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एनएफएल प्लेयर जैक क्रॉफर्ड का लाइफ लेसन:स्टेडियम के स्टार को 12 लोगों ने डराया, ओपन माइक ने सिखाया- डर का सामना करो

एनएफएल प्लेयर जैक क्रॉफर्ड का लाइफ लेसन:स्टेडियम के स्टार को 12 लोगों ने डराया, ओपन माइक ने सिखाया- डर का सामना करो

6 फीट 5 इंच लंबा शरीर, एनएफएल के बड़े-बड़े स्टेडियमों का अनुभव और करोड़ों दर्शकों के सामने खेलने का आत्मविश्वास। लेकिन जब अमेरिकी फुटबॉलर जैक क्रॉफर्ड पहली बार न्यूयॉर्क के एक छोटे से कॉमेडी क्लब में ओपन माइक करने पहुंचे, तो उनके हाथ कांप रहे थे। कमरे में मुश्किल से 12 लोग थे। पांच मिनट की परफॉर्मेंस में उनके जोक्स पर कोई नहीं हंसा। इसी असफलता ने उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाया कि डर से भागने के बजाय उसका सामना करो। 1. डर का सामना करने से बढ़ता है आत्मविश्वास 37 वर्षीय जैक क्रॉफर्ड कई सालों से स्टैंडअप कॉमेडी करना चाहते थे, लेकिन लोगों के जज करने का डर उन्हें रोकता रहा। फिर एक दिन उनका दोस्त उन्हें अचानक ओपन माइक में ले गया। पहली परफॉर्मेंस बुरी रही, लेकिन उसी दिन उन्होंने महसूस किया कि सबसे बड़ा डर असलियत में उतना बड़ा नहीं होता। इसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। उन्होंने कहा, ‘जब आप सबसे डरावनी चीज कर लेते हैं, तो बाकी चीजें छोटी लगने लगती हैं। ’2. गलतियां करना हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के करियर में भी क्रॉफर्ड का सबसे बड़ा दुश्मन डर ही था। अभ्यास में वे शानदार खेलते थे, लेकिन मैच में गलती का डर उन्हें रोक देता था। डलास काउबॉयज के कोच रॉड मारिनेली ने उनसे कहा, ‘खूब गलती करो, लेकिन मैच में पूरी ताकत से खेलो।’ इसी सोच से उनकी जिंदगी बदल गई। क्रॉफर्ड ने समझा कि हर गलती शर्मिंदगी नहीं होती, बल्कि सीखने का मौका होती है। यही सोच उन्हें स्टैंडअप कॉमेडी में भी काम आई। 3. असहजता कमजोरी नहीं, बल्कि ग्रोथ का संकेत शिकागो यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग असहज और शर्मिंदगी वाले हालात को सीखने का हिस्सा मानते हैं, वे तेजी से आगे बढ़ते हैं। क्रॉफर्ड के मुताबिक, स्टैंडअप कॉमेडी ‘एक्सपोजर थेरेपी’ की तरह है। जब इंसान बार-बार शर्मिंदगी झेलता है, तो डर खत्म होने लगता है। उन्होंने महसूस किया कि लोग उतना ध्यान नहीं देते जितना हम सोचते हैं। यही सोच मानसिक मजबूती देती है। 4. कभी भी शर्मिंदगी से भागना नहीं चाहिए हाल ही में क्रॉफर्ड ने फिर खराब परफॉर्म किया। दर्शक उनके मजाक से जुड़ नहीं पाए। उन्हें बुरा लगा, लेकिन फर्क यह था कि अब वे उस डर से टूटते नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘अब शर्मिंदगी चुभती जरूर है, लेकिन पहले जितनी नहीं। सबसे जरूरी बात यह है कि अब मैं उससे डरता नहीं हूं।’ क्रॉफर्ड की कहानी यही बताती है कि आत्मविश्वास का मतलब डर खत्म होना नहीं, बल्कि डर के बावजूद आगे बढ़ते रहना है।

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एनएफएल प्लेयर जैक क्रॉफर्ड का लाइफ लेसन:स्टेडियम के स्टार को 12 लोगों ने डराया, ओपन माइक ने सिखाया- डर का सामना करो

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