रेमो डिसूजा पत्नी के साथ नलखेड़ा पहुंचे:फिल्म डायरेक्टर ने किए मां बगलामुखी के किए दर्शन; यज्ञशाला में सपत्नीक हवन किया

मशहूर कोरियोग्राफर और फिल्म निर्देशक रेमो डिसूजा शनिवार को अपनी पत्नी लिजेल डिसूजा के साथ आगर मालवा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल नलखेड़ा पहुंचे। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर स्थित यज्ञशाला में सपत्नीक हवन अनुष्ठान भी संपन्न किया। दो घंटे तक चली विशेष पूजा और अनुष्ठान रेमो और लिज़ेल डिसूजा मंदिर परिसर में लगभग दो घंटे से अधिक समय तक रहे। उन्होंने धार्मिक परंपराओं के अनुसार आयोजित हवन में श्रद्धापूर्वक भाग लिया। इस दौरान मंदिर की अन्य धार्मिक गतिविधियों में भी दोनों शामिल हुए। लिज़ेल डिसूजा भारतीय फिल्म जगत में फिल्म निर्माता और कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर के रूप में सक्रिय हैं। प्रशंसकों और श्रद्धालुओं में दिखी उत्सुकता फिल्म जगत की बड़ी हस्ती के मंदिर पहुंचने की जानकारी मिलते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं और प्रशंसकों में उत्सुकता देखी गई। नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर देश भर में अपनी विशेष धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है, जहां समय-समय पर राजनीति और फिल्म जगत की हस्तियां दर्शन के लिए पहुंचती हैं।
डेविड धवन पर भड़के वाशु भगनानी:बोले- कुली नंबर 1 से ₹27 करोड़ का घाटा हुआ; नुकसान के बाद वरुण ने हालचाल नहीं पूछा

प्रोड्यूसर वाशु भगनानी ने शुक्रवार को फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में गाने ‘चुनरी चुनरी’ के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। फिल्म में वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े हैं। फिल्म को डेविड धवन ने डायरेक्ट किया है और रमेश तौरानी के टिप्स बैनर ने इसे प्रोड्यूस किया है। वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाशु भगनानी ने कहा कि उन्होंने डेविड धवन से बीवी नंबर 1 बनाने की बात की थी। उन्होंने दावा किया कि कुली नंबर 1 (2020) से उन्हें करीब 27 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। उनके मुताबिक फिल्म की पूरी प्रोडक्शन और खर्च की जिम्मेदारी डेविड धवन संभाल रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ नाम का प्रोड्यूसर था। मैंने डेविड जी को इस फिल्म के लिए करीब 70 करोड़ रुपए दिए थे। कोविड के समय डेविड जी ने कहा था कि भविष्य में नुकसान की भरपाई करेंगे और फिर बीवी नंबर 1 पर काम शुरू हुआ।’ वाशु ने डेविड धवन को फोन कर सवाल पूछा वाशु भगनानी के मुताबिक, करीब छह महीने तक फिल्म पर काम चला। बाद में रोहित धवन ने उन्हें बताया कि स्क्रिप्ट तैयार नहीं है, जिसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट में जल्दबाजी नहीं की। इसके बाद उन्हें पता चला कि रमेश तौरानी और डेविड धवन एक नई फिल्म बना रहे हैं, जिसमें गाने ‘चुनरी चुनरी’ का इस्तेमाल किया गया है। वाशु ने कहा कि उन्होंने डेविड धवन को फोन कर इस पर सवाल किया। उन्होंने कहा कि बीवी नंबर 1 के ऑडियो राइट्स रिलीज के समय टिप्स को बेचे गए थे, लेकिन उनकी अनुमति के बिना वीडियो इस्तेमाल किया जा रहा था। इस मामले में उनकी कंपनी ने कोर्ट में पत्र दिया, जिसके बाद बिहार के कटिहार कोर्ट ने स्टेटस क्वो का आदेश दिया। नुकसान के बाद वरुण ने हालचाल नहीं पूछा: भगनानी वाशु भगनानी ने कहा, ‘डेविड धवन मेरे प्रोडक्शन की फिल्म का वही गाना अपने बेटे की फिल्म में इस्तेमाल कर रहे हैं। कम से कम उन्हें मुझे पहले बताना चाहिए था। अगर वह बात करते तो मैं एनओसी दे देता।’ वाशु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरुण धवन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फिल्म कुली नंबर 1 के नुकसान के बाद वरुण धवन ने कभी उनका हालचाल नहीं पूछा।
डेविड धवन पर भड़के वाशु भगनानी:बोले- कुली नंबर 1 से ₹27 करोड़ का घाटा हुआ; नुकसान के बाद वरुण ने हालचाल नहीं पूछा

प्रोड्यूसर वाशु भगनानी ने शुक्रवार को फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में गाने ‘चुनरी चुनरी’ के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। फिल्म को डेविड धवन ने डायरेक्ट किया है और रमेश तौरानी के टिप्स बैनर ने इसे प्रोड्यूस किया है। वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में भगनानी ने कहा कि उन्होंने डेविड धवन से फिल्मा बीवी नंबर 1 का रीमेक बनाने की बात की थी। उन्होंने दावा किया कि कुली नंबर 1 (2020) से उन्हें करीब 27 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। उनके मुताबिक फिल्म की पूरी प्रोडक्शन और खर्च की जिम्मेदारी डेविड धवन संभाल रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ नाम का प्रोड्यूसर था। मैंने डेविड जी को इस फिल्म के लिए करीब 70 करोड़ रुपए दिए थे। कोविड के समय डेविड जी ने कहा था कि भविष्य में नुकसान की भरपाई करेंगे और फिर बीवी नंबर 1 पर काम शुरू हुआ।’ वाशु ने डेविड धवन को फोन कर सवाल पूछा वाशु भगनानी के मुताबिक, करीब छह महीने तक फिल्म पर काम चला। बाद में डेविड धवन के बड़े बेटे रोहित धवन ने उन्हें बताया कि स्क्रिप्ट तैयार नहीं है, जिसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट में जल्दबाजी नहीं की। इसके बाद उन्हें पता चला कि रमेश तौरानी और डेविड धवन एक नई फिल्म बना रहे हैं, जिसमें गाने ‘चुनरी चुनरी’ का इस्तेमाल किया गया है। वाशु ने कहा कि उन्होंने डेविड धवन को फोन कर इस पर सवाल किया। उन्होंने कहा कि बीवी नंबर 1 के ऑडियो राइट्स रिलीज के समय टिप्स को बेचे गए थे, लेकिन उनकी अनुमति के बिना वीडियो इस्तेमाल किया जा रहा था। इस मामले में उनकी कंपनी ने कोर्ट में पत्र दिया, जिसके बाद बिहार के कटिहार कोर्ट ने स्टेटस क्वो का आदेश दिया। नुकसान के बाद वरुण ने हालचाल नहीं पूछा: भगनानी वाशु भगनानी ने कहा, ‘डेविड धवन मेरे प्रोडक्शन की फिल्म का वही गाना अपने बेटे की फिल्म में इस्तेमाल कर रहे हैं। कम से कम उन्हें मुझे पहले बताना चाहिए था। अगर वह बात करते तो मैं एनओसी दे देता।’ वाशु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरुण धवन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फिल्म कुली नंबर 1 के नुकसान के बाद वरुण धवन ने कभी उनका हालचाल नहीं पूछा।
UAE बोला- अमेरिका अब ईरान पर हमला न करे:वरना लड़ाई महंगी पड़ेगी; पाकिस्तानी आर्मी चीफ जंग खत्म कराने की कोशिश में तेहरान गए

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई न करने की अपील की है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE ने ट्रम्प से कहा है कि युद्ध की जगह कूटनीति को मौका दिया जाए। UAE ने ट्रम्प से बातचीत में कहा कि ईरान पर हमला कर अमेरिका अपने मकसदों को हासिल नहीं कर पाएगा। उल्टा उससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और आर्थिक संकट बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि UAE का रुख पहले की तुलना में बदला हुआ दिख रहा है। इससे पहले UAE ईरान के खिलाफ ज्यादा सख्त रुख अपनाता रहा था। हालिया युद्ध के दौरान भारी नुकसान झेलने के बाद अब अबू धाबी खुलकर तनाव कम करने की बात कर रहा है। इससे पहले सऊदी अरब और कतर भी ट्रम्प से ऐसी अपील कर चुके हैं। हालांकि तीनों खाड़ी देशों के बीच इस बात पर मतभेद हैं कि अमेरिका को ईरान के साथ किस तरह का समझौता करना चाहिए और तेहरान पर कितना दबाव बनाना चाहिए। लेकिन सभी देश इस बात से सहमत हैं कि युद्ध दोबारा नहीं होना चाहिए। इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर शुक्रवार को तेहरान रवाना हो गए। ऐसे समय में यह दौरा हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावना बढ़ती दिख रही है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. EU होर्मुज बंद कराने वालों पर प्रतिबंध लगाएगा: EU ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। ये प्रतिबंध उन ईरानी अधिकारियों और लोगों पर लगाए जा सकते हैं, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट बंद कराने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। 2. होर्मुज खोलने के लिए फ्रांस का नया प्लान: फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक नया प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय मिशन तैनात कर जहाजों की आवाजाही बहाल करना है। 3. UAE बोला- समझौते की संभावना 50-50: UAE के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गरगाश ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावना अभी ‘50-50’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फिर से संघर्ष बढ़ता है तो इससे पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ेगी। 4. कतर की टीम ईरान पहुंची: रॉयटर्स के मुताबिक ईरान से जंग खत्म करने को लेकर बातचीत के लिए अमेरिकी की तरफ से कतर की एक टीम शुक्रवार को तेहरान पहुंची है। 5. होर्मुज से 35 जहाज गुजरे: ईरान ने दावा किया है कि उसकी नौसेना की निगरानी में पिछले 24 घंटों के दौरान 35 जहाज सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अंजुम शर्मा ने रणवीर सिंह की तारीफ:कहा- वो बहुत कमाल और सिक्योर एक्टर हैं; ‘धुरंधर’ में रहमान के रोल को भी सराहा

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों वेब सीरीज ‘कप्तान’ में अपने किरदार ‘मुन्ना’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला के बाद अंजुम ने इस बार एक बिल्कुल अलग और मस्तमौला किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंजुम शर्मा ने इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के संघर्ष, स्टार्स की इनसिक्योरिटी, ओटीटी के बदलते दौर पर बात की। सवाल: क्या ओटीटी ने बॉलीवुड और मेनस्ट्रीम सिनेमा की कहानी कहने का तरीका बदल दिया है? जवाब: बिल्कुल। ओटीटी मेनस्ट्रीम सिनेमा का ही एक्सटेंशन है। वही फिल्ममेकर आए, जिन्होंने फिल्मों का अनुभव लेकर ‘मिर्जापुर’, ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसी सीरीज बनाई। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां लॉन्ग फॉर्मेट मिला, इसलिए कहानियों को ज्यादा गहराई और खुलकर दिखाया जा सका। सवाल: इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने की वजह से कभी इनसिक्योरिटी या पॉलिटिक्स फेस करनी पड़ी? जवाब:कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी फिल्म या किरदार में कास्टिंग का पूरा मामला कॉम्बिनेशन पर निर्भर करता है। मैं इसमें किसी को दोष नहीं देता। कई बार मेकर्स ये देखते हैं कि दो कलाकार स्क्रीन पर साथ कैसे दिखेंगे, चाहे सामने बड़ा स्टार हो या कोई और एक्टर। ऐसे में अगर किसी एक कलाकार की प्रेजेंस या परफॉर्मेंस ज्यादा डोमिनेटिंग लगती है, तो हो सकता है कि वो उस किरदार या कहानी के लिए सही फिट न हो। कई बार कहानी को ऐसे एक्टर की जरूरत होती है, जो दूसरे किरदार पर हावी न पड़े और स्क्रीन पर बैलेंस बना रहे। मेरे साथ भी शुरुआत में एक-दो बार ऐसा हुआ, लेकिन मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि जिन लोगों के साथ काम किया, उन्होंने हमेशा बहुत सुरक्षित और सहयोग वाला माहौल दिया। चाहे ‘मिर्जापुर’ में अली फजल हों, पंकज त्रिपाठी जी हों या विजय वर्मा। मैं उस वक्त काफी नया था, जबकि वो लोग काफी अनुभवी थे, लेकिन उन्हें देखकर मुझे लगा कि जितना सहज हो सकते हो, उतना सहज हो जाओ। क्योंकि सामने वाला कलाकार पूरी तरह सिक्योर होकर काम कर रहा है, आपको सपोर्ट कर रहा है और एप्रिशिएट भी कर रहा है। मुझे हमेशा ऐसा महसूस हुआ कि वो लोग आपको नीचे नहीं दिखाना चाहते, बल्कि अपने साथ लेकर आगे बढ़ाना चाहते हैं। सवाल: लेकिन इंडस्ट्री में ऐसा भी सुनने को मिलता है कि अच्छे सीन्स काट दिए जाते हैं या अच्छे एक्टर्स को रिप्लेस कर दिया जाता है? जवाब: बहुत पहले की बात है। एक फिल्म में एक ऐसे एक्टर को कास्ट किया गया था, जो पहले से फिल्मों में काम कर रहे थे और इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे, लेकिन जिस लहजे और जिस जोन के किरदार के लिए उन्हें चुना गया था, उससे वो पूरी तरह वाकिफ नहीं थे। मुझे बिना ज्यादा कुछ बताए बुलाया गया और कहा गया कि उनकी आवाज डब करनी है। मैंने बिना यह पूछे कि क्यों, कैसे या कितने पैसे मिलेंगे, तुरंत हां कर दी। मैंने सोचा कि बुलाया है, तो जरूर कोई वजह होगी। मैंने डबिंग की और बाद में जब फिल्म रिलीज हुई, तो मैंने देखा कि फाइनल डबिंग काफी हद तक वैसी ही थी जैसी मैंने की थी। तब लगा कि शायद मेरी डबिंग को रेफरेंस की तरह इस्तेमाल किया गया होगा। ऐसे अनुभव बहुत कुछ सिखाते हैं। खासकर अगर आप इंडस्ट्री में बाहर से आए हैं, तो आपको समझ आ जाता है कि यहां मौके खुद आपके पास नहीं आते, आपको खुद उन्हें बनाना पड़ता है। सवाल: धुरंधर 2 में ऐसी कौन-सी चीज थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: धुरंधर 2 देखकर मुझे बहुत समय बाद ऐसा लगा कि इतनी लंबी, करीब साढ़े तीन घंटे की फिल्म को मैं दोबारा देखना चाहूंगा। खासकर रणवीर सिंह का गांव वाला शुरुआती सीक्वेंस आपको पूरी तरह बांध लेता है। फिल्म में वो सारी चीजें हैं, जो अच्छे सिनेमा को यादगार बनाती हैं। सवाल: ‘एनिमल’ और ‘धुरंधर’ जैसे मेकर्स के साथ काम करने की इच्छा है? जवाब: बिल्कुल। संदीप रेड्डी वांगा, विशाल भारद्वाज, आदित्य धर जैसे मेकर्स के साथ काम करने का बहुत मन है। मुझे लगता है कि मेरे अंदर अभी बहुत कुछ एक्सप्लोर होना बाकी है। सही डायरेक्टर और सही कहानी आपकी एनर्जी को सही दिशा देते हैं। सवाल: ‘धुरंधर’ में कोई ऐसा किरदार लगा, जिसे आप करना चाहते? जवाब: नहीं, मतलब यह तो मैं नहीं कह सकता कि मैं अलग फ्लेवर डाल सकता था। मुझे धुरंधर के पार्ट वन में रहमान डकैत एक ऐसा कैरेक्टर था, जिसको देख कर लगा कि मतलब बखूबी उन्होंने निभाया है। अक्षय खन्ना ने बहुत अच्छे से किया है। उनको देख कर आपको लगता है कि अरे, यह आप करते तो इसमें दो-चार चीजें आप और एड कर सकते थे। रणवीर सिंह ने तो कमाल किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि वो बहुत सिक्योर एक्टर हैं। वो कहानी और बाकी किरदारों के साथ पूरी तरह घुल-मिल जाते हैं। सवाल: क्या आज इंडस्ट्री में टैलेंट से ज्यादा पीआर और सोशल मीडिया को अहमियत मिलती है? जवाब: देखिए, मैं ये नहीं कहूंगा कि इंडस्ट्री पूरी तरह ऐसी है, लेकिन हां, आज एक गैप जरूर आ गया है। एक तरफ आपका टैलेंट, क्राफ्ट और काम है और दूसरी तरफ ये बात कही जाती है कि आपकी पीआर बहुत स्ट्रॉन्ग होनी चाहिए, आपको खुद को मार्केट करना आना चाहिए। मेरा मानना है कि एक्टर या किसी भी क्रिएटिव इंसान का असली काम अपना काम ईमानदारी और मेहनत से करना है। अगर आपने तमाम मुश्किलों के बावजूद अच्छा काम किया है, तो वही सिलसिला आगे बढ़ना चाहिए। आपकी पहचान आपके टैलेंट, क्रेडिबिलिटी और क्राफ्ट के आधार पर बननी चाहिए।
अमित बोले- ‘धुरंधर’ सक्सेस डिजर्व करती है, लेकिन ईर्ष्या हुई:प्रवीण सिसोदिया ने कहा- कास्टिंग परफेक्ट हो तो ‘मुगल-ए-आजम’ की तरह हर किरदार याद रहता है

फिल्म ‘सितंबर 21’ सिर्फ अल्जाइमर पर बनी कहानी नहीं, बल्कि उन केयरगिवर्स की भावनात्मक यात्रा है जो अपनों की देखभाल करते-करते अंदर से टूटने लगते हैं। डायरेक्टर करेन क्षिति सुवर्णा और को-प्रोड्यूसर प्रीति अली ने इस संवेदनशील विषय को असली जिंदगी के अनुभवों से जोड़कर पर्दे पर उतारा है। दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रवीण एस. सिसोदिया, प्रियंका उपेंद्र और अमित बहल ने बताया कि फिल्म मरीजों के साथ उनके परिवार के दर्द को भी सामने लाती है। इंटरव्यू में ‘धुरंधर’ की कास्टिंग और ‘मुगल-ए-आजम’ जैसे क्लासिक सिनेमा पर भी चर्चा हुई। सवाल: पहली ही फिल्म में अल्जाइमर जैसा संवेदनशील विषय… आखिर इस कहानी ने आपको इतना अंदर तक कैसे छू लिया? जवाब/करेन क्षिति सुवर्णा: जब मैं अपनी पहली फीचर फिल्म बनाना चाहती थी, तब मैंने तय किया था कि सिर्फ मनोरंजन के लिए फिल्म नहीं बनाऊंगी। मैं ऐसी कहानी कहना चाहती थी जो समाज को कुछ दे। हमारे लेखक राज शेखर की यह उनकी असली जिंदगी की कहानी है। वह अपने भाई के केयरगिवर थे, जिन्हें अल्जाइमर था। हमारे प्रोड्यूसर्स की मां भी इस बीमारी से जूझ चुकी थीं। जब मैं अल्जाइमर केयर सेंटर गई, तब मुझे एहसास हुआ कि लोग मरीजों की बात तो करते हैं, लेकिन केयरगिवर्स की तकलीफ कोई नहीं समझता। वहीं से यह फिल्म शुरू हुई। सवाल: यानी यह सिर्फ मरीज की नहीं, उन लोगों की भी कहानी है जो चुपचाप टूटते रहते हैं? जवाब/करेन क्षिति सुवर्णा: बिल्कुल। अल्जाइमर का अभी तक कोई इलाज नहीं है। सिर्फ देखभाल की जा सकती है। लेकिन किसी ने यह नहीं दिखाया कि केयरगिवर्स पर क्या बीतती है। वे मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं। हमारी फिल्म उसी दर्द और संघर्ष को दिखाती है। सवाल: प्रवीण, जब आपने पहली बार कहानी सुनी तो क्या तुरंत लगा कि यह फिल्म करनी ही है? जवाब/प्रवीण एस. सिसोदिया: हां। ऐसी फिल्में हर बार नहीं मिलतीं। एक कलाकार हमेशा कुछ नया करना चाहता है। जब करेन क्षिति ने कहानी सुनाई, तो मुझे लगा कि यह सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। मैंने तुरंत हां कह दी। सवाल: प्रियंका, एक केयरगिवर का दर्द निभाना कितना मुश्किल था? जवाब/प्रियंका उपेंद्र: बहुत मुश्किल था। क्योंकि सिर्फ लुक बदलना काफी नहीं था। मुझे उसकी भावनाएं समझनी थीं। अल्जाइमर के बारे में सुनना अलग बात है, लेकिन यह सोचना कि उस इंसान और उसके family पर क्या गुजरती होगी… वह बहुत भारी था। मेरे किरदार के अंदर बहुत दर्द था, लेकिन बाहर से उसे मजबूत दिखना था। यही सबसे बड़ी चुनौती थी। सवाल: फिल्म का नाम ‘सितंबर 21’ क्यों रखा गया? क्या इसका कनेक्शन कोविड से भी है? जवाब/प्रीति अली: हां, कोविड का दौर फिल्म का हिस्सा है। लेकिन ‘सितंबर 21’ सिर्फ एक तारीख नहीं है, यह कहानी की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ हिस्सा है। मैं अभी ज्यादा नहीं बताऊंगी, क्योंकि दर्शकों को यह फिल्म में महसूस करना चाहिए। सवाल: अमित, आपको इस फिल्म की कहानी ने निजी तौर पर छुआ? जवाब/अमित बहल: बहुत ज्यादा। मेरे पिता मेरे शिक्षक थे और मैंने करीब ढाई साल तक उनकी देखभाल की थी।जब मैंने फिल्म देखी, तो मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ मरीज की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की भी कहानी है जो उनके साथ जीते हैं। फिल्म यह भी दिखाती है कि हर केयरगिवर एक जैसा नहीं होता। हर इंसान की अपनी सीमाएं और संघर्ष होते हैं। सवाल: फिल्म में अल्जाइमर के मेडिकल पहलुओं पर भी काफी रिसर्च की गई है। यह कितना जरूरी था? जवाब/अमित बहल: बहुत जरूरी था। लोग अक्सर अल्जाइमर को सिर्फ बुढ़ापे में भूलने की आदत समझ लेते हैं। लेकिन यह एक गंभीर बीमारी है। फिल्म में दिखाया गया है कि यह बीमारी किस तरह बढ़ती है और मरीज के व्यवहार में क्या बदलाव आते हैं। यह सिर्फ इमोशनल फिल्म नहीं, बल्कि काफी शैक्षिक भी है। सवाल: फिल्म हिंदी और कन्नड़ दोनों भाषाओं में बनी है। पहली ही फिल्म में यह रिस्क लेना कितना मुश्किल था? जवाब/प्रीति अली: बहुत मुश्किल था। लेकिन जब हमने फिल्म को सपोर्ट करने का फैसला किया, तभी तय कर लिया था कि इसे दोनों भाषाओं में बनाएंगे। पूरी टीम ने इसे बहुत मेहनत से संभाला। सवाल: हाल ही में ‘धुरंधर’ की काफी चर्चा रही। उसकी सफलता और कास्टिंग को आप कैसे देखते हैं? जवाब/अमित बहल: ‘धुरंधर’ सच में कमाल की फिल्म है। उसकी सफलता पूरी तरह डिजर्व करती है। और सच कहूं तो थोड़ी-सी ईर्ष्या भी होती है, लेकिन वह बहुत स्वाभाविक है। उसकी कास्टिंग इतनी परफेक्ट थी कि कई किरदारों को पहचानना मुश्किल हो गया था। हर कलाकार अपने रोल में पूरी तरह फिट था। सवाल: प्रवीण, आपको ‘धुरंधर’ में कोई ऐसा किरदार लगा जिसे आप निभाना चाहते? जवाब/ प्रवीण एस. सिसोदिया: देखिए, अभिनेता के मन में हमेशा आता है कि “यह रोल मैं भी कर सकता था।” लेकिन सच यह है कि उस फिल्म की कास्टिंग शानदार थी। हर कलाकार बिल्कुल सही जगह पर था। मुझे तो ऐसा लगा जैसे पुरानी क्लासिक फिल्मों की तरह हर किरदार अपनी जगह पर पूरी ईमानदारी से खड़ा है। जैसे लोग ‘मुगल-ए-आजम’ के किरदारों को आज तक याद रखते हैं, वैसे ही जब कोई फिल्म सही कास्टिंग और सच्चे अभिनय के साथ बनती है, तो उसका असर लंबे समय तक रहता है।
अंजुम शर्मा ने रणवीर सिंह की तारीफ:कहा- वो बहुत कमाल और सिक्योर एक्टर हैं; ‘धुरंधर’ में रहमान के रोल को भी सराहा

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों वेब सीरीज ‘कप्तान’ में अपने किरदार ‘मुन्ना’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला के बाद अंजुम ने इस बार एक बिल्कुल अलग और मस्तमौला किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंजुम शर्मा ने इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के संघर्ष, स्टार्स की इनसिक्योरिटी, ओटीटी के बदलते दौर पर बात की। सवाल: क्या ओटीटी ने बॉलीवुड और मेनस्ट्रीम सिनेमा की कहानी कहने का तरीका बदल दिया है? जवाब: बिल्कुल। ओटीटी मेनस्ट्रीम सिनेमा का ही एक्सटेंशन है। वही फिल्ममेकर आए, जिन्होंने फिल्मों का अनुभव लेकर ‘मिर्जापुर’, ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसी सीरीज बनाई। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां लॉन्ग फॉर्मेट मिला, इसलिए कहानियों को ज्यादा गहराई और खुलकर दिखाया जा सका। सवाल: इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने की वजह से कभी इनसिक्योरिटी या पॉलिटिक्स फेस करनी पड़ी? जवाब:कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी फिल्म या किरदार में कास्टिंग का पूरा मामला कॉम्बिनेशन पर निर्भर करता है। मैं इसमें किसी को दोष नहीं देता। कई बार मेकर्स ये देखते हैं कि दो कलाकार स्क्रीन पर साथ कैसे दिखेंगे, चाहे सामने बड़ा स्टार हो या कोई और एक्टर। ऐसे में अगर किसी एक कलाकार की प्रेजेंस या परफॉर्मेंस ज्यादा डोमिनेटिंग लगती है, तो हो सकता है कि वो उस किरदार या कहानी के लिए सही फिट न हो। कई बार कहानी को ऐसे एक्टर की जरूरत होती है, जो दूसरे किरदार पर हावी न पड़े और स्क्रीन पर बैलेंस बना रहे। मेरे साथ भी शुरुआत में एक-दो बार ऐसा हुआ, लेकिन मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि जिन लोगों के साथ काम किया, उन्होंने हमेशा बहुत सुरक्षित और सहयोग वाला माहौल दिया। चाहे ‘मिर्जापुर’ में अली फजल हों, पंकज त्रिपाठी जी हों या विजय वर्मा। मैं उस वक्त काफी नया था, जबकि वो लोग काफी अनुभवी थे, लेकिन उन्हें देखकर मुझे लगा कि जितना सहज हो सकते हो, उतना सहज हो जाओ। क्योंकि सामने वाला कलाकार पूरी तरह सिक्योर होकर काम कर रहा है, आपको सपोर्ट कर रहा है और एप्रिशिएट भी कर रहा है। मुझे हमेशा ऐसा महसूस हुआ कि वो लोग आपको नीचे नहीं दिखाना चाहते, बल्कि अपने साथ लेकर आगे बढ़ाना चाहते हैं। सवाल: लेकिन इंडस्ट्री में ऐसा भी सुनने को मिलता है कि अच्छे सीन्स काट दिए जाते हैं या अच्छे एक्टर्स को रिप्लेस कर दिया जाता है? जवाब: बहुत पहले की बात है। एक फिल्म में एक ऐसे एक्टर को कास्ट किया गया था, जो पहले से फिल्मों में काम कर रहे थे और इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे, लेकिन जिस लहजे और जिस जोन के किरदार के लिए उन्हें चुना गया था, उससे वो पूरी तरह वाकिफ नहीं थे। मुझे बिना ज्यादा कुछ बताए बुलाया गया और कहा गया कि उनकी आवाज डब करनी है। मैंने बिना यह पूछे कि क्यों, कैसे या कितने पैसे मिलेंगे, तुरंत हां कर दी। मैंने सोचा कि बुलाया है, तो जरूर कोई वजह होगी। मैंने डबिंग की और बाद में जब फिल्म रिलीज हुई, तो मैंने देखा कि फाइनल डबिंग काफी हद तक वैसी ही थी जैसी मैंने की थी। तब लगा कि शायद मेरी डबिंग को रेफरेंस की तरह इस्तेमाल किया गया होगा। ऐसे अनुभव बहुत कुछ सिखाते हैं। खासकर अगर आप इंडस्ट्री में बाहर से आए हैं, तो आपको समझ आ जाता है कि यहां मौके खुद आपके पास नहीं आते, आपको खुद उन्हें बनाना पड़ता है। सवाल: धुरंधर 2 में ऐसी कौन-सी चीज थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: धुरंधर 2 देखकर मुझे बहुत समय बाद ऐसा लगा कि इतनी लंबी, करीब साढ़े तीन घंटे की फिल्म को मैं दोबारा देखना चाहूंगा। खासकर रणवीर सिंह का गांव वाला शुरुआती सीक्वेंस आपको पूरी तरह बांध लेता है। फिल्म में वो सारी चीजें हैं, जो अच्छे सिनेमा को यादगार बनाती हैं। सवाल: ‘एनिमल’ और ‘धुरंधर’ जैसे मेकर्स के साथ काम करने की इच्छा है? जवाब: बिल्कुल। संदीप रेड्डी वांगा, विशाल भारद्वाज, आदित्य धर जैसे मेकर्स के साथ काम करने का बहुत मन है। मुझे लगता है कि मेरे अंदर अभी बहुत कुछ एक्सप्लोर होना बाकी है। सही डायरेक्टर और सही कहानी आपकी एनर्जी को सही दिशा देते हैं। सवाल: ‘धुरंधर’ में कोई ऐसा किरदार लगा, जिसे आप करना चाहते? जवाब: नहीं, मतलब यह तो मैं नहीं कह सकता कि मैं अलग फ्लेवर डाल सकता था। मुझे धुरंधर के पार्ट वन में रहमान डकैत एक ऐसा कैरेक्टर था, जिसको देख कर लगा कि मतलब बखूबी उन्होंने निभाया है। अक्षय खन्ना ने बहुत अच्छे से किया है। उनको देख कर आपको लगता है कि अरे, यह आप करते तो इसमें दो-चार चीजें आप और एड कर सकते थे। रणवीर सिंह ने तो कमाल किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि वो बहुत सिक्योर एक्टर हैं। वो कहानी और बाकी किरदारों के साथ पूरी तरह घुल-मिल जाते हैं। सवाल: क्या आज इंडस्ट्री में टैलेंट से ज्यादा पीआर और सोशल मीडिया को अहमियत मिलती है? जवाब: देखिए, मैं ये नहीं कहूंगा कि इंडस्ट्री पूरी तरह ऐसी है, लेकिन हां, आज एक गैप जरूर आ गया है। एक तरफ आपका टैलेंट, क्राफ्ट और काम है और दूसरी तरफ ये बात कही जाती है कि आपकी पीआर बहुत स्ट्रॉन्ग होनी चाहिए, आपको खुद को मार्केट करना आना चाहिए। मेरा मानना है कि एक्टर या किसी भी क्रिएटिव इंसान का असली काम अपना काम ईमानदारी और मेहनत से करना है। अगर आपने तमाम मुश्किलों के बावजूद अच्छा काम किया है, तो वही सिलसिला आगे बढ़ना चाहिए। आपकी पहचान आपके टैलेंट, क्रेडिबिलिटी और क्राफ्ट के आधार पर बननी चाहिए।
अमित बोले- ‘धुरंधर’ सक्सेस डिजर्व करती है, लेकिन ईर्ष्या हुई:प्रवीण सिसोदिया ने कहा- कास्टिंग परफेक्ट हो तो ‘मुगल-ए-आजम’ की तरह हर किरदार याद रहता है

फिल्म ‘सितंबर 21’ सिर्फ अल्जाइमर पर बनी कहानी नहीं, बल्कि उन केयरगिवर्स की भावनात्मक यात्रा है जो अपनों की देखभाल करते-करते अंदर से टूटने लगते हैं। डायरेक्टर करेन क्षिति सुवर्णा और को-प्रोड्यूसर प्रीति अली ने इस संवेदनशील विषय को असली जिंदगी के अनुभवों से जोड़कर पर्दे पर उतारा है। दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रवीण एस. सिसोदिया, प्रियंका उपेंद्र और अमित बहल ने बताया कि फिल्म मरीजों के साथ उनके परिवार के दर्द को भी सामने लाती है। इंटरव्यू में ‘धुरंधर’ की कास्टिंग और ‘मुगल-ए-आजम’ जैसे क्लासिक सिनेमा पर भी चर्चा हुई। सवाल: पहली ही फिल्म में अल्जाइमर जैसा संवेदनशील विषय… आखिर इस कहानी ने आपको इतना अंदर तक कैसे छू लिया? जवाब/करेन क्षिति सुवर्णा: जब मैं अपनी पहली फीचर फिल्म बनाना चाहती थी, तब मैंने तय किया था कि सिर्फ मनोरंजन के लिए फिल्म नहीं बनाऊंगी। मैं ऐसी कहानी कहना चाहती थी जो समाज को कुछ दे। हमारे लेखक राज शेखर की यह उनकी असली जिंदगी की कहानी है। वह अपने भाई के केयरगिवर थे, जिन्हें अल्जाइमर था। हमारे प्रोड्यूसर्स की मां भी इस बीमारी से जूझ चुकी थीं। जब मैं अल्जाइमर केयर सेंटर गई, तब मुझे एहसास हुआ कि लोग मरीजों की बात तो करते हैं, लेकिन केयरगिवर्स की तकलीफ कोई नहीं समझता। वहीं से यह फिल्म शुरू हुई। सवाल: यानी यह सिर्फ मरीज की नहीं, उन लोगों की भी कहानी है जो चुपचाप टूटते रहते हैं? जवाब/करेन क्षिति सुवर्णा: बिल्कुल। अल्जाइमर का अभी तक कोई इलाज नहीं है। सिर्फ देखभाल की जा सकती है। लेकिन किसी ने यह नहीं दिखाया कि केयरगिवर्स पर क्या बीतती है। वे मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं। हमारी फिल्म उसी दर्द और संघर्ष को दिखाती है। सवाल: प्रवीण, जब आपने पहली बार कहानी सुनी तो क्या तुरंत लगा कि यह फिल्म करनी ही है? जवाब/प्रवीण एस. सिसोदिया: हां। ऐसी फिल्में हर बार नहीं मिलतीं। एक कलाकार हमेशा कुछ नया करना चाहता है। जब करेन क्षिति ने कहानी सुनाई, तो मुझे लगा कि यह सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। मैंने तुरंत हां कह दी। सवाल: प्रियंका, एक केयरगिवर का दर्द निभाना कितना मुश्किल था? जवाब/प्रियंका उपेंद्र: बहुत मुश्किल था। क्योंकि सिर्फ लुक बदलना काफी नहीं था। मुझे उसकी भावनाएं समझनी थीं। अल्जाइमर के बारे में सुनना अलग बात है, लेकिन यह सोचना कि उस इंसान और उसके family पर क्या गुजरती होगी… वह बहुत भारी था। मेरे किरदार के अंदर बहुत दर्द था, लेकिन बाहर से उसे मजबूत दिखना था। यही सबसे बड़ी चुनौती थी। सवाल: फिल्म का नाम ‘सितंबर 21’ क्यों रखा गया? क्या इसका कनेक्शन कोविड से भी है? जवाब/प्रीति अली: हां, कोविड का दौर फिल्म का हिस्सा है। लेकिन ‘सितंबर 21’ सिर्फ एक तारीख नहीं है, यह कहानी की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ हिस्सा है। मैं अभी ज्यादा नहीं बताऊंगी, क्योंकि दर्शकों को यह फिल्म में महसूस करना चाहिए। सवाल: अमित, आपको इस फिल्म की कहानी ने निजी तौर पर छुआ? जवाब/अमित बहल: बहुत ज्यादा। मेरे पिता मेरे शिक्षक थे और मैंने करीब ढाई साल तक उनकी देखभाल की थी।जब मैंने फिल्म देखी, तो मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ मरीज की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की भी कहानी है जो उनके साथ जीते हैं। फिल्म यह भी दिखाती है कि हर केयरगिवर एक जैसा नहीं होता। हर इंसान की अपनी सीमाएं और संघर्ष होते हैं। सवाल: फिल्म में अल्जाइमर के मेडिकल पहलुओं पर भी काफी रिसर्च की गई है। यह कितना जरूरी था? जवाब/अमित बहल: बहुत जरूरी था। लोग अक्सर अल्जाइमर को सिर्फ बुढ़ापे में भूलने की आदत समझ लेते हैं। लेकिन यह एक गंभीर बीमारी है। फिल्म में दिखाया गया है कि यह बीमारी किस तरह बढ़ती है और मरीज के व्यवहार में क्या बदलाव आते हैं। यह सिर्फ इमोशनल फिल्म नहीं, बल्कि काफी शैक्षिक भी है। सवाल: फिल्म हिंदी और कन्नड़ दोनों भाषाओं में बनी है। पहली ही फिल्म में यह रिस्क लेना कितना मुश्किल था? जवाब/प्रीति अली: बहुत मुश्किल था। लेकिन जब हमने फिल्म को सपोर्ट करने का फैसला किया, तभी तय कर लिया था कि इसे दोनों भाषाओं में बनाएंगे। पूरी टीम ने इसे बहुत मेहनत से संभाला। सवाल: हाल ही में ‘धुरंधर’ की काफी चर्चा रही। उसकी सफलता और कास्टिंग को आप कैसे देखते हैं? जवाब/अमित बहल: ‘धुरंधर’ सच में कमाल की फिल्म है। उसकी सफलता पूरी तरह डिजर्व करती है। और सच कहूं तो थोड़ी-सी ईर्ष्या भी होती है, लेकिन वह बहुत स्वाभाविक है। उसकी कास्टिंग इतनी परफेक्ट थी कि कई किरदारों को पहचानना मुश्किल हो गया था। हर कलाकार अपने रोल में पूरी तरह फिट था। सवाल: प्रवीण, आपको ‘धुरंधर’ में कोई ऐसा किरदार लगा जिसे आप निभाना चाहते? जवाब/ प्रवीण एस. सिसोदिया: देखिए, अभिनेता के मन में हमेशा आता है कि “यह रोल मैं भी कर सकता था।” लेकिन सच यह है कि उस फिल्म की कास्टिंग शानदार थी। हर कलाकार बिल्कुल सही जगह पर था। मुझे तो ऐसा लगा जैसे पुरानी क्लासिक फिल्मों की तरह हर किरदार अपनी जगह पर पूरी ईमानदारी से खड़ा है। जैसे लोग ‘मुगल-ए-आजम’ के किरदारों को आज तक याद रखते हैं, वैसे ही जब कोई फिल्म सही कास्टिंग और सच्चे अभिनय के साथ बनती है, तो उसका असर लंबे समय तक रहता है।
हैदराबाद ने एक सीजन में सबसे ज्यादा 200+ स्कोर बनाए:कोहली की टी-20 में 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप, विराट-हेड ने हाथ नहीं मिलाया; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL 2026 के 67वें मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 55 रन से हरा दिया। मैच में कई मोमेंट्स और रिकॉर्ड्स देखने को मिले। विराट कोहली टी-20 में सबसे ज्यादा 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप में शामिल रहे। हैदराबाद ने इस सीजन सबसे ज्यादा 9वीं बार 200+ स्कोर बनाया। मैच के बाद विराट कोहली और ट्रैविस हेड ने हाथ नहीं मिलाया। हैदराबाद-बेंगलुरु मैच के रिकॉर्ड्स और मोमेंट्स… 1. कोहली 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप में शामिल रहे कोहली ने हैदराबाद के खिलाफ 211वीं बार टी-20 में फिफ्टी पार्टनरशिप की। उन्होंने राजीव गांधी स्टेडियम में वेंकटेश अय्यर के साथ पहले विकेट के लिए 60 रन जोड़े। वे टी-20 में सबसे ज्यादा बार फिफ्टी रन की साझेदारी का हिस्सा बनने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इंग्लैंड के एलेक्स हेल्स को पीछे छोड़ा, जिनके नाम 210 साझेदारी है। 2. एक सीजन में सबसे ज्यादा बार 200+ रन बनाने वाली टीम बनी हैदराबाद IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा बार 200+ स्कोर करने वाली टीम बन गई। टीम ने बेंगलुरु के खिलाफ 4 विकेट खोकर 255 रन बनाए, जो इस सीजन टीम का नौवां 200+ स्कोर है। इससे पहले ये रिकॉर्ड गुजरात टाइटंस के नाम था, जिन्होंने 2025 में 8 बार यह कारनामा किया था। 3. भुवनेश्वर सबसे ज्यादा बार 50+ रन देने वाले गेंदबाज बने भुवनेश्वर IPL में संयुक्त रुप से सबसे ज्यादा बार एक स्पेल (4 ओवर) में 50+ रन देने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने मोहम्मद शमी बराबरी की, जिन्होंने 9 बार पचास से ज्यादा रन दिए हैं। भुवनेश्वर ने हैदराबाद के खिलाफ 51 रन दिए। इस लिस्ट में मोहम्मद सिराज 8 बार के साथ तीसरे नंबर पर हैं। 4. क्लासन ने मिडिल ऑर्डर में एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाए क्लासन ने IPL के एक सीजन में नंबर 4 या उससे नीचे बैटिंग करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने इस सीजन मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते हुए 606 रन बनाए हैं। उन्होंने ऋषभ पंत को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 2018 में 579 रन बनाए थे। 5. हैदराबाद ने IPL में छठवीं बार 250+ का स्कोर बनाया हैदराबाद ने शुक्रवार को छठवीं बार 250 या उससे रन का स्कोर खड़ा किया। वह सबसे ज्यादा बार यह आंकड़ा पार करने वाली टीम है। इस लिस्ट में पंजाब और बेंगलुरु संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं, जिन्होंने 3-3 बार यह कारनामा किया है। 6. अभिषेक सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले दूसरे भारतीय अभिषेक एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने बेंगलुरु के खिलाफ 5 सिक्स लगाए। अभिषेक ने इस सीजन 43 छक्के लगाते हुए खुद को पीछे छोड़ा। उन्होंने 2024 में 42 सिक्स लगाए थे। इस लिस्ट में राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने इस सीजन 53 छक्के जड़े हैं। 7. नंबर-4 या नीचे बैटिंग करते हुए क्लासेन ने 6वीं फिफ्टी लगाई क्लासेन ने इस सीजन नंबर 4 या उससे नीचे बैटिंग करते हुए छठवीं बार 50+ का स्कोर बनाया। उन्होंने बेंगलुरू के खिलाफ 51 रन बनाए। उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा बार ऐसा करने वाले ऋषभ पंत और ग्लेन मैक्सवेल की बराबरी की। पंत ने 2018 और मैक्सवेल ने 2021 में 6 फिफ्टी लगाई थी। 8. पहली 2 गेंद पर सिक्स लगाने वाले टीम के तीसरे बल्लेबाज नीतीश ने बेंगलुरु के खिलाफ अपनी पहली 2 गेंदों पर लगातार 2 छक्के लगाए। वे हैदराबाद के लिए पारी की पहली 2 गेंदों पर सिक्स लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले राशिद खान ने 2018 और पैट कमिंस ने 2025 में यह कारनामा किया था। 9. बेंगुलरु के 3 गेंदबाज ने 50+ रन दिए बेंगलुरु के 3 गेंदबाजों ने मैच में 50 या उससे ज्यादा रन दिए। एक मैच में सबसे ज्यादा 50+ रन देने वाले गेंदबाजों की लिस्ट में नंबर एक पर बेंगलुरु ही है। 2024 में बेंगलुरु के 4 गेंदबाजों ने एक मैच में फिफ्टी का आंकड़ा छुआ था। दिल्ली (2024) और राजस्थान (2024) के 3 गेंदबाजों ने पचास से ज्यादा रन दिए। सभी मौकों पर विरोधी टीम हैदराबाद थी। 10. ईशान ने बेंगलुरु के खिलाफ लगातार चौथी फिफ्टी लगाई ईशान किशन ने बेंगलुरु के खिलाफ 2024 से 2026 तक लगातार चौथी फिफ्टी लगाई। उन्होंने शुक्रवार को 79 रन की पारी खेली। वे बेंगलुरु के खिलाफ यह कारनामा करने वाले न्यूजीलैंड के केन विलियमसन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 2014 से 2016 के बीच लगातार 7 फिफ्टी लगाई। यहां से टॉप-3 मोमेंट्स… 1. अभिषेक शर्मा ने सिक्स लगाकर खाता खोला बेंगलुरु के खिलाफ अभिषेक शर्मा ने सिक्स लगाकर अपना खाता खोला। उन्होंने मैच के पहले ओवर में भुवनेश्वर की पांचवी गेंद को लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से छक्का जड़ दिया। यह पारी का उनका पहला रन था। 2. वेंकटेश ने अभिषेक का कैच छोड़ा हैदराबाद की पारी के छठवें ओवर में वेंकटेश अय्यर ने अभिषेक का कैच छोड़ दिया। ओवर की चौथी गेेंद रसिख सलाम डार ने शॉर्ट-लेंथ डाली। अभिषेक ने उसपर फ्लैट पुल शॉट खेला, लेकिन गेंद डीप स्क्वायर लेग पर पर खड़े वेंकटेश की ओर गई। उन्होंने दाईं ओर भागते हुए कैच लपकने की कोशिश की, लेकिन गेंद हाथ से छिटक गया। 3. कोहली-हेड के बीच नोंकझोंक, मैच के बाद हाथ नहीं मिलाया बेंगलुरू की पारी में पावरप्ले के दौरान कोहली और ट्रैविस हेड के बीच किसी बात को लेकर नोंक-झोंक हुई। इसके बाद कोहली ने मैच के बाद हेड से हैंडशेक भी नहीं किया। जब कोहली, हेड के पास पहुंचे, तो हेड ने हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन कोहली एकदम से आगे निकल गए।
हैदराबाद ने एक सीजन में सबसे ज्यादा 200+ स्कोर बनाए:कोहली की टी-20 में 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप, विराट-हेड ने हाथ नहीं मिलाया; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL 2026 के 67वें मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 55 रन से हरा दिया। मैच में कई मोमेंट्स और रिकॉर्ड्स देखने को मिले। विराट कोहली टी-20 में सबसे ज्यादा 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप में शामिल रहे। हैदराबाद ने इस सीजन सबसे ज्यादा 9वीं बार 200+ स्कोर बनाया। मैच के बाद विराट कोहली और ट्रैविस हेड ने हाथ नहीं मिलाया। हैदराबाद-बेंगलुरु मैच के रिकॉर्ड्स और मोमेंट्स… 1. कोहली 211वीं बार फिफ्टी पार्टनरशिप में शामिल रहे कोहली ने हैदराबाद के खिलाफ 211वीं बार टी-20 में फिफ्टी पार्टनरशिप की। उन्होंने राजीव गांधी स्टेडियम में वेंकटेश अय्यर के साथ पहले विकेट के लिए 60 रन जोड़े। वे टी-20 में सबसे ज्यादा बार फिफ्टी रन की साझेदारी का हिस्सा बनने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इंग्लैंड के एलेक्स हेल्स को पीछे छोड़ा, जिनके नाम 210 साझेदारी है। 2. एक सीजन में सबसे ज्यादा बार 200+ रन बनाने वाली टीम बनी हैदराबाद IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा बार 200+ स्कोर करने वाली टीम बन गई। टीम ने बेंगलुरु के खिलाफ 4 विकेट खोकर 255 रन बनाए, जो इस सीजन टीम का नौवां 200+ स्कोर है। इससे पहले ये रिकॉर्ड गुजरात टाइटंस के नाम था, जिन्होंने 2025 में 8 बार यह कारनामा किया था। 3. भुवनेश्वर सबसे ज्यादा बार 50+ रन देने वाले गेंदबाज बने भुवनेश्वर IPL में संयुक्त रुप से सबसे ज्यादा बार एक स्पेल (4 ओवर) में 50+ रन देने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने मोहम्मद शमी बराबरी की, जिन्होंने 9 बार पचास से ज्यादा रन दिए हैं। भुवनेश्वर ने हैदराबाद के खिलाफ 51 रन दिए। इस लिस्ट में मोहम्मद सिराज 8 बार के साथ तीसरे नंबर पर हैं। 4. क्लासन ने मिडिल ऑर्डर में एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाए क्लासन ने IPL के एक सीजन में नंबर 4 या उससे नीचे बैटिंग करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने इस सीजन मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते हुए 606 रन बनाए हैं। उन्होंने ऋषभ पंत को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 2018 में 579 रन बनाए थे। 5. हैदराबाद ने IPL में छठवीं बार 250+ का स्कोर बनाया हैदराबाद ने शुक्रवार को छठवीं बार 250 या उससे रन का स्कोर खड़ा किया। वह सबसे ज्यादा बार यह आंकड़ा पार करने वाली टीम है। इस लिस्ट में पंजाब और बेंगलुरु संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं, जिन्होंने 3-3 बार यह कारनामा किया है। 6. अभिषेक सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले दूसरे भारतीय अभिषेक एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने बेंगलुरु के खिलाफ 5 सिक्स लगाए। अभिषेक ने इस सीजन 43 छक्के लगाते हुए खुद को पीछे छोड़ा। उन्होंने 2024 में 42 सिक्स लगाए थे। इस लिस्ट में राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने इस सीजन 53 छक्के जड़े हैं। 7. नंबर-4 या नीचे बैटिंग करते हुए क्लासेन ने 6वीं फिफ्टी लगाई क्लासेन ने इस सीजन नंबर 4 या उससे नीचे बैटिंग करते हुए छठवीं बार 50+ का स्कोर बनाया। उन्होंने बेंगलुरू के खिलाफ 51 रन बनाए। उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा बार ऐसा करने वाले ऋषभ पंत और ग्लेन मैक्सवेल की बराबरी की। पंत ने 2018 और मैक्सवेल ने 2021 में 6 फिफ्टी लगाई थी। 8. पहली 2 गेंद पर सिक्स लगाने वाले टीम के तीसरे बल्लेबाज नीतीश ने बेंगलुरु के खिलाफ अपनी पहली 2 गेंदों पर लगातार 2 छक्के लगाए। वे हैदराबाद के लिए पारी की पहली 2 गेंदों पर सिक्स लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले राशिद खान ने 2018 और पैट कमिंस ने 2025 में यह कारनामा किया था। 9. बेंगुलरु के 3 गेंदबाज ने 50+ रन दिए बेंगलुरु के 3 गेंदबाजों ने मैच में 50 या उससे ज्यादा रन दिए। एक मैच में सबसे ज्यादा 50+ रन देने वाले गेंदबाजों की लिस्ट में नंबर एक पर बेंगलुरु ही है। 2024 में बेंगलुरु के 4 गेंदबाजों ने एक मैच में फिफ्टी का आंकड़ा छुआ था। दिल्ली (2024) और राजस्थान (2024) के 3 गेंदबाजों ने पचास से ज्यादा रन दिए। सभी मौकों पर विरोधी टीम हैदराबाद थी। 10. ईशान ने बेंगलुरु के खिलाफ लगातार चौथी फिफ्टी लगाई ईशान किशन ने बेंगलुरु के खिलाफ 2024 से 2026 तक लगातार चौथी फिफ्टी लगाई। उन्होंने शुक्रवार को 79 रन की पारी खेली। वे बेंगलुरु के खिलाफ यह कारनामा करने वाले न्यूजीलैंड के केन विलियमसन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 2014 से 2016 के बीच लगातार 7 फिफ्टी लगाई। यहां से टॉप-3 मोमेंट्स… 1. अभिषेक शर्मा ने सिक्स लगाकर खाता खोला बेंगलुरु के खिलाफ अभिषेक शर्मा ने सिक्स लगाकर अपना खाता खोला। उन्होंने मैच के पहले ओवर में भुवनेश्वर की पांचवी गेंद को लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से छक्का जड़ दिया। यह पारी का उनका पहला रन था। 2. वेंकटेश ने अभिषेक का कैच छोड़ा हैदराबाद की पारी के छठवें ओवर में वेंकटेश अय्यर ने अभिषेक का कैच छोड़ दिया। ओवर की चौथी गेेंद रसिख सलाम डार ने शॉर्ट-लेंथ डाली। अभिषेक ने उसपर फ्लैट पुल शॉट खेला, लेकिन गेंद डीप स्क्वायर लेग पर पर खड़े वेंकटेश की ओर गई। उन्होंने दाईं ओर भागते हुए कैच लपकने की कोशिश की, लेकिन गेंद हाथ से छिटक गया। 3. कोहली-हेड के बीच नोंकझोंक, मैच के बाद हाथ नहीं मिलाया बेंगलुरू की पारी में पावरप्ले के दौरान कोहली और ट्रैविस हेड के बीच किसी बात को लेकर नोंक-झोंक हुई। इसके बाद कोहली ने मैच के बाद हेड से हैंडशेक भी नहीं किया। जब कोहली, हेड के पास पहुंचे, तो हेड ने हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन कोहली एकदम से आगे निकल गए।








