न आम, न तरबूज…उत्तराखंड की गर्मियों का साथी ये नन्हा फल, पहाड़ों पर इसके गाए जाते गीत

Last Updated:May 18, 2026, 21:33 IST Kafal Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला काफल इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. गहरे लाल रंग का यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद और औषधीय गुणों की वजह से काफी प्रसिद्ध है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है. काफल केवल फल नहीं बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा भी है. प्रसिद्ध लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. पहाड़ों में यह गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहता है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. इसी के साथ जंगलों में रौनक बढ़ने लगती है. गांवों में बच्चे और महिलाएं जंगलों में काफल तोड़ने जाते हैं, जो एक तरह की पारंपरिक गतिविधि बन चुकी है. कई मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी काफल जान है. काफल को प्राकृतिक ऊर्जा देने वाला फल माना जाता है. गर्मियों में इसे खाने से शरीर को ताजगी और ठंडक मिलती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं. स्थानीय लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में उपयोग करते आए हैं. पहाड़ों में जंगलों से लौटते समय लोग काफल खाकर थकान मिटाते हैं. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. बिना किसी मिलावट और केमिकल के मिलने वाला काफल आज के समय में लोगों के लिए हेल्दी विकल्प बन चुका है. गर्मियों के मौसम में काफल स्थानीय ग्रामीणों के लिए अच्छी आय का साधन बन जाता है. गांवों के लोग जंगलों से काफल इकट्ठा कर बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है. सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में काफल की अच्छी कीमत मिलती है. पर्यटक भी इसे खरीदने में काफी रुचि दिखाते हैं. कई परिवारों की मौसमी आय का बड़ा हिस्सा काफल बिक्री से आता है. खासकर महिलाओं और युवाओं को इससे रोजगार मिलता है. पहाड़ों में सीमित रोजगार के बीच यह जंगली फल लोगों के लिए आर्थिक सहारा बन रहा है. हर साल काफल सीजन का उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google पिछले कुछ वर्षों में काफल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. पहले यह केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब शहरों में भी इसकी मांग बढ़ने लगी है. लोग इसे उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान के रूप में पसंद कर रहे हैं. कई स्थानीय व्यापारी काफल को पैक करके दूसरे शहरों तक पहुंचा रहे हैं. सोशल मीडिया और पर्यटन के कारण भी इसकी पहचान मजबूत हुई है. गर्मियों में बाजारों में काफल की दुकानें लोगों को आकर्षित करती हैं. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसका स्वाद पसंद करते हैं. प्राकृतिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण काफल आज उत्तराखंड के सबसे चर्चित जंगली फलों में शामिल हो गया है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की सबसे खास बात यह है कि इसकी खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला जंगली फल है. उत्तराखंड के बागेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों के जंगलों में यह बड़ी मात्रा में मिलता है. करीब 1500 से 2500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काफल के पेड़ अधिक पाए जाते हैं. ग्रामीण लोग हर साल मौसम आने पर जंगलों से काफल इकट्ठा करते हैं. पहाड़ों के पर्यावरण और जैव विविधता में भी इसका महत्त्वपूर्ण योगदान है. बिना किसी रासायनिक खाद या दवा के उगने वाला यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है. बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि काफल केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं बल्कि औषधीय गुणों का भी खजाना है. इसमें विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. काफल पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट की समस्याओं से राहत देने में उपयोगी है. इसकी छाल का उपयोग दांत दर्द और गले की खराश में भी किया जाता है. गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला यह फल प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है. उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के बीच काफल काफी लोकप्रिय होता जा रहा है. पहाड़ घूमने पहुंचे लोग स्थानीय बाजारों और सड़कों पर काफल खरीदते नजर आते हैं. इसका अनोखा स्वाद पर्यटकों को बेहद पसंद आता है. कई लोग इसे पहाड़ों की खास पहचान मानते हैं. काफल से बने नमक-मसाले वाले स्वाद को लोग बड़े चाव से खाते हैं. सोशल मीडिया पर भी काफल की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल होते हैं. गर्मियों में पहाड़ी पर्यटन के साथ काफल की बिक्री भी बढ़ जाती है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बाहर से आने वाले लोग अक्सर काफल के बारे में पूछते हैं, इसका स्वाद चखने के बाद दोबारा जरूर खरीदते हैं. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के पहाड़ों में काफल की मांग तेजी से बढ़ जाती है. यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है. लाल और गहरे बैंगनी रंग का काफल जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है, मई-जून के महीनों में बाजारों में दिखाई देता है. स्थानीय लोग सुबह-सुबह जंगलों से काफल तोड़कर बाजारों तक पहुंचाते हैं. सड़क किनारे छोटे दुकानदार भी इसे बेचते नजर आते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तराखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|
ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 20:40 IST पलानीस्वामी ने कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि अन्नाद्रमुक द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) अन्नाद्रमुक के संकटग्रस्त प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय पर विधायकों को “खरीद-फरोख्त” करके लुभाने का आरोप लगाया और सरकार बनाने के लिए द्रमुक के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की अफवाहों को खारिज कर दिया। उनकी टिप्पणी एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व वाले एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट द्वारा ईपीएस पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ सरकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विजय को बाहरी समर्थन देने के बाद आई है। हालांकि, पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि एआईएडीएमके डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है, उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना 1972 में डीएमके के विरोध के सिद्धांत पर की गई थी। ईपीएस ने ‘बैकस्टैबर’ विजय की आलोचना की अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) पर “खरीद-फरोख्त” और मंत्री पद की पेशकश के जरिए अन्नाद्रमुक पदाधिकारियों को लुभाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जो पार्टी शुद्ध ताकत होने का दावा करती है, वह द्रमुक सहयोगियों के चरणों में गिर गई है। उसी पार्टी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त कर अन्नाद्रमुक की पीठ में छुरा घोंपा है।” पलानीस्वामी ने आगे कहा कि टीवीके थोड़े समय के लिए ही टिकेगी और उन्हें विश्वास है कि तमिलनाडु में जल्द ही एआईएडीएमके की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, ”एमजीआर और जयललिता के दिनों से, हमने विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और अगर वे पश्चाताप करते हैं तो उन्हें वापस ले लेते हैं।” इस बीच, बागी एआईएडीएमके नेता सी वे शनमुगम ने ईपीएस पर चुनाव से पहले टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की बार-बार सलाह को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनकी टिप्पणी पलानीस्वामी द्वारा 13 मई को विधानसभा विश्वास प्रस्ताव के दौरान नेतृत्व की अवहेलना करने के लिए विधायक एसपी वेलुमणि और सी विजयभास्कर सहित कई बागी नेताओं को पार्टी पदों से निष्कासित करने के बाद आई है। अन्नाद्रमुक ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन किया है जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवज्ञा की और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए मतदान किया, जो ईपीएस नेतृत्व के तहत पार्टी में सबसे गंभीर संकट को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु की राजनीति(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)ईपीएस विजय(टी)ईपीएस बनाम विजय(टी)एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक(टी)विजय सरकार
‘परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाओ’: कांग्रेस विधायक ने कर्नाटक में नेतृत्व की नई चर्चा छेड़ी | बेंगलुरु-न्यूज़ न्यूज़

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 19:35 IST राजन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि अगर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करती है तो वह परमेश्वर का समर्थन करेंगे। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर (फाइल फोटो) कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन पर ताजा राजनीतिक चर्चा सोमवार को तब तेज हो गई जब वरिष्ठ कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने कहा कि अगर सिद्धारमैया को हटाया जाता है तो गृह मंत्री जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद के लिए विचार किया जाना चाहिए। पूर्व मंत्री राजन्ना ने कहा कि परमेश्वर ने अवसर के लिए लंबे समय से इंतजार किया था और अगर कांग्रेस नेतृत्व ने बदलाव करने का फैसला किया तो वह राज्य का नेतृत्व करने का मौका पाने के हकदार थे। पत्रकारों से बात करते हुए, राजन्ना ने कहा कि परमेश्वर ने आठ साल तक कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था और अगर वह अपनी सीट जीतते तो 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बन सकते थे। शीर्ष पद के लिए गृह मंत्री का समर्थन करते हुए राजन्ना ने कहा, “वह तब चुनाव हार गए थे और उनका बकाया अभी भी लंबित है।” ‘राहुल गांधी और हाईकमान करेंगे फैसला’ राजन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि वह केवल अपनी निजी राय व्यक्त कर रहे हैं और कहा कि अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी राय मांगी गई तो वह चाहेंगे कि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने रहें। हालांकि, अगर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करती है तो वह परमेश्वर का समर्थन करेंगे। कर्नाटक नेतृत्व वार्ता संभवत: केरल में हुई होगी राजन्ना ने यह भी दावा किया कि कर्नाटक के नेतृत्व के बारे में चर्चा सोमवार को तिरुवनंतपुरम में हुई होगी, जहां कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नई केरल सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए एकत्र हुए थे। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मौजूद थे। राजन्ना ने कहा कि यह उनका “भविष्यवाणी” था कि बैठक के दौरान कर्नाटक की राजनीति पर चर्चा हुई होगी। ‘दलित मुख्यमंत्री’ की मांग तेज़ यह टिप्पणी कर्नाटक में किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाने की कांग्रेस के एक वर्ग के भीतर बढ़ती मांग के बीच आई है। यदि ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है तो परमेश्वर को अग्रणी नामों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा के दौरान उनका नाम कई बार सामने आया है, खासकर पार्टी में अहिंदा नेताओं के बीच। AHINDA अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों का एक राजनीतिक और सामाजिक समूह है, जो सिद्धारमैया की राजनीति से निकटता से जुड़ा हुआ है। सत्ता साझेदारी पर बहस जारी है नवंबर 2025 में कांग्रेस सरकार द्वारा अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा पड़ाव पार करने के बाद से नेतृत्व में फेरबदल की अटकलें जारी हैं। शिवकुमार के समर्थकों ने बार-बार मांग की है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर कथित सत्ता साझेदारी व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। चल रही राजनीतिक चर्चा से राज्य में कैबिनेट फेरबदल की अफवाहें भी तेज हो गई हैं। इस बीच, कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने पहले कहा था कि कैबिनेट बदलाव के संबंध में कोई भी निर्णय मुख्यमंत्री और कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान शासन और विकास कार्यों पर केंद्रित है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक राजनीति(टी)कर्नाटक राजनीति समाचार(टी)राजनीतिक हलचल(टी)कर्नाटक सीएम
जिस शकरकंद के छिल्के को आप फेंक देते हैं, उसमें छिपा है कैंसर का काल, वैज्ञानिकों ने भी माना लोहा

Last Updated:May 18, 2026, 18:24 IST Sweet potato benefits: शकरकंद के कई फायदे के बारे में हम जानते हैं लेकिन जब भी हम शकरकंद खाते हैं तो उसके साथ कभी उसका छिल्का नहीं खाते. यह अक्सर डस्ट बिन में ही जाता है. अब एक नए रिसर्च में जो बात सामने आई है उसके हिसाब से आप इस छिल्के को नहीं फेकेंगे. रिसर्च के मुताबिक शकरकंद के छिल्के में कैंसर के जोखिम को कम करने की क्षमता है. शकरकंद के छिलके से कैंसर पर लगाम लग सकता है. Sweet potato peels Prevent cancer: शकरकंद रूट वेजिटेबल है जिसके कई फायदे हैं. इन फायदों के बारे में हम पहले से जानते हैं लेकिन एक रिसर्च में दावा किया गया है कि जिस शकरकंद के छिलके को हम फेंक देते हैं, उससे कैंसर जैसी बीमारियों को खत्म करने की क्षमता है. इस अध्ययन में दावा किया गया है कि शकरकंद के छिलके में ऐसे-ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर होने के जोखिम को बहुत कम कर देता है. रिसर्च के मुताबिक शकरकंद में भी कैंसररोधी गुण होता है. शकरकंद में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करने में मदद करता है. फ्री रेडिकल्स जब कोशिकाओं में बनने लगते हैं तब आसपास की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है. इससे कोशिकाओं के अंदर डीएनए, लिपिड और प्रोटीन डैमेज होने लगते हैं जो कैंसर कोशिकाओं में बदलने का कारण बनता है. छिल्के में मिले कैंसर को खत्म करने वाले कंपाउंडअमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन की वेबसाइट और पबमेड जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक शकरकंद के छिलके में कैंसररोधी गुण को साबित करने के लिए एक परीक्षण किया गया. इस परीक्षण में शकरकंद के छिलके में मौजूद विभिन्न तत्वों को निकाला गया और इसके बाद इसका विश्लेषण किया गया. इसके बाद शकरकंद के छिलके में स्लफोरहोडामाइन बी और 2, 2 डाइफिनाइल-1 पिकराइलड्रेजाइल जैसे तत्व पाए गए. इन तत्वों में एंटीकैंसर गुण से भरपूर होते हैं. इसके साथ ही इसमें कई एंटीऑक्सीडेंट्स भी मिले जो कैंसर से बचाने में बहुत मददगार है. दरअसल, कोलोन, ब्रेस्ट, ओवरी, नेक, लंग्स जैसे कैंसर में जो तत्व पाए जाते हैं, उन तत्वों को शकरकंद के छिलके पाए जाने वाले कंपाउड कम कर देते हैं. ये सारे तत्व इन कैंसर को होने से रोक सकता है. अध्ययन के मुताबिक शकरकंद के छिलके कई तरह के कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोकने में सक्षम है. स्किन पर लाता है ग्लोकई वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि शकरकंद के छिलकों में गूदे या पल्प के मुकाबले दस गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर होते हैं. यह न केवल पाचन को दुरुस्त रखता है बल्कि शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में भी सहायक पाया गया है. इसमें मौजूद अघुलनशील फाइबर कब्ज की समस्या को दूर करता है और आंतों की सेहत के लिए वरदान है. शकरकंद के छिलके हार्ट के लिए भी बहुत फायदेमंद है. शकरकंद के छिलके में मौजूद पोटैशियम बीपी को नियंत्रित करने और हार्ट की धमनियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इससे स्किन में निखार आता है. एंटीऑक्सीडेंट्स की अधिकता के कारण यह फ्री रेडिकल्स से लड़ता है, जिससे समय से पहले झुर्रियां नहीं आतीं और त्वचा चमकदार बनी रहती है. टाइप 2 डायबिटीज में भी फायदेमंदएक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक शकरकंद के छिलके डायबिटीज के जोखिम को कम करने में माहिर है. आमतौर पर यही समझा जाता है कि शकरकंद मीठा होता है इसलिए यह डायबिटीज मरीजों को नहीं खाना चाहिए. लेकिन बीबीसी की एक रिपोर्ट ने रिसर्च का हवाला देते हुए बताया है कि 80 ग्राम शकरकंद में 285 किलो जूल ऊर्जा मिलती है. इसके साथ ही इसमें 0.9 ग्राम प्रोटीन, 0.2 ग्राम फैट, 6.7 ग्राम शुगर, 280 मिलीग्राम पोटैशियम, 14 मिलीग्राम विटामिन सी सहित कई तरह के मिनिरलस् पाए जाते हैं. ये सारे तत्व कई बीमारियों से बचाते हैं. इतना ही नहीं शकरकंद से टाइप 2 डायबिटीज से भी मुक्ति दिलाता है. अध्ययन के मुताबिक अगर शकरकंद की कम खुराक का सेवन किया जाए तो यह टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ब्लड शुगर लेवल को बहुत घटा देता है. शकरकंद में कई तरह के विटामिन, मिनिरल्स और माइक्रो न्यूट्रेंट्स होते हैं जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है. शकरकंद के नियमित सेवन से वजन भी घटाया जा सकता है. शकरकंद वसा के मेटाबोलिज्म को तेज करता है. शकरकंद का सेवन करने के बाद भूख बहुत कम लगती है और लंबे समय तक कुछ खाने की चाहत नहीं होती है. इसी कारण शकरकंद वजन को कम करने में मदद करता है. इतना ही नहीं माना जाता है कि शकरकंद के सेवन से ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहता है. शकरकंद एनर्जी बूस्टर भी है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
क्या आप भी फ्रिज में रखते हैं कटे फल? ये गलती सेहत पर पड़ सकती है भारी, एक्सपर्ट ने बताया कब बन जाते हैं जहरीले

Cut Fruits Storage: गर्मियों में ज्यादातर लोग तरबूज, खरबूजा, पपीता या अनानास जैसे फलों को काटकर फ्रिज में रख देते हैं ताकि बार-बार काटने की झंझट न रहे और ठंडे फल आसानी से मिल जाएं. देखने में यह आदत काफी आसान लगती है, लेकिन कई बार यही छोटी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखने के बाद फल पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, जबकि सच यह है कि कटने के बाद फलों की ताजगी तेजी से कम होने लगती है. हवा, नमी और बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद उनमें खराबी शुरू हो जाती है, अगर सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो कटे हुए फल पेट से जुड़ी दिक्कतों की वजह भी बन सकते हैं. खासकर गर्म मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं और फल जल्दी खराब हो जाते हैं. यही कारण है कि एक्सपर्ट कटे फलों को ज्यादा देर तक स्टोर करने से बचने की सलाह देते हैं, अगर आप भी अक्सर कटे हुए फल फ्रिज में रखते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि उन्हें कितनी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है और स्टोर करने का सही तरीका क्या है. कटे हुए फल जल्दी क्यों खराब होते हैं?जब भी किसी फल को काटा जाता है, उसकी बाहरी सुरक्षा परत हट जाती है. इसके बाद फल सीधे हवा और नमी के संपर्क में आ जाता है. यही वजह है कि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे हानिकारक बैक्टीरिया कटे फलों में तेजी से बढ़ सकते हैं. फ्रिज बैक्टीरिया की रफ्तार को धीमा जरूर करता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता. इसलिए यह मान लेना गलत है कि फ्रिज में रखा हर कटे फल पूरी तरह सुरक्षित है. ऑक्सीडाइजेशन से कम हो जाते हैं पोषक तत्वआपने कई बार देखा होगा कि कटने के कुछ देर बाद सेब या केला भूरा पड़ने लगता है. यह ऑक्सीडाइजेशन की वजह से होता है. हवा के संपर्क में आने पर फलों में मौजूद विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. यानी फल सिर्फ स्वाद ही नहीं खोते, बल्कि उनका न्यूट्रिशन भी कम होने लगता है. लंबे समय तक कटे फल रखने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कितने समय तक सुरक्षित रहते हैं कटे फल?कटे फलों की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें किस तापमान पर रखा गया है. अगर फल कमरे के तापमान पर रखे हैं, तो उन्हें 4 से 6 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. अगर फ्रिज का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम है, तो ज्यादातर कटे फल करीब 24 घंटे तक ठीक रह सकते हैं. तरबूज, खरबूजा, पपीता और अनानास जैसे ज्यादा पानी वाले फल जल्दी खराब होते हैं. केला और सेब जैसे फल जल्दी रंग बदलते हैं, इसलिए इन्हें काटने के तुरंत बाद खाना बेहतर माना जाता है. लोग स्टोर करते समय कौन सी गलतियां करते हैं?कई लोग कटे फलों को प्लेट में खुला छोड़ देते हैं या हल्के फॉयल में ढककर फ्रिज में रख देते हैं. इससे फल लगातार हवा के संपर्क में बने रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं. इसके अलावा बार-बार फ्रिज खोलने से अंदर का तापमान बदलता रहता है. तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर फलों में खराबी तेजी से बढ़ती है. कई बार लोग एक ही कंटेनर को बार-बार खोलते रहते हैं, जिससे बाहर की दूषित हवा अंदर पहुंचती रहती है. कटे फलों को सुरक्षित रखने का सही तरीका 1. एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करेंकटे हुए फलों को हमेशा कांच या अच्छी क्वालिटी के एयरटाइट कंटेनर में रखें. इससे हवा अंदर कम जाती है और फल ज्यादा समय तक ताजे बने रहते हैं. 2. साफ-सफाई का ध्यान रखेंफल काटने से पहले हाथ, चाकू और कटिंग बोर्ड अच्छी तरह साफ करें. गंदे बर्तन या चाकू से बैक्टीरिया सीधे फल के अंदर पहुंच जाते हैं. 3. तुरंत फ्रिज में रखेंफल काटने के बाद उन्हें ज्यादा देर बाहर न छोड़ें. तुरंत फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. 4. छोटे हिस्सों में स्टोर करेंअगर ज्यादा फल काट रहे हैं, तो उन्हें छोटे-छोटे कंटेनर में रखें. इससे हर बार पूरा कंटेनर खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कैसे पहचानें कि फल खराब हो चुके हैं?कई बार फल देखने में ठीक लगते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो चुके होते हैं. ऐसे में इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है. फल से खट्टी या फर्मेंटेशन जैसी गंध आना, फल का चिपचिपा हो जाना, ज्यादा पानी छोड़ना, रंग का बहुत ज्यादा गहरा या काला पड़ जाना, स्वाद में बदलाव महसूस होना. अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो ऐसे फल खाने से बचना चाहिए. बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा जरूरी सावधानीकटे हुए खराब फल बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए उनके लिए हमेशा ताजे और तुरंत कटे फल देना ज्यादा सुरक्षित रहता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
Heatwave | Pregnant Women Safety Tips | भीषण गर्मी में गर्भवती महिलाएं रखें खास ध्यान, डॉक्टर ने बताए जरूरी उपाय

Last Updated:May 18, 2026, 17:34 IST Tips To Be Safe In Summer Season For Pregnant Women: राजस्थान की भीषण गर्मी अब गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता बढ़ाने लगी है. डॉक्टरों के मुताबिक तेज धूप, लू और शरीर में पानी की कमी का असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों पर पड़ सकता है. जोधपुर की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पूनम पारख ने सलाह दी है कि इस मौसम में पर्याप्त पानी, नारियल पानी, छाछ और हल्का भोजन बेहद जरूरी है. साथ ही धूप से बचाव और आराम का भी खास ध्यान रखना चाहिए. जोधपुर. राजस्थान में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी अब गर्भवती महिलाओं के लिए भी चिंता का कारण बनती जा रही है. तेज धूप, लू और शरीर में पानी की कमी का असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर पड़ सकता है. ऐसे में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पूनम पारख ने गर्भवती महिलाओं को गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. डॉक्टरों के अनुसार इस दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी होता है. इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. इसके अलावा नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन भी शरीर को राहत देता है. डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सतर्कता और सही देखभाल से इस भीषण गर्मी में भी गर्भवती महिलाएं खुद को और अपने होने वाले बच्चे को सुरक्षित रख सकती हैं. शरीर में पानी की कमी न होने देंडॉ. पूनम पारख के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रहता है. ऐसे में गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को लंबे समय तक धूप में रहने से बचना चाहिए और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना चाहिए, ताकि लू का असर कम हो सके. डॉक्टरों के मुताबिक नारियल पानी, छाछ, ताजे फलों का जूस और स्मूदी शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते. इसके साथ ही समय-समय पर आराम करना भी जरूरी है. अधिक देर तक गर्म वातावरण में रहने से कमजोरी और चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है. खानपान और कपड़ों का भी रखें ध्यानविशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में ज्यादा तेल-मसाले और तली-भुनी चीजों का सेवन शरीर पर भारी पड़ सकता है. गर्भवती महिलाओं को हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए. दलिया, खिचड़ी, दही और मौसमी फल इस मौसम में बेहतर विकल्प माने जाते हैं. डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लंबे समय तक खाली पेट नहीं रहना चाहिए और समय पर भोजन करना जरूरी है. डॉ. पूनम ने बताया कि गर्मी से राहत पाने के लिए एसी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन कमरे का तापमान बहुत ज्यादा कम नहीं रखना चाहिए. एसी वाले ठंडे कमरे से सीधे तेज गर्मी में जाने से शरीर पर अचानक असर पड़ सकता है. इसके अलावा महिलाओं को ढीले-ढाले और सूती कपड़े पहनने चाहिए, ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे और गर्मी कम महसूस हो. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
संगीत- फैशन की दुनिया में चमका एस्टन विला का खिलाड़ी:इंग्लैंड के 30 वर्षीय कोर्टनी हॉस; अपराधियों के हमले ने छीना फुटबॉल करियर

एक समय था, जब इंग्लैंड के फुटबॉल मैदानों में कोर्टनी हॉस का नाम गूंजता था। प्रीमियर लीग में खेलना, लाखों पाउंड की कमाई, बड़े स्टेडियमों की चमक और दुनिया भर में पहचान, यह सब उनके जीवन का हिस्सा था। लेकिन अब वही खिलाड़ी फुटबॉल से दूर, माइक्रोफोन के सामने खड़ा होकर अपने नए सपनों को आवाज दे रहा है। 30 वर्षीय कोर्टनी हॉस की कहानी सिर्फ एक फुटबॉलर की नहीं, बल्कि संघर्ष, दर्द और फिर नई शुरुआत की कहानी है। इंग्लैंड के क्लब एस्टन विला के लिए खेलने वाले इस डिफेंडर ने करियर में कई बड़े पल देखे। मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाफ ओल्ड ट्रैफर्ड में विजयी गोल करना सबसे यादगार पल बना। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। साल 2018 में क्रिसमस के दौरान लंदन में परिवार से मिलने गए हॉस का कुछ अपराधियों ने पीछा किया। घर पहुंचते ही उन पर हमला हुआ। सिर पर बोतल से वार किया गया। खून से लथपथ हालत में वह किसी तरह अस्पताल पहुंचे। उस रात उन्होंने सिर्फ अपना करियर नहीं, बल्कि अपनी जान भी लगभग खो दी थी। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। फुटबॉल खेलना जारी रखा, लेकिन शरीर अब उनका साथ छोड़ने लगा था। कभी ग्रोइन इंजरी, कभी एंकल और फिर घुटने की गंभीर समस्या। चोटें बढ़ती गईं और मैदान पर उनका समय कम होता गया। 2022 में वह वॉटफोर्ड क्लब गए, उम्मीद थी कि करियर पटरी पर लौटेगा। लेकिन घुटने की चोट ने सब खत्म कर दिया। लगातार सर्जरी हुईं, रिहैब चला, लेकिन वापसी नहीं हो सकी। दो साल तक उन्होंने प्रोफेशनल मैच नहीं खेला। आखिरकार एस्टन विला ने भी उनका साथ छोड़ दिया। जहां कई खिलाड़ी ऐसे समय में टूट जाते हैं, वहीं हॉस ने खुद को नए रास्ते पर खड़ा किया। फुटबॉल से दूर होने के बाद उन्होंने संगीत को चुना, जो उनका बचपन का प्यार था। अब वह ‘कोर्टनी हॉस’ नहीं, बल्कि ‘कोर्ट्स’ के नाम से पहचाने जाना चाहते हैं। अब उनका इंस्टाग्राम फुटबॉल नहीं, बल्कि म्यूजिक वीडियो और गानों से भरा है। जल्द ही उनका नया एल्बम आने वाला है। इसके साथ ही वह ‘ब्लाइंडेड माइंड्स’ नाम से कपड़ों का ब्रांड भी लॉन्च कर रहे हैं। कभी प्रीमियर लीग का डिफेंडर रहा यह खिलाड़ी जिंदगी के नए मैदान में उतर चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब उसके हाथ में फुटबॉल नहीं, बल्कि माइक्रोफोन है। लेकिन जज्बा वही पुराना है- गिरकर फिर उठने का। हॉस के परिवार में सभी संगीत के शौकीन हॉस का परिवार संगीत के बेहद करीब रहा है। सात भाइयों वाले परिवार में सभी माइकल जैक्सन, अशर, क्रिस ब्राउन जैसे कलाकारों के गाने सुना करते थे। परिवार की पार्टियों में सभी भाई मिलकर गाते थे और बचपन में उन्हें लगता था कि वे ‘जैक्सन फाइव’ का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें रैप, आर एंड बी, क्लासिकल, इंडी और रॉक सहित हर तरह का संगीत पसंद है। हालांकि, उन्होंने आर एंड बी को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी आवाज इस शैली के लिए सबसे बेहतर है।
एक दिन में कितने चम्मच कुकिंग ऑयल खाना चाहिए? डॉक्टर सरीन ने बताई सही मात्रा, ज्यादा खाना नुकसानदायक

Last Updated:May 18, 2026, 15:24 IST Daily Oil Intake for Better Health: अधिकतर लोग रोज जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन कर रहे हैं, जिसकी वजह से तमाम बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. मशहूर लिवर डॉक्टर शिवकुमार सरीन के अनुसार वयस्कों को एक दिन में 5 से 6 चम्मच से ज्यादा ऑयल या घी नहीं खाना चाहिए. बच्चों के लिए इसकी मात्रा और कम हो सकती है. ज्यादा तेल खाने से लिवर डिजीज, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. डॉ. सरीन के अनुसार एक दिन में 5 से 6 चम्मच तेल या घी खाना चाहिए. How Much Oil Safe Per Day: अधिकतर खाने-पीने की चीजों में तेल का इस्तेमाल किया जाता है. सब्जी, दाल, पराठा, स्नैक्स और फास्ट फूड जैसी चीजों में अच्छी खासी मात्रा में ऑयल यूज किया जाता है. शरीर को हेल्दी फैट की जरूरत होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन करना कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार तेल का जरूरत से ज्यादा सेवन मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और हार्ट डिजीज का कारण बन सकता है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आपको रोज कितना तेल खाना चाहिए और कितनी मात्रा सेहत के लिए नुकसानदायक होती है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने 30 मार्च 2026 को अपने एक्स हैंडल पर देश के मशहूर लिवर डॉक्टर शिवकुमार सरीन का एक वीडियो शेयर किया था. इसमें एसके सरीन ने बताया कि एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को रोजाना लगभग 5 से 6 चम्मच तेल या घी का सेवन करना चाहिए. एक चम्मच में करीब 5 ग्राम तेल या घी आता है. इस हिसाब से एक दिन में 25 से 30 ग्राम तेल या घी का सेवन करना चाहिए. अगर इससे कम तेल खाएंगे, तो शरीर को फायदा ही होगा. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या जिन्हें कोई बीमारी है, उन लोगों को कम से कम तेल खाना चाहिए. How much oil are you consuming in a day? Is it within the safe limit? Watch renowned liver expert Dr. Shiv Sarin explain how much oil you can consume in a day & how keeping track of daily oil intake is an effective step in preventing obesity.#StopObesity #EatRightIndia pic.twitter.com/11y6SAqYc8
LLB छात्रा से रेप के आरोपी ने जुलूस निकाला:गाजियाबाद जेल से छूटने पर समर्थकों ने फूल बरसाए, हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रहा

गाजियाबाद में रविवार को LLB छात्रा से रेप का आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आया। हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रह चुका है। 8 महीने बाद डासना जेल से निकलते ही उसके समर्थकों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इसके बाद उसे कंधे पर बैठाकर जेल परिसर से सड़क तक ले गए। फिर गाड़ियों का काफिला निकालकर जुलूस निकाला गया। समर्थकों ने इसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। 8 अगस्त 2025 को आरोपी सुशील प्रजापति ने LLB की एक छात्रा के साथ रेप किया था। इसके बाद उसे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। देर रात करीब 11 बजे छात्रा मुरादनगर थाने पहुंची। उसके समर्थन में बजरंग दल के लोग भी पहुंचे और हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। 11 अगस्त 2025 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 17 मई को सुशील प्रजापति जेल से बाहर आया। देखिए 3 तस्वीरें… अब जानिए पूरा मामला… 2021 में हुई थी मुलाकात पुलिस के मुताबिक, नवंबर 2021 में गाजियाबाद निवासी सुशील प्रजापति की मुलाकात LLB की एक छात्रा से हुई थी। इसके बाद सुशील उसे लगातार फोन कर हालचाल लेने लगा। छात्रा ने उससे बताया कि वह लॉ की पढ़ाई के साथ मेरठ कोर्ट में एक सीनियर वकील के पास प्रैक्टिस भी करती है। इस पर सुशील ने उससे कहा कि वह गाजियाबाद कोर्ट में बैठना शुरू कर दे। उसने दावा किया कि उसके जानकार वहां सीनियर एडवोकेट हैं, जो उसे हर महीने पैसे भी दिलवा देंगे। साथ ही, उसके जानने वाले लोग भी छात्रा के पास केस लेकर आएंगे। सुशील ने यह भी कहा कि गाजियाबाद, मोदीनगर के ज्यादा करीब है। इस पर छात्रा ने उससे गाजियाबाद कोर्ट में बैठने की व्यवस्था कराने को कहा। थार में बैठाकर ले गया था सुशील 8 अगस्त 2025 की सुबह करीब 11 बजे सुशील ने छात्रा को फोन कर कहा कि उसकी गाजियाबाद के एक सीनियर वकील से बात हो गई है और वह उसी दिन मुलाकात करा देगा। इसके बाद छात्रा मेरठ से बस के जरिए गाजियाबाद के मुरादनगर पहुंची। वहां सुशील पहले से थार गाड़ी लेकर खड़ा था। उसने कहा, “जल्दी बैठो, वकील साहब इंतजार कर रहे हैं। अभी उनसे मिलना है। इसके बाद वह छात्रा को एक फ्लैट पर ले गया। वहां उसने उसे कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए दी और कहा कि वकील साहब आने वाले हैं। आरोप है कि कोल्ड ड्रिंक पीते ही छात्रा को नींद आने लगी। इसी दौरान सुशील प्रजापति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद सुशील ने उसे धमकी दी कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया तो उसकी हत्या करवा देगा। उसने कहा कि उसके बड़े-बड़े लोगों से संबंध हैं और वह हिंदू युवा वाहिनी संगठन से जुड़ा हुआ है। इसके बाद वह छात्रा को अपनी कार से सड़क पर छोड़कर चला गया और कहा कि यहां से चुपचाप मेरठ लौट जाओ। छात्रा के पक्ष में जुटे कई संगठन होश आने के बाद छात्रा रात करीब 11 बजे मुरादनगर थाने पहुंची। सूचना मिलते ही उसके समर्थन में गोरक्षक दल और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी सुशील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। करीब 8 महीने तक डासना जेल में रहने के बाद वह रविवार को जमानत पर जेल से बाहर आया। —————- यह खबर भी पढ़िए… लखनऊ में ढाबा संचालक की हत्या:झगड़े का वीडियो बनाने पर दबंगों ने सिर में मारी गोली, 3 संदिग्ध हिरासत में लखनऊ में दबंगों ने एक ढाबा संचालक के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। उसने ढाबे के सामने रोड पर लड़ाई कर रहे युवकों का वीडियो बनाया था। इससे नाराज होकर दबंग युवकों ने घटना को अंजाम दिया। ढाबा संचालक को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी ऑपेरशन के दौरान मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें
लू में ज्यादा बाहर न निकलें, आंखों की इन 3 समस्याओं का हो जाएंगे शिकार, डॉक्टर से समझें खतरे

Last Updated:May 18, 2026, 14:04 IST Eye Problems in Summer Heat: तेज गर्मी और लू का असर आंखों पर भी बुरी तरह पड़ता है. अगर आप भीषण गर्मी में आंखों को खयाल नहीं रखेंगे, तो इससे ड्राई आई, एलर्जी और इंफेक्शन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. डॉक्टर्स की मानें तो आंखों को धूप से बचाना जरूरी होता है. इसके लिए घर से निकलते वक्त सनग्लासेस जरूर इस्तेमाल करने चाहिए. गर्मी में आंखों को हेल्दी रखने के लिए धूप में बाहर जाने से बचें. How Summer Heat Affect Eyes: देश के कई हिस्सों में इस वक्त भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है. दिल्ली-एनसीआर में पारा 45 के पार हो गया है. मौसम विभाग की मानें तो अगले एक सप्ताह तक इसी तरह आसमान से आग बरसेगी. गर्मी में तेज धूप और गर्म हवाएं आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. लू के दौरान लंबे समय तक बाहर रहने से आंखों में ड्राइनेस, जलन, लालिमा और संक्रमण जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. डॉक्टर्स के अनुसार तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें और गर्म हवाएं आंखों की संवेदनशील परत को प्रभावित करती हैं. नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया गर्मी और लू की वजह से आंखों की नमी तेजी से कम होने लगती है. जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या जल्दी सूख जाते हैं, तो ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या हो सकती है. लंबे समय तक धूप में रहना, कम पानी पीना, लगातार स्क्रीन देखना और AC में ज्यादा समय बिताना इस समस्या को बढ़ा सकता है. इस कंडीशन में लोगों को आंखों में जलन, चुभन, खुजली, धुंधला दिखना और लालिमा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार आंखों से बार-बार पानी भी आने लगता है. अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो आंखों में इंफेक्शन और कॉर्निया से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं. डॉक्टर ग्रोवर के मुताबिक गर्मियों में धूल, पसीना और प्रदूषण बढ़ने से आंखों में एलर्जी और संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है. तेज गर्मी और नमी में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जिससे कंजंक्टिवाइटिस यानी आई फ्लू जैसी समस्या हो सकती है. आई फ्लू होने पर लोगों को आंखों में रेडनेस, खुजली, सूजन, पानी आना और चिपचिपा पदार्थ निकलने जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं. कुछ लोगों को तेज रोशनी में आंखें खोलने में भी परेशानी होती है. अगर गंदे हाथों से आंखों को बार-बार छुआ जाए, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है. एक्सपर्ट ने बताया कि तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें आंखों के लिए काफी नुकसानदायक मानी जाती हैं. बिना सनग्लासेस के लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों की बाहरी सतह प्रभावित हो सकती है. लगातार UV एक्सपोजर से भविष्य में मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. धूप में ज्यादा काम करने वाले लोग, बाइक चलाने वाले, बच्चे और बुजुर्ग इस खतरे की चपेट में जल्दी आ सकते हैं. इसलिए आंखों को सीधी धूप से बचाना बेहद जरूरी है. अब सवाल है कि गर्मी में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें? डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि गर्मियों में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए बाहर निकलते समय हमेशा UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस पहनें. दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और आंखों को बार-बार हाथ लगाने से बचें. बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोना फायदेमंद हो सकता है. लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन देखने से भी आंखों पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए बीच-बीच में आंखों को आराम देना जरूरी है. अगर आंखों में तेज दर्द, लगातार रेडनेस, सूजन, धुंधला दिखना या रोशनी से ज्यादा परेशानी हो रही हो, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें








