मुंह के छाले कब ले लेता है कैंसर का रूप, कैसे समझें कि ये नॉर्मल नहीं, ENT के बड़े डॉक्टर ने बताया क्लू

Last Updated:May 19, 2026, 14:27 IST Persistence mouth ulcer: हमारे मुंह में छाले अक्सर होते रहते हैं. ये छाले बिना दर्द वाले होते हैं और अपने आप गायब भी हो जाते हैं. लेकिन जब ये छाले बार-बार आने लगे और साथ में आवाज में भी बदलाव होने लगे तो यह किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं. इसलिए ऐसे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कैंसर के भी संकेत हो सकते हैं. लेकिन सवाल है कि कैसे समझें कि कौन सा छाला कैंसर का संकेत है. इसके लिए हमने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में ENT डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. रवि मेहर से बात की. मुंह में छोटे-छोटे छाले बवंडर बन सकता है. हालांकि आमतौर पर इससे कोई परेशानी नहीं होती है. जब आप ज्यादा थक जाते हैं, कमजोरी होने लगती है, सीजनल इंफेक्शन होता है, पॉल्यूशन बढ़ता है, ब्रश करने में कुछ गलतियां होने लगती है तो मुंह में छाले आ जाते हैं और ये अपने आप ठीक भी हो जाते हैं. लेकिन जब ये छाले-छाले बार-बार आने लगे तो यह कैंसर भी हो सकता है. छाले के साथ अगर आवाज में परिवर्तन हो जाए तो यह ज्यादा घातक कॉम्बिनेशन है क्योंकि इससे कैंसर की आशंका ज्यादा प्रबल हो जाती है. ऐसे में हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि हम कब समझें कि मामला गंभीर हो गया है और अब डॉक्टर के पास जाना चाहिए. इसके लिए हमने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज नई दिल्ली में ENT डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. रवि मेहर से बात की. कब ये छाले कैंसर का रूप बन जाते हैं डॉ. रवि मेहर ने बताया कि मुंह में छाले आमतौर पर नॉर्मल होते हैं. कई कारणों से यह अपने आप आते हैं और अपने आप चले जाते हैं. कुछ मामलों में कुछ दवाइयां खाकर भी इसे ठीक किया जा सकता है. लेकिन कुछ छाले बेहद गंभीर किस्म के हो सकते हैं. अगर मुंह में छाल बड़े हैं और इसमें दर्द भी हो रहा है तो इसे गंभीरता से लेनी चाहिए. अगर ये छाले दवाई खाने के बाद ठीक नहीं हो रहा है तो यह और भी गंभीर है. वास्तव में जब मुंह में छाले बड़े आकार के हो और वे सख्त होने लगे, उनमें से खून निकलने लगे और कभी-कभार दर्द भी हो तो ऐसे संकेत कैंसर के हो सकते हैं. हालांकि इन सबके बावजूद यह जरूरी नहीं कि ये कैंसर ही हो लेकिन अगर ये सारे लक्षण दवा खाने के बाद भी ठीक न हो और दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हों तो कैंसर की आशंका ज्यादा है.अगर छाले का आकार धीरे-धीरे बढ़ता ही जाए कम न हो तो ये ज्यादा खतरनाक है. छाले के कैंसर में बदलने का सबसे बड़ा संकेत ये होता है कि यह सिर्फ एक छाला होता है जो धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है. अगर सिर्फ एक छाला है तो ऐसे मामलों में बिना देर किए कैंसर के डॉक्टर के पास जाना चाहिए. कब छाले बिना नुकसान वाले होते हैं डॉ. रवि मेहर कहते हैं कि आमतौर पर छाले नॉर्मल ही होते हैं. ये आकार में छोटे-छोटे होते हैं, आकार बढ़ता नहीं है. ये अपने आप ठीक हो जाता है. अगर नहीं भी ठीक होता तो दो-तीन बाद लोग मल्टीविटामिन की गोलियां खा लेते हैं. इससे ठीक हो जाता है. ऐसे छाले मुंह में कई होते हैं. जब मल्टीपल छाले हो तो डरने की कोई बात नहीं. ये छाले क्यों निकलते हैं मुंह में छाले निकलने के कई कारण होते हैं. हालांकि हर छाला कैंसर नहीं होता. आमतौर पर मुंह में छाले खराब लाइफस्टाइल की गलतियों से निकलते हैं. जब शरीर में विटामिन B12, फोलिक एसिड (B9), आयरन और जिंक की कमी होने लगे तो मुंह में छाले निकलने लगते है. इसलिए मल्टीविटामिन खाते ही ठीक होने लगते हैं. पेट की समस्याओं के कारण भी छाले निकलने लगते हैं. जब पाचन तंत्र में खराबी, कब्ज या एसिडिटी होती है तो पेट की गर्मी बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर मुंह की म्यूकोसा परत पर पड़ता है और छाले निकल आते हैं.कई बार ब्रश करते समय अचानक चोट लगना, गलती से गाल कट जाना या तीखे दांतों की रगड़ से भी छाले हो जाते हैं. शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण भी मुंह में छाले निकल सकते हैं. महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण भी बार-बार छाले होने की समस्या देखी जाती है. मानसिक तनाव, कमजोर इम्यूनिटी, कुछ फूड इंटॉलरेंस आदि के कारण भी छाले निकल सकते हैं. लेकिन ये छाले दवा खाते ही ठीक होने लगते हैं या अपने आप ठीक होने लगते हैं. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
जान्हवी कपूर ने किया बॉडीगार्ड को इशारा:तुरंत सेल्फी ले रहे फैन पर लिया गया एक्शन, गोविंदा के गार्ड्स की भी पैपराजी से हुई झड़प

सोमवार को अपकमिंग फिल्म पेड्डी का ट्रेलर लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था। मुंबई के बीकेसी में हुए इस इवेंट में जान्हवी कपूर और रामचरण समेत फिल्म की स्टारकास्ट पहुंची थी। इस दौरान एक फैन का नजदीक आकर सेल्फी लेना जान्हवी कपूर को पसंद नहीं आया और उन्होंने बॉडीगार्ड को इशारा कर तुरंत उसे अलग करवा दिया। पेड्डी ट्रेलर लॉन्च इवेंट से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जान्हवी कपूर मंच पर हैं। तभी एक फैन उनके काफी करीब आया और सेल्फी लेने लगा। उसके आते ही जान्हवी कपूर ने पास खड़े बॉडीगार्ड को एक नजर देख इशारा किया, जिसके ठीक बाद गार्ड ने उस शख्स का हाथ पकड़कर धक्का देकर मंच से नीचे उतार दिया। वीडियो सामने आने के बाद कई लोग जान्हवी की आलोचना कर रहे हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, मुझे समझ नहीं आता कि इन लोगों को इतना अटेंशन क्यों देते हैं। ये लोग भूल जाते हैं कि ये लोग पब्लिक की वजह से ही हैं और हमारे बिना कुछ नहीं हैं। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है, इसलिए इनकी मूवी नहीं चलती है। जिनकी वजह से इंडस्ट्री हैं, उनकी ही रिस्पेक्ट नहीं करते। नेपोकिड्स हैं, तो मूवी मिल रही है और दिखाना करना अच्छा होने का। बाकी असल में इनके पास कुछ नहीं है। गोविंदा के गार्ड की पैपराजी से हुई बहस हाल ही में गोविंदा एक इवेंट का हिस्सा बने, जहां उनके बॉडीगार्ड्स और पैपराजी के बीच बहस हो गई। दरअसल, इवेंट खत्म होने के बाद जैसे ही गोविंदा बाहर की तरफ निकले, तभी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान पैपराजी भी उन्हें क्लिक कर रहे थे। तभी गोविंदा के बाउंसर ने उनके निकलने का रास्ता बनाते हुए लोगों को पीछे की तरफ धक्का दिया। धक्का लगते ही वहां मौजूद पैपराजी भड़क गए और बहस शुरू कर दी। हंगामा होने के बाद गोविंदा ने खुद बीच-बचाव कर मामले को संभाला। बता दें कि फिल्म पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था। दो बार पोस्टपोन हुई जान्हवी कपूर- रामचरण की पेड्डी फिल्म पेड्डी शुरुआत में 27 मार्च को रामचरण के बर्थडे पर रिलीज की जाने वाली थी, हालांकि बाद में इसे पोस्टपोन कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को धुरंधर 2 और टॉक्सिक से क्लैश से बचाने के लिए पोस्टपोन किया गया था, हालांकि मेकर्स ने पोस्टपोन का कारण फिल्म के कुछ हिस्से कंप्लीट न होना बताया। पहले 30 अप्रैल 2026 के बाद इसे 25 जून के लिए शेड्यूल किया गया, जिसके बाद प्री-पोन कर इसे 4 जून को रिलीज किया जा रहा है।
जान्हवी कपूर ने किया बॉडीगार्ड को इशारा:तुरंत सेल्फी ले रहे फैन पर लिया गया एक्शन, गोविंदा के गार्ड्स की भी पैपराजी से हुई झड़प

सोमवार को अपकमिंग फिल्म पेड्डी का ट्रेलर लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था। मुंबई के बीकेसी में हुए इस इवेंट में जान्हवी कपूर और रामचरण समेत फिल्म की स्टारकास्ट पहुंची थी। इस दौरान एक फैन का नजदीक आकर सेल्फी लेना जान्हवी कपूर को पसंद नहीं आया और उन्होंने बॉडीगार्ड को इशारा कर तुरंत उसे अलग करवा दिया। पेड्डी ट्रेलर लॉन्च इवेंट से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जान्हवी कपूर मंच पर हैं। तभी एक फैन उनके काफी करीब आया और सेल्फी लेने लगा। उसके आते ही जान्हवी कपूर ने पास खड़े बॉडीगार्ड को एक नजर देख इशारा किया, जिसके ठीक बाद गार्ड ने उस शख्स का हाथ पकड़कर धक्का देकर मंच से नीचे उतार दिया। वीडियो सामने आने के बाद कई लोग जान्हवी की आलोचना कर रहे हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, मुझे समझ नहीं आता कि इन लोगों को इतना अटेंशन क्यों देते हैं। ये लोग भूल जाते हैं कि ये लोग पब्लिक की वजह से ही हैं और हमारे बिना कुछ नहीं हैं। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है, इसलिए इनकी मूवी नहीं चलती है। जिनकी वजह से इंडस्ट्री हैं, उनकी ही रिस्पेक्ट नहीं करते। नेपोकिड्स हैं, तो मूवी मिल रही है और दिखाना करना अच्छा होने का। बाकी असल में इनके पास कुछ नहीं है। गोविंदा के गार्ड की पैपराजी से हुई बहस हाल ही में गोविंदा एक इवेंट का हिस्सा बने, जहां उनके बॉडीगार्ड्स और पैपराजी के बीच बहस हो गई। दरअसल, इवेंट खत्म होने के बाद जैसे ही गोविंदा बाहर की तरफ निकले, तभी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान पैपराजी भी उन्हें क्लिक कर रहे थे। तभी गोविंदा के बाउंसर ने उनके निकलने का रास्ता बनाते हुए लोगों को पीछे की तरफ धक्का दिया। धक्का लगते ही वहां मौजूद पैपराजी भड़क गए और बहस शुरू कर दी। हंगामा होने के बाद गोविंदा ने खुद बीच-बचाव कर मामले को संभाला। बता दें कि फिल्म पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था। दो बार पोस्टपोन हुई जान्हवी कपूर- रामचरण की पेड्डी फिल्म पेड्डी शुरुआत में 27 मार्च को रामचरण के बर्थडे पर रिलीज की जाने वाली थी, हालांकि बाद में इसे पोस्टपोन कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को धुरंधर 2 और टॉक्सिक से क्लैश से बचाने के लिए पोस्टपोन किया गया था, हालांकि मेकर्स ने पोस्टपोन का कारण फिल्म के कुछ हिस्से कंप्लीट न होना बताया। पहले 30 अप्रैल 2026 के बाद इसे 25 जून के लिए शेड्यूल किया गया, जिसके बाद प्री-पोन कर इसे 4 जून को रिलीज किया जा रहा है।
आटा और मैदा में क्या अंतर है? मैदा को क्यों माना जाता है नुकसानदायक, एक्सपर्ट ने बताई असली वजह

Last Updated:May 19, 2026, 08:44 IST Atta vs Maida Difference: आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं. गेहूं को पीसकर आटा बनाया जाता है, जबकि मैदा प्रोसेस्ड प्रोडक्ट है. मैदा बनाने की प्रक्रिया में फाइबर और कई पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इस वजह से मैदा को सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता है. ज्यादा मैदा खाने से पाचन, वजन और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनाए जाते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अलग होती है. Atta or Maida Which is Better: गेहूं को पीसकर आटा बनाया जाता है और सदियों से इससे रोटी और पराठे बनाए जा रहे हैं. गेहूं से बना आटा सेहत के लिए फायदेमंद होता है. आजकल आटे के बजाय ज्यादातर चीजें मैदा से बनाई जा रही हैं. पिज्जा, बर्गर, केक, बिस्किट और समोसे जैसी चीजों में मैदा का इस्तेमाल ज्यादा होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मैदा को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. कई लोग तो मैदा को सफेद जहर तक बताते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों में बड़ा अंतर होता है. यह अंतर आटा और मैदा बनाने की प्रक्रिया में आ जाता है. एक्सपर्ट से यह जानने की कोशिश करते हैं कि आटे और मैदा में से कौन सी चीज सेहत के लिए ज्यादा बेहतर है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया आटा साबुत गेहूं को पीसकर बनाया जाता है. मैदा बनाने के लिए गेहूं के छिलके और अंकुर को पूरी तरह से हटा दिया जाता है. इसके बाद बचे हुए हिस्से को बारीक पीसकर ब्लीच किया जाता है, जिससे मैदा का रंग सफेद हो जाता है. यही प्रक्रिया दोनों चीजों में बड़ा अंतर पैदा करती है. आटे में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. मैदा बनाने के दौरान अधिकांश फाइबर और पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. इसमें सिर्फ स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट ही बचते हैं. यही वजह है कि आटे को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, जबकि मैदा को नुकसानदायक माना जाता है. मैदा का सेवन कई बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है. मैदा को नुकसानदायक क्यों माना जाता है? एक्सपर्ट के मुताबिक मैदा में फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है. यही वजह है कि इसे खाने के बाद पेट जल्दी भरता नहीं और भूख जल्दी लग सकती है. मैदा जल्दी पचती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. बार-बार ज्यादा मात्रा में मैदा से बनी चीजें खाने से वजन बढ़ने, मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. यही कारण है कि इसे कम से कम खाना चाहिए. मैदा में फाइबर कम होने की वजह से यह पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. कुछ लोगों को ज्यादा मैदा खाने के बाद कब्ज, गैस या पेट भारी होने जैसी समस्या महसूस हो सकती है. दूसरी तरफ आटे में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर रखने और पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराने में मदद करता है. इसलिए मैदा के बजाय आटे का सेवन करना चाहिए. क्या मैदा में पोषण बिल्कुल नहीं होता? मैदा में कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और एनर्जी जरूर होती है, लेकिन इसमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व काफी कम हो जाते हैं. यही वजह है कि इसे रिफाइंड फ्लोर कहा जाता है. कई देशों में मैदा में कुछ विटामिन और आयरन बाद में मिलाए जाते हैं, लेकिन फिर भी इसे साबुत आटे जितना पौष्टिक नहीं माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लगातार ज्यादा मैदा खाने से भविष्य में लाइफस्टाइल डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. आजकल फास्ट फूड और बेकरी आइटम्स की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से बच्चे और युवा ज्यादा मात्रा में मैदा का सेवन कर रहे हैं. कई पैकेज्ड फूड्स में भी मैदा का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी जानकारी लोगों को नहीं होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
पेट्रोल-डीजल 90 पैसे महंगा, 5 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी:छिंदवाड़ा में बिक्री की लिमिट तय; उज्जैन में कथावाचक ने दिलाई ईंधन बचाने की शपथ

देश में पेट्रोल और डीजल आज मंगलवार से 90 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। अब भोपाल में एक लीटर पेट्रोल 110.75 रुपए और डीजल 95.91 रुपए का हो गया है। इंदौर-जबलपुर में प्रति लीटर पेट्रोल के नए रेट 110.79 रुपए, ग्वालियर में 110.69 रुपए और उज्जैन में 111.27 रुपए हो गए हैं। वहीं, उज्जैन में डीजल 96.40 रुपए में मिलेगा। यह भोपाल में 95.91 रुपए, इंदौर में 95.97 रुपए, जबलपुर में 95.98 रुपए और ग्वालियर में 95.86 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा। छिंदवाड़ा में किल्लत को देखते हुए पेट्रोल-डीजल बेचने की लिमिट तय कर दी गई है। वहीं, उज्जैन में ईंधन बचाने और सोना न खरीदने की शपथ दिलाई गई। छिंदवाड़ा में पेट्रोल-डीजल बिक्री पर लिमिट तय छिंदवाड़ा में पेट्रोल-डीजल बेचने की लिमिट तय कर दी गई है। यहां पंपों से दोपहिया को 200 रुपए और छोटी कारों को 500 रुपए से ज्यादा का पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है। वहीं, बड़ी गाड़ियों में अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है। तेल कंपनियों ने डीलर्स को मौखिक निर्देश जारी कर तय सीमा से अधिक ईंधन बेचने पर रोक लगा दी है। पेट्रोल पंप के स्टॉक और बिक्री की कंपनियों द्वारा सीधे ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित लिमिट से ज्यादा पेट्रोल या डीजल बेचा गया, तो संबंधित रिफ्यूलिंग मशीन को तुरंत लॉक कर दिया जाएगा। कंपनियों की ओर से नया टैंकर तभी भेजा जा रहा है, जब पंप का पुराना स्टॉक पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर हो। कई पंपों पर गाड़ियों की टैंक क्षमता का केवल 25 प्रतिशत ईंधन ही उपलब्ध कराया जा रहा है। उज्जैन में कथा के दौरान पेट्रोल-डीजल बचाने की शपथ उज्जैन में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक ने श्रद्धालुओं को पेट्रोल-डीजल का कम उपयोग करने और एक साल तक सोना नहीं खरीदने की शपथ दिलाई। संत लीलाशाह कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में महाराष्ट्र के अमरावती से पहुंचे राष्ट्रीय संत डॉ. संतोष महाराज ने कहा- सप्ताह या महीने में कम से कम एक दिन पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों का उपयोग न करें। इसके बजाय ई-स्कूटर, ई-रिक्शा और साइकिल का ज्यादा इस्तेमाल करें, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अब अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे। ये अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। उन्होंने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हैं- 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है। 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है। 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देश भर में सभी राज्यों के लिए समान होती है। 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है। 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं इसीलिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर और सागर जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती हैं। तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा कि कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था- आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे। ये खबर भी पढ़ें… MP में सांची दूध 2 रुपए प्रति लीटर महंगा अमूल और मदर डेयरी के बाद मध्य प्रदेश में अब सांची दुग्ध संघ ने भी दूध की कीमत 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी है। नए रेट 15 मई से लागू हो गए हैं। इससे पहले सांची ने पिछले साल 7 मई को रेट बढ़ाए थे। भोपाल में पैक्ड दूध में सांची की सबसे ज्यादा खपत होती है। रोज करीब
रिजेक्शन, प्यार और संघर्ष: अंशुमन‑महवश ने सुनाई दिल छूती कहानी:छोटे शहरों से निकले दोनों बोले- सफलता के पीछे दर्द और अधूरा इश्क

अंशुमन पुष्कर और महवश जल्द ही वेब सीरीज ‘सतरंगी बदला का खेल’ में नजर आने वाले हैं। छोटे शहरों से निकलकर अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर पहचान बनाने वाले दोनों कलाकारों ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इंटरव्यू में उन्होंने अपने संघर्ष, रिजेक्शन, प्यार, छोटे शहरों की सोच और एक्टिंग के सफर पर खुलकर बात की। अंशुमन ने बताया कि कैसे कुछ किरदार उन्हें अंदर तक प्रभावित कर जाते हैं, वहीं महवश ने अपने पहले प्यार और परिवार से लड़कर करियर बनाने के अनुभव साझा किए। दोनों ने यह भी बताया कि सफलता के पीछे कितनी मेहनत, दर्द और भावनात्मक संघर्ष छिपे होते हैं। सवाल: ‘सतरंगी बदला का खेल’ में बबलू के किरदार से आप खुद को कितना जोड़ पाते हैं? जवाब/अंशुमन: मैं दोनों चीजों से जुड़ पाता हूं। एक तरफ बबलू का टूटा हुआ इमोशनल पक्ष है और दूसरी तरफ उसके अंदर बदले की भावना। लेकिन अगर एक चीज चुननी हो, तो मैं उसके दर्द और उन वजहों से ज्यादा जुड़ता हूं, जिनकी वजह से उसके अंदर बदले की भावना पैदा होती है। समाज में उसके साथ जो भेदभाव और अन्याय होता है, वही उसकी सबसे बड़ी तकलीफ है। सवाल: लाली और बबलू में कौन-सा किरदार आपके ज्यादा करीब है? जवाब/अंशुमन: दोनों किरदार मेरे बहुत करीब हैं। बचपन से मुझे परफॉर्म करना पसंद था। शादियों में डांस करना और स्टेज पर जाना अच्छा लगता था, लेकिन उस माहौल में इसे ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता था। इसलिए लाली के किरदार से मैं जुड़ता हूं। वहीं, बबलू की तरह मेरे अंदर भी बचपन से कुछ बड़ा और अच्छा करने की चाह थी। उसके लिए मेहनत करने और हर हद तक जाने का जज्बा था। इसलिए बबलू से भी बहुत जुड़ाव महसूस होता है। सवाल: महवश, आप अपने किरदार आरती से कितना रिलेट करती हैं? जवाब/महवश: मैं आरती के किरदार से काफी जुड़ती हूं। वह अपने लोगों के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और मैं भी ऐसी ही हूं। मुझे सही और गलत बहुत साफ दिखाई देता है। कॉलेज के समय मैं यूनिवर्सिटी चुनाव में भी खड़ी हुई थी। अगर समाज में कुछ गलत दिखता है, तो मैं उसके खिलाफ बोलती हूं। यही बात आरती में भी है। सवाल: क्या आपको अपना पहला प्यार आज भी याद है? जवाब/महवश: पहला प्यार हमेशा याद रहता है। मैं अपनी स्कूटी लेकर उसके कोचिंग सेंटर के बाहर खड़ी हो जाती थी, सिर्फ उसे देखने के लिए। सर्दियों में सुबह जल्दी उठकर उसकी स्कूल बस देखने का इंतजार करती थी। वह एहसास बहुत खास था। सवाल: अंशुमन, आपने कभी किसी से इंतिहा वाला इश्क किया है? जवाब/अंशुमन: मैं हमेशा बहुत फिल्मी रहा हूं। स्कूल के दिनों में भी मुझे लगता था कि यही प्यार है। लेकिन सच कहूं तो जिन लड़कियों को पसंद करता था, उनसे कभी ठीक से बात तक नहीं कर पाया। बस दूर से ही खुश रहता था। लेकिन जब सच में प्यार होता है, तब उसकी गहराई समझ में आती है। वह एहसास बहुत इंटेंस होता है। सवाल: छोटे शहर से मुंबई आने के बाद क्या सबसे ज्यादा बदला? जवाब/महवश: मैं बहुत मासूम थी, लेकिन इस शहर में आकर अपने इमोशन्स छुपाने पड़ते हैं। यहां बहुत कॉम्पिटिशन है। डर रहता है कि कोई आपकी अच्छाई का फायदा न उठा ले। इसलिए खुद को मजबूत बनाना पड़ता है। मुझे आज भी वह मासूमियत याद आती है। सवाल: क्या आज के समय में प्यार पहले जैसा नहीं रहा? जवाब/अंशुमन: आज सब कुछ बहुत जल्दी होने लगा है। पहले लोग प्यार को महसूस करते थे, उसके लिए इंतजार करते थे। अब रिश्तों में गहराई कम होती जा रही है। मुझे लगता है कि असली प्यार में समझदारी से ज्यादा दिल की जरूरत होती है। टूटे हुए दिल से ही अच्छी शायरी, संगीत और कहानियां निकलती हैं। सवाल: जिंदगी का कोई ऐसा अपमान या संघर्ष, जो आज भी याद हो? जवाब/महवश: एक बार स्कूल टूर पर जाना था और बहुत बारिश हो रही थी। हमारे पास गाड़ी नहीं थी। मैंने पापा से कहा कि पड़ोसी से गाड़ी मांग लीजिए। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाद में पापा मुझे बारिश में साइकिल से छोड़ने गए। उस दिन मैंने सोचा था कि एक दिन मैं अपने पापा को उनकी पसंद की गाड़ी जरूर दिलाऊंगी। जब मैंने अपनी पहली कार खरीदी, तब वही पल याद आया। सवाल: एक्टिंग की दुनिया में रिजेक्शन का सामना कैसे किया? जवाब/अंशुमन: ऑडिशन में कई बार बिना वजह ‘नॉट फिट’ कहकर रिजेक्ट कर दिया जाता था। शुरुआत में बुरा लगता था, लेकिन मैंने कभी किसी के लिए मन में कड़वाहट नहीं रखी। अगर कोई कहता था कि मैं खराब एक्टर हूं, तो मैं सोचता था कि शायद अभी मुझे और मेहनत करनी है। वही बातें मुझे बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती रहीं। सवाल: महवश, आपके संघर्ष की शुरुआत कहां से हुई? जवाब/महवश: हमारे यहां लड़कियों की लड़ाई बहुत जल्दी शुरू हो जाती है। पहले घरवालों को मनाना पड़ता है कि बाहर जाकर पढ़ाई करनी है। फिर शादी का दबाव होता है। मेरी भी कम उम्र में सगाई हो गई थी, जो बाद में टूट गई। अगर मैं वापस लौट जाती, तो शायद मेरी जिंदगी बिल्कुल अलग होती। इसलिए इस शहर में आने के बाद मेरे पास सिर्फ एक ही रास्ता था- कुछ करके दिखाना। सवाल: ‘12th Fail’ के बाद जिंदगी में कितना बदलाव आया? जवाब/अंशुमन: बहुत बड़ा बदलाव तो नहीं आया, लेकिन लोगों का भरोसा बढ़ा है। ‘12th Fail’ जैसी सफल फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत खास रहा। हर प्रोजेक्ट आपको थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ाता है। मुझे लगता है कि अभी सफर जारी है और बहुत कुछ करना बाकी है। सवाल: सबसे खास कॉम्प्लिमेंट कौन-सा मिला? जवाब/अंशुमन: ‘ग्रहण’ देखने के बाद मेरे थिएटर के सीनियर्स ने कहा था कि उन्हें नहीं पता था कि मैं किसी किरदार से इतने गहरे इमोशनली जुड़ सकता हूं। वह मेरे लिए बहुत खास था। महवश: हाल ही में डायरेक्टर जय सिंह का फोन आया। उन्होंने कहा कि एक सीन में मेरा रिएक्शन देखकर उन्हें गूजबंप्स आ गए। वह कॉम्प्लिमेंट हमेशा याद रहेगा।
रिजेक्शन, प्यार और संघर्ष: अंशुमन‑महवश ने सुनाई दिल छूती कहानी:छोटे शहरों से निकले दोनों बोले- सफलता के पीछे दर्द और अधूरा इश्क

अंशुमन पुष्कर और महवश जल्द ही वेब सीरीज ‘सतरंगी बदला का खेल’ में नजर आने वाले हैं। छोटे शहरों से निकलकर अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर पहचान बनाने वाले दोनों कलाकारों ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इंटरव्यू में उन्होंने अपने संघर्ष, रिजेक्शन, प्यार, छोटे शहरों की सोच और एक्टिंग के सफर पर खुलकर बात की। अंशुमन ने बताया कि कैसे कुछ किरदार उन्हें अंदर तक प्रभावित कर जाते हैं, वहीं महवश ने अपने पहले प्यार और परिवार से लड़कर करियर बनाने के अनुभव साझा किए। दोनों ने यह भी बताया कि सफलता के पीछे कितनी मेहनत, दर्द और भावनात्मक संघर्ष छिपे होते हैं। सवाल: ‘सतरंगी बदला का खेल’ में बबलू के किरदार से आप खुद को कितना जोड़ पाते हैं? जवाब/अंशुमन: मैं दोनों चीजों से जुड़ पाता हूं। एक तरफ बबलू का टूटा हुआ इमोशनल पक्ष है और दूसरी तरफ उसके अंदर बदले की भावना। लेकिन अगर एक चीज चुननी हो, तो मैं उसके दर्द और उन वजहों से ज्यादा जुड़ता हूं, जिनकी वजह से उसके अंदर बदले की भावना पैदा होती है। समाज में उसके साथ जो भेदभाव और अन्याय होता है, वही उसकी सबसे बड़ी तकलीफ है। सवाल: लाली और बबलू में कौन-सा किरदार आपके ज्यादा करीब है? जवाब/अंशुमन: दोनों किरदार मेरे बहुत करीब हैं। बचपन से मुझे परफॉर्म करना पसंद था। शादियों में डांस करना और स्टेज पर जाना अच्छा लगता था, लेकिन उस माहौल में इसे ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता था। इसलिए लाली के किरदार से मैं जुड़ता हूं। वहीं, बबलू की तरह मेरे अंदर भी बचपन से कुछ बड़ा और अच्छा करने की चाह थी। उसके लिए मेहनत करने और हर हद तक जाने का जज्बा था। इसलिए बबलू से भी बहुत जुड़ाव महसूस होता है। सवाल: महवश, आप अपने किरदार आरती से कितना रिलेट करती हैं? जवाब/महवश: मैं आरती के किरदार से काफी जुड़ती हूं। वह अपने लोगों के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और मैं भी ऐसी ही हूं। मुझे सही और गलत बहुत साफ दिखाई देता है। कॉलेज के समय मैं यूनिवर्सिटी चुनाव में भी खड़ी हुई थी। अगर समाज में कुछ गलत दिखता है, तो मैं उसके खिलाफ बोलती हूं। यही बात आरती में भी है। सवाल: क्या आपको अपना पहला प्यार आज भी याद है? जवाब/महवश: पहला प्यार हमेशा याद रहता है। मैं अपनी स्कूटी लेकर उसके कोचिंग सेंटर के बाहर खड़ी हो जाती थी, सिर्फ उसे देखने के लिए। सर्दियों में सुबह जल्दी उठकर उसकी स्कूल बस देखने का इंतजार करती थी। वह एहसास बहुत खास था। सवाल: अंशुमन, आपने कभी किसी से इंतिहा वाला इश्क किया है? जवाब/अंशुमन: मैं हमेशा बहुत फिल्मी रहा हूं। स्कूल के दिनों में भी मुझे लगता था कि यही प्यार है। लेकिन सच कहूं तो जिन लड़कियों को पसंद करता था, उनसे कभी ठीक से बात तक नहीं कर पाया। बस दूर से ही खुश रहता था। लेकिन जब सच में प्यार होता है, तब उसकी गहराई समझ में आती है। वह एहसास बहुत इंटेंस होता है। सवाल: छोटे शहर से मुंबई आने के बाद क्या सबसे ज्यादा बदला? जवाब/महवश: मैं बहुत मासूम थी, लेकिन इस शहर में आकर अपने इमोशन्स छुपाने पड़ते हैं। यहां बहुत कॉम्पिटिशन है। डर रहता है कि कोई आपकी अच्छाई का फायदा न उठा ले। इसलिए खुद को मजबूत बनाना पड़ता है। मुझे आज भी वह मासूमियत याद आती है। सवाल: क्या आज के समय में प्यार पहले जैसा नहीं रहा? जवाब/अंशुमन: आज सब कुछ बहुत जल्दी होने लगा है। पहले लोग प्यार को महसूस करते थे, उसके लिए इंतजार करते थे। अब रिश्तों में गहराई कम होती जा रही है। मुझे लगता है कि असली प्यार में समझदारी से ज्यादा दिल की जरूरत होती है। टूटे हुए दिल से ही अच्छी शायरी, संगीत और कहानियां निकलती हैं। सवाल: जिंदगी का कोई ऐसा अपमान या संघर्ष, जो आज भी याद हो? जवाब/महवश: एक बार स्कूल टूर पर जाना था और बहुत बारिश हो रही थी। हमारे पास गाड़ी नहीं थी। मैंने पापा से कहा कि पड़ोसी से गाड़ी मांग लीजिए। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाद में पापा मुझे बारिश में साइकिल से छोड़ने गए। उस दिन मैंने सोचा था कि एक दिन मैं अपने पापा को उनकी पसंद की गाड़ी जरूर दिलाऊंगी। जब मैंने अपनी पहली कार खरीदी, तब वही पल याद आया। सवाल: एक्टिंग की दुनिया में रिजेक्शन का सामना कैसे किया? जवाब/अंशुमन: ऑडिशन में कई बार बिना वजह ‘नॉट फिट’ कहकर रिजेक्ट कर दिया जाता था। शुरुआत में बुरा लगता था, लेकिन मैंने कभी किसी के लिए मन में कड़वाहट नहीं रखी। अगर कोई कहता था कि मैं खराब एक्टर हूं, तो मैं सोचता था कि शायद अभी मुझे और मेहनत करनी है। वही बातें मुझे बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती रहीं। सवाल: महवश, आपके संघर्ष की शुरुआत कहां से हुई? जवाब/महवश: हमारे यहां लड़कियों की लड़ाई बहुत जल्दी शुरू हो जाती है। पहले घरवालों को मनाना पड़ता है कि बाहर जाकर पढ़ाई करनी है। फिर शादी का दबाव होता है। मेरी भी कम उम्र में सगाई हो गई थी, जो बाद में टूट गई। अगर मैं वापस लौट जाती, तो शायद मेरी जिंदगी बिल्कुल अलग होती। इसलिए इस शहर में आने के बाद मेरे पास सिर्फ एक ही रास्ता था- कुछ करके दिखाना। सवाल: ‘12th Fail’ के बाद जिंदगी में कितना बदलाव आया? जवाब/अंशुमन: बहुत बड़ा बदलाव तो नहीं आया, लेकिन लोगों का भरोसा बढ़ा है। ‘12th Fail’ जैसी सफल फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत खास रहा। हर प्रोजेक्ट आपको थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ाता है। मुझे लगता है कि अभी सफर जारी है और बहुत कुछ करना बाकी है। सवाल: सबसे खास कॉम्प्लिमेंट कौन-सा मिला? जवाब/अंशुमन: ‘ग्रहण’ देखने के बाद मेरे थिएटर के सीनियर्स ने कहा था कि उन्हें नहीं पता था कि मैं किसी किरदार से इतने गहरे इमोशनली जुड़ सकता हूं। वह मेरे लिए बहुत खास था। महवश: हाल ही में डायरेक्टर जय सिंह का फोन आया। उन्होंने कहा कि एक सीन में मेरा रिएक्शन देखकर उन्हें गूजबंप्स आ गए। वह कॉम्प्लिमेंट हमेशा याद रहेगा।
दावा- इमरान खान का तख्तापलट अमेरिकी साजिश थी:पाकिस्तानी सेना ने साथ दिया; अमेरिका ने कहा था- इमरान हटे तो सब माफ हो जाएगा

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार गिरने को लेकर नया दावा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान की कुर्सी सिर्फ अविश्वास प्रस्ताव से नहीं गई थी। इसके पीछे अमेरिकी साजिश और पाक सेना की भूमिका थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान ने 24 फरवरी 2022 को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। ठीक उसी दिन रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। अमेरिका इस यात्रा से नाराज था। वह चाहता था कि पाकिस्तान यूक्रेन युद्ध पर रूस की खुलकर आलोचना करे, लेकिन इमरान सरकार ने तटस्थ रुख अपनाया। इसके बाद 7 मार्च 2022 को वॉशिंगटन में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू के बीच बातचीत हुई। लू ने मजीद से कहा कि अगर इमरान अविश्वास प्रस्ताव में हट जाते हैं तो अमेरिका ‘सब माफ’ कर देगा। इसके 33 दिन बाद यानी 9 अप्रैल 2022 को इमरान सरकार गिर गई। वॉशिंगटन में लंच टेबल पर दिया गया था इमरान को हटाने का दबाव वॉशिंगटन के एक होटल में लू ने मजीद को लंच टेबल पर इमरान को हटाने का दबाव दिया था। लू ने यूक्रेन युद्ध पर पाक रुख पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पाक रूस की आलोचना नहीं कर रहा है और अमेरिका-यूरोप को यह स्वीकार नहीं है। लू ने कहा, इमरान की रूस यात्रा से अमेरिका नाराज है। बात अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंची। लू ने संकेत दिया कि इमरान सत्ता में रहे तो पाक अकेला पड़ जाएगा। मजीद ने पत्र में लिखा कि यह संदेश वाइट हाउस की मंजूरी के बिना संभव नहीं था। इमरान के हटने के बाद पाकिस्तान की राजनीति कैसे बदली अप्रैल 2022: इमरान के हटने के अगले दिन शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बने। नवंबर 2022: सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा रिटायर हुए। उनकी जगह आसिम मुनीर नए आर्मी चीफ बने। इमरान ने आरोप लगाया था कि यह नियुक्ति नवाज शरीफ से सलाह के बाद हुई। 9 मई 2023: भ्रष्टाचार मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट परिसर से इमरान गिरफ्तार हुए। इसके बाद पाकिस्तान में हिंसा भड़क गई। अक्टूबर 2023: नवाज शरीफ पाकिस्तान लौटे। उनके खिलाफ कई मामलों में राहत मिली। 2024 चुनाव: दिसंबर 2023 में PTI का चुनाव चिन्ह बैट छीन लिया गया। उम्मीदवारों को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा। PTI समर्थित उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं। इसके बावजूद PML-N और PPP ने गठबंधन सरकार बना ली। 2025 में मुनीर की ताकत और बढ़ी: रिपोर्ट के मुताबिक, संवैधानिक बदलावों के बाद आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया गया। इससे सेना, रक्षा ढांचे और पाकिस्तान की परमाणु कमान पर उनकी पकड़ मजबूत हुई। इमरान के बाद अमेरिका-पाक रिश्तों में नजदीकी इमरान के सत्ता से जाने के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में गर्माहट आई। दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक और कारोबारी समझौतों तक पहुंच गए। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया, जिसका इमरान सरकार ने विरोध किया था। पाकिस्तान में क्रिप्टो काउंसिल बनी। ट्रम्प परिवार की कंपनी LF के साथ 36 अरब डॉलर की रेमिटेंस पाइपलाइन से जुड़ा समझौता हुआ। 500 मिलियन डॉलर के दुर्लभ खनिज समझौते भी हुए। गाजा फोर्स के लिए सैनिक भेजने की पेशकश भी की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की खुलकर तारीफ की। इमरान ने पहले ही विदेशी साजिश का आरोप लगाया था इमरान खान ने सरकार गिरने के समय भी विदेशी साजिश का आरोप लगाया था। मार्च 2022 में एक रैली में उन्होंने एक कागज लहराते हुए दावा किया था कि उनकी सरकार गिराने की साजिश रची गई है। बाद में यही मामला साइफर केस बना। अब इस रिपोर्ट के बाद इमरान की पार्टी PTI ने कहा है कि साइफर वास्तविक था। पार्टी महासचिव सलमान अकरम राजा ने कहा, “अब साबित हो गया कि साइफर सच था।” इमरान खान पर अब तक 188 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वह अगस्त 2023 से जेल में हैं। अल-कादिर ट्रस्ट केस में उन्हें 14 साल की सजा सुनाई गई है। साइफर केस में जनवरी 2024 में इमरान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी। बाद में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने यह सजा रद्द कर दी थी।
दावा- इमरान खान का तख्तापलट अमेरिकी साजिश थी:पाकिस्तानी सेना ने साथ दिया; अमेरिका ने कहा था- इमरान हटे तो सब माफ हो जाएगा

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार गिरने को लेकर नया दावा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान की कुर्सी सिर्फ अविश्वास प्रस्ताव से नहीं गई थी। इसके पीछे अमेरिकी साजिश और पाक सेना की भूमिका थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान ने 24 फरवरी 2022 को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। ठीक उसी दिन रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। अमेरिका इस यात्रा से नाराज था। वह चाहता था कि पाकिस्तान यूक्रेन युद्ध पर रूस की खुलकर आलोचना करे, लेकिन इमरान सरकार ने तटस्थ रुख अपनाया। इसके बाद 7 मार्च 2022 को वॉशिंगटन में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू के बीच बातचीत हुई। लू ने मजीद से कहा कि अगर इमरान अविश्वास प्रस्ताव में हट जाते हैं तो अमेरिका ‘सब माफ’ कर देगा। इसके 33 दिन बाद यानी 9 अप्रैल 2022 को इमरान सरकार गिर गई। वॉशिंगटन में लंच टेबल पर दिया गया था इमरान को हटाने का दबाव वॉशिंगटन के एक होटल में लू ने मजीद को लंच टेबल पर इमरान को हटाने का दबाव दिया था। लू ने यूक्रेन युद्ध पर पाक रुख पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पाक रूस की आलोचना नहीं कर रहा है और अमेरिका-यूरोप को यह स्वीकार नहीं है। लू ने कहा, इमरान की रूस यात्रा से अमेरिका नाराज है। बात अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंची। लू ने संकेत दिया कि इमरान सत्ता में रहे तो पाक अकेला पड़ जाएगा। मजीद ने पत्र में लिखा कि यह संदेश वाइट हाउस की मंजूरी के बिना संभव नहीं था। इमरान के हटने के बाद पाकिस्तान की राजनीति कैसे बदली अप्रैल 2022: इमरान के हटने के अगले दिन शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बने। नवंबर 2022: सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा रिटायर हुए। उनकी जगह आसिम मुनीर नए आर्मी चीफ बने। इमरान ने आरोप लगाया था कि यह नियुक्ति नवाज शरीफ से सलाह के बाद हुई। 9 मई 2023: भ्रष्टाचार मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट परिसर से इमरान गिरफ्तार हुए। इसके बाद पाकिस्तान में हिंसा भड़क गई। अक्टूबर 2023: नवाज शरीफ पाकिस्तान लौटे। उनके खिलाफ कई मामलों में राहत मिली। 2024 चुनाव: दिसंबर 2023 में PTI का चुनाव चिन्ह बैट छीन लिया गया। उम्मीदवारों को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा। PTI समर्थित उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं। इसके बावजूद PML-N और PPP ने गठबंधन सरकार बना ली। 2025 में मुनीर की ताकत और बढ़ी: रिपोर्ट के मुताबिक, संवैधानिक बदलावों के बाद आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया गया। इससे सेना, रक्षा ढांचे और पाकिस्तान की परमाणु कमान पर उनकी पकड़ मजबूत हुई। इमरान के बाद अमेरिका-पाक रिश्तों में नजदीकी इमरान के सत्ता से जाने के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में गर्माहट आई। दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक और कारोबारी समझौतों तक पहुंच गए। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया, जिसका इमरान सरकार ने विरोध किया था। पाकिस्तान में क्रिप्टो काउंसिल बनी। ट्रम्प परिवार की कंपनी LF के साथ 36 अरब डॉलर की रेमिटेंस पाइपलाइन से जुड़ा समझौता हुआ। 500 मिलियन डॉलर के दुर्लभ खनिज समझौते भी हुए। गाजा फोर्स के लिए सैनिक भेजने की पेशकश भी की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की खुलकर तारीफ की। इमरान ने पहले ही विदेशी साजिश का आरोप लगाया था इमरान खान ने सरकार गिरने के समय भी विदेशी साजिश का आरोप लगाया था। मार्च 2022 में एक रैली में उन्होंने एक कागज लहराते हुए दावा किया था कि उनकी सरकार गिराने की साजिश रची गई है। बाद में यही मामला साइफर केस बना। अब इस रिपोर्ट के बाद इमरान की पार्टी PTI ने कहा है कि साइफर वास्तविक था। पार्टी महासचिव सलमान अकरम राजा ने कहा, “अब साबित हो गया कि साइफर सच था।” इमरान खान पर अब तक 188 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वह अगस्त 2023 से जेल में हैं। अल-कादिर ट्रस्ट केस में उन्हें 14 साल की सजा सुनाई गई है। साइफर केस में जनवरी 2024 में इमरान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी। बाद में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने यह सजा रद्द कर दी थी। ———- ये खबर भी पढ़ें… कन्फर्म हुआ- इमरान की एक आंख की 85% रोशनी खत्म:कोर्ट के ऑर्डर पर हुई जांच, पूर्व PAK PM बोले- प्राइवेट इलाज की इजाजत नहीं पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की एक आंख की करीब 85% रोशनी चली गई है। यह खुलासा पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…
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