फ्लोर टेस्ट से पहले तमिलनाडु के सीएम सी जोसेफ विजय ने एआईएडीएमके के बागियों से मुलाकात की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 16:42 IST माना जाता है कि वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व में लगभग 30 विधायक विद्रोही खेमे में हैं। विधायकों के एक समूह ने पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी के खिलाफ विद्रोह कर दिया है, उन पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाया है और विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले अन्नाद्रमुक के उन बागियों से मुलाकात की जिन्होंने उनकी सरकार को समर्थन दिया है। विधायकों के एक समूह ने पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी के खिलाफ विद्रोह कर दिया है, उन पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाया है और विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। माना जाता है कि वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व में लगभग 30 विधायक विद्रोही खेमे में हैं, जिन्होंने 23 अप्रैल के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाया है, जहां उन्होंने 164 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 47 सीटें जीती थीं। सीवी षणमुगम खेमे के लगभग 30 एआईएडीएमके विधायकों ने प्रोटेम स्पीकर को एक याचिका सौंपकर एसपी वेलुमणि को विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की है, जबकि 17 विधायकों ने एक अलग पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी का समर्थन किया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने फ्लोर टेस्ट से पहले टीवीके सरकार का समर्थन करने वाले अन्नाद्रमुक विद्रोहियों से मुलाकात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु की राजनीति(टी)तमिलनाडु के मुख्यमंत्री(टी)सी जोसेफ विजय(टी)एआईएडीएमके विद्रोही(टी)फ्लोर टेस्ट विधानसभा(टी)एडप्पादी के पलानीस्वामी(टी)डीएमके गठबंधन(टी)एसपी वेलुमणि
सोनू निगम फैन से बोले-पिटने वाले काम क्यों करते हो:लाइव कॉन्सर्ट में फैन स्टेज पर चढ़ा; सोनू ने कहा- अगली बार नहीं बचा पाऊंगा

सिंगर सोनू निगम कोल्हापुर में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान अचानक एक फैन स्टेज पर चढ़ गया। वह स्टेज पर सिंगर के पैर छूने की कोशिश करने लगा। इस घटना से सोनू निगम काफी असहज नजर आए। उन्होंने अब सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए दर्शकों को सख्त चेतावनी दी है। कोल्हापुर में बीच शो में सुरक्षा चूक सोनू निगम पिछले हफ्ते कोल्हापुर में परफॉर्म कर रहे थे। वे अपने एक हिट गाने में मगन थे, तभी सफेद टी-शर्ट पहने एक युवक अचानक सिक्योरिटी घेरा तोड़कर स्टेज पर पहुंच गया। सोनू ने जैसे ही उसे अपनी तरफ आते देखा, वे गाना छोड़कर पीछे हट गए। फैन ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने की कोशिश की। इस वजह से शो को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। गुस्सा करने के बजाय फैन को थमाया माइक जब सिक्योरिटी टीम उस युवक को स्टेज से हटाने के लिए आई, तो सोनू ने उसे डांटने के बजाय शांत तरीके से हैंडल किया। उन्होंने उस फैन को अपना माइक थमा दिया और उसे गाने का मौका दिया। फैन ने ‘दबंग’ फिल्म का गाना ‘चोरी किया रे जिया’ की कुछ लाइनें गाईं। गाना खत्म करने के बाद उसने कहा, “कोल्हापुर लव्स यू।” हालांकि, सोनू निगम इस पूरी स्थिति से काफी परेशान और असहज दिखे। सोशल मीडिया पर दर्शकों को दी चेतावनी कंसर्ट के एक दिन बाद सोनू निगम ने इस घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा, “क्यों पिटने वाले काम करते हो ऑडियंस? इस बार तो बचा लिया, हर बार नहीं बचा पाऊंगा।” उन्होंने तंज कसते हुए वीडियो में फैन की हरकत पर “वाह, शाबाश!” भी कहा। लाइव शो में बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं कलाकारों के साथ लाइव शो के दौरान बदतमीजी या सुरक्षा में चूक की घटनाएं पिछले कुछ महीनों में बढ़ी हैं। हाल ही में दिल्ली में ‘धुरंधर’ सिंगर जैस्मीन सैंडलस के साथ भी एक फैन ने स्टेज पर गलत व्यवहार किया था। इसके अलावा आतिफ असलम और सुनंदा शर्मा जैसे मशहूर सिंगर्स को भी कंसर्ट के दौरान ऐसी ही स्थितियों का सामना करना पड़ा है।
‘वर्क फ्रॉम होम’ करते हुए आप भी तो नहीं बर्नआउट के शिकार? 10 लक्षण दिखे तो न करें इग्नोर, बन सकते हैं मानसिक बीमार

Work From Home Burnout Signs : लगातार वर्क फ्रॉम होम (WFH) ने हमारे काम करने के तरीके को बिल्कुल बदल दिया है. कोरोना महामारी के बाद घर से काम करने का ये तरीका काफी पॉपुलर हुआ, लेकिन इसके साथ ही ‘बर्नआउट’ जैसी नई चुनौती भी साथ में आ गई. आमतौर पर न्यू मॉम्स ऐसा काम पसंद करती हैं जिससे वे घर और बच्चों को भी संंभाल सकें और ऑफिस के काम से कुछ पैसे भी बना सकें. लेकिन 24 घंटे काम करने और दोनों हालातों को सही तरीके से मैनेज करते-करते मानसिक थकान और तनाव का बढ़ना स्वभाविक है. दौरान बर्नआउट तब होता है जब काम का तनाव आपकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है. अगर आप भी दिन भर काम करने के बाद चिड़चिड़ापन महसूस कर रहे हैं, तो यह महज थकान नहीं, बल्कि बर्नआउट का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इन लक्षणों को पहचानना और रिकवरी के उपाय अपनाना आपकी मानसिक सेहत के लिए अनिवार्य है. वर्क फ्रॉम होम बर्नआउट के 10 संकेत, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं- मायोक्लीनिक के अनुसार, रिमोट वर्क के दौरान बर्नआउट तब होता है जब काम का तनाव आपकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है. यहाँ वे 10 प्रमुख लक्षण हैं जिन पर आपको गौर करना चाहिए: हर समय थकान महसूस करना: नींद पूरी होने के बावजूद आप सुबह उठते ही थका हुआ महसूस करते हैं. एकाग्रता में कमी: छोटे-छोटे काम करने में भी सामान्य से अधिक समय लगना या बार-बार ध्यान भटकना. चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर सहकर्मियों या परिवार के सदस्यों पर गुस्सा आना. काम से अलगाव: अपनी उपलब्धियों में खुशी महसूस न होना और काम को सिर्फ एक बोझ समझना. नींद का पैटर्न बदलना: रात भर काम के बारे में सोचना या नींद न आने की समस्या (Insomnia). शारीरिक समस्याएं: बिना किसी बीमारी के सिरदर्द, पीठ दर्द या आंखों में खिंचाव महसूस होना. सोशल विड्रॉल: दोस्तों या परिवार से बात करने की इच्छा खत्म हो जाना. प्रोत्साहन की कमी: नए आइडियाज पर काम करने की इच्छा या रचनात्मकता का पूरी तरह खत्म हो जाना. डिजिटल एडिक्शन: काम खत्म होने के बाद भी बार-बार ईमेल या मैसेज चेक करते रहना. काम के घंटों का कोई अंत न होना: देर रात तक काम करना क्योंकि आपको लगता है कि काम कभी खत्म ही नहीं होगा. बर्नआउट से रिकवरी के तरीके:सीमाएं निर्धारित करें (Set Boundaries): काम शुरू करने और खत्म करने का एक निश्चित समय तय करें. लैपटॉप बंद होने का मतलब है कि अब आप ऑफिस के लिए उपलब्ध नहीं हैं.डेडिकेटेड वर्कस्पेस:बिस्तर या सोफे पर बैठकर काम करने के बजाय एक अलग डेस्क और कुर्सी का उपयोग करें. इससे दिमाग को ‘वर्क मोड’ और ‘रिलैक्स मोड’ के बीच अंतर समझने में मदद मिलती है.शेड्यूल ब्रेक:हर एक घंटे के काम के बाद 5-10 मिनट का ‘स्क्रीन फ्री’ ब्रेक लें. थोड़ा टहलें या पानी पिएं.डिजिटल डिटॉक्स:ऑफिस के बाद फोन को खुद से दूर रखें. अपनी हॉबी या परिवार को समय दें ताकि आपका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सके. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) प्रश्न 1: वर्क फ्रॉम होम (WFH) बर्नआउट सामान्य थकान से कैसे अलग है?उत्तर: सामान्य थकान आराम करने या एक अच्छी नींद के बाद ठीक हो जाती है. लेकिन बर्नआउट एक मानसिक और भावनात्मक स्थिति है जहाँ आप लगातार खालीपन, चिड़चिड़ापन और काम के प्रति अरुचि महसूस करते हैं, जो लंबी छुट्टी के बाद भी कम नहीं होती. प्रश्न 2: बर्नआउट के वे कौन से लक्षण हैं जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं?उत्तर: लोग अक्सर ‘डिजिटल फटीग’ (हर समय ईमेल चेक करना), अनिद्रा, काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने जैसे लक्षणों को सामान्य तनाव समझकर छोड़ देते हैं, जबकि ये बर्नआउट की शुरुआत हो सकते हैं. प्रश्न 3: क्या घर से काम करने पर मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा ज्यादा होता है?उत्तर: हाँ, क्योंकि घर और ऑफिस के बीच की सीमाएं खत्म हो जाती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ‘हमेशा उपलब्ध रहने’ (Always-on culture) का दबाव मानसिक तनाव और ‘मेंटल एग्जॉशन’ का मुख्य कारण बनता है. प्रश्न 4: बर्नआउट से बचने के लिए सबसे प्रभावी तरीका क्या है?उत्तर: सबसे जरूरी है ‘वर्क-लाइफ बाउंड्री’ तय करना. एक निश्चित वर्कस्पेस बनाना, काम के घंटों के बाद डिजिटल उपकरणों से दूरी (Digital Detox) बनाना और नियमित ब्रेक लेना इसमें बेहद मददगार साबित होता है. प्रश्न 5: क्या बर्नआउट से पूरी तरह रिकवर होना संभव है?उत्तर: बिल्कुल, समय पर लक्षणों की पहचान और अपनी जीवनशैली में बदलाव (जैसे हॉबी के लिए समय निकालना और फिजिकल एक्टिविटी) के जरिए बर्नआउट से रिकवर हुआ जा सकता है. गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना भी फायदेमंद होता है.
असम नई कैबिनेट: असम के कैबिनेट मंत्री बने रामातार तेली, मोदी से लेकर सीएम हिमंत तक…असम के कैबिनेट मंत्री ने कहा धन्यवाद

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के नवनिर्वाचित राम राम तेली ने मंगलवार को असम के मंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण कार्यक्रम से पहले उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा की सदस्यता ली। उनका ये बयान तब सामने आया, जब नए असम साबका में शामिल होने के लिए उनके नाम की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि वह समाज के सभी गुण और राज्य के विकास के लिए काम करना जारी रखें। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह जिम्मेदारी मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देता हूं। शपथ ग्रहण का दिन असम की राजनीतिक यात्रा एक ऐतिहासिक दिन होगा, क्योंकि इस समारोह में मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, हाल ही में असम विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी की दुलियाजान विधानसभा सीट की सराहना की गई। हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को मंत्री परिषद में शामिल होने की घोषणा की. शपथ से पहले क्या बोले रामास्वामी तेली? तेली ने कहा कि वे असम के लोगों की सेवा के लिए और राज्य के हर समुदाय के लिए काम करना जारी रखेंगे। सबसे पहले, मैं एक असमिया हूँ. मैंने जहां भी काम किया है, मैंने हमेशा पूरी ईमानदारी से लोगों की सेवा करने की कोशिश की है। मैंने सभी सोसाइटी और सोसाइटी के लिए काम किया है और भविष्य में भी मैं ऐसा ही सोचता हूं। ये भी पढ़ें- 10 साल पहले कांग्रेस छोड़ी, बीजेपी को 5 से 100 तक का झटका…असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कौन? रामास्वामी तेली फ़्लैम वर्ग के मजबूत नेता तेली मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं। उन्हें ऊपरी असम का एक दबंग भाजपा नेता माना जाता है। उन्हें चाय बागान वाले क्षेत्र और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में मजबूत समर्थन प्राप्त है। बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने असम में चुनावी जीत की और 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें हासिल कीं। बीजेपी ने 82 प्रमुख बढ़त हासिल की, जबकि गठबंधन के सहयोगी असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने 10-10 बढ़त हासिल की। ये भी पढ़ें- हिमंत के शपथ ग्रहण में शामिल होने जा रहे हैं व्यंग्यात्मक उपन्यास के खास दूत सर्जियो गोर, जानिए कौन-कौन हो रहा है शामिल
संजय कपूर प्रॉपर्टी विवाद केस:करिश्मा के बच्चों के पक्ष में हुई सुनवाई के बाद मां ने दायर करवाई याचिका, बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग

करिश्मा कपूर के पूर्व पति और इंडस्ट्रियलिस्ट संजय कपूर का प्रॉपर्टी विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। जून 2025 में हुए संजय कपूर के निधन के बाद करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने सौतेली मां प्रिया कपूर पर फर्जी वसीयत बनवाने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाई थी। कोर्ट ने सुनावई के दौरान वसीयत पर शक होने पर प्रिया द्वारा संजय कपूर की प्रॉपर्टी बेचने पर रोक लगा दी थी। अब संजय कपूर की मां सीमा कपूर ने नई याचिका दायर कर कंपनी की बोर्ड मीटिंग रोके जाने की मांग की है। संजय की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर मांग की है कि प्रिया कपूर और कुछ अन्य लोग आरके फैमिली ट्रस्ट के कामकाज में दखल न दें। याचिका के अनुसार, 18 मई को एक बोर्ड मीटिंग रखी गई है, जो 8 मई को जारी कोर्ट के नोटिस के बाद बुलाई गई थी। इस बोर्ड मीटिंग का लक्ष्य कंपनी का नया डायरेक्टर नियुक्त करना है। रानी कपूर ने याचिका में 18 मई के लिए शेड्यूल इस बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि जब तक मध्यस्त्था की प्रोसेस पूरी नहीं होती, तब तक कोई ट्रस्ट के काम में दखल न दे। रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश जे.बी.पर्दीवाला ने कहा, ‘अब हम एक ऐसे विवाद में आ चुके हैं, जिसके सामने महाभारत भी अब छोटी लगेगी। हम इस मामले को देखेंगे।’ रानी कपूर के केस को लिस्ट कर लिया गया है। केस की सुनवाई 14 मई गुरुवार को होगी। कोर्ट ने करिश्मा के बच्चों को दी राहत हाल ही में हुई मामले की सुनवाई में कोर्ट ने संजय कपूर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए प्रिया कपूर पर इन्हें बेचने की रोक लगा दी है। करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने कोर्ट में दावा किया है कि प्रिया सचदेवा ने उनके पिता की एक फर्जी वसीयत तैयार की है। बच्चों का आरोप है कि प्रिया ने कोर्ट में संपत्तियों की जो लिस्ट पेश की है, वह अधूरी है। उनके मुताबिक, इस लिस्ट में संजय की कई महंगी रोलेक्स घड़ियां, पोलो खेलने वाले कीमती घोड़े और करोड़ों की पेंटिंग्स का जिक्र नहीं किया गया है। बच्चों का कहना है कि संजय कपूर की कई अचल संपत्तियां भी इस सूची से बाहर रखी गई हैं। याचिका में बच्चों ने कहा था कि उनके पिता उन्हें वसीयत से अलग नहीं कर सकते थे, क्योंकि वो उनसे बेहद क्लोज थे। उनके निधन के बाद प्रिया कपूर ने उन्हें एक वसीयत दिखाई, जिसमें उनका नाम नहीं था। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि संजय कपूर की संपत्ति को सुरक्षित रखा जाना जरूरी है ताकि उसे नष्ट न किया जा सके। कोर्ट ने प्रिया सचदेवा को किसी भी संपत्ति को बेचने से रोक दिया है और संजय के बैंक खातों के संचालन पर भी फिलहाल पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब यह साबित करने की जिम्मेदारी प्रिया की है कि वसीयत असली है। अगर अभी कार्रवाई नहीं की गई और बाद में वसीयत फर्जी निकली, तो यह बच्चों के साथ बड़ा अन्याय होगा। लंदन में पोलो खेलते समय हुई थी मौत जून 2025 में 53 साल के संजय कपूर की इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी। रानी कपूर का कहना है कि बेटे की मौत के बाद उनकी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने पूरी ग्रुप कंपनियों पर नियंत्रण कर लिया और उन्हें संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं दिया।
संजय कपूर प्रॉपर्टी विवाद केस:करिश्मा के बच्चों के पक्ष में हुई सुनवाई के बाद मां ने दायर करवाई याचिका, बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग

करिश्मा कपूर के पूर्व पति और इंडस्ट्रियलिस्ट संजय कपूर का प्रॉपर्टी विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। जून 2025 में हुए संजय कपूर के निधन के बाद करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने सौतेली मां प्रिया कपूर पर फर्जी वसीयत बनवाने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाई थी। कोर्ट ने सुनावई के दौरान वसीयत पर शक होने पर प्रिया द्वारा संजय कपूर की प्रॉपर्टी बेचने पर रोक लगा दी थी। अब संजय कपूर की मां सीमा कपूर ने नई याचिका दायर कर कंपनी की बोर्ड मीटिंग रोके जाने की मांग की है। संजय की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर मांग की है कि प्रिया कपूर और कुछ अन्य लोग आरके फैमिली ट्रस्ट के कामकाज में दखल न दें। याचिका के अनुसार, 18 मई को एक बोर्ड मीटिंग रखी गई है, जो 8 मई को जारी कोर्ट के नोटिस के बाद बुलाई गई थी। इस बोर्ड मीटिंग का लक्ष्य कंपनी का नया डायरेक्टर नियुक्त करना है। रानी कपूर ने याचिका में 18 मई के लिए शेड्यूल इस बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि जब तक मध्यस्त्था की प्रोसेस पूरी नहीं होती, तब तक कोई ट्रस्ट के काम में दखल न दे। रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश जे.बी.पर्दीवाला ने कहा, ‘अब हम एक ऐसे विवाद में आ चुके हैं, जिसके सामने महाभारत भी अब छोटी लगेगी। हम इस मामले को देखेंगे।’ रानी कपूर के केस को लिस्ट कर लिया गया है। केस की सुनवाई 14 मई गुरुवार को होगी। कोर्ट ने करिश्मा के बच्चों को दी राहत हाल ही में हुई मामले की सुनवाई में कोर्ट ने संजय कपूर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए प्रिया कपूर पर इन्हें बेचने की रोक लगा दी है। करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने कोर्ट में दावा किया है कि प्रिया सचदेवा ने उनके पिता की एक फर्जी वसीयत तैयार की है। बच्चों का आरोप है कि प्रिया ने कोर्ट में संपत्तियों की जो लिस्ट पेश की है, वह अधूरी है। उनके मुताबिक, इस लिस्ट में संजय की कई महंगी रोलेक्स घड़ियां, पोलो खेलने वाले कीमती घोड़े और करोड़ों की पेंटिंग्स का जिक्र नहीं किया गया है। बच्चों का कहना है कि संजय कपूर की कई अचल संपत्तियां भी इस सूची से बाहर रखी गई हैं। याचिका में बच्चों ने कहा था कि उनके पिता उन्हें वसीयत से अलग नहीं कर सकते थे, क्योंकि वो उनसे बेहद क्लोज थे। उनके निधन के बाद प्रिया कपूर ने उन्हें एक वसीयत दिखाई, जिसमें उनका नाम नहीं था। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि संजय कपूर की संपत्ति को सुरक्षित रखा जाना जरूरी है ताकि उसे नष्ट न किया जा सके। कोर्ट ने प्रिया सचदेवा को किसी भी संपत्ति को बेचने से रोक दिया है और संजय के बैंक खातों के संचालन पर भी फिलहाल पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब यह साबित करने की जिम्मेदारी प्रिया की है कि वसीयत असली है। अगर अभी कार्रवाई नहीं की गई और बाद में वसीयत फर्जी निकली, तो यह बच्चों के साथ बड़ा अन्याय होगा। लंदन में पोलो खेलते समय हुई थी मौत जून 2025 में 53 साल के संजय कपूर की इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी। रानी कपूर का कहना है कि बेटे की मौत के बाद उनकी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने पूरी ग्रुप कंपनियों पर नियंत्रण कर लिया और उन्हें संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं दिया।
कोच फ्लिक ने बदली बार्सिलोना की तकदीर:97 साल बाद मैड्रिड को हराकर बार्सिलोना बना सरताज, फ्लिक की युवा ब्रिगेड का दबदबा

स्पेनिश फुटबॉल में इस साल खिताबी जंग किसी ड्रामे या आखिरी पलों के उलटफेर वाली नहीं थी। बार्सिलोना ने रियल मैड्रिड के खिलाफ 2-0 की जीत दर्ज की और पॉइंट टेबल में 14 अंकों के भारी अंतर के साथ ला लिगा का खिताब अपने नाम किया। ‘एल क्लासिको’ पिछले 97 वर्षों में पहला ऐसा मैच बना, जिसने आधिकारिक तौर पर लीग का विजेता तय किया। कोच हेंसी फ्लिक के दो साल के कार्यकाल में यह उनका दूसरा लगातार खिताब है। बार्सिलोना ने 29वीं बार ला लिगा का टाइटल जीता। जर्मनी के फ्लिक पिता के निधन के बावजूद मैच के दौरान टीम के साथ मौजूद थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में बार्सिलोना को ऐसी टीम बनाया, जिसने लीग पर दबदबा कायम किया। फ्लिक की टीम बार्सिलोना फरवरी से ही अविश्वसनीय फॉर्म में रही है और उसने लगातार पिछले 11 मैच जीते हैं। इस पूरे सीजन में बार्सिलोना ने केवल चार लीग मैच गंवाए और होम ग्राउंड पर उनका जीत का रिकॉर्ड 100% रहा। हालांकि, टीम चैम्पियंस लीग और कोपा डेल रे से बाहर हो गई, लेकिन ला लिगा की रेस पर उनका नियंत्रण कभी कम नहीं हुआ। इस सत्र के 53 मैचों में से बार्सिलोना ने 42 जीते हैं- यानी 79% जीत की दर, जो यूरोप की टॉप-5 लीग में केवल बायर्न म्यूनिख (83%) से कम है। फ्लिक के आने के बाद बार्सिलोना की पहचान बदल गई है। उनके आने के बाद टीम ज्यादा अनुशासनात्मक हुई। उन्होंने डायरेक्ट अटैकिंग खेल की रणनीति अपनाई। इस बदलाव के केंद्र में नई पीढ़ी रही, जिसका नेतृत्व लामिने यमाल कर रहे हैं। 18 वर्षीय यमाल ने इस सीजन में 45 खेलों में 24 गोल किए हैं। फ्लिक ने उन पर भरोसा जताते हुए ऐसे टैक्टिकल पैटर्न बनाए जो उनकी ड्रिबलिंग और रचनात्मकता को निखारते हैं। यमाल के साथ-साथ पाउ कुबार्सी और फर्मिन लोपेज जैसे अन्य युवा खिलाड़ियों को भी सिस्टम में बखूबी शामिल किया। फ्लिक की कोचिंग में मार्कस रेशफोर्ड ने अपनी उपयोगिता साबित की है। भले ही वह हर मैच में शुरुआती इलेवन का हिस्सा न रहे हों, लेकिन बेंच से आकर उन्होंने महत्वपूर्ण गोल किए हैं। रियल के खिलाफ क्लासिको में रेशफोर्ड की शानदार फ्री-किक ने जीत की नींव रखी। मैनेजर के तौर पर फ्लिक की संवेदनशीलता की भी प्रशंसा हुई है। दिसंबर में उन्होंने डिफेंडर रोनाल्ड अराउजो को उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए छुट्टी दे दी थी।
रिपोर्ट-पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमान छिपाने में मदद की:अमेरिकी हमलों से बचाने नूर खान एयरबेस पर रखा, PAK ने आरोपों को नकारा

पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी। यह दावा CBS न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि अप्रैल में सीजफायर के ऐलान के कुछ दिन बाद ईरान ने कई विमान पाकिस्तान एयरफोर्स के नूर खान एयरबेस भेजे। यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान का अहम सैन्य ठिकाना माना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भेजे गए विमानों में ईरानी एयरफोर्स का RC-130 विमान भी शामिल था। यह लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का खुफिया और निगरानी मिशन वाला वर्जन माना जाता है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रिपोर्ट में किए गए दावों को खारिज किया। CBS न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीच में स्थित है और वहां बड़ी संख्या में विमान छिपाना संभव नहीं है। दावा- ईरान ने कुछ प्लेन अफगानिस्तान भी भेजे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने कुछ नागरिक विमान अफगानिस्तान भी भेजे। एक अफगान सिविल एविएशन अधिकारी ने दावा किया कि माहान एयर का एक विमान युद्ध शुरू होने से पहले काबुल पहुंचा था। ईरानी एयरस्पेस बंद होने के बाद वह विमान काबुल एयरपोर्ट पर ही रुका रहा। मार्च में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच तनाव बढ़ने पर काबुल एयरपोर्ट पर हमले की आशंका बनी। इसके बाद तालिबान के सिविल एविएशन अधिकारियों ने माहान एयर के विमान को सुरक्षा कारणों से ईरान सीमा के पास हेरात एयरपोर्ट भेज दिया। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी से इनकार किया। ईरान और चीन को नाराज नहीं करना चाहता पाकिस्तान पाकिस्तान एक तरफ खुद को अमेरिका के सामने मध्यस्थ और स्थिरता लाने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ वह ईरान और चीन को नाराज करने से बचने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दशक में पाकिस्तान की चीन पर सैन्य निर्भरता काफी बढ़ी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80% बड़े हथियार चीन ने सप्लाई किए। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी। 21 घंटे तक यह वार्ता चलने के बावजूद नाकाम हो गई थी। दोनों के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। ईरान ने रविवार को पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक प्रस्ताव सौंपा था, जिसे ट्रम्प ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात कही गई थी। अमेरिका ने एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की शर्त रखी अमेरिका ने इस हफ्ते ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इसके तहत ईरान को कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा और अपने पास मौजूद करीब 440 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। इसके बदले अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देगा, ईरान की फ्रीज की गईं अरबों डॉलर की संपत्तियां छोड़ेगा, साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम पर पूरी तरह समझौता करने को तैयार नहीं है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
रिपोर्ट-पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमान छिपाने में मदद की:अमेरिकी हमलों से बचाने नूर खान एयरबेस पर रखा, PAK ने आरोपों को नकारा

पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी। यह दावा CBS न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि अप्रैल में सीजफायर के ऐलान के कुछ दिन बाद ईरान ने कई विमान पाकिस्तान एयरफोर्स के नूर खान एयरबेस भेजे। यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान का अहम सैन्य ठिकाना माना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भेजे गए विमानों में ईरानी एयरफोर्स का RC-130 विमान भी शामिल था। यह लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का खुफिया और निगरानी मिशन वाला वर्जन माना जाता है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रिपोर्ट में किए गए दावों को खारिज किया। CBS न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीच में स्थित है और वहां बड़ी संख्या में विमान छिपाना संभव नहीं है। दावा- ईरान ने कुछ प्लेन अफगानिस्तान भी भेजे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने कुछ नागरिक विमान अफगानिस्तान भी भेजे। एक अफगान सिविल एविएशन अधिकारी ने दावा किया कि माहान एयर का एक विमान युद्ध शुरू होने से पहले काबुल पहुंचा था। ईरानी एयरस्पेस बंद होने के बाद वह विमान काबुल एयरपोर्ट पर ही रुका रहा। मार्च में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच तनाव बढ़ने पर काबुल एयरपोर्ट पर हमले की आशंका बनी। इसके बाद तालिबान के सिविल एविएशन अधिकारियों ने माहान एयर के विमान को सुरक्षा कारणों से ईरान सीमा के पास हेरात एयरपोर्ट भेज दिया। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी से इनकार किया। ईरान और चीन को नाराज नहीं करना चाहता पाकिस्तान पाकिस्तान एक तरफ खुद को अमेरिका के सामने मध्यस्थ और स्थिरता लाने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ वह ईरान और चीन को नाराज करने से बचने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दशक में पाकिस्तान की चीन पर सैन्य निर्भरता काफी बढ़ी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80% बड़े हथियार चीन ने सप्लाई किए। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी। 21 घंटे तक यह वार्ता चलने के बावजूद नाकाम हो गई थी। दोनों के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। ईरान ने रविवार को पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक प्रस्ताव सौंपा था, जिसे ट्रम्प ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात कही गई थी। अमेरिका ने एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की शर्त रखी अमेरिका ने इस हफ्ते ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इसके तहत ईरान को कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा और अपने पास मौजूद करीब 440 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। इसके बदले अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देगा, ईरान की फ्रीज की गईं अरबों डॉलर की संपत्तियां छोड़ेगा, साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम पर पूरी तरह समझौता करने को तैयार नहीं है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट ने प्रस्तावित द्रमुक समझौते पर ईपीएस को छोड़ दिया, टीवीके को समर्थन की घोषणा की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 10:00 IST विद्रोही गुट ने वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि को अन्नाद्रमुक विधायक दल के नए नेता के रूप में प्रस्तावित करके पार्टी के आंतरिक नेतृत्व ढांचे को नया आकार देने की भी मांग की। विद्रोही गुट ने वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि को अन्नाद्रमुक विधायक दल के नए नेता के रूप में प्रस्तावित करके पार्टी के आंतरिक नेतृत्व ढांचे को नया आकार देने की भी मांग की। अन्नाद्रमुक के भीतर संकट मंगलवार को तेजी से बढ़ गया जब पार्टी के वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री के रूप में विजय का समर्थन किया, एडप्पादी के पलानीस्वामी पर राज्य का नेतृत्व करने के लिए द्रमुक से समर्थन तलाशने का आरोप लगाया और घोषणा की कि विद्रोही विधायक आने वाली तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार का समर्थन करेंगे। असंतुष्ट अन्नाद्रमुक विधायकों के साथ एक परामर्श बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए, शनमुगम ने कहा कि गुट को सूचित किया गया था कि खंडित फैसले के बाद ईपीएस “द्रमुक की मदद से” मुख्यमंत्री बन सकते हैं। शनमुगम ने कहा, “इन बैठकों के दौरान हमें बताया गया कि डीएमके की मदद से ईपीएस को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। हमें इस फैसले को स्वीकार करने के लिए कहा गया। हमने इसका विरोध किया। हमें लगा कि यह गलत है और हमें यह बता दिया गया। उन्होंने हमारे विचारों को स्वीकार नहीं किया।” प्रस्ताव को अन्नाद्रमुक की वैचारिक जड़ों के साथ विश्वासघात बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना एमजी रामचंद्रन ने द्रमुक के राजनीतिक विकल्प के रूप में की थी और बाद में जे जयललिता के तहत मजबूत हुई। उन्होंने कहा, “यह आंदोलन डीएमके के राजनीतिक विरोध के तौर पर शुरू किया गया था. हमारे सामने डीएमके को समर्थन देने का विचार था. उस प्रस्ताव से हमें बड़ा झटका लगा. हमने इसे स्वीकार नहीं किया.” शनमुगम ने यह भी स्पष्ट किया कि विद्रोही गुट द्रमुक से जुड़ी किसी भी गठबंधन व्यवस्था का हिस्सा नहीं होगा। उन्होंने कहा, ”हम घोषणा करना चाहते हैं कि अन्नाद्रमुक किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी।” उसी समय, असंतुष्ट खेमे ने तमिलनाडु चुनाव में लोगों के जनादेश को स्वीकार करते हुए औपचारिक रूप से टीवीके और विजय को समर्थन दिया। शनमुगम ने कहा, “तमिलनाडु के लोगों ने तमिलागा वेट्ट्री कज़गम और उसके नेता विजय को मुख्यमंत्री के रूप में अपना जनादेश दिया है। अन्नाद्रमुक लोगों के फैसले को स्वीकार करती है।” एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में उन्होंने घोषणा की कि बैठक में विजय की सरकार को समर्थन देने का प्रस्ताव पारित किया गया है. उन्होंने कहा, ”हम टीवीके और विजय को समर्थन देना चाहते हैं।” विद्रोही गुट ने वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि को अन्नाद्रमुक विधायक दल के नए नेता के रूप में प्रस्तावित करके पार्टी के आंतरिक नेतृत्व ढांचे को नया आकार देने की भी मांग की। शनमुगम ने घोषणा की, “हम एसपी वेलुमणि को अन्नाद्रमुक विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्त करना चाहते हैं,” हालांकि वेलुमणि ने औपचारिक विभाजन की अटकलों को कम करने का प्रयास किया। वेलुमणि ने कहा, “हम अन्नाद्रमुक को तोड़ना नहीं चाहते; हम पार्टी को विभाजित नहीं करेंगे।” उन्होंने कहा, “अन्नाद्रमुक कभी नहीं टूटेगी।” शनमुगम ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि असंतुष्ट गुट का उद्देश्य चुनावी असफलता के बाद पार्टी को नष्ट करने के बजाय उसे पुनर्जीवित करना था। उन्होंने कहा, “हम चुनाव में हार को पूरी तरह से स्वीकार करते हैं। यह गठबंधन विफल हो गया है।” “अन्नाद्रमुक को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। एमजीआर और जयललिता के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक को वापस आना चाहिए।” यह घटनाक्रम एआईएडीएमके में बढ़ते आंतरिक विद्रोह के बीच सामने आया है, जिसमें विधायक अलग-अलग खेमों में इकट्ठा हो रहे हैं और पार्टी के खराब चुनावी प्रदर्शन के बाद ईपीएस के पद छोड़ने की मांग बढ़ रही है। षणमुगम गुट के साथ जुड़े अन्नाद्रमुक विधायक बाद में विधानसभा के लिए रवाना हो गए, जिससे संकेत मिलता है कि सत्ता संघर्ष जल्द ही सदन में भी शुरू हो सकता है। इस बीच, सूत्रों ने कहा कि विजय का वीसीके प्रमुख थोल से मिलने का कार्यक्रम है। थिरुमावलवन, कांग्रेस नेताओं और शनमुगम के नेतृत्व वाले विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट ने मंगलवार को संकेत दिया कि टीवीके प्रमुख ने चुनाव के बाद व्यापक समर्थन हासिल करने के लिए औपचारिक राजनीतिक पहुंच शुरू कर दी है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट ने प्रस्तावित द्रमुक समझौते पर ईपीएस को छोड़ दिया, टीवीके को समर्थन की घोषणा की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग अनुवाद करने के लिए)एआईएडीएमके संकट(टी)एआईएडीएमके आंतरिक विद्रोह(टी)सीवी शनमुगम(टी)एडप्पादी के पलानीस्वामी(टी)विजय टीवीके(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)डीएमके गठबंधन विवाद







