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‘साइलेंट किलर’ बन रहा डेस्क जॉब, डॉक्टर ने बताया दिल पर भारी पड़ सकता है कॉर्पोरेट स्ट्रेस, बिना देरी ऐसे करें बचाव

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Work Stress And Heart Health: काम हमेशा रहेगा, डेडलाइन्स भी आती-जाती रहेंगी. लेकिन सेहत इतनी आसानी से वापस नहीं आती. यदि आप डेस्क जॉब करते हैं, तो वेक-अप कॉल का इंतजार न करें. वर्क स्ट्रेस आपके दिल पर भारी न पड़े इसके लिए डॉक्टर के सुझाव को आप यहां जान सकते हैं.

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आजकल हम में से ज्यादातर लोगों का दिन एक ही तरह से गुजरता है, डेस्क पर बैठकर काम करना, ईमेल, कॉल्स और डेडलाइन्स के बीच समय बिताना. यह सब सामान्य लगता है क्योंकि हमारे आसपास हर कोई ऐसा ही कर रहा होता है. लेकिन जो बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वह यह है कि यह दिनचर्या धीरे-धीरे हमारे दिल पर असर डालती है.

ऐसे में डॉ. संजय ढल, सीनियर डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग बताते हैं कि समस्या सिर्फ तनाव या सिर्फ लंबे समय तक बैठना नहीं है, बल्कि इन दोनों का मेल है. अगर डेस्क जॉब की बात करें, तो लंबे समय तक बैठना अब लगभग हर कॉर्पोरेट नौकरी का हिस्सा बन चुका है. एक बार काम शुरू किया और पता ही नहीं चलता कि 8–10 घंटे कब निकल गए. इस दौरान शरीर की मूवमेंट बहुत कम हो जाती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और कैलोरी बर्न भी कम होती है. धीरे-धीरे यह वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है.

काम से स्ट्रेस और फिर हार्ट प्रॉब्लम
डॉक्टर बताते हैं कि काम का दबाव हमेशा दिखने वाला नहीं होता. कई बार यह सिर्फ लगातार टारगेट्स, मैसेज का जवाब देना या हर समय ‘ऑन’ रहने की भावना होती है. यहां तक कि जब आप काम नहीं कर रहे होते, तब भी दिमाग काम करता रहता है. यह लगातार तनाव शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ाता है, जो लंबे समय में दिल की सेहत पर असर डालता है और ब्लड प्रेशर व हार्ट रेट को बढ़ा देता है.

स्ट्रेस से लाइफस्टाइल में बदलाव
तनाव हमारी आदतों को भी बदल देता है. हम समय पर खाना नहीं खाते या जो भी जल्दी मिल जाए वही खा लेते हैं. चाय और कॉफी की मात्रा बढ़ जाती है. नींद पूरी नहीं हो पाती, और शारीरिक गतिविधि लगभग खत्म हो जाती है. ये सभी चीजें धीरे-धीरे जुड़ती जाती हैं और यही इसे खतरनाक बनाती हैं.

संकेतों को न करें नजरअंदाज
बार-बार थकान महसूस होना, सिरदर्द, हल्का सीने में दर्द या थोड़ी सी गतिविधि में सांस फूलना जैसे शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है. लेकिन अक्सर लोग इन्हें “सिर्फ काम का तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि ये शरीर के चेतावनी संकेत हो सकते हैं.

बचाव मुमकिन है!
डॉक्टर ने कहा कि अच्छी बात यह है कि इस स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है. छोटे-छोटे कदम भी काफी असरदार होते हैं. जैसे हर घंटे कुछ मिनट के लिए उठकर चलना, कॉल्स के दौरान खड़े होकर बात करना या दिन में 20–30 मिनट कोई भी शारीरिक गतिविधि करना जैसे वॉक या एक्सरसाइज दिल के लिए बहुत फायदेमंद है. तनाव को कम करने के लिए लंबी मेडिटेशन जरूरी नहीं है. दिन में छोटे-छोटे ब्रेक लेना, स्क्रीन से दूर रहना या कुछ मिनट गहरी सांस लेना भी काफी मदद करता है.

इन बातों का भी रखें ध्यान
खान-पान में भी संतुलन जरूरी है. जंक फूड कम करें और हेल्दी खाना बढ़ाएं. साथ ही, पानी पीते रहें और ज्यादा कैफीन लेने से बचें. रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराएं. समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना समस्याओं को शुरुआती दौर में पकड़ने में मदद करता है.

About the Author

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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ऐसे में डॉ. संजय ढल, सीनियर डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग बताते हैं कि समस्या सिर्फ तनाव या सिर्फ लंबे समय तक बैठना नहीं है, बल्कि इन दोनों का मेल है. अगर डेस्क जॉब की बात करें, तो लंबे समय तक बैठना अब लगभग हर कॉर्पोरेट नौकरी का हिस्सा बन चुका है. एक बार काम शुरू किया और पता ही नहीं चलता कि 8–10 घंटे कब निकल गए. इस दौरान शरीर की मूवमेंट बहुत कम हो जाती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और कैलोरी बर्न भी कम होती है. धीरे-धीरे यह वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है.

काम से स्ट्रेस और फिर हार्ट प्रॉब्लम
डॉक्टर बताते हैं कि काम का दबाव हमेशा दिखने वाला नहीं होता. कई बार यह सिर्फ लगातार टारगेट्स, मैसेज का जवाब देना या हर समय ‘ऑन’ रहने की भावना होती है. यहां तक कि जब आप काम नहीं कर रहे होते, तब भी दिमाग काम करता रहता है. यह लगातार तनाव शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ाता है, जो लंबे समय में दिल की सेहत पर असर डालता है और ब्लड प्रेशर व हार्ट रेट को बढ़ा देता है.

स्ट्रेस से लाइफस्टाइल में बदलाव
तनाव हमारी आदतों को भी बदल देता है. हम समय पर खाना नहीं खाते या जो भी जल्दी मिल जाए वही खा लेते हैं. चाय और कॉफी की मात्रा बढ़ जाती है. नींद पूरी नहीं हो पाती, और शारीरिक गतिविधि लगभग खत्म हो जाती है. ये सभी चीजें धीरे-धीरे जुड़ती जाती हैं और यही इसे खतरनाक बनाती हैं.

संकेतों को न करें नजरअंदाज
बार-बार थकान महसूस होना, सिरदर्द, हल्का सीने में दर्द या थोड़ी सी गतिविधि में सांस फूलना जैसे शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है. लेकिन अक्सर लोग इन्हें “सिर्फ काम का तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि ये शरीर के चेतावनी संकेत हो सकते हैं.

बचाव मुमकिन है!
डॉक्टर ने कहा कि अच्छी बात यह है कि इस स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है. छोटे-छोटे कदम भी काफी असरदार होते हैं. जैसे हर घंटे कुछ मिनट के लिए उठकर चलना, कॉल्स के दौरान खड़े होकर बात करना या दिन में 20–30 मिनट कोई भी शारीरिक गतिविधि करना जैसे वॉक या एक्सरसाइज दिल के लिए बहुत फायदेमंद है. तनाव को कम करने के लिए लंबी मेडिटेशन जरूरी नहीं है. दिन में छोटे-छोटे ब्रेक लेना, स्क्रीन से दूर रहना या कुछ मिनट गहरी सांस लेना भी काफी मदद करता है.

इन बातों का भी रखें ध्यान
खान-पान में भी संतुलन जरूरी है. जंक फूड कम करें और हेल्दी खाना बढ़ाएं. साथ ही, पानी पीते रहें और ज्यादा कैफीन लेने से बचें. रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराएं. समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना समस्याओं को शुरुआती दौर में पकड़ने में मदद करता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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