बेटे-बहू ने सास-ससुर को डंडों से पीटा:अस्पताल में भर्ती महिला बोली- हमें अधमरा कर दिया, रिपोर्ट तो करेंगे

छतरपुर में पारिवारिक विवाद के चलते बहू और बेटे ने अपने ही माता-पिता पर हमला कर दिया। इस मारपीट में 60 वर्षीय आशा वाल्मीकि और उनके पति गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल आशा वाल्मीकि ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने कुछ साल पहले प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद से ही बहू का व्यवहार परिवार के प्रति ठीक नहीं था। आशा के अनुसार, बहू दहेज में कुछ नहीं लाई थी, लेकिन अब घर और संपत्ति में हिस्सा मांग रही है। महिला बोली- पति बीमार रहते हैं, खुद मेहनत करने चली जाती आशा ने बताया कि उनके पति बीमार रहते हैं, और वह स्वयं मेहनत कर घर चलाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बहू घर के काम में सहयोग नहीं करती और अक्सर विवाद करती रहती है। बीती रात यह विवाद इतना बढ़ गया कि बहू ने अपने पति के साथ मिलकर सास-ससुर पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। सिर, हाथ-पैर में आई चोट इस हमले में आशा वाल्मीकि के सिर, आंख, हाथ-पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। उनके पति का हाथ टूट गया है। मारपीट के बाद दोनों घायल सीधे जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल पीड़िता ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन उन्होंने बेटे और बहू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है। पुलिस का कहना है कि अक्सर पारिवारिक मामलों में लोग शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। हालांकि, शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की जाएगी और उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
‘डकैत’ में दिखेगी एंग्री लव स्टोरी:अदिवि शेष ने कहा- इंडियन सोल और अमेरिकन टेक्नीक का मेल है ये फिल्म

अदिवि शेष जल्द ही ‘डकैत: ए लव स्टोरी’ में नजर आने वाले हैं। फिल्म में उनके साथ मृणाल ठाकुर भी हैं। अदिवि ने दैनिक भास्कर से बातचीत की- यह प्रेम कहानी होने के बावजूद आपने शीर्षक ‘डकैत’ क्यों चुना? फिल्म का विचार हमारे सिनेमाई जुनून और पुरानी यादों का मेल है। मैं और मेरे करीबी दोस्त व निर्देशक शनि, हम दोनों ही ‘द मैग्निफिसेंट सेवन’ और ‘द गुड, ‘द बैड एंड द अग्ली’ जैसी क्लासिक काउबॉय फिल्मों के प्रशंसक रहे हैं। काफी समय से मेरा मन एक प्रेम कहानी पर काम करने का था, लेकिन मैं उसे पारंपरिक रूप में नहीं देखना चाहता था। हमने सोचा, क्या होगा अगर तपते रेगिस्तान, रेल की पटरियों, बंदूकों और खून-खराबे के उस खौफनाक काउबॉय माहौल के बीच एक ‘एंग्री लव स्टोरी’ बुनी जाए? बस, इसी कल्पना ने ‘डकैत’ को जन्म दिया। यह असल में डकैती के हिंसक बैकड्रॉप में रची गई एक ऐसी प्रेम कहानी है, जहां दो किरदारों के बीच प्यार और नफरत का एक बेहद बारीक और गहरा संघर्ष चलता है। क्या लीड पेयर पूरी तरह से डकैती से जुड़ा है? देखिए जब माहौल ही इतना कठोर हो, तो किरदारों को भी उसी रंग में ढलना पड़ता है। यही वजह है कि यह कहानी एक बिल्कुल अलग और यूनिक संयोजन बनकर सामने आई है। आमतौर पर दर्शक या तो पूरी तरह एक्शन से भरी फिल्म देखते हैं, या फिर एक ऐसी प्रेम कहानी, जहां भावनाएं आंसुओं और गीतों में बहती हैं। लेकिन हमने इस सोच को थोड़ा मोड़ा। हमने तय किया कि इस बार प्यार की बात तो होगी, लेकिन उस नरम, मासूम अंदाज में नहीं, बल्कि गुस्से, टकराव और तीखे जज्बातों के साथ। यानी यह एक ऐसी प्रेम कहानी है, जहां भावनाएं दबी नहीं रहती, बल्कि खुलकर, तेज और कभी-कभी चिल्लाते हुए सामने आती हैं। इस फिल्म में आपने प्यार का कौन सा अनछुआ पहलू छुआ है? फिल्म ‘डकैत’ की प्रेम कहानी पारंपरिक सामाजिक संघर्षों, जैसे जाति, धर्म या अमीरी-गरीबी तक सीमित नहीं है। इसका केंद्र किरदारों की आंतरिक संवेदनाएं और उनके निजी अनुभव हैं। यहां प्रेम को एक बेहद व्यक्तिगत एहसास की तरह दिखाया गया है, जो माता-पिता और संतान के रिश्ते जितना गहरा हो सकता है। जब भावनाएं इतनी निजी हो जाती हैं, तो उनका प्रभाव भी अनोखा बनता है। कहानी इस बात को टटोलती है कि कोई रिश्ता क्यों खास बनता है और टूटने पर भीतर क्या बदल जाता है, यही इसकी असली ताकत है। ‘ एक्शन और इसकी कोरियोग्राफी आपके लिए कैसी रही? मैं अपनी एक्शन कोरियोग्राफी के लिए जाना जाता हूं। मैं नियमित रूप से ‘मास’ फिल्में नहीं करता, बल्कि मुझे ‘हाइपर-रियल’ एक्शन पसंद है, जो दिखने में असली भी लगे और ग्लैमरस भी। अगर मेरी फिल्म में कोई बंदा हवा में उड़ रहा है, तो उसके पीछे एक तार्किक कारण होना चाहिए। इस फिल्म के निर्देशक सुनील, जो मेरे बहुत अच्छे दोस्त भी हैं, उन्होंने सिनेमैटोग्राफी की थी। वह अब डायरेक्टर बन गया है। हम दोनों की एक्शन को लेकर जो अमेरिकन सेंसिबिलिटी है, उसे हम इस फिल्म में लेकर आए हैं। हॉलीवुड की तकनीक और जिस तरह से वे एक्शन को कट और डायरेक्ट करते हैं, हमने उसे इस्तेमाल किया है। आप इसे इंडियन सोल और अमेरिकन टेक्नीक का मेल कह सकते हैं। अनुराग कश्यप से इस प्रोजेक्ट को लेकर पहली बार कब बात हुई? मेरे दोस्त शोभिता धुलिपाला और नागा चैतन्य की शादी का मौका था, जहां अनुराग कश्यप भी मौजूद थे। मैंने मौका देखते ही अनुराग सर का हाथ पकड़ा और उसी माहौल में उन्हें ‘डकैत’ की कहानी सुनानी शुरू कर दी। शादी के जश्न के बीच ही मैंने उन्हें फिल्म के लिए पिच किया और इसी तरह वे हमारे इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन गए।
साउथ अफ्रीका ने न्यूजीलैंड को 19 रन से हराया:चौथे टी-20 में एस्टरहुइजन की फिफ्टी, कूट्जी ने 3 विकेट लिए; सीरीज 2-2 से बराबर

वेलिंगटन में खेले गए चौथे टी-20 में साउथ अफ्रीका ने न्यूजीलैंड को 19 रन से हराकर सीरीज 2-2 से बराबर कर ली। पांचवां मैच हेग्ले ओवल में 25 मार्च को खेला जाएगा। रविवार को पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम ने 20 ओवर में 164/5 का स्कोर बनाया। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 18.5 ओवर में 145 रन पर ऑलआउट हो गई। एस्टरहुइजन के 57 रन साउथ अफ्रीका के लिए कॉनर एस्टरहुइजन ने 36 गेंद में 57 रन की पारी खेली। उनके अलावा रुबिन हरमन ने नाबाद 28 रन जोड़े। अंत में जॉर्ज लिंडे ने तेज 14 रन बनाकर टीम को 160 के पार पहुंचाया। न्यूजीलैंड की ओर से काइल जैमीसन ने शुरुआत में विकेट मेडेन डालकर दबाव बनाया। बाद में बेन सीयर्स ने भी कसी हुई गेंदबाजी की और आखिरी ओवर में सिर्फ 2 रन दिए। न्यूजीलैंड की तेज शुरुआत लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड को टिम रॉबिन्सन और डेब्यू कर रहे कैटेन क्लार्क ने तेज शुरुआत दिलाई। पावरप्ले में टीम ने 63/2 का स्कोर बना लिया था। रॉबिन्सन ने 32 रन बनाए, जबकि डेन क्लेवर ने भी कुछ अच्छे शॉट लगाए। साउथ अफ्रीका ने लगातार 3 विकेट लिए मध्य ओवर में साउथ अफ्रीका ने मैच पर पकड़ बना ली। टीम ने लगातार विकेट लेकर न्यूजीलैंड को 96/5 पर रोक दिया। प्रेनेलन सुब्रायन ने क्लेवर और बेवन जैकब्स को आउट किया, जबकि ओटनील बार्टमैन और केशव महाराज ने भी अहम विकेट लिए। आखिरी ओवरों में न्यूजीलैंड की कोशिशें जारी रहीं, लेकिन टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। जेराल्ड कूट्जी ने 3 विकेट लेकर जीत पक्की की और 19वें ओवर में आखिरी विकेट लेकर मैच खत्म किया। ——————————— क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें कोहली ने लंदन के लिए चार्टर्डफ्लाइट वाली खबर को नकारा RCB से ऐसी कोई डिमांड नहीं की; इंस्टाग्राम पर हंसने वाली इमोजी लगाई IPL 2026 से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बल्लेबाज विराट कोहली ने लंदन आने-जाने के लिए चार्टर्ड फ्लाइट मांगने की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने इन रिपोर्ट्स को अफवाह बताते हुए इंस्टाग्राम पर हंसने वाले इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी। पढ़ें पूरी खबर…
कोहली ने लंदन के लिए चार्टर्ड-फ्लाइट वाली खबर को नकारा:RCB से ऐसी कोई डिमांड नहीं की; इंस्टाग्राम पर हंसने वाली इमोजी लगाई

IPL 2026 से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बल्लेबाज विराट कोहली ने लंदन आने-जाने के लिए चार्टर्ड फ्लाइट मांगने की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने इन रिपोर्ट्स को अफवाह बताते हुए इंस्टाग्राम पर हंसने वाले इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा जोरों पर थी कि कोहली ने RCB मैनेजमेंट के सामने एक खास शर्त रखी है। इन रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अगर दो मैचों के बीच 3 दिन से ज्यादा का गैप होता है, तो कोहली चार्टर्ड फ्लाइट से लंदन अपने परिवार के पास जाएंगे और मैच से पहले वापस लौट आएंगे। इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की रिपोर्ट, लाफिंग इमोजी लगाई विराट कोहली ने इन दावों वाली एक न्यूज रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट अपनी स्टोरी पर शेयर किया और साथ में लाफिंग इमोजी (हंसने वाली इमोजी) लगाई। कोहली पिछले कुछ समय से अपने परिवार के साथ लंदन में ही वक्त बिता रहे हैं। 28 मार्च को पहला मैच हैदराबाद से IPL 2026 का आगाज 28 मार्च से होगा, जहां डिफेंडिंग चैंपियन टीम बेंगलुरु में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ खेलेगी। पिछले सीजन में पहली बार खिताब जीतने वाली RCB इस बार भी कोहली के बल्ले से रनों की बारिश की उम्मीद कर रही है। कोहली 18 सालों से इसी फ्रेंचाइजी के साथ जुड़े हुए हैं। IPL में 9,000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बन सकते हैं इस सीजन में विराट कोहली कई बड़े कीर्तिमान अपने नाम कर सकते हैं। वे IPL इतिहास में 9,000 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बनने की दहलीज पर हैं। वर्तमान में कोहली के नाम 267 मैचों में 8,661 रन दर्ज हैं, जिसमें 8 शतक और 63 अर्धशतक शामिल हैं। इसके अलावा, वे किसी एक टी-20 टीम (RCB) के लिए 10,000 रन (IPL और चैंपियंस लीग मिलाकर) पूरे करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी भी बन सकते हैं। अभी उनके नाम 282 मैचों में 9,085 रन हैं। 14,000 रनों के क्लब में शामिल होने का मौका विराट कोहली टी-20 फॉर्मेट के ओवरऑल रिकॉर्ड्स में भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। वे टी-20 क्रिकेट में 14,000 रन बनाने वाले पांचवें बल्लेबाज बन सकते हैं। अब तक केवल क्रिस गेल (14,562), कीरोन पोलार्ड (14,482), एलेक्स हेल्स (14,449) और डेविड वॉर्नर (14,028) ही इस आंकड़े तक पहुंच पाए हैं। कोहली के अभी 414 मैचों में 13,543 रन हैं। पिछले सीजन में भी रहा था शानदार प्रदर्शन IPL 2025 में भी विराट कोहली का बल्ला खूब चला था। उन्होंने 15 पारियों में 54.75 की औसत और 144.71 की स्ट्राइक रेट से 657 रन बनाए थे। वे अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे और पूरे टूर्नामेंट में तीसरे स्थान पर थे। ———————– IPL से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… आकाश दीप IPL 2026 से बाहर हुए KKR के पेसर इंजरी के कारण नहीं खेलेंगे; मेगा ऑक्शन में एक करोड़ में खरीदा था कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को IPL 2026 से पहले एक और झटका लगा है। टीम के तेज गेंदबाज आकाश दीप पूरे सीजन से बाहर हो गए हैं। शनिवार को क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज को फ्रेंचाइजी के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। पूरी खबर
मंडला जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी:पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने तलाशी ली, मेल दक्षिण भारतीय भाषा में आया

मंडला जिला कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद रविवार को पूरे शहर में हड़कंप मच गया। यह धमकी कोर्ट की ऑफिशियल मेल आईडी पर एक अनजान ईमेल के जरिए भेजी गई थी। खबर मिलते ही पुलिस, डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्ता (BDDS) तुरंत मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर को घेरकर तलाशी शुरू कर दी। थाना प्रभारी शफीक खान के मुताबिक, धमकी भरा यह ईमेल दक्षिण भारतीय भाषा में लिखा गया है। पुलिस की विशेष टीमें और बम निरोधक दस्ता कोर्ट के चप्पे-चप्पे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। एहतियात के तौर पर कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और वहां आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर पैनी नजर रखी जा रही है। साइबर सेल कर रही है मेल की जांच एसडीओपी पीयूष मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। अब तकनीकी तौर पर ईमेल का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह मेल आखिर कहां से और किसने भेजा है। पुलिस का कहना है कि अगर कोई भी संदिग्ध चीज मिलती है, तो तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
‘कांग्रेस बनाम कांग्रेस’: गौरव गोगोई ने दलबदलुओं पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया, कहा कि असम में कोई बीजेपी नहीं बची | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:22 मार्च, 2026, 15:37 IST यह टिप्पणी 9 अप्रैल को होने वाले असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से हाई-प्रोफाइल लोगों के बाहर निकलने के बाद आई है। असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (बाएं) और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई (दाएं)। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई ने प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य में कोई भाजपा नहीं बची है क्योंकि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पूर्व कांग्रेसियों के एक समूह का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहे हैं जो पार्टी में शामिल हो गए हैं। यह टिप्पणी 9 अप्रैल को होने वाले असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से हाई-प्रोफाइल लोगों के बाहर निकलने के बाद आई है। गौरव गोगोई ने माजुली में कांग्रेस उम्मीदवार डॉ इंद्रनील पेगु के लिए प्रचार करते हुए मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “हमारे सामने जो खड़ा है वह हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली कांग्रेस है; यह केवल भाजपा का टैग रखती है। जिन नेताओं ने तरुण गोगोई के कार्यकाल के दौरान गलत काम किया, वे अब भाजपा में हैं। यह चुनाव तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस और हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली कांग्रेस के बीच लड़ाई होगी।” गोगोई ने कहा कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा अब केवल बीजेपी लेबल के तहत कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने अपने पिता, कांग्रेस के कद्दावर नेता और असम के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा, “असम में अब कोई भाजपा नहीं है। हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा लेबल वाली कांग्रेस मौजूद है। उनके नेतृत्व में, कुछ पूर्व कांग्रेस नेता अपने और अपने परिवार के हितों के लिए चुनाव लड़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, जो वाजपेयी भवन में एकत्र हुए हैं। दूसरी ओर, हम तरूण गोगोई के आदर्शों से प्रेरित कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं।” विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने कुछ बड़े नेताओं को बाहर होते देखा है। पिछले महीने, पूर्व राज्य कांग्रेस प्रमुख भूपेन बोराज भाजपा में चले गए। और अभी हाल ही में, लोकसभा सांसद और पूर्व राज्य मंत्री प्रद्युत बोरदोलोई भाजपा में शामिल हो गए। कथित तौर पर गौरव गोगोई के नेतृत्व वाले राज्य नेतृत्व के साथ दलबदलू नेताओं का टकराव चल रहा था। लोकसभा सांसद और असम में कांग्रेस के प्रमुख नेता गोगोई ने कहा, “असम में कांग्रेस सरकार के दौरान, कुछ नेता और मंत्री जिनके कार्यों ने तरुण गोगोई की सरकार की छवि खराब की थी, अब (राज्य भाजपा मुख्यालय) वाजपेयी भवन में इकट्ठे हुए हैं, मंत्री और विधायक के रूप में पद की मांग कर रहे हैं। हम एक ऐसी कांग्रेस के साथ खड़े हैं जो तरुण गोगोई के आदर्शों के साथ आगे बढ़ती है, जहां लोग नए चेहरों को उभरते हुए देख रहे हैं।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कांग्रेस पार्टी आगामी चुनावों में विजयी होगी। उन्होंने कहा, “इस बार हम नए चेहरों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ऊपरी असम में विपक्षी दलों के बीच काफी एकता है, जिससे मुझे आशा है कि असम में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनेगी। इस बदलाव के पहले संकेत ऊपरी और उत्तरी असम में दिखाई देंगे, जहां हमें बेहतर परिणाम की उम्मीद है।” असम में 9 अप्रैल को एक ही चरण में विधानसभा चुनाव होंगे और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। पहले प्रकाशित: 22 मार्च, 2026, 15:37 IST समाचार राजनीति ‘कांग्रेस बनाम कांग्रेस’: गौरव गोगोई ने दलबदलुओं पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया, कहा कि असम में कोई बीजेपी नहीं बची है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम कांग्रेस(टी)गौरव गोगोई(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम में बीजेपी(टी)कांग्रेस बनाम बीजेपी असम(टी)तरुण गोगोई विरासत(टी)असम की राजनीति 2026
फुटबॉल क्लब चेल्सी ने शुरू की ‘बॉल-हडल’ की नई परंपरा:खिलाड़ियों को डांस करने, घास पर चलने जैसी प्री-मैच रस्मों से मिलती है ऊर्जा; इन्हें साथ करें तो पूरी टीम में आती है एकाग्रता

फुटबॉल मैदान पर इन दिनों इंग्लिश क्लब चेल्सी का एक नया तरीका सुर्खियों में है। मैच शुरू होने से ठीक पहले खिलाड़ी मैदान के बीचों-बीच रखी गेंद के चारों ओर एक गोल घेरा (हडल) बनाते हैं। मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व दिग्गज गैरी नेविले को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। उनका मानना है कि फैंस इन हरकतों से बेवकूफ नहीं बनेंगे, वे केवल खेल देखते हैं। हालांकि चेल्सी के कोच लियाम रोसेनियोर का नजरिया अलग है। उनका कहना है कि यह घेरा बनाने का फैसला उनका नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के लीडरशिप ग्रुप का था। टीम इसके जरिए अपनी एकजुटता दिखाना चाहती है और ‘गेंद का सम्मान’ करना चाहती है। प्री-मैच रस्में नई बात नहीं खेल जगत में प्री-मैच रस्में (मैच से पहले की आदतें) नई बात नहीं हैं। जीत और हार के बीच के फासले को कम करने के लिए टीमें ऐसे तरीके अपनाती हैं। 2019 वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल से पहले ऑस्ट्रेलिया के कोच जस्टिन लैंगर ने अपनी टीम को एजबेस्टन के मैदान पर नंगे पैर घास पर चलने को कहा था। उनका मानना था कि इससे खिलाड़ियों को धरती से ‘सकारात्मक ऊर्जा’ मिलती है। वहीं, लिवरपूल के पूर्व मैनेजर जुर्गन क्लॉप मैच से पहले वॉर्म-अप के दौरान मैदान के बीच खड़े होकर विपक्षी टीम को घूरते थे, ताकि विरोधी खिलाड़ियों की शारीरिक भाषा और कमियों को समझ सकें। रग्बी में भी इसके उदाहरण रग्बी में भी इसके दिलचस्प उदाहरण हैं। 2003 में इंग्लैंड के कप्तान मार्टिन जॉनसन अपनी टीम को लेकर विपक्षी टीम आयरलैंड के ‘रेड कार्पेट’ वाले हिस्से पर खड़े हो गए और हटने से साफ इनकार कर दिया। इस जिद ने इंग्लैंड की टीम में जबरदस्त जोश भर दिया। इसका असर मैच के दौरान खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज में साफ दिखा और उन्होंने मैच एकतरफा अंदाज में जीत लिया। ‘हाका’ डांस पूरी दुनिया में मशहूर दूसरी ओर, न्यूजीलैंड की रग्बी टीम का पारंपरिक ‘हाका’ डांस पूरी दुनिया में मशहूर है, जो विरोधी टीम को खुली चुनौती देता है। खेल मनोवैज्ञानिक जमील कुरैशी मानते हैं कि इन रस्मों का खिलाड़ियों पर गहरा असर होता है। चेल्सी का ‘गेंद के प्रति सम्मान’ इस बात का प्रतीक है कि खिलाड़ी उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो उनके नियंत्रण में हैं। जीत की नींव रखने वाला मनोवैज्ञानिक हथियार मैच से पहले एक जैसी रूटीन अपनाने से दिमाग एकाग्र होता है। पूर्व रग्बी खिलाड़ी विल ग्रीनवुड का भी मानना है कि जब पूरी टीम मिलकर ऐसा करती है, तो यह सामूहिक ताकत बन जाती है। जाहिर है, सिर्फ गेंद के चारों ओर खड़े होने या नंगे पैर घास पर चलने से कोई टीम मैच नहीं जीत सकती, लेकिन अगर खिलाड़ी इन रस्मों पर पूरी तरह विश्वास करते हैं, तो यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि जीत की नींव रखने वाला एक मजबूत मनोवैज्ञानिक हथियार बन सकता है।
प्रेग्नेंट महिला को अमेरिकी कंपनी ने वर्क-फ्रॉम होम नहीं दिया:जन्म के कुछ घंटे बाद नवजात की मौत हो गई, ₹200 करोड़ जुर्माना

अमेरिका के ओहायो में एक कंपनी को करीब ₹200 करोड़ (2.25 करोड़ डॉलर) का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है। चेल्सी वॉल्श नाम की महिला टोटल क्वालिटी लॉजिस्टिक्स (TQL) अमेरिकी कंपनी में काम करती थीं। फरवरी 2021 में उन्होंने वर्क फ्रॉम होम (WFH) की इजाजत मांगी थी। कंपनी ने उन्हें ऑफिस आकर काम करने या बिना सैलरी छुट्टी लेने का ऑप्शन दिया, जिससे उनकी इनकम और हेल्थ इंश्योरेंस पर असर पड़ता। मजबूरी में उन्हें 22 फरवरी से ऑफिस जाकर काम करना पड़ा। लगातार तीन दिन काम करने के बाद 24 फरवरी को उन्हें समय से पहले डिलीवरी हो गई। महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत हो गई। कोर्ट ने माना कि अगर महिला को घर से काम करने दिया जाता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। इसी आधार पर कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया गया। बच्ची का जन्म 18 हफ्ते पहले हुआ महिला की प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क थी और डॉक्टर ने उन्हें घर पर आराम करने और वर्क-फ्रॉम होम करने की सलाह दी थी, लेकिन कंपनी ने उनकी यह मांग ठुकरा दी। कोर्ट ने माना कि यह मामला कंपनी के फैसले से जुड़ा हुआ है। बच्ची का जन्म तय समय से करीब 18 हफ्ते पहले हुआ था। जन्म के समय वह सांस ले रही थी और उसका दिल धड़क रहा था, लेकिन करीब डेढ़ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिवार ने कंपनी के खिलाफ केस किया। उनका कहना था कि WFH की इजाजत मिलती, तो महिला को आराम मिलता और यह हादसा टल सकता था। मामला हैमिल्टन काउंटी की अदालत में चला, जहां जूरी ने कंपनी को दोषी माना। जहां कंपनी की जिम्मेदार मानते हुए 2.25 करोड़ डॉलर देने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने इसे एक दुखद घटना बताते हुए कहा कि कंपनी को कर्मचारी की स्थिति को समझना चाहिए था। प्रेग्नेंट महिलाओं को लेकर अलग-अलग नियम दुनियाभर में प्रेग्नेंट महिलाओं के काम से जुड़े अधिकारों को लेकर अलग-अलग कानून हैं, लेकिन कुछ सामान्य नियम हर जगह लागू होते हैं। इन नियमों के तहत प्रेग्नेंसी के कारण किसी महिला के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह माना जाता है कि प्रेग्नेंट महिलाओं को ‘रीजनेबल अकॉमोडेशन’ यानी उचित सुविधा दी जानी चाहिए। इसमें काम के घंटे कम करना, हल्का काम देना या घर से काम करने की इजाजत शामिल हो सकती है। अमेरिका में प्रेग्नेंट महिलाओं को लेकर कई कानून हैं अमेरिका में इसे लेकर कानून और भी क्लियर हैं। प्रेग्नेंट वर्कर्स फेयरनेस एक्ट (PWFA) के तहत कंपनियों को प्रेग्नेंट कर्मचारियों को जरूरी सुविधाएं देना अनिवार्य है, जब तक इससे कंपनी को बहुत ज्यादा नुकसान न हो। इसके अलावा प्रेग्नेंसी डिस्क्रिमिनेशन एक्ट (PDA) के मुताबिक, प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता। अगर किसी अन्य कर्मचारी को बीमारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जाती है, तो प्रेग्नेंट महिला को भी समान सुविधा मिलनी चाहिए। कुछ मामलों में अमेरिकन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट (ADA) भी लागू होता है। अगर गर्भावस्था से जुड़ी कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो, तो कंपनी को कर्मचारी की मदद करनी होती है, जिसमें वर्क फ्रॉम होम भी शामिल हो सकता है। हालांकि, हर मामले में वर्क फ्रॉम होम देना जरूरी नहीं होता। अगर काम ऐसा है जो घर से नहीं किया जा सकता या कंपनी को इससे ज्यादा नुकसान होता है, तो कंपनी मना कर सकती है। लेकिन इसके लिए उसे सही कारण बताना जरूरी होता है। इसके अलावा, कंपनियों को यह भी ध्यान रखना होता है कि प्रेग्नेंट महिलाओं से भारी काम न कराया जाए और उन्हें सुरक्षित माहौल दिया जाए। भारत में वर्क फ्रॉम होम सुविधा है, कानून नहीं भारत में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वर्क फ्रॉम होम (WFH) को लेकर कोई ऐसा कानून नहीं है, जो हर कंपनी को यह सुविधा देना जरूरी बनाता हो। लेकिन मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 के तहत महिलाओं को कई जरूरी अधिकार मिलते हैं। जैसे उन्हें 26 हफ्ते (करीब 6 महीने) की पेड छुट्टी मिलती है और नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। इस कानून के मुताबिक, अगर काम घर से किया जा सकता है और कंपनी और कर्मचारी दोनों तैयार हों, तो मेटरनिटी लीव के बाद WFH दिया जा सकता है। WFH एक सुविधा है, जरूरी अधिकार नहीं। इसलिए कंपनी अपनी जरूरत के हिसाब से इसे मंजूर या मना कर सकती है। सरकार ने कंपनियों को यह सलाह दी है कि वे महिलाओं को लीव के बाद कुछ समय तक घर से काम करने दें, लेकिन यह नियम अनिवार्य नहीं है। ————— यह खबर भी पढ़ें… महिला की लाश के साथ 13 घंटे उड़ता रहा विमान:हॉन्गकॉन्ग से लंदन उड़ान में टेकऑफ के बाद मौत हुई; रास्तेभर बदबू से परेशान रहे पैसेंजर ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट में रविवार को एक महिला यात्री की टेकऑफ के करीब 1 घंटे बाद मौत हो गई। इसके बाद उनका शव पूरे 13 घंटे तक विमान में ही रखा रहा। शव को विमान के पीछे वाले हिस्से में रखा गया था, जहां फर्श गर्म था। इसी वजह से धीरे-धीरे बदबू फैलने लगी, जिससे पीछे बैठे यात्रियों को काफी परेशानी हुई। पढ़ें पूरी खबर…
लैक्मे फैशन वीक के तीसरे दिन दिशा पाटनी बनीं शोस्टॉपर:तमन्ना भाटिया और खुशी कपूर ने भी रैंप वॉक किया, देखें तस्वीरें

मुंबई में शनिवार को लैक्मे फैशन वीक के तीसरे दिन दिशा पाटनी, तमन्ना भाटिया, शनाया कपूर और खुशी कपूर ने अलग-अलग डिजाइनरों के लिए ‘शोस्टॉपर’ के रूप में रैंप वॉक किया। दिशा पाटनी ने ब्लैक आउटफिट के साथ स्टेटमेंट दुपट्टा और ब्लाउज कैरी किया। उन्होंने बालों को बन में स्टाइल किया, जिसमें कुछ लटें खुली रखीं। ज्वेलरी में डायमंड नेकलेस के साथ एमराल्ड पेंडेंट पहना। वहीं, खुशी कपूर ने भी तीसरे दिन रैंप वॉक किया। उन्होंने फ्लोरल एम्बेलिश्ड क्रॉप टॉप के साथ मैचिंग लहंगा पहना और कलेक्शन के रंग, पैटर्न और डिटेलिंग की सराहना की। शो का समापन एक्ट्रेस मालविका मोहनन ने किया। उन्होंने ऑल-व्हाइट लुक में क्रॉप्ड जैकेट, व्हाइट शर्ट और असिमेट्रिक स्कर्ट पहनकर रैंप वॉक किया। देखें शो की तस्वीरें- लैक्मे फैशन वीक भारत का एक प्रमुख फैशन इवेंट है, जिसे लैक्मे और RISE वर्ल्डवाइड मिलकर आयोजित करते हैं। अब यह फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (FDCI) के साथ साझेदारी में होता है। यह मंच भारतीय डिजाइनरों को अपने नए कलेक्शन दिखाने और ग्लोबल पहचान बनाने का मौका देता है। यह इवेंट साल में दो बार होता है। मार्च में समर-रिसॉर्ट या फॉल-विंटर कलेक्शन और अक्टूबर में विंटर-फेस्टिव कलेक्शन पेश किए जाते हैं। इसका आयोजन मुख्य रूप से मुंबई में होता है। 2026 का मार्च एडिशन 19 से 22 मार्च तक जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है।
शरीर में नजर आने वाले ये संकेत किडनी खराब होने के हैं लक्षण, इन 6 चेतावनियों को न करें नजरअंदाज

Last Updated:March 22, 2026, 14:19 IST Sign and Symptoms of kidney disease: किडनी शरीर में कई तरह के महत्वपूर्ण काम करती है. कई बार किडनी में कोई समस्या होती है, तो इसके संकेत पेशाब में नजर आते हैं जैसे पेशाब करते समय जलन होना, खून आना आदि. इतना ही नहीं, कम पानी पीने के बाद भी पेशाब बहुत अधिक होने लगे तो यह शरीर का चेतावनी संकेत हो सकता है. विशेषज्ञ के अनुसार, ऐसी स्थिति क्रोनिक किडनी डिजीज होने के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. किडनी खराब होने के संकेत. Sign and Symptoms of kidney disease: किडनी शरीर की बेहद ही महत्वपूर्ण अंग है, जो कई महत्वूपूर्ण काम करती है. शरीर में गुर्दे (Kidney) दो होते हैं और ये अपना काम सही से न करें तो आप समझ लीजिए कि इसमें कोई समस्या शुरू हो चुकी है. आपको कई संकेत शरीर में नजर आने लगेंगे. इन संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए तो गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है. किडनी शरीर में खून साफ करती है. शरीर से गंदगी और अतिरिक्त पानी को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है. जब किडनी अपने ये सभी कार्य करना बंद कर देगी तो आपकी किडनी फेल हो जाएगी. ऐसे में शरीर छोटे-छोटे संकेत देना शुरू कर देता है. जब किडनी बीमार होती है, तो शरीर में कई तरह की परेशानियां शुरू हो सकती हैं. जानिए, किडनी खराब होने के क्या संकेत पहले नजर आते हैं… किडनी खराब होने के संकेत – जब किडनी में कोई समस्या शुरू होती है तो बार-बार पेशाब आना हो सकता है. कुछ लोग सोचते हैं कि बार-बार पेशाब आना कोई समस्या नहीं है, ये कॉमन है. लेकिन, जब आप कम पानी पीते हैं, उसके बाद भी अधिक पेशाब आए तो ये चिंता की बात हो सकती है. -रात में कई बार उठकर पेशाब जाना पड़े, तो यह शरीर का चेतावनी संकेत हो सकता है. विशेषज्ञ के अनुसार, कई बार यह स्थिति क्रोनिक किडनी डिजीज की शुरुआती संकेत हो सकते हैं. यदि आपको भी ये लक्षण कई दिनों से नजर आ रहे हैं, तो इसे बिल्कुल भी इग्नोर न करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. -कई बार पेशाब करते समय झाग आता है. पेशाब का रंग डार्क लगता है. ये बदलाव भी किडनी की समस्या का संकेत हो सकते हैं. पेशाब में झाग बनने का मतलब ये होता है कि शरीर से प्रोटीन बाहर निकल रहा है. सामान्य स्थिति में किडनी प्रोटीन को शरीर के अंदर ही रखती है. जब किडनी के फिल्टर कमजोर हो जाते हैं तो प्रोटीन पेशाब के साथ बाहर आने लगता है. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलें. -किडनी की क्षमता कम होने पर शरीर में सूजन दिखाई देने लगती है. ये सूजन पैरों, टखनों और आंखों के आसपास नजर आ सकती है. ये संकेत हैं कि किडनी शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पा रही है. जब टॉक्सिन तरल पदार्थ शरीर में जमा होने लगे तो सूजन बढ़ जाती है. इससे थकान समझने की गलती न करें. लगातार सूजन होना चिंता की बात हो सकती है. -किडनी की बीमारी होने पर त्वचा से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं. जब किडनी शरीर से गंदे पदार्थों को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो खून में यूरिया बढ़ जाता है. इसका असर त्वचा पर भी पड़ सकता है. कई लोगों को त्वचा में खुजली, रूखापन या जलन जैसी समस्या होती है. -कई बार हाई ब्लड प्रेशर होना भी किडनी की समस्या से संबंधित हो सकता है. अगर ब्लड प्रेशर लंबे समय तक कंट्रोल न हो, तो इससे किडनी के फिल्टर को नुकसान पहुंचा सकता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : March 22, 2026, 14:19 IST









