Thursday, 21 May 2026 | 01:42 PM

Trending :

EXCLUSIVE

फुटबॉल क्लब चेल्सी ने शुरू की ‘बॉल-हडल’ की नई परंपरा:खिलाड़ियों को डांस करने, घास पर चलने जैसी प्री-मैच रस्मों से मिलती है ऊर्जा; इन्हें साथ करें तो पूरी टीम में आती है एकाग्रता

फुटबॉल क्लब चेल्सी ने शुरू की ‘बॉल-हडल’ की नई परंपरा:खिलाड़ियों को डांस करने, घास पर चलने जैसी प्री-मैच रस्मों से मिलती है ऊर्जा; इन्हें साथ करें तो पूरी टीम में आती है एकाग्रता

फुटबॉल मैदान पर इन दिनों इंग्लिश क्लब चेल्सी का एक नया तरीका सुर्खियों में है। मैच शुरू होने से ठीक पहले खिलाड़ी मैदान के बीचों-बीच रखी गेंद के चारों ओर एक गोल घेरा (हडल) बनाते हैं। मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व दिग्गज गैरी नेविले को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। उनका मानना है कि फैंस इन हरकतों से बेवकूफ नहीं बनेंगे, वे केवल खेल देखते हैं। हालांकि चेल्सी के कोच लियाम रोसेनियोर का नजरिया अलग है। उनका कहना है कि यह घेरा बनाने का फैसला उनका नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के लीडरशिप ग्रुप का था। टीम इसके जरिए अपनी एकजुटता दिखाना चाहती है और ‘गेंद का सम्मान’ करना चाहती है। प्री-मैच रस्में नई बात नहीं खेल जगत में प्री-मैच रस्में (मैच से पहले की आदतें) नई बात नहीं हैं। जीत और हार के बीच के फासले को कम करने के लिए टीमें ऐसे तरीके अपनाती हैं। 2019 वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल से पहले ऑस्ट्रेलिया के कोच जस्टिन लैंगर ने अपनी टीम को एजबेस्टन के मैदान पर नंगे पैर घास पर चलने को कहा था। उनका मानना था कि इससे खिलाड़ियों को धरती से ‘सकारात्मक ऊर्जा’ मिलती है। वहीं, लिवरपूल के पूर्व मैनेजर जुर्गन क्लॉप मैच से पहले वॉर्म-अप के दौरान मैदान के बीच खड़े होकर विपक्षी टीम को घूरते थे, ताकि विरोधी खिलाड़ियों की शारीरिक भाषा और कमियों को समझ सकें। रग्बी में भी इसके उदाहरण रग्बी में भी इसके दिलचस्प उदाहरण हैं। 2003 में इंग्लैंड के कप्तान मार्टिन जॉनसन अपनी टीम को लेकर विपक्षी टीम आयरलैंड के ‘रेड कार्पेट’ वाले हिस्से पर खड़े हो गए और हटने से साफ इनकार कर दिया। इस जिद ने इंग्लैंड की टीम में जबरदस्त जोश भर दिया। इसका असर मैच के दौरान खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज में साफ दिखा और उन्होंने मैच एकतरफा अंदाज में जीत लिया। ‘हाका’ डांस पूरी दुनिया में मशहूर दूसरी ओर, न्यूजीलैंड की रग्बी टीम का पारंपरिक ‘हाका’ डांस पूरी दुनिया में मशहूर है, जो विरोधी टीम को खुली चुनौती देता है। खेल मनोवैज्ञानिक जमील कुरैशी मानते हैं कि इन रस्मों का खिलाड़ियों पर गहरा असर होता है। चेल्सी का ‘गेंद के प्रति सम्मान’ इस बात का प्रतीक है कि खिलाड़ी उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो उनके नियंत्रण में हैं। जीत की नींव रखने वाला मनोवैज्ञानिक हथियार मैच से पहले एक जैसी रूटीन अपनाने से दिमाग एकाग्र होता है। पूर्व रग्बी खिलाड़ी विल ग्रीनवुड का भी मानना है कि जब पूरी टीम मिलकर ऐसा करती है, तो यह सामूहिक ताकत बन जाती है। जाहिर है, सिर्फ गेंद के चारों ओर खड़े होने या नंगे पैर घास पर चलने से कोई टीम मैच नहीं जीत सकती, लेकिन अगर खिलाड़ी इन रस्मों पर पूरी तरह विश्वास करते हैं, तो यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि जीत की नींव रखने वाला एक मजबूत मनोवैज्ञानिक हथियार बन सकता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Bhumi Pednekar Struggle Success Story; Diet Routine

February 20, 2026/
4:30 am

20 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी/वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक भूमि पेडनेकर अपने जीवन के बुरे अनुभवों को अपनी ताकत बनाकर बॉलीवुड...

ईरान को परमाणु अप्रसार संधि का उपाध्यक्ष बनाने पर विवाद:अमेरिकी अधिकारी बोले- यह संगठन का अपमान, ईरान बोला- अमेरिका हमें न सिखाए

April 29, 2026/
2:48 pm

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इसी बीच एक दिलचस्प खबर...

राजपाल यादव जेल में स्मोकिंग रूम चाहते:शाहजहांपुर में बोले- तिहाड़ मेरे लिए चिंतन शिविर जैसा था; VIDEO में चेक बाउंस स्टोरी

February 19, 2026/
5:49 am

बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव चेक बाउंस मामले में 30 दिनों की अंतरिम जमानत पर हैं। तिहाड़ जेल से रिहाई के...

इंदौर के गेंदेश्वर महादेव मंदिर में शिव महापुराण:कलश यात्रा में किन्नर समाज की भागीदारी से दिखी सामाजिक समावेश की मिसाल

April 10, 2026/
12:16 am

शहर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण को सशक्त करने विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 में धर्म रक्षा समिति एवं ब्राह्मण सेवा...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

फुटबॉल क्लब चेल्सी ने शुरू की ‘बॉल-हडल’ की नई परंपरा:खिलाड़ियों को डांस करने, घास पर चलने जैसी प्री-मैच रस्मों से मिलती है ऊर्जा; इन्हें साथ करें तो पूरी टीम में आती है एकाग्रता

फुटबॉल क्लब चेल्सी ने शुरू की ‘बॉल-हडल’ की नई परंपरा:खिलाड़ियों को डांस करने, घास पर चलने जैसी प्री-मैच रस्मों से मिलती है ऊर्जा; इन्हें साथ करें तो पूरी टीम में आती है एकाग्रता

फुटबॉल मैदान पर इन दिनों इंग्लिश क्लब चेल्सी का एक नया तरीका सुर्खियों में है। मैच शुरू होने से ठीक पहले खिलाड़ी मैदान के बीचों-बीच रखी गेंद के चारों ओर एक गोल घेरा (हडल) बनाते हैं। मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व दिग्गज गैरी नेविले को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। उनका मानना है कि फैंस इन हरकतों से बेवकूफ नहीं बनेंगे, वे केवल खेल देखते हैं। हालांकि चेल्सी के कोच लियाम रोसेनियोर का नजरिया अलग है। उनका कहना है कि यह घेरा बनाने का फैसला उनका नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के लीडरशिप ग्रुप का था। टीम इसके जरिए अपनी एकजुटता दिखाना चाहती है और ‘गेंद का सम्मान’ करना चाहती है। प्री-मैच रस्में नई बात नहीं खेल जगत में प्री-मैच रस्में (मैच से पहले की आदतें) नई बात नहीं हैं। जीत और हार के बीच के फासले को कम करने के लिए टीमें ऐसे तरीके अपनाती हैं। 2019 वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल से पहले ऑस्ट्रेलिया के कोच जस्टिन लैंगर ने अपनी टीम को एजबेस्टन के मैदान पर नंगे पैर घास पर चलने को कहा था। उनका मानना था कि इससे खिलाड़ियों को धरती से ‘सकारात्मक ऊर्जा’ मिलती है। वहीं, लिवरपूल के पूर्व मैनेजर जुर्गन क्लॉप मैच से पहले वॉर्म-अप के दौरान मैदान के बीच खड़े होकर विपक्षी टीम को घूरते थे, ताकि विरोधी खिलाड़ियों की शारीरिक भाषा और कमियों को समझ सकें। रग्बी में भी इसके उदाहरण रग्बी में भी इसके दिलचस्प उदाहरण हैं। 2003 में इंग्लैंड के कप्तान मार्टिन जॉनसन अपनी टीम को लेकर विपक्षी टीम आयरलैंड के ‘रेड कार्पेट’ वाले हिस्से पर खड़े हो गए और हटने से साफ इनकार कर दिया। इस जिद ने इंग्लैंड की टीम में जबरदस्त जोश भर दिया। इसका असर मैच के दौरान खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज में साफ दिखा और उन्होंने मैच एकतरफा अंदाज में जीत लिया। ‘हाका’ डांस पूरी दुनिया में मशहूर दूसरी ओर, न्यूजीलैंड की रग्बी टीम का पारंपरिक ‘हाका’ डांस पूरी दुनिया में मशहूर है, जो विरोधी टीम को खुली चुनौती देता है। खेल मनोवैज्ञानिक जमील कुरैशी मानते हैं कि इन रस्मों का खिलाड़ियों पर गहरा असर होता है। चेल्सी का ‘गेंद के प्रति सम्मान’ इस बात का प्रतीक है कि खिलाड़ी उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो उनके नियंत्रण में हैं। जीत की नींव रखने वाला मनोवैज्ञानिक हथियार मैच से पहले एक जैसी रूटीन अपनाने से दिमाग एकाग्र होता है। पूर्व रग्बी खिलाड़ी विल ग्रीनवुड का भी मानना है कि जब पूरी टीम मिलकर ऐसा करती है, तो यह सामूहिक ताकत बन जाती है। जाहिर है, सिर्फ गेंद के चारों ओर खड़े होने या नंगे पैर घास पर चलने से कोई टीम मैच नहीं जीत सकती, लेकिन अगर खिलाड़ी इन रस्मों पर पूरी तरह विश्वास करते हैं, तो यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि जीत की नींव रखने वाला एक मजबूत मनोवैज्ञानिक हथियार बन सकता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.