हाईकोर्ट ने रेप केस में वॉइस सैंपल जांच सही ठहराई:निष्पक्ष ट्रायल के लिए इसे जरूरी बताया, पीड़िता की याचिका खारिज

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बलात्कार और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में कॉल रिकॉर्डिंग और वॉइस सैंपल की एफएसएल जांच को सही ठहराया है। कोर्ट ने पीड़िता की याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट ने 1 मई 2024 को दी थी अनुमति ग्वालियर के विशेष न्यायाधीश (अत्याचार) ने 1 मई 2024 को आरोपी के आवेदन पर पेन ड्राइव में मौजूद कॉल रिकॉर्डिंग की जांच और आरोपी व पीड़िता के वॉइस सैंपल की एफएसएल जांच की अनुमति दी थी। निष्पक्ष सुनवाई के लिए साक्ष्य का अधिकार जरूरी जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए आरोपी को अपने बचाव में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अधिकार है। केवल ट्रायल शुरू होने के आधार पर जांच से इनकार नहीं किया जा सकता। पीड़िता ने जांच को बताया अनावश्यक देरी पीड़िता की ओर से कहा गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और बयान दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में वॉइस सैंपल जांच की अनुमति ट्रायल को अनावश्यक रूप से लंबा करने का प्रयास है। याचिका में कहा गया कि आरोपी का आवेदन स्पष्ट नहीं है। कॉल रिकॉर्डिंग की तारीख, समय और उसकी प्रामाणिकता का उल्लेख नहीं किया गया, इसलिए जांच की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।
गोआंग, कर्नाटक समेत 4 राज्यों में राजस्थान के लिए बीजेपी ने निकाली लॉटरी, कोलोराडो की लिस्ट जारी, जानिए किस पर दांव

उद्योग ने गोएग, नागालैंड, कर्नाटक और त्रिपुरा में होने वाले विधानसभा के लिए अपने पैमाने के नाम की घोषणा कर दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया. ये स्केल्स उन पार्सल पर हो रहे हैं जहां पर स्टैट्स का निधन हो गया था। वोटिंग 9 अप्रैल 2026 को आएगी और नतीजे 4 मई 2026 को आएंगे। किस नेता को मिला किस सीट से मौका? बीजेपी ने स्थानीय स्तर के मजबूत और लोकप्रिय टिकटों की डिलीवरी का निर्णय लिया है। पार्टी महासचिव का कहना है कि स्थानीय संगठन का चयन में राय को काफी महत्व दिया गया है. पार्टी ने गोआ की पोंडा सीट से रितेश नायक को उम्मीदवार बनाया है. यह सीट संख्या 21 है और यहां पर एक साधारण कार्यकर्ता की मृत्यु हो गई थी। नागालैंड की कोरिडांग (अनुसूचित जनजाति) सीट से दाओचियर इल इंचेन को टिकट दिए गए हैं। यह सीट नंबर 28 है और यहां किसी भी नेता की मौत का कारण गंभीर हो रहा है। कर्नाटक में दो रेज़्यूमे पर उम्मीदवार घोषित किये गये हैं। बागलकोट सीट से श्री वीरभद्रैया चारन्तिमठ को उम्मीदवार बनाया गया है, जो सीट नंबर 24 है। वहीं दावणगेरे साउथ सीट से श्रीनिवास टी. दासाकिरप्पा को टिकटें मिलीं। यह सीट नंबर 107 है और यहां किसी भी नेता की मृत्यु के बाद मृत्यु हो जाती है। त्रिपुरा की धर्मनगर सीट से श्री जवाहरलाल नेहरू सीट के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। यह सीट नंबर 56 है और यहां नेताओं के निधन के कारण चुनाव हो रहा है। बीजेपी की चुनाव समिति की बैठक में हुआ फैसला भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक 18 मार्च 2026 को नई दिल्ली में हुई, जिसमें पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बैठक में विश्वनाथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गणेश ने की। इस बैठक में 2026 के लिए ग्रेनाइट के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई।
‘सीएम के साथ आराम’: कर्नाटक कांग्रेस में दरार बढ़ी क्योंकि शिवकुमार ने विधायक अनुशासन प्रश्न को टाल दिया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 09:32 IST डीके शिवकुमार ने कहा, ”कांग्रेस विधायक दल में शामिल विधायकों के बीच अनुशासन सुनिश्चित करने की मुझसे ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी सीएम सिद्धारमैया की है।” कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार. (न्यूज़18) कर्नाटक कांग्रेस के भीतर आंतरिक सत्ता संघर्ष तेज हो गया है क्योंकि उपमुख्यमंत्री और केपीसीसी अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने पार्टी विधायकों के आचरण के संबंध में एक तीखा बयान दिया है। कैबिनेट में जगह पाने की मांग कर रहे विधायकों के विभिन्न गुटों द्वारा आयोजित “रात्रिभोज बैठकों” में वृद्धि के बीच, शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के भीतर व्यवस्था बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की है। शिवकुमार ने पार्टी के संगठनात्मक विंग को आंतरिक लॉबिंग की हालिया लहर से प्रभावी ढंग से दूर करते हुए कहा, “विधायकों को प्रबंधित करने की जिम्मेदारी सीएम की है क्योंकि वह विधायक दल के नेता हैं।” उपमुख्यमंत्री ने सरकार के भीतर प्राधिकार के पदानुक्रम पर जोर देते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री विधायकों को नियंत्रित करते हैं। कांग्रेस विधायक दल का हिस्सा रहे विधायकों के बीच अनुशासन सुनिश्चित करने की मुझसे ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की है।” यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पहली बार चुनकर आए और वरिष्ठ विधायकों के बीच स्पष्ट अशांति है। मंगलवार की रात, पहली और दूसरी बार के लगभग 45 विधायक मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व की मांग पर समन्वय करने के लिए बेंगलुरु के एक लक्जरी होटल में एकत्र हुए। इन कनिष्ठ विधायकों ने कथित तौर पर पार्टी आलाकमान के सामने अपनी शिकायतें रखने के लिए जल्द ही नई दिल्ली की यात्रा की योजना बनाई है। इसके साथ ही, बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अध्यक्ष एनए हारिस सहित वरिष्ठ विधायकों के एक अलग समूह ने संभावित कैबिनेट फेरबदल में खुद को शामिल करने के लिए दबाव बनाने के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात की। निजी बैठकों की इस झड़ी ने मुख्यमंत्री के प्रति वफादार लोगों और नेतृत्व में बदलाव या अधिक सत्ता-साझाकरण चाहने वालों के बीच गहराते विभाजन को उजागर किया है। जबकि शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से धैर्य का रुख बनाए रखा है, उनकी हालिया टिप्पणियाँ एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देती हैं, जिससे “डिनर डिप्लोमेसी” को नियंत्रित करने का बोझ पूरी तरह से सिद्धारमैया के कंधों पर आ गया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का सुझाव है कि ये घटनाक्रम उस एकीकृत मोर्चे में टूट का संकेत देते हैं जिसे पार्टी ने 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले पेश करने का प्रयास किया है। स्थिति अस्थिर बनी हुई है क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों गुट आने वाले हफ्तों में अपनी मांगों को राष्ट्रीय नेतृत्व तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। कर्नाटक विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के बाद, कैबिनेट में बदलाव के लिए दबाव बढ़ने की उम्मीद है, जिससे अनुशासन का और परीक्षण होगा, जिस पर शिवकुमार जोर देकर कहते हैं कि इसे बनाए रखना मुख्यमंत्री का कर्तव्य है। पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 09:32 IST समाचार राजनीति ‘सीएम के साथ आराम’: कर्नाटक कांग्रेस में दरार बढ़ी क्योंकि शिवकुमार ने विधायक अनुशासन प्रश्न को टाल दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कांग्रेस सत्ता संघर्ष(टी)कर्नाटक कांग्रेस(टी)डीके शिवकुमार(टी)मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(टी)कांग्रेस विधायक दल(टी)आंतरिक लॉबिंग(टी)कैबिनेट बर्थ(टी)जूनियर विधायक
खंडवा में गुड़ी पड़वा पर भगवा यात्रा आज:सकल हिंदू समाज निकालेगा वाहन रैली, भवानी माता मंदिर से होगी शुरू; बिजली कंपनी ने मेंटेनेंस स्थगित किया

गुड़ी पड़वा और हिंदू नववर्ष के अवसर पर आज (गुरुवार) सकल हिंदू समाज द्वारा एक विशाल भगवा वाहन रैली निकाली जाएगी। यह रैली शाम 4 बजे भवानी माता मंदिर प्रांगण से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए इंदिरा चौक के पास समाप्त होगी। आयोजन को देखते हुए पुलिस ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है, वहीं नववर्ष के आयोजनों के चलते बिजली कंपनी ने भी आज का अपना प्रस्तावित मेंटेनेंस कार्य स्थगित कर दिया है। हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक माधव झा और आयोजन की अध्यक्षता कर रहे राकेश बंसल ने बताया कि हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में यह वाहन रैली निकाली जा रही है। इस रैली में हजारों लोग अपने हाथों में भगवा झंडा थामे वाहनों से शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेंगे। इन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी रैली वाहन रैली गौशाला, अंजनी टॉकीज होते हुए दुबे कॉलोनी और जीडीसी कॉलेज से पड़ावा पहुंचेगी। यहां से रैली मेडिकल चौराहा, शिवाजी चौक, मोघट थाना, शक्कर तालाब, मरी माता मंदिर से रामेश्वर पुलिस चौकी जाएगी। इसके बाद बड़ाबम के रास्ते तीन पुलिया, रेलवे स्टेशन, बॉम्बे बाजार, घंटाघर, नगर निगम, जलेबी चौक, बजरंग चौक, मछली बाजार, टपालचाल और बस स्टैंड से ओवरब्रिज क्रॉस करके इंदिरा चौक माता मंदिर पर समाप्त होगी। बिजली कंपनी ने स्थगित किया मेंटेनेंस गुड़ी पड़वा पर बाजार क्षेत्र में बिजली कंपनी ने मेंटेनेंस शेड्यूल तय किया था। जिसे आयोजनों और नववर्ष को देखते हुए कैंसिल कर दिया गया है। सहायक यंत्री (मेंटेनेंस) महेश कुमार सोलंकी ने बताया कि, “आज सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली कंपनी की ओर से मेंटेनेंस कार्य किया जाना था, जिसे कि स्थगित कर दिया गया हैं।” इस मेंटेनेंस कार्य के तहत शहर के बॉम्बे बाजार, बुधवारा बाजार और घंटाघर क्षेत्र की बिजली प्रभावित होने वाली थी।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने चाकू से रेता अपना गला, देखें VIDEO:मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने खून से लथपथ शव देखा

धार शहर के आनंद चौपाटी क्षेत्र में खून से लथपथ शव मिला। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज चेक किया तो पता चला कि युवक ने खुद पर हमला किया था, जिससे अत्यधिक खून बहने से उसकी मौत हो गई। घटना गुरुवार सुबह 5.30 बजे की बताई जा रही है। लोगों ने 6 बजे के करीब शव देखा था। कोतवाली थाना प्रभारी दीपक सिंह चौहान के मुताबिक, मृतक की पहचान आनंद चौपाटी के पास रहने वाले 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर कुणाल जोशी के रूप में हुई है। मौके पर सीएसपी सुजावल जग्गा और फॉरेंसिक टीम भी पहुंची है। शराब का आदी और मानसिक रूप से था परेशान सीएसपी सुजावल जग्गा ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए हैं। फुटेज में युवक खुद अपने आप का चाकू से गला काटते हुए दिखाई दे रहा है। इसके बाद उसने अपने शरीर को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया। सीएसपी ने बताया कि आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला है कि मृतक शराब पीने का आदी था। कुछ समय से परेशान था। देखिए तस्वीरें लकवाग्रस्त पिता की देखभाल के लिए छोड़ दी थी जॉब कुणाल जोशी पहले इंदौर की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। दो साल पहले उसके पिता सूर्यनारायण जोशी को पैरालिसिस हो गया था, जिससे वह बेड पर रहते हैं। उनकी देखभाल करने के लिए कुणाल ने करीब दो साल पहले अपनी जॉब छोड़ दी थी और धार में रहने लगा था। उसका छोटा भाई इंदौर में रहता है।
मंदसौर में जानलेवा हमले के दोषियों को 6-6 साल कारावास:परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह से हुआ था विवाद, आरोपियों ने की था फायरिंग

मंदसौर में निकाह को लेकर उपजी रंजिश में जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 6-6 वर्ष के कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई है। यह निर्णय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आसिफ अब्दुल्लाह की अदालत ने सुनाया। परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह बना विवाद की वजह अभियोजन के अनुसार, 22 जुलाई 2024 को फरियादी इसराईल ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध सन्नो से निकाह किया था। इस निकाह से नाराज होकर सन्नो के भाई आफताब और शाहरुख इसराईल से रंजिश रखने लगे। निकाह के बाद इसराईल रतलाम में रहने लगा था, लेकिन घटना से तीन दिन पहले वह अपने दादा के कार्यक्रम में शामिल होने मुल्तानपुरा आया हुआ था। दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या का प्रयास घटना के दिन दोपहर करीब 3:15 बजे इसराईल अपने चाचा के घर के बाहर बैठा हुआ था। इसी दौरान सोहेल टांडिया मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा। मौके पर मौजूद शाहरुख ने उसे इसराईल पर गोली चलाने के लिए उकसाया। जान बचाने के लिए इसराईल घर के अंदर भागा, लेकिन आफताब ने उसका पीछा कर पिस्टल से फायर कर दिया। गोली लगने से इसराईल मौके पर गिर पड़ा। शोर सुनकर लोग इकट्ठा हुए, तब तक तीनों आरोपी मौके से फरार हो चुके थे। पुलिस की कार्रवाई और मजबूत साक्ष्य घटना के बाद थाना वाय.डी. नगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 256/2024 दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की विवेचना उप निरीक्षक कपिल सौराष्ट्रीय द्वारा की गई, जिन्होंने साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 12 साक्षियों के बयान और 31 दस्तावेज न्यायालय के समक्ष पेश किए। न्यायालय ने सुनाया सख्त फैसला प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने सोहेल टांडिया, शाहरुख और आफताब को दोषी ठहराया। अदालत ने तीनों को 6-6 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इस प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक भगवतीलाल शर्मा एवं भगवान सिंह चौहान ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट पर हमला:विदेश मंत्रालय बोला- ईरान ने हद पार की; ईरान की धमकी- लारीजारी की हत्या का बदला लेंगे

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 20वां दिन है। ईरान ने बुधवार रात को कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट ‘रास लफान’ पर मिसाइल हमला किया। हमले के बाद वहां आग लग गई और काफी नुकसान हुआ, जिसे काबू करने के लिए तुरंत इमरजेंसी टीमें भेजी गईं। कतर ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। कतर के विदेश मंत्रालय का कहना है कि ईरान ने “रेड लाइन पार कर दी है” क्योंकि उसने आम लोगों और जरूरी जगहों को निशाना बनाया। कतर ने कहा कि ऐसे हमले से पूरे इलाके में हालात बिगड़ सकते हैं, इसलिए सभी देशों को मिलकर तनाव कम करना चाहिए और शांति बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। वहीं ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने धमकी दी है कि सिक्योरिटी चीफ अली लाराजानी की हत्या का बदला लिया जाएगा। खामेनेई ने चेतावनी दी कि ‘हर खून की एक कीमत होती है’ और शहीदों के खून का हिसाब जल्द लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले ईरान को कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत करेंगे। अली लारीजानी के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए… ईरान में दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड पर हमला अमेरिका-इजराइल ने बुधवार को दक्षिणी ईरान में साउथ पार्स गैस फील्ड और असालुयेह शहर की तेल-गैस सुविधाओं पर एयरस्ट्राइक की। साउथ पार्स दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस फील्ड मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में गैस के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया गया। इजराइली मीडिया ने भी बुशहर क्षेत्र में गैस फैसिलिटी पर हमले की जानकारी दी। इससे पहले इजराइल के रक्षा मंत्री ने कहा था कि आज ईरान और लेबनान में ‘बड़े सरप्राइज’ देखने को मिलेंगे, जिसे इन हमलों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में बड़े हमलों की चेतावनी दी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने लोगों से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के प्रमुख तेल और गैस ठिकानों से दूर रहने को कहा। वहीं कतर ने ईरान के गैस फील्ड पर हमले की निंदा की। भारतीय जहाज ‘जग लाडकी’ गुजरात पहुंचा भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ बुधवार को गुजरात के मुंद्रा स्थित अडाणी पोर्ट्स पर पहुंच गया है। यह UAE के फुजैराह पोर्ट से होर्मुज स्ट्रेट पार करते हुए आया है। इसपर 80,886 मीट्रिक टन (लगभग 5.8-6 लाख बैरल) कच्चा तेल लदा है। भारत में हर रोज लगभग 5.5-5.6 मिलियन बैरल (करीब 90 करोड़ लीटर) तेल की खपत होती है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
राष्ट्रपति अयोध्या पहुंचीं, योगी ने स्वागत किया:रामलला के दर्शन करेंगी; श्रीराम यंत्र के पूजन में शामिल होंगी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या पहुंच गई हैं। वह थोड़ी देर में राम मंदिर पहुंचेंगी। उनका काफिला एयरपोर्ट से रवाना हो चुका है। एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति नवरात्रि के पहले दिन रामलला का दर्शन-पूजन करेंगी। इसके बाद दूसरे फ्लोर पर बने राम परिवार दरबार के भी दर्शन करेंगी। राष्ट्रपति श्रीराम यंत्र की स्थापना के पूजन कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। अयोध्या में करीब 5 घंटे रुकने के बाद वह दोपहर 3 बजे मथुरा के लिए रवाना होंगी। मथुरा में राष्ट्रपति इस्कॉन और प्रेम मंदिर में दर्शन करेंगी। शुक्रवार यानी 20 मार्च को वह प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करेंगी। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राष्ट्रपति का यह दूसरा अयोध्या दौरा है। इससे पहले वह 1 मई 2024 को अयोध्या आई थीं, तब उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। राम यंत्र के बारे में जानिए राम यंत्र को कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित मठ में तैयार किया गया। इसके बाद इसे कांचीपुरम से तिरुपति (आंध्र प्रदेश) लाया गया। फिर रथयात्रा के जरिए 10 दिन पहले इसे अयोध्या पहुंचाया गया। राम यंत्र का वजन 150 किलो है। इस पर सोने की परत चढ़ाई गई है। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य रघुनाथ दास शास्त्री ने बताया- राम यंत्र एक विशेष वैदिक ज्यामितीय संरचना है। इसमें भगवान श्रीराम और अन्य देवी-देवताओं की दिव्य ऊर्जा को मंत्रों और आकृतियों के माध्यम से स्थापित किया गया है। इसे अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रपति के अयोध्या दौरे से जुड़ी अपडेट्स जानने के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए—
वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने एक दूसरे पर हमलों में अस्थायी रोक की घोषणा की

अफगानिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद पर काबुल के एक पुनर्वास अस्पताल पर हमले में 400 लोगों को मारने का आरोप लगाने के एक दिन बाद, पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने बुधवार को ईद-उल-फितर के मद्देनजर और सऊदी अरब, तुर्की तथा कतर के अनुरोध पर लड़ाई में अस्थायी रोक की घोषणा की। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़ ने ‘X’ पर एक पोस्ट में यह घोषणा की। यह घोषणा उनके देश द्वारा सीमावर्ती क्षेत्र में कथित तालिबान ठिकानों पर नए हमले किए जाने के कुछ घंटों बाद की गई। उन्होंने कहा, आने वाले इस्लामी त्योहार ईद-उल-फितर के मद्देनजर, अपनी पहल पर और साथ ही सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे ‘भाईचारे वाले इस्लामी देशों’ के अनुरोध पर, पाकिस्तान ने चल रहे ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ के बीच एक अस्थायी रोक की घोषणा करने का फैसला किया है।
नसों के बीच ट्यूमर, महिला का उठना-बैठना था मुश्किल:निजी अस्पतालों ने लौटाया, एम्स में माइक्रोसर्जिकल तकनीक से डॉक्टरों ने निकाला

नसों के बीच विकसित हुए खतरनाक ट्यूमर ने एक 40 वर्षीय महिला की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। हालत यह हो गई थी कि उनका उठना-बैठना तक मुश्किल हो गया और धीरे-धीरे वे बिस्तर पर निर्भर हो गईं। कई निजी अस्पतालों ने इस जटिल सर्जरी को जोखिम भरा बताकर हाथ खड़े कर दिए, जिससे परिवार की उम्मीदें टूटने लगीं। ऐसे कठिन समय में एम्स Bhopal के डॉक्टरों ने चुनौती स्वीकार की और माइक्रोसर्जिकल तकनीक के जरिए नसों के बीच मौजूद ट्यूमर को निकालकर मरीज को नई जिंदगी दी। बिस्तर तक सीमित हो गई थी जिंदगी भोपाल निवासी 40 वर्षीय महिला पिछले कई महीनों से इस न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रही थीं। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि वे खुद से उठ-बैठ भी नहीं पा रही थीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपने शरीर पर नियंत्रण खोना शुरू कर दिया, जिसमें सबसे बड़ी समस्या मल और मूत्र पर नियंत्रण खत्म होना था। डॉक्टरों ने बताया कि महिला को इंट्रामेडुलरी स्पाइनल ट्यूमर की समस्या थी। यह वह गांठ होती है जो रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) के अंदर विकसित होती है। यह बेहद दुर्लभ स्थिति है और कुल स्पाइनल ट्यूमर मामलों में इसका प्रतिशत बहुत कम होता है। इस तरह के ट्यूमर में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि यह सीधे नसों के बीच विकसित होता है, जिससे सर्जरी के दौरान जरा सी चूक स्थायी लकवे का कारण बन सकती है। इसके लक्षणों में शरीर के हिस्सों में कमजोरी, सुन्नपन, चलने में दिक्कत, और मल-मूत्र नियंत्रण में समस्या शामिल हैं। समय पर पहचान और विशेषज्ञ इलाज ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। एक प्रतिशत मामलों में होती है यह बीमारी यह ट्यूमर स्पाइनल श्वाननोमा के बेहद कम, लगभग 1.1 प्रतिशत मामलों में ही देखने को मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति रीढ़ की सर्जरी में सबसे जटिल मानी जाती है, क्योंकि इसमें स्पाइनल कॉर्ड के भीतर से ट्यूमर निकालना होता है। जरा सी चूक भी स्थायी लकवा जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। कई अस्पतालों ने ठुकराया, एम्स में मिली उम्मीद मरीज और उनके परिजनों ने इलाज के लिए कई अस्पतालों का रुख किया, लेकिन कहीं सर्जरी को टाल दिया गया तो कहीं इसे अत्यधिक जोखिम भरा और महंगा बताया गया। लगातार निराशा और आर्थिक संकट के बीच परिवार ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी। ऐसे कठिन समय में उन्होंने एम्स का रुख किया, जहां उन्हें नई उम्मीद मिली। ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. पंकज मिश्रा के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को स्वीकार किया। सर्जरी से पहले विस्तृत जांच और सटीक योजना बनाई गई। ऑपरेशन के दौरान माइक्रोसर्जिकल तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे स्पाइनल कॉर्ड के भीतर मौजूद ट्यूमर को सावधानीपूर्वक हटाया गया। इस प्रक्रिया में नसों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। ये सावधानियां जरूरी अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर की सर्जरी इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में कई विभागों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. एसआरएएन भूषण ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा। वहीं, शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग के डॉ. विट्ठल पुरी ने सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में मरीज ने धीरे-धीरे अपनी शारीरिक क्षमता वापस पाना शुरू किया। आयुष्मान योजना से मिला फ्री इलाज इस पूरे इलाज की एक और खास बात यह रही कि सर्जरी और उपचार पूरी तरह आयुष्मान भारत योजना के तहत फ्री किया गया। इससे मरीज और उसके परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। यह योजना गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। तेजी से हो रहा सुधार, लौट रही सामान्य जिंदगी सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी ताकत वापस पाना शुरू कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने फिर से मल-मूत्र पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है, जो उनके लिए बड़ी राहत की बात है। अब वह धीरे-धीरे सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही हैं।







