Friday, 25 Sep 2026 | 02:23 AM

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वेलकम फिल्म फेम एक्टर मुश्ताक खान का निधन:56 साल की उम्र में ली अंतिम सांस; 5 साल से कैंसर से पीड़ित थे वेलकम फिल्म फेम एक्टर मुश्ताक खान का निधन:56 साल की उम्र में ली अंतिम सांस; 5 साल से कैंसर से पीड़ित थे अनुपम खेर बोले- गोविंदा अपने आसपास के माहौल से परेशान:कहा- आदतों को काम पर हावी न होने दें; रूमर्ड गर्लफ्रेंड के चलते विवाद में फंसे गोविंदा अनुपम खेर बोले- गोविंदा अपने आसपास के माहौल से परेशान:कहा- आदतों को काम पर हावी न होने दें; रूमर्ड गर्लफ्रेंड के चलते विवाद में फंसे गोविंदा 13 साल की छात्रा ने बनाया स्टडी ऐप:लॉन्च होने के 3 दिन में ढाई लाख की कमाई, AI की मदद से बिना कोडिंग जाने किया डिजाइन Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu & Vivek Joshi Profile Details
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आमिर खान को लॉरेंस गैंग की धमकी:गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी को कहा लव जिहाद, बोले- सबक सिखाएंगे; कुछ दिन पहले एक्टर ने दी सफाई

आमिर खान को लॉरेंस गैंग की धमकी:गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी को कहा लव जिहाद, बोले- सबक सिखाएंगे; कुछ दिन पहले एक्टर ने दी सफाई

बॉलीवुड एक्टर आमिर खान को लॉरेंस गैंग की तरफ से जान से मारने की धमकी मिली है। गैंग ने आमिर खान की 5 जुलाई को हुई गौरी स्प्रैट से शादी को लव जिहाद बताया है। खबर लगातार अपडेट हो रही है।

दावा- BLA ने पाकिस्तान के 45 सैनिकों को मारा:बलूचिस्तान में काफिले को बनाया निशाना, क्वेटा-कराची हाइवे से गुजर रहे थे

दावा- BLA ने पाकिस्तान के 45 सैनिकों को मारा:बलूचिस्तान में काफिले को बनाया निशाना, क्वेटा-कराची हाइवे से गुजर रहे थे

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने मस्तुंग जिले में पाकिस्तान सेना के एक काफिले पर हमला किया है। इस हमले में 45 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है, जबकि दर्जनों जवान घायल हुए हैं। यह घटना गुरुवार को क्वेटा-कराची हाइवे पर खदकुचा के पास हुई। पाकिस्तान सेना ने काफिले पर हमले की पुष्टि की है, लेकिन हताहत हुए जवानों की संख्या पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। BLA प्रवक्ता जियांद बलूच ने बयान जारी कर बताया कि इस हमले में काफिले, सुरक्षा टीम और बाद में पहुंची सेना की टुकड़ियों को निशाना बनाया गया। BLA ने इस हमले को ‘फतेह स्क्वाड’ द्वारा अंजाम दिया गया एक सुनियोजित और जबरदस्त हमला बताया है।

दावा- BLA ने पाकिस्तान के 45 सैनिकों को मारा:बलूचिस्तान में काफिले को बनाया निशाना, बचाव में पहुंची टुकड़ी पर भी अटैक

दावा- BLA ने पाकिस्तान के 45 सैनिकों को मारा:बलूचिस्तान में काफिले को बनाया निशाना, बचाव में पहुंची टुकड़ी पर भी अटैक

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने मस्तुंग जिले में पाकिस्तान सेना के एक काफिले पर हमला किया है। इस हमले में 45 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है, जबकि दर्जनों जवान घायल हुए हैं। यह घटना गुरुवार को क्वेटा-कराची हाइवे पर खदकुचा के पास हुई। पाकिस्तान सेना ने काफिले पर हमले की पुष्टि की है, लेकिन हताहत हुए जवानों की संख्या पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। BLA प्रवक्ता जियांद बलूच ने बयान जारी कर बताया कि इस हमले में काफिले, सुरक्षा टीम और बाद में पहुंची सेना की टुकड़ियों को निशाना बनाया गया। BLA ने इस हमले को ‘फतेह स्क्वाड’ द्वारा अंजाम दिया गया एक सुनियोजित और जबरदस्त हमला बताया है। बचाव के लिए पहुंचे सैनिकों पर भी हमला BLA का दावा है कि हमले में सैनिकों को ले जा रही बसों के काफिले को निशाना बनाया गया। इसके अलावा काफिले की सुरक्षा में तैनात सैनिकों और बाद में मौके पर पहुंची अतिरिक्त सैन्य टुकड़ी पर भी हमला किया गया। संगठन के मुताबिक, इसके बाद इलाके में काफी देर तक मुठभेड़ चली। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक माना जाएगा। सीमित रास्तों का उठाता है BLA फायदा बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा, लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है। यहां रेगिस्तान और पहाड़ों के बीच सेना की आवाजाही के लिए गिनी-चुनी मुख्य सड़कें ही हैं। ऐसे में सैनिकों के काफिलों को बार-बार उन्हीं रास्तों से गुजरना पड़ता है। इसका फायदा उठाकर उग्रवादी पहले से उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं और ऐसे स्थान चुनते हैं, जहां घात लगाकर हमला करना आसान हो और सेना के लिए जवाबी कार्रवाई करना मुश्किल हो।

अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक, मेरिटाइम कंट्रोल टावर को बनाया निशाना

अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक, मेरिटाइम कंट्रोल टावर को बनाया निशाना

अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया। इसी दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर भी मिसाइल हमला हुआ। ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, पोर्ट के मेरिटाइम कंट्रोल टावर को निशाना बनाया गया। पिछले एक हफ्ते में इस टावर पर यह तीसरा हमला है। CENTCOM ने कहा कि हमलों में तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान बोला- अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम होगा: ईरानी सांसद बेहनाम सईदी ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया, तो अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम कर दिया जाएगा। 2. बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर खतरा बढ़ा: ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि अगर अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे पर हमला करता है तो वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने के लिए तैयार रहें। 3. होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 9 जहाज गुजरे: समुद्री डेटा कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को सिर्फ 9 जहाजों ने होर्मुज पार किया। मंगलवार को यह संख्या 13 थी। 4. होर्मुज में भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं होगी: भारत सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं। 5. कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला: ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

बांग्लादेश ने भारत की जगह चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट:बदले में ₹7 हजार करोड़ का सॉफ्ट लोन; भारत ने ₹9 हजार करोड़ का ऑफर दिया था

बांग्लादेश ने भारत की जगह चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट:बदले में ₹7 हजार करोड़ का सॉफ्ट लोन; भारत ने ₹9 हजार करोड़ का ऑफर दिया था

बांग्लादेश और चीन के संबंधों में ‘चीनी’ कुछ ज्यादा ही घुलने लगी है। बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने तीस्ता नदी प्रोजेक्ट में भारत के इन्वेस्टमेंट ऑफर को ना कर इसे चीन को सौंप दिया है। चीन लगभग 9 हजार करोड़ रुपए के तीस्ता रिवर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट (TRMP) में ₹7 हजार करोड़ सॉफ्ट लोन के रूप में देगा। बांग्लादेश को इसे 50 साल में चुकाना होगा। जबकि भारत ने चीन को बाहर रखने के लिए 2024 में तत्कालीन शेख हसीना सरकार को 9 हजार करोड़ का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं किया। अब रहमान सरकार ने चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना से समझौता किया है। इस जीटूजी एग्रीमेंट के तहत चीन के इंजीनियरों का दल पिछले हफ्ते ही बांग्लादेश आया था। लगभग 50 इंजीनियरों और टेक्नीकल स्टाफ ने तीस्ता कैचमेंट एरिया का सर्वे किया। इस मानसून में तीस्ता नदी का सर्वे करेगा चीन सूत्रों के अनुसार इस मानसून के दौरान चीन का दल तीस्ता नदी के फ्लो का आकलन कर बांध, जेट्‌टी और अन्य निर्माण कार्यों का प्लान तैयार करेगा। साथ ही इस सीजन में तीस्ता कैचमेंट एरिया में सिल्ट (तलछट) की सफाई में भी चीन ने सहयोग का वादा किया है। बांग्लादेश की मांग थी कि तीस्ता के रन ऑफ (अतिरिक्त बहाव) को चीन इसी मानसून में रोके। जिससे कि अगले साल से प्रस्तावित प्रोजेक्ट के निर्माण से पहले ही बांग्लादेश तीस्ता नदी के पानी का खरीफ ​की बुआई के लिए ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर सके। चीन सेना के इंजीनियर भी प्रोजेक्ट कंपनी में 1. पूर्वोत्तर का एंट्री पॉइंट: परियोजना क्षेत्र (नीलफामारी और रंगपुर) भारतीय सीमा से 10-12 किमी जबकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर से 22 किमी दूर है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को जोड़ता है। पूर्वोत्तर के एंट्री पॉइंट के लिए खतरा हो सकता है। 2. पावर चाइना कंपनी सेना से जुड़ी: पावर चाइना स्वतंत्र व्यावसायिक कंपनी नहीं, बल्कि चीन की सैन्य-नागरिक फ्यूजन नीति से गहराई से जुड़ी सरकारी कंपनी है। ये कंपनी एशिया और अफ्रीका में कई मल्टी पर्पज प्रोजेक्ट्स काे चला रही है। कंपनी में चीन सेना की इंजीनियरिंग काेर के भी लाेग होते हैं। 3. दो-मोर्चों पर चुनौती: सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता है कि सैकड़ों चीनी इंजीनियरों और तकनीशियनों की भारत की पूर्वोत्तर की संवेदनशील सीमा पर लंबे समय तक मौजूदगी भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी। भारत के पूर्वी मोर्चे पर चीन अपनी पैठ को और बढ़ाने में जुट सकता है। बड़ी डिफेंस डील की तैयारी, चीन फाइटर जेट देगा सूत्रों के अनुसार पीएम तारिक रहमान के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल शमशुल इस्लाम ने हाल में चीन के राजदूत के साथ मुलाकात की थी। इसमें बांग्लादेश को चीन के साथ जे सीरीज फाइटर जेट्स देने पर चर्चा हुई। बताया जाता है कि चीन अक्टूबर में 12 जेट्स की पहली खेप देने वाला है।

‘प्रहार, द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द होगी रिलीज:निकम बोले- राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, पूरी बॉडी लैंग्वेज आत्मसात की

‘प्रहार, द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द होगी रिलीज:निकम बोले- राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, पूरी बॉडी लैंग्वेज आत्मसात की

राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘प्रहार: द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द ही रिलीज होगी। इसकी तैयारी और राजकुमार की मेथड एक्टिंग को लेकर खुद वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व पब्लिक प्रॉसिक्यूटर निकम ने खास बातें साझा कीं उज्ज्वल निकम बताते हैं कि ‘राजकुमार राव ने पारंपरिक रिसर्च की तरह लगातार सवाल नहीं पूछे। वह लंबे समय तक सामने बैठकर केवल यह देखते थे कि मैं कैसे बैठता हूं, फाइल कैसे पकड़ता हूं और अदालत में बहस करते समय हाथों का इस्तेमाल कैसे करता हूं। राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, बल्कि पूरी बॉडी लैंग्वेज को आत्मसात किया। उन्होंने मुझसे सवाल कम पूछे, लेकिन मेरी हर सूक्ष्म बारिकियों को बखूबी पकड़ा।’ संवाद रटने से ज्यादा व्यक्तित्व समझने पर फोकस किया गया निकम के मुताबिक, ‘राजकुमार की दिलचस्पी संवाद याद करने से ज्यादा उस व्यक्तित्व को समझने में थी, जिसे उन्हें परदे पर जीना था। वह रियल लाइफ में इंट्रोवर्ट हैं लेकिन किरदार की तैयार के लिहाज से की जाने वाली हर चीज जेहन में दर्ज करते जाते हैं। खास बात ये है कि वह अनावश्यक बातचीत में समय नहीं गंवाते। यही उनकी तैयारी की सबसे बड़ी ताकत है।’ वॉइस पर भी खास मेहनत की गई निकम का कहना है कि ‘अदालत में किसी वकील की पहचान केवल कानूनी ज्ञान से नहीं, बल्कि प्रस्तुति से भी बनती है। वॉइस कब ऊंची होगी, कब धीमी होगी और किस तर्क पर कितना विराम लेना है। इन बारीकियों पर राजकुमार ने खास तौर पर विशेष मेहनत की। उन्होंने सिर्फ संवाद याद नहीं किए, बल्कि उस लय को पकड़ने की कोशिश की जिसमें मैं अदालत में दलीलें रखता हूं।’ पुराने वीडियो देखकर राजकुमार ने पकड़ी निकम की शैली व्यक्तिगत मुलाकातों के अलावा राजकुमार ने निकम की कई पुराने दलीलों और रिकॉर्डिंग्स को बार-बार देखा। बकौल निकम, ‘मैंने देखा कि वह शब्दों पर जोर, बोलने की स्पीड और चेहरे के भावों को समझने के लिए मेरे वीडियोज बार-बार देखते थे। यह किसी संवाद को याद करने का नहीं, बल्कि एक इंसान के व्यक्तित्व को आत्मसात करने का अभ्यास था।’ निर्देशक के साथ असली कोर्ट जाकर लाइव माहौल भी समझा निर्देशक अविनाश अरुण के साथ राजकुमार ने वास्तविक अदालत की कार्यवाही भी देखी। निकम कहते हैं कि ‘राजकुमार को असल कोर्ट में जाकर समझ आया कि कोर्टरूम फिल्मों से बिल्कुल अलग दुनिया है। वहां हर शब्द का महत्व होता है, हर प्रतिक्रिया नियंत्रित होती है। अभिनय से ज्यादा संयम जरूरी होता है।’ शूटिंग के दौरान खुद सेट पर पहुंचे थे निकम, बोल दिए संवाद निकम के अनुसार, किसी व्यक्ति की हूबहू नकल करना आसान है लेकिन उसे परदे पर विश्वसनीय बनाना मुश्किल। राजकुमार ने मेरी आवाज या चाल की कॉपी करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने मेरी सोच, प्रतिक्रिया और ऊर्जा को समझने की कोशिश की। एक कोर्ट सीन की शूटिंग के दौरान मैं अचानक सेट पर पहुंच गया था और वह संवाद खुद बोल दिया, जिसे राजकुमार बोलने वाले थे। कुछ पल के लिए पूरी यूनिट चौंक गई। बाद में जब सभी को पता चला कि यह मजाक था, तो सेट पर ठहाके गूंज उठे।’

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो का मुख्य बिजनेस यानी आईटी सर्विसेज का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कंसॉलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो का मुख्य बिजनेस यानी आईटी सर्विसेज का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कंसॉलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।

जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री के बाद अब रक्षामंत्री को भी हटाया:ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ा था, फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे

ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ने वाले रक्षामंत्री हटाए गए:जेलेंस्की के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे, इसी महीने प्रधानमंत्री को भी हटाया था

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव को नियुक्ति के सिर्फ छह महीने बाद पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी कीव में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसके अलावा ओडेसा, ल्वीव और रूस के हमलों का लगातार सामना कर रहे खारकीव शहर में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। खारकीव में 300 से ज्यादा लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाए। 35 साल के फेडोरोव यूक्रेन के ड्रोन युद्ध कार्यक्रम का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते थे। उन्हें यूक्रेन में ड्रोन और रोबोट की मदद से युद्ध लड़ने की रणनीति का प्रमुख समर्थक माना जाता था। उनके हटने से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि रूस जैसी बड़ी सेना का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन की नई तकनीक और ड्रोन पर आधारित रणनीति आगे भी पहले की तरह जारी रहेगी या नहीं। फेडोरोव को हटाया जाना जेलेंस्की सरकार में बड़े बदलाव का हिस्सा है। इसी फेरबदल में प्रधानमंत्री को भी हटाया गया है। पहले डिजिटल मंत्री थे, फिर बने रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री बनने से पहले फेडोरोव यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (ई-गवर्नेंस) मंत्री थे। वे कई वर्षों तक जेलेंस्की के सबसे भरोसेमंद तकनीकी सलाहकार भी रहे। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने सेना में नई तकनीक, ड्रोन और रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया। उसी दौरान यूक्रेन के कई पुराने ड्रोन प्रोजेक्ट सफल होने लगे। यूक्रेन ने रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक लगातार ड्रोन हमले किए और कब्जे वाले क्रीमिया को निशाना बनाकर वहां रूसी सेना की आपूर्ति और ठिकानों पर हमले किए। इन सफलताओं से यूक्रेन में लोगों का भरोसा बढ़ा कि नई तकनीक के जरिए रूस का मुकाबला किया जा सकता है। शुरुआत से ही सेना के जनरलों से मतभेद रहे कई रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री फेदोरोव को हटाने के पीछे भ्रष्टाचार या नाकामी नहीं, बल्कि सेना के शीर्ष जनरलों और कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की के साथ उनका गहरा मतभेद था। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के तुरंत बाद से ही फेडोरोव की उनसे बहस होने लगी थी। फेडोरोव का मानना था कि भविष्य का युद्ध ड्रोन, रोबोट और नई तकनीक से लड़ा जाएगा। लेकिन सिरस्की का कहना था कि यह सोच पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना था कि युद्ध जीतने के लिए अब भी सैनिकों को मोर्चे पर जाकर लड़ना पड़ेगा। केवल ड्रोन से युद्ध नहीं जीता जा सकता। दोनों के बीच आपसी बातचीत भी बंद हो गई थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कमान के इस टकराव को सुलझाने के लिए सेना के जनरलों का पक्ष लिया और फेदोरोव को हटाने का फैसला किया। रक्षा उद्योग की बड़ी कंपनियां भी नाराज हो गईं फेडोरोव ने हथियार खरीदने की व्यवस्था बदलने की कोशिश की। इससे अरबों डॉलर के रक्षा उद्योग से जुड़े कई ठेकेदार उनके विरोधी बन गए। उन्होंने ब्रेव-1 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसे लोग ‘हथियारों का अमेजन’ कहते थे। इसके जरिए सैनिक अपनी जरूरत के कुछ हथियार और उपकरण खुद ऑनलाइन चुन सकते थे और मंगा सकते थे। इसके अलावा उन्होंने डॉटचेन नाम का एक और प्लेटफॉर्म भी शुरू किया। इन दोनों सिस्टम की वजह से हथियार खरीदने की पारंपरिक सरकारी प्रक्रिया कमजोर होने लगी। इससे हथियार कंपनियों की लॉबिंग और बंद कमरों में होने वाले रक्षा सौदों पर असर पड़ा। यही वजह थी कि कई बड़े रक्षा ठेकेदार उनके खिलाफ हो गए। सेना के भीतर भी विरोध था सेना के कुछ अधिकारियों का कहना था कि फेडोरोव के पास सैन्य अनुभव नहीं था। उनके आलोचकों का कहना था कि वे युद्ध का अनुभव रखने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि अच्छी प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) देने वाले व्यक्ति हैं। उनके कई वरिष्ठ सहयोगी भी पहले डिजिटल मंत्रालय में काम करते थे। वे सेना से नहीं आए थे। इस वजह से भी सेना के भीतर उनके नेतृत्व पर सवाल उठते रहे। फेडोरोव के एक वरिष्ठ सहयोगी ने स्केल्या (Skelya) नाम की हमलावर सैन्य यूनिट की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि उस यूनिट को लड़ाई में भारी नुकसान हुआ। इसके जवाब में स्केल्या यूनिट ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें युद्ध की इतनी समझ है तो वे खुद मोर्चे पर जाकर हमला करके दिखाएं। यह विवाद भी काफी चर्चा में रहा। रक्षामंत्री की लोकप्रियता भी परेशानी बन गई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फेडोरोव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। वे ड्रोन कार्यक्रम का चेहरा बन चुके थे और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। कीव स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक पेंटा सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के प्रमुख वोलोदिमिर फेसेन्को ने कहा, “जेलेंस्की चाहते हैं कि सरकार में सबसे बड़ा चेहरा वही बने रहें।” फेसेन्को ने यह भी कहा कि फेडोरोव को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा था। संभव है कि जेलेंस्की ने इसे भी अपने लिए राजनीतिक खतरे के रूप में देखा हो। यूक्रेन की समाचार वेबसाइट उक्राइन्स्का प्रावदा के मुताबिक, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने राजनीतिक सहयोगियों से कहा कि फेडोरोव, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग के बीच बढ़ते विवाद अब उनके लिए संभालना मुश्किल हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, यही वजह बनी कि आखिरकार जेलेंस्की ने उन्हें रक्षा मंत्री के पद से हटाने का फैसला किया।

सोहेल खान बेटे का नाम 'राम खान' रखना चाहते थे:जन्म के बाद फिर क्यों बेटे का नाम 'निर्वाण' रखा गया? एक्टर ने सुनाया किस्सा

सोहेल खान बेटे का नाम 'राम खान' रखना चाहते थे:जन्म के बाद फिर क्यों बेटे का नाम 'निर्वाण' रखा गया? एक्टर ने सुनाया किस्सा

एक्टर सोहेल खान ने हाल ही में बताया कि वह अपने बड़े बेटे का नाम ‘राम खान’ रखना चाहते थे, लेकिन बेटे के जन्म के बाद सीमा सजदेह ने उसका नाम ‘निर्वाण’ रख दिया था। उन्होंने यह बात रियलिटी शो ‘अलायंस’ में बातचीत के दौरान शेयर की। शो में वाइल्डकार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर आए अली गोनी ने सोहेल और सीमा की परवरिश की तारीफ करते हुए कहा कि उनके बच्चे बहुत अच्छे संस्कार वाले हैं। इस पर सोहेल ने बताया कि पहली संतान के जन्म से पहले उन्होंने और सीमा ने मजाक में तय किया था कि बेटा हुआ तो नाम वह रखेंगे और बेटी हुई तो नाम सीमा रखेंगी। सोहेल ने कहा कि वह बेटे का नाम ‘राम खान’ रखना चाहते थे और इसे उन्होंने अपने परिवार की सेक्युलर सोच का उदाहरण बताया। हालांकि, बेटे के जन्म के बाद जब सीमा को होश आया तो उन्होंने सबसे पहले बच्चे का नाम ‘निर्वाण’ लिया। सोहेल ने कहा कि उस पल के बाद वह नाम बदलना नहीं चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाण का स्वभाव भी उसके नाम की तरह शांत और संतुलित है। शो में दिख रही सोहेल और सीमा की अच्छी बॉन्डिंग शो में सीमा की एंट्री के बाद दोनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग देखने को मिल रही है। सीमा का स्वागत करते हुए सोहेल ने कहा था कि उन्होंने 25 साल इस खूबसूरत महिला के साथ बिताए हैं और अगर रिश्ते में कोई गलती हुई तो उसकी जिम्मेदारी वह लेते हैं। सीमा ने भी सोहेल के प्रति अपनापन जताया। जब होस्ट कुणाल खेमू ने उनसे गेम में उनके सहयोगी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि फिलहाल सोहेल ही उनके इकलौते सहयोगी हैं। बाद में सोहेल ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य को देखकर उन्हें अंदर से खुशी हुई। शादी टूटने पर भी की बात एक अन्य एपिसोड में सोहेल ने अपनी शादी टूटने पर भी बात की। निखिल चिनप्पा के सवाल पर उन्होंने कहा था कि उस समय उनका काम ठीक नहीं चल रहा था और वह सही मानसिक स्थिति में नहीं थे। अपने व्यवहार की वजह से उन्होंने उस इंसान को खो दिया, जिससे वह बहुत प्यार करते थे। उन्होंने कहा था कि सीमा उनके दोनों बच्चों की मां हैं और प्यार से भी ज्यादा वह उनका सम्मान करते हैं। उनके मुताबिक, इस शो ने दोनों को फिर से बातचीत करने और एक-दूसरे से खुलकर बात करने का मौका दिया। सोहेल और सीमा की पहली मुलाकात चंकी पांडे की सगाई की पार्टी में हुई थी। सोहेल पहली नजर में ही सीमा को दिल दे बैठे। जल्द ही दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया। लेकिन अलग-अलग धर्म होने की वजह से सीमा का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। परिवार के विरोध के बावजूद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। 15 मार्च 1998 को, जिस दिन सोहेल की पहली डायरेक्टेड फिल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’ रिलीज हुई, उसी दिन दोनों ने घर से भागकर शादी कर ली। पहले आर्य समाज मंदिर में फेरे लिए और फिर निकाह किया। उनका पहला बेटा निर्वाण 2000 में और दूसरा बेटा योहान 2011 में हुआ। दोनों 2022 में अलग हो गए। रियलिटी गेम शो ‘अलायंस’ को कुणाल खेमू होस्ट कर रहे हैं। शो में रिश्तों और दोस्ती के समीकरण हर दिन बदलते रहते हैं। यह शो प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रहा है, जिसमें फिल्म और टीवी कलाकारों के साथ कई इंफ्लुएंसर्स भी हिस्सा ले रहे हैं। इसमें सोहेल खान, मिनी माथुर, कुशल टंडन, नीति टेलर और पायल गेमिंग शामिल हैं।