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विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो का मुख्य बिजनेस यानी आईटी सर्विसेज का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कंसॉलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।

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आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो का मुख्य बिजनेस यानी आईटी सर्विसेज का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कंसॉलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।

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