अमेरिकी पुलिस गुरुद्वारे में जूते पहनकर घुसी, VIDEO:सिर भी नंगा; गोलक को लेकर हुआ था झगड़ा; SGPC बोली- दोषियों पर कार्रवाई हो

अमेरिका की पुलिस एक गुरुद्वारे में जूते पहनकर ही अंदर घुस गई। जिस जगह पुलिस वाले खड़े थे, वहीं पर श्री गुरू ग्रंथ साहिब का पवित्र स्वरूप भी रखा हुआ था। इसका वीडियो सामने आते ही पंजाब में सिख संगठनों में गुस्सा है। उन्होंने इसे मर्यादा के उलट बताया है। पुलिस यहां गोलक को लेकर हुए विवाद के बाद आई थी। हालांकि इस बारे में अभी तक गुरुद्वारा कमेटी या अमेरिकी पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि अमेरिका में रहने वाले कुछ लोगों का दावा है कि जूते भी अमेरिकी पुलिस की यूनिफॉर्म का हिस्सा हैं। ऑन ड्यूटी होने पर वह इसे नहीं उतार सकते। वहीं SGPC ने इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब से मामले की जांच करवाकर ऐसे हालात बनाने के दोषियों को तलब करने और उन पर कार्रवाई की मांग की है। जानिए क्या है पूरा मामला:- जानकारी के मुताबिक अमेरिका के फिलाडेल्फिया में गुरुद्वारा है। 19 मई को यहां पर गोलक में आए डॉलर और नोट गिने जा रहे थे। इस दौरान गिनती में अंतर को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। झगड़ा इतना बढ़ गया कि किसी ने फोन कर वहां अमेरिकी पुलिस बुला ली। पुलिस वाले सीधे गुरुद्वारे के अंदर आ गए। इस दौरान भी 2 पक्षों में वहां बहस होती दिखी। किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो रिकॉर्ड कर दिया। वीडियो में नजर आ रहा है कि जहां पर पुलिसकर्मी खड़ा है, वहीं पर श्री गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप भी हैं। वहीं पास में ही डॉलर और नोट भी जमीन पर गिरे हुए हैं। इस दौरान अमेरिकी पुलिस का जवान लोगों को शांत करने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने सिख मर्यादा के मुताबिक सिर भी नहीं ढका जबकि दूसरे ने टोपी पहन रखी थी। मनजीत जीके बोले- गोलक का झगड़ा निंदनीय, दूसरों को क्या कहेंगे दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने कहा- मैंने फिलाडेल्फिया का वीडियो देखा। यहां झगड़ा भी गोलक को लेकर हुआ। मैं समझता हूं कि इससे निंदनीय बात नहीं हो सकती कि गोलक का झगड़ा हो और उसके पीछे पुलिस आ जाए। पुलिस जूतों समेत नंगे सिर गुरुघर में आ जाती है। यही नहीं, श्री गुरू ग्रंथ साहिब के बिल्कुल आगे खड़ी हो जाती है, जहां हम माथा टेकते हैं। इस दौरान संगत उनसे गुजारिश करती है और प्रबंधक मौके से भाग जाते हैं। मुझे ये समझ नहीं आती, कि प्रबंधक गुरुघर के कस्टोडियन हैं। ये ऐसा काम क्यों करते हैं कि पुलिस अंदर आए। SGPC मेंबर बोले- सिख कौम की भावनाएं आहत हुईं इस बारे में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित गुरुद्वारा साहिब में पुलिस कर्मियों के जूते पहनकर आना दुखदाई और चिंताजनक है। इस वीडियो ने पूरी सिख कौम की भावनाओं को आहत किया है। गुरुद्वारा साहिब, जो श्रद्धा और मर्यादा का केंद्र होता है, वहां इस प्रकार की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रेवाल ने कहा कि चाहे यह मामला गुरुद्वारे के प्रबंधन, गोलक या आपसी विवाद से जुड़ा हो, लेकिन गुरु साहिब की हजूरी में पुलिस का जूतों सहित खड़ा होना सिख परंपराओं और मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे हालात क्यों बने और इसके लिए जिम्मेदार लोग कौन हैं। उन्होंने संगत से भी सहयोग की अपील की, ताकि भविष्य में किसी भी गुरुद्वारा साहिब में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो और गुरुघर की मर्यादा हमेशा कायम रहे।
प्लेट छोड़िए, पत्ता अपनाइए, जानिए केले के पत्ते पर खाने के फायदे और परंपरा के पीछे का विज्ञान

Last Updated:May 21, 2026, 21:25 IST Benefits of Eating Food on Banana Leaves: दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा स्वास्थ्य, संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम माना जाता है. इसमें पत्ते की प्राकृतिक संरचना का उपयोग कर भोजन को अधिक स्वादिष्ट और सुरक्षित बनाया जाता है. गरम भोजन परोसने से पत्ते के प्राकृतिक यौगिक भोजन में मिलकर पाचन और इम्युनिटी को लाभ पहुंचाते हैं. पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स गरम भोजन के संपर्क में आकर स्वास्थ्य लाभ देते हैं. यह परंपरा प्लास्टिक मुक्त और इको-फ्रेंडली है और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है. मंदिरों और घरों में इसका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति का अनूठा संगम माना जाता है. गरमा-गरम भोजन परोसने से पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भोजन में मिल जाते हैं जो पाचन और सेहत के लिए लाभकारी होते हैं. यह परंपरा केमिकल-मुक्त और इको-फ्रेंडली मानी जाती है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है. इसके साथ ही यह मेहमान-नवाजी और समृद्धि का प्रतीक है. पत्ते को बिछाने, धोने और मोड़ने की प्रक्रिया में सांस्कृतिक शिष्टाचार भी जुड़ा होता है. दक्षिण भारतीय घरों और मंदिरों में इसका विशेष महत्व है और यह परंपरा आज भी प्रचलित है. केले के पत्तों में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो ग्रीन टी में भी मौजूद होते हैं. जब गरम भोजन इन पत्तों पर परोसा जाता है तो इनमें मौजूद जैव सक्रिय यौगिक भोजन में मिल जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं. ये तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और पाचन तंत्र को सुधारते हैं. यह परंपरा सांस्कृतिक के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी मानी जाती है. केले के पत्तों का उपयोग पर्यावरण के लिए सुरक्षित और इको-फ्रेंडली है. यह भोजन को प्राकृतिक सुगंध भी प्रदान करते हैं स्वाद बढ़ाता है. होटलों या शादियों में अक्सर प्लास्टिक या धातु की प्लेटों को साफ करने के लिए डिटर्जेंट और केमिकल वाले डिशवॉशर का उपयोग किया जाता है, जिनके सूक्ष्म अंश सतह पर रह जाने की संभावना रहती है. इसके विपरीत, केले के पत्ते प्राकृतिक रूप से शुद्ध और केमिकल-मुक्त होते हैं. इन्हें इस्तेमाल करने से पहले केवल साफ पानी से हल्का धोना पर्याप्त होता है. इनमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम कोटिंग या प्रसंस्करण नहीं होता, जिससे भोजन पूरी तरह प्राकृतिक सतह पर परोसा जाता है. यह न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी टिकाऊ और इको-फ्रेंडली विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google केले के पत्ते की ऊपरी सतह पर प्राकृतिक रूप से एक मोम जैसी पतली परत पाई जाती है. जब इस पर गरमा-गरम भोजन जैसे चावल, सांभर या रसम परोसा जाता है तो यह परत हल्की गर्मी से सक्रिय होकर भोजन में एक खास सुगंध और स्वाद जोड़ देती है. इससे खाने का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है और एक पारंपरिक देसी अनुभव मिलता है. यह प्राकृतिक प्रक्रिया भोजन को हल्की सौंधी खुशबू प्रदान करती है जो इंद्रियों को आकर्षित करती है. यही कारण है कि दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वाद और संस्कृति दोनों के लिए विशेष माना जाता है. केले के पत्ते पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में माने जाते हैं और डिस्पोजेबल प्लास्टिक या थर्माकोल की प्लेटों का बेहतरीन विकल्प हैं. इनका उपयोग एक बार भोजन परोसने के बाद किया जाता है, जिसके बाद इन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है. ये प्राकृतिक रूप से जल्दी सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और कुछ समय बाद जैविक खाद में बदल जाते हैं. इससे न तो प्लास्टिक कचरा बढ़ता है और न ही पर्यावरण प्रदूषण होता है. यह परंपरा टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देती है और प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा के पीछे सांस्कृतिक और व्यावहारिक मान्यताएं हैं. पत्ता हमेशा इस तरह बिछाया जाता है कि उसका चौड़ा हिस्सा दाईं ओर और नुकीला हिस्सा बाईं ओर रहे. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अधिकतर लोग दाएं हाथ से भोजन करते हैं जिससे दाईं ओर अधिक जगह मिलती है और चावल व मुख्य व्यंजन आसानी से परोसे जाते हैं. पत्ते के ऊपरी हिस्से में नमक, अचार, चटनी, सूखी सब्जियां और मिठाई रखी जाती हैं. निचले हिस्से में चावल, सांबर और रसम जैसे मुख्य व्यंजन परोसे जाते हैं. यह परंपरा स्वाद और व्यवस्था दोनों को संतुलित बनाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
गर्मियों में कूलिंग टिप्स: घर में नहीं है एसी या लैपटॉप? भारी गर्मी में मसाला को ठंडी बनायेगी ये एक चीज, पोछे के पानी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है

अगर आपके घर में भी एसी या लैपटॉप नहीं है तो एक चीज आपकी मदद कर सकती है, वो है फिटकरी। पोछा बनाने वाले पानी में फिटकरी मिलाने से लेकर देर तक ठंडा एहसास होता है। साथ ही घर में ताजगी भी रहती है। छवि: फ्रीपिक एक बाल्टी ठंडा या सामान्य पानी लें। इसमें फिटकरी का छोटा टुकड़ा दाल या छोटा फिटकरी पाउडर मिला लें। फ़्लोरिडा तो कुछ बल्बें नींबू या गुलाब जल की भी डाल सकते हैं। अब इस पानी से पूरे घर में पोछा क्षेत्र। छवि: एआई फिटकरी वाले पानी के सामान को जल्दी ठंडा करने में मदद मिलती है और मछली को भी थोड़ा कम लगता है। छवि: फ्रीपिक फिटकरी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सुपरमार्केट की कुछ समय तक बनाए रखने में मदद करते हैं। विशेष रूप से मिश्रित और टाइल्स वाले एसएएम पर प्रभाव अधिक महसूस होता है। छवि: एआई जब आलमारी ठंडी रहती है तो का तापमान भी असुंदर आरामदायक महसूस होता है। इससे संबंधित कम जानकारी है। छवि: फ्रीपिक फिटकरी वाला पानी को कम करने में मदद करता है। यह घर का ताज़ा ताज़ा लगता है। फिटकरी में व्हीस विरोधी-सतत् गुण होते हैं, जिससे ई-सफ़ाई की सफाई बेहतर होती है। छवि: एआई बहुत ज्यादा फिटकरी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। संगमरमर या लकड़ी के टुकड़े पर पहले थोड़ा परीक्षण कर लें। बच्चों और सामान की पहुंच से फिटकरी दूर। छवि: मेटा एआई दिन में ऑर्थोडॉक्स पर मोटोरोला स्कर्ट रहता है। शाम के समय खोले गए सामान ताकि हवा सुरक्षित रहे। कमरे में पानी से भरी बाल्टी या औषधियों का उपयोग करें। छवि: एआई अगर आप भी बिना एसी और पावर के घर को थोड़ा ठंडा और आरामदायक रखना चाहते हैं, तो फिटकरी वाला ये आसान घरेलू उपाय जरूर आजमाएं। कम खर्च में यह उपाय गर्मी और मित्र दोनों को राहत से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)समर फ्लोर कूलिंग टिप्स(टी)फ्लोर क्लीनिंग DIY(टी)फिटकरी का उपयोग(टी)फिटकारी का पोचा लगाने के फायदे(टी)फर्श सफाई टिप्स(टी)होम कूलिंग टिप्स(टी)समर होम कूलिंग टिप्स
रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?
रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?
बादाम केसर ठंडाई ड्रिंक रेसिपी: गरमा गरम घर पर पहले से तैयार बाजार में जैसी बादाम-केसर वाली ठंडी, बनाएं ही हो जाएं कूल-कूल

सामग्री: 1 किलो दूध, 20 बादाम, 1 बड़ा चम्मच खरबूजे के बीज, 1 बड़ा चम्मच, 1 छोटा चम्मच खसखस, 4 काली मिर्च, 5 इलायची, 10 केसर के टुकड़े, 5 बड़ा चम्मच चीनी, 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल, बर्फ के टुकड़े, बादाम-पिस्ता छवि: फ्रीपिक सबसे पहले बादाम को 2-3 घंटे पानी में डुबोएं। इसके बाद बादाम का छिलका हटा दिया गया। पिस्सू में बादाम, खरबुजे के बीज, सौंफ, खसखस, काली मिर्च और इलायची के टुकड़े, पानी के टुकड़े और स्टॉक पेस्ट तैयार कर लें। छवि: एआई अब एक पोटैशियम में दूध और सम्मिलित पेस्ट मिलाप तैयार करें। इसके बाद चीनी, केसर और गुलाब जल स्मारक से मिश्रण करें। अगर आप ज्यादा ठंडा स्वाद चाहते हैं तो इसमें बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. छवि: एआई अब ठंडी को 20-30 मिनट के लिए फ़्रिज़ में रखें ताकि इसका स्वाद और भी बढ़ जाए। बिना सोचे-समझे ठंडा बादाम-केसर ठंडाई के गिलास में और ऊपर से कटे हुए बादाम-केसर ठंडाई सर्व करें। छवि: एआई इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद आता है। यह शरीर को गर्मी और लू से बचने में मदद करता है। बादाम से शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है। छवि: फ्रीपिक सौंफ और इलायची पेट को ठंडा रखने में मदद मिलती है। केसर का स्वाद और शुभकामनाएँ दोनों पुनर्प्राप्त हैं। छवि: फ्रीपिक इस हीट होम पर बनी इस बादाम-केसर कूलाई को जरूर ट्राई करें और इसके साथ ठंडक भरा स्वाद का आनंद लें। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)बादाम-केसर वाली ठंडीई(टी)बादाम-केसर वाली ठंडीई रेसिपी(टी)बादाम ठंडाई(टी)केसर ठंडाई(टी)समर ड्रिंक(टी)कूलिंग ड्रिंक(टी)ठंडाई रेसिपी
सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज साई सुदर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब वह सिर्फ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बस देखने के लिए स्कूल के बाहर सड़क पर खड़े रहते थे। आज IPL में गुजरात का मुकाबला चेन्नई से होना है। मैच से पहले सुदर्शन ने जियोस्टार से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। सुदर्शन ने कहा, क्रीज पर समय बिताना हमेशा खास होता है, खासकर जब मैं चेन्नई के खिलाफ खेलता हूं। चाहे कुछ भी कहा जाए, चेन्नई के साथ मेरा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चेन्नई को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्होंने आगे कहा, हम स्कूल के पास सड़क पर सिर्फ उनकी टीम बस को गुजरते देखने के लिए खड़े हो जाया करते थे। वो यादें आज भी बेहद खास हैं। भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे चेन्नई के खिलाफ कुछ यादगार पारियां खेलने का मौका मिला। सुदर्शन ने अपना पहला शतक चेन्नई के खिलाफ ही लगाया सुदर्शन ने मई 2023 के IPL फाइनल में चेन्नई के खिलाफ 96 रन बनाए थे। यह उस सीजन की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। इसके बाद 2024 में सुदर्शन ने इसी टीम के खिलाफ अपना पहला IPL शतक लगाया। यह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। कप्तान शुभमन गिल के साथ साझेदारी और तालमेल कप्तान शुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और समझ को लेकर सुदर्शन ने कहा, शुभमन एक मास्टरमाइंड हैं। वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। उनके साथ होने से आपको कुछ भी करने की आजादी मिलती है क्योंकि आपको पता होता है कि शुभमन वहां मौजूद हैं। मुझे लगता है कि इसका उल्टा भी उतना ही सच है, जब वे गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि मैं वहां हूं और पारी को संभाल हमारे बीच बेहतरीन संबंध हैं, हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। बल्लेबाजों को भी खुद को बदलना होगा इस सीजन धीमी शुरुआत पर सुदर्शन ने कहा, मैं चीजों को जितना हो सके खुला रखने की कोशिश करता हूं। अगर मैच अच्छा रहा है, तो हां, हम उस आत्मविश्वास को आगे ले जा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो हम आगामी मैचों के लिए अपने दिमाग को जितना संभव हो उतना फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि खेल कैसे बदल रहा है क्योंकि टी-20 क्रिकेट बहुत तेजी से बदलता है। बल्लेबाजों के रूप में हमें पता होना चाहिए कि टीम या स्थिति की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें। अगर हम ऐसा करने में सक्षम हैं, तो मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छी बात है।
सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज साई सुदर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब वह सिर्फ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बस देखने के लिए स्कूल के बाहर सड़क पर खड़े रहते थे। आज IPL में गुजरात का मुकाबला चेन्नई से होना है। मैच से पहले सुदर्शन ने जियोस्टार से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। सुदर्शन ने कहा, क्रीज पर समय बिताना हमेशा खास होता है, खासकर जब मैं चेन्नई के खिलाफ खेलता हूं। चाहे कुछ भी कहा जाए, चेन्नई के साथ मेरा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चेन्नई को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्होंने आगे कहा, हम स्कूल के पास सड़क पर सिर्फ उनकी टीम बस को गुजरते देखने के लिए खड़े हो जाया करते थे। वो यादें आज भी बेहद खास हैं। भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे चेन्नई के खिलाफ कुछ यादगार पारियां खेलने का मौका मिला। सुदर्शन ने अपना पहला शतक चेन्नई के खिलाफ ही लगाया सुदर्शन ने मई 2023 के IPL फाइनल में चेन्नई के खिलाफ 96 रन बनाए थे। यह उस सीजन की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। इसके बाद 2024 में सुदर्शन ने इसी टीम के खिलाफ अपना पहला IPL शतक लगाया। यह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। कप्तान शुभमन गिल के साथ साझेदारी और तालमेल कप्तान शुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और समझ को लेकर सुदर्शन ने कहा, शुभमन एक मास्टरमाइंड हैं। वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। उनके साथ होने से आपको कुछ भी करने की आजादी मिलती है क्योंकि आपको पता होता है कि शुभमन वहां मौजूद हैं। मुझे लगता है कि इसका उल्टा भी उतना ही सच है, जब वे गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि मैं वहां हूं और पारी को संभाल हमारे बीच बेहतरीन संबंध हैं, हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। बल्लेबाजों को भी खुद को बदलना होगा इस सीजन धीमी शुरुआत पर सुदर्शन ने कहा, मैं चीजों को जितना हो सके खुला रखने की कोशिश करता हूं। अगर मैच अच्छा रहा है, तो हां, हम उस आत्मविश्वास को आगे ले जा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो हम आगामी मैचों के लिए अपने दिमाग को जितना संभव हो उतना फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि खेल कैसे बदल रहा है क्योंकि टी-20 क्रिकेट बहुत तेजी से बदलता है। बल्लेबाजों के रूप में हमें पता होना चाहिए कि टीम या स्थिति की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें। अगर हम ऐसा करने में सक्षम हैं, तो मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छी बात है।
चेहरा चमकाने के लिए स्किन में इंजेक्शन घुसेड़ा तो खैर नहीं, ब्यूटी क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, लड़कियां भी ध्यान दें

CDSCO Warn against Injectable Cosmetic Products: शहरों में ब्यूटी क्लिनिकों की कोई कमी नहीं है. ऐसे कई ब्यूटी क्लिनिक मिल जाएंगे जहां दावा किया जाएगा कि हमारे पास प्रतिष्ठित संस्थानों से ट्रेंड डर्मेटोलॉजिस्ट है. कुछ क्लिनिकों में चेहरे काया पलट करने के लिए खास सलाह दी जाती है. इसमें कहा जाता है कि जो क्रीम आप चेहरे पर लगाते हैं वह जल्दी असर नहीं करती, इसलिए इसका इंजेक्शन लगा लीजिए. कुछ लोग इस झांसे में आ जाते हैं और झट से इस इंजेक्शन को लगा लेते हैं. इस प्रैक्टिस पर सख्त नराजगी जताते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने एक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कहा गया है कि किसी भी हाल में कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में मंजूरी नहीं है. इसलिए यदि कोई ब्यूटी क्लीनिक ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्स से सख्त कार्रवाई की जाएगी. कॉस्मेटिक का इस्तेमाल इंजेक्शन के लिए नहीं दरअसल, कई ऐसी शिकायतें आ रही थी जिनमें किसी व्यक्ति ने चेहरे में इंजेक्शन लगाया और उसे कई तरह की परेशानियां हो गईं. इसी के बाद CDSCO ने यह नोटिस जारी की. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने साफ किया है कि किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी, क्लीनिक या विक्रेता कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल करने का दावा करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि कॉस्मेटिक कंपनियां ऐसे दावे नहीं कर सकतीं जो लोगों को गुमराह करें. किसी भी उत्पाद के लेबल, पैकेजिंग या विज्ञापन में झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर या इलाज जैसे दावे करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध सरकार ने स्पष्ट किया है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कॉस्मेटिक वे उत्पाद हैं, जो शरीर पर लगाने, छिड़कने या बाहरी इस्तेमाल के लिए होते हैं. इनका उद्देश्य केवल सफाई, सुंदरता बढ़ाना और आकर्षक दिखाना है. इन्हें इलाज या इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. नोटिस में यह भी कहा गया है कि असुरक्षित या प्रतिबंधित सामग्री वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल और कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध है. सीडीएससीओ ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं कॉस्मेटिक उत्पादों का गलत इस्तेमाल, भ्रामक प्रचार या इंजेक्शन के जरिए उपयोग होता दिखे, तो इसकी जानकारी तुरंत नियामक एजेंसियों या राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को दें. अधिकारियों के मुताबिक यह चेतावनी खास तौर पर एस्थेटिक, ब्यूटी और वेलनेस क्लीनिकों के लिए अहम है, जहां स्किन ग्लो, एंटी-एजिंग और ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर इंजेक्शन आधारित प्रक्रियाएं की जा रही हैं. सीडीएससीओ के पास हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है. क्यों खतरनाक हैं ये ब्यूटी इंजेक्शन हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो किसी भी तरह के कॉस्मेटिक प्रोडेक्ट में कई तरह के केमिकल होते हैं. इसलिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इस तरह से बनाया जाता है कि इसमें मौजूद खतरनाक भारी मेटल स्किन के अंदर न घुसे. अगर स्किन की सतह पर लगाए जाने वाले कॉस्मेटिक्स को सीधे इंजेक्शन के जरिए स्किन की भीतरी परतों में डाल दिया जाए, तो यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है. यह कोशिकाओं के स्तर पर विनाशकारी साबित हो सकता है. इसके कई कारण है. इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में पैराबेंस, फेथलेट्स, फॉर्मलडिहाइड, मर्करी, पारा, लेड, सीसा जैसे अत्यंत हानिकारक तत्व होते हैं. इसलिए इसमें सिलिकॉन और मिनिरल ऑयल मिले होते हैं तो त्वचा में लगाने के साथ तुरंत एक सिंथेटिक परत बना लें लेकिन जब ये भारी टॉक्सिक तत्व स्किन के अंदर घुस जाएंगे तो खून में पहुंचकर किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाने लगते है. मर्करी, लेड जैसे तत्व सीधे नर्वस सिस्टम को अटैक करते हैं. फॉर्मेल्डिहाइड जैसे तत्व कैंसर का कारण भी बन सकता है. कभी-कभी गलत डोज के कारण चेहरा संवारने के बजाय चेहरा बदसूरत होने लगता है. गलत डोज या गलत तरीके से सुई लगाने से चेहरे पर परमानेंट निशान, सूजन या पैरालिसिस तक हो सकता है. लड़कियां खास ध्यान दें इन ब्यूटी क्लिनिकों में अधिकांश लड़कियां जाती हैं. उन्हें इस बात पर खास ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि उन्हें नहीं पता होता है कि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में लेने के बाद इसका क्या अंजाम होता है. अगर कोई इंजेक्शन या लेजर ट्रीटमेंट का सुझाव दे रहा है, तो पहले सुनिश्चित करें कि वह डर्मेटोलॉजिस्ट है या नहीं. उसका लाइसेंस देखें, उस क्लिनिक के पास हेल्थ डिपार्टमेंट से सर्जिकल या कॉस्मेटिक प्रक्रिया का लाइसेंस है या नहीं यह भी देखना चाहिए. आप किस डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, उसके बारे में सब कुछ पहले पता करें. सबसे बेहतर यही है कि नेचुरल पर भरोसा करें. इंस्टेंट निखार के बजाय अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी, नींद और तनाव रहित जीवन को अपनाएं.
सोनाक्षी सिन्हा-जहीर इकबाल ने बनाया मेलोडी टॉफी पर वीडियो:पीएम मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की टॉफी; सोशल मीडिया पर शुरू हुआ मेलोडी ट्रेंड

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल सोशल मीडिया पर चल रहे ‘मेलोडी’ ट्रेंड में शामिल हो गए हैं। दोनों ने बुधवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक मजेदार वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में जहीर मेलोडी टॉफी की मशहूर टैगलाइन बोलते नजर आ रहे हैं। दरअसल, यह पूरा ट्रेंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी देने के बाद शुरू हुआ है। जॉइंट इंस्टाग्राम पोस्ट में शेयर किए गए इस वीडियो में सोनाक्षी अपने पति जहीर से पूछती हैं, “तुम क्या पूछना चाहते हो?” इस पर जहीर जवाब देते हैं, “तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं।” जब सोनाक्षी चिढ़ाते हुए कहती हैं “नहीं”, तो जहीर तुरंत अपनी जेब से मेलोडी टॉफी निकालते हैं और कहते हैं, “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।” पीएम मोदी और मेलोनी के वीडियो से शुरू हुआ ट्रेंड इस मेलोडी ट्रेंड का बैकग्राउंड काफी दिलचस्प है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत हो रही थी। जी-7 समिट या द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान भारत की तरफ से इटली को मेलोडी टॉफी का एक पैकेट गिफ्ट किया गया था। इसके बाद से ही यह मामला चर्चा में आया। ‘मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ’ की कहानी वीडियो में इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी कहती हैं, “प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक गिफ्ट लेकर आए हैं, यह बहुत अच्छी टॉफी है।” इस पर पीएम मोदी हंसते हुए कहते हैं, “मेलोडी।” इसके बाद दोनों नेता हंसने लगते हैं। दोनों देशों के बड़े नेताओं के बीच हुई इस बातचीत के बाद से ही सोशल मीडिया पर मेलोडी को लेकर अलग-अलग रील्स और वीडियो बनाने का ट्रेंड शुरू हो गया, जिसमें अब बॉलीवुड के ये सेलिब्रिटीज भी शामिल हो रहे हैं। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की थी शादी बता दें कि सोनाक्षी और जहीर ने साल 2024 में ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत शादी की थी। यह कानून अलग-अलग धर्मों के लोगों को बिना धर्म बदले शादी करने की अनुमति देता है। चूंकि यह एक अंतरधार्मिक विवाह था, इसलिए सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा और बहस हुई थी। सलमान खान की पार्टी में हुई थी पहली मुलाकात सोनाक्षी और जहीर की लव स्टोरी करीब 10 साल पुरानी है। दोनों की पहली मुलाकात साल 2016 में सलमान खान की एक पार्टी में हुई थी। यहीं से उनकी दोस्ती शुरू हुई, जो समय के साथ और मजबूत होती गई। साल 2017 से दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया।








