रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं:अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी- ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बात कही। अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है। SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था। पश्चिम एशिया के तनाव पर बातचीत BRICS और SCO में सहयोग जारी रखेगा भारत मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पेजेश्कियन को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया।
रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रूस गुपचुप तरीके से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक दे रहा था। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें कुछ रूसी मिसाइल एक्सपर्ट ईरान के साथ काम कर रहे थे। कार्यक्रम का मकसद ईरान को ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद करना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वॉरशिप के खिलाफ किया जा सकता है। ईरान के पास सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता नहीं है सुपरसोनिक का मतलब है ऐसी रफ्तार जो आवाज की गति (मैक 1) से ज्यादा हो। सुपरसोनिक मिसाइल कम से कम करीब 1,200 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ती है। ईरान के पास तेज रफ्तार बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ईरान अपनी फत्तह मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 13 से 15 बताता है, यानी लगभग 16,000 से 18,500 किमी/घंटा। ईरान के पास ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो आवाज की रफ्तार से कई गुना तेज जा सकती हैं। लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल का उड़ने का तरीका अलग होता है। वह ऊपर जाती है और फिर तेज रफ्तार से नीचे अपने टारगेट की तरफ आती है। ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल रडार को ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकती है। डिफेंस सिस्टम को उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिलता है। कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइल जमीन या समुद्र की सतह के करीब उड़ती है। धरती की गोलाई और पहाड़ों जैसी चीजों की वजह से रडार उसे तब पकड़ सकता है, जब वह काफी करीब आ चुकी हो। यही वजह है कि ईरान सुपरसोनिक रफ्तार वाली क्रूज मिसाइल बना रहा है। 3 साल तक जारी रहा काम FT के मुताबिक, लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि C430L कार्यक्रम को लेकर रूस और ईरान के बीच बातचीत 2026 की गर्मियों तक जारी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस कार्यक्रम के तहत ईरान ने पूरी तरह तैयार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर ली है या उसे सैन्य इस्तेमाल के लिए कब तक तैनात किया जा सकता है। C430L प्रोग्राम का मकसद- रैमजेट इंजन बनाना FT की जांच के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य फोकस रैमजेट इंजन पर था। यह ऐसा इंजन है, जो तेज रफ्तार से उड़ रही मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए हवा और ईंधन का इस्तेमाल करता है। मिसाइल जब तेजी से आगे बढ़ती है तो सामने से आने वाली हवा इंजन के अंदर जाती है। वहां इस हवा में ईंधन मिलाकर जलाया जाता है। इससे पैदा होने वाली ताकत मिसाइल को आगे बढ़ाने और उसकी तेज रफ्तार बनाए रखने में मदद करती है। रैमजेट इंजन का तेज रफ्तार वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे काम करने के लिए मिसाइल को पहले से पर्याप्त गति चाहिए। इसलिए शुरुआत में मिसाइल को गति देने के लिए अलग इंजन या लॉन्च सिस्टम की जरूरत हो सकती है। ईरान ने रैमजेट इंजन का टेस्ट भी किया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट इंजन विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि रूस की मदद से विकसित कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरानी सेना में तैनात हो चुकी है। पूर्व CIA विश्लेषक जिम लैमसन के मुताबिक, इस तरह की तकनीक ईरान को भविष्य में ऐसा हथियार सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बने। ड्रोन से मिसाइल तकनीक तक पहुंचा रूस-ईरान का सहयोग ईरान पहले ही रूस को शाहेद ड्रोन दे चुका है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। ईरान ने रूस में इन ड्रोनों का उत्पादन शुरू करने में भी मदद की थी। वहीं रूस ने भी ईरान को सैन्य उपकरण और हथियार मुहैया कराए हैं। यह पहली बार हो रहा है जब रूस सिर्फ हथियार देने के बजाय ईरान की अपनी मिसाइल बनाने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। यही वजह है कि C430L प्रोग्राम को रूस और ईरान के सैन्य सहयोग में एक अहम कदम मान जा रहा है। रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी शामिल एफटी के मुताबिक, सी430एल कार्यक्रम को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसबोरोनेक्सपोर्ट ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उसने रूस की मिसाइल कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया के साथ काम किया। अमेरिका ने 2014 में NPO मशिनोस्त्रोयेनिया पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी जहाज, पनडुब्बी और जमीन से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों पर काम करती है। यह कंपनी रूस के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े काम में भी शामिल रही है। FT को मिले लीक दस्तावेजों और यात्रा रिकॉर्ड से पता चलता है कि C430L समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले रूस के हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने ईरान के कई दौरे किए थे।
स्वरा भास्कर बोलीं- रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा:पद्मावत के जौहर सीन विवाद पर दी सफाई; सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से भी हुई बहस

एक्ट्रेस स्वरा भास्कर 2018 की फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर सीन पर दिए गए बयान के बाद विवादों में आ गई हैं। दिल्ली में एक इवेंट के दौरान उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म के जौहर सीन पर सवाल उठाए थे। बयान के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि स्वरा ने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा है। भारी ट्रोलिंग के बाद मंगलवार को स्वरा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर सफाई दी। स्वरा ने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा, बल्कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। दिल्ली के इवेंट में दिए बयान पर शुरू हुआ विवाद यह पूरा विवाद 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ टॉक के दौरान शुरू हुआ था। इवेंट में स्वरा ने फिल्म के क्लाइमेक्स का जिक्र करते हुए कहा था कि एक सीन में गर्भवती महिला का पेट दिखाया गया है जो जौहर करने जा रही है। स्वरा ने कहा था, “यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया था और मैंने थियेटर में ही ‘छी’ कह दिया था। 5 दिन विचार करने के बाद मैंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को ओपन लेटर लिखा था।” उन्होंने आगे कहा ‘क्या आप हमारे जैसे समाज में यही बताना चाहते हैं, जहां मुझे लगता है कि रेप की महामारी फैली हुई है?’ उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर ऐतिहासिक बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया था। इंस्टाग्राम वीडियो शेयर कर दी सफाई मंगलवार को स्वरा भास्कर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर मेरा एक क्लिप वायरल हो रहा है। मुझसे पूछा गया था कि पद्मावत देखने के बाद मैंने ओपन लेटर क्यों लिखा था। मैं साफ करना चाहती हूं कि मैंने रानी पद्मावती या महल की बाकी महिलाओं को कायर नहीं कहा। अगर गाली देनी है तो सही बात पर दीजिए। मैंने कहा था कि अगर मैं रेप पीड़िता होती, तो क्लाइमेक्स देखकर मुझे लगता कि रेप के बाद जिंदा बचकर मैंने कायरता दिखाई है।” ‘क्या महिला की पवित्रता उसकी जान से ज्यादा कीमती है?’ स्वरा ने कहा कि देश में आज भी रेप एक महामारी जैसा बन चुका है। हाल ही में दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जो संदेश दें कि महिला की पवित्रता उसकी जिंदगी से ज्यादा कीमती है? उन्होंने निर्भया केस का उदाहरण देते हुए कहा कि निर्भया ने आखिरी सांस तक अपनी जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ी थी। किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कम नहीं आंकना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी से सोशल मीडिया पर हुई बहस स्वरा के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका ने लिखा कि जब चुनाव मौत और हराम में गुलाम बनने के बीच हो, तो महिलाओं ने मौत को चुना, जो उनका एक फैसला था। इस पर जवाब देते हुए स्वरा ने लिखा, “प्रियंका जी, आप असल बात नहीं समझ रही हैं। बात जौहर करने वाली महिलाओं की पसंद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि हम किस चीज को महिमामंडित कर रहे हैं। क्या रेप के बाद किसी सर्वाइवर को जीने का हक नहीं है?” क्या है पद्मावत का जौहर सीन फिल्म में जौहर का सीन क्लाइमैक्स के पास आता है। अलाउद्दीन खिलजी की सेना राजपूतों को हरा देती है और चित्तौड़ के किले में घुस जाती है। दीपिका पादुकोण का किरदार ‘रानी पद्मावती’ किले की महिलाओं के साथ जौहर करती हैं। फिल्म में इसे पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को आग के हवाले करने की घटना के तौर पर दिखाया गया है।
पाकिस्तान के पहले सिख एंकर के दफ्तर पर रेड:बोले- पुलिस ने वर्करों को पीटा, सामान चुराया; इमरान खान की खबर चलाने पर लगा था बैन

पाकिस्तान के 79 साल के इतिहास में सिख समुदाय से पहले टेलीविजन एंकर और पत्रकार के तौर पर पहचान बनाने वाले हरमीत सिंह के डिजिटल स्टूडियो पर इस्लामाबाद पुलिस की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हरमीत सिंह ने वीडियो जारी कर बताया, करीब दो दिन पहले पुलिस ने उनके स्टूडियो में रेड कर वहां काम कर रहे कर्मचारियों को हिरासत में लिया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। पुलिस वाले सामान चुराकर ले गए। हरमीत सिंह ने पाकिस्तान सरकार, पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर आरोप लगाते हुए कहा- टीवी से बैन और नौकरी जाने के बाद उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से डिजिटल स्टूडियो खड़ा किया था, लेकिन अब पत्रकारिता जारी रखने के लिए उनके पास न नौकरी बची है और न जरूरी संसाधन। हालांकि हरमीत सिंह के आरोपों के बाद पुलिस का कोई बयान सामने नहीं आया। हरमीत सिंह सिख परिवार से हैं और 1947 को बंटवारे के समय हरमीत सिंह का परिवार पाकिस्तान में रह गया। इनके कई रिश्तेदार भारतीय पंजाब में रहते हैं। मौजूदा समय में वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चाकेसर (शांगला) शहर के रहने वाले हैं। पाकिस्तान की इस्लामाबाद पुलिस की ओर से की गई बर्बरता को बताते हुए हरमीत सिंह ने क्या कहा, जानिए… टीवी से बैन के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया…6 बड़ी बातें… 1. टीवी स्क्रीन से बैन और नौकरी गई 31 अगस्त को वीडियो जारी कर हरमीत सिंह ने बताया कि वह सिख समुदाय के पहले पत्रकार हैं, जिन्होंने मुख्यधारा के पाकिस्तानी मीडिया में जगह बनाई। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा दुनिया के सामने पाकिस्तान की सकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की। लेकिन संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, कानून के शासन और पीड़ित लोगों की आवाज उठाने के कारण सत्ताधारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्हें टीवी स्क्रीन पर आने से रोक दिया गया और नौकरी भी चली गई। 2. जमा-पूंजी से बनाया डिजिटल स्टूडियो टीवी में काम के रास्ते बंद होने के बाद हरमीत सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और कुछ फिल्मों से मिले पैसों से दो-तीन दोस्तों के साथ मिलकर छोटा दफ्तर और डिजिटल स्टूडियो शुरू किया। इसका मकसद व्लॉग और पॉडकास्ट के जरिए अपना काम जारी रखना और आजीविका कमाना था। 3. स्टूडियो पर रेड कर सामान जब्त किया हरमीत सिंह का आरोप है कि पुलिस ने उनके दफ्तर पर 30 अगस्त को रेड की और वहां रखा सामान अपने साथ चुराकर ले गई। इसमें 5 कंप्यूटर सिस्टम, कैमरे, पॉडकास्ट माइक, स्टैंड, प्रॉम्प्टर और बैटरियां शामिल थीं। उनका आरोप है कि स्टूडियो में काम करने वाले मुल्तान निवासी सैफ और सहयोगी रजी ताहिर को हिरासत में लिया गया और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट व प्रताड़ना की गई। 4. हरमीत ने कार्रवाई पर उठाए सवाल हरमीत सिंह ने सवाल उठाया कि अगर उनके सहयोगी रजी ताहिर ने पत्रकार के तौर पर कश्मीर (पीओके) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, तो इसके लिए पूरे स्टूडियो का सामान और अन्य कर्मियों के कंप्यूटर जब्त करने का क्या औचित्य था। 5. परिवार ने देश छोड़ने की सलाह दी हरमीत ने बताया कि उनकी सिख बिरादरी और परिवार के लोग उन्हें कोई दूसरा कारोबार करने या देश छोड़ने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि पत्रकारिता के कारण उनकी जान को खतरा है और परिवार की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा पाकिस्तान में रहकर काम करना पसंद किया। 6. मानवाधिकार संगठनों से मदद की अपील हरमीत सिंह ने कहा कि अब उनके पास न नौकरी है और न ही काम जारी रखने के लिए जरूरी सामान। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उनके कैमरों और कंप्यूटर सिस्टम का क्या करेगी। उनका आरोप है कि पत्रकारों को आर्थिक रूप से खत्म किया जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों से पत्रकारों पर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और जब्त सामान वापस दिलाने की अपील की। हरमीत की प्रशासन से तनातनी…2 केस केस-1 केस-2
अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के लिए डायरेक्टर फराह खान की पहली पसंद बताया जाता है। हालांकि, बेटी आराध्या को जन्म देने के बाद फिल्मों में वापसी कर रहीं ऐश्वर्या ने इस फिल्म को ठुकरा दिया था। फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी बननी थी, जबकि उनके पति अभिषेक बच्चन भी फिल्म का हिस्सा थे। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन स्टारर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। ऐश्वर्या ने फिल्म इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म में वह और अभिषेक एक-दूसरे के साथ कास्ट नहीं होंगे और अलग-अलग कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी बनने से स्क्रीन पर अजीब स्थिति पैदा हो सकती है। एक पुराने इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया था कि उन्हें यह फिल्म फिल्मों से ब्रेक के बाद वापसी के लिए बिल्कुल सही लगी थी। 2018 में पत्रकार राजीव मसंद से बातचीत में उन्होंने कहा था कि बड़े ब्लॉकबस्टर और तय बॉक्स ऑफिस वाली ऐसी फिल्म उनके लिए बेहतरीन वापसी हो सकती थी। हालांकि, फिल्म में अभिषेक के पहले से होने की वजह से ऐश्वर्या को इसकी कास्टिंग का डायनेमिक सही नहीं लगा। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर फिल्म ऑफर की जाती तो वह जरूर करतीं, लेकिन अभिषेक के साथ फिल्म में अलग-अलग कलाकारों के साथ जोड़ी बनाना ठीक नहीं लगता। ऐश्वर्या ने माना था कि एक प्रोफेशनल और एक्टर के तौर पर ऐसी फिल्म छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन पत्नी के तौर पर उन्होंने यह फैसला लिया। एक अन्य बातचीत में NDTV से ऐश्वर्या ने कहा था कि उन्हें फिल्म काफी मजेदार लगी थी और उन्हें पता था कि इसकी शूटिंग का अनुभव अच्छा रहेगा, लेकिन फिल्म में उनके और अभिषेक के एक-दूसरे के साथ जोड़ी न बनने की वजह से उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ऐश्वर्या ने और कौन-सी फिल्में ठुकराईं ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के अलावा ऐश्वर्या को कई सफल फिल्मों के ऑफर मिलने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। इनमें ‘ट्रॉय’, ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’, ‘भूल भुलैया’, ‘कृष’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ शामिल हैं। हालांकि, इन फिल्मों को ठुकराने की वजहों से जुड़ी बातें ऐश्वर्या ने खुद कंफर्म नहीं की हैं। अभिषेक-ऐश्वर्या के तलाक की अफवाहें सामने आई थीं अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन के तलाक की अफवाहें साल 2024 में काफी चर्चा में रही थीं। इन अफवाहों को तब हवा मिली, जब जुलाई 2024 में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में अभिषेक पूरे बच्चन परिवार के साथ पहुंचे थे। वहीं, ऐश्वर्या अपनी बेटी आराध्या के साथ अलग नजर आई थीं। इसके बाद ऐश्वर्या को पेरिस फैशन वीक और दूसरे इवेंट्स में भी सिर्फ आराध्या के साथ देखा गया। सोशल मीडिया पर अभिषेक का एक डीपफेक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह तलाक का ऐलान करते दिख रहे थे। इससे अफवाहों को और बढ़ावा मिला। हालांकि, लंबे समय तक चुप रहने के बाद अभिषेक ने इन खबरों पर नाराजगी जताई थी। दिसंबर 2025 में पीपिंग मून से बातचीत में अभिषेक ने कहा था, “अगर आप एक पब्लिक फिगर हैं, तो लोग आपकी हर छोटी बात पर अपनी राय बनाएंगे। हमारे बारे में जो भी गलत बातें लिखी गई हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। ये बातें गलत हैं और जानबूझकर दुख पहुंचाने वाली हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें उनकी शादी के बाद शुरू नहीं हुई थीं, बल्कि शादी से पहले से ही चल रही थीं। अभिषेक ने कहा, “शादी से पहले लोग हमारी शादी की तारीखें बताने लगे थे। शादी के बाद लोग यह तय करने लगे कि हम कब अलग होंगे। ये सब बकवास है। वह मेरी सच्चाई जानती हैं और मैं उनकी सच्चाई जानता हूं। हम अपने परिवार के साथ प्यार और खुशी से रहते हैं, और हमारे लिए यही सबसे ज्यादा मायने रखता है।” पिछले महीने अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या बच्चन को एक साथ मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। वे अमेरिका (न्यूयॉर्क) से अपनी पारिवारिक छुट्टियां बिताकर वापस लौटे थे।
अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के लिए डायरेक्टर फराह खान की पहली पसंद बताया जाता है। हालांकि, बेटी आराध्या को जन्म देने के बाद फिल्मों में वापसी कर रहीं ऐश्वर्या ने इस फिल्म को ठुकरा दिया था। फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी बननी थी, जबकि उनके पति अभिषेक बच्चन भी फिल्म का हिस्सा थे। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन स्टारर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। ऐश्वर्या ने फिल्म इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म में वह और अभिषेक एक-दूसरे के साथ कास्ट नहीं होंगे और अलग-अलग कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी बनने से स्क्रीन पर अजीब स्थिति पैदा हो सकती है। एक पुराने इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया था कि उन्हें यह फिल्म फिल्मों से ब्रेक के बाद वापसी के लिए बिल्कुल सही लगी थी। 2018 में पत्रकार राजीव मसंद से बातचीत में उन्होंने कहा था कि बड़े ब्लॉकबस्टर और तय बॉक्स ऑफिस वाली ऐसी फिल्म उनके लिए बेहतरीन वापसी हो सकती थी। हालांकि, फिल्म में अभिषेक के पहले से होने की वजह से ऐश्वर्या को इसकी कास्टिंग का डायनेमिक सही नहीं लगा। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर फिल्म ऑफर की जाती तो वह जरूर करतीं, लेकिन अभिषेक के साथ फिल्म में अलग-अलग कलाकारों के साथ जोड़ी बनाना ठीक नहीं लगता। ऐश्वर्या ने माना था कि एक प्रोफेशनल और एक्टर के तौर पर ऐसी फिल्म छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन पत्नी के तौर पर उन्होंने यह फैसला लिया। एक अन्य बातचीत में NDTV से ऐश्वर्या ने कहा था कि उन्हें फिल्म काफी मजेदार लगी थी और उन्हें पता था कि इसकी शूटिंग का अनुभव अच्छा रहेगा, लेकिन फिल्म में उनके और अभिषेक के एक-दूसरे के साथ जोड़ी न बनने की वजह से उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ऐश्वर्या ने और कौन-सी फिल्में ठुकराईं ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के अलावा ऐश्वर्या को कई सफल फिल्मों के ऑफर मिलने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। इनमें ‘ट्रॉय’, ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’, ‘भूल भुलैया’, ‘कृष’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ शामिल हैं। हालांकि, इन फिल्मों को ठुकराने की वजहों से जुड़ी बातें ऐश्वर्या ने खुद कंफर्म नहीं की हैं। अभिषेक-ऐश्वर्या के तलाक की अफवाहें सामने आई थीं अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन के तलाक की अफवाहें साल 2024 में काफी चर्चा में रही थीं। इन अफवाहों को तब हवा मिली, जब जुलाई 2024 में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में अभिषेक पूरे बच्चन परिवार के साथ पहुंचे थे। वहीं, ऐश्वर्या अपनी बेटी आराध्या के साथ अलग नजर आई थीं। इसके बाद ऐश्वर्या को पेरिस फैशन वीक और दूसरे इवेंट्स में भी सिर्फ आराध्या के साथ देखा गया। सोशल मीडिया पर अभिषेक का एक डीपफेक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह तलाक का ऐलान करते दिख रहे थे। इससे अफवाहों को और बढ़ावा मिला। हालांकि, लंबे समय तक चुप रहने के बाद अभिषेक ने इन खबरों पर नाराजगी जताई थी। दिसंबर 2025 में पीपिंग मून से बातचीत में अभिषेक ने कहा था, “अगर आप एक पब्लिक फिगर हैं, तो लोग आपकी हर छोटी बात पर अपनी राय बनाएंगे। हमारे बारे में जो भी गलत बातें लिखी गई हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। ये बातें गलत हैं और जानबूझकर दुख पहुंचाने वाली हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें उनकी शादी के बाद शुरू नहीं हुई थीं, बल्कि शादी से पहले से ही चल रही थीं। अभिषेक ने कहा, “शादी से पहले लोग हमारी शादी की तारीखें बताने लगे थे। शादी के बाद लोग यह तय करने लगे कि हम कब अलग होंगे। ये सब बकवास है। वह मेरी सच्चाई जानती हैं और मैं उनकी सच्चाई जानता हूं। हम अपने परिवार के साथ प्यार और खुशी से रहते हैं, और हमारे लिए यही सबसे ज्यादा मायने रखता है।” पिछले महीने अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या बच्चन को एक साथ मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। वे अमेरिका (न्यूयॉर्क) से अपनी पारिवारिक छुट्टियां बिताकर वापस लौटे थे।
अमेरिका का ईरान पर नया हमला:चाबहार, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप को निशाना बनाया; US बोला- हमारे सैनिकों को निशाना बनाने के बदले किया

ईरानी मीडिया ने मंगलवार को बताया कि दक्षिणी ईरान में सोमवार को कई जगह धमाकों की खबर है। इनमें रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास, चाबहार और केश्म द्वीप शामिल हैं। धमाकों को लेकर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इन घटनाओं में किसी के हताहत होने या नुकसान की भी पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका ने कहा कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर IRGC के हालिया हमलों की कोशिशों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की घटनाओं के बाद किए गए हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है….
मौनी रॉय ने बताया पहला रोल मिलने का किस्सा:सड़क पर चलते हुए ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में मिला था मौका

एक्ट्रेस मौनी रॉय ने हाल ही में बताया कि उन्हें पहले टीवी शो में रोल सड़क पर चलते हुए मिला था। मौनी ने फराह खान के व्लॉग के लिए हुई बातचीत में बताया कि उन्होंने टीवी शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में कृष्णा तुलसी का किरदार निभाकर डेब्यू किया था। यूनिवर्सिटी के बाहर एकता कपूर की टीम ने देखा हाल ही में फराह खान मौनी के मुंबई स्थित घर पहुंची थीं, जहां एक्ट्रेस ने अपने पहले एक्टिंग मौके से जुड़ी बातें शेयर कीं। मौनी ने बताया कि वह अपनी यूनिवर्सिटी के बाहर पैदल चल रही थीं, तभी प्रोड्यूसर एकता कपूर की टीम के किसी व्यक्ति ने उन्हें देखा। फराह यह सुनकर हैरान रह गईं। उन्होंने कहा, “सच में ऐसा हुआ था? क्या बात कर रही है? हम तो ऐसी कहानियां ही सुनते हैं कि कोई कैफे में बैठा था और किसी ने उसे देख लिया।” मौनी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, “लेकिन यह सच में हुआ था। बिल्कुल इसी तरह यह मौका मिला था। यह शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ था।” कृष्णा तुलसी का किरदार और कहानी मौनी ने यह भी बताया कि शो में कृष्णा तुलसी की कहानी दिलचस्प थी और उनके आने से तुलसी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया था। कृष्णा तुलसी के किरदार को एक अनाथ बच्ची के रूप में दिखाया गया था। शो में तुलसी का किरदार स्मृति ईरानी ने निभाया था। जब तुलसी अपनी जान कुर्बान करने के लिए खुद को गंगा नदी में समर्पित करने का फैसला करती है, तब उसे गंगा में तैरती हुई यह बच्ची मिलती है। इसके बाद इस किरदार का नाम तुलसी के नाम पर कृष्णा तुलसी रखा गया था। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में मौनी रॉय की जोड़ी पहले पुलकित सम्राट के साथ बनाई गई थी। बाद में शो में उनकी जोड़ी आकाशदीप सहगल के साथ भी दिखाई गई। इस शो के बाद मौनी ने कई लोकप्रिय टीवी शो में काम किया। उनके प्रमुख प्रोजेक्ट्स में ‘देवों के देव महादेव’ शामिल है, जिसमें उन्होंने सती का किरदार निभाया था। मौनी ने ‘नागिन’ के दो सीजन में भी काम किया। इसमें उन्होंने रूप बदलने वाली नागिनों शिवन्या और शिवांगी के किरदार निभाए थे। एकता कपूर ने कई कलाकारों को मौका दिया गौरतलब है कि एकता कपूर ने टीवी इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकारों को मौका दिया है, जिन्होंने आगे चलकर बड़ा नाम बनाया। उन्होंने जैसा मौका सड़क पर चलते हुए मौनी रॉय को दिया था, वैसा ही कुछ करण कुंद्रा के साथ फेसबुक के जरिए किया था। एकता कपूर ने खुद बताया था कि उन्होंने करण कुंद्रा को कैसे डिस्कवर किया था। करण कुंद्रा एक्टिंग में नहीं आना चाहते थे और जालंधर में अपना पारिवारिक बिजनेस संभाल रहे थे। उन्होंने फेसबुक पर अपनी कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं। एकता कपूर की नजर उनकी फेसबुक प्रोफाइल पर पड़ी। उन्हें करण का लुक और एटीट्यूड इतना पसंद आया कि उन्होंने उन्हें मुंबई बुला लिया। इसके बाद एकता ने उन्हें साल 2009 में अपने बड़े शो ‘कितनी मोहब्बत है’ में ‘अर्जुन पुंज’ का मुख्य किरदार देकर लॉन्च किया। सुशांत को एकता ने नाटक के दौरान देखा था वहीं, एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को एकता कपूर ने बालाजी के एक नाटक के दौरान बैकग्राउंड में देखा था। चैनल वाले सुशांत को ‘पवित्र रिश्ता’ में ‘मानव’ के लीड रोल के लिए रिजेक्ट कर रहे थे क्योंकि उनका लुक हीरो जैसा नहीं लग रहा था, लेकिन एकता अपनी जिद पर अड़ गईं और कहा, “इस लड़के की मुस्कान करोड़ों दिलों को जीतेगी।” और वैसा ही हुआ। स्मृति ईरानी को ‘मिस इंडिया’ प्रतियोगिता में रिजेक्ट कर दिया गया था। जब वह बालाजी के दफ्तर में किसी और रोल के लिए आई थीं, तो एकता कपूर ने उन्हें सिर्फ चलते हुए देखा और अपनी टीम से कहा, “यह लड़की हमारी अगली बड़ी स्टार ‘तुलसी’ बनेगी।” टीम के मना करने के बावजूद एकता ने उन्हें कास्ट किया।
रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। उनका मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। एस्टोनिया के खुफिया प्रमुख काउपो रोसिन ने भी हाल में कहा था कि अगर पुतिन अभी या आने वाले समय में युद्ध रोकते हैं तो उन्हें रूस में कमजोर नेता के तौर पर देखा जा सकता है। पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है और युद्ध का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेकिन युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। रूस के ताकतवर लोगों में बढ़ रही नाराजगी? द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों की चिंता अब सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध में सफलता तक सीमित नहीं है। उनमें यह सवाल भी उठने लगा है कि इस युद्ध में करीब पांच साल बर्बाद हो गए और आखिर हासिल क्या हुआ। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” आसान भाषा में इसका मतलब है कि सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं रह गई हैं। हालांकि, पुतिन की सत्ता पर पकड़ अभी भी मजबूत है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की राजनीति में लोगों को काफी हद तक हिंसा मंजूर हो सकती है, लेकिन हार या नाकामी आसानी से स्वीकार नहीं की जाती। यही वजह है कि पुतिन को कथित तौर पर लगता है कि अगर वह डोनबास पर पूरी तरह कब्जा किए बिना युद्ध खत्म करते हैं, तो इसे उनकी हार माना जा सकता है। इससे रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ने और उनकी सत्ता को चुनौती मिलने का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए युद्ध खत्म करना पुतिन के लिए बड़ी चुनौती एक तरफ युद्ध जारी रखने से रूस को आर्थिक नुकसान और यूक्रेन के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, युद्ध रोकने पर पुतिन को अपनी छवि और सत्ता को लेकर खतरा दिखाई दे रहा है। ऐसे में यूक्रेन युद्ध खत्म करने का फैसला पुतिन के लिए सिर्फ रूस की विदेश नीति का मामला नहीं, बल्कि उनकी अपनी सत्ता और राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।
रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” पुतिन का मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को मिलाकर डोनबास कहा जाता है। रूस का डोनबास के करीब 90% हिस्से पर कंट्रोल है। लुहांस्क: करीब 99.8% हिस्से पर रूस का नियंत्रण डोनेत्स्क: करीब 80% हिस्से पर रूस का नियंत्रण पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है और युद्ध का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेकिन युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। रूस के ताकतवर लोगों में बढ़ रही नाराजगी? द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों की चिंता अब सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध में सफलता तक सीमित नहीं है। उनमें यह सवाल भी उठने लगा है कि इस युद्ध में करीब पांच साल बर्बाद हो गए और आखिर हासिल क्या हुआ। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” आसान भाषा में इसका मतलब है कि सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं रह गई हैं। हालांकि, पुतिन की सत्ता पर पकड़ अभी भी मजबूत है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की राजनीति में लोगों को काफी हद तक हिंसा मंजूर हो सकती है, लेकिन हार या नाकामी आसानी से स्वीकार नहीं की जाती। यही वजह है कि पुतिन को कथित तौर पर लगता है कि अगर वह डोनबास पर पूरी तरह कब्जा किए बिना युद्ध खत्म करते हैं, तो इसे उनकी हार माना जा सकता है। इससे रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ने और उनकी सत्ता को चुनौती मिलने का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए युद्ध खत्म करना पुतिन के लिए बड़ी चुनौती एक तरफ युद्ध जारी रखने से रूस को आर्थिक नुकसान और यूक्रेन के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, युद्ध रोकने पर पुतिन को अपनी छवि और सत्ता को लेकर खतरा दिखाई दे रहा है। ऐसे में यूक्रेन युद्ध खत्म करने का फैसला पुतिन के लिए सिर्फ रूस की विदेश नीति का मामला नहीं, बल्कि उनकी अपनी सत्ता और राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।







