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अवैध बोरिंग पर शिकंजा, मशीन जब्त:सीधी में बिना अनुमति चल रही थी बोरिंग, एजेंट समेत जिम्मेदारों पर एक्शन

अवैध बोरिंग पर शिकंजा, मशीन जब्त:सीधी में बिना अनुमति चल रही थी बोरिंग, एजेंट समेत जिम्मेदारों पर एक्शन

सीधी जिले के चुरहट क्षेत्र के ग्राम कुसमहर में अवैध बोरिंग के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे बिना अनुमति के बोरिंग का कार्य चल रहा था, जिसे रोककर मशीन जब्त कर ली गई। यह अवैध बोरिंग गांव के प्राथमिक स्कूल से महज 100 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही थी, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई थीं। जानकारी मिलते ही एसडीएम विकास कुमार आनंद ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने तहसीलदार रामपुर नैकिन आशीष कुमार मिश्रा को मौके पर भेजा। तहसीलदार ने बोरिंग कार्य करवा रहे लोगों से दस्तावेज मांगे, लेकिन कोई भी वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जा सकी। जांच में पता चला कि बोरिंग लक्ष्मीकांत प्रजापति की जमीन पर हो रही थी, जबकि कार्य कराने का जिम्मा एजेंट जितेंद्र चतुर्वेदी के पास था। दोनों पक्षों के पास आवश्यक अनुमति नहीं थी, जिससे यह कार्य पूरी तरह अवैध पाया गया। दस्तावेजों के अभाव में प्रशासन ने तत्काल बोरिंग मशीन जब्त कर ली। सुरक्षा कारणों से मशीन को सेमरिया थाने में खड़ा करवाया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी कागजी कार्रवाई नहीं हो जाती और मामला न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक मशीन थाने में ही रहेगी। तहसीलदार आशीष कुमार मिश्रा ने बताया कि मौके पर नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अवैध खनन किया जा रहा था, जिस पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। जब्त की गई बोरिंग मशीन शिव शक्ति कंपनी की है, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर KA 01 ME 7577 है। यह मशीन कर्नाटक की बताई जा रही है। गौरतलब है कि सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा ने पहले ही जिले को प्रतिबंधित जोन घोषित कर अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। प्रशासन की कार्रवाई से अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।

खरगोन में पारा 41°C, फिर भी स्कूल टाइम नहीं बदला:तेज धूप में घर लौटने को मजबूर छात्र, मांग के बाद भी फैसला नहीं

खरगोन में पारा 41°C, फिर भी स्कूल टाइम नहीं बदला:तेज धूप में घर लौटने को मजबूर छात्र, मांग के बाद भी फैसला नहीं

खरगोन जिले में भीषण गर्मी के बावजूद स्कूलों के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दोपहर में स्कूल लगने और छुट्टी होने के कारण छात्रों को तेज धूप में घर लौटना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने जिले में लू का अलर्ट जारी किया है। पिछले दो दिनों से तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। शुक्रवार को हल्के बादलों के बावजूद दोपहर में तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया। ग्रामीण क्षेत्र अहिरखेड़ा में दोपहर 3:30 बजे स्कूल से लौटते समय बच्चे रुमाल और दुपट्टे से सिर ढंककर तेज धूप से बचते नजर आए। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चिंता बढ़ा रही है। अत्यधिक गर्मी के कारण स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति भी कम हो रही है। गर्मी और सुविधाओं की कमी के चलते कई विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। शिक्षक संघ ने समय बदलने पत्र लिखा मध्य प्रदेश शिक्षक संघ, खरगोन ने तीन दिन पहले ही कलेक्टर को पत्र लिखकर स्कूलों का समय सुबह करने की मांग की थी। जिला अध्यक्ष सुनील भावसार ने बताया कि कई सरकारी स्कूलों में बिजली और पंखों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे छात्रों को गर्मी में दिक्कत होती है। शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र कानूडे ने अभी तक कलेक्टर को समय परिवर्तन का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है। वर्तमान में स्कूलों की छुट्टी दोपहर 2 बजे के बाद हो रही है, जिससे छात्रों को तेज धूप में घर जाना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे नमी बढ़ेगी और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि फिलहाल गर्मी से राहत के आसार कम हैं।

‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया | राजनीति समाचार

GT vs KKR Live Score, IPL 2026, Playing 11 Today Match Updates: Follow live action here.(Creimas Photo)

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:51 IST पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि। (संसद टीवी पीटीआई के माध्यम से) द्रमुक नेता कनिमोझी ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के खिलाफ पार्टी के विरोध पर निर्देशित “काला टीका” टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया। लोकसभा में बोलते हुए कनिमोझी ने कहा कि वह इस टिप्पणी से आश्चर्यचकित हैं और उन्होंने कहा कि काला देवी काली का रंग है। उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक इस मुद्दे पर अंत तक अपना विरोध जारी रखेगी। गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर बहस में हस्तक्षेप करते हुए, पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष किया था और कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। काले कपड़ों और झंडों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे काम शुरू करने से पहले काला टीका लगाने की परंपरा है जिसके लिए वह उन्हें धन्यवाद देते हैं. शुक्रवार को बहस में भाग लेते हुए, कनिमोझी, जो काली साड़ी पहने हुए थीं, ने कहा कि वह “आश्चर्यचकित हैं कि जो लोग हिंदुत्व की रक्षा के लिए वहां हैं, उन्हें देवी काली की याद नहीं दिलाई गई, जो काली देवी हैं जो काला पहनती हैं”। उन्होंने यह भी कहा कि काला द्रमुक के बौद्धिक नेता पेरियार का भी रंग है, जिन्होंने उन्हें अंत तक लड़ना सिखाया है। कनिमोझी के अलावा डीएमके के अन्य सांसद भी सदन में काले कपड़े पहने हुए थे। द्रमुक सांसद ने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण अधिनियम, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा प्रदान करता है, को समान 543 सीटों के साथ 2029 से लागू किया जाए। उन्होंने मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया को महिलाओं के कोटे से अलग किया जाना चाहिए। गुरुवार को, जबकि DMK सदस्यों ने सदन में काले कपड़े पहने थे, पार्टी नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य में काला झंडा फहराया और परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई, इसे “काला कानून” करार दिया, जो तमिल लोगों को अपनी ही भूमि में “शरणार्थी” बनाने का प्रयास करता है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:50 IST समाचार राजनीति ‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मोदी काला टीका टिप्पणी पर कनिमोझी की प्रतिक्रिया(टी)कनिमोझी लोकसभा भाषण(टी)मोदी काला टीका टिप्पणी(टी)डीएमके काला विरोध(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)परिसीमन और महिला कोटा(टी)डीएमके हिंदुत्व आलोचना(टी)पेरियार काला प्रतीकवाद

फूड एप से 12 ऑर्डर पर ₹900 एक्स्ट्रा खर्च हो:जोमैटो, स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस 3 साल में 9 गुना बढ़ी, यहां दाम भी 15% तक ज्यादा

फूड एप से 12 ऑर्डर पर ₹900 एक्स्ट्रा खर्च हो:जोमैटो, स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस 3 साल में 9 गुना बढ़ी, यहां दाम भी 15% तक ज्यादा

ऑनलाइन ऑर्डर के जरिये खाना मंगवाना, OTT देखना, 10 मिनट में किराना- ये सुविधाएं अब पहले से महंगी हो चुकी हैं। प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और छुपे हुए खर्च मिलकर हर महीने हजारों रुपए यूं ही खर्च हो रहे हैं। यदि आप महीने में 12 बार भी फूड डिलीवरी एप से ऑर्डर करते हैं तो अनजाने में करीब 900 रुपए अतिरक्ति खर्च कर रहे हैं। इसमें 180 रुपए प्लेटफॉर्म फीस और 720 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। यह रकम हर साल बढ़ रही है। 2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। ऑनलाइन मेन्यू के दाम भी ऑफलाइन से 10-15% ज्यादा होते हैं। मंथली खर्च पर बढ़ रहा 2 से 5 हजार का बोझ असली समस्या यह है कि हर खर्च छोटा लगता है। 249 रुपए का लंच, 199 रुपए का सब्सक्रिप्शन, लेकिन ये सब मिलकर परिवार के बजट पर हर महीने 2000-5000 रुपए का बोझ बढ़ा देते हैं। चुनौतीपूर्ण हालात में यह बिजनेस बढ़ता है। कोविड महामारी की सबसे कमजोर तिमाही (जनवरी-मार्च 2020) में जहां SP 500 कंपनियों की बिक्री 1.9% घटी, वहीं सब्सक्रिप्शन बिजनेस 9.5% बढ़े थे। नेटफ्लिक्स की आय 16%, एपल सर्विसेज की 36% और स्पॉटिफाई की 26% बढ़ी थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सब्सक्रिप्शन मॉडल दो दशकों का सबसे लचीला और मजबूत बिजनेस आर्किटेक्चर है। यहां सीधे ग्राहकों की जेब से पैसा आता है। आलस और मुश्किल प्रोसेस से बढ़ रहे पेड ग्राहक मैकिंजी की रिपोर्ट कहती है कि लोग सब्सक्रिप्शन तभी बंद करते हैं जब उसके दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाएं। लेकिन ज्यादातर लोग इसे कैंसिल क्यों नहीं करते? इसकी सबसे बड़ी वजह है ‘जड़ता’ (Inertia) यानी कुछ न करने की आदत। फ्रीमियम मॉडल (जहाँ शुरुआत में सर्विस फ्री मिलती है) वाली कंपनियां 5 साल में करीब 95-100% ग्राहकों को अपने साथ जोड़े रखने में सफल रहती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि 95% ग्राहक उनकी सर्विस से बहुत खुश हैं। असल में, सब्सक्रिप्शन बंद करने के लिए ग्राहक को खुद से मेहनत और प्रोसेस करना पड़ता है, जबकि उसे चालू रखने के लिए उसे कुछ भी नहीं करना पड़ता। इसी आलस या प्रोसेस की जटिलता की वजह से लोग पैसे देते रहते हैं। फूड डिलीवरी, OTT की रफ्तार तेज 1. फूड डिलीवरी: तीन साल में तीन गुना हुआ बाजार 2023 में भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार 69,000 करोड़ रुपए का था। ईएमआर एंड मार्क का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक यह 2.25 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। 2. OTT: 60 करोड़ से ऊपर निकले स्ट्रीमिंग ऑडियंस आईबीईएफ के मुताबिक 2023 में OTT का पेड सब्सक्रिप्शन 8,200 करोड़ रुपए का था। इस साल यह 11,191 करोड़ तक पहुंच सकता है। बीते साल स्ट्रीमिंग ऑडियंस 60.1 करोड़ थे। ईरान जंग का असर: 10% तक और महंगाई के लिए तैयार रहें मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अभी सीमित है। लेकिन कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। यह अब भी 96 डॉलर पर है। अगर जंग लंबा खिंचा तो कई सेक्टरों में 10% से ज्यादा महंगाई देखने को मिल सकती है। वेल्थ मैनेजमेंट फर्म मेवनार्क के मुताबिक, घर के बजट में कम से कम 10% बढ़ने के लिए अभी से तैयार रहें।

पेट की बेलगाम चर्बी पर ICMR का महाप्लान, लाखों लोगों पर हो रही रिसर्च, मोटापा दूर करने का निकालेगा फॉर्मूला

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Last Updated:April 17, 2026, 18:25 IST ICMR Plan for Belly Fat Control: भारत पेट की चर्बी से परेशान है. यहां चौथा वयस्कों के पेट पर बेलगाम चर्बी होती है. पेट की चर्बी घटाने के लिए तरह-तरह की बात की जाती है लेकिन कोई एक मानक फॉर्मूला अब तक तैयार नहीं हो पाया है. इसी समस्या को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR ने एक महाप्लान तैयार किया है. इसके तहत देश भर में लाखों लोगों पर अध्ययन किया जाएगा और ऐसा फॉर्मूला निकाला जाएगा जिससे पेट के मोटापे से मुक्ति मिले. मोटापा कम करने का निकलेगा समाधान. मोटापा कम करने के लिए हजारों तरह के फंडे आजमाए जाते हैं. कोई कहता है कि भोजन कम कर दो. कोई कहता है एक्सरसाइज करो. कोई कहता है वॉक करो. कोई कहता है फास्ट करो तो कोई कहता है योग करो लेकिन क्या कोई ऐसा फॉर्मूला है जिसमें दावे के साथ कहा जाए कि इससे मोटाप कम हो जाएगा. शायद कोई नहीं. किसी को भोजन कम करने से मोटापा कम हो जाता है तो किसी को भोजन कम करने से मोटापा बढ़ ही जाता है. मतलब अब तक कोई भी ऐसी चीज नहीं जिससे मोटापे का फुलप्रूव इलाज किया जा सके. इसी बात को मद्देनजर रखते हुए आईसीएमआर ने एक महाप्लान बनाया है. इस महाप्लान के तहत देश भर में लाखों लोगों पर अध्ययन किया जाएगा और पेट की चर्बी को खत्म करने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका निकाला जाएगा. भारत के लिए प्रभावी तरीका रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर चार में से एक वयस्क पेट की चर्बी से परेशान है. यहां मोटापाग्रस्त व्यक्तियों में अधिकांश के पेट पर चर्बी ही सबसे बड़ी समस्या है. मोटापा भारत में इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि भारतीय चिकित्सा जगत इससे परेशान है. मोटापा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर डिजीज जैसी मेटाबोलिक बीमारियों की प्रमुख वजह है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार इस मोटापे को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे चुके है. अब इस चुनौती से निपटने के लिए देश की सर्वोच्च चिकित्सा संस्था ICMR ने एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है. संस्था अब लाखों लोगों के डेटा का विश्लेषण कर यह पता लगाएगी कि वास्तव में वजन घटाने का कौन सा तरीका भारतीय शरीर और भौगोलिक स्थितियों के हिसाब से सबसे प्रभावी है. शुगर, कोलेस्ट्रॉल का भी विश्लेषण टीओआई के मुताबिक कई वर्षों से चल रही रिसर्च, अलग-अलग डाइट प्लान, फिटनेस रूटीन और जागरुकता अभियानों के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन-सा तरीका सबसे ज्यादा प्रभावी है और किस व्यक्ति पर कौन-सा उपाय बेहतर काम करता है. इस कमी को दूर करने के लिए आईसीएमआर ने विभिन्न अध्ययनों के शोधकर्ताओं से डेटा साझा करने का आह्वान किया है, ताकि एक बड़ा संयुक्त विश्लेषण किया जा सके. इस पहल का मकसद वजन कम करने के लिए विभिन्न उपायों जैसे कि डाइट, एक्सरसाइज, व्यवहार और मल्टी कंपोनेंट इंटवेंशन की प्रभावशालिता पर अध्ययन किया जएगा. यह देखा जाएगा विभिन्न समूहों पर इन सबका क्या असर होता है. यह विश्लेषण केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे मानकों पर भी नजर रखेगा, क्योंकि मोटापा कई लाइफस्टाइल बीमारियों से गहराई से जुड़ा हुआ है. हर उम्र के लोगों के लिए निकलेगा फॉर्मूलाइसका एक अहम फोकस यह भी होगा कि एक ही तरीका कुछ लोगों पर काम करता है जबकि दूसरों पर नहीं. इसके लिए उम्र, लिंग, आय स्तर और भौगोलिक स्थितियों जैसे ग्रामीण इलाकों के आधार पर अंतर का अध्ययन किया जाएगा. ग्रामीण इलाकों में कुपोषण होते हुए भी मोटापा बढ़ रहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह समस्या अब और जटिल होती जा रही है, क्योंकि केवल वजन अब स्वास्थ्य जोखिम का भरोसेमंद पैमाना नहीं रह गया है. अब कई ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं जिनका वजन सामान्य है लेकिन वे मेटाबॉलिक समस्याओं से जूझ रहे हैं. बेशक अधिक वजन वाले लोगों में तुरंत कोई गंभीर जटिलता नहीं दिखती लेकिन बाद कई परेशानियां सामने आ जाती है. इस विश्लेषण से अखिल भारतीय प्रमाण मिलने की उम्मीद है. इस समग्र विश्लेषण के बाद पेट की चर्बी और मोटापे को कम करने के लिए एक सर्वमान्य फॉर्मूला तय किया जाएगा जो पूरे देश के सभी उम्र के लोगों के लिए प्रभावी होगा. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 17, 2026, 18:25 IST

सरपंच पति पर हमला करने वाले तीन आरोपी पकड़ाए:शादी विवाद में रॉड से किया था वार , 6 बदमाश अभी भी फरार

सरपंच पति पर हमला करने वाले तीन आरोपी पकड़ाए:शादी विवाद में रॉड से किया था वार , 6 बदमाश अभी भी फरार

बालाघाट जिले के हट्टा थाना क्षेत्र में सरपंच पति आतिश लिल्हारे पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने 10 दिन बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घटना 7 अप्रैल को कोहकाडीबर गांव में एक शादी समारोह के दौरान हुई थी। जानकारी के अनुसार, शादी समारोह में विवाद के बाद नौ लोगों ने मिलकर आतिश लिल्हारे पर हमला कर दिया था। हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनका इलाज गोंदिया अस्पताल में चल रहा है। तीन आरोपी गिरफ्तार, हथियार भी बरामद पुलिस ने कोहकाडीबर निवासी महेश पिछोडे, राजेन्द्र मस्करे और सीताराम जामरे को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से लोहे की रॉड और अन्य हमला करने में इस्तेमाल किए गए हथियार भी जब्त किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। छह आरोपी अभी भी फरार मामले में चिमनलाल बिरनवार, राजू बिरनवार, गुड्डु बिरनवार, शैलेन्द्र मसकरे, सीताराम मसकरे और योगेश बिसेन अभी फरार हैं। थाना प्रभारी अविनाश राठौर ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं और उन्हें जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।

हिमाचल के जोड़ीदार भाईयों के घर हुई बेटी, कौन हैं असली पापा? कैसे चलेगा पता? बहस पर डॉक्टर ने दिया जवाब

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Jodidara sirmauri bhai: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई गांव में दो भाईयों की एक ही महिला से हुई शादी एक बार फिर चर्चा में है. जुलाई 2025 में शादी के बाद जोड़ीदार भाई कपिल और प्रदीप की पत्नी सुनीता ने शादी के 10 महीने बाद एक प्यारी नन्ही परी को जन्म दिया है. सोशल मीडिया पर काफी वायरल जोड़ीदार भाईयों को लगातार बधाईयां मिल रही हैं. हालांकि कुछ लोग सिरमौरी जोड़ीदार भाइयों से यह भी पूछ रहे हैं कि परंपरा के अनुसार दो भाईयों की एक पत्नी से शादी तो ठीक है लेकिन बच्ची का असली पिता कौन है और उसके बर्थ सर्टिफिकेट पर किस पिता का नाम दर्ज होगा? सोशल मीडिया पर लोगों का यह सवाल इसलिए भी जायज है क्योंकि इस बच्ची के सामाजिक रूप से दो पिता हैं लेकिन जैविक रूप से तो कोई एक ही पिता होगा, ऐसे में जन्म प्रमाणपत्र से लेकर अन्य दस्तावेजों पर किस पिता नाम लिखा जाएगा? और यह कैसे पता चलेगा कि वास्तव में वही उसके जैविक पिता हैं? इस बारे में News18hindi ने एम्स नई दिल्ली की पूर्व एचओडी और फॉर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में गायनेकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स में डायरेक्टर डॉ. सुनीता मित्तल से बात की तो उन्होंने इस बारे में कई बातें बताईं. डॉ. सुनीता ने कहा कि उस बच्चे के पिता नाम क्या होगा, यह तो उस गांव की प्रथा के अनुसार जो नियम होगा, वहीं से तय होगा. अभी तक इस प्रथा के अनुसार पैदा होने वाले बच्चों के पिता का नाम कैसे तय किया जाता रहा है, यह उस पर निर्भर करेगा. हो सकता है कि वहां ऐसा हो कि घर के बड़े बेटे का नाम ही पिता के रूप में दस्तावेजों में दर्ज होगा, या कुछ और भी क्राइटेरिया हो सकता है. क्‍या कहती है मेड‍िकल साइंस  डॉ. सुनीता कहती हैं,  ‘हालांकि अगर मेडिकली बात करें तो बच्चे के जैविक पिता का पता डीएनए से ही चल सकता है. हालांकि डीएनए जांच भी तब होती है माता-पिता या बच्चे बड़े हो जाएं और उनकी ओर से मांग हो. अगर वे जैविक पिता का पता लगाने के बाद उस बच्चे का पिता कौन होगा, ये तय करेंगे तो उन्हें डीएनए जांच ही करानी होगी, हालांकि पुरानी प्रथा के संदर्भ में लगता नहीं है कि ऐसा कुछ होता होगा.’ यहां सबसे बड़ी बात है कि उस बच्ची के पिता भी सगे भाई हैं और एक ही पिता के बेटे हैं. ऐसे में उनका भी डीएनए बहुत अलग नहीं होगा, लेकिन फिर भी जांच में तो उनमें भी अंतर का पता लगाया जा सकता है. ‘डीएनए जांच के तहत मानव शरीर में 46 क्रोमोजोम होते हैं, जिनमें एक-एक क्रोमोजोर में कम से कम 1000 डीएनए होते हैं, ऐसे में अगर बच्ची और पिताओं की जांच होती है तो आराम से उनमें संबंध मिल सकता है. हालांकि इस केस में ऐसी जरूरत दिखाई नहीं दे रही.’ कुछ मामलों में ब्लड ग्रुप से भी बच्चे और पिता के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन वह पूरी तरह सटीक नहीं होता. आमतौर पर बच्चों का ब्लड ग्रुप माता-पिता से मिलता है, लेकिन वह माता-पिता के भाई-बहनों से भी मैच कर सकता है. क्या पैदा होते ही बच्ची का हो सकता है डीएनए टेस्ट नहीं नवजात बच्चों का डीएनए टेस्ट अवॉइड किया जाता है, क्योंकि 15 दिन या तीन हफ्ते से पहले तक बच्चे के डीएनए का रिजल्ट पूरी तरह ठीक न आने की कुछ संभावना होती है. हालांकि बच्चे के 3 महीने का होते ही यह जांच हो सकती है. क्या है यह प्रथा बता दें कि कपिल नेगी और प्रदीप नेगी हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई गांव के रहने वाले है. दोनों किसान परिवार से हैं. प्रदीप हिमाचल में ही सरकारी नौकरी में हैं तो कपिल विदेश (बहरीन) में नौकरी कर रहे हैं. कपिल शादी के बाद से बहरीन में ही हैं. दोंनों भाइयों की एक ही महिला से शादी काफी सुर्खियों में आई थी. इन दोनों ने कुनहाट गांव की रहने वाली सुनीता चौहान से शादी की थी. दोनों भाइयों ने हाटी समुदाय की बहुपति (पॉलीएंड्री) परंपरा के तहत शादी की. इस परंपरा के तहत एक ही युवती एक परिवार के दो या उससे अधिक भाइयों को साझा रूप से पति मानती है. बहुपति और बहु-पत्नी प्रथा के पीछे तर्क दिया जाता हैं कि यह परंपरा संपत्ति के विभाजन को रोकने, संयुक्त परिवार को बनाए रखने और भाईयों के बीच आपसी प्रेम और विश्वास को बढ़ाने के लिए अपनाई जाती है.

युवक का सेप्टिक टैंक में 9 टुकड़ों में मिला शव:6 दिन से लापता था, स्थानीय निवासियों ने बड़े भाई पर मर्डर का जताया शव

युवक का सेप्टिक टैंक में 9 टुकड़ों में मिला शव:6 दिन से लापता था, स्थानीय निवासियों ने बड़े भाई पर मर्डर का जताया शव

मंडला के अंजनिया चौकी क्षेत्र में शुक्रवार को एक युवक का शव घर के सेप्टिक टैंक से 9 टुकड़ों में बरामद किया गया है। मृतक की पहचान करियागांव निवासी आशीष साहू के रूप में हुई है। वह 6 दिन पहले यानी 11 अप्रैल से लापता था। खोजबीन के बाद परिजनों ने 15 अप्रैल को अंजनिया चौकी में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सेप्टिक टैंक से बदबू आने पर हुआ खुलासा जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को मृतक के पिता मुन्ना लाल साहू ने पुलिस को सूचना दी कि घर के सेप्टिक टैंक से तेज बदबू आ रही है। पुलिस मौके पर पहुंची और टैंक की जांच की, तो अंदर कपड़े में लिपटे शव के टुकड़े मिले। बाद में मुन्ना लाल ने शव की पहचान अपने बेटे आशीष के रूप में की। घटना की सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी शिवकुमार वर्मा भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया। एफएसएल टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए अंजनिया भेजा गया है। मृतक के बड़े भाई पर हत्या का शक इस मामले में मृतक के बड़े भाई घनश्याम साहू पर शक जताया जा रहा है। पिता और स्थानीय लोगों ने भी उसी पर संदेह व्यक्त किया है। फिलहाल पुलिस घनश्याम से गहन पूछताछ कर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों भाई अलग-अलग काम करते थे। आशीष ने कुछ समय पहले ट्रैक्टर खरीदा था और उसी से रोजगार चला रहा था, जबकि घनश्याम मंडला की एक फैक्ट्री में काम करता है। दोनों की मां भी 2019 से लापता बताई जा रही है। पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और हत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

‘वह बचपन के आघात से गुजर रहे हैं’: राहुल गांधी की ‘जादू’ टिप्पणी पर कंगना रनौत की प्रतिक्रिया | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 16:54 IST बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने पीएम मोदी पर ‘जादूगर’ वाले बयान पर राहुल गांधी को सिरदर्द बताया. बाएं: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी; दाएं: बीजेपी सांसद कंगना रनौत भाजपा सांसद कंगना रनौत ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संसद में ”जादू” वाली टिप्पणी पर उन पर कटाक्ष किया और इसे ”सिरदर्द” बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस नेता बचपन में देखे गए जादू के शो के कारण बचपन के आघात से गुजर रहे हैं। पत्रकारों से बात करते हुए, रानौत ने कहा, “उन्हें सुनना बहुत सिरदर्द था। वह अपने बचपन के दुखों और बचपन में देखे गए जादू के शो से गुजर रहे हैं। यह एक उपद्रव था। अध्यक्ष ने उन्हें रुकने के लिए भी कहा। उन्होंने संसद का मजाक बनाया है।” #घड़ी | दिल्ली: लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत का कहना है, “उन्हें सुनना बहुत सिरदर्द था। वह अपने बचपन के दुखों और जादू के शो से गुजर रहे हैं जो उन्होंने बचपन में देखा था। यह एक उपद्रव था। सभापति ने उन्हें रुकने के लिए भी कहा। उन्होंने… pic.twitter.com/XDNyBBIyv9– एएनआई (@ANI) 17 अप्रैल 2026 राहुल गांधी ने क्या कहा? महिला आरक्षण विधेयक पर बहस के दौरान लोकसभा को संबोधित करते हुए, गांधी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को “जादूगर” कहा, इस टिप्पणी से निचले सदन में हंगामा शुरू हो गया। गांधी ने कहा, “आप (भाजपा) जो कर रहे हैं, क्योंकि आप देश की राजनीति में जो हो रहा है उससे डरे हुए हैं, आप अपनी ताकत के क्षरण से डरे हुए हैं, और आप भारतीय राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आपने असम, जम्मू-कश्मीर में ऐसा किया और अब कल्पना कर रहे हैं कि आप इसे भारत में भी कर सकते हैं। आपको ऐसा करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि जादूगर पकड़ा गया है। बालाकोट का जादूगर, नोटबंदी का जादूगर, सिन्दूर का जादूगर अचानक पकड़ा गया है। हर कोई जानता है कि हमारे दोस्त, जादूगर और व्यापारी के बीच साझेदारी है।” राहुल गांधी की ‘जादू’ वाली टिप्पणी पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गांधी की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रधानमंत्री के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे और बालाकोट हमलों और ऑपरेशन सिन्दूर का संदर्भ देकर देश और सेना को बदनाम कर रहे थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा, “विपक्ष के नेता द्वारा इस देश के प्रधान मंत्री के बारे में जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरा मानना ​​है कि इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है।” उन्होंने कहा, “उन्हें बार-बार ‘जादूगर’ कहना वास्तव में देश के लोगों का अपमान है। मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि उन्होंने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, उन्हें कार्यवाही से हटा दिया जाए। राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 16:54 IST समाचार राजनीति ‘वह बचपन के आघात से गुजर रहे हैं’: कंगना रनौत ने राहुल गांधी की ‘जादू’ टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राहुल गांधी जादूगर टिप्पणी(टी)कंगना रनौत बीजेपी सांसद(टी)राहुल गांधी जादू टिप्पणी(टी)लोकसभा बहस(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)मोदी जादूगर संदर्भ(टी)भाजपा प्रतिक्रिया राहुल गांधी(टी)बालाकोट स्ट्राइक टिप्पणी

‘साइलेंट किलर’ बन रहा डेस्क जॉब, डॉक्टर ने बताया दिल पर भारी पड़ सकता है कॉर्पोरेट स्ट्रेस, बिना देरी ऐसे करें बचाव

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Last Updated:April 17, 2026, 16:04 IST Work Stress And Heart Health: काम हमेशा रहेगा, डेडलाइन्स भी आती-जाती रहेंगी. लेकिन सेहत इतनी आसानी से वापस नहीं आती. यदि आप डेस्क जॉब करते हैं, तो वेक-अप कॉल का इंतजार न करें. वर्क स्ट्रेस आपके दिल पर भारी न पड़े इसके लिए डॉक्टर के सुझाव को आप यहां जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट आजकल हम में से ज्यादातर लोगों का दिन एक ही तरह से गुजरता है, डेस्क पर बैठकर काम करना, ईमेल, कॉल्स और डेडलाइन्स के बीच समय बिताना. यह सब सामान्य लगता है क्योंकि हमारे आसपास हर कोई ऐसा ही कर रहा होता है. लेकिन जो बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वह यह है कि यह दिनचर्या धीरे-धीरे हमारे दिल पर असर डालती है. ऐसे में डॉ. संजय ढल, सीनियर डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग बताते हैं कि समस्या सिर्फ तनाव या सिर्फ लंबे समय तक बैठना नहीं है, बल्कि इन दोनों का मेल है. अगर डेस्क जॉब की बात करें, तो लंबे समय तक बैठना अब लगभग हर कॉर्पोरेट नौकरी का हिस्सा बन चुका है. एक बार काम शुरू किया और पता ही नहीं चलता कि 8–10 घंटे कब निकल गए. इस दौरान शरीर की मूवमेंट बहुत कम हो जाती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और कैलोरी बर्न भी कम होती है. धीरे-धीरे यह वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है. काम से स्ट्रेस और फिर हार्ट प्रॉब्लमडॉक्टर बताते हैं कि काम का दबाव हमेशा दिखने वाला नहीं होता. कई बार यह सिर्फ लगातार टारगेट्स, मैसेज का जवाब देना या हर समय ‘ऑन’ रहने की भावना होती है. यहां तक कि जब आप काम नहीं कर रहे होते, तब भी दिमाग काम करता रहता है. यह लगातार तनाव शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ाता है, जो लंबे समय में दिल की सेहत पर असर डालता है और ब्लड प्रेशर व हार्ट रेट को बढ़ा देता है. स्ट्रेस से लाइफस्टाइल में बदलावतनाव हमारी आदतों को भी बदल देता है. हम समय पर खाना नहीं खाते या जो भी जल्दी मिल जाए वही खा लेते हैं. चाय और कॉफी की मात्रा बढ़ जाती है. नींद पूरी नहीं हो पाती, और शारीरिक गतिविधि लगभग खत्म हो जाती है. ये सभी चीजें धीरे-धीरे जुड़ती जाती हैं और यही इसे खतरनाक बनाती हैं. संकेतों को न करें नजरअंदाजबार-बार थकान महसूस होना, सिरदर्द, हल्का सीने में दर्द या थोड़ी सी गतिविधि में सांस फूलना जैसे शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है. लेकिन अक्सर लोग इन्हें “सिर्फ काम का तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि ये शरीर के चेतावनी संकेत हो सकते हैं. बचाव मुमकिन है!डॉक्टर ने कहा कि अच्छी बात यह है कि इस स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है. छोटे-छोटे कदम भी काफी असरदार होते हैं. जैसे हर घंटे कुछ मिनट के लिए उठकर चलना, कॉल्स के दौरान खड़े होकर बात करना या दिन में 20–30 मिनट कोई भी शारीरिक गतिविधि करना जैसे वॉक या एक्सरसाइज दिल के लिए बहुत फायदेमंद है. तनाव को कम करने के लिए लंबी मेडिटेशन जरूरी नहीं है. दिन में छोटे-छोटे ब्रेक लेना, स्क्रीन से दूर रहना या कुछ मिनट गहरी सांस लेना भी काफी मदद करता है. इन बातों का भी रखें ध्यानखान-पान में भी संतुलन जरूरी है. जंक फूड कम करें और हेल्दी खाना बढ़ाएं. साथ ही, पानी पीते रहें और ज्यादा कैफीन लेने से बचें. रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराएं. समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना समस्याओं को शुरुआती दौर में पकड़ने में मदद करता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 17, 2026, 16:04 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.