चुकंदर दही सलाद रेसिपी: गर्मी के मौसम में घर पर बनाएं चुकंदर और दही का दही, स्वादानुसार खाएं और खाएं फिट; नोट करें रेसिपी

15 अप्रैल 2026 को 17:10 IST पर अपडेट किया गया चुकंदर दही का सलाद: अगर आप त्वचा की चमक और फिटनेस दोनों चाहते हैं, तो इस दही को सप्ताह में 3-4 बार जरूर शामिल करें। यह शरीर के अंदर से डिटॉक्स करने में भी मदद करता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)चुकंदर दही का सलाद(टी)चुकंदर दही का सलाद कैसे बनाएं(टी)चुकंदर दही का सलाद(टी)सलाद रेसिपी(टी)चुकंदर सलाद(टी)चुकंदर दही सलाद(टी)चुकंदर दही सलाद
होर्मुज के बाद अब ट्रम्प की मलक्का स्ट्रेट पर नजर:इंडोनेशिया से रक्षा करार किया, अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई इलाके में जाने की इजाजत

हॉर्मुज स्ट्रेट में इस समय हालात काफी तनाव भरे हैं। अमेरिका वहां ईरान से जुड़ी जहाजों की गतिविधियों पर सख्ती कर रहा है। इसी बीच अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में ज्यादा आसानी से आने-जाने की इजाजत मिल गई है। इसे आधिकारिक तौर पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह डील ऐसे समय हुई है जब US ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए होर्मुज में नाकाबंदी शुरू कर दी है। इसके बाद तेल सप्लाई लगभग ठहर गई और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका ने मलक्का स्ट्रेट पर नजर रखने के लिए यह करार किया है। होर्मुज के बाद मलक्का पर फोकस मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यह वही रास्ता है जो हिंद महासागर को पूर्वी एशिया से जोड़ता है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से करीब 40% वैश्विक व्यापार और लगभग 30% तेल सप्लाई गुजरती है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है। फिलिप चैनल पर इसकी चौड़ाई 3 किलोमीटर है, जो इसे बड़ा बॉटलनेक बनाती है। यह होर्मुज से करीब नौ गुना ज्यादा संकरा है। मलक्का स्ट्रेट पर इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का कंट्रोल है। इस रास्ते से दुनिया का बहुत बड़ा व्यापार गुजरता है। यही वजह है कि इस इलाके में कोई भी हलचल सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है। US-इंडोनेशिया डील के बाद एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक में बड़े समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स और पूर्व सैनिकों ने कहा है कि दुनिया के चोकपॉइंट्स पर US अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। चीन के लिए सबसे बड़ी कमजोरी अगर हॉर्मुज को तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता माना जाता है, तो मलक्का को पूरी दुनिया के ट्रेड की लाइफलाइन कहा जा सकता है। यहां से तेल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें और बाकी सामान भी बड़ी मात्रा में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं। चीन के लिए तो मलक्का को सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी माना जाता है। चीन के करीब 80% तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं। ये इंडस्ट्रियल इकॉनमी और एक्सपोर्ट सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। इसी वजह से चीन लंबे समय से इस पर अपनी निर्भरता को एक कमजोरी मानता है। यही कारण है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा था। हाल में चीन ने इलाके के आसपास समुद्री मैपिंग और मॉनिटरिंग गतिविधियां बढ़ाई हैं। भारत के लिए क्यों अहम है मलक्का मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए भी उतना ही अहम है। देश का करीब 55% व्यापार इसी रास्ते और सिंगापुर क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे इस इलाके में रणनीतिक बढ़त देती है। अंडमान और निकोबार आइलैंड्स इस स्ट्रेट के पश्चिमी मुहाने के पास हैं, जहां से पोर्ट ब्लेयर से 24 घंटे में पहुंचा जा सकता है। भारत का INS बाज एयर स्टेशन, जो कैंपबेल बे में है, इस इलाके की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह भारत को समुद्री ट्रैफिक पर नजर रखने की ताकत देता है। क्या US-भारत सहयोग बढ़ सकता है एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका मलक्का में अपनी भूमिका बढ़ाता है, तो भारत की भागीदारी अहम हो सकती है। सिंगापुर ने पहली बार मलक्का स्ट्रेट पेट्रोल में भारत की दिलचस्पी को औपचारिक तौर पर माना है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, मलक्का स्ट्रेट में अमेरिका के लिए सब कुछ आसान नहीं होगा। इंडोनेशिया और मलेशिया इस इलाके को लेकर काफी संवेदनशील रहते हैं और अपनी संप्रभुता को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते। सिंगापुर का हिस्सा छोटा जरूर है, लेकिन वैश्विक शिपिंग में उसकी भूमिका बहुत बड़ी है। उसका पोर्ट और समुद्री सेवाएं उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए वह इस रास्ते में किसी भी तरह की अस्थिरता नहीं चाहता। हाल के समय में समुद्री टैक्स और नियमों को लेकर भी बहस तेज हुई है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में अमेरिका की बढ़ती गतिविधियां यह दिखाती हैं कि वह अब एक साथ कई अहम समुद्री रास्तों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज पर अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी शुरू:ट्रम्प की धमकी- इसके पास आए ईरानी जहाज तबाह करेंगे, ईरान बोला- भारत से कोई टोल नहीं लिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू हो गई है। यह फैसला आज शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 10 बजे) से लागू हुआ। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए वही तरीका इस्तेमाल होगा, जिससे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाज रोके जाते हैं, यानी तेजी और सख्ती से। पूरी खबर पढ़ें…
होर्मुज के बाद अब ट्रम्प की मलक्का स्ट्रेट पर नजर:इंडोनेशिया से रक्षा करार किया, अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई इलाके में जाने की इजाजत

हॉर्मुज स्ट्रेट में इस समय हालात काफी तनाव भरे हैं। अमेरिका वहां ईरान से जुड़ी जहाजों की गतिविधियों पर सख्ती कर रहा है। इसी बीच अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में ज्यादा आसानी से आने-जाने की इजाजत मिल गई है। इसे आधिकारिक तौर पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह डील ऐसे समय हुई है जब US ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए होर्मुज में नाकाबंदी शुरू कर दी है। इसके बाद तेल सप्लाई लगभग ठहर गई और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका ने मलक्का स्ट्रेट पर नजर रखने के लिए यह करार किया है। होर्मुज के बाद मलक्का पर फोकस मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यह वही रास्ता है जो हिंद महासागर को पूर्वी एशिया से जोड़ता है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से करीब 40% वैश्विक व्यापार और लगभग 30% तेल सप्लाई गुजरती है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है। फिलिप चैनल पर इसकी चौड़ाई 3 किलोमीटर है, जो इसे बड़ा बॉटलनेक बनाती है। यह होर्मुज से करीब नौ गुना ज्यादा संकरा है। मलक्का स्ट्रेट पर इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का कंट्रोल है। इस रास्ते से दुनिया का बहुत बड़ा व्यापार गुजरता है। यही वजह है कि इस इलाके में कोई भी हलचल सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है। US-इंडोनेशिया डील के बाद एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक में बड़े समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स और पूर्व सैनिकों ने कहा है कि दुनिया के चोकपॉइंट्स पर US अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। चीन के लिए सबसे बड़ी कमजोरी अगर हॉर्मुज को तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता माना जाता है, तो मलक्का को पूरी दुनिया के ट्रेड की लाइफलाइन कहा जा सकता है। यहां से तेल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें और बाकी सामान भी बड़ी मात्रा में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं। चीन के लिए तो मलक्का को सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी माना जाता है। चीन के करीब 80% तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं। ये इंडस्ट्रियल इकॉनमी और एक्सपोर्ट सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। इसी वजह से चीन लंबे समय से इस पर अपनी निर्भरता को एक कमजोरी मानता है। यही कारण है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा था। हाल में चीन ने इलाके के आसपास समुद्री मैपिंग और मॉनिटरिंग गतिविधियां बढ़ाई हैं। भारत के लिए क्यों अहम है मलक्का मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए भी उतना ही अहम है। देश का करीब 55% व्यापार इसी रास्ते और सिंगापुर क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे इस इलाके में रणनीतिक बढ़त देती है। अंडमान और निकोबार आइलैंड्स इस स्ट्रेट के पश्चिमी मुहाने के पास हैं, जहां से पोर्ट ब्लेयर से 24 घंटे में पहुंचा जा सकता है। भारत का INS बाज एयर स्टेशन, जो कैंपबेल बे में है, इस इलाके की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह भारत को समुद्री ट्रैफिक पर नजर रखने की ताकत देता है। क्या US-भारत सहयोग बढ़ सकता है एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका मलक्का में अपनी भूमिका बढ़ाता है, तो भारत की भागीदारी अहम हो सकती है। सिंगापुर ने पहली बार मलक्का स्ट्रेट पेट्रोल में भारत की दिलचस्पी को औपचारिक तौर पर माना है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, मलक्का स्ट्रेट में अमेरिका के लिए सब कुछ आसान नहीं होगा। इंडोनेशिया और मलेशिया इस इलाके को लेकर काफी संवेदनशील रहते हैं और अपनी संप्रभुता को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते। सिंगापुर का हिस्सा छोटा जरूर है, लेकिन वैश्विक शिपिंग में उसकी भूमिका बहुत बड़ी है। उसका पोर्ट और समुद्री सेवाएं उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए वह इस रास्ते में किसी भी तरह की अस्थिरता नहीं चाहता। हाल के समय में समुद्री टैक्स और नियमों को लेकर भी बहस तेज हुई है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में अमेरिका की बढ़ती गतिविधियां यह दिखाती हैं कि वह अब एक साथ कई अहम समुद्री रास्तों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज पर अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी शुरू:ट्रम्प की धमकी- इसके पास आए ईरानी जहाज तबाह करेंगे, ईरान बोला- भारत से कोई टोल नहीं लिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू हो गई है। यह फैसला आज शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 10 बजे) से लागू हुआ। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए वही तरीका इस्तेमाल होगा, जिससे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाज रोके जाते हैं, यानी तेजी और सख्ती से। पूरी खबर पढ़ें…
पुणे गई सास के घर का ताला तोड़ घुसी बहू:कब्जे की कोशिश का आरोप, इंदौर लौटने पर घर में घुसने नहीं दिया

इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद के बीच मकान पर कब्जा करने की कोशिश का मामला सामने आया है। एक बुजुर्ग महिला ने अपनी बहू, उसके पिता और अन्य साथियों पर घर का ताला तोड़कर जबरन घुसने का आरोप लगाया है। आरोप है कि बहू अब सास को ही घर में प्रवेश नहीं करने दे रही है। पुलिस के मुताबिक सिल्वर पार्क कॉलोनी निवासी 62 वर्षीय शीला शर्मा ने बताया कि उनका बेटा आशीष साल 2020 से बेंगलुरु में निजी नौकरी कर रहा है और वह इंदौर स्थित मकान में अकेली रहती थीं। हाल ही में उनकी छोटी बेटी दीपिका के यहां पुणे में बच्चा हुआ था, जिसके चलते वह कुछ दिनों के लिए पुणे गई हुई थीं। महिला का आरोप बिना जानकारी घर में घुसे इसी दौरान 22 मार्च 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे उनकी बहू आरती शर्मा अपने पिता बादशाह बरुआ और दो अन्य लोगों के साथ घर पहुंची। आरोप है कि सभी ने मिलकर मकान का ताला तोड़ दिया और बिना अनुमति घर के अंदर घुस गए। महिला का कहना है कि आरोपियों का मकसद मकान पर कब्जा करना था। उन्होंने बताया कि उनके बेटे और बहू के बीच पहले से ही दहेज प्रताड़ना, भरण-पोषण और तलाक से जुड़े मामले कोर्ट में लंबित हैं। इसी पारिवारिक विवाद के चलते इस घटना को अंजाम दिया गया। दूसरे के घर में रहने को मजबूर घटना की जानकारी मिलने के बाद शीला शर्मा इंदौर लौटीं और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि अब बहू उन्हें घर में घुसने नहीं दे रही, जिसके कारण वह अपनी एक सहेली के यहां रह रही हैं। पुलिस ने आरती शर्मा, उसके पिता और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत फिर शुरू होगी:भारतीय-डेलिगेशन अगले हफ्ते वॉशिंगटन रवाना होगा; नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर चर्चा होगी

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुकी हुई अंतरिम ट्रेड डील को लेकर अगले हफ्ते बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। केंद्र सरकार का एक हाई-लेवल डेलिगेशन अगले सप्ताह वॉशिंगटन रवाना होगा। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका में टैरिफ नियमों और अदालती फैसलों की वजह से व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को सरकारी सूत्रों ने डेलिगेशन की इस यात्रा की पुष्टि की। पहले इस समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प शासन के दौरान लागू टैरिफ व्यवस्था और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने स्थितियों को कठिन बना दिया है। मार्च में होने वाला था समझौता दोनों देशों ने फरवरी में व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा तैयार कर ली थी। इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया था। हालांकि, इसके तुरंत बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ नियमों को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों से होने वाले आयात पर 10% टैरिफ लागू कर दिया है। इसी स्पष्टता की कमी के कारण पिछले महीने होने वाली बैठक टाल दी गई थी। भारत का रिलेटिव एडवांटेज कम हुआ जब फरवरी में फ्रेमवर्क तैयार हुआ था, तब भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति मिल रही थी। अमेरिका के अन्य देशों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच भारत के लिए 18% की दर फायदेमंद थी। लेकिन अब अमेरिका ने सभी देशों के लिए 10% का फ्लैट टैरिफ लागू कर दिया है। इससे भारत का वह खास फायदा कम हो गया है, क्योंकि अब हर ट्रेडिंग पार्टनर को एक समान दर का लाभ मिल रहा है। धारा 301 के तहत दो जांच चल रहीं अगले हफ्ते होने वाली यह बातचीत केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रहेगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने हाल ही में धारा 301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू की हैं, जिनमें भारत भी शामिल है… चर्चा का मुख्य एजेंडा क्या होगा? वॉशिंगटन में होने वाली इस बैठक में भारतीय अधिकारी नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर स्पष्टता मांगेंगे। भारत की कोशिश होगी कि बदले हुए हालातों में भी भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा की जाए। साथ ही धारा 301 के तहत चल रही जांचों पर भारत अपना पक्ष मजबूती से रखेगा ताकि भविष्य में किसी भी तरह के प्रतिबंधों से बचा जा सके। क्या है धारा 301? यह अमेरिका के ‘ट्रेड एक्ट 1974’ का एक हिस्सा है। इसके तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर उसे लगता है कि किसी दूसरे देश की व्यापार नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं, तो वह उसकी जांच कर सकती है और उस पर जुर्माना या व्यापार प्रतिबंध लगा सकती है। भारत के लिए क्यों जरूरी है यह डील? ये खबर भी पढ़ें… थोक महंगाई 38 महीने में सबसे ज्यादा: मार्च में ये 3.88% पर पहुंची, रोजाना जरूरत का सामान और फ्यूल महंगा हुआ मार्च में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई है। फरवरी के यह 2.13% पर थी। यानी इसमें एक महीने के अंदर 1.75% की बढ़ोतरी हुई है। थोक महंगाई ने 38 महीने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। जनवरी 2023 में थोक महंगाई 4.73% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 अप्रैल को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
अगर ब्लड प्रेशर 200 के पार हो जाए तो क्या होगा, डॉक्टर बोले – यह मेडिकल इमरजेंसी, मौत का भी खतरा

Last Updated:April 15, 2026, 15:09 IST High Blood Pressure Crisis: अगर ब्लड प्रेशर 200 के पार चला जाए, तो यह एक खतरनाक मेडिकल इमरजेंसी होती है. इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक आ सकता है. डॉक्टर ने बताया कि बीपी बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो इससे किडनी और आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर की मदद लेना जरूरी होता है, क्योंकि लापरवाही जानलेवा हो सकती है. बीपी अगर 200 के पार हो जाए, तो हाइपरटेंसिव क्राइसिस हो सकता है. इसमें जान भी जा सकती है. Can BP Over 200 Be Fatal: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आजकल तेजी से बढ़ रही है और हर उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं. ब्लड प्रेशर का सामान्य स्तर 120/80 mmHg माना जाता है, लेकिन जब इससे ज्यादा हो जाता है, तब हाइपरटेंशन की कंडीशन पैदा हो जाती है. अगर बीपी अचानक 200 के पार पहुंच जाए, तो यह बेहद खतरनाक स्थिति बन जाती है. कई लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि इतना ज्यादा ब्लड प्रेशर शरीर के कई जरूरी अंगों को तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है. डॉक्टर इसे मेडिकल इमरजेंसी मानते हैं, जिसे नजरअंदाज करने से मौत हो सकती है. लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि जब ब्लड प्रेशर 200 या उससे ऊपर चला जाता है, तो इसे हाइपरटेंसिव क्राइसिस कहा जाता है. इस स्थिति में दिल, दिमाग, किडनी और आंखों पर तुरंत दबाव बढ़ जाता है. इससे खून की नसें कमजोर हो सकती हैं और फटने का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि इस स्थिति में तुरंत इलाज जरूरी होता है. बीपी हाई होने का सबसे बड़ा खतरा दिमाग पर पड़ता है. बहुत ज्यादा बीपी के कारण ब्रेन में ब्लड वेसल्स फट सकती हैं, जिससे स्ट्रोक हो सकता है. इससे कई मरीजों को लकवा मार जाता है. मरीज को तेज सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखना, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण भी महसूस होते हैं. अगर समय पर इलाज न मिले, तो मौत हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि हार्ट पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है. हाई ब्लड प्रेशर के कारण दिल को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट अटैक आ सकता है. लंबे समय तक ऐसा रहने पर हार्ट फेल होने का खतरा भी बढ़ सकता है. इसके अलावा किडनी और आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है. किडनी की छोटी-छोटी नसें खराब हो सकती हैं, जिससे किडनी फेलियर का खतरा रहता है. वहीं आंखों की नसों पर असर पड़ने से नजर कमजोर हो सकती है या अचानक विजन लॉस हो सकता है. सही समय पर इलाज से हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, विजन लॉस और स्ट्रोक से बचा जा सकता है. अब सवाल है कि अगर किसी का बीपी 200 के पार हो जाए, तो क्या करें? डॉक्टर लोकेंद्र ने बताया कि किसी का बीपी 200 के आसपास या उससे ज्यादा हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या नजदीकी अस्पताल जाएं. घर पर खुद से दवा लेने या इंतजार करने की गलती बिल्कुल न करें. मरीज को शांत रखें, ज्यादा हिलने-डुलने से बचाएं और तुरंत मेडिकल सहायता लें. ब्लड प्रेशर का 200 के पार जाना शरीर के लिए अलार्म की तरह है. यह संकेत देता है कि तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. सही समय पर इलाज से जान बच सकती है. अगर इस दौरान लापरवाही की, तो जान जा सकती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 15:09 IST
उधारी की राह पर भारतीय, 10 साल का रिकॉर्ड टूटा:जीवनशैली और एसेट्स के लिए बढ़ रहा पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का चलन

बीते एक दशक में हमारी आर्थिक आदतें तेजी से बदल रही हैं। ईएमआई, क्रेडिट कार्ड और होम लोन अब जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय परिवारों की वित्तीय देनदारियां बढ़कर जीडीपी के 6.2% पर पहुंच गई हैं, जो बीते एक दशक का उच्चतम स्तर है। क्लाइंट एसोसिएट्स के वाइट पेपर ‘द न्यू इंडियन हाउसहोल्ड बैलेंस शीट’ के अनुसार, भारतीयों की उधारी अब उनकी बचत की रफ्तार को पीछे छोड़ रही है। महामारी के बाद के दौर में घरेलू कर्ज में 44.6% सीएजीआर की बढ़त हुई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज का बढ़ना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। यह बढ़ते आत्मविश्वास और भविष्य की बेहतर कमाई की उम्मीद का भी संकेत है। बड़ा बदलाव क्या है? – बचत घट रही है – महामारी से पहले शुद्ध वित्तीय बचत जीडीपी का 7.7% थी। वित्त वर्ष 2024 में यह घटकर 5.2% रह गई। यानी हर 100 रुपए में से निवेश के लिए कम पैसे बचते हैं। – कर्ज बढ़ रहा है – घरेलू वित्तीय देनदारियां जीडीपी का 4.1% (महामारी से पहले) से बढ़कर अब 6.2% हो गई हैं, यह एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर है। – प्रॉपर्टी में निवेश बढ़ा- कुल बचत में भौतिक संपत्ति (मुख्यतः रियल एस्टेट) की हिस्सेदारी 58-60% से 70% हो गई है। – शेयर-म्यूचुअल फंड में उछाल- इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश वित्त वर्ष 2020 के 4% से तीन गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 15% हो गया है। 6.2% जीडीपी के अनुपात में घरेलू कर्ज; बीते एक दशक के उच्चतम स्तर पर। 44.6% महामारी के बाद उधारी की सालाना विकास दर; बचत से ज्यादा रफ्तार। 5.2% जीडीपी के मुकाबले शुद्ध वित्तीय बचत; दशक के निचले स्तर के करीब। (स्रोत: क्लाइंट एसोसिएट्स – द न्यू इंडियन हाउसहोल्ड बैलेंसशीट (2025) क्रेडिट कार्ड, पर्सनल – वाहन लोन का कर्ज बीते एक दशक में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा क्रेडिट कार्ड का क्रेज – अब कर्ज सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल के लिए भी लिया जा रहा है। यह सेगमेंट 25.2% की दर से सबसे तेजी से बढ़ रहा है। पर्सनल लोन – लाइफस्टाइल अपग्रेड और कंजम्पशन के लिए पर्सनल लोन में 20.1% की ग्रोथ देखी गई है। फिजिकल एसेट्स का मोह – कुल घरेलू बचत का 70% हिस्सा अब रियल एस्टेट जैसे फिजिकल एसेट्स में जा रहा है, जिससे हाथ में नकदी की कमी हो रही है। प्लानिंग चार अहम काम जो हमें बिना देर किए शुरू करने चाहिए 1: एसआईपी शुरू करें: इक्विटी और म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश दीर्घकालिक संपत्ति बनाएगा। 2: कर्ज की समीक्षा करें: क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन की लागत सबसे ज़्यादा होती है, पहले इन्हें चुकाएं। 3: फंड बनाएं: 6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं, लिक्विड एफडी या डेट फंड में रखें। 4: पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई करें: सिर्फ रियल एस्टेट नहीं, इक्विटी, डेट और गोल्ड का संतुलन रखें।
धर्मेंद्र के निधन पर भावुक हुए बॉबी देओल:पापा के साथ और वक्त बिताने का पछतावा; कहा- दुख ने ईशा और अहाना के करीब लाया

बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र के निधन को करीब 140 दिन बीत चुके हैं। उनके छोटे बेटे बॉबी देओल ने पिता के जाने के बाद अपना पहला इंटरव्यू दिया है। बॉबी ने बताया कि उनके पापा की मौत ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। इस दौरान उन्होंने अपने पछतावे और सौतेली बहनों ईशा और अहाना देओल के साथ बदलते रिश्तों पर भी खुलकर बात की। पापा के साथ और वक्त बिताने का है पछतावा बॉबी देओल ने एस्क्वायर इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे अपने पापा के साथ और भी क्वालिटी टाइम बिताना चाहते थे। बॉबी ने भावुक होते हुए कहा,कई ऐसे दिन होते हैं जब मुझे लगता है कि काश मैं पापा के साथ और बैठता। काश मैंने उनसे और सवाल पूछे होते। अब मैं अपने बेटों, पत्नी और परिवार के साथ रहने को लेकर ज्यादा सजग रहता हूं। बॉक्स ऑफिस, रिव्यूज और रोल्स… ये सब आखिर में मायने नहीं रखते। इंस्टाग्राम पर आज भी देखते हैं धर्मेंद्र की रील्स सफलता के मायने बताते हुए बॉबी ने कहा कि कामयाबी इस बात से मापी जाती है कि आप अपने प्रियजनों के साथ कितना वक्त बिता पाते हैं। उन्होंने कहा, बिना किसी अपने के शोहरत और दौलत का क्या फायदा? मैं आज भी इंस्टाग्राम पर उनकी (धर्मेंद्र) रील्स देखता रहता हूं। वे बहुत ही सादगी भरे और गर्मजोशी से भरे इंसान थे। कभी-कभी लगता है कि वे रील के जरिए सीधे मुझसे ही बात कर रहे हैं। दुख ने ईशा और अहाना के करीब लाया धर्मेंद्र के निधन के बाद देओल परिवार में एक सकारात्मक बदलाव आया है। बॉबी ने बताया कि इस दुख ने उन्हें अपनी सौतेली बहनों ईशा और अहाना देओल के करीब ला दिया है। बॉबी ने कहा, हम सभी अपने-अपने तरीके से इस दुख से निपट रहे हैं। कभी-कभी दुख की वजह से लोग एक-दूसरे को गलत समझ लेते हैं, लेकिन वक्त के साथ सब ठीक हो जाता है। किसी अपने को खोना परिवार को करीब लाने का अपना तरीका जानता है। धर्मेंद्र को भी था अपने पिता के लिए मलाल बॉबी ने एक पुरानी याद साझा करते हुए बताया कि उनके पिता अक्सर कविताएं और छंद सुनाते थे। उन कविताओं में धर्मेंद्र का अपने पिता के साथ ज्यादा वक्त न बिता पाने का दर्द और पछतावा झलकता था। बॉबी ने कहा, उनकी बातों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मुझे लगता है कि यह जीवन का एक चक्र है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है। 24 नवंबर को हुआ था निधन बता दें कि धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर को मुंबई में 89 साल की उम्र में हुआ था। ब्रीच कैंडी अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 12 दिन बाद उन्होंने आखिरी सांस ली थी। उनके अंतिम संस्कार में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान खान समेत बॉलीवुड के कई बड़े सितारे पहुंचे थे।
तमिलनाडु: जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या बढ़ाने की मांग…भड़के सीएम स्टालिन

विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु के प्रमुख राजनीतिक दलों के विधायकों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के विरोध में स्वर मुखर कर रखा है। परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे दक्षिणी राज्यों में चिंताएं बढ़ी हैं। 1971 की वास्तविकता के अनुसार, जब भारत की जनसंख्या लगभग 550 मिलियन थी, तब मुसलमानों की वर्तमान संख्या 543 सदस्य थी। अब जब जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक हो गई है, तो केंद्र सरकार एक नई परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से संसदीय प्रतिनिधित्व का विस्तार करने की योजना बना रही है। बौद्धों के अनुसार, प्रस्तावित परिसिमन संशोधन का उद्देश्य मोटरसाइकिलों की संख्या 543 से लगभग 850 करना है, जबकि केंद्रशासित प्रयोगशाला से प्रतिनिधित्व 20 से 35 करना है। आने वाले तीन दिनों में वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में पेश होने की उम्मीद है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है, उनका तर्क है कि इससे उन क्षेत्रों को नुकसान होगा, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अधिक हो रही है। खबरों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 2002 के परिसीमन संशोधन अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से 2026 के बजाय 2011 के सिद्धांतों या उसके पहले के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन संशोधन अधिनियम पर विचार किया है, जिससे विवाद और भी बढ़ रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इससे संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व कम होगा और संघीय ढांचे को नुकसान होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इस योजना पर आगे बढ़ती है, तो उनकी पार्टी एक बड़ा आंदोलन फिर से पुराने और पुराने शिक्षकों को देखना शुरू कर देगी। दूसरी ओर, एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने कैंसर को कम करने के लिए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया से तमिल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा। अनुमानों के अनुसार, तमिलनाडु का निचला हिस्सा वर्तमान में 39 से 50 के बीच हो सकता है, जबकि प्रदेश का प्रतिनिधित्व 80 से 80 तक, उत्तर में 143 के करीब हो सकता है, जिससे संसद में सत्ता का संतुलन काफी हद तक बदल जाएगा। इसी बीच, केंद्र सरकार परीसीमन प्रस्ताव के साथ-साथ महिला नाचीज़ पेशावर की भी योजना बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य 2029 के आम चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत नॉमिनेट पेशिंग लागू करना है। यह भी पढ़ें- ‘तमिलनाडु नहीं रहेगा चुप’, स्टालिन की मोदी सरकार को खुली चेतावनी, कहा- सड़क पर उतरेगा हर परिवार (टैग्सटूट्रांसलेट)इलेक्शन(टी)विधानसभा चुनाव(टी)स्टालिन(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)स्टालिन(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026
कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने जल्दबाजी में काम किया’ | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:15 अप्रैल, 2026, 14:05 IST दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में कथित पार्टी विरोधी गतिविधि के लिए कांग्रेस एमएलसी अब्दुल जब्बार को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘आदेश की समीक्षा के बाद जवाब देंगे’ हाल ही में दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के दौरान कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर अब्दुल जब्बार को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से की गई। जब्बार, जिन्होंने पहले केपीसीसी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, दावणगेरे से कांग्रेस के टिकट के दावेदार भी थे। उन पर उपचुनाव के दौरान पार्टी के चुने हुए उम्मीदवार शमनूर समर्थ के खिलाफ काम करने का आरोप है। ऐसे भी आरोप थे कि उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में एक एसडीपीआई उम्मीदवार का समर्थन किया, जिससे पार्टी के भीतर चिंताएं बढ़ गईं। केपीसीसी द्वारा आधिकारिक बयान एक प्रेस विज्ञप्ति में, कर्नाटक के डिप्टी सीएम और केपीसीसी अध्यक्ष डीके शिवकुमार के कार्यालय ने कहा कि विधान परिषद के सदस्य अब्दुल जब्बार को दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित कर दिया गया है। बयान में पुष्टि की गई कि निर्णय तुरंत प्रभावी होगा। जब्बार के निलंबन के साथ-साथ डीके शिवकुमार ने उनके नेतृत्व में गठित सभी अल्पसंख्यक समितियों को भी भंग कर दिया है। यह कदम केपीसीसी अल्पसंख्यक विंग प्रमुख के पद से उनके हालिया इस्तीफे के बाद उठाया गया है। राजनीतिक नतीजा उपचुनाव के दौरान पार्टी के भीतर आंतरिक असहमति के मद्देनजर यह घटनाक्रम सामने आया है। आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करने और प्रतिद्वंद्वी का समर्थन करने के आरोपों के कारण सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। जब्बार के बाहर निकलने के बाद पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को सुलझाने और अल्पसंख्यक विंग संरचना को पुनर्गठित करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा है। जब्बार की प्रतिक्रिया निलंबन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, अब्दुल जब्बार ने कहा कि वह कोई भी विस्तृत प्रतिक्रिया देने से पहले आदेश की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें निलंबित किया है, उन्होंने कारण बताए होंगे और वह पार्टी और मीडिया दोनों को जवाब देने से पहले उनकी जांच करेंगे। उन्होंने किसी भी चुनावी झटके के सुझाव को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि कांग्रेस के हारने का कोई सवाल ही नहीं है और विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी जीतेगी। उम्मीदवार चयन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे एक नाम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए और याद दिलाया कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक के दौरान एक परिवार को तरजीह देने के बजाय कुरुबा समुदाय को टिकट देने की मांग की गई थी. जब्बार ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि पार्टी ने जल्दबाजी क्यों की. उन्होंने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे कि इस फैसले के पीछे कौन हो सकता है, यह देखते हुए कि पार्टी ने उन्हें पद और सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक पत्र मिलने के बाद वह इसका पूरा जवाब देंगे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 15 अप्रैल, 2026, 14:02 IST समाचार राजनीति कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने जल्दबाजी में काम किया’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अब्दुल जब्बार निलंबन(टी)अब्दुल जब्बार कांग्रेस(टी)केपीसीसी अनुशासनात्मक कार्रवाई(टी)दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव(टी)डीके शिवकुमार केपीसीसी(टी)कांग्रेस आंतरिक संघर्ष(टी)अल्पसंख्यक विंग विघटन(टी)एसडीपीआई समर्थन आरोप







