भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुकी हुई अंतरिम ट्रेड डील को लेकर अगले हफ्ते बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। केंद्र सरकार का एक हाई-लेवल डेलिगेशन अगले सप्ताह वॉशिंगटन रवाना होगा। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका में टैरिफ नियमों और अदालती फैसलों की वजह से व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को सरकारी सूत्रों ने डेलिगेशन की इस यात्रा की पुष्टि की। पहले इस समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प शासन के दौरान लागू टैरिफ व्यवस्था और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने स्थितियों को कठिन बना दिया है। मार्च में होने वाला था समझौता दोनों देशों ने फरवरी में व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा तैयार कर ली थी। इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया था। हालांकि, इसके तुरंत बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ नियमों को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों से होने वाले आयात पर 10% टैरिफ लागू कर दिया है। इसी स्पष्टता की कमी के कारण पिछले महीने होने वाली बैठक टाल दी गई थी। भारत का रिलेटिव एडवांटेज कम हुआ जब फरवरी में फ्रेमवर्क तैयार हुआ था, तब भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति मिल रही थी। अमेरिका के अन्य देशों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच भारत के लिए 18% की दर फायदेमंद थी। लेकिन अब अमेरिका ने सभी देशों के लिए 10% का फ्लैट टैरिफ लागू कर दिया है। इससे भारत का वह खास फायदा कम हो गया है, क्योंकि अब हर ट्रेडिंग पार्टनर को एक समान दर का लाभ मिल रहा है। धारा 301 के तहत दो जांच चल रहीं अगले हफ्ते होने वाली यह बातचीत केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रहेगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने हाल ही में धारा 301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू की हैं, जिनमें भारत भी शामिल है… चर्चा का मुख्य एजेंडा क्या होगा? वॉशिंगटन में होने वाली इस बैठक में भारतीय अधिकारी नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर स्पष्टता मांगेंगे। भारत की कोशिश होगी कि बदले हुए हालातों में भी भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा की जाए। साथ ही धारा 301 के तहत चल रही जांचों पर भारत अपना पक्ष मजबूती से रखेगा ताकि भविष्य में किसी भी तरह के प्रतिबंधों से बचा जा सके। क्या है धारा 301? यह अमेरिका के ‘ट्रेड एक्ट 1974’ का एक हिस्सा है। इसके तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर उसे लगता है कि किसी दूसरे देश की व्यापार नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं, तो वह उसकी जांच कर सकती है और उस पर जुर्माना या व्यापार प्रतिबंध लगा सकती है। भारत के लिए क्यों जरूरी है यह डील? ये खबर भी पढ़ें… थोक महंगाई 38 महीने में सबसे ज्यादा: मार्च में ये 3.88% पर पहुंची, रोजाना जरूरत का सामान और फ्यूल महंगा हुआ मार्च में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई है। फरवरी के यह 2.13% पर थी। यानी इसमें एक महीने के अंदर 1.75% की बढ़ोतरी हुई है। थोक महंगाई ने 38 महीने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। जनवरी 2023 में थोक महंगाई 4.73% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 अप्रैल को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…












































