वन अमले पर हमला, दो महिला समेत 10 पर केस:खंडवा के जंगल में अतिक्रमण रोकने पहुंचे चौकीदार से की थी मारपीट

खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र में जंगल की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। सोमवार को भिलाईखेड़ा बीट के आमाखुजरी टांडा में अतिक्रमणकारियों ने जंगल की जमीन पर हल चलाकर खेती की तैयारी शुरू कर दी थी। इस दौरान वन विभाग की टीम ने कार्रवाई की तो आरोपियों ने एकजुट होकर वन अमले के साथ झूमाझपटी की और चौकीदार से मारपीट की थी। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया हैं। वनपाल अंतरसिंह बघेल (44), निवासी गुड़ी वन परिक्षेत्र की शिकायत पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की है। पुलिस ने रमेश, इंदर सिंह, सुरसिंह, भुवानसिंह, बुचा, गंगाराम, गणपत, सूरज, रामसिंह की पत्नी, गोरेलाल की पत्नी सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 190, 189(2), 132, 351(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। चौकीदार पर हमला, कपड़े फाड़े कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों ने चौकीदार रामदास को घेर लिया और उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि हमलावरों ने उसके कपड़े फाड़ दिए, गला दबाया और नाखूनों से हमला कर घायल कर दिया। साथ ही दोबारा कार्रवाई करने पर जान से मारने की धमकी दी। महिलाओं ने किया हंगामा, बनाया दबाव वन विभाग के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाओं ने हंगामा करते हुए खुद के कपड़े फाड़ लिए, ताकि वन अमले पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, पूरे घटनाक्रम का वीडियो वन कर्मचारियों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया है। बाहरी जिलों से पहुंचे अतिक्रमणकारी वन विभाग का कहना है कि क्षेत्र में अतिक्रमणकारी बड़वानी, खरगोन और बुरहानपुर जिलों से आकर वन भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। अतिक्रमण में मुआसिंह और उसके परिवार के सदस्यों की भूमिका सामने आई है। विभाग के मुताबिक, इनके पट्टे करीब दो महीने पहले निरस्त कर दिए गए थे और बेदखली के आदेश भी जारी हो चुके हैं। मुआसिंह पर पहले से आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और जिलाबदर की कार्रवाई भी लंबित है। पेड़ काटे, दोबारा कब्जा करने की कोशिश अतिक्रमणकारियों ने करीब 3 हेक्टेयर क्षेत्र में बबूल के पेड़ काट दिए, जहां पहले बीजारोपण किया गया था। वहीं आमाखुजरी क्षेत्र की करीब 250 हेक्टेयर वनभूमि में से लगभग 50 हेक्टेयर पर दोबारा अवैध कब्जा कर बोवनी की तैयारी की जा रही है।
कलेक्टर रात में वेयरहाउस पहुंचे, ताला खुलवाया:फसल तुलाई रुकने पर कलेक्टर की फटकार; बोले- किसान जगेगा तो सबको जागना पड़ेगा

अशोकनगर जिले के सिजावट गांव स्थित अमल वेयरहाउस पर 8 अप्रैल से किसानों की फसल तुलाई बंद होने की सूचना पर कलेक्टर साकेत मालवीय सोमवार रात मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां पहुंचते ही अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल वेयरहाउस का ताला खुलवाया। कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन तुलाई का काम सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है। गौरतलब है कि इससे पहले तुलाई रुकने से नाराज होकर किसानों ने चक्काजाम भी किया था, जिसे अधिकारियों के समझाने पर हटाया गया था। बोले- मुंशी नहीं होगा तो क्या काम नहीं होगा? कलेक्टर ने अधिकारियों से सवाल किया कि यदि समिति प्रबंधक नहीं है, तो क्या किसानों की फसल नहीं तोली जाएगी? जिला अधिकारी होने के नाते उन्हें तुलाई सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा, “आप डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर हो, मुंशी न होने की स्थिति में तुलाई शुरू नहीं कर पा रहे। मुंशी नहीं होगा तो क्या काम नहीं होगा?” कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि किसान अपनी फसल लेकर खड़े रहेंगे और अधिकारी चैन से सोएंगे, ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। अधिकारियों से पूछा- दिनभर से तोल नहीं हो रही थी, जानकारी क्यों नहीं थी मौके पर प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ पहुंचे कलेक्टर मालवीय ने जवाब मांगा कि दिनभर से तोल नहीं हो रही थी, इसकी जानकारी उन्हें क्यों नहीं थी और तुलाई का काम शुरू क्यों नहीं कर पाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसानों को तुलाई में जितनी देर होगी, अधिकारियों को भी उतनी ही रात भर जागना पड़ेगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “किसान जगेगा तो सबको जागना पड़ेगा।” 8 अप्रैल से बंद थी तुलाई, किसानों ने किया था चक्काजाम दरअसल, सिजावट गांव स्थित अमल वेयरहाउस पर समिति प्रबंधक द्वारा 8 अप्रैल से किसानों की फसल की तुलाई रोक दी गई थी। लगातार कई दिनों से तुलाई न होने के कारण किसानों में भारी आक्रोश था और इसी से नाराज होकर उन्होंने चक्काजाम कर दिया था। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप और समझाने के बाद चक्काजाम हटाया गया था, जिसके बाद सोमवार रात खुद कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला।
पुलिस का सुरक्षित ट्रैक्टर-ट्रॉली, सुरक्षित किसान अभियान:सड़क दुर्घटना रोकने 30 ट्रैक्टर ट्रालियों पर लगाया रिफ्लेक्टर रेडियम

नर्मदापुरम पुलिस ट्रैक्टर ट्रालियों से होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए अभियान चला रही है। अभियान का नाम सुरक्षित ट्रैक्टर-ट्रॉली सुरक्षित किसान दिया है। अभियान के अंतर्गत पुलिस द्वारा ट्रॉली के पीछे रिफ्लेक्टर रेडियम लगाया जा रहा है। ताकि रात के दौरान गाड़ी के लाइट का उजाला पड़ने पर वो रिफ्लेक्ट हो और सामने वाला वाहन चालक पहले से सतर्क हो जाएं। किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। डोलरिया थाना प्रभारी प्रवीण चौहान के नेतृत्व में थाना क्षेत्र में गेहूं,चना खरीदी केंद्रों पर खड़ी ट्रालियों और हाईवे से गुजरती ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रेडियम चस्पा किया। अभियान का फ्लैक्स लगाकर भी रेडियम लगाने के फायदें बताएं। डोलरिया थाना प्रभारी चौहान ने बताया ट्रॉलियों में पीछे लाइट नहीं होती है। जिस वजह से अधिकांश रात को ट्रॉलियों दिखती नहीं और उसमें अन्य वाहन टकरा जाते। जिससे मृत्यु और घायल होने की घटनाएं होती। उसे रोकने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। 30 ट्रॉलियों के पीछे रेडियम लगाया। किसानों को इसके फायदें और रेडियम नहीं लगे होने के नुकसान बताएं।
अनियंत्रित होकर ट्रैक्टर में लगा थ्रेसर पलटा:धूमा बाईपास पर यातायात रहा बाधित, मशक्कत के बाद खुला जाम

सिवनी जिले के धूमा थाना क्षेत्र अंतर्गत धूमा बाईपास पर सोमवार देर रात एक बड़ा हादसा टल गया। यहां एक ट्रैक्टर में लगा थ्रेसर मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलट गया। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। जानकारी के अनुसार, देर रात एक ट्रैक्टर थ्रेसर लेकर धूमा बाईपास मार्ग से गुजर रहा था। मोड़ पर संतुलन बिगड़ने के कारण थ्रेसर अचानक पलट गया। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां आमतौर पर वाहनों और लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। हालांकि, घटना के समय वहां कोई राहगीर या अन्य वाहन मौजूद नहीं था, जिससे संभावित बड़ा नुकसान टल गया। हादसे के बाद सड़क पर थ्रेसर पलटने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हो गया। राहगीरों और वाहन चालकों को असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। क्रेन की सहायता से पलटे हुए थ्रेसर को सड़क से हटाया गया, जिसके बाद यातायात सुचारू रूप से बहाल हो सका। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बाईपास मार्ग पर तेज गति और मोड़ों पर पर्याप्त संकेतक न होने के कारण अक्सर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सावधानीपूर्वक वाहन संचालन की आवश्यकता को उजागर किया है।
अमेरिका में आज इजराइल-लेबानन की सीजफायर वार्ता:हिजबुल्लाह मुद्दे पर अटका पेंच, नेतन्याहू बोले- उग्रवादियों पर हमले बंद नहीं करेंगे

अमेरिका में आज इजराइल और लेबनान के बीच सीजफायर पर अहम बातचीत होगी। यह बैठक वॉशिंगटन डीसी में होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस बातचीत का मकसद लेबनान सीमा पर हिंसा कम करना और स्थायी युद्धविराम की तरफ बढ़ना है। हालांकि, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कह चुके हैं कि लेबनान में ईरान समर्थक उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, ईरान का कहना है कि इजराइल को लेबनान में तुरंत हमले रोकने होंगे, क्योंकि सीजफायर समझौते की एक शर्त है कि लेबनान पर हमले नहीं होंगे। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स ईरान जंग जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
ईरान का 5 साल परमाणु प्रोग्राम रोकने का प्रस्ताव था:अमेरिका 20 साल पर अड़ा रहा; होर्मुज स्ट्रेट पर सैन्य नाकाबंदी शुरू

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता में ईरान ने 5 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन अमेरिका 20 साल की शर्त पर अड़ा रहा। इस असहमति के कारण दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी बंदरगाहों की सैन्य नाकाबंदी शुरू कर दी। अमेरिकी सेना ने साफ किया कि ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा, हालांकि अन्य देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी। नाकाबंदी लागू होने के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने नए तरीके से युद्ध करने की चेतावनी दी, जबकि सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। नाकाबंदी पर अमेरिका को यूरोपीय देशों का समर्थन नहीं नाकाबंदी पर अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला। कई यूरोपीय देशों ने नाकाबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया, वहीं एक ईरानी टैंकर ने नाकाबंदी को चुनौती देते हुए रास्ता पार किया। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से करीब 20% तेल सप्लाई होती है। इससे पहले ईरान ने भी यहां पश्चिमी जहाजों की आवाजाही रोक दी थी। लगातार बढ़ते तनाव का असर तेल बाजार पर भी दिख रहा है। फरवरी के अंत से शुरू हुए संघर्ष के बाद कीमतों में 50% तक उछाल आया है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा और बाद में करीब 99 डॉलर पर आ गया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स ईरान जंग जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
राज्यसभा सीट पर कांग्रेस में कास्ट प्रेशर बढ़ा:दलित और ब्राह्मणों के बाद अब सिंधी समाज ने ठोकी दावेदारी

मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान तेज हो गई है। पार्टी में जातीय समीकरणों को लेकर दबाव(कास्ट प्रेशर) लगातार बढ़ रहा है। जहां पहले दलित और फिर विंध्य के ब्राह्मणों की ओर से दावेदारी पेश की गई थी, वहीं अब इस रेस में सिंधी समाज की भी एंट्री हो गई है। सिंधी प्रतिनिधित्व की मांग उठी रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से राज्यसभा प्रतिनिधि भेजने की मांग उठाई है। ठारवानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संबोधित पत्र में लिखा है कि वे लंबे समय से कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उनका परिवार पीढ़ियों से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा है। सिंधी समाज देशभर में कांग्रेस के प्रति अपनी आस्था और योगदान के लिए जाना जाता है। आगामी राज्यसभा चयन में सिंधी समाज से एक योग्य और समर्पित प्रतिनिधि के रूप में उनके नाम पर विचार किया जाए। इस पत्र की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी भेजी गई है। त्रिकोणीय हुआ जातीय समीकरण दलित वर्ग: दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से इनकार करने के बाद कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दलित वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजे जाने की मांग की थी। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी इसका समर्थन कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज: विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में उमंग सिंघार और जीतू पटवारी से मुलाकात की थी। उनका तर्क है कि विंध्य में ब्राह्मण समाज का बड़ा प्रभाव है, जिसे राज्यसभा के जरिए प्रतिनिधित्व देना जरूरी है। सिंधी समाज: अब दिलीप ठारवानी की दावेदारी ने इस रेस को और दिलचस्प बना दिया है। ठारवानी का मानना है कि यदि उन्हें अवसर मिलता है, तो वे संसद में पार्टी की नीतियों और जनहित के मुद्दों को पूरी निष्ठा से उठाएंगे। प्रदेश भर में सिंधी समाज कांग्रेस से जुडे़गा।
चंडीगढ़ में लेडी डॉक्टर ने पहले दिन ही जॉब छोड़ी:बोली- अस्पताल मालिक तय करती मरीज ICU में कब तक रहेगा, मेरे नाम पर गलत काम होता

चंडीगढ़ के प्राइवेट अस्पताल में महिला डॉक्टर डॉ. प्रभलीन कौर ने नौकरी के पहले ही दिन इस्तीफा दे दिया। डॉक्टर ने कहा कि अस्पताल की ओनर ही तय करती थी कि मरीज को कितने दिन भर्ती रखना है और कितने दिन ICU में रखना है। उन्होंने कहा कि नाम मेरा और गलत काम उनका। इललिए मैंने रिजाइन कर दिया। महिला डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह ये सारी बातें कह रही है। उसी वीडियो को पंजाब ह्यूमन राइट्स कमीशन के मेंबर पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि इस बहादुर डॉक्टर बेटी ने बेधड़क होकर चंडीगढ़ में प्राइवेट अस्पताल माफिया का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया है। पंजाब स्टेट एंड चंडीगढ़ ह्यूमन राइट्स कमीशन इस बहादुर बेटी के साहस की सराहना करता है और डटकर इस बेटी के साथ खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि हम ह्यूमन राइट्स की आवाज उठाते हैं। हमारे देश में बड़े-बड़े लोग सोचते हैं कि आवाज को कैसे उठाया जाए, लेकिन इस बेटी ने इसे उठाया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आप भी अस्पतालों पर नजर रखें। महिला डॉक्टर की वीडियो में अहम बातें… डॉक्टर का वीडियो शेयर कर जतिंदर सिंह ने ये 2 बातें कहीं चंडीगढ़ की रहने वाली डॉक्टर, जीरकपुर में क्लिनिक जानकारी के मुताबिक, डॉ. प्रभलीन कौर चंडीगढ़ में रहती हैं और जीरकपुर के लोहगढ़ एरिया में अपना क्लिनिक भी चलाती हैं। वह एक इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 30 मार्च को सोशल मीडिया पर अपना वीडियो अपलोड किया था। हालांकि, उन्होंने उस अस्पताल का नाम उजागर नहीं किया। वहीं, अस्पताल की ओर से भी इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। साथ ही कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं की गई है।
आशा-लता से कहा जाता- शमशाद जैसे गाओ:पिता की शर्त पर ताउम्र बुर्खा पहनकर गाया, फोटो खिंचवाने की मनाही थी, किशोर कुमार उठाते थे इनकी कुर्सी

1931 की बात थी भारत-पाकिस्तान उन दिनों एक था और कोई सीमाएं-सरहद नहीं थी। लाहौर-बॉम्बे और कोलकाता में फिल्में बनना शुरू हो चुकी थीं, रेडियो का दौर भी आ चुका था और कुछ म्यूजिक कंपनियां गाने रिकॉर्ड कर बेचा करती थीं। लाहौर की जेनोफोन म्यूजिक कंपनी उन दिनों काफी मशहूर हुआ करती थी। एक दोपहर एक नौजवान शख्स 12 साल की बच्ची का हाथ थामे स्टूडियो में पहुंचा। बच्ची का पहनावा एक दम आम था, जैसे किसी गरीब परिवार से हो। देखकर मालूम पड़ता था कि उसे अचानक ही वहां ऑडिशन में लाया गया हो। साथ पहुंचे शख्स ने साफ किया कि वो बच्ची को उसके परिवार से छिपाकर यहां लाया था। लीजेंड्री म्यूजिक कंपोजर गुलाम हैदर सामने बैठे थे। वही गुलाम हैदर, जिन्होंन लता मंगेशकर को ब्रेक दिया था। अब गाने की बारी थी, बच्ची ने झिझकते हुए पॉजिशन ली, स्टूडियो में सन्नाटा पसरा और बच्ची ने बहादुर शाह जफर की गजल मेरा यार मुझे मिले अगर गाना शुरू किया। उस बच्ची ने दो लाइन गाई ही थीं कि गुलाम हैदर ने गाना रुकवा दिया। बच्ची डर गई। मन में बस यही ख्याल था कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गई। गुलाम हैदर ने पास खड़े असिस्टेंट को देखा और कहा- बच्ची के साथ 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट बनवा लो। साथ ही कहा गया कि बच्ची को हर वो लग्जरी सुविधा दो, जो टॉप सिंगर्स को दी जाती है। उस बच्ची ने हुनर और गूंजती आवाज से वो कमाल दिखाया कि भारत की पहली प्लेबैक सिंगर बनीं और ‘सैंया दिल में आना रे…’, ‘कजरा मोहब्बत वाला….’ और ‘मुगल-ए-आजम’ का मशहूर गाना ‘तेरी महफिल में किस्मत आजमां कर हम भी देखेंगे…’, जैसे 6 हजार गाने गाए। करीब 100 साल बाद भी उनके गाने सुने और रीमिक्स किए जाते हैं। उस बच्ची का नाम था शमशाद बेगम, जिनकी लेजेंड्री सिंगर लता मंगेशकर भी फैन थीं। जब लता नई-नई गायिकी में आईं तो उन्हें शमशाद की तरह गाने की सलाह दी जाती थी। एक दौर वो भी आया जब किशोर कुमार जैसे लीजेंड्री सिंगर भी शमशाद की खिदमद में कुर्सी उठाए पीछे-पीछे चलते थे। जब सिंगर्स को एक गाने के लिए 100 रुपए फीस दी जाती थी, तब फिल्ममेकर्स शमशाद को 2000 रुपए फीस देने के लिए भी राजी हो जाया करते थे। पिता की शर्त में ताउम्र बुर्का पहनकर गाया। पाबंदी ऐसी कि जवानी के दिनों में कोई तस्वीर तक क्लिक नहीं करवाई। फिल्मों में हीरोइन बनने के बड़े मौके भी पिता के गुस्से के भेंट चढ़े। आज शमशाद बेगम की 107वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर जानिए, हिंदी सिनेमा के इतिहास में गायिकी की मिसाल शमशाद बेगम की समाजिक बेड़ियों से निकलकर इतिहास रचने की कहानी- बचपन में स्कूल और शादियों में गाने से हुनर को मिली पहचान जलियावाला हत्याकांड के ठीक एक दिन बाद 14 अप्रैल 1919 को शमशाद बेगम का जन्म ब्रिटिश इंडिया के लाहौर में हुआ। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शमशाद का जन्म लाहौर नहीं बल्कि अमृतसर में हुआ। उनके पिता मियां हुसैन बख्श के मिस्त्री थे। उन्होंने तंगहाली में 8 बच्चों की परवरिश की। शमशाद महज 10 साल की थीं, जब उन्होंने शादियों में गाना शुरू कर दिया। नन्ही सी बच्ची की आवाज इतनी बुलंद थी कि हर बार उन्हें ही गाने के लिए बुलाया जाने लगा। कुछ रिश्तेदार खुद होकर एक आना दे दिया करते थे। एक दिन शमशाद ने स्कूल के प्रोग्राम में कोरस में गाना गाया। प्रिंसिपल आवाज सुनकर दंग रह गईं। उन्होंने पास बुलाकर कहा- देखना, एक दिन तुम परिवार का नाम रौशन करोगी। इसके बाद उन्हें स्कूल प्रेयर की हेड सिंगर बना दिया गया। 12 की उम्र में 2 लाइनें सुनकर बडे़ म्यूजिक डायरेक्टर ने दिए 12 गाने शमशाद की आवाज आस-पड़ोस में पहचान बना रही थी, लेकिन पिता मियां हुसैन इससे काफी चिढ़ते। उन्हें बेटी का गाना पसंद न था। रूढ़िवादी परिवार में गाना सुनना भी हराम था। घर में रेडियो तक नहीं था। लेकिन 1931 में उनके चाचा आमिर गजल, कव्वाली के बड़े फैन थे। एक रोज उन्होंने शमशाद को गाते सुना और उन्हें हुनर परखने में देर न लगी। जैसे ही उन्हें पता चला कि लाहौर में जेनोफोन म्यूजिक कंपनी के ऑडिशन हो रहे हैं, वो परिवार से छिपकर शमशाद को अपने साथ ले गए। ऑडिशन में मशहूर सिगंर गुलाम हैदर, जो कंपनी के म्यूजिक डायरेक्टर थे ने 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट दिया। तय हुआ कि हर गाने के 12 रुपए मिलेंगे। घर लौटकर जब चाचा ने ये खबर पिता को दी, तो वो खूब नाराज हुए। नाराजगी चरम पर थी। लंबी बहस के बाद चाचा ने भाई मियां हुसैन को समझाया कि ये हुनर हर किसी में नहीं होता, अगर पूरी दुनिया गाना गा रही है तो तुम्हें क्यों ऐतराज है। आखिरकार वो मान गए, लेकिन शर्तों पर। शर्त कि शमशाद का चेहरा कोई न देखे, उन्हें हमेशा बुर्का पहनकर गाना होगा। वो कभी तस्वीर क्लिक न करवाएं और न ही उनकी पहचान दुनिया के सामने आए। गायिकी के लिए उतावलीं शमशाद बेगम ने हर एक शर्त मानी और जेनोफोन म्यूजिक कंपनी केे साथ जुड़ गईं। शमशाद बेगम के शुरुआती कुछ गाने बिना उनके नाम के रिलीज किए गए। आरती गाने पर उनकी जगह सिंगर का नाम उमा देवी लिखा जाता और पंजाबी गानों में सुरंदिर कौर। उस समय रिकॉर्डिंग कंपनियों का मानना था कि लोग अपने धर्म के लोगों के ही गाने सुनना पसंद करते थे। जेनोफोन का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद उन्हें कंपनी की तरफ से 5000 रुपए दिए गए थे। जेनोफोन म्यूजिक कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद उन्हें पेशावर रेडियो और फिर दिल्ली के एयर इंडिया रेडियो में काम मिल गया। उनके गाने और प्रोग्राम काफी हिट हुआ करते थे। परिवार के खिलाफ जाकर की हिंदू लड़के से शादी साल 1932, शमशाद 13 साल की थीं, जब उनकी मुलाकात पड़ोस में रहने वाले वकालत के स्टूडेंट गणपत लाल बट्टो से हुई। दोनों की उम्र में बड़ा फासला था, लेकिन विचार जल्द ही एक होने लगे। शमशाद अक्सर चोरी-छिपे उनसे मिला करती थीं। ये वो दौर था, जब कम उम्र में ही शादी करवाने की कवायद थी, ऊपर से शमशाद का रूढ़िवादी परिवार। 13 की उम्र
प्रफुल IPL डेब्यू ओवर में 3 विकेट वाले पहले बॉलर:वैभव शून्य पर आउट; संदीप-जुरेल टकराए, फ्लडलाइट्स बंद हुईं; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL के 21वें मैच में राजस्थान रॉयल्स को 57 रन से हराया। राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में रोचक मोमेंट्स और रिकॉर्ड्स देखने को मिले। IPL डेब्यू में प्रफुल्ल हिंगे ने पहले ओवर में 3 विकेट लिए। वे ऐसा करने वाले पहले गेंदबाज बने। वैभव सूर्यवंशी बिना खाता खोले आउट हुए। ईशान किशन के कैच के दौरान संदीप शर्मा और ध्रुव जुरेल टकरा गए। SRH Vs RR मैच के मोमेंट्स और रिकॉर्ड्स… 1. अभिषेक एक साल में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट अभिषेक शर्मा एक साल में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने वाले भारतीय बल्लेबाज बने। वे इस साल 18 पारियों में 7 बार बिना खाता खोले लौटे। उन्होंने रोहित शर्मा (2018) और संजू सैमसन (2024) को पीछे छोड़ा, जो 32-32 पारियों में 6-6 बार शून्य पर आउट हुए थे। 2. साकिब का IPL डेब्यू में बेस्ट बॉलिंग फिगर साकिब हुसैन IPL डेब्यू में बेस्ट बॉलिंग परफॉर्मेंस वाले प्लेयर बने। उन्होंने 24 रन देकर 4 विकेट लिए। साकिब ने अश्विनी कुमार का रिकॉर्ड तोड़ा। अश्विनी ने 2025 में KKR के खिलाफ 26 रन देकर 4 विकेट लिए थे। तीसरे नंबर पर प्रफुल हिंगे हैं। उन्होंने आज 34 रन देकर 4 विकेट लिए। यहां से टॉप-6 मोमेंट्स… 1. आर्चर को लगातार दूसरे मैच की पहली गेंद पर विकेट जोफ्रा आर्चर ने मैच की पहली गेंद पर विकेट लिया। उन्होंने अभिषेक शर्मा को आउट किया। अभिषेक बिना खाता खोले लौटे। इससे पहले 10 अप्रैल को RCB के खिलाफ भी आर्चर ने पहली गेंद पर फिल सॉल्ट को आउट किया था। लगातार दूसरे मैच में उन्होंने यह कारनामा किया। IPL में पहली गेंद पर सबसे ज्यादा विकेट के मामले में मोहम्मद शमी 5 विकेट के साथ टॉप पर हैं। आर्चर 4 विकेट के साथ दूसरे नंबर पर हैं। राजस्थान के लिए यह 24वीं बार रहा जब टीम ने बिना कोई रन दिए पहला विकेट लिया। यह IPL में किसी भी टीम के लिए सबसे ज्यादा है। वहीं, 12वीं बार ऐसा हुआ जब राजस्थान ने पारी की पहली ही गेंद पर विकेट लिया। 2. ईशान किशन की सिक्स से फिफ्टी 10वें ओवर में ईशान किशन ने फिफ्टी पूरी की। उन्होंने रवि बिश्नोई के खिलाफ घुटने के बल बैठकर डीप मिडविकेट पर छक्का लगाकर 30 गेंद में अर्धशतक बनाया। 3. संदीप-ध्रुव टकराए, ईशान कैच आउट 14वें ओवर में ईशान किशन का विकेट गिरा। संदीप शर्मा की वाइड लेंथ गेंद पर ईशान ने पुल शॉट खेला, लेकिन टाइमिंग सही नहीं रही और गेंद ऊपर चली गई। कैच के दौरान संदीप शर्मा और ध्रुव जुरेल टकराए, लेकिन संदीप ने गेंद पकड़ ली। 4. फ्लडलाइट बंद हुई, दर्शकों ने फ्लैश जलाए 13वें ओवर में फ्लडलाइट बंद होने से खेल रुका। मैदान पर अंधेरा छा गया और दर्शकों ने मोबाइल फ्लैश जलाई। ब्रेक में ईशान किशन टॉवेल से खुद को सुखाते नजर आए, जबकि रियान पराग और संदीप शर्मा बात करते दिखे। 5. वैभव शून्य पर आउट, हिंगे ने पहले ओवर में 3 विकेट लिए IPL डेब्यू में प्रफुल्ल हिंगे ने इतिहास रचा। वे पहले ओवर में 3 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। इससे पहले IPL इतिहास में 32 बार पहले ओवर में 2 विकेट लिए गए थे। दूसरी गेंद पर वैभव सूर्यवंशी को आउट किया। चौथी पर ध्रुव जुरेल को बोल्ड किया। आखिरी गेंद पर लुहान-ड्रे प्रिटोरियस को कैच कराकर तीसरा विकेट लिया। तीनों बल्लेबाज शून्य पर आउट हुए। 6. फरेरा ने 102 मीटर लंबा सिक्स लगाया 11वें ओवर में डोनोवन फरेरा ने 102 मीटर का सिक्स लगाया। हर्ष दुबे की फुल लेंथ गेंद पर उन्होंने आगे बढ़कर शॉट खेला और गेंद को डीप मिडविकेट के ऊपर 102 मीटर दूर भेजा। फरेरा को 15वें ओवर की आखिरी बॉल पर डेब्यू कर रहे साकिब हुसैन ने बोल्ड कर दिया।






