शिवपुरी में किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस का धरना प्रदर्शन:गेहूं खरीदी में देरी पर एसडीएम को ज्ञापा, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदेशव्यापी किसान आंदोलन के तहत गुरुवार को जिला मुख्यालय शिवपुरी में कांग्रेस ने जोरदार धरना प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में दोपहर 1 बजे माधव चौक चौराहे पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी एकत्रित हुए। उन्होंने किसानों की समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन में जिले भर से कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता, किसान कांग्रेस, युवक कांग्रेस, महिला कांग्रेस और एनएसयूआई सहित विभिन्न प्रकोष्ठों के सदस्य शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए उन पर तीखा हमला किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि गेहूं उपार्जन की तिथियों को बार-बार आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे किसानों को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियों के कारण किसान अपनी उपज 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं, जबकि अन्य राज्यों में खरीदी समय पर शुरू हो चुकी है। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के नाम एसडीएम आनंद राजावत को ज्ञापन सौंपा। प्रमुख मांगें, जिसके लिए ज्ञापन दिया दोपहर लगभग 3 बजे एसडीएम आनंद राजावत धरना स्थल पर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद धरना प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हो गया। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
राजस्थानी केरी अचार रेसिपी: घर पर बनाएं राजस्थान की खास केरी अचार, 1 साल से भी ज्यादा कीमत; नोट करें रेसिपी

राजस्थानी केरी अचार रेसिपी: राजस्थान में लोग अक्सर चटपटा और तीखा खाना पसंद करते हैं। इतना ही नहीं, राजस्थानी थाली का स्वाद तब तक अधूरा है, जब तक केरी का अचार न हो। राजस्थान में इस अचार को बनाने का तरीका थोड़ा सा अलग और खट्टा है। खास बात यह है कि आप इस आचार्य को पिछले साल तक बता सकते हैं। यह बुरा नहीं है. आइये आपको राजस्थान की केरी अचार बनाने के तरीके के बारे में बताते हैं। राजस्थानी केरी अचार बनाने की सामग्री के लिए कच्ची आम केरीहल्दी का तेलसौंफमेथी दानाकलौंजीहल्दी पाउडरलाल मिर्च पाउडरहींगनमक सबसे पहले केरी को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अब ऐसे ही छोटे नमूने में कट लें। एक बड़ी पोथी में कटी हुई केरी, हल्की हल्दी और नमक लगभग 5-6 घंटे के लिए छोड़ दें। इससे केरी अपना पानी छोड़ो देवी। इसके बाद पानी अच्छा लें और केरी के मिश्रण को पंजाब के नीचे या हल्की धूप में 2-3 घंटे के लिए सुखाएं। ध्यान रहे, बिल्कुल नहीं रहना चाहिए।एक मिठाई में मेथी दाना और सौंफ को पेंटिंग सा भून लें। अब एक बड़े पोयस्टोर में दरदरी सौंफ, मेथी, कलौंजी, हल्दी, लाल मिर्च, हींग और नमक को एक साथ मिला लें।सरसों के तेल को एक कड़ाही में तब तक गर्म करें जब तक इसमें से धुआं ना निकले। इसके बाद गैस बंद हो गई और तेल में खराबी आ गई। बिल्कुल गर्म तेल में मोनोजल हो सकता है।जब तेल गुनगुना हो जाए, तो इसमें तैयार किए गए मूल उत्पाद शामिल हैं। अब इस मिश्रण में सुखी हुई केरी के टुकड़े शामिल हैं और अच्छी तरह से बनाए गए हैं ताकि हर टुकड़े पर ठोस की कोटिंग हो जाए। 1 साल से ज्यादा की कीमत ‘सीक्रेट टिप्स’ अचार को कांच या चीनी मिट्टी के जार में भरें। जार में अचार को दबा-दबा कर भरा और ऊपर से इतना उपयोग तेल डाला कि अचार पूरी तरह डूब जाए। तेल आचार्य के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का काम करता है।आचार रखने के लिए प्लास्टिक का उपयोग न करें। जार को गर्म पानी से धोकर धूप में सुखाना चाहिए ताकि कोई खरीदारी न हो।आचार विचार समय हमेशा आकर्षक का उपयोग करें। सिद्धांत ही है आचार्य के सबसे बड़े दुश्मन।अचार के विज्ञापन के बाद जार के मुंह पर सूती फैब्रिक के टुकड़े उसे 4-5 दिन से लेकर रोज 2-3 घंटे की धूप तक सुनाते हैं। इसी प्रकार अच्छे प्रकार के पाक मिलते हैं।
फरमान से शादी करने वाली मोना लिसा की उम्र की होगी जांच, पर कैसे होता है यह टेस्ट, विज्ञान के हिसाब से जानिए

Last Updated:April 09, 2026, 17:03 IST Mona Lisa Age Test: सोशल मीडिया सेंसेशन मोना लिसा ने जब से केरल के एक्टर फरमान से शादी की है तब से वह विवादों में है. कहा जा रहा है मोना लिसा नाबालिग है. इसलिए फरमान के साथ यह शादी अवैध है. ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है और केरल और मध्य प्रदेश पुलिस को 7 दिनों के अंदर जांच करने के आदेश दिए हैं. इस बीच पुलिस ने मोना लिसा की उम्र का पता लगाने के लिए ऑसिफिकेशन टेस्ट करने का फैसला किया है. अब सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. आइए जानते हैं. mona_lisa_0007 इंस्टाग्राम पेज से ली गई मोना लिसा और फरमान खान की फोटो. कुंभ मेले से सोशल मीडिया में रातों-रात सनसनी बनीं मोना लिसा की उम्र की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. दरअसल, उनकी उम्र को लेकर विवाद गहरा गया है. केरल के फरमान से शादी के बाद हिन्दू पक्षों ने कई जगहें शिकायतें पहुंचाई हैं. शिकायत में कहा गया है कि कुंभ के दौरान एक वीडियो में मोना लिसा ने अपनी उम्र 16 साल बताई थी. इस हिसाब से अभी उसकी उम्र 17 साल ही होगी लेकिन उम्र से संबंधित दस्तावेजों में हेरफेर कर गलत जानकारी दी गई है. ऐसे में मोना लिसा नाबालिग है और इस हिसाब से फरमान ने नाबालिग से शादी की है. इस तरह फरमान पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए. इसी शिकायत को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को जांच करने का आदेश दिया है. अब सवाल है कि उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. क्या विज्ञान इस गुत्थी को सुलझा पाएगा कि मोना लिसा शादी के वक्त नाबालिग थी या बालिग? विज्ञान के हिसाब से उम्र का पता विज्ञान में उम्र का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. यह केवल एक सामान्य चेकअप नहीं बल्कि फॉरेंसिक विज्ञान की एक जटिल प्रक्रिया है जिसे ऑसिफिकेशन टेस्ट कहा जाता है. इसमें हड्डियों के जुड़ाव की स्थिति को देखा जाता है. इसके बाद डेंटल एजिंग टेस्ट है. इसमें दांतों और उसकी जड़ों की बनावट को आंका जाता है. वहीं उम्र का पता लगाने के लिए हार्मोनल और सेकेंडरी सेक्सुअल कैरेक्टर को भी आधार बनाया जाता है. फोरेंसिक साइंस में बोन डेंसिटी टेस्ट भी प्रमुख है. इसके बाद टेलोमीयर टेस्टिंग से भी इसका पता लगाया जाता है. ओसिफिकेशन टेस्ट या बोन डेंसिटी टेस्ट-विज्ञान में उम्र का अंदाजा लगाने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट प्रमुख है. कोई व्यक्ति नाबालिग है या बालिग, इसका पता लगाने के लिए इस टेस्ट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इसमें एक्स-रे के जरिए हाथ की कलाई की हड्डियों के जुड़ाव की जांच की जाती है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां आपस में जुड़ती हैं. विज्ञान के हिसाब से, जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे शरीर की हड्डियां आपस में जुड़ती हैं और उनके सिरे फ्यूज होने लगते हैं. एक्स-रे और डेंटल स्कैन के जरिए डॉक्टर इन्हीं हड्डियों के घनत्व और दांतों की बनावट का विश्लेषण करते हैं. इस विश्लेषण के आधार पर यह देखा जाता है कि व्यक्ति बालिग है या नाबालिग. हालांकि इसकी सटीकता 80% से 90% तक होती है. पोषण और बीमारियों के कारण इसमें 2-3 साल का अंतर आ सकता है. दांतों का विश्लेषण-जीवित व्यक्तियों और हाल के शवों की उम्र पता करने के लिए यह सबसे सटीक तरीका है. इसमें बच्चों में दांतों के निकलने के क्रम और वयस्कों में दांतों के घिसने या एस्पार्टिक एसिड रेसमीकरण की जांच की जाती है. बच्चों और किशोरों में यह 95% तक सटीक होता है लेकिन वयस्कों में इसमें 5-10 साल का अंतर आ सकता है. टेलोमेयर विश्लेषण-टेलोमेयर टेस्ट जेनेटिक टेस्ट है. यह उम्र पता करने की एक आधुनिक जेनेटिक विधि है. वास्तव में हमारे डीएनए के सिरों पर टेलोमेयर्स होते हैं. हर बार जब कोशिका विभाजित होती है, टेलोमेयर्स छोटे हो जाते हैं. इनकी लंबाई मापकर बायोलॉजिकल एज का पता लगाया जाता है. यह बायोलॉजिकल उम्र बताने में तो सटीक है लेकिन क्रोनोलॉजिकल उम्र (जन्म तिथि के हिसाब से) बताने में इसमें 5-8 साल का अंतर हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 09, 2026, 17:03 IST
TCS को चौथी तिमाही में ₹13,718 करोड़ का मुनाफा:सालाना आधार पर प्रॉफिट 12% बढ़ा, टोटल इनकम 9% बढ़कर ₹71,455 करोड़ पर पहुंची

देश की सबसे बड़ी आईटी (IT) कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने गुरुवार को अपने चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 12% बढ़कर 13,718 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह मुनाफा 12,247 करोड़ रुपए था। रेवेन्यू में 10% की बढ़त, 70 हजार करोड़ के पार मुनाफे के साथ-साथ कंपनी के रेवेन्यू में भी बढ़त देखी गई है। इस तिमाही में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 10% बढ़कर 70,698 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। कंपनी की इस मजबूत ग्रोथ के पीछे 12 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपए) की तीन मेगा डील्स रही। FY26 की चौथी तिमाही में TCS को ₹13,718 करोड़ का मुनाफा सालाना आधार पर तिमाही आधार पर नोट: आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। 31 रुपए प्रति शेयर लाभांश देगी TCS कंपनी ने अपने शेयरधारकों को प्रति शेयर पर 31 रुपए का लाभांश यानी डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनियां अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयर होल्डर्स को भी देती हैं, इसे ही लाभांश कहा जाता है। CEO बोले- हर सेक्टर में दिखा मजबूत प्रदर्शन TCS के CEO और MD के. कृतिवासन ने नतीजों पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह लगातार तीसरी तिमाही है जब कंपनी ने ग्रोथ दर्ज की है। उन्होंने कहा कि हमारी ‘फाइव पिलर स्ट्रेटेजी’ और AI पर फोकस काम कर रहा है। राहत की बात यह है कि यह ग्रोथ किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के बड़े बाजारों और लगभग सभी इंडस्ट्रीज में देखने को मिली है। 1 साल में 20% गिरा TCS का शेयर TCS का शेयर आज यानी 9 अप्रैल को 1.20% यानी 30.80 रुपए चढ़कर 2,590 रुपए पर बंद हुआ। बीते एक महीने में कंपनी का शेयर 2.48% चढ़ा है। एक साल में करीब 20% गिरा है। कंपनी की मार्केट वैल्यू 11.71 लाख करोड़ रुपए है। 1968 में हुई थी TCS की स्थापना टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) भारत की मल्टीनेशनल इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) कंपनी है। यह टाटा ग्रुप की एक सहायक कंपनी है। TCS की स्थापना 1968 में ‘टाटा कंप्यूटर सिस्टम्स’ के रूप में हुई थी। 25 अगस्त 2004 को TCS पब्लिक लिस्टेड कंपनी बनी। 2005 में इन्फॉरमेटिक्स मार्केट में जाने वाली यह भारत की पहली कंपनी बनी। अप्रैल 2018 में 100 अरब डॉलर मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली देश की पहली IT कंपनी बनी। यह 46 देशों में 149 लोकेशन पर काम करती है।
सतीश शाह का पिंडदान 'साराभाई' की कास्ट ने किया था:राजेश कुमार ने बताया- निःसंतान होने पर गया में पूरी टीम ने निभाई परंपरा

एक्टर राजेश कुमार ने हाल ही में बताया कि दिवंगत एक्टर सतीश शाह के लिए टीवी शो साराभाई वर्सेज साराभाई की पूरी कास्ट ने गया में पिंडदान किया था क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं थी। राजेश कुमार ने बॉलीवुड बबल से बात करते हुए सतीश शाह को बहुत जिंदादिल और पॉजिटिव इंसान बताया। उन्होंने कहा कि सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम के बावजूद, उन्होंने कभी भी अपने दर्द को अपने व्यवहार या काम पर असर नहीं पड़ने दिया। राजेश के मुताबिक, सतीश शाह डायलिसिस पर थे और उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था, लेकिन उन्होंने कभी निराशा नहीं दिखाई। वे शम्मी कपूर से काफी प्रेरित थे, जिन्होंने जीवन के आखिरी समय में भी हिम्मत नहीं हारी। सतीश शाह आखिरी दिनों तक खुशमिजाज थे राजेश ने कहा कि सतीश शाह अपने निधन से कुछ दिन पहले भी नॉर्मल और खुशमिजाज मूड में थे। एक्टर ने कहा, “मैंने उनसे चार दिन पहले बात की थी और वह तब भी खुशमिजाज और एनर्जी से भरे हुए थे।” पिंडदान को लेकर राजेश कुमार ने कहा कि वे गया से हैं, जहां यह परंपरा निभाई जाती है। सतीश शाह के निःसंतान होने के कारण शो की पूरी टीम ने मिलकर उनका पिंडदान किया। यह एक इमोशनल फैसला था। सतीश शाह का अक्टूबर 2025 में निधन हुआ था सतीश शाह का निधन 25 अक्टूबर 2025 को 74 साल की उम्र में मुंबई में हुआ। शाह के निधन को लेकर शुरुआत में किडनी फेलियर की बात सामने आई थी। हालांकि बाद में राजेश कुमार ने साफ किया था कि उनका निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। सतीश शाह फिल्म और टीवी इंडस्ट्री का जाना-माना नाम थे। उन्होंने साराभाई वर्सेज साराभाई और जाने भी दो यारो जैसे प्रोजेक्ट्स से पहचान बनाई। इसके अलावा वे फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, मैं हूं ना, रा.वन और इश्क विश्क में भी नजर आए थे।
तोरई की सब्जी का जबरदस्त फायदा! कब्ज, शुगर और वजन पर असरदार, जानिए फायदे और आसान रेसिपी

X तोरई की सब्जी का कमाल! कब्ज, शुगर और वजन कम पर जबरदस्त असरदार Benefits Of Ridge Gourd Vegetable : नागौर में इन दिनों तोरई सब्जी को लेकर खास चर्चा हो रही है. भले ही यह सब्जी देखने में साधारण लगती हो, लेकिन इसके अंदर सेहत का खजाना छिपा होता है. आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार तोरई में विटामिन-A, विटामिन-C, आयरन, कैल्शियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने, कब्ज दूर करने और शरीर को ठंडक देने में बेहद फायदेमंद मानी जाती है. गर्मी के मौसम में इसका सेवन खास लाभ पहुंचाता है. इतना ही नहीं, यह वजन कम करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी सहायक बताई जाती है. यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे रोजाना आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं. आसान रेसिपी के साथ यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल बन जाती है.
अमिताभ बच्चन बोले- खाली हाथ आए थे, ऐसे ही जाएंगे:बिग बी ने जिंदगी के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ पर किया चिंतन, खुद से सवाल-जवाब किए

एक्टर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में जीवन और उसके अर्थ को लेकर एक नोट शेयर किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक पूरा दिन शांति में रहकर खुद से सवाल-जवाब करते हुए बिताया। अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा कि दिनभर उन्होंने अपने आसपास और खुद के साथ समय बिताया, जवाब खोजने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर सवालों के साफ जवाब नहीं मिले। उन्होंने लिखा कि जीवन के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ को समझने की कोशिश हर व्यक्ति करता है, लेकिन इसके ठोस जवाब मिलना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है। ब्लॉग के आखिर में उन्होंने यह भी लिखा, आप सबसे सच्चे रूप को ढूंढते रहते हैं, लेकिन यह तलाश कभी खत्म नहीं होती क्योंकि असली जवाब आसानी से मिलता ही नहीं… और शायद ऐसा ही होना चाहिए। किसी भी सवाल का एक तय जवाब नहीं होता। हर सोच के कई रास्ते होते हैं, और हर रास्ता एक ही मंजिल तक नहीं पहुंचता। और इसलिए… मैं सोचता रहता हूं… काम न करने पर होती है बेचैनी: अमिताभ इससे पहले 6 अप्रैल को भी अमिताभ ने लिखा था कि जब वह रोज काम नहीं करते, तो उन्हें असहज महसूस होता है। उन्होंने कहा कि बिना काम के दिन उन्हें परेशान और असंतुलित लगते हैं। उनके अनुसार, काम न करने से उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है, जिससे बेचैनी हो सकती है, अगर इसे समझा और संभाला न जाए। अमिताभ बच्चन के वर्क फ्रंट की बात करें तो उन्हें आखिरी बार फिल्म कल्कि 2898 AD में देखा गया था, जिसे नाग अश्विन ने डायरेक्ट किया था। वहीं, अमिताभ ने इसके दूसरे पार्ट की भी शूटिंग शुरू कर दी है और फिल्म के सेट से बिहाइंड द सीन (BTS) तस्वीरें शेयर की थीं। साथ ही उन्होंने करीब 40 साल बाद कमल हासन के साथ दोबारा काम करने को लेकर उत्साह जताया था।
अमिताभ बच्चन बोले- खाली हाथ आए थे, ऐसे ही जाएंगे:बिग बी ने जिंदगी के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ पर किया चिंतन, खुद से सवाल-जवाब किए

एक्टर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में जीवन और उसके अर्थ को लेकर एक नोट शेयर किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक पूरा दिन शांति में रहकर खुद से सवाल-जवाब करते हुए बिताया। अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा कि दिनभर उन्होंने अपने आसपास और खुद के साथ समय बिताया, जवाब खोजने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर सवालों के साफ जवाब नहीं मिले। उन्होंने लिखा कि जीवन के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ को समझने की कोशिश हर व्यक्ति करता है, लेकिन इसके ठोस जवाब मिलना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है। ब्लॉग के आखिर में उन्होंने यह भी लिखा, आप सबसे सच्चे रूप को ढूंढते रहते हैं, लेकिन यह तलाश कभी खत्म नहीं होती क्योंकि असली जवाब आसानी से मिलता ही नहीं… और शायद ऐसा ही होना चाहिए। किसी भी सवाल का एक तय जवाब नहीं होता। हर सोच के कई रास्ते होते हैं, और हर रास्ता एक ही मंजिल तक नहीं पहुंचता। और इसलिए… मैं सोचता रहता हूं… काम न करने पर होती है बेचैनी: अमिताभ इससे पहले 6 अप्रैल को भी अमिताभ ने लिखा था कि जब वह रोज काम नहीं करते, तो उन्हें असहज महसूस होता है। उन्होंने कहा कि बिना काम के दिन उन्हें परेशान और असंतुलित लगते हैं। उनके अनुसार, काम न करने से उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है, जिससे बेचैनी हो सकती है, अगर इसे समझा और संभाला न जाए। अमिताभ बच्चन के वर्क फ्रंट की बात करें तो उन्हें आखिरी बार फिल्म कल्कि 2898 AD में देखा गया था, जिसे नाग अश्विन ने डायरेक्ट किया था। वहीं, अमिताभ ने इसके दूसरे पार्ट की भी शूटिंग शुरू कर दी है और फिल्म के सेट से बिहाइंड द सीन (BTS) तस्वीरें शेयर की थीं। साथ ही उन्होंने करीब 40 साल बाद कमल हासन के साथ दोबारा काम करने को लेकर उत्साह जताया था।
गर्मियों में चाय पीने का सेहत पर क्या होता है असर? जानिये इसके फायदे और नुकसान

गर्मियों में चाय पीना भारतीय आदतों में शामिल है. चाहे तेज़ धूप हो या लू चल रही हो, बहुत से लोग बिना चाय के दिन की शुरुआत अधूरी ही मानते हैं. बेसक पसीना निकल रहा हो, लेकिन चाय पीना कई लोगों के लिये बहुत ही जरूरी होता है. लेकिन असली सवाल यह है कि गर्मियों में चाय पीना फायदेमंद है या नुकसानदायक? आइए इसके फायदे और नुकसान दोनों को विस्तार से समझते हैं. गर्मियों में चाय पीने के फायदे 1. थकान और सुस्ती दूर करती हैचाय में मौजूद कैफीन दिमाग को अलर्ट करता है. गर्मियों में अक्सर सुस्ती और थकान महसूस होती है, ऐसे में एक कप चाय ताजगी और ऊर्जा देने में बहुत मदद करती है. 2. पाचन को बेहतर बनाती हैहल्की मात्रा में चाय पीने से पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है. जिन लोगों को भारी भोजन के बाद गैस या अपच की समस्या होती है, उनके लिए चाय राहत दे सकती है. 3. तनाव और सिरदर्द में राहतगर्मी के मौसम में चिड़चिड़ापन और सिरदर्द आम समस्या है. चाय पीने से दिमाग को सुकून मिलता है और मूड बेहतर होता है. 4. गर्म पेय शरीर को ठंडा महसूस करवा सकता हैयह सुनने में अजीब लगे, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सीमित मात्रा में गर्म चाय पीने से शरीर पसीना छोड़ता है, जिससे नेचुरल कूलिंग होती है. गर्मियों में चाय पीने के नुकसान 1. डिहाइड्रेशन का खतराचाय की तासीर मूत्रवर्धक (diuretic) होती है. ज्यादा चाय पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जो गर्मियों में खतरनाक साबित हो सकती है. 2. एसिडिटी और गैस की समस्याखाली पेट या अधिक मात्रा में चाय लेने से पेट में जलन, साथ ही एसिडिटी और गैस की शिकायत बढ़ जाती है. 3. लू लगने का जोखिमतेज धूप में बाहर निकलने से पहले या बहुत गर्म समय पर चाय पीने से शरीर का तापमान अचानक से और भी बढ़ सकता है, जिससे लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. 4. नींद और बेचैनी की परेशानीगर्मियों के मौसम में रात की नींद पहले से ही प्रभावित होती है. शाम या रात में चाय पीने से अनिद्रा, बेचैनी और दिल की धड़कन और भी तेज़ होने की समस्या हो सकती है. कितना और कैसे पिएं चाय? दिन में 1–2 कप से ज्यादा न पिएंखाली पेट चाय पीने से सावधान रहेंआपके लिये दूध वाली चाय की जगह ग्रीन टी या हर्बल टी एक बेहतर विकल्प हो सकती हैचाय के साथ-साथ पानी और मौसमी फल ज़रूर लेते रहें गर्मियों में चाय पूरी तरह नुकसानदायक भी नहीं होती है, लेकिन अधिक मात्रा में चाय पीना सेहत के लिए ज्यादा सही भी नहीं हैं. संतुलित मात्रा और सही समय पर ली गई चाय फायदे दे सकती है, जबकि लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए गर्मी के मौसम में चाय का आनंद समझदारी से लें.
क्लॉड मिथोस मॉडल; साइबर पैमाने पर 100% स्कोर:एंथ्रोपिक ने ताकतवर एआई बनाया पर लॉन्च रोका; वजह-गलत हाथों में आने से साइबर तबाही का डर

एआई दिग्गज कंपनी एंथ्रोपिक ने बुधवार को दुनिया का सबसे ताकतवर मॉडल ‘क्लॉड मिथोस’ पेश किया, लेकिन इसे आम यूजर के लिए लॉन्च नहीं किया गया। कंपनी का कहना है कि यह मॉडल खुद जिम्मेदारी से काम करता है, लेकिन इसकी ताकत गलत हाथों में बेहद खतरनाक हो सकती है। बैंक, अस्पताल, बिजली ग्रिड और सरकारी सिस्टम सब इसके निशाने पर आ सकते हैं। एंथ्रोपिक ने इसे फिलहाल प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत अमेजन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी 12 बड़ी कंपनियों और 40 से अधिक संस्थाओं को दिया है, ताकि वे पहले अपने सिस्टम की सुरक्षा दुरुस्त कर सकें। प्रोजेक्ट ग्लासविंग नाम एक पारदर्शी पंखों वाली तितली से लिया गया है। यह खुले में होने पर भी नजर नहीं आती। ठीक वैसे ही जैसे सॉफ्टवेयर की खामियां छुपी रहती हैं। एंथ्रोपिक ने 850 करोड़ रु. के क्रेडिट व ओपन सोर्स संस्थाओं को 34 करोड़ रु. की मदद का वादा किया है। 90 दिनों बाद कंपनी बताएगी कि मॉडल ने कितनी खामियां पकड़ी। ऐतिहासिक – 50 लाख टेस्ट में नहीं पकड़ी खामी, इसने पहली बार में ढूंढ़ी पायलट में मॉडल ने कई ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में हजारों गंभीर साइबर खामियां खोजीं। सबसे सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम ओपनबीएसडी में 27 साल पुरानी खामी ढूंढी। वीडियो सॉफ्टवेयर एफएफएमपेग में 16 साल पुरानी खामी जो 50 लाख बार स्कैन में भी नहीं मिली। इसने पहली बार में पकड़ा। लिनक्स कर्नेल में कई खामियां जोड़कर पूरे सिस्टम का नियंत्रण हासिल करने का रास्ता भी इसी मॉडल ने दिखाया। बेंचमार्क – साइबर परीक्षण में 100%, कोडिंग में 93.9% स्कोर साइबर सुरक्षा के सबसे कठिन परीक्षणों में इस मॉडल ने शत-प्रतिशत सफलता हासिल की। कोडिंग बेंचमार्क में 93.9% जबकि पिछले मॉडल का स्कोर 80.8% था। साइबरजिम परीक्षण में 83.1%, पिछले मॉडल का 66.6% स्कोर था। बता दें कि इस मॉडल के लॉन्च के साथ एंथ्रोपिक की सालाना आय भी तीन गुना से अधिक बढ़कर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गई है। सीईओ अमोडेई बोले- मिथोस मॉडल से खतरा बहुत हमने मिथोस को साइबर सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि कोडिंग के लिए बनाया था। लेकिन कोडिंग की ताकत का साइड इफेक्ट यह निकला कि यह साइबर हमलों में भी उतना ही माहिर हो गया। यदि यह सही हाथों में रहा तो यह तकनीक पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित इंटरनेट और दुनिया बना सकती है। लेकिन अगर गलत हुआ तो खतरा बहुत है।’






