Sunday, 04 Oct 2026 | 07:23 AM

Trending :

EXCLUSIVE

रजनीकांत की 'जेलर 2' में नहीं दिखेंगे शाहरुख:कैमियो ऑफर ठुकराया; बेटी सुहाना की 'किंग' पर फोकस, नहीं चाहते फिल्म से पहले बड़े पर्दे पर दिखें

रजनीकांत की 'जेलर 2' में नहीं दिखेंगे शाहरुख:कैमियो ऑफर ठुकराया; बेटी सुहाना की 'किंग' पर फोकस, नहीं चाहते फिल्म से पहले बड़े पर्दे पर दिखें

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान ने रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ में कैमियो करने से मना कर दिया है। पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक, शाहरुख फिलहाल अपनी आने वाली फिल्म ‘किंग’ पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि ‘किंग’ की रिलीज से पहले वे किसी भी फिल्म में बड़े पर्दे पर नजर आएं। शाहरुख ने रजनीकांत और फिल्म के मेकर्स से बात कर इस ऑफर को विनम्रता के साथ ठुकरा दिया है। बेटी सुहाना के डेब्यू की वजह से लिया फैसला शाहरुख खान के लिए फिल्म ‘किंग’ कई मायनों में खास है। इसी फिल्म के जरिए उनकी बेटी सुहाना खान बड़े पर्दे पर अपना डेब्यू करने जा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘जेलर 2’ के मेकर्स चाहते थे कि शाहरुख 5 दिनों का कैमियो शूट करें। शाहरुख को यह आइडिया पसंद भी आया था, लेकिन वे ‘किंग’ की एक्सक्लूसिविटी बनाए रखना चाहते हैं। ‘किंग’ में शाहरुख का एक खास लुक है और वे नहीं चाहते कि उस फिल्म से पहले उनका वही लुक किसी और मूवी में दिखे। अगस्त में रिलीज होनी है ‘जेलर 2’ फिल्म ‘जेलर 2’ के मेकर्स इसे अगस्त 2026 में रिलीज करने का प्लान बना रहे हैं, जबकि शाहरुख की फिल्म ‘किंग’ दिसंबर 2026 के लिए शेड्यूल है। दोनों फिल्मों की टाइमलाइन अलग होने की वजह से शाहरुख और मेकर्स ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया। शाहरुख ने खुद रजनीकांत से फोन पर बात की और उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। शाहरुख ने आश्वासन दिया कि वे भविष्य में उनके साथ काम करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। रजनीकांत की फिल्म का काम लगभग पूरा नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बन रही ‘जेलर 2’ का काम काफी तेजी से चल रहा है। खुद रजनीकांत ने अप्रैल 2026 में कन्फर्म किया था कि फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है और अब यह पोस्ट-प्रोडक्शन के आखिरी फेज में है। शाहरुख के मना करने के बाद अब मेकर्स इस खास कैमियो के लिए किसी दूसरे बड़े एक्टर के नाम पर विचार कर रहे हैं। ‘किंग’ में नजर आएगी बड़ी स्टारकास्ट सिद्धार्थ आनंद द्वारा निर्देशित फिल्म ‘किंग’ में शाहरुख और सुहाना के अलावा अभिषेक बच्चन, दीपिका पादुकोण, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और अरशद वारसी जैसे कलाकार नजर आएंगे। शाहरुख इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी सीरियस हैं और अपनी बेटी के लॉन्च में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते। यही वजह है कि उन्होंने पिछले कुछ समय से किसी भी दूसरी फिल्म का हिस्सा बनने से दूरी बनाई हुई है।

तेल संकट का चीन पर असर क्यों नहीं पड़ा:20 साल पहले इमरजेंसी भंडार बनाए, नए तरीकों से बिजली; केमिकल के लिए भी निर्भर नहीं

तेल संकट का चीन पर असर क्यों नहीं पड़ा:20 साल पहले इमरजेंसी भंडार बनाए, नए तरीकों से बिजली; केमिकल के लिए भी निर्भर नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, वहीं चीन पर इसका असर बाकी दुनिया के मुकाबले कम दिखाई दे रहा है। इसकी वजह यह है कि चीन खुद को कई सालों से ऐसे हालात के लिए तैयारी कर रहा था। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है, इसलिए अगर तेल की सप्लाई में रुकावट आती है तो उसे सबसे ज्यादा नुकसान होना चाहिए था। लेकिन चीन ने पहले से ही बड़ी मात्रा में तेल जमा करके रखा हुआ है। इसके अलावा चीन बिजली से चलने वाले सिस्टम पर शिफ्ट कर चुका है और कोयले से भी जरूरी चीजें बना रहा है। चीन ने धीरे-धीरे अपनी ऊर्जा पॉलिसी को इस तरह बदला कि वह वैश्विक सप्लाई शॉक का सामना कर सके। सरकार ने अहम सेक्टर्स में निवेश बढ़ाया और इंडस्ट्रियल स्ट्रेंथ को राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बनाया। इसके साथ-साथ उसने बिजली बनाने के दूसरे तरीकों पर भी तेजी से काम किया है, जैसे सौर ऊर्जा, हवा से बनने वाली ऊर्जा और पानी से बनने वाली बिजली। इसी कारण अब चीन में पेट्रोल और डीजल की मांग धीरे-धीरे कम होती जा रही है। चीन ने फैक्ट्रियों और प्रोडक्शन को मजबूत बनाया चीन की सरकार लंबे समय से यह मानती है कि मजबूत इंडस्ट्री ही देश की असली ताकत होती है। इसी सोच के तहत उसने अपनी फैक्ट्रियों और उत्पादन क्षमता को इतना मजबूत बना लिया है कि उसे बाहर के देशों पर कम निर्भर रहना पड़े। खास तौर पर उसने उन सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दिया, जो उसके लिए रणनीतिक रूप से जरूरी हैं। सरकार सीधे तौर पर दिशा देती रही कि किन क्षेत्रों को मजबूत करना है, ताकि चीन किसी भी पश्चिमी देश के दबाव में न आए। ऊर्जा इस पूरी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा रही है। कुछ साल पहले तक चीन पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार था, लेकिन अब वह इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। इसका मतलब यह है कि वहां अब बड़ी संख्या में गाड़ियां तेल की जगह बिजली से चल रही हैं, जिससे तेल पर निर्भरता कम हो रही है। कोयले की मदद से जरूरी केमिकल बनाना सीखा 1990 के दशक में जब चीन कई फैक्ट्रियां बना रहा था, तब उसे केमिकल बनाने के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। ये वही केमिकल होते हैं जिनसे प्लास्टिक, रबर, धातु के हिस्से और कई दूसरी चीजें बनती हैं। लेकिन अब चीन ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे वह कोयले की मदद से ही कई जरूरी केमिकल बना सकता है, जैसे मेथेनॉल और सिंथेटिक अमोनिया। यह तकनीक नई नहीं है, बल्कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने भी इसका इस्तेमाल किया था। अब चीन इसी तरीके से तेल के बिना भी अपनी इंडस्ट्री चला सकता है। आज दुनिया का बड़ा हिस्सा केमिकल सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर है। उदाहरण के तौर पर, दुनिया का करीब तीन-चौथाई पॉलिएस्टर और नायलॉन चीन में बनता है। वियनताम-फिलीपींस ने चीन से मदद मांगी हाल ही में वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को जब ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने चीन से मदद मांगी। चीन ने भी कहा कि वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ मिलकर ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर काम करने को तैयार है। चीन की यह सोच नई नहीं है। साल 2000 के आसपास उसे इस बात की चिंता होने लगी थी कि उसका तेल कुछ खास समुद्री रास्तों पर निर्भर है, जैसे मलक्का स्ट्रेट। अगर वहां कोई समस्या होती है, तो सप्लाई रुक सकती है। इसी वजह से 2004 में चीन ने इमरजेंसी तेल भंडार बनाना शुरू किया और अब वह लगातार इसे बढ़ा रहा है। फिर भी चीन पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। आज भी उसकी करीब 75% तेल जरूरतें आयात से पूरी होती हैं। लेकिन उसने इलेक्ट्रिक गाड़ियों और नवीकरणीय ऊर्जा में इतना निवेश किया है कि पेट्रोल और डीजल की मांग लगातार दो साल से घट रही है। कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चीन में तेल की मांग अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है और आगे कम हो सकती है। चीन ने कोयले का इस्तेमाल बढ़ाया इसके साथ ही चीन ने कोयले का इस्तेमाल फिर से बढ़ा दिया है, खासकर केमिकल बनाने के लिए। 2020 में जहां उसने 155 मिलियन टन कोयला इस काम में इस्तेमाल किया था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 276 मिलियन टन हो गया और 2025 में इसमें और बढ़ोतरी हुई। सरकार कहती है कि यह एक अस्थायी उपाय है, जब तक वह पूरी तरह साफ ऊर्जा पर नहीं पहुंच जाता। लेकिन फिलहाल इससे उसे फायदा मिल रहा है, क्योंकि तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर, खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाला यूरिया देखें। इसकी वैश्विक कीमतें 40% से ज्यादा बढ़ गई हैं, लेकिन चीन में कोयले से बनने वाले यूरिया की कीमत वैश्विक दर से आधी से भी कम है। इससे चीन को बड़ा फायदा मिल रहा है। असल में, अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ सालों से चल रहे तनाव ने भी चीन को आत्मनिर्भर बनने के लिए और तेज कर दिया। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में शुरू हुए व्यापार युद्ध और तकनीकी टकराव ने चीन को यह एहसास कराया कि उसे अपने सप्लाई चेन और संसाधनों पर खुद का नियंत्रण मजबूत करना होगा। इसके बाद चीन ने अपनी इंडस्ट्री और तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाया। ———————————————- ये खबर भी पढ़ें… ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए‎ खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने‎ मिडिल ईस्ट में भारी निवेश किया हुआ है। साथ ‎ही ये क्षेत्र उसके इस्पात, इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर पैनलों के लिए बड़ा बाजार है।‎ ईरान के रूप में चीन को तेल का सस्ता स्रोत‎ मिला था। पूरे क्षेत्र में उसे ऐसी सरकारें भी मिलीं,‎जो नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में चीन से‎ सीखने के लिए उत्सुक थीं। इन्हीं सब के बीच‎ चीन तेल और गैस‎ के लिए मध्य पूर्व की

आर्टेमिस-II ने अपोलो-13 का गलती से बना रिकॉर्ड तोड़ा:चांद पर जाते समय ऑक्सीजन टैंक फट गया था, मुश्किल से बची थी एस्ट्रोनॉट्स की जान

आर्टेमिस-II ने अपोलो-13 का गलती से बना रिकॉर्ड तोड़ा:चांद पर जाते समय ऑक्सीजन टैंक फट गया था, मुश्किल से बची थी एस्ट्रोनॉट्स की जान

11 अप्रैल 1970 चांद पर उतरने के मकसद से अमेरिका ने अपोलो-13 मिशन लॉन्च किया। तीन एस्ट्रोनॉट चांद कि तरफ तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि तीनों एस्ट्रोनॉट को बचाने के लिए ग्राउंड कंट्रोल टीम बेहद जटिल रेस्क्यू मिशन चलाना पड़ा। यान पृथ्वी से 400171 किमी दूर पहुंच गया जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड था। कल 6 अप्रैल को रात 11:26 बजे आर्टेमिस II मिशन के 4 एस्ट्रोनॉट्स ने इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इस स्टोरी में अपोलो-13 मिशन की पूरी कहानी। आखिर कैसे एक रेस्क्यू मिशन से वर्ल्ड रिकॉर्ड बना… अपोलो-13 की कहानी को समझने के लिए एक बार इस जानकारी से गुजर जाएं… अपोलो 13 स्पेसक्राफ्ट मुख्य रूप से तीन मॉड्यूल्स से मिलकर बना था: अचानक ऑक्सीजन टैंक नंबर 2 फट गया 13 अप्रैल 1970 अपोलो 13 मिशन को लॉन्च हुए 56 घंटे बीत चुके थे। कमांडर जेम्स ए. लवेल जूनियर, लूनर मॉड्यूल पायलट फ्रेड डब्ल्यू और कमांड मॉड्यूल पायलट जॉन एल. स्विगर्ट इसमें सवार थे। स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से 3.20 लाख कमी दूर पहुंच चुका था। क्रू इस यान के लैंडिंग मॉड्यूल ‘एक्वेरियस’ की जांच कर रहे थे। अगले दिन अपालो 13 को चांद की कक्षा में प्रवेश करना था। लवेल और हाइस चांद पर चलने वाले पांचवें और छठे इंसान बनने वाले थे। तभी अचानक सर्विस मॉड्यूल का ऑक्सीजन टैंक 2 फट गया। क्रू को लूनर मॉड्यूल में जाने का निर्देश मिला ऑक्सीजन, बिजली और पानी की सप्लाई बंद हो गई। लवेल ने मिशन कंट्रोल को रिपोर्ट किया। उन्होंने कहा- “ह्यूस्टन यहां एक समस्या हो गई है। कमांड मॉड्यूल से ऑक्सीजन लीक हो रही थी और फ्यूल सेल्स तेजी से खत्म हो रहे थे। चांद पर उतरने का मिशन रद्द हो गया। धमाके के एक घंटे बाद, मिशन कंट्रोल ने क्रू को लूनर मॉड्यूल में जाने का निर्देश दिया। इसमें काम चलाने लायक ऑक्सीजन थी। इस मॉड्यूल को केवल अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में घूम रहे कमांड मॉड्यूल से चांद की सतह तक ले जाने और वापस लाने के लिए बनाया गया था। पानी का कोटा घटाकर पांचवां हिस्सा कर दिया इसकी पावर सप्लाई सिर्फ दो लोगों के लिए 45 घंटे तक चलने लायक थी। अगर अपालो 13 के क्रू को जिंदा धरती पर लौटना था, तो इस लेंडिंग मॉड्यूल को तीन लोगों का बोझ कम से कम 90 घंटे तक उठाना था। अंतरिक्ष में 3 लाख किमी से ज्यादा का रास्ता पार करना था। ऊर्जा बचाने के लिए क्रू ने पानी का कोटा घटाकर पांचवां हिस्सा कर दिया। केबिन का तापमान जमा देने वाली ठंड से बस कुछ ही डिग्री ऊपर रखा। कमांड मॉड्यूल के चौकोर लिथियम हाइड्रोक्साइड कैनिस्टर, लूनर मॉड्यूल के सिस्टम के गोल छेद में फिट नहीं बैठ रहे थे। इसका मतलब था कि कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना एक बड़ी समस्या थी। मिशन कंट्रोल ने यान में मौजूद चीजों की मदद से एक जुगाड़ू अडैप्टर तैयार किया। अपोलो के क्रू ने उनके मॉडल को कॉपी कर लिया। इसमें लगा नेविगेशन सिस्टम भी बहुत ही साधारण था। 15 अप्रैल को अपोलो 13 ने पृथ्वी से दूरी का रिकॉर्ड बनाया 14 अप्रैल को अपालो 13 ने चांद का चक्कर लगाया। स्विगर्ट और हाइस ने तस्वीरें लीं और लवेल ने सबसे कठिन मैनुअर के बारे में मिशन कंट्रोल से बात की। यह पांच मिनट का इंजन बर्न था, जिससे LM को इतनी रफ्तार मिल सके कि वह ऊर्जा खत्म होने से पहले घर लौट आए। चांद के पिछले हिस्से का चक्कर लगाने के दो घंटे बाद, क्रू ने लैंडिंग मॉड्यूल के छोटे डिसेंट इंजन को चालू किया। अपालो 13 घर वापसी की राह पर था। 15 अप्रैल 1970 को अपालो 13 चांद के पिछले हिस्से में उसकी सतह से 254 किमी और पृथ्वी की सतह से 4,00,171 किमी दूर था। मिशन कंट्रोल को यान की हीट शील्ड खराब होने का डर था 17 अप्रैल को कमांड मॉड्यूल चालू किया गया। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से एक घंटे पहले लैंडिंग मॉड्यूल को कमांड मॉड्यूल से अलग किया गया। दोपहर करीब 1 बजे यान ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। मिशन कंट्रोल को यान की हीट शील्ड खराब होने का डर था। उन्होंने क्रू से बिना किसी रेडियो संपर्क के चार मिनट इंतजार किया। फिर, अपालो 13 के पैराशूट दिखाई दिए। तीनों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतर गए। इस तरह गलती से इस मिशन में वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना और तीनों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर भी लौट आएं। ये खबर भी पढ़ें… अपोलो-13 का 56 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा:पृथ्वी से 4 लाख किमी से ज्यादा दूर पहुंचे 4 एस्ट्रोनॉट्स; अब चांद की ग्रेविटी की मदद से वापस आएंगे पूरी खबर पढ़े…

लंबी उम्र के ‘जेनेटिक ब्लूप्रिंट’ पर काम:लॉन्जिविटी इंडिया बना रहा है भारतीयों के लिए सेहत का ‘स्वदेशी पैमाना’

लंबी उम्र के ‘जेनेटिक ब्लूप्रिंट’ पर काम:लॉन्जिविटी इंडिया बना रहा है भारतीयों के लिए सेहत का ‘स्वदेशी पैमाना’

जब आप ब्लड टेस्ट करवाते हैं और रिपोर्ट में आपकी वैल्यू नॉर्मल आती है, तो क्या आप वाकई सुरक्षित हैं? अब तक भारत में इस्तेमाल होने वाले स्वास्थ्य के मानक या तो पश्चिमी देशों की नकल हैं या बहुत पुराने डेटा पर आधारित हैं। लेकिन अब भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु इस विसंगति को दूर करने के लिए एक मिशन चला रहा है-लॉन्जिविटी इंडिया प्रोजेक्ट। भारतीयों का शरीर, जेनेटिक्स, खान-पान और प्रदूषण पश्चिमी देशों से बिल्कुल अलग है। इसलिए, हमारे स्वास्थ्य को नापने का पैमाना भी अलग होना चाहिए। वर्तमान में हम जिन नॉर्मल वैल्यू को आधार मानकर इलाज करते हैं, वे भारतीयों के लिए सटीक नहीं हैं। उदाहरण, भारत में महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर अक्सर कम पाया जाता है। अगर हम 20 हजार स्वस्थ भारतीयों के सैंपल का वैज्ञानिक विश्लेषण करें, तो मुमकिन है कि भारत के लिए एक नई और ज्यादा सटीक नॉर्मल वैल्यू सामने आए। यह प्रोजेक्ट स्वदेशी बेसलाइन तैयार करने की कोशिश है। रिसर्चर खोज रहे हैं उम्र बढ़ने के साथ इम्यून सिस्टम में क्या बदलाव आते हैं इस मिशन के तहत दो प्रमुख रिसर्च चल रही हैं। एक है – BHARAT स्टडी। इसका मतलब है बायोमार्कर्स ऑफ हेल्दी एजिंग, रेजिलिएंस, एडवर्सिटी एंड ट्रांजिशन। इसके जरिए स्वस्थ भारतीयों के मॉलिक्यूलर डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह समझा जा सके कि उम्र बढ़ने के साथ हमारे इम्यून सिस्टम में क्या बदलाव आते हैं। दूसरी रिसर्च है – ऑर्गन एजिंग प्रोजेक्ट: इसके तहत शोध चल रहा है कि शरीर के अलग-अलग अंग किस रफ्तार से बूढ़े होते हैं। इन प्रोजेक्ट्स के लिए 2030 तक 10,000 स्वस्थ भारतीयों के सैंपल इकट्ठा करना (आदर्श लक्ष्य 1 लाख का)है। इस प्रोजेक्ट में आईआईएससी के साथ-साथ आईआईटी दिल्ली, एम्स और आईआईटी हैदराबाद जैसे संस्थान भी जुड़ रहे हैं। हालांकि अभी यह डेटा कलेक्शन के चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि 2027 से 2030 के बीच इसके ऐसे परिणाम आएंगे, जो चिकित्सा जगत की दिशा बदल देंगे। यह कोई ‘अमृत’ खोजने का दावा नहीं है। उम्र को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बुढ़ापे में लाचारी को कम किया जा सकता है। इस रिसर्च का अंतिम लक्ष्य भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, ताकि हम उम्र के आखिरी पड़ाव तक सक्रिय और स्वस्थ रहें। इन रिसर्च से होगा यह फायदा – कैंसर के पैटर्न को समझना आसान होगा – ऑर्गन फेल्योर की दर को कम किया जा सकेगा। – भारतीयों की औसत उम्र में इजाफा हो सकेगा।

दमोह में कुत्तों ने किया हिरण पर हमला:फुटेरा तालाब पर पानी पीने आया था, बचने के लिए तालाब में लगाई छलांग

दमोह में कुत्तों ने किया हिरण पर हमला:फुटेरा तालाब पर पानी पीने आया था, बचने के लिए तालाब में लगाई छलांग

दमोह के फुटेरा तालाब पर मंगलवार दोपहर पानी पीने आए एक हिरण पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। इस हमले में हिरण गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे बचाया और वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद हिरण को पशु अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, फुटेरा मोहल्ला स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास फुटेरा तालाब पर हिरण पानी पीने पहुंचा था। तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया और कई जगह काट कर घायल कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए हिरण तालाब में छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने निकाला बाहर स्थानीय निवासी ऐलू रैकवार ने बताया कि बच्चों ने उन्हें हिरण पर कुत्तों के हमले की सूचना दी। वह तुरंत अपने पड़ोसियों के साथ तालाब पर पहुंचे और कुत्तों को भगाकर हिरण को तालाब से बाहर निकाला। उन्होंने वन विभाग और कोतवाली पुलिस को घटना की जानकारी दी। दो घंटे बाद पहुंचे वनकर्मी रैकवार के अनुसार, वनकर्मी करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे। तब तक स्थानीय लोगों ने हिरण को तालाब से बाहर निकाल लिया था और उसके घावों पर प्राथमिक उपचार भी किया था। कुत्तों के काटने से हिरण के शरीर पर कई गहरे घाव हो गए थे। वन विभाग की टीम बाद में घायल हिरण को अपने साथ ले गई। दमोह के डीएफओ ईश्वर जरांडे ने बताया कि घायल हिरण को पशु अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि हिरण की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

कच्चे आम की चटनी: घर पर कच्चे कच्चे आम की खट्टी-मीठी चटनी, ही सब कहेंगे मूल्यवान; नोट करें सबसे आसान तरीका

कच्चे आम की चटनी: घर पर कच्चे कच्चे आम की खट्टी-मीठी चटनी, ही सब कहेंगे मूल्यवान; नोट करें सबसे आसान तरीका

7 अप्रैल 2026 को 14:20 IST पर अपडेट किया गया कच्चे आम की चटनी रेसिपी: कच्चे आम की चटनी बनाना बहुत ही आसान है और इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है। एक बार जब आप इसे घर पर बनायेंगे, तो बाजार की सोच भूल जायेंगे।

विधानसभा चुनाव 2026: केरल में सत्ता परिवर्तन के संकेत! एक और प्री पोल सर्वे में एलडीएफ पिछड़ गया, यूडीएफ को बढ़त, एनडीए लगभग साफ?

विधानसभा चुनाव 2026: केरल में सत्ता परिवर्तन के संकेत! एक और प्री पोल सर्वे में एलडीएफ पिछड़ गया, यूडीएफ को बढ़त, एनडीए लगभग साफ?

केरल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) विधानसभा चुनाव में प्रचंड की जीत पर भारी नजर है। पोल मंत्रा साइंटिफिक रिपोर्ट के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, 140 के बड़े पैमाने पर आंकड़े यूडीएफ को 88-92 मंजिल मिल सकते हैं, यानी 70 के बहुमत आंकड़े आराम से पार करने की स्थिति में हैं। यह सिर्फ जीत का अनुमान नहीं है, बल्कि सत्ता परिवर्तन का साफ संकेत हैपोल मंत्रा एजेंसी रिपोर्ट के अनुसार, सचिवालय लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को 42-46 मताधिकार का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गिरावट उनके पारंपरिक गढ़ों में भी दिखाई दे रही है। वहीं एनडीए की स्थिति और कमजोर दिख रही है, जिसमें सिर्फ 0-2 दर्शकों की मुलाकात का अनुमान है। सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि, यह “एकतरफा वोट परिणाम” हो सकता है, जो कि एलजीबीटी का खेल नहीं बल्कि “वोटर शिफ्ट” का परिणाम है। साफ है कि इस बार वर्कशॉप हवा बदल गई है और इसकी सबसे बड़ी वजह एंटी-इंकंबेंसी कानून जारी है। 10 साल की छूटेगी सरकार!पोल मंत्रा साइंटिफिक रिपोर्ट के सर्वे के अनुसार अगर पुस्तकालय के मूड को स्वीकारा जाए तो तस्वीर और साफ हो जाती है। “परिवर्तन की इच्छा” 22.8% के साथ सबसे बड़ा अवतार उभर कर सामने आया है। इसके बाद कल्याण सूची (17.6%), अलगाव (16.2%) और नेतृत्व (14.6%) आते हैं। यानी जनता अब सिर्फ परिभाषा से नहीं, बल्कि बदलाव और बेहतर नेतृत्व की तलाश में है। मत प्रतिशत के आंकड़े भी इसी कहानी को मजबूत बनाते हैं। यूडीएफ को 41.5% वोट शेयर के साथ 8% से ज्यादा बढ़त दिख रही है, जबकि एलडीएफ को 33.4% वोट मिले हैं। एनडीए को 17.2% और अन्य को 2.3% वोट मिलने का अनुमान है। केवल 5.6% कलाकार ही अभी अनिर्णित हैं—जो एक स्थिर और स्पष्ट जनमत की ओर इशारा करते हैं। कौन बनेगा मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री की बात करें तो वीडियो देखें मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 21.3% के साथ आगे हैं, जबकि स्थिर मुख्यमंत्री पिनाराई विजय 18.5% पर हैं। रमेश चेन्निथला (17.2%) और केसी वेणुगोपाल (15.1%) भी दौड़ में बने हुए हैं। इस चुनाव में असली मुद्दे भी साफ हैं. बैक्टीरिया और जीवनयापन की लागत 24.5% के साथ सबसे बड़ी लागत है। नौकरीपेशा और बेरोजगारों का पलायन 20.2% है। यानी करीब 45% मतदाता सीधे आर्थिक दबाव से प्रभावित हैं। लाभ, स्वास्थ्य सेवाएँ और क़ानून-व्यवस्था भी अहम मुद्दे बने हुए हैं। अगर रीजनल तौर पर देखें तो यूडीएफ हर इलाके में बढ़त बनाए हुए है। मालाबार के 60 में से यूडीएफ में 41-43 में बढ़त हो सकती है, जबकि एलडीएफ में 15-17 में बढ़त हो सकती है। मध्य केरल के 41 में यूडीएफ को 25-26 और एलडीएफ को 12-13 में प्रवेश का अनुमान है। ट्रैवेनकोर में मुकाबला थोड़ा कठिन जरूर है, लेकिन यहां भी यूडीएफ 22-23 के साथ आगे बढ़ रहा है।

घर पर ऐसे बनाएं पुदीना की चटनी, सेहत के साथ-साथ स्वाद में भी लाजवाब! – News18 हिंदी

arw img

X घर पर ऐसे बनाएं पुदीना की चटनी, सेहत के साथ-साथ स्वाद में भी लाजवाब!   पुदीना चटनी रेसिपी (Pudina Chutney Recipe): विंध्य क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों में पुदीने की चटनी का अपना एक अलग स्थान है. यह चटनी खासतौर पर गर्मी के मौसम में खाई जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक और भरपूर ऊर्जा देती है. सादा खाना भी इस चटनी के साथ और ज्यादा खास बन जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को बताया कि पुदीने की चटनी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी देती है. गर्मी के दिनों में यह शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करती है. इसलिए लोग इसे अपने रोजमर्रा के भोजन में शामिल करते हैं. उन्होंने बताया कि चटनी को मिक्सर में आसानी से बनाया जा सकता है, लेकिन अगर इसे पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे पर पीसा जाए तो इसका स्वाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है. पुदीना पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, अपच, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. इसके अलावा यह मुंह की बदबू दूर करने, तनाव कम करने और त्वचा संबंधी दिक्कतों को कम करने में भी सहायक है.

क्या पहाड़ों पर घूमने से टेंशन दूर हो जाती है? मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए क्या करें, एक्सपर्ट से जानिए टिप्स

authorimg

Last Updated:April 07, 2026, 12:55 IST Benefits of Mountain Travel: पहाड़ों पर घूमना और ट्रेकिंग मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं. प्राकृतिक वातावरण, ठंडी हवा, हरियाली और शारीरिक गतिविधि से तनाव कम होता है, मूड बेहतर होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है. साथ ही योग, ध्यान और सामाजिक जुड़ाव भी मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद करते हैं. नेचर के साथ वक्त बिताने से तनाव कम हो सकता है. How Hills Improve Mental Health: आज के जमाने में स्ट्रेस की समस्या हर किसी को परेशान कर रही है. बच्चों पर पढ़ाई का दबाव है, युवाओं पर नौकरी का दबाव है, मिडिल एज के लोगों पर जिम्मेदारियों का बोझ है और बुजुर्ग सेहत से जुड़ी समस्याओं से परेशान हैं. प्रोफेशनल लाइफ से लेकर पर्सनल लाइफ में लोगों को अत्यधिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है. लगातार तनाव न केवल हमारी इमोशनल हेल्थ को प्रभावित करता है, बल्कि शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है. ऐसे में तनाव कम करने और मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए लोग पहाड़ों पर जा रहे हैं. एक्सपर्ट भी ऐसी जगहों पर जाने की सलाह देते हैं. नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की साइकेट्री डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि पहाड़ों पर यात्रा करना या ट्रेकिंग करना मेंटल हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. ठंडी हवा, हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक दृश्यों को देखकर ब्रेन में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हैप्पी हार्मोन बढ़ जाते हैं. इससे मन को सुकून मिलता है और तनाव कम होता है. पहाड़ों में समय बिताने से डिप्रेशन और एंजायटी के लक्षण भी घट सकते हैं. पहाड़ों में लंबी सैर, झरनों के पास समय बिताना या सिर्फ शांत जगह पर बैठना मन को वर्तमान में रहने की कला सिखाता है. इसे माइंडफुलनेस कहा जाता है. जब हम प्रकृति के साथ वक्त बिताते हैं, तो हमारी नेगेटिव सोच कम होती है और मेंटल क्लैरिटी बढ़ती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. साइकेट्रिस्ट ने बताया कि ट्रेकिंग, हाइकिंग या पहाड़ों पर चलना सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. यह शरीर में एंडॉर्फिन रिलीज करता है, जो प्राकृतिक रूप से दर्द और तनाव को कम करता है. नियमित शारीरिक गतिविधियां नींद सुधारने, मूड बेहतर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती हैं. अपने जीवन में छोटे छोटे कदम उठाएं, प्रकृति के करीब रहें और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाएं. हालांकि पहाड़ों पर जाना हर किसी के लिए हर समय संभव नहीं होता, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के कुछ अन्य तरीके भी हैं, जिन्हें आप रोज फॉलो कर सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आप बाहर घूमने नहीं जा पा रहे हैं, तो स्ट्रेस कम करने के लिए रोज योग और प्राणायाम का अभ्यास करें. डीप ब्रीदिंग टेक्निक तनाव कम करने में बेहद असरदार है. रोज 10 से 20 मिनट मेडिटेशन करने से मेंटल स्टेबिलिटी बढ़ती है. पसंदीदा म्यूजिक सुनने या क्रिएटिव एक्टिविटी से ब्रेन को सुकून मिलता है और स्ट्रेस कम होता है. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से भी तनाव कम होता है. इसके अलावा पर्याप्त नींद, अच्छी लाइफस्टाइल और हेल्दी खान-पान से भी स्ट्रेस कम हो सकता है. अगर तमाम कोशिशों के बाद भी अत्यधिक तनाव से परेशान हैं, तो डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 07, 2026, 12:55 IST

अश्लील गाने के विवाद में नोरा की मुश्किल बढ़ी:पेश न होने पर महिला आयोग भड़का, संजय दत्त को भी 8 अप्रैल को पेश होने का समन

अश्लील गाने के विवाद में नोरा की मुश्किल बढ़ी:पेश न होने पर महिला आयोग भड़का, संजय दत्त को भी 8 अप्रैल को पेश होने का समन

केडी: द डेविल के गाने ‘सरके चुनर तेरी’ विवाद में सफाई के बावजूद नोरा फतेही की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। 6 अप्रैल को राष्ट्रीय महिला आयोग की सुनवाई में वह पेश नहीं हुईं, जिस पर आयोग ने नाराज होकर उन्हें आखिरी मौका दिया। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, 6 अप्रैल को राष्ट्रीय महिला आयोग की सुनवाई में सरके चुनरिया तेरी के लिरिसिस्ट रकीब आलम, फिल्म केडीःद डेविल के डायरेक्टर प्रेम और केवीएन प्रोडक्शन के रीप्रेसेंटेटिव गौतम के.एम और सुप्रिथ पेश हुए थे। इस सुनवाई की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने की थी। समन में नोरा फतेही को भी पेश होने के लिए कहा गया था, हालांकि वो खुद नहीं आईं और सफाई देने के लिए वकील को भेजा। सुनवाई में विजया रहाटकर ने चिंता जताते हुए कहा कि गाने के बोल महिलाओं की गरिमा के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि क्रिएटिविटी के नाम पर महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान मौजूद सभी ने ये स्वीकार किया कि गाना आपत्तिजनक था, जिसका नाकारात्मक प्रभाव पड़ा और सभी ने इसके लिए लिखित माफी भी दी। इसके अलावा सभी ने तीन महीनों तक महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने और महिला आयोग को इसकी रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया है। अश्लील गाने के विवाद पर संजय दत्त को भी समन आयोग ने संजय दत्त को भी समन भेजकर 8 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में पेश होने का आदेश दिया है। उनके अलावा नोरा फतेही की गैरमौजूदगी पर भड़कर आयोग ने उन्हें 27 अप्रैल को पेश होने का आखिरी मौका दिया है। नोरा फतेही दे चुकी हैं सफाई अश्लील गाने पर विवाद बढ़ने के बाद एक्ट्रेस ने बयान जारी कर सफाई दी थी। उन्होंने कहा है कि उनसे कन्नड़ में गलत ट्रांसलेशन बताकर पूरा गाना शूट करवाया गया और फिर बिना अप्रूवल या परमिशन गाने को हिंदी में बना लिया। उन्होंने कहा कि मेकर्स ने लिरिकल गाने को बिना इजाजत लिए उनकी AI इमेज के साथ रिलीज किया। एक्ट्रेस ने ये भी माना कि गाना वाकई अनुचित है, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें सॉन्ग लॉन्च इवेंट में पहुंचकर मिलीं। हिंदी गाना देखकर एक्ट्रेस खुद शॉक में थीं। पैन इंडिया फिल्म केडीः द डेविल, 30 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली है। 14 मार्च को इस फिल्म का गाना सरके चुनर तेरी कई भाषाओं में रिलीज हुआ। ये गाना नोरा फतेही और संजय दत्त पर फिल्माया गया था। यूट्यूब पर गाना जारी होते ही सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा, जिसका कारण था, गाने के अश्लील और डबल मीनिंग बोल। इसके अलावा गाने में दिखाए गए डांस स्टेप्स और पिक्चराइजेशन भी काफी आपत्तिजनक थे। सोशल मीडिया पर गाने की जमकर आलोचना हुई, जिसके बाद इसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हो रही हैं। “सरके चुनर तेरी”, जो आने वाली कन्नड़ फिल्म “KD: द डेविल” का हिस्सा है, अपने अश्लील बोलों के कारण यूट्यूब पर रिलीज के बाद बड़े विवाद का कारण बना। इसके बाद इस वीडियो को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। “KD: द डेविल”, जिसका निर्देशन प्रेम ने किया है और जिसमें ध्रुव सरजा मुख्य भूमिका में हैं, 30 अप्रैल को रिलीज होगी।