Moringa Fruit Benefits: हड्डियों से लेकर दिल तक….. यह सब्जी कैसे बदल सकती है आपका स्वास्थ्य, जानिए पूरी कहानी

Last Updated:April 02, 2026, 14:30 IST भारत में सहजन, जिसे मोरिंगा या ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है, स्वास्थ्य और पोषण से भरपूर है. यह सब्जी इम्यून सिस्टम मजबूत करने, पाचन सुधारने, हड्डियों और दिल की सेहत बनाए रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स इसे एक महत्वपूर्ण सुपरफूड बनाते हैं. भारत में सहजन, जिसे कई जगहों पर मोरिंगा या ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसा पौधा है जो अपने औषधीय गुणों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. आमतौर पर लोग इसकी पत्तियों के फायदे के बारे में जानते हैं, लेकिन सहजन सब्जी भी पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती है. इसमें मौजूद विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. दरअसल, रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सालय, शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्मिता श्रीवास्तव (BAMS, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सहजन की फली को आसानी से सब्जी, सूप या सांभर के रूप में आहार में शामिल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन शरीर को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है और कई बीमारियों से बचाव में मदद करता है. सहजन की फली में विटामिन-सी, विटामिन-ए, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. ये सभी तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. नियमित रूप से सहजन की फली का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google सहजन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा और कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है. सहजन की फली पाचन तंत्र के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक है. पेट से जुड़ी समस्याओं से परेशान लोगों के लिए सहजन की सब्जी या सूप फायदेमंद हो सकता है. यह आंतों की सफाई में मदद करता है और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है. सहजन की फली हड्डियों को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी होते हैं. बढ़ते बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इसका सेवन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा, यह जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में भी मदद कर सकता है. दिल की सेहत के लिए भी सहजन की फली उपयोगी मानी जाती है. इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. साथ ही, यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी सहायक माना जाता है, जिससे मधुमेह के मरीजों को लाभ मिल सकता है. First Published : April 02, 2026, 14:30 IST
तमिलनाडु चुनाव 2026: स्टार उम्मीदवारों की पूरी सूची, उनके निर्वाचन क्षेत्र | नाम जांचें | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 14:24 IST तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में विधानसभा चुनाव होने हैं और वोटों की गिनती 4 मई, 2026 को होनी है। एडप्पादी के पलानीस्वामी, एमके स्टालिन, अभिनेता-राजनेता विजय और भाजपा के नैनार नागेंद्रन की फाइल तस्वीरें। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के अनुसार, तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में विधानसभा चुनाव होने हैं और वोटों की गिनती 4 मई, 2026 को होनी है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) अपने शासन रिकॉर्ड और कल्याण-संचालित नीतियों को उजागर करके लगातार कार्यकाल पर नजर गड़ाए हुए है, जिसे अक्सर “द्रविड़ मॉडल” कहा जाता है। विपक्षी वोटों को एकजुट करने के लिए अन्नाद्रमुक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ हाथ मिलाकर वापसी करने का प्रयास कर रही है। तमिलनाडु में परंपरागत रूप से कमजोर होने के बावजूद, भाजपा शहरी मतदाताओं और रणनीतिक गठबंधनों पर ध्यान केंद्रित करके राज्य में अपनी जमीन का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। प्रमुख नेताओं पर रहेगी नजर: के पलानीस्वामी (एआईडीएमके): एआईएडीएमके ने अपने प्रमुख के पलानीस्वामी, विपक्ष के नेता को सलेम जिले के एडप्पादी निर्वाचन क्षेत्र के अपने गृह क्षेत्र से फिर से नामांकित किया है। उन्होंने 2017 से 2021 तक तमिलनाडु के 7वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वह सत्तारूढ़ द्रमुक को सत्ता से हटाने के लिए, खुद को प्राथमिक चुनौती देने वाले और गठबंधन के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में पेश करने के लिए एनडीए अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसका हिस्सा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) है। केपी मुनुसामी (एआईएडीएमके): मौजूदा विधायक मुनुसामी को आधिकारिक तौर पर कृष्णागिरी जिले के वेप्पनहल्ली निर्वाचन क्षेत्र के लिए अन्नाद्रमुक उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा गया है। माना जाता है कि एआईएडीएमके के उप महासचिव के रूप में, मुनुसामी ने तमिलनाडु में एनडीए गठबंधन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। डिंडीगुल सी श्रीनिवासन (एआईएडीएमके): श्रीनिवासन को अन्नाद्रमुक ने आधिकारिक तौर पर उनके गृह गढ़ डिंडीगुल निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ने के लिए फिर से नामित किया है। वह डिंडीगुल के मौजूदा विधायक हैं, जिन्होंने 2016 और 2021 दोनों चुनावों में सीट हासिल की थी। श्रीनिवासन पार्टी कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं, यह एक महत्वपूर्ण पद है जो उन्होंने पार्टी के आंतरिक नेतृत्व के पुनर्गठन के बाद जुलाई 2022 से संभाला है। एमके स्टालिन (डीएमके): मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सत्तारूढ़ धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) के प्राथमिक चेहरे और रणनीतिकार हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख दोनों के रूप में कार्य करते हुए, वह लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए दावेदारी का नेतृत्व कर रहे हैं। उदयनिधि स्टालिन (डीएमके): 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में, उदयनिधि स्टालिन एक स्टार प्रचारक से एक केंद्रीय नेता के रूप में परिवर्तित हो गए हैं, जो उप मुख्यमंत्री और द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन में दूसरे नंबर के नेता के रूप में कार्यरत हैं। राज्य में एक प्रमुख युवा नेता होने के नाते उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी युवा मतदाताओं को एकजुट करना है। विजय (टीवीके): 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में, अभिनेता से नेता बने विजय अपनी पार्टी, तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) के लिए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुनावी शुरुआत कर रहे हैं, जो खुद को स्थापित डीएमके और एआईएडीएमके के तीसरे मोर्चे के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 14:24 IST समाचार चुनाव तमिलनाडु चुनाव 2026: स्टार उम्मीदवारों की पूरी सूची, उनके निर्वाचन क्षेत्र | नाम जांचें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)एमके स्टालिन डीएमके(टी)एआईएडीएमके बीजेपी गठबंधन(टी)के पलानीस्वामी तमिलनाडु(टी)उदयनिधि स्टालिन(टी)विजय तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)द्रविड़ियन मॉडल शासन
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड पर गंभीर आरोप:डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग के मैचों में दिव्यांग खिलाड़ी तो पानी पिला रहे, जो दिव्यांग नहीं वे खेलने उतरे

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) पर आरोप है कि वह अपनी शीर्ष घरेलू प्रतियोगिता ‘डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग’ में ऐसे खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दे रहा है, जो तय मानकों के अनुसार दिव्यांग नहीं हैं। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखने वाले असली दिव्यांग क्रिकेटरों का रास्ता बंद हो रहा है। जय चरण और एलेक्स जर्विस जैसे इंग्लैंड के पूर्व इंटरनेशनल खिलाड़ियों के माता-पिता ने यह मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि लीग में उनके बेटों की जगह ऐसे खिलाड़ियों ने ले ली है, जो ईसीबी की लर्निंग डिसेबिलिटी (एलडी) यानी ‘सीखने की अक्षमता’ के मेडिकल मानदंड को पूरा ही नहीं करते हैं। एक अभिभावक का अनुमान है कि हालिया ड्राफ्ट में चुने गए 64 में से 12 खिलाड़ी बिना किसी दिव्यांगता के हैं। नियमों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस श्रेणी में खेलने के लिए खिलाड़ी का आईक्यू 75 या उससे कम होना चाहिए। लेकिन आरोप है कि ईसीबी ने लीग में ऐसे कई खिलाड़ियों को शामिल कर लिया है, जो इस सख्त पैमाने पर खरे नहीं उतरते। इनमें से कई तो मुख्यधारा का पेशेवर क्रिकेट खेलते हैं। उदाहरण के तौर पर इंग्लैंड की गेंदबाज एम्म अर्लोट, जिन्हें 2023 में ऑटिज्म और एडीएचडी डायग्नोज हुआ था, वो सामान्य क्रिकेट खेलती हैं। इस गड़बड़ी का सीधा असर होनहार खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। लीग इतिहास में सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग एवरेज और स्ट्राइक रेट वाले जय चरण और एक दशक से खेल रहे एलेक्स जर्विस को सिर्फ ‘ड्रिंक्स कैरियर’ (पानी पिलाने वाले) की भूमिका तक सीमित कर दिया गया। हताश होकर जय ने टूर्नामेंट ही छोड़ दिया। यॉर्कशायर डिसेबिलिटी टीम के मैनेजर ओवेन जर्विस का कहना है कि गलत तरीके से एलडी श्रेणी में रखे गए नए खिलाड़ी ही सारी बैटिंग और बॉलिंग कर रहे हैं। असली खिलाड़ियों को सिर्फ फील्डिंग करने के लिए छोड़ दिया गया है, जिससे उनका मनोबल टूट रहा है। ईसीबी के डिसेबिलिटी क्रिकेट मैनेजर रिचर्ड हिल ने भी एक ईमेल में माना था कि ‘हाई-फंक्शनिंग’ (बेहतर क्षमता वाले) खिलाड़ियों के लीग में आने से चुनौतियां बढ़ रही हैं। हालांकि, ईसीबी के एक प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में कहा है कि लीग में सिर्फ 60 जगहें हैं, जिसके लिए कड़ा मुकाबला होता है। बोर्ड ने माना है कि पात्रता नियमों को लेकर बहस चल रही है और वे 2027 के सीजन तक इन पैमानों की समीक्षा करेंगे।
हिमाचल में अयोग्य घोषित विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन:विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित, दल-बदल पर सख्ती, चैतन्य-देवेंद्र भुट्टो की पेंशन बंद

हिमाचल प्रदेश में अयोग्य घोषित विधायकों को पेंशन नहीं मिलेगी। कांग्रेस सरकार ने विधानसभा बजट सेशन में आज विपक्ष के विरोध के बावजूद संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह व्यवस्था 14वीं विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित होने वाले विधायकों पर लागू होगी। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में इसका विरोध किया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को ‘हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026’ सदन में पेश किया था। इससे पहले, उन्होंने 2024 में इसी सदन में पारित पेंशन बंद करने वाले उस विधेयक को वापस लिया, जिसे राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिल पाई। लिहाजा दोबारा यह संशोधक विधेयक लाया गया। इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विधायक दल-बदल के चलते संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करार दिया जाता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह संशोधन विधेयक वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है, जिसके तहत विधायकों को भत्ते और पेंशन दी जाती है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 5 वर्ष तक विधायक रहने वाले सदस्य को 50 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है और अतिरिक्त कार्यकाल पर प्रत्येक वर्ष के लिए एक हजार रुपए की बढ़ोतरी का प्रावधान है। चैतन्य और देवेंद्र भुट्टों की पेंशन बंद इस विधेयक को मंजूरी के बाद पूर्व में गगरेट से कांग्रेस के विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से पूर्व MLA देवेंद्र कुमार भुट्टो की पेंशन भी बंद हो जाएगी, क्योंकि इन दोनों पूर्व विधायकों ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट और पार्टी व्हिप का भी उल्लंघन किया। इसके बाद, स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने दोनों को अयोग्य घोषित ठहराया। दोनों पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि दलबदल करने वाले अन्य 4 विधायक पहले भी हिमाचल विधानसभा में सदस्य रहे हैं। इस वजह से उनकी पेंशन पर कोई संकट नहीं है। मगर भविष्य में यदि कोई विधायक दल बदल करता है तो उस पर कानून के ने प्रावधान लागू होंगे। दल-बदल को हतोत्साहित करने के मकसद से संशोधन सीएम सुक्खू ने कहा- विधेयक का उद्देश्य दल-बदल को हतोत्साहित करना है। ऐसे में जनादेश की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह संशोधन आवश्यक माना गया है। सरकार का मानना है कि पेंशन जैसे दीर्घकालिक लाभ को जोड़कर दलबदल पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस संशोधन से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। हिमाचल में बनेगा किसान आयोग राज्य में किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग विधेयक, 2026’ लाया गया है। इस विधेयक के जरिए राज्य में एक संस्थागत तंत्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जो कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में नीतिगत सुझाव देगा। विधेयक के अनुसार, राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से राज्य किसान आयोग का गठन करेगी। यह आयोग कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा कर उनके विकास के लिए रणनीति तैयार करेगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव देगा। आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य विभागों के निदेशक तथा कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के कुलपति भी इसमें पदेन सदस्य के रूप में शामिल होंगे। आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा।
हनुमान जयंती पर खैरुआ सरकार धाम में उमड़ी भारी भीड़:दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें, करीब 2 एकड़ क्षेत्र में फैला मंदिर

सतना में हनुमान जयंती के अवसर पर गुरुवार को जिले के हनुमान मंदिरों में सुबह से भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। खैरुआ सरकार धाम में भी सुबह 5 बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह की आरती में शामिल होकर भक्तों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया, वहीं मंदिर परिसर में कई जगह भंडारे का आयोजन भी किया गया। 500 साल पुरानी प्रतिमा से जुड़ी मान्यता नागौद विकासखंड मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर दूर खैरुआ गांव में स्थित खैरुआ सरकार हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा करीब 500 साल पुरानी मानी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर आज मंदिर स्थित है, वहां हनुमान जी के स्वयं प्रकट होने की मान्यता प्रचलित है। मंदिर के पुजारी, जिनका परिवार चार पीढ़ियों से यहां सेवा दे रहा है, बताते हैं कि यह आस्था वर्षों से चली आ रही है और श्रद्धालु इसी विश्वास के साथ यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। हर मंगलवार-शनिवार को लगती है भीड़ मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुले रहते हैं। यहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से भारी भीड़ उमड़ती है। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त भंडारे का आयोजन भी करते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु लगातार पांच से सात मंगलवार तक 11 परिक्रमा लगाकर सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। करीब 2 एकड़ क्षेत्र में फैला यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के कारण क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है।
तमिलनाडु चुनाव पोल: तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की बंपर रैली, इस प्री पोल सर्वे का अनुमान एआईएडीएमके-बीजेपी की उड़ी नींद

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले आए लोकपाल के ताजा सर्वे में राज्य की राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी गई है। इस सर्वे के मुताबिक, जनता के बीच अभी किस पार्टी का मनोबल है, इसका आकलन किया जा सकता है। लोक पोल के इस सर्वे में बताया गया है कि राज्य में एक बार फिर डीएमके गठबंधन की सरकार पर नजरें टिकी हुई हैं. तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभाएं हैं और सरकार बनाने के लिए 118 विधानसभाओं की जरूरत है। सर्वे के मुताबिक डीएमके और कांग्रेस गठबंधन को 181 से 189 सीटें मिल सकती हैं। इसका मतलब यह है कि इस गठबंधन के बहुमत के आंकड़ों को बहुत आसानी से पार किया जा सकता है और स्थिर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार बन सकती है। वहीं एआईएडीएमके और बीजेपी का गठबंधन इस दौड़ में काफी पीछे दिख रहा है. इस गठबंधन को सिर्फ 38 से 42 सदस्यों की मुलाकात का अनुमान है, जो बहुमत से काफी दूर है। विजय थलापति की पार्टी को लेकर सर्वेक्षण के नतीजे इस बार चुनाव में एक नया चेहरा भी चर्चा में है. अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी टीवीके पहली बार चुनाव लड़ रही है। सर्वे के मुताबिक इस पार्टी को 8 से 10 टिकटें मिल सकती हैं. हालाँकि पर्वतारोहण कम दिख रहे हैं, लेकिन उनके आगमन ने राजनीति का माहौल जरूर बदल दिया है। अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो डीएमके गठबंधन को करीब 40.1% वोट मिल रहे हैं। एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन को करीब 29% वोट मिल सकते हैं। वहीं टीवीके को 23.9% वोट मिलने का अनुमान है, जो एक नई पार्टी के लिए काफी बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। थलापति की पार्टी का वोट शेयर खास बात यह है कि सर्वे में पहली बार चुनाव में जीत थलापति की पार्टी का वोट शेयर एआईएडीएमके के काफी करीब पहुंच रही है। इससे साफ है कि युवाओं और नए मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ बन रही है। मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी सर्वे में लोगों की राय सामने आई है. इसमें एमके स्टाइल सबसे आगे हैं और इन्हें 41% लोगों ने पसंद किया है। दूसरे नंबर पर एआईएडीएमके के ई पलानीस्वामी हैं, जिनमें 24.1% लोगों का समर्थन मिला है। वहीं विजय थलापति को 27.1% लोग मुख्यमंत्री की तरह पसंद कर रहे हैं, जो उन्हें एक मजबूत नए नेता के रूप में जीत दिलाते हैं। तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन की स्थिति मजबूत लोकपाल के सर्वेक्षण से साफ संकेत मिल रहा है कि तमिलनाडु में ब्लॉक डीएमके गठबंधन मजबूत स्थिति में है और कंपनी सरकार बना सकती है। लेकिन विजय थलापति की शुरूआत ने भविष्य की राजनीति को नई दिशा जरूर दी है। असली नतीजे चुनाव के बाद ही साफ होंगे, लेकिन अभी के मोन्ट में दिलचस्प मुकाबला बन गया है। ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल ओपिनियन पोल: बीजेपी को मिल सकती है बढ़त? कितने प्रतिशत लोग ममता बनर्जी को सीएम बनाना चाहते हैं, प्री पोल सर्वे का आकलन वाला (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएन चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव सर्वेक्षण(टी)डीएमके बनाम एआईएडीएमके(टी)विजय थलापति टीवीके(टी)एमके स्टालिन(टी)तमिलनाडु राजनीति हिंदी(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव सर्वे(टी)डीएमके बनाम एआईएडीएमके(टी)विजय थलपति टीवीके(टी)एमके स्टालिन(टी)तमिलनाडु राजनीति
हिमाचल में चिट्टा तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक:प्रधान की जाएगी कुर्सी, सरकार ने कानून बदला; डिफाल्टर-ऑडिट रिकवरी वाले भी अयोग्य

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी में शामिल लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। विधानसभा में आज (गुरुवार को) हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलते ही यह प्रावधान प्रभावी हो जाएगा और चिट्टा तस्करी से जुड़े लोग चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह द्वारा बीते बुधवार को इस विधेयक को सदन में पेश किया था। चुने जाने के बाद भी जाएगी कुर्सी इस संशोधन के तहत पंचायत जनप्रतिनिधियों पर भी सख्त प्रावधान लागू होंगे। यदि कोई प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, बीडीसी सदस्य या जिला परिषद सदस्य चुने जाने के बाद चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाया जाता है और उस पर आरोप तय हो जाते हैं, तो उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। ग्राम सभाओं के कोरम में बड़ा बदलाव विधेयक में ग्राम सभाओं के कोरम को लेकर भी अहम संशोधन किया गया है। अब तक ग्राम सभा के लिए 25 प्रतिशत परिवारों की उपस्थिति अनिवार्य थी, लेकिन नए प्रावधान के तहत इसे बदल दिया गया है। अब कुल परिवारों की बजाय कुल मतदाताओं में से 10 प्रतिशत की उपस्थिति को कोरम माना जाएगा। डिफाल्टर भी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव संशोधन में सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टरों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जिन लोगों पर पंचायत ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। सरकार का उद्देश्य पंचायतों में वित्तीय अनुशासन लाना और साफ-सुथरी छवि वाले प्रतिनिधियों को बढ़ावा देना है। 3600 पंचायतों में चुनाव से पहले बड़ा असर प्रदेश की करीब 3600 पंचायतों में 31 मई से पहले चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके लिए 7 अप्रैल तक आरक्षण रोस्टर तय किया जाना है। हर चुनाव में 60 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। ऐसे में यह संशोधन बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा और पंचायत चुनाव की तस्वीर बदल सकता है।गों को प्रभावित करेगा।
सीएम योगी से मिले गौतम अडाणी:डेढ़ घंटे में निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई, अयोध्या में परिवार के साथ रामलला के दर्शन किए

बिजनेसमैन गौतम अडाणी ने गुरुवार शाम लखनऊ में सीएम योगी से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान यूपी में निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा हुई। गौतम अडाणी के बेटे करण अडाणी भी मौजूद रहे। इससे पहले गौतम अडाणी ने परिवार के साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन किए। उन्होंने पत्नी डॉ. प्रीति अडाणी, बड़े बेटे करण और बहू पारिधि अडाणी के साथ विधि-विधान से रामलला की पूजा की। आरती की। पुजारी से तिलक लगवाया। प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर का भ्रमण कर राम मंदिर निर्माण के बारे में जानकारी ली। गौतम अडाणी गुरुवार सुबह 8.30 बजे पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अयोध्या पहुंचे। अहमदाबाद से 2 चार्टर्ड फ्लाइट्स से अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड हुए। एयरपोर्ट से सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। यहां उनका अंग वस्त्र भेंटकर स्वागत किया। 30 मिनट तक मंदिर में रहने के बाद बाहर आकर गौतम अडाणी ने कहा- मुझे और मेरे परिवार को अयोध्या में भगवान राम के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह एक भावुक पल है, एक गर्व का पल है। यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की संस्कृति, एकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। भगवान राम के आदर्श हमें सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। मैं प्रार्थना करता हूं कि भगवान राम का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे और हमारा देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे। गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की गौतम अडाणी ने अयोध्या के गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की। उन्हें सम्मानित किया। गुरुकुल की पुरानी और आधुनिक परंपरा के बारे जाना। उन्होंने कहा कि मैंने बच्चों के साथ समय बिताया। गुरुकुल आज के युग में हमारी संस्कृति को जागृत रखने का काम कर रहा है। अडाणी फाउंडेशन AI के इस दौर में इस गुरुकुल संस्कृति को संरक्षित करने में हर संभव सहयोग देगा। लखनऊ में योगी से मुलाकात करेंगे इसके बाद, गौतम अडाणी लखनऊ के लिए रवाना हो गए। यहां सीएम योगी से मुलाकात करेंगे। इससे पहले गौतम अडानी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या आए थे। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे। अब 4 तस्वीरें देखिए- विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की गौतम अडाणी श्रीराम मंदिर से करीब 10 मिनट दूर स्थित गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचे। यह गुरुकुल 1935 में स्वामी त्यागानंद ने शुरू किया था। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की। देखा कि कैसे यहां अनुशासन, संस्कार और पढ़ाई एक साथ चलती है। उन्होंने कहा- जब शिक्षा मूल्यों के साथ जुड़ी होती है, तो वह सिर्फ इंसान को नहीं बनाती, बल्कि देश का भविष्य भी बनाती है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन परंपराओं को आगे बढ़ाएं और आने वाले समय के लिए भी तैयार रहें। 16 साल की उम्र में शुरू कर दिया था कारोबार किडनैप कर मांगी गई थी 11 करोड़ की फिरौती साल 1998 का पहला दिन था। गौतम अडाणी और शांतिलाल पटेल अहमदाबाद के कर्णवती क्लब से कार में सवार हुए। ये कार मोहम्मदपुरा रोड की तरफ जा रही थी। रास्ते में बीच सड़क पर एक स्कूटर खड़ा मिला। कार जैसे ही रुकी, तभी वहां एक वैन पहुंची। वैन में सवार लोगों ने अडाणी और पटेल को किडनैप कर लिया और किसी अज्ञात जगह पर ले गए। पुलिस चार्जशीट के मुताबिक इन दोनों को छोड़ने से पहले 11 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई थी। 26/11 हमले में भी बाल-बाल बचे ऐसा ही एक वाकया 26 नवंबर 2008 का है। गौतम अडाणी मुंबई के ताज होटल स्थित वेदर क्राफ्ट रेस्टोरेंट में दुबई पोर्ट के सीईओ मोहम्मद शर्राफ के साथ डिनर कर रहे थे। उन्होंने देखा कि कुछ आतंकी होटल में घुस आए हैं और ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। 26 नवंबर की पूरी रात उन्होंने होटल के बेसमेंट में दहशत के साये में बिताई। 27 नवंबर की सुबह उन्हें बचाया गया। अपने प्राइवेट विमान से अहमदाबाद पहुंचते ही उन्होंने कहा, ‘मैंने 15 फीट की दूरी से मौत देखी है।’ ——————– अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…
हिमाचल में प्रीमियम शराब ₹105 तक महंगी:वाइन के शौकीन टूरिस्ट के बजट पर पड़ेगा असर, MRP से अधिक रेट पर नहीं बिकेगी

हिमाचल प्रदेश में शराब महंगी हो गई है। इसका असर लोकल लोगों के साथ देशभर से पहाड़ों पर घूमने आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ेगा। शराब के शौकीन टूरिस्ट और लोकल को राज्य में अब महंगे दाम पर शराब मिलेगी। एक्साइज डिपार्टमेंट ने 2026-27 के लिए शराब के रेट तय कर दिए है। अंग्रेजी शराब के रेट अधिकतम 105 रुपए प्रति बोलत तक बढ़ाए हैं, जबकि रेगुलर ब्रांड की शराब के दाम में 10 से 30 रुपए तक की बढ़ौतरी की गई है। ऑफिसर चॉइस शराब में सबसे कम 10 रुपए बढ़ाए गए। हिमाचल में पहले यह 535 रुपए की मिल रही थी, अब इसके 545 रुपए देने होंगे। रॉयल स्टैग की कीमत 750 से बढ़ाकर 770 रुपए प्रति बोतल की गई है। VAT 69 की कीमत में सबसे ज्यादा 105 रुपए बढ़ाए गए हैं। यानी प्रीमियम शराब के ज्यादा रेट बढ़ाए है। MRP में बिकेगी शराब एक्साइज डिपार्टमेंट ने 2026-27 के लिए एमआरपी के तहत ही ठेके नीलाम किए हैं। बीते वित्त वर्ष ही एमएसपी को समाप्त कर एमआरपी की व्यवस्था शुरू की गई थी। यानी अब कोई भी ठेका संचालक तय एमआरपी से अधिक दाम पर शराब नहीं बेच सकेगा। एमआरपी सिस्टम का फायदा यह है कि पर्यटकों को ओवरचार्जिंग से सुरक्षा मिलती है और वे तय कीमत से ज्यादा भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं होते। प्रदेश में शराब ठेकों की पहली बार ऑनलाइन नीलामी की गई है। शराब ठेकों में रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य एक्साइज डिपार्टमेंट ने शराब के सभी ठेकों पर रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य किया है। इसे लेकर ठेका संचालकों को ऑक्शन के दौरान ही सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं। साथ ही विभाग ने अपने अधिकारियों को भी शराब ठेकों की रूटीन जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी शराब उपभोक्ता के साथ कोई धोखाधड़ी न हो। एक्साइज एंड टेक्सेशन इंस्पेक्टर का फोन नंबर भी लिखना होगा विभाग ने रेट लिस्ट पर संबंधित क्षेत्र के एक्साइज एंड टेक्सेशन इंस्पेक्टर का फोन नंबर भी लिखना अनिवार्य किया है। ऐसा नहीं करने वाले शराब कारोबारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में यदि कोई ठेका संचालक किसी उपभोक्ता से एमआरपी से अधिक रेट वसूलता है, तो वह संबंधित अधिकारी को फोन पर शिकायत कर सकेगा। होटल-बार में प्रीमियम शराब के रेट बढ़ेंगे प्रीमियम शराब महंगी होने से होटलों को अपने मेन्यू रेट में आंशिक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। इससे हाई-एंड टूरिस्ट के खर्च में बढ़ोतरी होगी, लेकिन मध्यम वर्ग पर इस बढ़ौतरी का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। बाहर से दो बोतल से ज्यादा लाने की अनुमति नहीं हिमाचल में हर साल ढाई से 3 करोड़ टूरिस्ट घूमने आता है। इनमें ज्यादा टूरिस्ट पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के होते है। ऐसे में शराब के रेट में बढ़ौतरी के बाद बाहर से भी टूरिस्ट अपने साथ शराब ला सकते हैं। मगर पर्सनल यूज के लिए 2 बोतल से ज्यादा शराब लाने की अनुमति नहीं है। ————– यह खबर भी पढ़ें… हिमाचल में चिट्टा-तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर लगेगी रोक: विधानसभा में आज कानून बना रही सरकार, सोसायटी-बैंक डिफॉल्टर भी बाहर होंगे हिमाचल प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव की घोषणा से पहले चिट्टा तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान करने जा रही है। राज्य में ऐसे लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित ठहराया जाएगा। (पूरी खबर पढ़ें)
अवैध कॉलोनी बसाने वाले 79 कॉलोनाइजरों पर FIR के आदेश:ग्वालियर में 16 साल बाद बड़ा एक्शन, खाली प्लॉट सरकार लेगी कब्जे में

जिले में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। करीब 16 साल बाद कलेक्टर रुचिका चौहान के न्यायालय ने 51 अवैध कॉलोनियां बसाने वाले 79 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। सभी संबंधित एसडीएम को इन मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इन कॉलोनियों में जो खाली प्लॉट बचे हैं, उन्हें कॉलोनाइजर से छीनकर सरकारी कब्जे में लिया जाएगा। वहीं, जिन लोगों ने पहले ही प्लॉट खरीद लिए हैं, उन्हें फिलहाल किसी भी तरह की राहत मिलने की संभावना नहीं है। पहले ही दी जा चुकी थी चेतावनी अधिकारियों के मुताबिक अवैध कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदने की चेतावनी पहले ही सार्वजनिक रूप से दी जा चुकी थी। साथ ही संबंधित जमीन की खसरा-खतौनी के कॉलम नंबर-12 में अवैध कॉलोनी की एंट्री भी दर्ज की जा चुकी है। सुनवाई के बाद लिया गया फैसला कलेक्टर न्यायालय ने सभी आरोपियों को विधिवत सुनवाई का मौका दिया, लेकिन कॉलोनी विकसित करने से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद अलग-अलग एसडीएम द्वारा प्रस्तुत प्रकरणों पर सुनवाई कर सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। प्रशासन की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। कलेक्टर न्यायालय में ऐसे ही 152 और प्रकरण लंबित हैं, जिन पर सुनवाई चल रही है। आने वाले दिनों में इन पर भी बड़े फैसले हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में चला अभियान मुरार: उदयपुर, धनेली, करिगवां, बेरजा, सुनारपुरा ग्वालियर सिटी: ओड़पुरा, सुसैरा, कुलैथ, जिगसौली, इकहरा घाटीगांव, मोहना







