इंदौर में युवक की मौत,परिजन ने पुलिस पर लगाए आरोप:कलेक्टोरेट जनसुनवाई में जांच की मांग, मां की तबीयत बिगड़ी

इंदौर के चंदन नगर थाना क्षेत्र में ताप्ती परिसर निवासी 23 वर्षीय राज मकवाना की मल्टी से कूदकर मौत के मामले में परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को राज के परिजन कलेक्टोरेट में जनसुनवाई में पहुंचे और घटना की जांच की मांग की। जनसुनवाई के बाद लौटते समय राज की मां रेखा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें एम्बुलेंस से एमवाय अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब दो घंटे ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। मां ने पुलिसकर्मियों पर धमकी देने का आरोप लगाया मंगलवार को राज मकवाना के परिजन कलेक्टोरेट पहुंचे और अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। परिजनों का कहना है कि घटना से पहले पुलिसकर्मियों ने राज को धमकाया था। राज की मां रेखा, पिता मनोज मकवाना और बहन निकिता ने आरोप लगाया कि दो पुलिसकर्मियों ने राज को मर्डर केस में फंसाने की धमकी दी थी। परिवार का कहना है कि इसी डर से उसने मल्टी की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। सांस की तकलीफ के कारण रात में टहलने निकला था राज परिजनों के अनुसार राज को काफी समय से सांस की समस्या थी। घटना वाली रात वह इसी कारण टहलने के लिए घर से बाहर निकला था। नीचे मौजूद गार्ड ने उससे देर रात बाहर घूमने की वजह पूछी। परिवार का आरोप है कि उसी दौरान पुलिस की गाड़ी वहां पहुंची और दो पुलिसकर्मियों ने राज को रोककर पूछताछ की। इस दौरान उसे चांटे भी मारे गए और किसी को फोन लगाकर उसे मर्डर केस में फंसाने की बात कही गई। पांचवीं मंजिल से कूदने पर मौके पर मौत परिजनों के अनुसार धमकी से घबराकर राज मल्टी की पांचवीं मंजिल पर पहुंच गया और नीचे कूद गया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिवार का कहना है कि जहां घटना हुई वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन पुलिस ने अब तक उनकी जांच नहीं की। परिजनों ने आरोप लगाया कि जब वे थाने पहुंचे तो संबंधित पुलिसकर्मी वहां से तुरंत चले गए। शराब पीने के आरोप को परिजनों ने बताया गलत परिजनों ने पुलिस के उस दावे को भी खारिज किया है जिसमें कहा गया था कि राज ने शराब पी रखी थी। उनका कहना है कि वह दवाइयां ले रहा था और शराब पीने का सवाल ही नहीं उठता।
ईरान में अब तक 8000 घरों पर हमला, 1300 मौत:जंग में 140 अमेरिकी सैनिक घायल, इजराइल में कई जगह बमबारी

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 12वां दिन है। ईरान का कहना है कि अब तक हुए हमलों में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 8000 घरों को नुकसान पहुंचा है। UN में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी के मुताबिक देश में करीब 9600 सिविलियन इलाकों पर हमले हुए हैं। इनमें घरों के अलावा बाजार, अस्पताल, मेडिसिन सेंटर्स और स्कूल भी शामिल हैं। वहीं ईरान ने इजराइल में हाइफा, येरुशलम और तेल अवीव पर भी मिसाइल हमले करने का दावा किया है। युद्ध का असर अमेरिकी सेना पर भी पड़ा है। अमेरिका के रक्षा विभाग के मुताबिक अब तक करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
भीड़ कम होने पर शंकराचार्य बोले-यह शराब की दुकान नहीं:मुझे सपा समर्थक कहते हैं, मेरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा भाजपाई हैं

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शंखनाद किया। इसके बाद उन्होंने सभा को संबोधित करना शुरू किया। शंकराचार्य ने कहा- यह शराब की दुकान नहीं, ये सभा शुद्ध गाय की दुकान है। यहां ज्यादा भीड़ हो जाती तो इसका मतलब होता यह शराब की दुकान है। यहां कम भीड़ है, इसी से पता चल रहा है कि यह शुद्ध गाय के दूध की दुकान है। उन्होंने कहा- भाजपा अब भागपा हो गई है। अगर आप लोग पक्के गो-भक्त नहीं होते, तो इतनी रुकावट के बावजूद यहां आकर बैठे न होते। आप जितने भी लोग आए हैं, कार्यक्रम खत्म होने के बाद नाम नोट करके जाइएगा। क्योंकि, आप लोग इस कार्यक्रम के फाउंडर मेंबर होंगे। इसी बीच उनसे मिलने पहुंची एक महिला को पुलिस ने रोका, तो वह भड़क गई। उसने महिला पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की। शंकराचार्य ने दैनिक भास्कर से कहा- 26 शर्तों के साथ कार्यक्रम की अनुमति मिली है। इसमें कहा गया है कि किसी का नाम नहीं लेना है। इससे लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है। आखिर किसका नाम पुलिस छिपाना चाहती है? उसने ऐसा क्या किया है? दरअसल, लखनऊ प्रशासन ने 26 शर्तों के साथ कार्यक्रम की अनुमति दी है। इसके मुताबिक, सभा में धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के खिलाफ भड़काने वाली कोई बात नहीं होगी। शंकराचार्य ने 30 जनवरी को योगी सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने तब कहा था- गाय को राष्ट्रमाता घोषित करें, वरना आंदोलन करेंगे। शंकराचार्य ने 7 मार्च को वाराणसी से यात्रा शुरू की थी। जौनपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर होते हुए 4 दिन में लखनऊ पहुंचे। वह आज रात लखनऊ में ही रुकेंगे। गुरुवार सुबह की फ्लाइट से अहमदाबाद रवाना होंगे। 4 तस्वीरें देखिए… शंकराचार्य के धर्मयुद्ध सभा से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
कजाकिस्तान में युवक को बंधक बनाया,VIDEO:करनाल से घूमने गया था, हाथ-पैर टेप से बांधे, पीठ पर ब्लेड मारकर ₹10 लाख वसूले

हरियाणा में करनाल के रहने वाले एक युवक को कजाकिस्तान के अल्माटी शहर में बंधक बना लिया गया। परिवार का आरोप है कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन देखकर जालंधर के एक एजेंट से संपर्क किया था। 22 लाख में बेटे को कनाडा भेजने की बात तय हुई थी। 28 फरवरी को उनका बेटा और एक अन्य युवक कनाडा के लिए रवाना हुए। आरोप है कि एजेंट कनाडा ले जाने के बजाए दोनों युवकों को कजाकिस्तान ले गए और वहां एक होटल में बंधक बना लिया। उन्होंने उनके हाथ और मुंह टेप से बांध दिए और मारपीट की। उन्होंने युवक की कमर पर ब्लेड से भी वार किए। मारपीट के वीडियो बनाकर 20 लाख रुपए की डिमांड की। परिवार ने डर से 10 लाख रुपए भी भेज दिए। घरौंडा थाना पुलिस ने युवक के पिता की शिकायत पर 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सिलसिलेवार जानिए, पुलिस को क्या शिकायत दी… इंस्टाग्राम पर एड देखा, 22 लाख में डील सदरपुर गांव के रहने वाले बलकार ने घरौंडा पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मेरा बेटा निखिल कनाडा घूमने के लिए जाना चाहता था। उसने इंस्टाग्राम पर विदेश भेजने का एक विज्ञापन देखा था। इस विज्ञापन में राय इमिग्रेशन, गांव मियानी, जालंधर का पता और मोबाइल नंबर दिए गए थे। उन्होंने इमिग्रेशन के नंबर पर संपर्क किया, जहां उनकी बात मनप्रीत नाम के व्यक्ति से हुई। बाद में मनप्रीत ने उन्हें जश्न नामक व्यक्ति से मिलवाया। जश्न ने निखिल को कनाडा भेजने के लिए 22 लाख रुपए में सौदा तय किया। 28 फरवरी को निखिल- हेमराज गए बलकार ने आगे बताया कि एजेंटों ने बेटे के सभी दस्तावेज ऑनलाइन मंगवा लिए। 28 फरवरी की रात करीब 8 बजे बेटे को दिल्ली हवाई अड्डे पर बुलाया गया और साथ में 500 डॉलर लाने को कहा। परिजनों ने 500 डॉलर निखिल को दे दिए और वह हवाई जहाज से विदेश रवाना हो गया। निखिल के साथ हेमराज नाम का एक और युवक भी गया था। बाद में पता चला कि एजेंटों ने निखिल की उड़ान मुंबई से कजाकिस्तान के लिए बुक करवाई थी। हाथ और मुंह टेप से बांधे, ब्लेड से काटा उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर सोनू नाम का व्यक्ति निखिल को लेने आया और कहा कि तीन घंटे के लिए होटल में रुकना होगा। इसके बाद निखिल और दूसरे युवक हेमराज को बंधक बना लिया। आरोपियों ने उसे ब्लेड से काटने, मुंह पर टेप लगाने और उल्टा लटकाकर मारपीट करने की बात कही। वीडियो भेजकर 20 लाख रुपए की मांग की। बेटे की जान बचाने के लिए कर्ज लेकर 10 लाख भेज दिए। इसके बावजूद निखिल को नहीं छोड़ा। पैसे लेने आए दो लोगों को पुलिस को सौंपा बलकार सिंह ने बताया कि 2 मार्च को चार लोग सदरपुर गांव में पैसे लेने पहुंचे थे। हमने उनमें से दो लोगों को पकड़ लिया और घरौंडा थाना पुलिस को सौंप दिया, जबकि दो आरोपी मौके से फरार हो गए। निखिल उनका इकलौता बेटा है और उसे कनाडा भेजने के लिए उन्होंने कर्ज लेकर पैसे जुटाए थे। अब फिरौती के रूप में भी 10 लाख रुपए कर्ज लेकर ही दिए गए हैं। विदेश भेजने वाले एजेंटों का इसमें हाथ है। 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज घरौंडा पुलिस ने बलकार की शिकायत पर 9 मार्च को मनप्रीत, जश्न, परमिंदर कौर और सोनू के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामले की जांच सब इंस्पेक्टर उमेश को सौंपी गई है। कार्यकारी थाना प्रभारी राजकुमार ने बताया कि विदेश युवक के परिवार से सभी रिकॉर्ड क्लेक्ट किए जा रहे हैं। उसके आधार पर आगामी जांच शुरू कर दी गई है। युवक को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पंजाबी सिंगर जस्सी बोले- मैं कब्रों पर जाकर नहीं गाता:₹35 लाख का ऑफर ठुकराया; डेरे चिट्टे से भी खतरनाक, माइंडवॉश करते हैं

‘दिल ले गई कुड़ी गुजरात दी’ फेम पंजाबी सिंगर जसबीर जस्सी ने कहा कि वह कब्रों पर जाकर नहीं गाते, चाहे कोई उन्हें करोड़ों रुपए क्यों न दे। जस्सी यहीं नहीं रूके उन्होंने डेरों को चिट्टा, ड्रग बेचने से भी खतरनाक बता दिया। एक इंटरव्यू में जस्सी ने कहा कि डेरों को प्रमोट करना चिट्टा बेचने से भी खतरनाक है क्योंकि यहां लोगों का माइंडवॉश किया जाता है। जसबीर जस्सी ने कहा कि लुधियाना के एक बाबा ने उन्हें अपने डेरे में होने वाले मेले में गाने के लिए ऑफर किया और 32 से 35 लाख रुपए देने की बात की लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। मेरे से पहले भी वहां पर कई सिंगर गा चुके थे और मेरे बाद भी कई सिंगरों ने गाया है। बाबा ने मेले के बाद फोन करके कहा कि तुम नहीं आए तो मैं तुमसे भी बेहतर सिंगर लेकर आया और वह गाकर चला गया। जस्सी ने कहा कि मेरा उसूल है कब्र वाली जगह पर नहीं गाता हूं। इसलिए बाबा को मना कर दिया। जस्सी का ये बयान सीधे तौर पर उन सिंगरों को चुभने वाला है, जो डेरों और मजारों पर हर साल लगने वाले मेलों में परफॉर्म करते हैं। पंजाबी सिंगर जस्सी की 5 अहम बातें… जसबीर जस्सी के करियर से जुड़े 3 बड़े विवाद… कीर्तन-धार्मिक मर्यादा को लेकर विवाद हुआ पंजाबी सिंगर जसबीर सिंह जस्सी ने हाल ही में एक धार्मिक कार्यक्रम में शबद कीर्तन गाया। जिसको लेकर कुछ सिख धार्मिक संस्थाओं ने आपत्ति दर्ज की और मामला श्री अकाल तख्त तक पहुंचा। श्री अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने यहां तक कहा कि कीर्तन करने के लिए गुरमत मर्यादा का पालन जरूरी है। जसबीर जस्सी ने तुरंत सफाई दी और कहा कि सिख धर्म व श्री गुरुग्रंथ साहिब में उनका अटूट विश्वास है। अगर उनकी बात से किसी को ठेस पहुंची हो तो वो माफी चाहते हैं। श्री अकाल तख्त के आदेशों का पूरा सम्मान करूंगा। उसके बाद मामला शांत हुआ। यो यो हनी सिंह की अमर्यादित भाषा पर उठाए थे सवाल हाल ही में दिल्ली में यो यो हनी सिंह ने एक लाइव परफॉर्मेंस के दौरान अश्लील टिप्पणी की थी। म्युजिक इंडस्ट्री में सबसे पहले जसबीर जस्सी ने सवाल उठाए थे और उनके माता पिता व बहन से अपील की थी कि इसे अभी रोक लो। इसको लेकर काफी विवाद रहा। पाकिस्तानी कलाकारों के समर्थन का विवाद जसबीर जस्सी ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म सरदार जी-3 में पाकिस्तानी अभिनेत्री को कास्ट करने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध लगाना है तो फिर उनके गाने और कंटेंट भी पूरी तरह हटाए जाने चाहिए। इस बयान के बाद दिल्ली के पार्लियामेंट थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई और सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई।
20 साल से ट्रैक्टर चलाने वालों को बहरेपन का खतरा:55 ड्राइवरों पर रिसर्च के बाद सीआईएई भोपाल के वैज्ञानिकों का खुलासा

खेतों में ट्रैक्टर चलाने वाले किसानों की सुनने की शक्ति कमजोर हो रही है। एक ताजा रिसर्च में खुलासा हुआ है कि जो किसान 20 साल या उससे ज्यादा समय से ट्रैक्टर चला रहे हैं, उनमें से कई को सामान्य बातचीत करने में भी जोर लगाना पड़ता है। ऑफिस वर्कर के मुकाबले देखें तो दफ्तर में यह जोखिम 0.2% है, जबकि ट्रैक्टर चलाने वालो में यह बढ़कर 7.1% तक पहुंच जाता है। जो 35 गुना ज्यादा है। केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (सीआईएई), भोपाल के वैज्ञानिकों ने 55 ट्रैक्टर ड्राइवरों पर यह रिसर्च की है। जो 5 से 43 सालों से खेत जोत रहे हैं। सामने आया कि यह केवल कानों तक सीमित नहीं, बल्कि ड्राइवरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी सीधा असर कर रहा है। ड्राइवरों में डिप्रेशन (अवसाद), एंग्जायटी (चिंता) और भारी तनाव जैसी मानसिक बीमारियां घर कर रही हैं। इस अध्ययन में सीआईएई के डॉ. अभिजीत खड़त्कर, सीआर मेहता, विजय कुमार और रतलाम मेडिकल कॉलेज कम्युनिटी मेडिसिन के लोकेंद्रसिंह कोट शामिल रहे। रिसर्च डेटा: कम हाइट वालों को दोगुना नुकसान 55 में से 45 ड्राइवरों के बाएं कान की क्षमता दाएं कान के मुकाबले कम थी। 15-20 ड्राइवर जिन्हें 20 साल से ज्यादा अनुभव है, उनकी स्थिति गंभीर, हर तीसरे ड्राइवर में चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव की शिकायत भी सामने आई है। ट्रैक्टर की डिजाइन : दाएं से ज्यादा बाएं कान को नुकसान दायां कान: दायां कान कम प्रभावित मिला, बढ़ती उम्र, शोर का असर रहा। बायां कान: कम लंबाई वाले ड्राइवर धुआं निकलने वाले पाइप के ज्यादा करीब होते हैं, जिससे बाएं कान पर ज्यादा असर होता है। यह जानना जरूरी है… कानों की सुरक्षा: इयरप्लग या इयरमफ शोर को 20 से 30 डेसिबल तक कम करते हैं। मशीन का रखरखाव: पुराने ट्रैक्टरों के साइलेंसर और मफलर समय पर बदलें। काम का बंटवारा: लगातार घंटों तक अकेले ट्रैक्टर न चलाएं, बीच-बीच में आराम लें। औजारों का शोर: ट्रैक्टर के साथ इस्तेमाल होने वाला ‘डिस्क हैरो’ ज्यादा शोर करता है। नियमित जांच जरूर करवाएं।
दिल्लीवासियों की आंखों की सेहत पर एम्स की चौंकाने वाली स्टडी.

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज के आरपी सेंटर की एक पायलट स्टडी ने दिल्लीवासियों की चिंता बढ़ा दी है. राजधानी में रहने वाले करीब 30 फीसदी लोगों की आंखों पर मुसीबत मंडरा रही है और सबसे खास बात है कि बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं. स्कूल जाने वाले बच्चों की आंखों में नजर का स्तर लगातार गिर रहा है और इन सभी लोगों को चश्मे की बेहद जल्दी जरूरत है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज की रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली में लगभग 30 फीसदी लोगों को रिफ्रैक्टिव एरर (दृष्टि दोष) के कारण चश्मे की जरूरत है. यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को साफ दिखाई देने में कठिनाई होती है. अध्ययन के आंकड़े साझा करते हुए कम्यूनिटी ऑप्थेल्मोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि दिल्ली में नजर से जुड़ी समस्याएं कितनी आम हो चुकी हैं.स्टडी के अनुसार 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में समस्या सबसे ज्यादा है, जिनमें लगभग 70% लोगों को साफ देखने के लिए चश्मे की जरूरत होती है. वे आगे कहते हैं कि यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है. करीब 20 फीसदी स्कूली बच्चों को भी चश्मे की जरूरत पड़ती है, जो कम उम्र में आंखों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा रहा है. हालांकि एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो समय से न तो चश्मे की जांच करा रहे हैं और न ही पर्याप्त रूप से पहन रहे हैं. डॉक्टर पर्याप्त लेकिन जांचने वाले कम प्रोफेसर वशिष्ठ ने बताया कि दिल्ली में नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologists) की संख्या अच्छी है लेकिन एक बड़ी कमी यह है कि नजर की जांच करने वाले ऑप्टोमेट्रिस्ट (Optometrists) की संख्या जरूरत से काफी कम है. ऑफ्थेल्मोलॉजिस्ट के पास व्यक्ति तभी जाता है जब उसे आंखों में कोई परेशानी होती है क्योंकि ये आंखों की बीमारियों का इलाज करते हैं. जबकि ऑप्टोमेट्रिस्ट आंखों की जांच करते हैं और चश्मे का नंबर लिखते हैं.इसलिए रिफ्रैक्टिव एरर जैसी समस्याओं के समाधान के लिए ऑप्टोमेट्रिस्ट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. डॉ. वशिष्ठ बताते हैं कि दिल्ली में लगभग 249 संस्थान आंखों की देखभाल की सेवाएं देते हैं, जिनमें से अधिकतर प्राइवेट सेक्टर में हैं. शहर में करीब 1,085 नेत्र रोग विशेषज्ञ और लगभग 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट मौजूद हैं. डब्ल्यूएचओ के मानकों से कम हैं विशेषज्ञ उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार प्रति 50,000 लोगों पर कम से कम एक ऑप्टोमेट्रिस्ट होना चाहिए, लेकिन दिल्ली अभी इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई है. यहां प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं में भी आंखों की सेवाएं सीमित हैं. दिल्ली में लगभग 270 आयुष्मान आरोग्य मंदिर केंद्र हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 50 केंद्रों पर ही आंखों की देखभाल की सेवाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में जरूरी है कि आंखों की नियमित जांच की सुविधा बढ़ाई जाए और प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट की संख्या बढ़ाई जाए. ताकि बच्चों और बुजुर्गों में दृष्टि समस्याओं का जल्दी पता लगाया जा सके और अधिक लोगों को समय पर चश्मा मिल सके.
पन्ना में मटेरियल से भरा डंपर पलटा:ड्राइवर-हेल्पर मौके से भागे, बिलपुरा के पास रैपुरा-मोहन्द्रा मार्ग पर लगा लंबा जाम

पन्ना जिले के रैपुरा-मोहन्द्रा मार्ग पर बिलपुरा के पास मंगलवार शाम, 10 मार्च को सामान से भरा एक डंपर पलट गया। ड्राइवर ने कूद कर जान बचाई। इस हादसे की वजह से सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और रास्ता पूरी तरह जाम हो गया। प्रत्यक्षदर्शी शैलेन्द्र यादव ने बताया चालक और हेल्पर का पता नहीं पाया है। शायद दोनों भाग गए हैं। जानकारी के मुताबिक, निर्माण सामग्री (मटेरियल) से भरा यह डंपर टिकरिया मोड़ और बिलपुरा के बीच अचानक बेकाबू होकर पलट गया। डंपर ठीक सड़क के बीचों-बीच गिरा, जिससे आने-जाने का रास्ता बंद हो गया। अच्छी बात यह रही कि डंपर की चपेट में कोई दूसरी गाड़ी या इंसान नहीं आया। लगा लंबा जाम, यात्री परेशान हादसे के बाद सड़क के दोनों ओर वाहनों की लाइन लग गई और आवाजाही ठप हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी खबर पुलिस और प्रशासन को दी। जाम में फंसे मुसाफिरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। क्रेन की मदद से रास्ता साफ करने की कोशिश मौके पर पहुंची पुलिस ने गांव वालों की मदद से डंपर को हटाने का काम शुरू किया। भारी-भरकम क्रेन मंगवाई गई है ताकि डंपर को किनारे कर जल्द से जल्द रास्ता खुलवाया जा सके और ट्रैफिक फिर से शुरू हो सके।
नरसिंहपुर में हाईवे पर तेंदुए का शव मिला:वाहन की टक्कर से मौत की आशंका, 3 साल का था

नरसिंहपुर-सागर नेशनल हाईवे 44 पर झिराघाटी के पास मंगलवार रात एक तेंदुए का शव मिला है। तेंदुआ सड़क की उस लेन पर पड़ा था जो सागर से नरसिंहपुर की ओर जाती है। घटना की खबर डायल 112 के जरिए पुलिस को मिली, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सुआतला थाना प्रभारी प्रियंका केवट ने बताया कि डायल 112 पर सूचना मिली थी कि झिराघाटी के पास किसी एक्सीडेंट में एक ‘चीता’ घायल हो गया है। जब पुलिस की टीम वहां पहुंची, तो पता चला कि वह एक तेंदुआ था और उसकी मौत हो चुकी थी। इसके तुरंत बाद वन विभाग को जानकारी दी गई। 3 साल का था नर तेंदुआ बरमान वन परिक्षेत्र अधिकारी एचएल बिसेन के मुताबिक, मारा गया तेंदुआ नर है और उसकी उम्र करीब 3 साल के आसपास है। शुरुआती जांच में यही लग रहा है कि किसी तेज रफ्तार वाहन ने उसे टक्कर मार दी, जिससे उसकी जान चली गई। जंगल से निकलकर पार कर रहा था रोड अंदेशा जताया जा रहा है कि तेंदुआ सागर और नरसिंहपुर जिले की सीमा पर लगे जंगल से निकलकर सड़क पार कर रहा होगा, तभी वह किसी गाड़ी की चपेट में आ गया। वन विभाग की टीम ने मौके की बारीकी से जांच की है और मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।
पंजाब: मोमोज खाने से दो बच्चों की मौत, जंक फूड्स पर सवाल eating momos can cause death

हाल ही में पंजाब के तरनतारन में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसमें मोमोज खाने से दो सगे भाई-बहनों की मौत हो गई. माता-पिता की ओर से बताया गया कि शनिवार शाम को मोमोज और सोया चाप खाने के बाद बच्चों के पेट में भीषण दर्द उठा और उल्टियां होने लगीं. दोनों बच्चों की हालत बिगड़ती देख उन्हें घर पर रखी उल्टी रोकने की दवा दे दी और वे सो गए लेकिन रविवार सुबह उनकी मौत हो गई. जंक फूड के लगभग ऐसे ही दो मामले कुछ दिन पहले यूपी से भी आए थे जब पेरेंट्स ने बताया था कि उनकी बेटी ज्यादा चाऊमीन-बर्गर खाने की लत के चलते बीमार हुई और फिर उसकी मौत हो गई. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जंक फूड्स अब जानलेवा होते जा रहे हैं? मोमोज हो या चाऊमीन-बर्गर क्या ये चीजें खाने के तुरंत बाद किसी की जान ले सकती हैं? आईए सर गंगाराम अस्पताल नई दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी एंड पैनक्रिएटिको बिलियरी साइंसेज के वाइस चेयरपर्सन डॉ. पीयूष रंजन और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में डायटीशियन मनीषा वर्मा से जानते हैं उनकी राय.. विशेषज्ञों से जानें मोमोज, बर्गर आदि जंक फूड कितने नुकसानदेह हैं? डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं कि मोमोज वाले मामले में क्लिनिकल डिटेल्स ज्यादा नहीं मालूम है इसलिए पूरी तरह ये बताना तो मुश्किल है कि बच्चों की मौत की असली वजह क्या है, हालांकि मौत के पीछे खाना नहीं बल्कि इससे या किसी और चीज से होने वाला इन्फेक्शन वजह हो सकता है. बाहर के खाने पीने की चीजों में अगर गंदगी है और हाईजीन का अभाव होता है तो बच्चों को टाइफॉइड हो सकता है, ज्यादा गंभीर स्थिति में ब्लीडिंग हो सकती है, आंतें फट सकती हैं. इन्फेक्टेड खाने से एक्यूट डायरिया हो सकता है, जिसमें पेट में दर्द और उल्टी होती हैं. संक्रमण के बाद एक और जो खराब चीज हो सकती है वह है रैपिडली किडनी का शट डाउन होना. किडनी शट डाउन 24 घंटे या उससे थोड़े ज्यादा समय में भी हो सकता है. वहीं डायटिशियन मनीषा कहती हैं कि जंक फूड नुकसानदेह तो होता ही है लेकिन सिर्फ मोमोज खाने भर से किसी की मृत्यु हो जाए ये संभव नहीं लगता. हालांकि बच्चों की मौत के पीछे मोमोज में मौजूद कोई टॉक्सिक चीज वजह हो सकती है. मोमोज बनाने से लेकर रखरखाव तक क्या उसमें किसी तरह की अनहाइजेनिक कंडीशन, टॉक्सिक चीजें या मिलावट की गई है तो वह संक्रमण पैदा कर सकती है, शरीर में जहरीले तत्व पहुंच सकते हैं और तब उससे जान जा सकती है. डॉ. रंजन आगे कहते हैं कि फूड पॉइजनिंग का मामला अगर हो भी तो उससे मौत की संभावना कम दिखती है. डिहाइड्रेशन से भी इतनी जल्दी जान नहीं जा सकती है. मामोज खाने और बच्चों की मौत होने का पीरियड इतना छोटा है कि इसमें किसी प्रकार के संक्रमण और किडनी शट डाउन की संभावना हो सकती हैं, हालांकि ये सभी संभावनाएं हैं और ऐसे केसेज में ऐसी चीजें हो सकती हैं लेकिन एक्जेक्टली हुआ क्या है यह तो जांच का विषय है. वहीं मनीषा कहती हैं कि इस चीज का खुलासा तो बच्चों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकता है कि उन मोमोज में ऐसा क्या था. क्या उसमें खराब मीट या चिकन का इस्तेमाल हुआ, या अगर वेज मोमोज थे तो उनमें किसी प्रकार की खराब या अनहाइजेनिक चीजें मिली थीं या उनके रखरखाव के समय उसमें कुछ गड़बड़ हुई. क्या जंक फूड हैं नुकसानदेह डायटीशियन मनीषा कहती हैं, हालांकि जंक फूड सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह होते हैं और ये लंबे समय तक खाने से शरीर को काफी नुकसान पहुंचाते हैं. सबसे बड़ी बात है कि आपको नहीं पता कि ये कैसे बनाए गए हैं, इन्हें कैसे रखा गया है, कितनी साफ-सफाई का ध्यान रखा गया है या नहीं रखा गया है, कैसा पानी इस्तेमाल हुआ है, क्या संक्रमित चीजें इनके प्रभाव में आई हैं. इसलिए बाहर के खाने को अवॉइड करें या सिर्फ वहीं से खरीदें जहां आपको साफ-सफाई का भरोसा हो. सड़क किनारे कहीं भी मिलने वाले फूड्स को न खाएं.








