सोहेल खान के घर हुई गणपति पूजा:बहन अर्पिता-अलवीरा समेत पूरा खान परिवार पहुंचा, विसर्जन में शामिल हो सकते हैं सलमान

मुंबई में गणेशोत्सव की धूम के बीच अभिनेता सोहेल खान के घर भी गणपति पूजा का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर खान परिवार के कई सदस्य एक साथ नजर आए। अर्पिता खान शर्मा, अलवीरा खान अग्निहोत्री और मां सलमा खान सोहेल के घर गणपति बप्पा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं। परिवार ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ बप्पा का स्वागत किया। इस दौरान घर पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। अर्पिता और अलवीरा पारंपरिक अंदाज में नजर आईं, वहीं सलमा खान भी परिवार के साथ गणपति पूजा में शामिल हुईं। सलमान भी शाम की आरती में शामिल हो सकते हैं। खान परिवार हर साल गणेशोत्सव को खास अंदाज में मनाता है। ऐसे में सोहेल खान के घर हुई इस पूजा में परिवार की एकजुटता और बप्पा के प्रति आस्था साफ नजर आई। पिछले साल बहन अर्पिता के घर की गणेश आरती में शामिल हुए थे सलमान सलमान खान की बहन अर्पिता खान शर्मा हर साल गणपति बप्पा की स्थापना करती हैं। बीते साल सलमान खान समेत पूरा खान परिवार उनके घर गणेश आरती में शामिल हुआ था। देखिए 2025 में हुई गणेश आरती से खान परिवार की झलक- सलमान खान का परिवार हर साल गणेशोत्सव में चर्चा में रहता है। सोहेल खान, अर्पिता खान के घर गणपति स्थापना होती है और विसर्जन में पूरा परिवार साथ नजर आता है। साल 2024 में भी सलमान खान बहन के गणपति विसर्जन का हिस्सा बने। रिब इंजरी के बावजूद उन्होंने विसर्जन में जमकर डांस किया था। देखिए 2024 में खान परिवार के गणपति विसर्जन की झलक-
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच लड़ाई तेज:सऊदी पर ड्रोन और मिसाइल से हमला हमल, 82 हजार से ज्यादा लोग बेघर

यमन में ईरान समर्थित हूतियों और सरकार के बीच लड़ाई तेज हो गई है। रविवार को यमनी सरकारी बलों ने लाल सागर के पास हूती ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में हूतियों ने पड़ोसी सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। यमनी सरकार ने लाल सागर के तट पर और सैनिक भेजने की बात कही है। पिछले हफ्ते हूतियों ने लाल सागर के किनारे मौजूद मोखा बंदरगाह शहर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के एक द्वीप पर कब्जा कर लिया था। यह जलडमरूमध्य एक अहम समुद्री रास्ता है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से अब तक यमन में 82 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। लड़ाई बढ़ने से वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है। यमन की सेना के 500 से ज्यादा लड़ाके मारे गए सरकार के साथ लड़ रहे नेशनल रेजिस्टेंस बल ने बताया कि पिछले 4 हफ्तों में पश्चिमी तट पर उसके 500 से ज्यादा लड़ाके मारे गए। यह इस बल की ओर से जारी की गई पहली व्यापक मौतों की संख्या है। बल ने यह भी दावा किया कि होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके मारे गए। हूती प्रवक्ता ने इन आंकड़ों पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। खबर अपडेट हो रही है…
नीलम ने गोविंदा संग रिश्ते की अफवाहों पर रिएक्शन दिया:बोलीं- उस समय मैं बहुत छोटी थी, उनकी शादी की जानकारी बाद में मिली

एक्ट्रेस नीलम कोठारी ने हाल ही में गोविंदा के साथ अपने रिश्ते की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं थीं, तब वह बहुत छोटी थीं और उन्हें गोविंदा की शादी की जानकारी नहीं थी। नीलम ने यह बात टाइम्स नाउ के इंटरव्यू में कही। गौरतलब है कि नीलम कोठारी और गोविंदा ने 1980 के दशक और 1990 के शुरुआती वर्षों में कई फिल्मों में साथ काम किया था। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर अफवाहें वर्षों तक चलती रहीं। इंटरव्यू में नीलम से कहा गया कि गोविंदा ऑफ-स्क्रीन उनसे प्यार करते थे। इस पर नीलम ने कहा, “मुझे नहीं पता। सबसे पहले तो मैं उस समय बहुत छोटी थी। अब मुझे पता चला है कि शायद उस वक्त उनकी शादी हो चुकी थी।” वहीं, नीलम के पास बैठे पति समीर सोनी ने गोविंदा को लेकर कहा, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं। जब भी मैं उनसे मिला हूं, वह बहुत गर्मजोशी से मिले हैं।” समीर ने यह भी कहा, “जो बात 20 साल पहले हुई भी हो सकती है और नहीं भी, उसके बारे में मुझे पता ही नहीं, तो मैं उसे लेकर कैसे बैठ सकता हूं? वह अब भी दावा करते हैं कि वह तुमसे बहुत प्यार करते थे।” रिश्ता उनके लिए विकल्प नहीं था नीलम कोठारी ने बताया कि उस दौर में उनके लिए रिश्ता बनाना कभी विकल्प नहीं था। उनका पूरा ध्यान हिंदी सीखने और फिल्मों में काम करने पर था। नीलम ने यह भी बताया कि कम उम्र की वजह से उनके परिवार का कोई सदस्य शूटिंग पर उनके साथ जाता था। नीलम के मुताबिक, सेट पर सभी लोग उन्हें बहुत प्यार करते थे। उनके को-स्टार्स भी उनके साथ बच्चे जैसा व्यवहार करते थे। समीर सोनी ने कहा कि जैकी श्रॉफ और संजय दत्त खास तौर पर नीलम को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव रहते थे। नीलम और गोविंदा की जोड़ी नीलम कोठारी और गोविंदा की जोड़ी ने 80 और 90 के दशक में कई फिल्मों में साथ काम किया था। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को खूब पसंद आती थी। इस जोड़ी की पर्दे पर शुरुआत फिल्म ‘लव 86’ से हुई थी। 14 फरवरी 1986 को रिलीज हुई यह मूवी गोविंदा की डेब्यू फिल्म भी थी। इसके 2 हफ्ते बाद 28 फरवरी 1986 को दोनों की दूसरी फिल्म ‘इल्जाम’ रिलीज हुई। इस फिल्म के गानों और गोविंदा के बेहतरीन डांस (खासकर गाने ‘स्ट्रीट डांसर’ ) ने उन्हें रातों-रात फिल्म इंडस्ट्री में बड़ी पहचान दिलाई। दोनों ‘खुदगर्ज’ (1987) में साथ नजर आए। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर सफल रही। इसके बाद नीलम और गोविंदा ने ‘सिंदूर’, ‘हत्या’, ‘दो कैदी’ और ‘फर्ज की जंग’ जैसी कई अन्य फिल्मों में भी साथ काम किया। इसी दौरान दोनों के रिश्ते की अफवाहें सामने आई थीं। 15 साल की उम्र में फिल्मों में डेब्यू किया नीलम कोठारी का जन्म हांगकांग में हुआ था। उनके पिता शिशिर कोठारी गुजराती जैन थे, जबकि मां परवीन कोठारी पारसी थीं। बचपन से ही नीलम को संगीत और डांस में रुचि थी। उन्होंने कीबोर्ड बजाना और जैज बैले भी सीखा। उनकी पढ़ाई हांगकांग के आइलैंड स्कूल में हुई। बाद में उनका परिवार बैंकॉक शिफ्ट हो गया। मुंबई में छुट्टियां बिताने के दौरान उनकी मुलाकात फिल्म डायरेक्टर रमेश बहल से हुई। उन्होंने नीलम को फिल्म में काम करने का ऑफर दिया, जिसके बाद नीलम ने एक्टिंग में हाथ आजमाने का फैसला किया। इसके बाद, जब वो महज 15 साल की थीं, तब बतौर लीड उनकी पहली फिल्म ‘जवानी’ (1984) रिलीज हुई थी। वहीं, कई लोकप्रिय फिल्मों में काम करने के बाद नीलम ने साल 2001 में अभिनय से दूरी बना ली थी। बाद में उन्होंने ज्वेलरी डिजाइनिंग में कदम रखा। कई साल बाद नीलम 2020 में रियलिटी शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ में नजर आईं। इसमें उनकी दोस्त महीप कपूर, भावना पांडे और सीमा सजदेह भी थीं। वह इसके स्पिन-ऑफ ‘फैबुलस लाइव्स वर्सेज बॉलीवुड वाइव्स’ में भी नजर आईं। इसमें मुंबई और दिल्ली की कास्ट को साथ लाया गया था।
नीलम ने गोविंदा संग रिश्ते की अफवाहों पर रिएक्शन दिया:बोलीं- उस समय मैं बहुत छोटी थी, उनकी शादी की जानकारी बाद में मिली

एक्ट्रेस नीलम कोठारी ने हाल ही में गोविंदा के साथ अपने रिश्ते की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं थीं, तब वह बहुत छोटी थीं और उन्हें गोविंदा की शादी की जानकारी नहीं थी। नीलम ने यह बात टाइम्स नाउ के इंटरव्यू में कही। गौरतलब है कि नीलम कोठारी और गोविंदा ने 1980 के दशक और 1990 के शुरुआती वर्षों में कई फिल्मों में साथ काम किया था। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर अफवाहें वर्षों तक चलती रहीं। इंटरव्यू में नीलम से कहा गया कि गोविंदा ऑफ-स्क्रीन उनसे प्यार करते थे। इस पर नीलम ने कहा, “मुझे नहीं पता। सबसे पहले तो मैं उस समय बहुत छोटी थी। अब मुझे पता चला है कि शायद उस वक्त उनकी शादी हो चुकी थी।” वहीं, नीलम के पास बैठे पति समीर सोनी ने गोविंदा को लेकर कहा, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं। जब भी मैं उनसे मिला हूं, वह बहुत गर्मजोशी से मिले हैं।” समीर ने यह भी कहा, “जो बात 20 साल पहले हुई भी हो सकती है और नहीं भी, उसके बारे में मुझे पता ही नहीं, तो मैं उसे लेकर कैसे बैठ सकता हूं? वह अब भी दावा करते हैं कि वह तुमसे बहुत प्यार करते थे।” रिश्ता उनके लिए विकल्प नहीं था नीलम कोठारी ने बताया कि उस दौर में उनके लिए रिश्ता बनाना कभी विकल्प नहीं था। उनका पूरा ध्यान हिंदी सीखने और फिल्मों में काम करने पर था। नीलम ने यह भी बताया कि कम उम्र की वजह से उनके परिवार का कोई सदस्य शूटिंग पर उनके साथ जाता था। नीलम के मुताबिक, सेट पर सभी लोग उन्हें बहुत प्यार करते थे। उनके को-स्टार्स भी उनके साथ बच्चे जैसा व्यवहार करते थे। समीर सोनी ने कहा कि जैकी श्रॉफ और संजय दत्त खास तौर पर नीलम को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव रहते थे। नीलम और गोविंदा की जोड़ी नीलम कोठारी और गोविंदा की जोड़ी ने 80 और 90 के दशक में कई फिल्मों में साथ काम किया था। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को खूब पसंद आती थी। इस जोड़ी की पर्दे पर शुरुआत फिल्म ‘लव 86’ से हुई थी। 14 फरवरी 1986 को रिलीज हुई यह मूवी गोविंदा की डेब्यू फिल्म भी थी। इसके 2 हफ्ते बाद 28 फरवरी 1986 को दोनों की दूसरी फिल्म ‘इल्जाम’ रिलीज हुई। इस फिल्म के गानों और गोविंदा के बेहतरीन डांस (खासकर गाने ‘स्ट्रीट डांसर’ ) ने उन्हें रातों-रात फिल्म इंडस्ट्री में बड़ी पहचान दिलाई। दोनों ‘खुदगर्ज’ (1987) में साथ नजर आए। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर सफल रही। इसके बाद नीलम और गोविंदा ने ‘सिंदूर’, ‘हत्या’, ‘दो कैदी’ और ‘फर्ज की जंग’ जैसी कई अन्य फिल्मों में भी साथ काम किया। इसी दौरान दोनों के रिश्ते की अफवाहें सामने आई थीं। 15 साल की उम्र में फिल्मों में डेब्यू किया नीलम कोठारी का जन्म हांगकांग में हुआ था। उनके पिता शिशिर कोठारी गुजराती जैन थे, जबकि मां परवीन कोठारी पारसी थीं। बचपन से ही नीलम को संगीत और डांस में रुचि थी। उन्होंने कीबोर्ड बजाना और जैज बैले भी सीखा। उनकी पढ़ाई हांगकांग के आइलैंड स्कूल में हुई। बाद में उनका परिवार बैंकॉक शिफ्ट हो गया। मुंबई में छुट्टियां बिताने के दौरान उनकी मुलाकात फिल्म डायरेक्टर रमेश बहल से हुई। उन्होंने नीलम को फिल्म में काम करने का ऑफर दिया, जिसके बाद नीलम ने एक्टिंग में हाथ आजमाने का फैसला किया। इसके बाद, जब वो महज 15 साल की थीं, तब बतौर लीड उनकी पहली फिल्म ‘जवानी’ (1984) रिलीज हुई थी। वहीं, कई लोकप्रिय फिल्मों में काम करने के बाद नीलम ने साल 2001 में अभिनय से दूरी बना ली थी। बाद में उन्होंने ज्वेलरी डिजाइनिंग में कदम रखा। कई साल बाद नीलम 2020 में रियलिटी शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ में नजर आईं। इसमें उनकी दोस्त महीप कपूर, भावना पांडे और सीमा सजदेह भी थीं। वह इसके स्पिन-ऑफ ‘फैबुलस लाइव्स वर्सेज बॉलीवुड वाइव्स’ में भी नजर आईं। इसमें मुंबई और दिल्ली की कास्ट को साथ लाया गया था।
ओमान के पास जहाज पर हमला, 14 भारतीय सवार थे:13 का रेस्क्यू हुआ, एक लापता; भारत ने हमले की निंदा की

ओमान के तट के पास रविवार को कमर्शियल जहाज एमटी एल गाइया पर हमला हुआ। जहाज पर 14 भारतीय सवार थे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि 13 भारतीय क्रू सदस्यों को बचा लिया गया है। एक भारतीय अब भी लापता है और उसकी तलाश जारी है। विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि लापता भारतीय की तलाश के लिए बचाव अभियान चल रहा है। मंत्रालय के मुताबिक, ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर नजर रख रहा है। दूतावास ओमानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी जहाज भी हमले की चपेट में भारत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रविवार सुबह ईरान के केश्म द्वीप के पास एक ईरानी कार्गो जहाज पर भी हमला होने की खबर सामने आई। यह इलाका होर्मुज स्ट्रेट में आता है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस हमले में एक शख्स की मौत हुई और चार लोग घायल हुए। हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी और लोगों को बाहर निकालने का ऑपरेशन शुरू किया गया था। इस हमले से कुछ घंटे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सोशल मीडिया पर कहा था कि ईरान के लोगों को दबाव डालकर झुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, ‘ईरान सरेंडर नहीं करेगा।’ खबर लगातार अपडेट हो रही है…
ब्रिटेन के बंटवारे पर साथ आएंगे स्कॉटलैंड, वेल्स-नॉर्दर्न आयरलैंड:तीनों जगहों के नेताओं की कल मीटिंग, अलग होने के पक्ष में

UK के एकजुट रहने पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर सोमवार को वेल्स की राजधानी कार्डिफ में मिलेंगे। स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड की सरकार के प्रमुख को फर्स्ट मिनिस्टर कहा जाता है। इनके साथ अलग देश आयरलैंड की पार्टी सिन फेन की अध्यक्ष मैरी लू मैकडोनाल्ड भी रहेंगी। बैठक में नेता हर क्षेत्र को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार देने की बात पर साझा बयान जारी कर सकते हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर आजादी या दूसरे बड़े बदलावों पर जनमत संग्रह कराने की बात भी शामिल है। इस बैठक से UK पर दबाव बढ़ सकता है। UK से अलग होने के पक्ष में तीनों जगहों की पार्टियां ब्रिटेन की केंद्र सरकार देश को एकजुट रखने के पक्ष में है। लेकिन स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में ज्यादा अधिकार और बड़े बदलाव की मांग बढ़ रही है। इन तीनों जगहों पर ऐसी पार्टियां प्रभावशाली हैं जो ब्रिटेन की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव चाहती हैं। स्कॉटलैंड में SNP आजादी का समर्थन करती है। वेल्स में प्लाइड कम्री भी आजादी की मांग करती है। वहीं नॉर्दर्न आयरलैंड में सिन फेन आयरलैंड के साथ जुड़ने का समर्थन करती है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी और वेल्स के फर्स्ट मिनिस्टर रुन एपी इओर्थवर्ट के साथ नॉर्दर्न आयरलैंड का नेतृत्व भी साझा घोषणा का समर्थन कर सकता है। बैठक में आजादी और संवैधानिक बदलाव के अलावा अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, यूरोप और दूसरे देशों से रिश्ते मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। स्कॉटलैंड में फिर जनमत संग्रह की चर्चा स्कॉटलैंड की आजादी इस पूरी बहस का सबसे बड़ा मुद्दा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में कहा था कि अगर स्कॉटलैंड और नॉर्दर्न आयरलैंड में आजादी के पक्ष में लोगों के बीच सहमति बनती है, तो एक और जनमत संग्रह पर विचार किया जा सकता है। SNP ने बर्नहम के इस बयान को तुरंत मुद्दा बना लिया। इसके बाद में बर्नहम को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर स्विनी को चिट्ठी लिखकर कहा कि अगले आम चुनाव से पहले आजादी पर जनमत संग्रह नहीं कराया जाएगा। नॉर्दर्न आयरलैंड को लेकर भी उन्होंने कहा कि अभी ब्रिटेन से अलग होने को लेकर ऐसा माहौल नहीं है। बर्नहम ने 2024 के चुनावी घोषणापत्र का हवाला देते हुए कहा कि लेबर पार्टी स्कॉटलैंड की आजादी या एक और जनमत संग्रह का समर्थन नहीं करती। स्विनी – UK पर एकजुट रहने का दबाव बढ़ा स्विनी ने बर्नहम के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहली बार स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में ऐसे फर्स्ट मिनिस्टर हैं जो आजादी के पक्ष में हैं। उनके मुताबिक, इससे साफ है कि ब्रिटेन को एकजुट रखने वाली मौजूदा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं, वेल्स में भी ज्यादा अधिकार की मांग तेज हो गई है। मई में हुए चुनाव में वहां ब्रिटेन की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली पार्टियों को मजबूती मिली है। 96 सीट पर हुए चुनाव में अलग देश की समर्थक प्लाइड कम्री को 43 जबकि लेबर पार्टी को सिर्फ 9 सीटें मिलीं। इस चुनाव के बाद प्लाइड कम्री के रुन एपी इओर्थवर्ट वेल्स के फर्स्ट मिनिस्टर बने। नॉर्दर्न आयरलैंड के पास आयरलैंड से जुड़ने का रास्ता नॉर्दर्न आयरलैंड का मामला स्कॉटलैंड और वेल्स से अलग है। 1998 के गुड फ्राइडे समझौते के तहत अगर यह संभावना दिखे कि नॉर्दर्न आयरलैंड के ज्यादातर लोग ब्रिटेन से अलग होकर आयरलैंड के साथ जुड़ना चाहते हैं, तो वहां जनमत संग्रह कराया जा सकता है। यहां की नेता सिन फेन का कहना है कि कार्डिफ की बैठक में भी इसी अधिकार की बात उठाई जाएगी कि हर देश और क्षेत्र को लोकतांत्रिक तरीके से अपना भविष्य तय करने का मौका मिलना चाहिए। ट्रम्प के बयान से आयरलैंड के एकीकरण की चर्चा बढ़ी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हाल में आयरलैंड के एकीकरण पर बयान दिया है। शनिवार को डबलिन दौरे के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वह आयरलैंड को एक देश के रूप में देखना पसंद करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपतियों का इस मुद्दे पर आमतौर पर सावधानी भरा रुख रहा है। ऐसे में ट्रम्प का बयान इस बहस को और चर्चा में ले आया है। मामला सिर्फ आजादी का नहीं, पैसा और यूरोप भी अहम कार्डिफ की बैठक सिर्फ ब्रिटेन से अलग होने की मांग तक सीमित नहीं है। तीनों जगहों की कई प्रमुख पार्टियां यूरोपीय यूनियन के साथ करीबी रिश्तों की समर्थक हैं। UK 2020 में आधिकारिक तौर पर यूरोपीय यूनियन से आजाद हो गया था। इसके लिए 2016 में वोटिंग हुई थी। अगर स्कॉटलैंड या वेल्स भविष्य में आजाद होते हैं, तो वे EU की सदस्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं अगर नॉर्दर्न आयरलैंड आयरलैंड में शामिल होता है, तो वह EU का हिस्सा बन जाएगा, क्योंकि आयरलैंड पहले से EU का सदस्य है। अब जानिए कि ये तीनों इलाके ब्रिटेन से कैसे जुड़े और अब अलग होने की मांग क्यों हो रही है… स्कॉटलैंड करीब 300 साल पहले स्कॉटलैंड और इंग्लैंड दो अलग-अलग देश थे। दोनों के अपने राजा, संसद और कानून थे। साल 1603 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम की मौत हो गई। उनका कोई वारिस नहीं था। तब स्कॉटलैंड के राजा जेम्स VI इंग्लैंड के भी राजा बन गए। यानी अब एक ही व्यक्ति दो देशों का राजा था, लेकिन दोनों देश फिर भी अलग-अलग थे। इसके करीब 100 साल बाद बड़ा फैसला हुआ। 1707 में स्कॉटलैंड और इंग्लैंड की संसद ने समझौता किया। दोनों देश मिलकर ग्रेट ब्रिटेन बन गए। इसके बाद दोनों की अलग-अलग संसद नहीं रही और एक साझा संसद बनी। अलग देश बनने की मांग कब तेज हुई 20वीं सदी में स्कॉटलैंड की आजादी की मांग को राजनीतिक ताकत मिलने लगी। 1934 में स्कॉटिश नेशनल पार्टी (NSP) बनी, जिसका मकसद स्कॉटलैंड को अलग देश बनाना था। इसके बाद यह मुद्दा धीरे-धीरे मजबूत होता गया। 1999 में स्कॉटलैंड को अपनी संसद और सरकार वापस मिली। इससे स्कॉटलैंड को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे कई मामलों में खुद फैसले लेने का अधिकार मिला, लेकिन रक्षा और विदेश नीति जैसे बड़े मुद्दे अब भी ब्रिटेन की केंद्र सरकार के पास रहे।
पंजाबी सिंगर के घर ताबड़तोड़ फायरिंग:7-8 राउंड फायर किए, गेट पर लगीं गोलियां; सिद्धू को जान से मारने की मिली थी धमकी

बरनाला के गांव फरवाही में पंजाबी सिंगर गुलाब सिद्धू के पैतृक घर पर शनिवार-रविवार की दरमियानी रात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। घटना रात करीब 1:30 से 2 बजे के बीच हुई। हमलावरों ने घर पर करीब 7 से 8 राउंड फायर किए और मौके से फरार हो गए। गोलीबारी में किसी को चोट नहीं आई। हालांकि, गोलियां घर के गेट पर लगी हैं। वारदात के समय सिंगर गुलाब सिद्धू घर पर मौजूद नहीं थे। परिवार के मुताबिक, वह इन दिनों म्यूजिकल शो और प्रोग्राम के सिलसिले में विदेश गए हुए हैं। गौरतलब है कि कुछ समय पहले गुलाब सिद्धू को कुछ लोगों ने फिरौती और जान से मारने की धमकियां भी दी थीं। ऐसे में पुलिस इस फायरिंग को पुरानी धमकियों और गैंगस्टर्स से जोड़कर भी देख रही है।। मामले की जांच कर रही पुलिस घटना की सूचना मिलते ही थाना सदर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। पुलिस अधिकारियों ने फायरिंग की पुष्टि की और बताया कि फिलहाल मौके से कोई साफ सीसीटीवी फुटेज नहीं मिली है। हालांकि, आसपास के रास्तों और गांव के मुख्य मार्गों पर लगे कैमरों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि मामले की हर पहलू से गहराई से जांच की जा रही है और फॉरेंसिक सबूत जुटाकर अज्ञात हमलावरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खबर को हम अपडेट कर रहे हैं…
आतंकी लादेन की हिट लिस्ट में भारत भी था:CIA के खुफिया दस्तावेज में खुलासा; 9/11 से पहले कई देशों पर हमले की तैयारी थी

आतंकी संगठन अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन 9/11 हमले से पहले भारत में भी आतंकी हमला करना चाहता था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की ओर से जारी एक दस्तावेज में इसका खुलासा हुआ है। 28 अगस्त 1998 की इस रिपोर्ट में भारत समेत कई देशों को संभावित हमलों के लिए निशाना बनाए जाने की बात कही गई थी। CIA ने 9/11 हमले की 25वीं बरसी के मौके पर शुक्रवार को बिन लादेन से जुड़े 70 से ज्यादा राष्ट्रपति स्तरीय खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए। इनमें 100 से ज्यादा पन्नों की सामग्री शामिल है। भारत समेत 8 देशों पर हमले करना चाहता था लादेन CIA की रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन कई देशों में हमले करना चाहता था। इनमें भारत, पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन और युगांडा शामिल थे। नाइजीरिया का भी संभावित देश के तौर पर जिक्र किया गया था। हालांकि CIA के दस्तावेजों में इसकी जानकारी नहीं है कि लादेन भारत के किस शहर, इमारत या संस्थान को निशाना बनाना था, इसका कोई जिक्र नहीं है। हमले की तारीख या किसी खास ऑपरेशन की योजना भी दस्तावेज में नहीं बताई गई है। रिपोर्ट का टाइटल ‘बिन लादेन का आतंकी नेटवर्क अब भी खतरा’ था। दस्तावेज के कुछ हिस्से काले कर दिए गए हैं और इसमें खुफिया जानकारी के स्रोत का खुलासा नहीं किया गया है। 60 देशों में नेटवर्क का इस्तेमाल करने की तैयारी रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन कम से कम 60 देशों में मौजूद लोगों और सहयोगी आतंकी संगठनों के नेटवर्क का इस्तेमाल हमले कराने के लिए कर सकता था। CIA ने आकलन किया था कि अफगानिस्तान में अमेरिकी हमलों के बावजूद बिन लादेन और दूसरे आतंकी नेताओं का संचार नेटवर्क काम कर रहा था। अल-कायदा ने कुछ प्रशिक्षण शिविरों में गतिविधियां दोबारा शुरू कर दी थीं, जबकि कुछ शिविरों को दूसरी जगह ले जाया जा रहा था। अमेरिका और ब्रिटेन पर भी हमले की तैयारी दस्तावेज में कहा गया था कि बिन लादेन अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ भी नए हमलों की तैयारी कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में अल-कायदा के ठिकानों पर अमेरिकी मिसाइल हमलों से कुछ घंटे पहले बिन लादेन की ओर से आगे के हमलों की योजना बनाए जाने की जानकारी थी। 1998 से 2001 तक अमेरिका को मिलती रहीं चेतावनियां CIA की ओर से जारी दस्तावेजों का यह पूरा संग्रह 1998 से 2001 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपतियों को दी गई खुफिया जानकारियों से जुड़ा है। इसमें बिल क्लिंटन के कार्यकाल से लेकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के राष्ट्रपति बनने के शुरुआती दौर तक की रिपोर्ट शामिल हैं। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी 9/11 से पहले कई बार बिन लादेन और अल-कायदा से जुड़े संभावित आतंकी हमलों को लेकर चेतावनी दे चुकी थी। 11 सितंबर 2001 को हुआ था 9/11 हमला 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था। दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराए। दोनों इमारतें पूरी तरह ढह गईं। तीसरा विमान अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन से टकराया। चौथा विमान पेंसिल्वेनिया के एक खेत में गिर गया। माना जाता है कि इसे व्हाइट हाउस या अमेरिकी संसद की ओर ले जाया जा रहा था, लेकिन यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं का विरोध किया था। 9/11 हमले में करीब 3 हजार लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान शुरू किया और अफगानिस्तान में अल-कायदा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की।
आतंकी लादेन की हिट लिस्ट में भारत भी था:CIA के खुफिया दस्तावेज में खुलासा; 9/11 से पहले कई देशों पर हमले की तैयारी थी

आतंकी संगठन अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन 9/11 हमले से पहले भारत में भी आतंकी हमला करना चाहता था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की ओर से जारी एक दस्तावेज में इसका खुलासा हुआ है। 28 अगस्त 1998 की इस रिपोर्ट में भारत समेत कई देशों को संभावित हमलों के लिए निशाना बनाए जाने की बात कही गई थी। CIA ने 9/11 हमले की 25वीं बरसी के मौके पर शुक्रवार को बिन लादेन से जुड़े 70 से ज्यादा खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए। इनमें 100 से ज्यादा पन्नों की सामग्री शामिल है। भारत समेत 8 देशों पर हमले करना चाहता था लादेन CIA की रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन कई देशों में हमले करना चाहता था। इनमें भारत, पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन और युगांडा शामिल थे। नाइजीरिया का भी संभावित देश के तौर पर जिक्र किया गया था। हालांकि CIA के दस्तावेजों में इसकी जानकारी नहीं है कि लादेन भारत के किस शहर, इमारत या संस्थान को निशाना बनाना था, इसका कोई जिक्र नहीं है। हमले की तारीख या किसी खास ऑपरेशन की योजना भी दस्तावेज में नहीं बताई गई है। रिपोर्ट का टाइटल ‘बिन लादेन का आतंकी नेटवर्क अब भी खतरा’ था। दस्तावेज के कुछ हिस्से काले कर दिए गए हैं और इसमें खुफिया जानकारी के स्रोत का खुलासा नहीं किया गया है। 60 देशों में नेटवर्क का इस्तेमाल करने की तैयारी रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन कम से कम 60 देशों में मौजूद लोगों और सहयोगी आतंकी संगठनों के नेटवर्क का इस्तेमाल हमले कराने के लिए कर सकता था। CIA ने आकलन किया था कि अफगानिस्तान में अमेरिकी हमलों के बावजूद बिन लादेन और दूसरे आतंकी नेताओं का संचार नेटवर्क काम कर रहा था। अल-कायदा ने कुछ प्रशिक्षण शिविरों में गतिविधियां दोबारा शुरू कर दी थीं, जबकि कुछ शिविरों को दूसरी जगह ले जाया जा रहा था। अमेरिका और ब्रिटेन पर भी हमले की तैयारी दस्तावेज में कहा गया था कि बिन लादेन अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ भी नए हमलों की तैयारी कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में अल-कायदा के ठिकानों पर अमेरिकी मिसाइल हमलों से कुछ घंटे पहले बिन लादेन की ओर से आगे के हमलों की योजना बनाए जाने की जानकारी थी। 1998 से 2001 तक अमेरिका को मिलती रहीं चेतावनियां CIA की ओर से जारी दस्तावेजों का यह पूरा संग्रह 1998 से 2001 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपतियों को दी गई खुफिया जानकारियों से जुड़ा है। इसमें बिल क्लिंटन के कार्यकाल से लेकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के राष्ट्रपति बनने के शुरुआती दौर तक की रिपोर्ट शामिल हैं। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी 9/11 से पहले कई बार बिन लादेन और अल-कायदा से जुड़े संभावित आतंकी हमलों को लेकर चेतावनी दे चुकी थी। 11 सितंबर 2001 को हुआ था 9/11 हमला 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था। दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराए। दोनों इमारतें पूरी तरह ढह गईं। तीसरा विमान अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन से टकराया। चौथा विमान पेंसिल्वेनिया के एक खेत में गिर गया। माना जाता है कि इसे व्हाइट हाउस या अमेरिकी संसद की ओर ले जाया जा रहा था, लेकिन यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं का विरोध किया था। 9/11 हमले में करीब 3 हजार लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान शुरू किया और अफगानिस्तान में अल-कायदा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की।
‘बिरजू को क्यों मारा?’ पर बोले रसिका-मोहित:‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ जैसी ‘मिर्जापुर मूवी की बड़ी मिस्ट्री

मिर्जापुर’ की दुनिया किरदारों, हिंसा और दमदार डायलॉग्स के साथ मीम्स के लिए भी मशहूर है। वेब सीरीज के पुराने मीम्स हों या फिल्म के नए किरदार बिरजू लोहार और उनके दर्दभरे सीन, सोशल मीडिया पर ‘मिर्जापुर’ का जलवा है। फिल्म में बीना त्रिपाठी का किरदार निभाने वाली रसिका दुग्गल और बिरजू लोहार बने मोहित मलिक ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में वायरल मीम्स, अपने किरदारों पर बने मजेदार मीम्स और सोशल मीडिया के रिएक्शन पर बात की। रसिका ने अपने सबसे पुराने और पसंदीदा ‘मिर्जापुर’ मीम का किस्सा सुनाया, वहीं मोहित ने बिरजू के दर्द पर बने मीम्स को ‘रिलेटेबल’ बताया। सवाल: ‘मिर्जापुर’ और मीम्स का रिश्ता पुराना है। पहली बार अपने किरदारों पर मीम्स बनते देखे तो कैसा लगा? जवाब/रसिका दुग्गल: मेरे लिए यह बहुत खास अनुभव रहा है। जो मीम सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ, वह 2018 का है और ‘मिर्जापुर’ में मेरा पहला शॉट था। उस दिन हम वह सीन शूट कर रहे थे। मैं बिस्तर से उठती हूं और लाइन बोलती हूं- ‘हर बार गर्म करके छोड़ देते हैं ठंडा।’ जब मैंने वह शॉट मॉनिटर पर देखा तो मेरे एक तरफ के बाल सचमुच खड़े हो गए थे। मैंने गुरु से कहा कि मुझे पता है कि सीन थोड़ा अस्त-व्यस्त दिखना चाहिए, लेकिन यह ज्यादा अजीब लग रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे सिर पर कुछ उग आया हो। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दो-तीन सेकेंड का शॉट है, ज्यादा देर नहीं रहेगा। मैंने कहा ठीक है। बाद में वही शॉट मीम बन गया। उस समय मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। उस दौर में ‘मिर्जापुर’ के साथ मीम कल्चर भी तेजी से बढ़ रहा था। मुझे लगता है कि किसी अभिनेता का काम पॉपुलर कल्चर का हिस्सा बन जाए तो यह बहुत अच्छी बात है। सवाल: अगर बीना, बिरजू से वही लाइन कहतीं- ‘हर बार गर्म करके छोड़ देते हैं ठंडा’, तो बिरजू का रिएक्शन क्या होता? जवाब/मोहित मलिक: ऐसा हो ही नहीं सकता। रसिका दुग्गल: क्योंकि यह हमारा रिश्ता नहीं है। वह लाइन अखंडा और बीना के रिश्ते की है। बिरजू और बीना के रिश्ते में ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता। मोहित मलिक: यहां प्यार अलग तरह का है। यह भक्ति जैसा प्यार है। बिरजू और बिना के बीच जो रिश्ता है, उसमें वह लाइन फिट ही नहीं होती। सवाल: ‘हमने मजबूरी में किया था, अब मजा आने लगा है’ मीम भी वायरल हुआ। इसके बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब/रसिका दुग्गल: यह मेरा फेवरेट है। मुझे यह मीम बहुत पसंद है। सवाल: अगर इसी लाइन को बिना त्रिपाठी के अंदाज में बोलना हो तो कैसे बोलेंगी? जवाब/रसिका दुग्गल: बीना के अंदाज में मैं कहूंगी- ‘हमने मजबूरी में किया था, अब मजा आने लगा है।’ सवाल: कालीन भैया पूरी जिंदगी ‘कंट्रोल’ की बात करते हैं। क्या बीना ने कभी कालीन भैया को कंट्रोल किया है? जवाब/ रसिका दुग्गल: बहुत ज्यादा। कालीन भैया पूरी तरह बिना के कंट्रोल में हैं। कौन नहीं है? अगर आज की Gen-Z भाषा में कहें तो बिना के सामने कालीन भैया ‘पुकी’ बन जाते हैं। ‘पुकी’ का मतलब है कि जो व्यक्ति बाहर से बहुत पावरफुल और दबंग है, लेकिन किसी खास इंसान के सामने बिल्कुल नरम और थोड़ा सहमा हुआ हो जाए। पूरी दुनिया कालीन भैया से डरती है, लेकिन कालीन भैया बिना से डरते हैं। मोहित मलिक: यही कालीन भैया के किरदार की खूबसूरती है। जिस तरह से उन्होंने इस किरदार को निभाया है, उसमें यह चीज अच्छी तरह दिखाई देती है। रसिका दुग्गल: बाहर वह कालीन भैया हैं, लेकिन घर के अंदर बीना के पति हैं। वहां पूरा समीकरण बदल जाता है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ में सबसे ज्यादा ‘जलवा’ किसका है? जवाब/ मोहित मलिक: मुन्ना का। यह उसी की लाइन है और मुझे लगता है कि ‘जलवा’ अब उसका ट्रेडमार्क बनना चाहिए। रसिका दुग्गल: लेकिन मैं कहूंगी कि त्रिपाठियों का है। बीना का भी है और अखंडा का भी। सवाल: बिरजू लोहार के किरदार पर सोशल मीडिया पर खूब मीम्स बन रहे हैं। क्या आपको अंदाजा था कि यह किरदार इस तरह वायरल होगा? जवाब/ मोहित मलिक: नहीं, बिल्कुल नहीं। कोशिश पूरी की थी। मुझे पता था कि इतने बड़े किरदारों और एक्टर्स के बीच मेरा स्क्रीन टाइम काफी कम है। इसलिए जरूरी था कि जब भी मैं स्क्रीन पर आऊं, तो बिरजू की पांच साल की जर्नी दिखाई दे। मुझे लगता है कि दर्शक भावनाओं से जल्दी जुड़ते हैं। मैंने पूरी मेहनत की, अपनी जान लगा दी। लेकिन आखिर में यह उस मोमेंट का खेल होता है कि उस समय जो चीजें सही बैठती हैं, वह मोमेंट बन जाता है। फिल्म में भी ऐसा ही हुआ। जैसे कोई माला पिरोता है, वैसे सारे मोमेंट्स एक-दूसरे से जुड़ते गए और खूबसूरत माला बन गई। शायद इसलिए लोगों को बिरजू का किरदार इतना पसंद आया। सवाल: बिरजू के दर्द और आखिरी सीन पर बने मीम्स देखकर कैसा लगा? जवाब/ मोहित मलिक: मुझे लगता है कि ये मीम्स लोगों को इसलिए इतने रिलेटेबल लगे क्योंकि हर किसी का दिल कभी न कभी टूटा है। हर कोई किसी न किसी तरह का दिलजला है। मैंने एक मीम देखा था, जिसमें बिरजू के साथ जो हुआ, उसे मजेदार तरीके से दिखाया गया था। वह काफी वायरल हुआ। मुझे लगा कि लोगों ने उस दर्द को अपने तरीके से पकड़ लिया है। क्योंकि यह सिर्फ बिरजू की कहानी नहीं रह गई थी। लोगों ने उसमें अपना दर्द देख लिया। सवाल: बीना और बिरजू के सीन की लाइन ‘लव ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है’ मीम और पोएट्री का हिस्सा बन गई। क्या सेट पर आपको अंदाजा था कि यह लाइन इतनी बड़ी हो जाएगी? जवाब/ रसिका दुग्गल: नहीं, बिल्कुल नहीं। उस समय हम सिर्फ यही सोच रहे थे कि हमारी परफॉर्मेंस अच्छी हो जाए और सीन ठीक से शूट हो जाए। शूटिंग के दौरान ही सेट पर लोग इस लाइन को अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल करके मजाक करने लगे थे। कोई कहता था- ‘लव ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है।’ फिर लोग छोटी-छोटी चीजों पर भी कहते थे कि सीन खराब हो गया तो सीन ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है। उस वक्त वह सेट







