शादी में गोआ पहुंचे साउथ और बॉलीवुड स्टार्स:अनिल कपूर-जैकी श्रॉफ, चिरंजीवी और नागार्जुन ट्रेडिशनल लुक में नजर आए; तृषा कृष्णन भी शामिल हुईं

अभिनेत्री और राजनेता खुशबू सुंदर और फिल्ममेकर सुंदर सी की बड़ी बेटी अवंतिका सुंदर शादी के बंधन में बंध गई हैं। उन्होंने 25 जून को गोवा के एक लग्जरी रिसॉर्ट में श्रवण श्रीनिवासन के साथ सात फेरे लिए। इस शादी में साउथ फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार शामिल हुए। सोशल मीडिया पर शादी के कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें चिरंजीवी, नागार्जुन, अनिल कपूर, वेंकटेश और जैकी श्रॉफ जैसे एक्टर्स एक साथ नजर आ रहे हैं। एक्ट्रेस तृषा कृष्णन भी शादी में शामिल हुईं। खुशबू सुंदर ने इस शादी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को भी न्योता भेजा था। देखें शादी की तस्वीरें.… चिरंजीवी, जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर का गेट-टुगेदर इस शादी के जरिए सिनेमा जगत के दिग्गज कलाकारों का एक बड़ा गेट-टुगेदर देखने को मिला। एक वीडियो में चिरंजीवी और जैकी श्रॉफ आपस में बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वहीं एक अन्य क्लिप में चिरंजीवी, जैकी श्रॉफ, वेंकटेश, अनिल कपूर और नागार्जुन एक साथ बैठकर हंसते-मजाक करते और एक-दूसरे की तस्वीरें खींचते हुए दिखे। एक्ट्रेस तृषा कृष्णन भी शादी में शामिल हुईं। वे गोल्डन साड़ी और डायमंड नेकलेस में पहली रो में बैठकर चिरंजीवी और उनकी पत्नी से बात करती नजर आईं। वाइट और गोल्ड रही शादी की थीम शादी के फंक्शंस के लिए एक खास ड्रेस कोड रखा गया था। समारोह में पहुंचे ज्यादातर मेहमान पारंपरिक दक्षिण भारतीय परिधानों जैसे वेष्टी और मुंडू में नजर आए। शादी की थीम वाइट और गोल्ड कलर पर आधारित थी, जिससे पूरा माहौल पारंपरिक लग रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सभी स्टार्स इसी कॉम्बिनेशन के कपड़ों में दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री विजय को दिया था पर्सनल न्योता खुशबू सुंदर ने इस शादी के लिए कई बड़ी राजनीतिक हस्तियों को भी आमंत्रित किया था। इस महीने की शुरुआत में, 3 जून को खुशबू सुंदर अपने परिवार के साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के आवास पर गई थीं। उन्होंने विजय को शादी का पर्सनल कार्ड दिया था। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए खुशबू ने विजय को अपना भाई बताया था और लिखा था कि उनके व्यस्त शेड्यूल के बावजूद वे बहुत गर्मजोशी से मिले। हालांकि, मुख्यमंत्री इस शादी समारोह में शामिल नहीं हो सके। प्रधानमंत्री मोदी से भी की थी मुलाकात मुख्यमंत्री विजय के अलावा खुशबू सुंदर और उनके पति सुंदर सी ने पिछले महीने नई दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को शादी का निमंत्रण पत्र सौंपा था। खुशबू सुंदर ने इस मुलाकात की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं और नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया था।
वर्ल्ड अपडेट्स:यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं

यूरोपीय संघ (EU) के जलवायु मंत्रियों की बैठक में गुरुवार को स्वीडन की जलवायु मंत्री रोमिना पूरमोख्तारी अपने 3 महीने के बेटे एडम को लेकर पहुंचीं। EU परिषद के अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार किसी मंत्री स्तरीय बैठक में एक शिशु शामिल हुआ है। 30 साल की रोमिना ने कहा कि वह यह दिखाना चाहती थीं कि महिलाओं को मां बनने और करियर में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा तभी संभव है, जब परिवार और सरकारी नीतियों से पूरा सहयोग मिले। स्वीडन में दुनिया की सबसे उदार पेरेंटल लीव नीतियों में से एक है। वहां माता-पिता को कुल 16 महीने का सवेतन अवकाश मिलता है। इसमें से 90 दिन मां और 90 दिन पिता के लिए तय होते हैं।
वर्ल्ड अपडेट्स:यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं

यूरोपीय संघ (EU) के जलवायु मंत्रियों की बैठक में गुरुवार को स्वीडन की जलवायु मंत्री रोमिना पूरमोख्तारी अपने 3 महीने के बेटे एडम को लेकर पहुंचीं। EU परिषद के अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार किसी मंत्री स्तरीय बैठक में एक शिशु शामिल हुआ है। 30 साल की रोमिना ने कहा कि वह यह दिखाना चाहती थीं कि महिलाओं को मां बनने और करियर में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा तभी संभव है, जब परिवार और सरकारी नीतियों से पूरा सहयोग मिले। स्वीडन में दुनिया की सबसे उदार पेरेंटल लीव नीतियों में से एक है। वहां माता-पिता को कुल 16 महीने का सवेतन अवकाश मिलता है। इसमें से 90 दिन मां और 90 दिन पिता के लिए तय होते हैं।
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है।
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है। ये खबर भी पढ़ें… सोमवार को गिरावट के साथ खुल सकता है भारतीय बाजार: गिफ्टी निफ्टी में 150 अंकों की कमजोरी; 8% टूटा दक्षिण कोरिया का कोस्पी मुहर्रम की छुट्टी के कारण आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। लेकिन वैश्विक बाजारों में मंदी के कारण सोमवार को ये गिरावट के साथ खुल सकता है। आज दक्षिण कोरिया का बाजार कोस्पी 8% नीचे हैं और गिफ्ट निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा टूट गया है। पूरी खबर पढ़ें…
जैवलिन थ्रो छोड़ रग्बी में चमकीं अमनदीप कौर:ऑक्शन में 11 घंटे नहीं चुनी गईं, फिर बनीं बेस्ट प्लेयर; लक्ष्य भारत को गोल्ड जिताना

पंजाब की 24 वर्षीय अमनदीप कौर कभी जैवलिन थ्रो में करियर बनाने के लिए मेहनत करती थीं, लेकिन इस खिलाड़ी ने हाल ही में आयोजित रग्बी प्रीमियर लीग 2026 में ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ का खिताब जीत लिया है। हालांकि, ऐसा करना आसान नहीं था। अप्रैल में इस लीग के पहले सीजन की नीलामी के दिन अमनदीप को सुबह 9 बजे से रात 8 बजे जब किसी टीम ने नहीं चुना, तो वह काफी निराश हो गईं। लेकिन तभी रात करीब 8 बजे उनकी एक दोस्त ने इंस्टाग्राम पर देखकर खुशखबरी दी कि उन्हें ‘चेन्नई बुल्स’ ने खरीद लिया है। 1.6 लाख रुपए की बोली के साथ वह नीलामी में संयुक्त रूप से तीसरी सबसे महंगी खिलाड़ी बनीं। उनका यह चयन सही साबित हुआ, क्योंकि उनके शानदार खेल की बदौलत चेन्नई बुल्स लीग चरण में शीर्ष पर रही और टूर्नामेंट की उपविजेता बनी। अमनदीप का रग्बी तक पहुंचने का सफर भी आसान नहीं था। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब की श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी से फिजिकल एजुकेशन में ग्रेजुएशन करने वाली अमनदीप शुरुआत में एक जैवलिन थ्रोअर थीं। लेकिन आर्थिक चुनौतियों और अपने कोच के सेंटर बदल जाने के कारण उन्हें ट्रेनिंग में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसी दौरान न्यूजीलैंड की स्टार प्लेयर पोर्टिया वुडमैन की ताकत और खेल में दिखने वाली आक्रामकता ने उन्हें रग्बी की ओर खींचा। अमनदीप ने रग्बी के मैदान को अपना गुस्सा और ऊर्जा निकालने का जरिया माना। हालांकि, परिवार को समझाना मुश्किल था। उनके भाई, जो खुद एक पहलवान हैं, चाहते थे कि अमनदीप किसी टीम गेम की बजाय व्यक्तिगत खेल पर ध्यान दें। रग्बी खेलते हुए अमनदीप को काफी चोटें आईं। कभी सिर में टांके लगे तो कभी हाथ में फ्रैक्चर हुआ। उन्होंने अपनी चोटें और सर्जरी की बात परिवार से छिपाई, क्योंकि उन्हें डर था कि घरवाले खेलने से रोक देंगे। लेकिन अब परिवार का नजरिया पूरी तरह से बदल चुका है। अमनदीप के हौसले भी बुलंद हैं और उनका अगला लक्ष्य अब आगामी एशियन गेम्स में भारत को मेडल जिताना है। जिनके वीडियो देखकर खेल सीखा, उन्हीं की कप्तानी में खेलीं 2025 में अमनदीप को पहली बार भारतीय टीम के नेशनल कैंप में बुलाया गया। जब चीन और श्रीलंका दौरे के लिए अंतिम 14 खिलाड़ियों का चयन होना था, तो मीटिंग में सबसे पहला नाम अमनदीप का ही पुकारा गया। चीन में एशियन रग्बी सेवन सीरीज में उन्होंने पहली बार भारत की जर्सी पहनी। इस दौरान उन्हें अपनी आदर्श और भारतीय कप्तान शिखा यादव के साथ खेलने का मौका भी मिला, जिनके वीडियो देखकर वह खेल सीखा करती थीं।
सुशांत केस से ट्रॉमा से रिकवर नहीं हुईं रिया चक्रवर्ती:कहा- ये ट्रॉमा ऐसी चीज है, जिससे उबर नहीं सकते; 27 दिन जेल में रही थीं एक्ट्रेस

रिया चक्रवर्ती ने हाल ही में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद हुए ट्रॉमा पर बात की है। उन्होंने बताया है कि वो पूरी तरह इससे रिकवर नहीं कर सकी हैं। इसके अलावा एक्ट्रेस ने अपनी वायरल टी-शर्ट पर भी बात की है। नेहा धूपिया और अंगद बेदी से बातचीत के दौरान रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत और ट्रॉमा पर बात की है। नेहा धूपिया ने रिया से पूछा कि एक इंटरव्यू में आपकी मां ने सवाल किया था कि मेरी बेटी इससे कैसे हील करेगी, क्या आपने इससे पूरी तरह रिकवर कर लिया है? तो जवाब में एक्ट्रेस ने कहा, ‘यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिससे आप कभी पूरी तरह उबर सकें। यह ट्रॉमा है। अगर दिमाग में न भी रहे, तो भी इसका असर शरीर में बना रहता है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘इसमें PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) जैसी स्थिति हो सकती है। आप थेरेपी लेते हैं और धीरे-धीरे इससे निपटने की कोशिश करते हैं। क्योंकि हमारी चीज पब्लिक में है, तो लोग इसके बारे में बात करते हैं, सोचते हैं।’ सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस के समय रिया चक्रवर्ती द्वारा एक टी-शर्ट भी काफी सुर्खियों में रही थी, जिसमें पैट्रियारकी खत्म करने से जुड़ी एक लाइन लिखी गई थी। अब रिया ने वो टी-शर्ट पहनने के फैसले पर कहा है, ‘वो टी-शर्ट मैंने इसलिए पहनी, क्योंकि वो मेरे पहले अध्याय का हिस्सा थी। जब मैं अरेस्ट हुई, तब मैंने वो टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें लिखा था,”Roses are red, violets are blue, let’s smash the patriarchy, me and you.”, उस टी-शर्ट ने मेरे लिए बात की, जब कोई भी मेरी तरफ से बात नहीं कर रहा था। मैंने कहा था कि ऐसी और टी-शर्ट बनाओ, जो उन लोगों की मदद कर सके, जिनके लिए कोई नहीं बोलता।’ रिया ने कहा कि यही वजह है कि उन्होंने भाई शौविक के साथ क्लोदिंग ब्रांड (चैप्टर-2) शुरू किया, जिसमें वो टी-शर्ट बना रही हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद 27 दिन जेल में रहीं सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उनके पिता ने रिया चक्रवर्ती पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा ड्रग्स से जुड़ी बात सामने आने के बाद नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने भी एक्ट्रेस और उनके भाई शौविक को जांच के दायरे में लिया था। केस के चलते रिया चक्रवर्ती 27 दिनों तक जेल में रही थीं। CBI ने 22 मार्च 2025 को अपनी क्लोजर रिपोर्ट में रिया और उनके परिवार को क्लीन चिट दे दी।
सऊदी अरब में भारतीय भी खरीद सकेंगे अपना घर:ऑयल इकोनॉमी पर निर्भरता घटाने का बड़ा फैसला; 24 लाख प्रवासियों को सीधा फायदा

सऊदी अरब ने अपने रियल एस्टेट सेक्टर को विदेशियों के लिए खोल दिया है। ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ नाम के नए डिजिटल पोर्टल के जरिए अब विदेशी नागरिक, कंपनियां और निवेशक वहां प्रॉपर्टी खरीदने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह कदम जनवरी, 2026 में लागू हुए विदेशी रियल एस्टेट स्वामित्व कानून के तहत उठाया गया है। इस बदलाव से सबसे अधिक फायदा करीब 24 लाख उन भारतीयों को हो सकता है जो सऊदी अरब में रहते और काम करते हैं। अब तक भारतीय केवल किराए पर मकान ले सकते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत वे वहां प्रॉपर्टी के मालिक भी बन सकते हैं। रियल एस्टेट जनरल अथॉरिटी (रेगा) ने बताया कि ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ पोर्टल पूरी तरह डिजिटल है। इसके जरिए आप अपनी पात्रता जांच सकते हैं, आवेदन कर सकते हैं, और अपने आवेदन की स्थिति भी ट्रैक कर सकते हैं। हालांकि दो पवित्र शहरों मक्का और मदीना के लिए नियम अब भी सख्त हैं। इन दोनों शहरों में प्रॉपर्टी का मालिकाना हक केवल सऊदी कंपनियों और मुस्लिम प्रवासियों/नागरिकों को ही दिया जाएगा। 6.8 लाख करोड़ रुपए का है सऊदी अरब का रियल एस्टेट मार्केट (2025)। 2034 तक करीब 13 लाख करोड़ होने का अनुमान है। जानिए नए नियमों के तहत सऊदी अरब में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए कैसे कर सकते हैं निवेश भारतीय खरीदारों के लिए कितना बड़ा मौका? रियल एस्टेट कन्सल्टेंसी फर्म एनारॉक ग्रुप के सीईओ (रिटेल) अनुज केजरीवाल ने कहा, ‘किंगडम में भारतीय प्रवासियों की बड़ी आबादी है। नए नियमों के चलते सांस्कृतिक रूप से परिचित होने और किराए की मांग अच्छी होने की वजह से खास तौर पर प्राइम और बिजनेस-लिंक्ड लोकेशंस में भारतीय खरीदारों की दिलचस्पी काफी बढ़ सकती है।’ दुबई से कितना अलग है? केजरीवाल के मुताबिक, सऊदी का बाजार नया होने के कारण कई खरीदार अब भी दुबई जैसे परखे हुए मार्केट्स को तरजीह दे सकते हैं। दुबई का बाजार पुराना और भारतीयों का जाना-पहचाना है। शुरुआत में भारतीयों की मांग थोड़ी सीमित भी रह सकती है क्योंकि नियम अभी बन रहे हैं। वैसे सऊदी में विजन 2030 के तहत बड़े शहरी और पर्यटन प्रोजेक्ट चल रहे हैं। लंबी अवधि में कैपिटल ग्रोथ की उम्मीद है। ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ पोर्टल पर क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? यह पोर्टल विदेशी खरीदारों के लिए ‘वन-स्टॉप शॉप’ है, जहां वे उपलब्ध प्रॉपर्टी और निवेश के मौके ब्राउज कर सकते हैं, अपनी पात्रता चेक कर सकते हैं, मालिकाना हक के कानूनी रास्तों की जानकारी ले सकते हैं। आवेदन करने के साथ ही स्टेटस भी लाइव ट्रैक कर सकते हैं। किन-किन शहरों में विदेशी प्रॉपर्टी कर सकते हैं? मक्का, मदीना को छोड़कर पूरे सऊदी अरब के विकसित इलाकों, नियोम, रेड सी प्रोजेक्ट, दीरिया और अल-उला जैसे गीगा-प्रोजेक्ट्स में विदेशी निवेशक प्रॉपर्टी खरीद सकेंगे। कौन खरीद सकता है? सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय और विदेश में रहने वाले एनआरआई, दोनों आवेदन कर सकते हैं। सऊदी में रहने वाले रेजिडेंसी नंबर से सीधे आवेदन कर सकेंगे, विदेश में रहने वाले एनआरआई को पहले सऊदी दूतावास से डिजिटल आईडी लेनी होगी। क्या कंपनी के जरिए निवेश कर सकते हैं? भारतीय कंपनियां ‘इन्वेस्ट सऊदी’ प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन और नेशनल यूनिफाइड नंबर लेने के बाद आवेदन कर सकती हैं। अभी निवेश करना चाहिए? इस समय अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण रियल एस्टेट मंदी से जूझ रही है। मार्च 2025 में दुबई में आवासीय बिक्री करीब 20% गिर गई थी। ऐसे में सऊदी अरब एक नया विकल्प बनकर उभर रहा है।
पेरू की पहली महिला राष्ट्रपति, 19 वर्ष में संभाली जिम्मेदारी:पढ़ाई छूटी, जेल गईं और बंकर में काटी रातें, केइको ने बिखरने नहीं दी पार्टी

पेरू में पहली बार कोई महिला राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। यहां चौथी बार चुनाव लड़ रही दक्षिणपंथी नेता केइको फुजीमोरी (51) ने जीत हासिल की है। केइको को करीब 50.1% वोट मिले, जबकि वामपंथी उम्मीदवार रोबर्टो सांचेज को 49.9% वोट मिले। केइको 28 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। वह पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की बेटी हैं। चुनावी फंडिंग मामले में केइको 2018 से 2020 तक जेल में भी रह चुकी हैं। अब उनके सामने अपराध, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से देश को संभालने की चुनौती होगी। पढ़िए केइको के जीवन से जुड़े किस्से… धमाकों के बीच भी पिता स्कूल भेजते 1990 के दशक में केइको के पिता अल्बर्टो फुजीमोरी राष्ट्रपति थे। तब पेरू उग्रवादी संगठन सेंडेरो लुमिनोसो के हमलों से दहल रहा था। उस समय राष्ट्रपति भवन भी उग्रवादियों के निशाने पर था, इसलिए बेटी केइको और उनके भाई-बहनों को सुरक्षा के लिए लंबे समय तक बंकरों में रहना पड़ता था। रात में धमाकों और हमलों की खबरें आतीं तो बच्चे डर जाते और स्कूल न जाने की जिद करते। लेकिन पिता अल्बर्टो फुजीमोरी का नियम था कि हालात जैसे भी हों, पढ़ाई नहीं रुकेगी। संकट के बीच सामान्य जीवन जीना उन्होंने यहीं सीखा। छात्रा से फर्स्ट लेडी बनीं 1994 में केइको अमेरिका की स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं। तभी उनके माता-पिता में विवाद के बाद दोनों अलग हो गए। उनकी मां सुजाना हिगुची ने अल्बर्टो के सहयोगियों पर भ्रष्टाचार व राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए। विवाद के बीच केइको को पढ़ाई छोड़कर पेरू लौटना पड़ा। महज 19 की उम्र में पिता ने सुजाना को हटाकर केइको को फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी सौंपी। तब वे दुनिया की सबसे कम उम्र की फर्स्ट लेडी में गिनी जाने लगीं। उस दौरान केइको ने राष्ट्रपति भवन के कुछ हिस्सों को अपने पसंदीदा गुलाबी रंग से सजवा दिया था। उन्हें अनुभवहीन किशोरी कहकर आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन केइको ने इसे सामान्य बात बताया। बेटियों को हिम्मत देने के लिए जेल से लिखती थीं चिट्ठी केइको की दो बेटियां हैं। 2018 में मनी लॉन्ड्रिंग व चुनावी फंडिंग मामले में केइको जेल गईं। उस दौरान वे जेल से बेटियों को चिट्ठियां लिखती थीं, जिनमें पढ़ाई पर ध्यान देने, हिम्मत बनाए रखने और परिवार का ख्याल रखने की सलाह देती थीं। ये पत्र बेटियों के साथ खुद केइको के लिए भी मुश्किल दौर में मानसिक सहारा बने। करीब 13 महीने बाद वे रिहा हुई और राजनीति में सक्रिय हुईं।
सोमवार को गिरावट के साथ खुल सकता है भारतीय बाजार:गिफ्टी निफ्टी में 150 अंकों की कमजोरी; 8% टूटा दक्षिण कोरिया का कोस्पी

मुहर्रम की छुट्टी के कारण आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। लेकिन वैश्विक बाजारों में मंदी के कारण सोमवार को ये गिरावट के साथ खुल सकता है। आज दक्षिण कोरिया का बाजार कोस्पी 8% नीचे हैं और गिफ्ट निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा टूट गया है। इससे पहले, गुरुवार को भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच मामूली बढ़त रही थी। सेंसेक्स 109 अंक (0.14%) की बढ़त के साथ 77,100 पर और निफ्टी 34 अंक (0.14%) बढ़कर 24,056 पर बंद हुआ। सेंसेक्स अपने डे हाई से 703 अंक टूट गया था। विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में ₹2 हजार करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे 25 जून को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने भारतीय बाजारों से ₹384 करोड़ की नेट खरीदारी की। वहीं डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने भी ₹5,748 करोड़ की नेट खरीदारी की है। इस साल के कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो FIIs अब तक लगभग ₹3.46 लाख करोड़ के नेट सेलर्स रहे हैं, जबकि DIIs ने ₹4.57 लाख करोड़ की खरीदारी की है। नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। एशियाई बाजारों में कोस्पी 8% टूटा, निक्केई में भी 5% की गिरावट AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च को लेकर बढ़ी चिंताओं के कारण ग्लोबल मार्केट्स में टेक शेयरों में बिकवाली आई है। दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स कोस्पी 8% तक टूट गया। इसके अलावा जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 3% गिरा है। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग भी नीचे हैं। अमेरिकी बाजारों में मिला जुला कारोबार, एपल का शेयर 6% टूटा डाउ जोंस में भले ही 0.14% की बढ़त रही, लेकिन टेक-हैवी नैस्डैक कंपोजिट 0.46% गिरकर बंद हुआ। टेक कंपनी एनवीडिया, माइक्रोसॉफ्ट और अल्फाबेट जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर नीचे आ गए। सबसे ज्यादा नुकसान एपल को हुआ, जिसके शेयर 6% टूट गए। कंपनी ने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान किया है, ताकि मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई की जा सके। इस गिरावट से एपल की मार्केट वैल्यू करीब 250 बिलियन डॉलर घट गई। अब इसका मार्केट कैप 4.04 लाख करोड़ डॉलर रह गया है। हालांकि, सेमीकंडक्टर सेक्टर से कुछ अच्छे संकेत भी मिले। माइक्रोन टेक्नोलॉजी के तिमाही नतीजे अनुमान से बेहतर रहने के बाद उसका शेयर 16% चढ़ गया। इसके साथ ही सैनडिस्क में 22% की तेजी आई। क्वालकॉम, वेस्टर्न डिजिटल और सीगेट जैसी कंपनियां भी बढ़त रही। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई घटेगी सप्लाई से जुड़ी चिंताएं दूर होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से टैंकरों की आवाजाही फिर से सामान्य होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है। ब्रेंट क्रूड 2% गिरकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि WTI क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। गुरुवार को ओमान के पास एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले के बाद आई मामूली तेजी के बावजूद कच्चे तेल के दामों में गिरावट रही हैं। कच्चे तेल की कीमतों में आ रही इस कमी से भारत जैसे बड़ी मात्रा में तेल आयात करने वाले देश को महंगाई कम करने में मदद मिलेगी। नॉलेज पार्ट :





