DMK ने भारत ब्लॉक बैठक का बहिष्कार किया: कांग्रेस के खिलाफ DMK के ‘विश्वासघात’ के दावे पर विपक्षी एकता में दरार

तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस द्वारा “विश्वासघात” का हवाला देते हुए द्रमुक द्वारा एक प्रमुख विपक्षी बैठक से हटने का निर्णय लेने के बाद भारतीय गुट को अपनी एकता पर नए सिरे से सवालों का सामना करना पड़ रहा है। यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित अन्य गठबंधन सहयोगियों के भीतर कथित आंतरिक तनाव के बीच आया है, जिससे विपक्षी मोर्चे के भीतर एकजुटता को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का सुझाव है कि ये बढ़ती दरारें राष्ट्रीय राजनीति को नया रूप दे सकती हैं और संभावित रूप से आगामी संसदीय और विधायी लड़ाई में एनडीए को फायदा दे सकती हैं। n18oc_politicsn18oc_plain-speakn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube
गाय बनाम भैंस घी: घर पर घी बनाने का रहस्य… जानिए गाय और भैंस में से किस दूध से निकलेगा डबल घी

4 जून 2026 को 19:01 IST पर अपडेट किया गया गाय बनाम भैंस का घी: मलाई से चिप्सदार और दानेदार घी बनाना एक कला है, लेकिन अक्सर लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि गाय और भैंस के घर से किस दूध से ज्यादा घी निकलता है। आइए जानते हैं। अनुसरण करना : अगर आप घर पर अधिक मात्रा में घी बनाना चाहते हैं, तो बफ़ेलो का दूध सबसे बेहतरीन विकल्प है। भैंस के दूध में फैट की मात्रा लगभग 7% से 8% होती है, जो कि गाय के दूध में (3% से 4%) की मात्रा लगभग होती है। छवि: मेटा एआई गाय के दूध का घी पतले पीले रंग का होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, के2, और बीटा-कैरोटीन पाया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत है। छवि: मेटा एआई यह घी बेहद प्रभावकारी और आसानी से पचने योग्य होता है। गाय के घी में मौजूद शॉर्ट-चेन साइबेरियाई एसिड्स आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं। यह हृदय रोग और वजन कम करने वालों के लिए बेहतर है। छवि: मेटा एआई दूध को हमेशा के लिए लंबे समय तक स्टॉक में रखा गया। बाद में दूध को पूरी तरह से ठंडा होने दें और फिर 8-10 घंटे के लिए फ़िरोज़ में रख दें। इससे दूध के ऊपर एक बेहद मोटा और मलाईदार परत जम जाएगा छवि: मेटा एआई मलाई से मक्खन के तेल का उपयोग हमेशा ठंडा पानी या बर्फ के मिश्रण के रूप में करें। यह मलाई में मौजूद फैट को तेजी से बांधता है, जिससे तुरंत मक्खन अलग हो जाता है और मट्ठा नीचे रह जाता है। छवि: मेटा एआई मक्खन को हमेशा भारी चॉकलेट के पोर में ही टुकड़े टुकड़े कर दिया जाता है। तेज़ आँकड़े पर कुकिंग से नीचे मलाई जल दिया जाता है और घी की मात्रा कम हो जाती है। छवि: मेटा एआई मक्खन को हमेशा भारी चॉकलेट के पोर में ही टुकड़े टुकड़े कर दिया जाता है। तेज़ आँकड़े पर कुकिंग से नीचे मलाई जल दिया जाता है और घी की मात्रा कम हो जाती है। छवि: मेटा एआई द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 4 जून 2026 19:01 IST पर
कनाडा में स्विमिंग पूल में डूबने से युवक की मौत:कुरुक्षेत्र से 2 साल पहले गया, ₹14 लाख में डेडबॉडी इंडिया पहुंची; दिसंबर में होनी थी शादी

हरियाणा के कुरुक्षेत्र के युवक की कनाडा में स्वीमिंग पूल में डूबने से मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ, जब युवक नहाने के लिए स्वीमिंग में उतरा, लेकिन पैर फिसलने से वह गहरे पानी में चला गया। जब तक उसे बाहर निकाला जाता, वह बेसुध हो चुका था। साथियों ने उसे तुरंत ही हॉस्पिटल में एडमिट कराया, जहां वह करीब तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। इसकी सूचना मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक युवक की पहचान मंदीप सिंह (21) निवासी लाडवा के रूप में हुई। मंदीप सिंह करीब दो साल पहले स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। वह ब्रैम्पटन शहर में रहकर बच्चों की हेल्थ केयर से जुड़े फील्ड में काम कर रहा था। परिवार ने कनाडा से बॉडी पहुंचने के बाद आज उसका दाह संस्कार कर दिया। परिवार के मुताबिक, मंदीप को इसी साल दिसंबर में आना था। उसकी सगाई हो चुकी थी, दिसंबर में परिवार ने उसकी शादी करने के लिए तैयारी कर रखी थी। मगर, इससे पहले ही वह हादसे का शिकार हो गया। कनाडा में युवक के साथ कैसे हुआ हादसा… मंदीप सिंह के बारे में परिवार ने बताईं ये बातें… परिवार में माता-पिता और बड़ा भाई : मंदीप अपने पीछे माता-पिता, बड़े भाई और उसके परिवार को छोड़ गया है। उसके चाचा राम कुमार श्री सनातन धर्म महाबीर दल लाड़वा के उपप्रधान हैं। उन्होंने बताया कि पूरे परिवार को इस घटना से गहरा सदमा लगा है। रिश्तेदारों और परिचितों का परिवार को सांत्वना देने के लिए लगातार घर पहुंचना जारी है। दिसंबर में हुआ था 21 साल का : मंदीप सिंह ने पिछले साल 3 दिसंबर को अपना 21वां जन्मदिन मनाया था। वह पढ़ाई पूरी करने के बाद बेहतर करियर की उम्मीद लेकर कनाडा गया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह अपने भविष्य को संवारकर घर लौटेगा, लेकिन उसकी असमय मौत ने सभी सपने अधूरे छोड़ दिए। 14 लाख रुपए में डेडबॉडी इंडिया पहुंची चाचा राम कुमार ने बताया कि मंदीप अपने कुछ दोस्तों के साथ हेमिल्टन शहर में घूमने आया था। मंदीप को तैरना नहीं आता था। यहां अचानक पैर फिसलने से गहरे पानी में चला गया। करीब 14 लाख रुपए में मंदीप की बॉडी वापस भारत पहुंची। मंदीप का बड़ा भाई नरेश प्राइवेट सेक्टर में जॉब करता है। सगाई हो चुकी, दिसंबर में शादी होनी थी चाचा राम कुमार ने आगे बताया कि मंदीप के पिता खेती-बाड़ी का काम करते हैं। मंदीप की जाने से पहले से पास के गांव के हलालपुर की लड़की के साथ सगाई हो चुकी थी। अब मंदीप को दिसंबर को वापस आना था। उसी महीने में उसकी शादी तय हो रखी थी।
मूवी रिव्यू – ‘मां बहन’:माधुरी दीक्षित-तृप्ति डिमरी भी नहीं बचा पाईं यह बिखरी हुई डार्क कॉमेडी, हंसी से ज्यादा सिर पकड़ने पर मजबूर करती है

डार्क कॉमेडी बनाना आसान नहीं होता। इसमें अपराध भी चाहिए, हास्य भी चाहिए और किरदारों का पागलपन भी। नेटफ्लिक्स की नई फिल्म मां बहन इन तीनों चीजों को एक साथ परोसने की कोशिश तो करती है, लेकिन आखिर तक आते आते यह तय नहीं कर पाती कि इसे कॉमेडी बनना है, थ्रिलर बनना है या पारिवारिक ड्रामा। नतीजा एक ऐसी फिल्म के रूप में सामने आता है जिसमें शोर बहुत है, लेकिन असर बेहद कम। फिल्म की कहानी कहानी रेखा और उसकी दो बेटियों के इर्द गिर्द घूमती है। एक दिन उनके घर की रसोई में एक लाश मिल जाती है और यहीं से शुरू होता है झूठ, छिपाने और बचने का सिलसिला। पड़ोसियों की ताकझांक, परिवार के भीतर की खींचतान और लगातार बढ़ती मुसीबतों के बीच तीनों महिलाएं इस राज को छिपाने की कोशिश करती हैं। सुनने में यह सेटअप दिलचस्प लगता है, लेकिन समस्या यह है कि फिल्म पहले आधे घंटे में जितना वादा करती है, उसके बाद उतना निभा नहीं पाती। फिल्म में एक्टिंग माधुरी दीक्षित पूरी फिल्म में सबसे ज्यादा ईमानदार नजर आती हैं। वह अपने अनुभव से कई कमजोर दृश्यों को संभालने की कोशिश करती हैं, लेकिन कमजोर लेखन उनके हाथ बांध देता है। तृप्ति डिमरी के हिस्से कुछ अच्छे पल आते हैं, मगर उनका किरदार लगातार एक जैसा बना रहता है। रवि किशन अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं, लेकिन उन्हें भी ऐसा कोई दृश्य नहीं मिलता जो लंबे समय तक याद रह सके। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कलाकार मेहनत करते दिखते हैं, लेकिन किरदार कागज पर अधूरे लिखे गए हैं। दर्शक उनसे जुड़ने से पहले ही कहानी अगले मोड़ पर भागने लगती है। फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने पहले तुम्हारी सुलु जैसी संवेदनशील फिल्म दी थी, इसलिए उम्मीदें ज्यादा थीं। यहां उनका निर्देशन कई जगह असमंजस का शिकार लगता है। फिल्म डार्क कॉमेडी बनना चाहती है, लेकिन कई दृश्य इतने बनावटी लगते हैं कि न हंसी आती है और न तनाव महसूस होता है। सबसे बड़ी कमी स्क्रीनप्ले है। कई घटनाएं सिर्फ इसलिए होती हैं क्योंकि कहानी को आगे बढ़ाना है। किरदारों के फैसले स्वाभाविक नहीं लगते। फिल्म में रहस्य का तत्व भी है, लेकिन उसके खुलासे उतने प्रभावशाली नहीं हैं जितने होने चाहिए थे। तकनीकी तौर पर फिल्म ठीक ठाक है। कैमरा वर्क और प्रोडक्शन डिजाइन कहानी के छोटे शहर वाले माहौल को पकड़ते हैं, लेकिन एडिटिंग बार बार लय तोड़ती है। कई दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे और कई महत्वपूर्ण पल अधूरे महसूस होते हैं। फिल्म में संगीत फिल्म का संगीत ऐसा नहीं है जो थिएटर या ओटीटी से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए। बैकग्राउंड स्कोर कुछ जगह माहौल बनाने की कोशिश करता है, लेकिन कहानी की कमजोर पकड़ के कारण उसका असर भी सीमित रह जाता है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट मां बहन एक शानदार विचार पर बनी औसत फिल्म है। लाश, झूठ और अजीबोगरीब परिवार वाला इसका सेटअप दिलचस्प था, लेकिन कमजोर लेखन, अस्थिर टोन और अधूरी कॉमेडी इसे खास बनने से रोक देती है। माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती हैं, लेकिन जब कहानी ही बार बार पटरी से उतरती रहे तो कलाकार भी ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। अगर आप सिर्फ स्टार कास्ट के लिए देखना चाहते हैं तो एक बार मौका दे सकते हैं, लेकिन मजबूत डार्क कॉमेडी की उम्मीद लेकर बैठेंगे तो निराशा हाथ लगेगी।
‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर जारी; 19 जून को आएगी फिल्म:ट्रेलर में शाहिद, कृति और रश्मिका के किरदारों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाया गया है

शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म ‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म का निर्देशन होमी अदजानिया ने किया है, जिन्होंने 2012 में आई कॉकटेल का भी निर्देशन किया था। हालांकि यह फिल्म ‘कॉकटेल’ की सीधी कहानी को आगे नहीं बढ़ाती लेकिन इसकी थीम रिश्तों, दोस्ती और प्रेम के जटिल समीकरणों पर आधारित है। इस बार फिल्म में पूरी तरह नई स्टार कास्ट और नई कहानी देखने को मिलेगी। ट्रेलर में शाहिद, कृति और रश्मिका के किरदारों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाया गया है। कहानी एक ऐसे लव ट्रायंगल के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां दोस्ती और प्यार की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं। फिल्म आधुनिक रिश्तों की उलझनों और भावनात्मक संघर्षों को केंद्र में रखती है। फिल्म की कहानी तरुण जैन और लव रंजन ने लिखी है। इसका संगीत प्रीतम ने तैयार किया है, जबकि गीत अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं। ट्रेलर में लोकप्रिय गीत ‘तुम्ही हो बंधु’ की वापसी भी देखने को मिलती है, जो सैफ अली खान स्टारर पहली फिल्म का चर्चित गाना था। फिल्म का निर्माण दिनेश विजान और लव रंजन ने किया है। शाहिद और कृति इससे पहले ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में साथ नजर आ चुके हैं, जबकि रश्मिका पहली बार इस जोड़ी के साथ स्क्रीन साझा कर रही हैं। बता दें कि यह फिल्म 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार शाहिद और रश्मिका की जोड़ी ‘कॉकटेल 2’ के बाद फिर एक रोमांटिक कॉमेडी में नजर आ सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, कभी खून की उल्टी होने की शिकायत थी

डायरेक्टर- प्रोड्यूसर और CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह कई दिनों से बीमार थे। खबर लगातार अपडेट हो रही है पहलाज निहलानी की पॉपुलर फिल्में पहलाज निहलानी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा- रीना रॉय स्टारर ‘हथकड़ी’ (1982), गोविंदा- दिव्या भारती स्टारर ‘शोला और शबनम’ (1992), गोविंदा-चंकी पांडे स्टारर ‘आंखें’ (1993), अनिल कपूर- करिश्मा कपूर स्टारर ‘अंदाज’ (1994), अक्षय कुमार-करीना कपूर स्टारर ‘तलाश’ (2003), राय लक्ष्मी स्टारर ‘जूली 2’ (2017) और गोविंदा स्टारर ‘रंगीला राजा’ (2019) जैसी फिल्में बनाई हैं।
पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, गोविंदा को मानते थे इनसिक्योर

डायरेक्टर- प्रोड्यूसर और CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह कई दिनों से बीमार थे, उन्हें किडनी से संबंधित दिक्कतें थीं। खबर लगातार अपडेट हो रही है पहलाज निहलानी की पॉपुलर फिल्में पहलाज निहलानी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा- रीना रॉय स्टारर ‘हथकड़ी’ (1982), गोविंदा- दिव्या भारती स्टारर ‘शोला और शबनम’ (1992), गोविंदा-चंकी पांडे स्टारर ‘आंखें’ (1993), अनिल कपूर- करिश्मा कपूर स्टारर ‘अंदाज’ (1994), अक्षय कुमार-करीना कपूर स्टारर ‘तलाश’ (2003), राय लक्ष्मी स्टारर ‘जूली 2’ (2017) और गोविंदा स्टारर ‘रंगीला राजा’ (2019) जैसी फिल्में बनाई हैं। 2015-17 तक CBFC के चीफ रहे, कई आरोप लगे पहलाज निहलानी 2015 से 2017 तक CBFC के चीफ रहे हैं। कई लोगों ने उन पर फिल्मों से हिंसक और इंटिमेट सीन बेवजह छोटे करने के आरोप लगाए थे और इसके चलते उनका कार्यकाल विवादित रहा था। जेम्स बॉन्ड सीरीज की फिल्म ‘स्पेक्टर’ से किसिंग सीन को छोटा कराने पर सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई थी। निहलानी ने शाहिद कपूर स्टार ‘उड़ता पंजाब’ में कथित तौर पर 69 कट लगाने के लिए कहा था, जो काफी चर्चा में रहा था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC के फैसले को गलत बताया और फिल्म सिर्फ एक कट के साथ रिलीज हुई थी। 2017 में सरकार ने उन्हें हटाकर गीतकार प्रसून जोशी को CBFC का नया चेयरमैन बनाया था। खून की उल्टियां होने पर, 5 साल पहले 29 दिनों तक एडमिट रहे थे पहलाज निहलानी को 5 साल पहले खून की उल्टियां हुई थीं, जिसके बाद वो 28 दिनों तक मुंबई के नानावटी अस्पातल में भर्ती रहे थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “एक रात अचानक से 3 बजे मुझे बेचैनी होने लगी और खून की उल्टियां भी हुईं। मुझे अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई। यह क्रोनिक फूड पॉइजनिंग का मामला था। लेकिन इमरजेंसी थी। शुरुआत में मुझे 5-6 दिनों तक आईसीयू में भर्ती रखा गया।” “जब मैं आईसीयू से बाहर आया तो सोचा कि 2-3 दिन में मैं घर चला जाऊंगा। लेकिन लंबे समय तक मेरा टेम्प्रेचर कम नहीं हुआ। मुझे बुखार आ रहा था और शाम के वक्त पेट में भी बहुत दर्द हो रहा था। डायग्नोसिस बढ़ता गया और यह चिंता का विषय बन गया।” गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक पहलाज निहलानी ने ही गोविंदा को उनके करियर का पहला बड़ा ब्रेक दिया था। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर बात करते हुए कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था। लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ ‘अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी, तो मैंने उससे एक दिन मांगा। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो।’ आगे उन्होंने कहा, ‘लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। हालांकि उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।’ गोविंदा के पास काम नहीं था, तो दी गई शोला और शबनम उसी पॉडकास्ट में पहलाज निहलानी ने आगे कहा, जब गोविंदा के पास काम नहीं था, ‘जब शोला और शबनम हमने शुरू की तो उससे पहली बार कॉमेडी रोल करवाया। फिर जब काम नहीं था उसके बाद तब फिल्म आंखें करवाई। दोनों फिल्मों में एकदम अलग रोल था।’ पहलाज निहलानी ने कहा था- गोविंदा इनसिक्योर है जब पहलाज निहलानी से पूछा गया कि क्या गोविंदा के नेगेटिव एटीट्यूड की वजह से कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘जब सक्सेस मिलती है, तो आदमी हर दर्द सह लेता है, लेकिन जब सक्सेस की सीढ़ी से नीचे उतरते हैं तो तकलीफ होती है। गोविंदा में वो प्रॉब्लम शुरू से थी। क्योंकि वो खुद को इनसिक्योर मानता था।’ ‘उसके पिता बहुत बड़े हीरो रहे हैं महबूब खान के। बड़ी-बड़ी पिक्चरें की, अच्छे प्रोड्यूसर भी रहे, नुकसान हुआ। इसके बाद उसने इतना दर्द सहा, बहुत सारी चीजें उसके हाथ से निकल गईं, स्ट्रगल करना पड़ा। वो सारी चीजें उसके अंदर थीं। वो इनसिक्योरिटी रहती हैं। उसे था कि कहीं से पैसे आ जाएं। उसके पास भाई-बहन की जिम्मेदारियां थीं। वो पैसे में उलझा रहता था, उसे करना भी सब था।’ ‘इस वजह से उसका एटीट्यूड ऐसा हो गया था। जब काम और प्रेशर बहुत हो जाता है, तो आप छोड़ नहीं सके, तो चीजें बढ़ गईं। फिर आदत बन गई, वहमी हो गया। जब नहीं चलता आदमी तो सब उसे डैमेज करते हैं, वर्ना गोविंदा जैसा हीरो ढूंढने पर नहीं मिलेगा।’
शरद पवार की पोती की शादी लखानी परिवार में, बीजेपी-आरएसएस संबंधों पर बनी सुर्खियां | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:04 जून, 2026, 11:59 IST महाराष्ट्र के प्रमुख परिवारों के बीच गठबंधन को कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़नवीस द्वारा सुगम बनाया गया था, जो दोनों नागपुर से आते हैं। शरद पवार की पोती रेवती सुले और बीजेपी नेता अरुण लखानी के बेटे सारंग शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। (एक्स) जैसा कि राजनीतिक हलकों में शरद पवार की पोती रेवती सुले और भाजपा नेता अरुण लखानी के बेटे सारंग की आगामी शादी पर चर्चा जारी है, नया ध्यान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के साथ लखानी परिवार के लंबे समय से जुड़ाव की ओर गया है। दोनों परिवारों के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के बार-बार तंज कसने के बीच भी इस घटनाक्रम को महत्व मिला है, खासकर तब जब आगामी चुनावों के लिए एमएलसी की भाजपा सूची में लखानी का नाम शामिल है। लखानी वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली से चुनाव लड़ेंगे। सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के दो प्रमुख परिवारों के बीच गठबंधन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस द्वारा किया गया था, जो दोनों नागपुर से हैं और लखानी और पवार परिवारों के साथ लंबे समय से संबंध साझा करने के लिए जाने जाते हैं। कौन हैं अरुण लखानी? महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के मलकापुर से एमटेक स्नातक, अरुण लखानी आरएसएस परंपरा में गहराई से जुड़े परिवार से आते हैं। उनके पिता, जिन्होंने 1934 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से एमटेक की डिग्री हासिल की थी, सक्रिय रूप से संघ से जुड़े थे, जबकि उनके बड़े भाई वर्तमान में मलकापुर के संघचालक के रूप में कार्यरत हैं। लखानी 1999 से भाजपा से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के संयुक्त कोषाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं, यह पद उन्होंने दिसंबर 2023 में ग्रहण किया था। राजनीति से परे, उन्होंने खेल प्रशासन में प्रमुख भूमिका निभाई है। वह 2014 से महाराष्ट्र बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष, 2016 से भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और 2022 से राष्ट्रीय निकाय के कोषाध्यक्ष हैं। उन्हें 2026 में महाराष्ट्र ओलंपिक एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था। लखानी सामाजिक और शैक्षिक पहलों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। उन्होंने 2016 से 2026 तक आरएसएस से जुड़े लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। ट्रस्ट विदर्भ के आदिवासी क्षेत्रों में लगभग 1,000 एकल-शिक्षक स्कूल चलाता है और विभिन्न शैक्षिक आउटरीच कार्यक्रम चलाता है। इससे पहले, उन्होंने नरकेसरी प्रकाशन का नेतृत्व किया, जो नागपुर से मराठी दैनिक तरुण भारत प्रकाशित करता है। उन्होंने 1998 से 2003 तक साईं मंदिर, नागपुर के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। आगामी शादी ने काफी राजनीतिक दिलचस्पी पैदा कर दी है, पर्यवेक्षकों ने कहा कि यह महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक और संघ परिवार और भाजपा के साथ गहरे संगठनात्मक और वैचारिक संबंधों वाले परिवार को एक साथ लाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : नागपुर, भारत, भारत समाचार राजनीति शरद पवार की पोती की शादी लखानी परिवार में होने वाली है, बीजेपी-आरएसएस संबंधों पर चर्चा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)शरद पवार की पोती की शादी(टी)रेवती सुले की शादी(टी)अरुण लखानी के बेटे सारंग(टी)लखानी परिवार आरएसएस लिंक(टी)बीजेपी महाराष्ट्र की राजनीति(टी)नितिन गडकरी की भूमिका(टी)देवेंद्र फड़नवीस नागपुर(टी)महाराष्ट्र के राजनीतिक परिवार
पंजाब-चंडीगढ़ में चढ़ेगा टेस्ट क्रिकेट का फीवर:6 जून को मुल्लांपुर में भारत-अफगानिस्तान का मैच, शुभमन गिल होंगे कप्तान; गंभीर पहुंचे नाडा साहिब

आईपीएल के मैच भले ही खत्म हो गए हैं, लेकिन क्रिकेट का रोमांच अभी बाकी है। 6 जून से न्यू चंडीगढ़ में भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच खेला जाएगा। दोनों टीमें चंडीगढ़ पहुंच चुकी हैं और प्रैक्टिस जारी है। यह ऐतिहासिक मुकाबला पंजाब और देश के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने नाडा साहिब पहुंचकर माथा टेका और आशीर्वाद लिया। बता दें कि, यह मैच 2 वजहों से खास है। पहला मुल्लांपुर में बने स्टेडियम में पहली बार कोई टेस्ट मैच खेला जाएगा। ऐसे में पीसीए इसकी मेजबानी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। दूसरा शहर के युवा खिलाड़ी शुभमन गिल टीम इंडिया की कप्तानी करेंगे। वहीं, गुरनूर सिंह के लिए भी यह मुकाबला खास रहेगा। शुभमन ने हाल ही में आईपीएल में भी शानदार प्रदर्शन किया था। पिच क्यूरेटर से कोच की लंबी चर्चा भारत और अफगानिस्तान के बीच इससे पहले 2018 में एकमात्र टेस्ट मैच खेला गया था, जिसमें भारत जीती थी। उस समय टीम की कमान अजिंक्य रहाणे के हाथों में थी। हेड कोच गौतम गंभीर भी चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं। उन्होंने पिच क्यूरेटर के साथ लंबी चर्चा की है। इसकी एक बड़ी वजह अफगानिस्तान का मजबूत स्पिन आक्रमण है। अफगान टीम के पास कई बेहतरीन स्पिनर मौजूद हैं। वहीं भारतीय टीम इस विभाग में थोड़ी कमजोर नजर आ रही है। रविचंद्रन अश्विन संन्यास ले चुके हैं, जबकि रविंद्र जडेजा टीम का हिस्सा नहीं हैं। अक्षर पटेल को भी टीम में जगह नहीं मिली है। हालांकि कुलदीप यादव और वाशिंगटन सुंदर टीम में शामिल हैं। हर्ष दुबे को पहली बार भारतीय टीम में मौका मिला है। मैच से जुड़ी यह 3 बातें भी ध्यान में रखिए:- 6 से 10 जून तक खेला जाएगा मैच: पीसीए सचिव गुरमीत सिंह मीत हेयर ने बताया कि 6 से 10 जून तक भारत और अफगानिस्तान के बीच टेस्ट मैच खेला जाएगा। उन्होंने कहा कि पहली बार मुल्लांपुर स्टेडियम को टेस्ट मैच की मेजबानी का मौका मिला है। यह भारत का 31वां और पंजाब का तीसरा टेस्ट वेन्यू होगा। 250 रुपए से शुरू टिकट: गुरमीत सिंह मीत हेयर ने खास तौर पर अभिभावकों से अपील की है कि वे गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव दिलाने के लिए स्टेडियम लेकर आएं। इससे बच्चों को अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को मैदान पर खेलते देखने का मौका मिलेगा। मैच के लिए टिकट की कीमत 250 रुपए से शुरू रखी गई है। एक टिकट पर दर्शक पांचों दिन मैच देख सकेंगे। वे चाहें तो पूरा दिन या किसी विशेष सत्र के दौरान भी स्टेडियम पहुंच सकते हैं। कप्तान होंगे शुभमन गिल, टीम में गुरनूर बराड़ भी: भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी पंजाब के स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल करेंगे, जबकि पंजाब के ही गुरनूर बराड़ भी टीम का हिस्सा हैं। क्रिकेट प्रशंसकों से भारतीय टीम और पंजाब के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचने की अपील की गई है। देखिए मैच से जुड़ी PHOTOS:- स्पिन बॉलिंग कोच ने संभाली जिम्मेदारी भारत के स्पिन बॉलिंग कोच साईराज बहुतुले भी टीम से जुड़ चुके हैं और उन्होंने प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लिया। इससे पहले वह आईपीएल में पंजाब किंग्स के स्पिन बॉलिंग कोचिंग सेटअप का हिस्सा रहे हैं। वहीं गुरजपनीत सिंह, आकिब नबी, प्रिंस यादव, सारांश जैन, जीशान अंसारी और शिवांग कुमार नेट बॉलर के रूप में टीम इंडिया के साथ जुड़े हुए हैं।
सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:74,400 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 50 अंक चढ़ा; ऑटो और फार्मा शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 4 जून को बढ़त है। सेंसेक्स 100 अंक की बढ़त के साथ 74,400 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 50 अंक की तेजी है, ये 23,400 के स्तर पर है। आज ऑटो, फार्मा और कंज्यूमर ड्यूरेबल में ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में भी आज गिरावट कल अमेरिकी बाजारों में गिरावट रही विदेशी निवेशकों ने कल 5,617 करोड़ के शेयर बेचे कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 3 जून को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 303 अंक की गिरावट के साथ 74,346 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 77 अंकों की गिरावट रही, ये 23,405 पर बंद हुआ था।






