आम खाने के टिप्स: गर्मियों में इन लोगों को नहीं खाना चाहिए आम, फायदे की जगह हो सकता है सेहत को नुकसान

आम में प्राकृतिक शर्करा की मात्रा काफी अधिक होती है। इसलिए जिन लोगों को टकराव की समस्या है, उन्हें आम का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। आम तौर पर आम खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। छवि: फ्रीपिक अगर आप वजन की कोशिश कर रहे हैं तो आम का सेवन सोच-समझकर करें। इसमें प्राकृतिक और प्राकृतिक शर्करा अधिक होती है, जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है। सीमित मात्रा में आम खाना सुरक्षित माना जाता है। छवि: फ्रीपिक कुछ लोगों को आम से एलर्जी हो सकती है। आम खाने के बाद त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या गले में परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। छवि: फ्रीपिक किडनी से जुड़े गंभीर मुद्दों वाले लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही आम खाना खाना चाहिए। किसी भी फल का अधिक सेवन स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकता है। छवि: फ्रीपिक आम खाने का सही तरीका: आम को खाने से पहले कुछ देर पानी में भिगोकर रखें। एक बार में बहुत ज्यादा आम नहीं। आम के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। आहार के साथ ही आम का सेवन करें। छवि: फ्रीपिक आम का स्वाद और पोषण से भरपूर फल है, लेकिन हर चीज की तरह उसका सेवन भी मात्रा में करना जरूरी है। छवि: फ्रीपिक मोटापा, मोटापा, पाचन संबंधी या एलर्जी से पीड़ित लोगों को आम खाने के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सही मात्रा में खाया गया आपका आम समर्स को स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक बनाया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।
इलायची दूध पीने के फायदे: गर्म में इलायची का दूध पीने के 5 फायदे, जानिए शरीर पर क्या होता है असर

इलायची दूध पीने के फायदे: गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएँ अक्सर हमारे शरीर की ऊर्जा को ख़त्म कर देती हैं। ऐसे में खुद को प्रमाणित और अंदर से कूल रखने के लिए हम इसी तरह के समर ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रसोई में मौजूद छोटी सी इलायची और दूध का संयोजन इस मौसम में एक बेहतरीन औषधि टॉनिक साबित हो सकता है? आम तौर पर लोग देखते हैं कि दूध के क्षेत्र में बहुत अधिक लाभ मिलता है, लेकिन अवांछनीय या गुणगुनी इलायची कंबाइंड मिल्क की तासीर शरीर के लिए बेहद सुखद हो जाती है। आइए जानते हैं कि गर्म में मिला हुआ इलायची का दूध पीने से शरीर पर क्या असर होता है और इसके 5 फायदे क्या हैं। पेट की गर्मी और एसिडिटी से तुरंत राहत गर्मियों में सामूहिक खाना खाना या कम पानी पीना से एसिडिटी, गैस और सीने में जलन की समस्या आम हो जाती है। इलायची में पाचक गुण होते हैं जो पेट के एसिड को कृषि योग्य बनाते हैं। रात को या शाम के समय मैक का सेवन करने से डॅक्स का मूल्यांकन रहता है और ब्लोटिंग नहीं होती है। बॉडी कूलेंट और लू से डिफ्रेंस इलायची दूध और का मिश्रण एक बेहतरीन रिफ्रेशिंग ड्रिंक है। यह शरीर के आंतरिक तापमान को मापता है। बाहर आशियाने से पहले या थकाकर घर वापसी के बाद इसका प्रभाव ठंडा सेवन करने से शरीर को लू से बाहर निकलने में मदद मिलती है। तनाव कम करे और गहरी नींद गर्मी के मौसम में रातों को ठंड लगने की वजह से बार-बार नींद उचटती है। इलायची की भीनी-भीनी सुगंध और दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन समूह आपके नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करते हैं। सोने से आधा घंटा पहले इसे पीने से तनाव कम होता है और अनिद्रा की समस्या दूर होती है। मौखिक स्वास्थ्य और मुंह के छात्रों में चिकित्सक पेट की खराबी और गर्मी के कारण बार-बार मुंह में छाले हो जाते हैं। इलायची में विरोधी-विवादित गुण होते हैं। दूध पीने से मुंह के छाले ठीक होते हैं, मसूड़े मजबूत होते हैं और सांसों की दुर्गंध से हमेशा के लिए सामने आते हैं। इंस्टेंट ऊर्जा और इम्युनिटी बूस्टर चिलचिलाती धूप में सिक्कों के माध्यम से शरीर के जरूरी सामान बाहर निकलते हैं, जिससे कमजोरी महसूस होती है। इलायची वाले दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देकर थकान पैदा करते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)महिलाओं के लिए इलायची दूध के फायदे(टी)पुरुषों के लिए इलायची दूध के फायदे(टी)वजन घटाने के लिए इलायची दूध के फायदे(टी)त्वचा के लिए इलायची दूध के फायदे(टी)पुरुष टेस्टोस्टेरोन के लिए इलायची दूध के फायदे(टी)रात में इलायची दूध के फायदे(टी)क्या इलायची दूध आपके लिए अच्छा है(टी)अगर हम रोजाना इलायची खाते हैं तो क्या होता है(टी)कौन सा बेहतर है(टी)दालचीनी या इलायची
इंपैक्ट फीचर:जेईई-एडवांस्ड 2026 में एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान, एलन के क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ऑल इंडिया में टॉपर, टॉप-10 में एलन क्लासरूम से

जेईई-एडवांस्ड 2026 रिजल्ट्स में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा ने लगातार तीसरे वर्ष ऑल इंडिया रैंक-1 देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन रिजल्ट्स के साथ एलन ने अब तक आईआईटी-जेईई में 7 बार ऑल इंडिया रैंक-1 दिए हैं तथा अपने इतिहास में दूसरी बार ऑल इंडिया रैंक-1, 2 और 3 को दोहराया है। इससे पहले वर्ष 2016 में भी एलन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। एलन के विद्यार्थियों ने देश की टॉप-10 रैंक में से 6, टॉप 50 में 24 क्लासरूम स्टूडेंट्स रहे हैं। यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर टॉप रैंकर्स तैयार करने में एलन देश का सबसे सफल और लगातार प्रदर्शन करने वाला संस्थान है। देशभर में एलन की सफलता की अगुआई एलन के कोटा क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने की। शुभम ने 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। श्रेष्ठता के दौर को जारी रखते हुए एलन के ही क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने 360 में से 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 तथा जतिन चाहर ने 319 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की। इसके साथ ही ऑल इंडिया गर्ल्स टॉपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से है। आरोही ने 280 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-77 प्राप्त की है। इसके साथ ही एलन ऑनलाइन लाइव कोर्स से यशवर्धन ने ऑल इंडिया रैंक-52 प्राप्त कर ऑनलाइन में बेस्ट रिजल्ट दिया है। टाॅप रैंकर्स की सूची में एलन क्लासरूम प्रोग्राम के स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7), कनिष्क जैन (एआईआर-8), दर्श सिक्का (एआईआर-10) हासिल करते हुए देश की टॉप-10 रैंक में सफलता की संख्या 6 तक पहुंचा दी है। टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स टॉप-10 से आगे बढ़ते हुए देश की टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स, टॉप-50 में 24 स्टूडेंट्स शामिल हैं। देश के 7 में से पांच आईआईटी जोन टाॅपर एलन क्लासरुम से हैं। इसमें दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, भुवनेश्वर और रूडकी जोन टाॅपर शामिल हैं। स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि “एलन उत्कृष्टता में विश्वास रखता है और ये परिणाम स्टूडेंट्स की सफलता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। एलन ने क्वालिटी और क्वांटिटि दोनों ही तरह से असाधारण परिणाम दिए हैं। एलन ने हर ब्रेकेट टाॅप-50, टाॅप-100, ऑफलाइन और ऑनलाइन हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम रहे हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सभी सेंटर्स पर उत्साह का माहौल है, क्योंकि देश के हर कोने से, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक एलन स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है। पिछले दो वर्षों में आईआईटी में प्रवेश पाने वाला प्रत्येक चैथा स्टूडेंट एलन से रहा है। हमें अपने स्टूडेंट्स, फैकल्टीज और एलन टीम पर गर्व है। उन्होंने आगे कहा कि एलन परिणामों की पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए संस्थान पिछले तीन वर्षों से देश की अग्रणी ऑडिट फर्म ई-वाय से अपने स्टूडेंट्स के रिकाॅर्ड का वेलिडेशन करवा रहा है। इस उपलब्धि के साथ एलन ने अब तक सात बार आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक-1 प्रदान की है। इससे पहले वर्ष 2025 में रजित गुप्ता तथा वर्ष 2024 में वेद लाहोटी ने एलन कोटा के क्लासरूम प्रोग्राम से एआईआर-1 हासिल की थी। उनसे पहले चित्रांग मुर्डिया (2014), अमन बंसल (2016), कार्तिकेय गुप्ता (2019) और मृदुल अग्रवाल (2021) ने भी आईआईटी-जेईई में एआईआर-1 प्राप्त की थी। हर चुनौती मेरे लिए मोटिवेशन होती हैः शुभम कुमार एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने जेईई-एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। शुभम ने जेईई मेन में 100 परसेंटाइल स्कोर किया था और ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल की थी। मूलतः गया बिहार के साधारण परिवार से आने वाले शुभम की सफलता लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पिछले दो वर्षों से एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ने साबित किया है कि सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, रेगुलर प्रेक्टिस और काॅन्फिडेंस से बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। शुभम की इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिता शिवकुमार गया में हार्डवेयर की दुकान संचालित करते हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं। शुभम की बड़ी बहन वर्तमान में आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर रही हैं। एलन के साथ घर का शैक्षणिक माहौल और परिवार का निरंतर सहयोग शुभम की सफलता की मजबूत नींव बना। शुभम ने बताया कि मेरी सक्सेस का सबसे बड़ा कारण मेरे टीचर्स और परिवार का त्याग और विश्वास बहुत महत्वपूर्ण रहा। पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि मां ने हर भावनात्मक एवं मानसिक मजबूती दी। मैंने हमेशा फैकल्टीज की हर बात को गंभीरता से सुना और उन्हीं के बताए हुए तरीके को फॉलो किया। जब भी कोई टॉपिक कठिन लगता था, मैं बार-बार डाउट पूछता था। एलन की फैकल्टीज ने हर कॉन्सेप्ट को बेसिक्स से समझाया, जिससे मेरी नींव बहुत मजबूत हुई। मुझे लगता है कि अगर छात्र अपने टीचर्स पर भरोसा करके डिसिप्लिन के साथ पढ़ाई करें, तो बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मैं रोजाना 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते था। क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करना मेरे डेली रूटीन में शामिल था। डेली प्रश्नों की प्रैक्टिस करते थे और कमजोर टाॅपिक्स पर विशेष फोकस करता था। जेईई की तैयारी में कई बार प्रेशर आ जाता है, लेकिन मैंने उसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैंने हर चुनौती को मोटिवेशन में बदला। मेरा पूरा फोकस सिर्फ अपने लक्ष्य पर था। अब मैं देश के आईआईटी, मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करूंगा। मेरी पढ़ाई के लिए पूरा परिवार कोटा शिफ्ट हो गया: आरोही जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 77 प्राप्त करने के साथ ऑल इंडिया गर्ल टाॅपर रही आरोही देशपांडे सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित मेहनत को दिया। पुणे निवासी आरोही ने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे चार वर्षों की निरंतर तैयारी और अनुशासित दिनचर्या रही है। उसने कहा कि कभी रैंक के बारे में ज्यादा नहीं सोचा, बल्कि अपना पूरा ध्यान कॉन्सेप्ट्स को मजबूत करने और नियमित अभ्यास पर रखा। आरोही ने 10वीं कक्षा में 96.7 प्रतिशत तथा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 97.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इससे पहले जेईई मेन में
इंपैक्ट फीचर:जेईई-एडवांस्ड 2026 में एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान, एलन के क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ऑल इंडिया टॉपर, टॉप-10 में एलन क्लासरूम से 6 स्टूडेंट

जेईई-एडवांस्ड 2026 रिजल्ट्स में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा ने लगातार तीसरे वर्ष ऑल इंडिया रैंक-1 देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन रिजल्ट्स के साथ एलन ने अब तक आईआईटी-जेईई में 7 बार ऑल इंडिया रैंक-1 दिए हैं तथा अपने इतिहास में दूसरी बार ऑल इंडिया रैंक-1, 2 और 3 को दोहराया है। इससे पहले वर्ष 2016 में भी एलन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। एलन के विद्यार्थियों ने देश की टॉप-10 रैंक में से 6, टॉप 50 में 24 क्लासरूम स्टूडेंट्स रहे हैं। यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर टॉप रैंकर्स तैयार करने में एलन देश का सबसे सफल और लगातार प्रदर्शन करने वाला संस्थान है। देशभर में एलन की सफलता की अगुआई एलन के कोटा क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने की। शुभम ने 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। श्रेष्ठता के दौर को जारी रखते हुए एलन के ही क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने 360 में से 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 तथा जतिन चाहर ने 319 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की। इसके साथ ही ऑल इंडिया गर्ल्स टॉपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से है। आरोही ने 280 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-77 प्राप्त की है। इसके साथ ही एलन ऑनलाइन लाइव कोर्स से यशवर्धन ने ऑल इंडिया रैंक-52 प्राप्त कर ऑनलाइन में बेस्ट रिजल्ट दिया है। टाॅप रैंकर्स की सूची में एलन क्लासरूम प्रोग्राम के स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7), कनिष्क जैन (एआईआर-8), दर्श सिक्का (एआईआर-10) हासिल करते हुए देश की टॉप-10 रैंक में सफलता की संख्या 6 तक पहुंचा दी है। टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स टॉप-10 से आगे बढ़ते हुए देश की टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स, टॉप-50 में 24 स्टूडेंट्स शामिल हैं। देश के 7 में से पांच आईआईटी जोन टाॅपर एलन क्लासरुम से हैं। इसमें दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, भुवनेश्वर और रूडकी जोन टाॅपर शामिल हैं। स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि “एलन उत्कृष्टता में विश्वास रखता है और ये परिणाम स्टूडेंट्स की सफलता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। एलन ने क्वालिटी और क्वांटिटि दोनों ही तरह से असाधारण परिणाम दिए हैं। एलन ने हर ब्रेकेट टाॅप-50, टाॅप-100, ऑफलाइन और ऑनलाइन हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम रहे हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सभी सेंटर्स पर उत्साह का माहौल है, क्योंकि देश के हर कोने से, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक एलन स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है। पिछले दो वर्षों में आईआईटी में प्रवेश पाने वाला प्रत्येक चैथा स्टूडेंट एलन से रहा है। हमें अपने स्टूडेंट्स, फैकल्टीज और एलन टीम पर गर्व है। उन्होंने आगे कहा कि एलन परिणामों की पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए संस्थान पिछले तीन वर्षों से देश की अग्रणी ऑडिट फर्म ई-वाय से अपने स्टूडेंट्स के रिकाॅर्ड का वेलिडेशन करवा रहा है। इस उपलब्धि के साथ एलन ने अब तक सात बार आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक-1 प्रदान की है। इससे पहले वर्ष 2025 में रजित गुप्ता तथा वर्ष 2024 में वेद लाहोटी ने एलन कोटा के क्लासरूम प्रोग्राम से एआईआर-1 हासिल की थी। उनसे पहले चित्रांग मुर्डिया (2014), अमन बंसल (2016), कार्तिकेय गुप्ता (2019) और मृदुल अग्रवाल (2021) ने भी आईआईटी-जेईई में एआईआर-1 प्राप्त की थी। हर चुनौती मेरे लिए मोटिवेशन होती हैः शुभम कुमार एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने जेईई-एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। शुभम ने जेईई मेन में 100 परसेंटाइल स्कोर किया था और ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल की थी। मूलतः गया बिहार के साधारण परिवार से आने वाले शुभम की सफलता लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पिछले दो वर्षों से एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ने साबित किया है कि सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, रेगुलर प्रेक्टिस और काॅन्फिडेंस से बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। शुभम की इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिता शिवकुमार गया में हार्डवेयर की दुकान संचालित करते हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं। शुभम की बड़ी बहन वर्तमान में आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर रही हैं। एलन के साथ घर का शैक्षणिक माहौल और परिवार का निरंतर सहयोग शुभम की सफलता की मजबूत नींव बना। शुभम ने बताया कि मेरी सक्सेस का सबसे बड़ा कारण मेरे टीचर्स और परिवार का त्याग और विश्वास बहुत महत्वपूर्ण रहा। पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि मां ने हर भावनात्मक एवं मानसिक मजबूती दी। मैंने हमेशा फैकल्टीज की हर बात को गंभीरता से सुना और उन्हीं के बताए हुए तरीके को फॉलो किया। जब भी कोई टॉपिक कठिन लगता था, मैं बार-बार डाउट पूछता था। एलन की फैकल्टीज ने हर कॉन्सेप्ट को बेसिक्स से समझाया, जिससे मेरी नींव बहुत मजबूत हुई। मुझे लगता है कि अगर छात्र अपने टीचर्स पर भरोसा करके डिसिप्लिन के साथ पढ़ाई करें, तो बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मैं रोजाना 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते था। क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करना मेरे डेली रूटीन में शामिल था। डेली प्रश्नों की प्रैक्टिस करते थे और कमजोर टाॅपिक्स पर विशेष फोकस करता था। जेईई की तैयारी में कई बार प्रेशर आ जाता है, लेकिन मैंने उसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैंने हर चुनौती को मोटिवेशन में बदला। मेरा पूरा फोकस सिर्फ अपने लक्ष्य पर था। अब मैं देश के आईआईटी, मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करूंगा। मेरी पढ़ाई के लिए पूरा परिवार कोटा शिफ्ट हो गया: आरोही जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 77 प्राप्त करने के साथ ऑल इंडिया गर्ल टाॅपर रही आरोही देशपांडे सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित मेहनत को दिया। पुणे निवासी आरोही ने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे चार वर्षों की निरंतर तैयारी और अनुशासित दिनचर्या रही है। उसने कहा कि कभी रैंक के बारे में ज्यादा नहीं सोचा, बल्कि अपना पूरा ध्यान कॉन्सेप्ट्स को मजबूत करने और नियमित अभ्यास पर रखा। आरोही ने 10वीं कक्षा में 96.7 प्रतिशत तथा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 97.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इससे पहले जेईई मेन में
बीजेपी से बाहर निकलने के बाद, क्या अन्नामलाई तमिलनाडु उपचुनाव में अपनी ताकत का परीक्षण करेंगे? | भारत समाचार

आखरी अपडेट:02 जून, 2026, 14:00 IST यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अन्नामलाई एक जन आंदोलन शुरू करने का इरादा रखते हैं जिसका उद्देश्य युवा मतदाताओं, विशेषकर जेन जेड के साथ सीधा संबंध बनाना है। के अन्नामलाई ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और भाजपा से ‘सौहार्दपूर्ण निकास’ की मांग की है। (एक्स) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से बाहर निकलने के बाद के अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, अब तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण सवाल पर ध्यान केंद्रित हो रहा है: क्या पूर्व आईपीएस अधिकारी राज्य के उपचुनावों में अपनी ताकत का परीक्षण करेंगे? राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच इस सवाल ने तूल पकड़ लिया है। वर्तमान में पांच विधानसभा सीटें खाली हैं, जिससे आने वाले महीनों में उपचुनाव की संभावना बन रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद पेरम्बूर को बरकरार रखने का विकल्प चुनने के बाद त्रिची पूर्व सीट खाली कर दी, जिसमें उनके टीवीके ने राज्य में जीत हासिल की। इसके अलावा, चार एआईएडीएमके विधायकों ने विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) में शामिल होने से पहले पिछले महीने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि रिक्तियों की संख्या और बढ़ सकती है. कहा जा रहा है कि कुछ और विधायक अपनी सीटों से इस्तीफा देने और पाला बदलने पर विचार कर रहे हैं, जिससे संभावित रूप से भविष्य में किसी भी उपचुनाव की कवायद का दायरा बढ़ जाएगा। यह भी पढ़ें | बाहर निकलने की अफवाहें, नई पार्टी की चर्चा और एक दिल्ली यात्रा: अन्नामलाई की कहानी कैसे सामने आई यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अन्नामलाई खुद को उस स्थिति के लिए तैयार कर रहे हैं जिसे उनके करीबी सूत्र एक बड़े राजनीतिक प्रोजेक्ट के रूप में वर्णित करते हैं। उनकी योजनाओं से परिचित लोगों का कहना है कि पूर्व भाजपा नेता इस साल के अंत में एक जन आंदोलन शुरू करने का इरादा रखते हैं, जिसका उद्देश्य युवा मतदाताओं, विशेष रूप से जेन जेड के साथ सीधा जुड़ाव बनाना है। यह आंदोलन एक राजनीतिक पार्टी के अग्रदूत के रूप में काम करने की उम्मीद है जिसे अन्नामलाई आने वाले महीनों में बनाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, अन्नामलाई ने खुद बार-बार संकेत दिया है कि एक बड़ी राजनीतिक पहल पर काम चल रहा है। अपने भविष्य पर तीव्र अटकलों के बीच हाल ही में पत्रकारों से बात करते हुए, उन्होंने समर्थकों से “दो दिन इंतजार करने” के लिए कहा, एक ऐसी टिप्पणी जिसने एक नए राजनीतिक अध्याय की उम्मीदों को और बढ़ा दिया। समय महत्वपूर्ण है. हाल के महीनों में अन्नामलाई के राजनीतिक संदेश ने तेजी से सुझाव दिया है कि वह भाजपा और पारंपरिक द्रविड़ प्रतिष्ठान दोनों से परे एक अवसर देखते हैं। उन्होंने बार-बार तर्क दिया है कि तमिलनाडु का दशकों पुराना द्रविड़ राजनीतिक मॉडल ख़त्म हो रहा है और मतदाता, विशेषकर युवा पीढ़ी, एक नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं। अन्नामलाई के करीबी सूत्रों ने सोमवार को सीएनएन-न्यूज18 को बताया था कि तमिलनाडु के पूर्व भाजपा प्रमुख का मानना है कि विजय के एक प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने के बाद राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में बुनियादी बदलाव आया है। चर्चाओं से अवगत एक सूत्र ने कहा, “आज विजय से लड़ने के लिए कोई नेता नहीं है। द्रविड़ युग खत्म हो गया है। केवल भाषा के मुद्दों पर केंद्रित राजनीति अब काम नहीं करेगी। राज्य की राजनीति बदल गई है।” राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह प्रशंसा पहली बार मतदाताओं के बीच विजय की बढ़ती अपील के प्रति अन्नामलाई की मान्यता को दर्शा सकती है। लेकिन इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है: क्या अन्नामलाई खुद को विजय की पूरक शक्ति या अंतिम विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं? उनके सामने चुनौती बड़ी है. दक्षिण में भाजपा के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक के रूप में उभरने और तमिलनाडु में पार्टी की दृश्यता में उल्लेखनीय रूप से विस्तार करने के बावजूद, अन्नामलाई ने कोई चुनाव नहीं जीता है। फिर भी उनके समर्थकों का तर्क है कि केवल चुनावी जीत ही उनकी निरंतर प्रासंगिकता को स्पष्ट नहीं करती है। एक हाई-प्रोफाइल पुलिस करियर के बाद राजनीति में प्रवेश करने के बाद से, उन्होंने एक मजबूत सोशल मीडिया फॉलोइंग बनाई है, एक सत्ता-विरोधी प्रचारक के रूप में प्रतिष्ठा बनाई है और राज्य की सबसे पहचानने योग्य राजनीतिक हस्तियों में से एक बन गए हैं। यदि ऐसा होता है तो उपचुनाव प्रतियोगिता महज़ एक स्थानीय चुनाव से कहीं अधिक बन सकती है। यह अन्नामलाई को यह परखने का मौका दे सकता है कि क्या उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता भाजपा के ढांचे के बाहर वोटों में तब्दील हो सकती है और क्या द्रविड़ प्रमुखों और विजय की तेजी से बढ़ती टीवीके के बीच एक राजनीतिक ताकत के लिए जगह है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पूर्णिमा मुरली सीएनएन-न्यूज18 की वरिष्ठ विशेष संवाददाता पूर्णिमा मुरली ने तमिलनाडु में नागरिक और राजनीतिक मुद्दों पर एक दशक से अधिक समय तक रिपोर्टिंग की है। वह पिछले कुछ वर्षों से चैनल के लिए चेन्नई ब्यूरो का नेतृत्व कर रही हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया बीजेपी से बाहर निकलने के बाद, क्या अन्नामलाई तमिलनाडु उपचुनाव में अपनी ताकत का परीक्षण करेंगे? 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चंडीगढ़ में रैपर बादशाह का क्लब सील:मंजूर नक्शे से ज्यादा निर्माण किया, कई नोटिसों के बावजूद नहीं हटाया

चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित मशहूर रैपर बादशाह के क्लब सागो को मंगलवार सुबह प्रशासन की बिल्डिंग ब्रांच ने सील कर दिया है। क्लब संचालकों को भवन नियमों के उल्लंघन को लेकर कई बार नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें निर्धारित समय के भीतर कमियां दूर करने और नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके बाद बिल्डिंग ब्रांच की टीम मौके पर पहुंची और सीलिंग की कार्रवाई की। प्रशासन के मुताबिक, क्लब में भवन संबंधी नियमों और स्वीकृत नक्शे से जुड़े कुछ उल्लंघनों को लेकर लंबे समय से मामला चल रहा था। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद संतोषजनक जवाब और अनुपालन नहीं मिलने पर आखिरकार क्लब को सील करने का फैसला लिया गया। यह वही क्लब है, जो इससे पहले भी एक बड़े विवाद के कारण चर्चा में आ चुका है। क्लब के बाहर हुए धमाकों की जिम्मेदारी सोशल मीडिया के जरिए गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा की ओर से लिए जाने की बात सामने आई थी। सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट में दावा किया गया था कि क्लब संचालकों से कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी मांगी गई थी और मांग पूरी नहीं होने पर धमाके किए गए। हालांकि, उस मामले की जांच सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस द्वारा की गई थी। अब एक बार फिर यह क्लब प्रशासनिक कार्रवाई के चलते चर्चा में आ गया है। मंजूर नक्शे से अलग निर्माण पड़ा भारी प्रशासन के अनुसार, क्लब के लिए जो नक्शा मंजूर कराया गया था, उसके बाद अंदर अतिरिक्त निर्माण कर लिया गया था। इसी को लेकर बिल्डिंग ब्रांच की ओर से क्लब संचालकों को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, निर्धारित समय के भीतर निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे बिल्डिंग ब्रांच की टीम पुलिस की मौजूदगी में मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए क्लब को सील कर दिया। 2 साल पहले हुआ था क्लब के बाहर धमाका करीब दो साल पहले सेक्टर-26 स्थित दो क्लबों के बाहर धमाके हुए थे। इस घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग की ओर से ली गई थी। गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी सामने आई थी, जिसमें धमाकों की वजह कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी न देना बताई गई थी। धमाके सेविले बार एंड लाउंज और डि’ओरा क्लब के बाहर हुए थे। इस घटना में क्लबों के बाहर लगे शीशे टूट गए थे। सेविले बार एंड लाउंज के मालिकों में मशहूर रैपर बादशाह भी पार्टनर हैं। गोल्डी बराड़ के हवाले से सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में दावा किया गया था कि दोनों क्लबों के मालिकों से प्रोटेक्शन मनी के लिए संपर्क किया गया था। पोस्ट में कहा गया था कि उनकी ओर से कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद धमाके किए गए। साथ ही यह भी दावा किया गया था कि जो लोग उनकी कॉल्स को नजरअंदाज कर रहे हैं, वे इसे चेतावनी के तौर पर लें। हालांकि, इस मामले की जांच पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई थी। इस खबर को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं……
ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष? बंगाल में चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी खुले विद्रोह की ओर देख रही हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:02 जून, 2026, 12:25 IST जो बात हस्ताक्षरों को लेकर शिकायत के रूप में शुरू हुई वह लंबे समय से ममता बनर्जी के प्रभुत्व वाली पार्टी के अंदर नेतृत्व, असहमति और नियंत्रण पर एक बड़ी बहस में बदल गई है। ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी (दाएं)। कथित “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा निष्कासित पूर्व विधायक रीतब्रत बनर्जी पार्टी के विधायी रैंकों के भीतर पनप रहे विद्रोह के केंद्र में उभर रहे हैं। टीएमसी के नेता विपक्ष (एलओपी) के उम्मीदवार के समर्थन वाले एक प्रस्ताव पर कथित रूप से जाली हस्ताक्षर को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, वह अब पार्टी नेतृत्व के लिए एक संभावित चुनौती बन गया है। सीएनएन-न्यूज18 को पता चला है कि पार्टी के 80 में से 50 से अधिक विधायक “असली तृणमूल” के रूप में दावा करने की तैयारी कर रहे हैं और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद के लिए बनर्जी का समर्थन कर रहे हैं, जबकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस भूमिका के लिए अनुभवी नेता सोभोंदेब चट्टोपाध्याय को नामित किया है। इस घटनाक्रम से विपक्षी खेमे में बड़े विभाजन की अटकलें तेज हो गई हैं, राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने स्थिति की तुलना हाल के वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति में देखी गई आंतरिक टूट से की है। हस्ताक्षर पंक्ति जिसने संकट को जन्म दिया विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए एक प्रस्ताव पर केंद्रित है जिसमें चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन दिया गया है। बनर्जी और साथी विधायक संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि दस्तावेज़ पर कई विधायकों के जाली हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके बाद वे जांच की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रतिंद्र बोस के पास पहुंचे। यह भी पढ़ें | राय | टीएमसी पर शिवसेना जैसी विभाजन की आशंका के चलते ममता बनर्जी पार्टी और चुनाव चिह्न दोनों खो सकती हैं उनकी शिकायत पर सीआईडी जांच शुरू हुई। तब से कई टीएमसी विधायकों से पूछताछ की गई है, कुछ ने कथित तौर पर दावा किया है कि प्रस्ताव पर दिखाई देने वाले हस्ताक्षर उनके नहीं थे। हालाँकि, टीएमसी ने इस कदम को अनुशासनहीनता के रूप में देखा। पार्टी नेताओं ने तर्क दिया कि विधायकों को संवैधानिक अधिकारियों से संपर्क करने के बजाय आंतरिक रूप से अपनी चिंताओं को उठाना चाहिए था। मामला बढ़ने के कुछ ही घंटों के भीतर बनर्जी और साहा को पहले निलंबित कर दिया गया और फिर पार्टी से निकाल दिया गया। रीताब्रता सुर्खियों में बनर्जी के नाम का महत्व इस बात से है कि यह विवाद अब केवल कथित जालसाजी का नहीं रह गया है। हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद यह टीएमसी के भीतर अधिकार की परीक्षा के रूप में विकसित हुआ है। निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने दावा किया है कि विधायकों का एक बड़ा हिस्सा वैकल्पिक एलओपी उम्मीदवार के रूप में बनर्जी के पीछे एकजुट होना शुरू हो गया है। टीएमसी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, “तृणमूल के 80 विधायक हैं। इनमें से 50 से अधिक विधायकों की बैठक सोमवार दोपहर गेटवे होटल में हुई। वे कह रहे हैं कि वे ‘असली तृणमूल’ हैं और वे स्पीकर को एक नई सूची सौंपेंगे, जिसमें कहा जाएगा कि विपक्ष का एक अलग नेता होगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई टीएमसी सांसद भाजपा में जाने की संभावना तलाश रहे हैं। “12 लोकसभा सांसद हैं, मैं आपको सटीक संख्या दे रहा हूं, और कुछ राज्यसभा सांसद भी। वास्तव में, 12 लोकसभा सांसद और 6 राज्यसभा सांसद पहले ही भाजपा के साथ ‘पेंसिल बुकिंग’ कर चुके हैं। जहां तक तृणमूल विधायकों की बात है, भाजपा अभी उन्हें नहीं ले रही है, लेकिन वे हर दिन फोन करते रहते हैं, कहते हैं, ‘कृपया हमारी बुकिंग लें, कृपया हमारी बुकिंग लें।’ मैं यह बात खुलकर कह रहा हूं।” यह भी पढ़ें | लुप्त हो रहे कैडर: ममता बनर्जी की सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी नहीं हो सकती बढ़ता असंतोष उन रिपोर्टों के साथ मेल खाता है कि बड़ी संख्या में टीएमसी विधायक हाल की पार्टी बैठकों में शामिल नहीं हुए, जिससे अटकलें तेज हो गईं कि असंतोष दो निष्कासित विधायकों से भी आगे तक फैला हुआ है। जबकि पार्टी ने विभाजन के सुझावों को खारिज कर दिया है, प्रमुख संगठनात्मक बैठकों से दर्जनों विधायकों की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े कर दिए हैं। नंबर गेम बनर्जी को वास्तव में विपक्ष के नेता पद के लिए दावा पेश करने के लिए विपक्षी विधायकों के बीच पर्याप्त समर्थन प्रदर्शित करना होगा। यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एलओपी मुद्दा पहले से ही प्रक्रियात्मक विवादों में उलझा हुआ है। चट्टोपाध्याय ने पहले शिकायत की थी कि टीएमसी के पास पद के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए पर्याप्त सीटें होने के बावजूद, विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए दस्तावेजों और हस्ताक्षरों पर सवालों के बीच नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी मान्यता में देरी हुई है। यदि विधायकों का एक बड़ा समूह खुले तौर पर बनर्जी का समर्थन करता है, तो स्पीकर को अंततः प्रतिस्पर्धी दावों का सामना करना पड़ सकता है कि कौन वैध रूप से विपक्षी बेंच का प्रतिनिधित्व करता है। ममता के नियंत्रण के लिए परीक्षण? क्या बनर्जी अंततः विपक्ष के नेता बनेंगे या नहीं यह अनिश्चित बना हुआ है। लेकिन यह तथ्य कि अब पार्टी के आधिकारिक तौर पर चुने गए उम्मीदवार के विकल्प के रूप में उनके नाम पर चर्चा हो रही है, टीएमसी के सामने संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है। यह भी पढ़ें | अभिषेक बनर्जी का हमला 1990 में ममता के हमले जैसा नहीं, लेकिन पस्त टीएमसी अब भी इसे 3 तरीकों से इस्तेमाल कर सकती है जो बात हस्ताक्षरों को लेकर शिकायत के रूप में शुरू हुई वह लंबे समय से ममता बनर्जी के प्रभुत्व वाली पार्टी के अंदर नेतृत्व, असंतोष और नियंत्रण पर एक बड़ी बहस में बदल गई है। यदि आने वाले दिनों में अधिक विधायक सार्वजनिक रूप से बनर्जी के साथ आते हैं, तो एलओपी की लड़ाई बंगाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी के भीतर व्यापक सत्ता संघर्ष का पहला स्पष्ट संकेत बन सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के
फोर्ब्स बिलियनेयर्स की लिस्ट में माइक्रॉन के भारतवंशी सीईओ शामिल:संजय ने कोडेक का ऑफर ठुकराकर सैंडिस्क को घर-घर पहुंचाया

अमेरिकी चिप कंपनी माइक्रॉन टेक्नोलॉजी के सीईओ संजय मेहरोत्रा फोर्ब्स की चिप कंपनियों के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। फोर्ब्स के मुताबिक उनकी संपत्ति 11,406 करोड़ रुपए है। वे इस लिस्ट में शामिल इकलौते भारतीय हैं। इसमें शीर्ष पर एनवीडिया के सीईओ जेन्संग हुआंग हैं जिनकी नेटवर्थ 17.46 लाख करोड़ रु. है। कानपुर में जन्मे मेहरोत्रा (67) ने सैंडिस्क की सह-स्थापना से लेकर माइक्रॉन को 104 लाख करोड़ मार्केट कैप तक पहुंचाने में काफी योगदान दिया है। 1976 में संजय ने अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीसा मांगा, लेकिन तीन बार दूतावास ने मना कर दिया। अंत में पिता उनके साथ नई दिल्ली दूतावास पहुंचे और काउंसलर अधिकारी के लंच पर जाने के बावजूद लॉबी में डटे रहे। अंत में उन्हें वीसा मिला। इंटेल में पहली नौकरी के दौरान वे रात दो बजे तक नौकरी करते थे। 1988 में संजय ने दो दोस्तों के साथ मिलकर सैंडिस्क की नींव रखी। उस समय फ्लैश मेमोरी नई तकनीक थी, लेकिन संजय ने इसी पर दांव लगाया। आगे चलकर पेनड्राइव, एसडी कार्ड और मोबाइल मेमोरी को दुनिया भर तक पहुंचाने में सैनडिस्क की बड़ी भूमिका रही। 90 के दशक में जब सैनडिस्क एक स्टार्टअप था, तब कोडेक ने उनकी डिजिटल मेमोरी तकनीक को सिर्फ अपने लिए बनाने का ऑफर दिया और इसके बदले बड़ी रकम देने की बात कही, लेकिन संजय और उनके साथी एली हरारी ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने तकनीक को खुले मानक के रूप में रखने का फैसला किया। इसी सोच से कॉम्पैक्ट फ्लैश और आगे एसडी कार्ड बने, जो आज हर डिवाइस में इस्तेमाल होते हैं। उसी दौरान जब वैश्विक मंदी आई तो कंपनी पर दबाव बढ़ गया, लेकिन संजय ने कर्मचारियों की छंटनी के बजाय अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपनी बेसिक सैलरी शून्य कर दी और बड़े अधिकारियों की सैलरी भी घटाई। उनका मानना था कि मुश्किल समय में सबसे पहले त्याग नेतृत्व को करना चाहिए। इस फैसले ने उन्हें कर्मचारियों के बीच खास भरोसा दिलाया। पद से ज्यादा तकनीक पसंद थी इसलिए नौकरी तक छोड़ दी 80 के दशक में संजय आईडीटी में थे। कंपनी उन्हें बेहतर पद देने को तैयार थी, लेकिन जिस नॉन-वोलेटाइल मेमोरी प्रोजेक्ट पर वे काम कर रहे थे, उसे बंद कर दिया गया। तब पसंदीदा तकनीक के चलते उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। बाद में कहा, ‘मुझे मेमोरी का जुनून था।’ यही जिद सैनडिस्क की नींव बनी। 2017 में वे माइक्रॉन से जुड़े, जो अब गुजरात के साणंद में 26 हजार करोड़ रुपए की चिप फैसिलिटी बना रही है, जिसमें कंपनी की हिस्सेदारी 7838 करोड़ रुपए है।
भारतीय शेयर बाजार को साउथ कोरिया ने पीछे छोड़ा:AI में तेजी से मार्केट कैप ₹475 लाख करोड़ हुआ, भारत की वैल्यू ₹456 लाख करोड़

साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पछाड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। इस तेजी की बड़ी वजह चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियां हैं, जो दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के दम पर लगातार रिकॉर्ड बना रही हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप 86% बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 475 लाख करोड़ रुपए) पर पहुंच गई है। दूसरी तरफ, भारतीय शेयर बाजार की मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर (करीब 456 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। अमेरिकी शेयर बाजार का मार्केट कैप 78 ट्रिलियन सोर्स: ब्लूमबर्ग भारतीय बाजार के पिछड़ने की 3 मुख्य वजहें भारतीय शेयर बाजार के दुनिया में एक पायदान नीचे खिसकने के पीछे जानकारों ने तीन बड़े कारण बताए हैं: इकोनॉमी के मामले में भारत अभी भी साउथ कोरिया से दोगुने से ज्यादा बड़ा भले ही शेयर बाजार के वैल्यूएशन (मार्केट कैप) के मामले में साउथ कोरिया ने भारत को पछाड़ दिया हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था (GDP) के आकार के मामले में भारत अब भी साउथ कोरिया से बहुत आगे है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी का साइज 4.15 लाख करोड़ डॉलर ($4.15 ट्रिलियन) है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहीं, साउथ कोरिया की जीडीपी महज 1.93 लाख करोड़ डॉलर ($1.93 ट्रिलियन) है, जो भारत के मुकाबले आधे से भी कम है। मार्केट कैप क्या होता है? किसी भी देश के शेयर बाजार की ‘मार्केट कैपिटलाइजेशन’ का मतलब वहां की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल कीमत होती है। अगर किसी देश का मार्केट कैप बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।
भारतीय शेयर बाजार को साउथ कोरिया ने पीछे छोड़ा:AI में तेजी से मार्केट कैप ₹475 लाख करोड़ हुआ, भारत की वैल्यू ₹456 लाख करोड़

साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। इसकी बड़ी वजह चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियां हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के दम पर लगातार रिकॉर्ड बना रही हैं। ब्लूमबर्ग के अनुसार इस साल साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप 86% बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 475 लाख करोड़ रुपए) पर पहुंच गई है। वहीं, भारतीय शेयर बाजार की मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर (करीब 456 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। भारतीय बाजार के पिछड़ने की 3 मुख्य वजहें भारतीय शेयर बाजार के दुनिया में एक पायदान नीचे खिसकने के पीछे जानकारों ने तीन बड़े कारण बताए हैं: इकोनॉमी के मामले में भारत अभी भी साउथ कोरिया से दोगुने से ज्यादा बड़ा भले ही शेयर बाजार के वैल्यूएशन (मार्केट कैप) के मामले में साउथ कोरिया ने भारत को पछाड़ दिया हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था (GDP) के आकार के मामले में भारत अब भी साउथ कोरिया से बहुत आगे है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी का साइज 4.15 लाख करोड़ डॉलर (4.15 ट्रिलियन डॉलर) है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहीं, साउथ कोरिया की GDP महज 1.93 लाख करोड़ डॉलर (1.93 ट्रिलियन डॉलर) है, जो भारत के मुकाबले आधे से भी कम है। मार्केट कैप क्या होता है? किसी भी देश के शेयर बाजार की ‘मार्केट कैपिटलाइजेशन’ का मतलब वहां की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल कीमत होती है। अगर किसी देश का मार्केट कैप बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।






