हरे प्याज़ मटर का पराठा रेसिपी: पनीर-आलू नहीं, घर में ऐसे बनाएं हरे प्याज़ और मटर का पराठा, खाते ही खाते रह जायेंगे उगलियाँ

सामग्री: 2 कप आटे का आटा, 1 कप हरा प्याज, 1/2 कप मसाले वाले मटर, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा अदरक, 1/2 छोटा जीरा, 1/2 छोटा लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा धनिया पाउडर, नमक का स्वाद, घी छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले एक बाउल में सुलगते हुए मटर को इम्पैक्ट मैश कर लें। अब इसमें हरी प्याज, हरी मिर्च, अदरक, जीरा, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और नमक के मसाले अच्छी तरह मिला लें। छवि: फ्रीपिक एक बड़े पैमाने पर मिट्टी के बर्तनों का आटा लें और आवश्यकता के अनुसार पानी के टुकड़ों में आटा गूंध लें। क्रूज़ तो इसमें थोड़ा सा तेल भी मिला सकते हैं, इससे पराठे नरम बने होते हैं। आटे की छोटी-छोटी लोट्टियाँ बना लें। छवि: एआई अब एक लोई को प्रभाव बेलें और उसके बीच में तैयार स्टफिंग भर दें। बच्चे को बंद करके धीरे-धीरे-धीरे-धीरे पराठा बेल लें। गरम तवे पर पराठा डालें और दोनों तरफ घी या तेल का मिश्रण, सोना और कुरकुरा होने तक सेक लें। छवि: एआई गरमा-गरम हरे प्याज और मटर का पराठा दही, अचार या सफेद मक्खन के साथ सर्व करें। चाय के साथ इसका स्वाद और भी शानदार लगता है। छवि: एआई अगर बच्चे बना रहे हैं तो हरी मिर्च कम डालें। परांठे को ज्यादा स्वादिष्ट बनाने के लिए थोड़ा सा चाट मसाला भी मिला सकते हैं. मटर का इस्तेमाल करेंगे तो स्वाद और बेहतर आएगा। छवि: फ्रीपिक घर में मौजूद है आसान गुमनाम से बनने वाला यह पराठा स्वाद और स्वास्थ्य मित्र का बेहतरीन संयोजन है। एक बार इसे जरूर बनाएं, परिवार वाले बार-बार इसे जरूर बनाएं। छवि: फ्रीपिक
कनखजूरा गलती से कान में चला जाए तो कैसे जानें, ऐसे में कौन सी सावधानियों का रखें ध्यान? जानें

कनखजूरा (Centipede) एक जहरीला कीट होता है, जो आमतौर पर नम और अंधेरी जगहों में पाया जाता है. कई बार यह गलती से कान में घुस सकता है, जो बेहद असहज और डरावनी स्थिति पैदा कर देता है. हालांकि, सही समय पर सही कदम उठाने से इस स्थिति को संभाला जा सकता है. कान में कनखजूरा जाने पर क्या हो सकता है?अगर कनखजूरा कान में चला जाए, तो व्यक्ति को तुरंत कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं: तेज दर्द और जलन: कनखजूरा हिलने-डुलने से कान में तेज दर्द हो सकता है.अचानक सरसराहट या हलचल महसूस होना.घबराहट और बेचैनी.सुनने में परेशानी.कभी-कभी जहर के कारण सूजन या जलन.हालांकि, आमतौर पर यह जानलेवा नहीं होता, लेकिन अगर समय पर इलाज न हो तो संक्रमण या चोट हो सकती है. क्या कनखजूरा खतरनाक होता है?कनखजूरा हल्का विषैला होता है. अगर यह काट दे या अंदर ज्यादा देर तक फंसा रहे, तो: कान में सूजन बढ़ सकती है.इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है.कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है.इसलिए इसे हल्के में बिल्कुल न लें. ऐसी स्थिति में क्या करें?अगर कनखजूरा कान में चला जाए, तो तुरंत ये उपाय करें:1. घबराएं नहींसबसे पहले शांत रहें, क्योंकि घबराहट में आप गलत कदम उठा सकते हैं. 2. तेल या गुनगुना पानी डालेंसरसों का तेल, नारियल तेल या बेबी ऑयल की 2–3 बूंदें कान में डालें.इससे कनखजूरा मर जाता है या बाहर निकल सकता है. 3. सिर को झुकाएंजिस कान में कीट है, उस तरफ सिर झुकाकर बंद करें ताकि वह बाहर निकल सके. 4. रुई, पिन या सुई का इस्तेमाल न करेंकान में कोई नुकीली चीज डालने से स्थिति और खराब हो सकती है और चोट लग सकती है. 5. तुरंत डॉक्टर से संपर्क करेंअगर कीट बाहर न निकले या दर्द ज्यादा हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए?कान में उंगली या तीली डालना.तेज झटके से निकालने की कोशिश करना.देर तक इंतजार करना.ये सभी चीजें नुकसान बढ़ा सकती हैं. बचाव कैसे करें?सोने से पहले आसपास साफ-सफाई रखें.जमीन पर सीधे न सोएं.नम और गंदे स्थानों से दूर रहें.बच्चों का खास ध्यान रखें.
लौकी रसम रेसिपी: दाल खा गए हैं बोर? उदयपुर में मिठाई चटपटी लोकी रसम, चावल के साथ सबसे अच्छा; यूनिक विधि नोट करें

लोकी बॉडी को ठंडक ड्रॉस्ट्रिक का काम करती है, वहीं रसम का कट्टा-तीखा स्वाद खाने का मजा दोगुना कर देती है। आइये जानते हैं इसकी आसान रेसिपी। छवि: फ्रीपिक लोकी रसम बनाने की सामग्री: 1 लोकी, 1 टमाटर, 2 बड़ी लौकी अरहर दाल, 1 छोटी लौकी रसम पाउडर, 1/2 छोटी लौकी, 1 छोटा लौकी, स्वादानुसार नमक, 1 छोटी लौकी इमली का पल्प, 3 कप पानी, हरा धनियां छवि: फ्रीपिक धन्यवाद के लिए: 1 छोटा चम्मच घी, 1/2 छोटा चम्मच घी, 1 सूखी लाल मिर्च, 7-8 कैरी पत्ते, चुटकी भर हींग। यह पेट के लिए भी स्वादिष्ट है। छवि: फ्रीपिक लोकी रसम बनाने की विधि: सबसे पहले लोकी को ढोकर की छोटी सी टोकरी में काट लें। अब हो रहा है एक पैन में लोकी, टमाटर, हल्दी और थोड़ा सा पानी का गैस्ट्रोनॉमी तक पका लें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद एक छोटा तड़का पैन में घी गर्म करें। सम्मिलित राई। जब राई चटकने लगे तो सूखी लाल मिर्च, कैरी पत्ते और हींग डाल दें। तैयार हो जाओ दादी को रसम में। छवि: एआई यह हल्की और आसानी से पचने वाली डिश है। गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने में मदद मिलती है। चावल के साथ इसका स्वाद बेहद शानदार लगता है. कम वजन में भी टेस्टी बन जाती है। छवि: एआई अगर आप इसे और अधिक स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं तो इसमें थोड़ी सी काली मिर्च पाउडर और लहसुन का तड़का भी डाल सकते हैं। वहीं नारियल की चटनी और पापड़ के साथ इसका मजा डबल हो जाता है। छवि: सोशल मीडिया
schizophrenia diagnosis| Twisha sharma death case: सिजोफ्रेनिया कौन-सी बीमारी है? ट्विशा की सास के दावे में कितनी सच्चाई, डॉक्टर ने बताया

सिजोफ्रेनिया शब्द इन दिनों आपने टीवी, इंटरनेट और अखबार में खूब देखा, सूना होगा. ये एक गंभीर मानसिक बीमारी है. इसका जिक्र ट्विशा शर्मा केस में भी किया गया है. मृतक ट्विशा की सास ने मीडिया में बताया कि उन्हें सिजोफ्रेनिया नाम की बीमारी थी. हालांकि ये बीमारी ट्रीटेबल है, लेकिन बहुत ही रेयर और सीरियस होती है. जिन लोगों को सिजोफ्रेनिया का पता चलता है, उन्हें यह समझने में दिक्कत हो सकती है कि क्या असली है और क्या काल्पनिक है. सिर्फ 100 में से एक को ही ये बीमारी होती है. खासबात ये है कि मरीज को खुद अपनी इस बीमारी का पता नहीं लग पाता है. नई दिल्ली स्थित तुलसी हेल्थकेयर के सीनियर साइकेट्रिस्ट और सी ई ओ डॉक्टर गौरव गुप्ता से हमने इस बीमारी के बारे में गहराई से समझने के लिए बात की. डॉक्टर ने बताया कि सिजोफ्रेनिया ट्रीटेबल मेंटल बीमारी है जो किसी व्यक्ति के सोचने के तरीके, भावनाओं, टास्क और रियलिटी की समझ पर असर डालती है. लेकिन इसका निदान तुरंत नहीं होता है. इसके लिए कई हफ्तों और महीनों तक मरीज की काउंसलिंग करनी पड़ती है. लेकिन इससे पहले भी जरूरी है कि इसके लिए लक्षण नजर आए. तो चलिए समझते हैं सिजोफ्रेनिया के लक्षण और इसके निदान के लिए क्या प्रोसेस किया जाता है और कितना समय निकलता है. सिजोफ्रेनिया के लक्षण ऐसी चीजें देखना और सुनना जो असल में वहां नहीं हैं.हेल्लुसिनेशन होना, ऐसी चीजों का अनुभव करना या उन पर यकीन करना जो सच नहीं हैं.उलझे हुए और रैंडम थॉट्स आना.अजीबोगरीब व्यवहार करना.सामाजिक मेलजोल से दूर रहना.बहुत कम या बिल्कुल भी भावनाएं जाहिर न करना.ध्यान न लगा पाना.नींद का पैटर्न बिगड़ जाना.रोजमर्रा के काम न कर पाना.साफ-सफाई का ध्यान न रखना.व्यक्तित्व में बदलाव.दूसरों पर विश्वास न करना या शक करना. बीमारी को समझने में हो सकती है गलत!एक्सपर्ट बताते हैं कि सिजोफ्रेनिया को अक्सर गलत समझा जाता है, क्योंकि यह माना जाता है कि इस बीमारी वाले व्यक्ति की स्प्लिट पर्सनैलिटी होती है. जबकि सिजोफ्रेनिया और स्प्लिट पर्सनैलिटी एक ही चीज नहीं हैं. लेकिन अगर आपने ट्विशा की सास को मीडिया ट्रायल में ये कहते हुए सुना है कि ट्विशा की दो स्प्लिट पर्सनैलिटी नजर आने लगी थी, तो आपको डॉक्टर की बात पर गौर करने की जरूरत है. क्योंकि सिजोफ्रेनिया में ऐसा नहीं होता है. कैसे शुरु होती है ये बीमारीएक्सपर्ट ने बताया कि इस बीमारी की शुरुआत धीरे-धीरे होती है, लेकिन जिन लोगों को यह बीमारी होती है, उनमें लक्षण अचानक भी उभर सकते हैं. सिजोफ्रेनिया के लक्षण अक्सर दूसरी मानसिक बीमारियों, जिनमें अन्य साइकोटिक या न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी शामिल हैं, के लक्षण एक जैसे ही लगते हैं. इसलिए, सिजोफ्रेनिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर को व्यक्ति का ध्यान से असेसमेंट करना पड़ता है निदान में कितना समय लगता हैएक्सपर्ट ने ये बात साफ कहा है कि तुरंत किसी व्यक्ति को देखकर सिजोफ्रेनिया की पुष्टि नहीं की जा सकती है. इसके निदान के लिए एक पूरा प्रोसेस फॉलो किया जाता है, जिसमें कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक का समय लग सकता है. अगर लक्षण 6 महीने या उससे ज्यादा समय तक बने रहें, तब डॉक्टर इस बीमारी को कन्फर्म करते है. क्योंकि डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर को मरीज के व्यवहार, सोच और मानसिक स्थिति को लगातार जांचना पड़ता है. क्या है डायग्नोसिस का पूरा प्रोसेससिजोफ्रेनिया के डायग्नोसिस प्रोसेस के बारे में डॉक्टर ने बताया कि इसका का पता किसी एक लैब टेस्ट, डायग्नोस्टिक स्कैन या किसी अन्य मेडिकल प्रॉसिजर के जरिए नहीं लगाया जा सकता है. जांच प्रक्रिया के दौरान, आमतौर पर मरीज की पूरी तरह से मानसिक जांच करके आकलन की प्रक्रिया शुरू की जाती है. – असेसमेंट के इंटरव्यू वाले हिस्से के दौरान, साइकेट्रिस्ट व्यक्ति के मानसिक स्थिति, कामकाज और रोजमर्रा के काम-काज के बारे में सावल पूछे जाते हैं ताकि सिजोफ्रेनिया का पता लगाने के लिए एक क्लिनिकल आधार बनाया जा सके. मरीज की पिछली या मौजूदा मेडिकल हिस्ट्री पर भी गौर किया जाता है, जिसमें परिवार में मानसिक समस्याएं, ड्रग्स या शराब का इस्तेमाल, और नींद से जुड़े दूसरे जरूरी दस्तावेज शामिल हैं. हर इंटरव्यू साइकेट्रिस्ट को मरीज की अपनी सोच, भावनाओं और व्यवहार को जाहिर करने की काबिलियत और तरीके को समझने का मौका देता है. – इसके अलावा मेडिकल जांच भी किया जाता है. इसमें ब्लड टेस्ट और ब्रेन इमेजिंग शामिल हैं, साथ ही साइकोलॉजिकल जांच भी, बीमारी का पता लगाने में मददगार साबित होती है. इन टेस्ट का मकसद यह पता लगाना है कि क्या मरीज के लक्षण ड्रग्स के इस्तेमाल, हार्मोन के असामान्य स्तर, इन्फेक्शन, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर या किसी दूसरी शारीरिक समस्या से जुड़े हैं. – मरीज की जांच में परिवार के सदस्यों को भी शामिल किया जाता है. क्योंकि वे ऐसी बहुत सी जानकारी देते हैं जो हेल्थकेयर देने वालों को मरीज की पर्सनैलिटी में आए बदलावों, जैसे कि अग्रेशन , सबसे अलग-थलग रहना, भ्रम या कामकाज और सोशल एक्टिविटी में सफलता के लेवल में कमी, को पहचानने में मदद करती है, जिनके बारे में शायद मरीज को खुद पता न हो. क्या है इलाजउपचार में आमतौर पर दवाएं , साइकोथेरेपी , फॅमिली थेरेपी , रिहैबिलिटेशन , जीवनशैली संबंधी सहायता और लगातार मनोचिकित्सकीय जांच-पड़ताल शामिल होती है. जिन लोगों में सिजोफ्रेनिया का डायग्नोसिस हुआ है, वे लगातार देखभाल और एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम मिलने पर अपने लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं और अपने जीवन की क्वालिटी में सुधार ला सकते हैं. क्या ट्विशा की बीमारी को लेकर किया दावा सही?यदि यहां बताए गए जानकारी और ट्विशा की सास के दावों को देखा जाए तो दिमाग में कुछ सवाल खड़े होते हैं. पहला- जब शादी को ही 5 महीने हुए थे तो ट्विशा को ऐसी मेंटल डिजीज कैस हो सकती है जिसके निदान में ही 6 महीने तक समय लग जाता है? दूसरा- ट्विशा की सास ने ये बात भी खुद कही है कि शादी के 1-2 महीने तक सब कुछ ठीक था, उनका व्यवहार भी अच्छा था, तो अचानक उन्हें सिजोफ्रेनिया कैसे हो सकता है, जो कि बहुत ही धीरे- धीरे होता है? हालांकि अभी इस मामले में जजमेंट आना बाकी है, हम सिर्फ इस बीमारी के बारे में आपको जानकारी दे रहे
रुड़की की सोनिया ने सीनियर नेशनल एथलेटिक्स में जीता सिल्वर:रांची के ट्रैक पर 10 हजार मीटर दौड़ीं; पहले ही दिन हासिल किया पदक

झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में शुक्रवार से शुरू हुई 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन चैंपियनशिप में उत्तराखंड की बेटी ने पहले ही दिन पदक हासिल कर लिया। रुड़की के एक छोटे से गांव की रहने वाली एथलीट कुमारी सोनिया ने महिला वर्ग की 10,000 मीटर रेस में सिल्वर मेडल जीतकर राज्य को गौरवान्वित किया। सोनिया ने यह रेस 36 मिनट 16.22 सेकंड में पूरी की। वह स्पोर्ट्स कॉलेज में उत्तराखंड के वरिष्ठ कोच लोकेश कुमार से प्रशिक्षण ले रही हैं। सोनिया की इस सफलता के पीछे उनके संघर्षों की एक लंबी कहानी है। यह वही सोनिया हैं, जिन्होंने संसाधनों की भारी कमी के बावजूद कभी हालातों के आगे घुटने नहीं टेके। फटे जूतों से रांची के पोडियम तक का सफर सोनिया की असली पहचान 2025 में हुए राष्ट्रीय खेलों के दौरान बनी थी, जब उन्होंने 10,000 मीटर की दौड़ में ही ब्रॉन्ज मेडल जीता था। उस जीत की सबसे बड़ी बात यह थी कि सोनिया के पास दौड़ने के लिए सही स्पाइक्स तक नहीं थे। वह फटे जूतों में ट्रैक पर उतरी थीं। इसके बाद उन्होंने जापान के फुकुओका में हुई 18वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। महंगे सप्लीमेंट्स तो दूर, वह ऑनलाइन मिलने वाले सस्ते मल्टी-विटामिन के सहारे ही अपनी तैयारी कर रही थीं। स्नेह राणा ने बढ़ा था हौसला, दिए थे नए स्पाइक्स हाल ही में जब सोनिया के संघर्ष की यह कहानी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा तक पहुंची थी, तो उन्होंने देहरादून स्थित अपने स्पोर्ट्स स्ट्राइव टर्फ पर सोनिया को बुलाया था। फटे जूतों में दौड़ने वाली सोनिया को जब स्नेह राणा ने प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट सौंपा, तो वह भावुक हो गई थीं। नए स्पाइक्स और स्नेह राणा से मिले उसी नए आत्मविश्वास को लेकर सोनिया रांची के ट्रैक पर उतरीं और सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया। पिता करते हैं मजदूरी, बहनों ने निभाया मां का फर्ज सोनिया का पूरा बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और मां का निधन हो चुका है। सोनिया बताती हैं कि कई बार ऐसा वक्त आया जब तंगी के कारण ट्रेनिंग छोड़ने का मन हुआ, लेकिन उनकी बहनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। बहनों ने ही मां की कमी पूरी की और हर मुश्किल में साथ खड़ी रहीं। गांव के तानों को बनाया अपनी ताकत सोनिया के सफर में सिर्फ गरीबी ही नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव भी बड़ी चुनौती रहा। गांव के लोग अक्सर ताने मारते थे और परिवार से कहते थे कि लड़की को वापस बुला लो। लेकिन, सोनिया ने इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत से खुद को साबित करने का रास्ता चुना और आज रांची में जीता गया यह सिल्वर मेडल उन सभी तानों का जवाब है।
गर्मियों के लिए फालसा छाछ ड्रिंक: गर्मी में शरीर को ऊर्जा देने का काम करेगा फालसे का ठंडा-ठंडा छाछ, मिनटों में लू की होगी छुट्टी

फालसा अपने आश्रम-मी थे स्वाद और विश्वविद्यालय तासीर के लिए जाना जाता है। साथ ही छाछ पेट को ठंडा रखने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इन दोनों का कॉम्बिनेशन समर के लिए किसी भी सुपर ड्रिंक से कम नहीं है। छवि: सोशल मीडिया फालसा छाछ बनाने की सामग्री: 1 कप समुद्री फालसे, 2 कप जैतून छाछ, 1 छोटा चम्मच बाकी जीरा पाउडर, स्वादानुसार काला नमक, 4-5 पुदीने की सब्जी, बर्फ के टुकड़े, थोड़ा सा या शहद चीनी छवि: एआई सबसे पहले झूठ को अच्छी तरह धो लें। अब बड़े पैमाने पर एक बाउल में बेकार का रस मिला दिया गया। छवि: एआई इसमें जीरा पाउडर, काला नमक और पुदीने की सामग्री के साथ मिश्रण भी शामिल करें। अगर आपको इसमें मेला पसंद है तो थोड़ा सा शहद या चीनी भी मिला सकते हैं। अब इसमें बर्फ डालें और ठंडा-ठंडा सर्व करें। छवि: एआई शरीर को तुरंत ठंडक दिशानिर्देश में मदद मिलती है। लू और डायग्नोस्टिक्स से बचाव में सहायक होता है। पेट को असर और ठंडा होता है। पाचन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। छवि: एआई गर्मी में शरीर की थकान और कमजोरी को दूर करना उपयोगी माना जाता है। अगर आप इसका स्वाद और ज्यादा मजा बनाना चाहते हैं तो ऊपर से छोटी सी चाट मसाला डाल सकते हैं। छवि: एआई पुदीने की जगह तुलसी के पौधे से भी इसका स्वाद काफी ताज़ा लगता है। समरस्लैम में जापान के समुद्री डाकू और चॉकलेट ड्रिंक पीने का मन हो तो फालसे की छाछ एक बेहतरीन पद हो सकता है। छवि: एआई
अमेरिकी हाउसिंग मार्केट में दिलचस्प ट्रेंड:लाइफस्टाइल इकोसिस्टम और जेनरेशनल वेल्थ के लिए प्रॉपर्टी में निवेश कर रहीं महिलाएं

मियामी में 50 करोड़ रुपए का वॉटरफ्रंट अपार्टमेंट हो, न्यूयॉर्क में पेंटहाउस हो या नैशविले में इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी। अमेरिका के इन टॉप-एंड रियल एस्टेट बाजार में अब एक नया चेहरा दिख रहा है। और यह चेहरा युवा महिलाओं का है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियल्टर्स के मुताबिक अमेरिका में सिंगल महिला होमबायर्स की हिस्सेदारी 21% है, जबकि सिंगल पुरुष खरीदार महज 9% ही हैं। इतना ही नहीं, सिंगल महिला होमबायर्स में 29 वर्ष की युवतियों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 35% पहुंच गई है। 2 करोड़ से ज्यादा सिंगल महिलाएं अमेरिका में घर की मालकिन हैं। पुरुषों के मामले में यह संख्या 1.4 करोड़ है। जहां बात 40 करोड़ से ऊपर की प्रॉपर्टी की हो, वहां तस्वीर और भी दिलचस्प है। कोल्डवेल बैंकर की रिपोर्ट कहती है कि 50 लाख डॉलर (करीब ~ 48 करोड़) नेटवर्थ वाली महिलाएं 15% लग्जरी घरों की मालकिन हैं। सिर्फ घर नहीं, पूरे ‘लाइफस्टाइल इकोसिस्टम’ पर बढ़ा फोकस मैनहट्टन में प्राइवेट इक्विटी बैकग्राउंड की जेन शी ने अपनी बिल्डिंग पांच बार विजिट करने के बाद खरीदारी का फैसला किया और वह भी फिनिशिंग देखने नहीं, बल्कि यह जांचने कि रोज की जिंदगी कैसे चलती है। महिलाएं उस ‘इनविजिबल वैल्यू’ को ज्यादा समझती हैं जो अच्छे सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर से आती है। मियामी के फोर सीजन्स प्राइवेट रेसिडेंस (कीमत 50 करोड़ से शुरू) में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर क्रिस्टीन मार्टिनेज डे कास्त्रो कहती हैं, ‘अगर वाइफ को फोर सीजन्स पसंद आ गया, तो बस। फिर कोई बातचीत नहीं होती। ’नंबरों में देखिए महिलाओं की बढ़ती ताकत कैटेगरी – आंकड़ा अमेरिका में सिंगल महिला होमबायर्स – 21% सिंगल पुरुष होमबायर्स – 9% घर की मालकिन सिंगल महिलाएं – 2 करोड़+ घर के मालिक सिंगल पुरुष – 1.4 करोड़ 42 करोड़+नेटवर्थ महिलाओं का लग्जरी होम शेयर – 15% अमीर महिला खरीदार क्या चाहती हैं ? फुल-सर्विस बिल्डिंग – बटलर, कंसियर्ज, हाउसकीपिंग वेलनेस अमेनिटी – स्पा, पूल, योगा सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर – कम्युनिटी स्पेस, एंटरटेनिंग एरिया लॉन्ग-टर्म वैल्यू – जेनरेशनल वेल्थ की सोच प्राइवेसी, सिक्योरिटी – 24/7 सुरक्षा, मैनेज्ड इकोसिस्टम
अमेरिकी हाउसिंग मार्केट में दिलचस्प ट्रेंड:लाइफस्टाइल इकोसिस्टम और जेनरेशनल वेल्थ के लिए प्रॉपर्टी में निवेश कर रहीं महिलाएं

मियामी में 50 करोड़ रुपए का वॉटरफ्रंट अपार्टमेंट हो, न्यूयॉर्क में पेंटहाउस हो या नैशविले में इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी। अमेरिका के इन टॉप-एंड रियल एस्टेट बाजार में अब एक नया चेहरा दिख रहा है। और यह चेहरा युवा महिलाओं का है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियल्टर्स के मुताबिक अमेरिका में सिंगल महिला होमबायर्स की हिस्सेदारी 21% है, जबकि सिंगल पुरुष खरीदार महज 9% ही हैं। इतना ही नहीं, सिंगल महिला होमबायर्स में 29 वर्ष की युवतियों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 35% पहुंच गई है। 2 करोड़ से ज्यादा सिंगल महिलाएं अमेरिका में घर की मालकिन हैं। पुरुषों के मामले में यह संख्या 1.4 करोड़ है। जहां बात 40 करोड़ से ऊपर की प्रॉपर्टी की हो, वहां तस्वीर और भी दिलचस्प है। कोल्डवेल बैंकर की रिपोर्ट कहती है कि 50 लाख डॉलर (करीब ~ 48 करोड़) नेटवर्थ वाली महिलाएं 15% लग्जरी घरों की मालकिन हैं। सिर्फ घर नहीं, पूरे ‘लाइफस्टाइल इकोसिस्टम’ पर बढ़ा फोकस मैनहट्टन में प्राइवेट इक्विटी बैकग्राउंड की जेन शी ने अपनी बिल्डिंग पांच बार विजिट करने के बाद खरीदारी का फैसला किया और वह भी फिनिशिंग देखने नहीं, बल्कि यह जांचने कि रोज की जिंदगी कैसे चलती है। महिलाएं उस ‘इनविजिबल वैल्यू’ को ज्यादा समझती हैं जो अच्छे सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर से आती है। मियामी के फोर सीजन्स प्राइवेट रेसिडेंस (कीमत 50 करोड़ से शुरू) में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर क्रिस्टीन मार्टिनेज डे कास्त्रो कहती हैं, ‘अगर वाइफ को फोर सीजन्स पसंद आ गया, तो बस। फिर कोई बातचीत नहीं होती। ’नंबरों में देखिए महिलाओं की बढ़ती ताकत कैटेगरी – आंकड़ा अमेरिका में सिंगल महिला होमबायर्स – 21% सिंगल पुरुष होमबायर्स – 9% घर की मालकिन सिंगल महिलाएं – 2 करोड़+ घर के मालिक सिंगल पुरुष – 1.4 करोड़ 42 करोड़+नेटवर्थ महिलाओं का लग्जरी होम शेयर – 15% अमीर महिला खरीदार क्या चाहती हैं ? फुल-सर्विस बिल्डिंग – बटलर, कंसियर्ज, हाउसकीपिंग वेलनेस अमेनिटी – स्पा, पूल, योगा सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर – कम्युनिटी स्पेस, एंटरटेनिंग एरिया लॉन्ग-टर्म वैल्यू – जेनरेशनल वेल्थ की सोच प्राइवेसी, सिक्योरिटी – 24/7 सुरक्षा, मैनेज्ड इकोसिस्टम
पेट्रोल-डीजल पर VAT घटा सकते हैं राज्य:तेलंगाना में सबसे ज्यादा लगता है टैक्स, ₹10 तक एक्साइज ड्यूटी घटा चुका केंद्र

केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर पेट्रोल-डीजल सस्ता करने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार जल्द ही राज्यों से पेट्रोल और डीजल पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) कम करने की अपील कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा शासित 22 राज्यों में वैट में कटौती की पूरी संभावना है। डीजल की कीमतों को नियंत्रित करना प्राथमिकता है, क्योंकि इसका सीधा असर परिवहन, खेती और उद्योग जगत पर पड़ता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की बढ़ रही हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.9% बढ़कर $104.52 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। ऐसे में बढ़ती महंगाई से लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। हालांकि, इसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत में 3.90 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। सचिवों के समूह ने की ईरान युद्ध के असर पर चर्चा ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर हाल ही में सचिवों के एक अधिकार प्राप्त ग्रुप की बैठक हुई। इस बैठक में चर्चा की गई कि महंगे कच्चे तेल के बोझ को कम करने के लिए वैट में कटौती जरूरी है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाकर शून्य कर दी थी, जबकि पेट्रोल पर ₹3 की कटौती की गई थी। अब केंद्र चाहता है कि राज्य भी अपनी ओर से टैक्स कम करें। डीजल पर फोकस, क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई पर अधिकारियों के मुताबिक, भाजपा शासित राज्य सबसे पहले डीजल पर टैक्स कम करने पर विचार कर सकते हैं। भारत में हर साल करीब 9.47 करोड़ टन डीजल की खपत होती है, जो किसी भी अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से कहीं ज्यादा है। पेट्रोल का इस्तेमाल ज्यादातर निजी वाहनों के लिए होता है, लेकिन डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, खेती और इंडस्ट्री में होता है। अगर डीजल सस्ता होता है तो माल ढुलाई सस्ती होगी, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम गिरेंगे। अप्रैल में थोक महंगाई दर 42 महीने के उच्च स्तर 8.3% पर पहुंच गई थी। 2022 का फॉर्मूला फिर दोहराने की तैयारी अगर भाजपा शासित राज्य वैट कम करते हैं, तो यह साल 2022 की स्थिति जैसा होगा। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। तब भी केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी घटाई थी और राज्यों से वैट कम करने को कहा था। वर्तमान में भाजपा और उसके सहयोगी दल देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में हैं। भारत में अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें 1 से 27% तक लगता हैं। इसमें कटौती होने से तेल की कीमतों में बड़ा अंतर आ सकता है। एक्सपर्ट बोले- जनता के जीवन स्तर को बचाना जरूरी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा, “ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ी हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम सिर्फ 4% के करीब बढ़े हैं। केंद्र ₹10 की एक्साइज ड्यूटी घटा चुका है, अब राज्यों की बारी है। हमें साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि आम नागरिक के जीवन स्तर पर कोई बुरा असर न पड़े। राज्यों को अपने खजाने पर ज्यादा असर डाले बिना यह कदम उठाना चाहिए।” राज्यों की कमाई और तेल कंपनियों का घाटा विपक्ष का पलटवार: ‘कीमतें बढ़ाने की जमीन तैयार हो रही’ दूसरी ओर, कांग्रेस प्रवक्ता रंजीत रंजन ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्यों से वैट घटाने के लिए कहना इस बात का संकेत है कि सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक और बड़ी बढ़ोतरी की जमीन तैयार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता था, तब केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपना खजाना भरा और जनता को लाभ नहीं दिया।
'आईपीएल में बिहार की भी अपनी टीम होनी चाहिए':वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने उठाई मांग, CM सम्राट बोले- निश्चित ही सकारात्मक निर्णय लेंगे

आईपीएल 2026 में बिहार के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। चाहे वह पटना की ईशान किशन हो, समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी या फिर गोपालगंज के साकिब हुसैन। सभी अपने शानदार परफॉर्मेंस से चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बिहार के अपनी खुद की टीम बनाने की मांग की है। बिहार के अनिल अग्रवाल ने कहा कि, ‘अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का टैलेंट मैदान पर दिखे।’ बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए- अनिल अग्रवाल अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि, ‘क्या आपको नहीं लगता चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए? बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं। पटना में जन्मे ईशान किशन ने सबसे कम गेंदों में ODI डबल सेंचुरी लगाई। समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में IPL डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने। गोपालगंज के साधारण परिवार में जन्मे साकिब हुसैन की शानदार गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नज़रें हैं।’ बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी- अनिल अग्रवाल बिहार की अपनी आईपीएल क्रिकेट टीम नहीं होने को लेकर अफसोस जाहिर करते हुए अनिल अग्रवाल ने लिखा, ‘एक बात मुझे हमेशा खलती है कि हमारे बिहार को क्रिकेट में अब भी वह नाम और पहचान क्यों नहीं मिल पा रही, जिसके हम हकदार हैं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘मेरा हमेशा से यह सपना और प्रयास रहा है कि बिहार के युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले, हमारे खिलाड़ियों को भी वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट बिहार में ही मिलना चाहिए।’ अनिल अग्रवाल ने विश्वास जताते हुए कहा कि, ‘मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हमारे बच्चों को सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलें, तो हमारे बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी।’ हमारी मिट्टी का टैलेंट मैदान पर दिखे – अनिल अग्रवाल अनिल अग्रवाल ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘मैं इस काम में बिहार के युवाओं के साथ पूरी मज़बूती से खड़ा हूं। बिहार की क्रिकेट टीम और यहां के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए मैं अपनी तरफ से कंडीशनल सपोर्ट दूंगा। बिहार मेरे लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, एक इमोशन है। और अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का टैलेंट मैदान पर दिखे।’ सीएम सम्राट ने क्रिकेट टीम को लेकर दिया भरोसा वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडियो एक्स पर पोस्ट कर सीएम सम्राट ने लिखा, ‘आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूं। बिहार के क्रिकेट “इमोशन” के लिए सरकार स्पष्ट “विजन” के साथ “मिशन” मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।’








