गर्मियों में खाना जल्दी क्यों खराब हो जाता है? क्या होती है इसकी वजह, डॉक्टर से समझ लीजिए

Last Updated:May 07, 2026, 16:01 IST Summer Heat and Food Spoilage: गर्मियों में ज्यादा तापमान और नमी के कारण बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. इससे खाना जल्दी खराब हो जाता है. इसी वजह से गर्मियों में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं. सही स्टोरेज, साफ-सफाई और ताजा खाना खाकर गर्मियों में फूड पॉइजनिंग से बचा जा सकता है. गर्मी में ज्यादा तापमान और नमी के कारण खाना जल्दी खराब हो जाता है. Food Safety Tips in Summer Season: गर्मियों के मौसम में खाना जल्दी खराब हो जाता है. खाने को कई घंटों तक फ्रेश बनाए रखने के लिए इसे फ्रिज में रखना जरूरी होता है. गर्मियों में यह एक कॉमन समस्या है. कई बार सुबह बना भोजन शाम तक खराब होने लगता है या उसमें खट्टापन और बदबू आने लगती है. डॉक्टर्स के अनुसार इसके पीछे सबसे बड़ी वजह गर्म तापमान और नमी होती है, जो बैक्टीरिया और फंगस को तेजी से बढ़ने का मौका देती है. यही कारण है कि गर्मियों में फूड पॉइजनिंग के मामले भी बढ़ जाते हैं. गर्मियों में पेट की समस्याओं से लोगों को हमेशा ताजा भोजन करना चाहिए. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया गर्मियों में तापमान बढ़ जाता है और इसकी वजह से बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं. इस वजह से पका हुआ खाना जल्दी संक्रमित हो सकता है और कुछ घंटों में खराब होने लगता है. खासकर दूध, दही, चावल, दाल, मांस और कटे हुए फल जैसी चीजें ज्यादा जल्दी खराब होती हैं. खाना खराब होने की एक और वजह हवा में मौजूद नमी है. नमी बढ़ने से सूक्ष्मजीवों को बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण मिलता है. अगर खाना खुला छोड़ दिया जाए या सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो बैक्टीरिया उसमें तेजी से पनपने लगते हैं. यही वजह है कि गर्मियों में खाना ढककर रखने और फ्रिज में स्टोर करने की सलाह दी जाती है. एक्सपर्ट के मुताबिक खराब खाना खाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, बुखार और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है. इसलिए खाने की ताजगी को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए. गर्मियों में खाने को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए. खाना बनने के दो घंटे के भीतर उसे फ्रिज में रख देना चाहिए. बार-बार गर्म और ठंडा करने से भी खाना जल्दी खराब हो सकता है. इसके अलावा साफ बर्तनों का इस्तेमाल और हाथों की सफाई भी बेहद जरूरी है. डॉक्टर की मानें तो गर्मियों में जरूरत से ज्यादा खाना बनाकर लंबे समय तक न रखें. ताजा बना खाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. अगर खाने से अजीब गंध आए, रंग बदल जाए या स्वाद अलग लगे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. गर्मियों में खाना जल्दी खराब होना गंभीर समस्या है. सही तापमान, साफ-सफाई और उचित स्टोरेज अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है. थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्याओं से सुरक्षित रख सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे युजवेंद्र चहल:वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट हुआ, रियान पराग पर जुर्माना लगा था

पंजाब किंग्स के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे हैं। इस पर विवाद हो गया है। दरअसल, पंजाब किंग्स ने टीम के सफर का वीडियो पोस्ट किया। इसमें युजवेंद्र चहल ई-सिगरेट पीते दिख रहे हैं। विवाद होने के बाद पंजाब ने यह वीडियो डिलीट कर दिया है। चहल से पहले 28 अप्रैल को न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग भी ड्रेसिंग रूम में वेप का इस्तेमाल करते पाए गए थे। इसके बाद BCCI ने उन पर मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया गया था। पूरा वीडियो देखिए… फ्लाइट सुरक्षा और कड़े नियमों का उल्लंघन फ्लाइट में धूम्रपान या ई-सिगरेट का उपयोग करना सख्त वर्जित है। विमान के संवेदनशील वातावरण में ऐसी लापरवाही आग लगने का कारण बन सकती है, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्हें ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डालने या कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। भारत में 2019 से ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है भारत सरकार ने ‘ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (PECA) 2019’ के तहत वेप्स और ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया है। उल्लंघन पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में एलीट एथलीट का सार्वजनिक मंच पर इसका इस्तेमाल कानून और खेल की मर्यादा का उल्लंघन माना गया। ———————————————————— IPL से जुड़ी यह खबर देखिए IPL- ईशान ने लगातार 3 छक्कों से फिफ्टी पूरी की; यानसन ने 4 ओवर में 61 दिए सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL में बुधवार को पंजाब को 33 रन से हराया। हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में पंजाब की टीम 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी। पढ़ें पूरी खबर
फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे युजवेंद्र चहल:वीडियो सामने आया, रियान पराग पर जुर्माना लगा था

पंजाब किंग्स के अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल एक नए विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि हैदराबाद की यात्रा के दौरान वे फ्लाइट के अंदर ई-सिगरेट (वेप) का इस्तेमाल कर रहे थे। वीडियो में चहल को इसे छिपाने की कोशिश करते देखा गया है। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ रिपोर्ट्स में लिखा गया है कि पंजाब किंग्स ने टीम के सफर का वीडियो पोस्ट किया। सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पंजाब ने यह वीडियो डिलीट कर दिया है। IPL के मौजूदा सीजन में यह ई-सिगरेट से जुड़ा दूसरा विवाद है। चहल से पहले 28 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग पंजाब के खिलाफ मैच के दौरान मुल्लांपुर स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम में वेपिंग करते पाए गए थे। पूरा वीडियो देखिए… BCCI ने रियान पराग पर 25% जुर्माना लगाया था ड्रेसिंग रूप में ई-सिगरेट पीने का वीडियो सामने आने के बाद BCCI ने रियान पराग पर मैच फीस का 25% का जुर्माना लगाया गया था। उन्हें IPL के कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। मैच रेफरी ने उन पर कड़ा एक्शन लेते हुए जुर्माना और पेनल्टी पॉइंट लगाया है। नो फ्लाई लिस्ट में डाल सकते हैं चहल फ्लाइट में धूम्रपान या ई-सिगरेट का उपयोग करना सख्त वर्जित है। ऐसी लापरवाही फ्लाइट में आग लगने का कारण बन सकती है, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्हें ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डालने या कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। IPL से पहले कहा था- मैंने शराब छोड़ दी IPL 2026 से पहले चहल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने पिछले 6 महीनों से पूरी तरह शराब छोड़ दी है ताकि वे युवाओं के लिए एक उदाहरण बन सकें और अपना 150% योगदान दे सकें। इस वीडियो के सामने आने के बाद उनके इन दावों पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी चहल का कार चलाते समय सिगरेट पीने का एक वीडियो वायरल हो चुका है। भारत में 2019 से ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है भारत सरकार ने ‘ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (PECA) 2019’ के तहत वेप्स और ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया है। उल्लंघन पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में एलीट एथलीट का सार्वजनिक मंच पर इसका इस्तेमाल कानून और खेल की मर्यादा का उल्लंघन माना गया। ———————————————————— IPL से जुड़ी यह खबर देखिए IPL- ईशान ने लगातार 3 छक्कों से फिफ्टी पूरी की; यानसन ने 4 ओवर में 61 दिए सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL में बुधवार को पंजाब को 33 रन से हराया। हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में पंजाब की टीम 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी। पढ़ें पूरी खबर
“मोदी का नाम लेकर सीएम मांगिए!” केरल में कांग्रेस के प्रमुख भूचाल, श्रीशेषन की नियुक्ति से नामांकन

केरल में प्रचंड सरकार के गठन के बाद कांग्रेस के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं वी डी शेशन अब अपने एक बयान को लेकर धरने पर बैठे हैं और यह बयान सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ से आया है। एक मीडिया हाउस को दिए गए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि “प्रशासनिक अनुभव की कोई संभावना नहीं है। वी एस अच्युतानंद के पास क्या अनुभव था? जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने, तब उनके पास क्या अनुभव था? वह एक पार्टी ऑर्गनाइजेशन के समर्थक थे, वरिष्ठ सांसद भी नहीं थे।” यानि कि सिद्धार्थन ने अपने पक्ष में तर्क देते हुए मोदी के उदाहरण का सहारा लिया। लेकिन यही दांव अब उनके लिए साइंटिस्ट वैक्टिव दिख रहे हैं। “मोदी का उदाहरण बड़ा रेड टैग”-सोशल मीडिया पर विरोध शृष्णिण की इस टिप्पणी को लेकर पार्टी के अंदर और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई दावों का मानना है कि स्टालिनवादी राजनीतिक तानाशाही में मोदी की प्रशंसा करना और उन्हें अपनी दावेदारी के लिए इस्तेमाल करना “बड़ा रेड टैग” करना है। केरल कांग्रेस के नेता वीडी सतीसन मोदी की तारीफ कर रहे हैं और उनके उदाहरण का इस्तेमाल कर केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं. यह मेरे लिए एक बड़ा ख़तरा है, खासकर उस समय के लिए जब हम जी रहे हैं। https://t.co/DlXqw82p1M – रोशन राय (@RoशनKrRaii) 6 मई 2026 यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस आलाकमान केरल में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मंथन कर रही है. यानी, एक कथन ने ऑब्जेक्टिव गुणांकों को और जटिल बना दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस के नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए तो कुछ और भी वीडियो वॉयरल हो रही है। कांग्रेस नेता वीडी सतीसन का एक वीडियो भाषण है। यहां पर वो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की क्षमता की सराहना कर रहे हैं? यह व्यक्तिगत राय क्या है या पार्टी की सोच क्या है? और जब दूसरी तरफ राहुल गांधी… pic.twitter.com/pXVvYtXrpc – प्रो.अंलाहली (نور) (@ProfNoorul) 6 मई 2026 “सीएम नहीं तो मंत्री भी नहीं”- श्रीशन का कड़ा रुख इस पूरी घटना के बीच श्रीशचन के रुख को लेकर भी खबरें सामने आई हैं. ब्रांड की माने तो बताया जा रहा है कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो वे आकार का हिस्सा नहीं बनेंगे और सिर्फ अध्यक्ष बने रहेंगे। श्रीशन और उनके समर्थक सख्त रुख अख्तियार किये हुए हैं और सीएलपी की बैठक के बाद नकली समय के अनुरूप बात भी नहीं की। #घड़ी | तिरुवनंतपुरम, केरलम | कांग्रेस के निर्वाचित विधायक वीडी सतीसन केपीसीसी कार्यालय से निकले। केरलम के लिए पार्टी पर्यवेक्षकों के साथ सीएलपी की बैठक चल रही है और प्रत्येक विधायक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की जा रही है pic.twitter.com/5JCW0CqpVV – एएनआई (@ANI) 7 मई 2026 यह संकेत साफ करता है कि श्रीशेषन अब अपनी उम्मीदवारी को लेकर पूरी तरह से आक्रामक रुख अपना रहे हैं-जो पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकते हैं। इस बीच “राहुल गांधी, वीडियो श्रीशेषन को मुख्यमंत्री बनाओ” संदेश सोशल मीडिया पर 1 लाख से अधिक कमेंट्स के साथ, वीडियो श्रीशेषन के समर्थन में समर्थक सोशल मीडिया रैली कर रहे हैं। 102 की जीत, लेकिन श्रेष्ठतम 140 केरला खण्ड में यू.एस. फ़्लिक ने 102 रेज़्यूमे में प्रवेश किया, जबकि एल 35 फ़्रांसीसी खण्डों में प्रवेश किया। यह कांग्रेस की जीत के लिए वापसी का बड़ा मौका लेकर आया है। परावूर सीट से भारी अंतर से मरने वाले अभिषेकन को इस जीत का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। उनके दावे का तर्क है कि 2021 की हार के बाद श्रीशेषन ने ही संगठन को खड़ा किया और पार्टी को सत्ता तक कायम रखा, समाजवादी मुख्यमंत्री पद पर उनका दावा सबसे मजबूत है। सीएलपी बैठक और अलकमान की भूमिका केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (KPCC) की नवीनीकृत CLP बैठक में सभी पार्टियों से व्यक्तिगत राय ली गई। इस प्रक्रिया के तहत पार्टी पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने नेताओं से मुलाकात की। ओमन चंदी के बेटे और विधायक चंदी ओमन ने सार्वजनिक रूप से किसी के नाम का समर्थन करते हुए बचते हुए कहा, “मैं पार्टी नेतृत्व को अपनी बात बताना चाहता हूं। मैं सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहना चाहता। नेतृत्व पर सही समय पर निर्णय लेना चाहता हूं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “कांग्रेस का एक तय एसओपी है। हम जनता द्वारा चुने गए नेता हैं। हमने अपनी राय दी है और पार्टी एक ही आधार पर सही निर्णय लेगी।” अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि कांग्रेस के आलाकमान इस पूरे विवाद को कैसे संभालेंगे. एक तरफा अभिषेक का मजबूत दावा और दूसरी तरफ का दबाव, दूसरी तरफ उपजा विवाद- दोनों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। यह सिर्फ नेतृत्व चयन का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी के पक्षधर संदेश और राजनीतिक लाइन से भी टकराव हुआ है। यदि श्रीशेषन को नियुक्त किया जाता है, तो असंतोष का खतरा है। अगर उन्हें चुना जाता है, तो उनके बयान पर उठाए गए सवालों का जवाब देना होगा। यह भी पढ़ें: ‘विजय तभी ले जाएगी शपथ जब…’, तमिल के गवर्नर ने टीवीके प्रमुख के सामने रखी ये शर्त (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल सीएम रेस 2026(टी)वीडी सतीसन विवाद(टी)कांग्रेस नेतृत्व संकट(टी)केरल राजनीति समाचार(टी)केरल सीएम रेस कांग्रेस(टी)वीडी सतीसन बयान मोदी विवाद(टी)केरल चुनाव 2026 यूडीएफ जीत(टी)कांग्रेस नेतृत्व निर्णय केरल(टी)केसी वेणुगोपाल रमेश चेन्निथला सीएम रेस(टी)केपीसीसी सीएलपी बैठक समाचार(टी)केरल राजनीतिक घटनाक्रम(टी)राहुल गांधी सीएम निर्णय केरल(टी)कांग्रेस आंतरिक संघर्ष भारत(टी)केरल सरकार गठन समाचार(टी)केरल सीएम(टी)वीडी शृंखला विवाद(टी)कांग्रेस नेतृत्व संकट(टी)केरल राजनीति समाचार(टी)वीडी शशिसन का बयान मोदी विवाद(टी)केरल चुनाव 2026 यूडीएफ की जीत(टी)केरल में कांग्रेस नेतृत्व का फैसला(टी)केसी वेणुगोपाल चेन्निथला सीएम की दौड़(टी)केपीसीसी सीएलपी बैठक समाचार(टी)केरल के राजनीतिक घटनाक्रम(टी)राहुल गांधी का केरल सीएम पर निर्णय
रिपोर्ट- 90% जापानियों ने चीनी कारों का बहिष्कार किया:फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका ईवी से दूर भाग रहे; इंडोनेशिया, भारत जैसे देश अपनाने में आगे

दुनिया के 31 देशों में औसतन 43% लोग कहते हैं कि बिना कार के जीना उनके लिए असंभव है। 22 देशों में लोग कार को पसंदीदा ट्रांसपोर्ट मानते हैं। 65% अमेरिकी बिना कार लिए नहीं रह सकते हैं। लेकिन भारत के लोगों की पहली पसंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट है। देश के 62% लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट को चुनना चाहते हैं। इप्सॉस की ग्लोबल मोबिलिटी रिपोर्ट 2026 में यह खुलासा हुआ है। लेकिन ईवी के सबसे बड़े पैरोकार रहे फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों का इससे मोहभंग हो रहा है। जापान में यह आंकड़ा -28% तक गिर चुका है। इसके विपरीत इंडोनेशिया (60%), मेक्सिको (60%) और चिली (57%) सबसे आगे हैं। यह सर्वे 31 देशों में किया गया। 23,722 लोगों ने हिस्सा लिया। सेल्फ-ड्राइविंग कार – भारत डरता नहीं – भारत में ईवी अपील 40% है, जो ग्लोबल औसत 47% से थोड़ा कम है। लेकिन यह यूरोप और नॉर्थ अमेरिका से बेहतर स्थिति में है। – 36% लोग सेल्फ-ड्राइविंग कार को असुरक्षित मानते हैं। सबसे आगे फ्रांस (-37%), नीदरलैंड्स (-35%), अमेरिका (-25%) है। – भारत में करीब 47% लोग इस तकनीक में सुरक्षित महसूस करते हैं, जबकि ग्लोबल औसत 36% है। भारतीय बाजार में हर कंपनी के लिए बड़े मौके भारत में 16% किसी टेक कंपनी से कार खरीदना पसंद करेंगे, 22% की पसंद पारंपरिक ऑटोमेकर हैं। – 62% को कोई प्राथमिकता नहीं है। यानी बाजार किसी के लिए बंद नहीं है। टाटा, महिंद्रा से लेकर गूगल, शाओमी जैसी टेक कंपनियों के लिए दरवाजे खुले हैं। एशिया में चीन विरोध बढ़ रहा, भारत के लिए बड़े मौके – जापान में 90% लोग चीनी कार नहीं लेंगे। दक्षिण कोरिया में भी चीन-विरोधी भावना प्रबल है। – कनाडा में 48% लोग अमेरिकी कार नहीं खरीदेंगे। यानी इस माहौल में भारत के लिए बड़े मौके भी हैं। – चीन के खिलाफ यह अविश्वास भारतीय ब्रांड्स के लिए एशियाई बाजारों में रास्ता खोल सकता है। – 42% लोग किसी न किसी खास देश की कार खरीदने से बच रहे हैं। इस लिस्ट में चीनी सबसे ऊपर है। उसका बॉयकॉट रेट (41%) और अमेरिकी कारों के लिए यह आंकड़ा करीब 24% है।
Health Tips: क्या गर्मी में हद से ज्यादा पसीना आना बुरा है? यह बीमारी का है संकेत या सेहत की निशानी, जानिए डिटेल

Last Updated:May 07, 2026, 14:37 IST Excess Sweating good or Bad: गर्मी के मौसम में पसीना आना आम बात है. भीषण गर्मी में जैसे ही लोग बाहर निकलते हैं या ज्यादा मेहनत करते हैं उन्हें बहुत तेज पसीना आता है. कुछ लोगों को हद से ज्यादा पसीना निकलता है. ऐसे में सोशल मीडिया पर यह फैलाया जा रहा है कि ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह है. पर असली सवाल यह है कि क्या सच में ज्यादा पसीना आना बुरा है या यह हेल्दीपन का संकेत है. यदि आप भी कंफ्यूज हैं तो इस खबर को जरूर पढ़ें. जैसे ही गर्मी बढ़ती है या हम वर्कआउट करते हैं, पसीना हमारे कपड़ों को भिगो देता है.इससे हमें इरीटेशन होने लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर पसीना न आए तो क्या होगा? पसीना आना असल में हमारे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम है. यह न केवल हमारे शरीर के अंदर के तापमान को नियंत्रित करता है बल्कि अंदर जमी गंदगी को भी बाहर फेंकता है. इसलिए यह बात दिमाग से निकाल लीजिए कि ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह है. किसी भी तरह से ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह नहीं है. डॉक्टरों के अनुसार पसीना आपकी त्वचा को साफ करने से लेकर आपके मानसिक तनाव को कम करने तक में मदद करता है. एक्सपर्ट के मुताबिक धूप में पसीना आना बिल्कुल सामान्य है. बहुत लोग सोचते हैं कि पसीना आना सेहत के लिए खराब है. लेकिन पसीना हमारे शरीर को अंदर से और गर्मी से बचाता है, ये बात बहुत लोगों को पता नहीं होती. पसीना हमारे शरीर को ठंडा रखने का कमाल का तरीका है और ये हमें सुरक्षित रखने के लिए लगातार काम करता है. यह प्रक्रिया सिर्फ पानी निकालने की नहीं है, बल्कि शरीर को बचाने के लिए जरूरी एक जैविक प्रतिक्रिया है. तो चलिए जानते हैं पसीना आने से क्या-क्या फायदे होते हैं. असल में पसीना आना शरीर की एक प्राकृतिक ठंडा करने की प्रक्रिया है, जिसे वैज्ञानिक तौर पर थर्मोरेगुलेशन कहा जाता है. हमारे शरीर का अंदरूनी तापमान आमतौर पर करीब 98.6°F (37°C) होना चाहिए.
फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
egg embryo eating effects on health: मिड डे मील के अंडे में चूजे का भ्रूण: अगर खा लें तो क्या नुकसान हो सकता है? डॉक्टर ने बता दिया

Last Updated:May 07, 2026, 13:53 IST Mid Day Meal embryo in Egg: झारखंड में गोड्डा के सरकारी स्कूल में मिड डे मील के उबले अंडे में चूजे का भ्रूण मिलने से हंगामा मच गया है. पेरेंट्स ने इसे लेकर अस्पताल में बवाल मचाया और बच्चों की सेहत को होने वाले नुकसान डॉ रमन कुमार ने कहा पकने पर इससे सेहत को नुकसान नहीं होता झारखंड में मिड डे मील के अंडे में निकला भ्रूण, अगर कोई खा ले तो क्या नुकसान हो सकते हैं.. सांकेतिक तस्वीर.. Mid Day Meal Chick embryo: झारखंड के गोड्डा जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को बांटे गए मिड डे मील में चूजे का भ्रूण निकलने से हंगामा मच गया. दर्जनों पेरेंट्स स्कूल में आकर प्रदर्शन करने लगे और बच्चों को खराब खाना परोसने का आरोप लगाया. दरअसल बच्चों को खाने में उबला अंडा दिया गया था. जब एक बच्चे ने अंडा फोड़ा तो उसमें चूजे का हिस्सा जैसा दिखाई दिया.पेरेंट्स का कहना था कि सिर्फ एक ही नहीं बल्कि बच्चों को दिए गए कई अंडों में भ्रूण बन रहा था. मिड डे मील की गुणवत्ता पर सवाल पहली बार नहीं उठा है, लेकिन अंडे में भ्रूण निकलने का यह पहला और अजीबोगरीब मामला सामने आया है. पेरेंट्स इस भ्रूण वाले अंडे से बच्चों की सेहत को खतरा होने का आरोप लगा रहे हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई चूजे का भ्रूण अगर बच्चे खा लेते तो उनकी सेहत को नुकसान हो सकता था? क्या इससे कोई गंभीर बीमारी हो सकती थी? यह कितना खतरनाक है? इसे लेकर आइए फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. रमन कुमार से जानते हैं… डॉ. रमन कुमार ने बताया कि आमतौर पर जो अंड़े खाए जाते हैं, उनमें जीव पैदा करने की क्षमता नहीं होती है, लेकिन यह अंडा कैसे फर्टाइल हुआ और इसमें कैसे भ्रूण पनपा, या यह अंडा मिड डे मील में कैसे आया यह तो प्रशासनिक जांच का विषय है, लेकिन अगर मेडिकल नजरिए से देखें तो अगर यह भ्रूण पक गया था और इसे बच्चे खा लेते तो इससे हेल्थ को कोई नुकसान नहीं होता. डॉ. रमन कहते हैं कि यह अपने आप में पहला मामला है लेकिन जो बच्चे घरों में अंडा और चिकन खाते हैं, अगर वे इसे भी खाते तो स्वास्थ्य पर तो कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन इसे न खाने या इसका विरोध करने के अन्य पहलू हो सकते हैं. वहीं इस भ्रूण से संक्रमण होने के सवाल पर डॉक्टर कहते हैं कि मिड डे मील हो या कहीं और मिलने वाला भोजन हो, अगर उसे बनाने के दौरान सही नियमों का पालन नहीं किया गया है और साफ-सफाई व अन्य चीजों का ध्यान नहीं रखा गया है, पानी ठीक इस्तेमाल नहीं किया गया है तो उससे भी संक्रमण फैल सकता है. जो लोग चिकन नहीं सिर्फ अंडा खाते हैं… कुछ लोग सिर्फ अंडा खाते हैं लेकिन मीट या चिकन नहीं खाते हैं तो ऐसी स्थिति में अगर किसी के उबले अंडे में भ्रूण निकलता है तो वह बर्दाश्त करना मुश्किल होता है. ये भी एक वजह हो सकती है कि पेरेंट्स विरोध कर रहे हों. या हो सकता है कि उस अंडे की क्ववालिटी ही खराब हो. विदेशों में खाते हैं बलूत और भ्रूण बता दें कि चीन, इंडोनेशिया और कोरियाई देशों में लोग मुर्गी या बत्तख के अंडों में पनपे भ्रूण को खाते हैं. भ्रूण पनप चुके अंडों को बलूत बोला जाता है. वहां लोग अंडों को बिना छीले भी खा जाते हैं. हालांकि भारत में ऐसा नहीं पाया जाता है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद:नोएल टाटा IPO के खिलाफ, दो ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में; 8 मई को हो सकता है फैसला

टाटा ग्रुप की पेरेंट कंपनी ‘टाटा संस’ को शेयर बाजार में लिस्ट करने के मुद्दे पर ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट में मतभेद गहरे हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि ट्रस्ट के दो बड़े सदस्य आरबीआई के नियमों का हवाला देते हुए आईपीओ लाने के पक्ष में हैं। इस पूरे विवाद और इसके असर को समझने के लिए पढ़ें यह QA: 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 4. 8 मई की बोर्ड मीटिंग में क्या होने की उम्मीद है? 8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की एक अहम मीटिंग होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इस मीटिंग में आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग की तैयारी शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके अलावा, टाटा संस के बोर्ड में नए ट्रस्टी नॉमिनी चुनने पर भी चर्चा होगी। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। 8. अगर टाटा संस का IPO आता है, तो सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? इसका सबसे बड़ा फायदा ‘शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप’ को होगा। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारी कर्ज में है और उन्होंने अपनी यह हिस्सेदारी गिरवी रखी है। लिस्टिंग होने से उनके हिस्से की वैल्यू अनलॉक होगी और वे अपना कर्ज चुका पाएंगे। 9. शापूर मिस्त्री परिवार की नेटवर्थ पर इसका क्या असर पड़ेगा? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, SP ग्रूप को चलाने वाले शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि उनकी इस दौलत का 75% हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है, जिसे वे अभी बेच नहीं सकते। लिस्टिंग उनके लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। 10. आगे क्या होने वाला है? अगले दो महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। टाटा संस फिलहाल रेगुलेटर से अनौपचारिक सलाह ले रहा है और समय सीमा बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। अगर 8 मई की मीटिंग में ट्रस्टी हावी रहते हैं, तो भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा IPO देखने को मिल सकता है। नॉलेज पार्ट:






