दमोह में किन्नरों के दो गुटों में विवाद, मारपीट का:एक पक्ष ने गुरु की हत्या की धमकी देने का आरोप

दमोह में किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच विवाद सामने आया है। शनिवार रात एक पक्ष की खुशी किन्नर ने कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब छह किन्नरों ने उनके साथ मारपीट की और उनके गुरु की हत्या की धमकी दी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बिलवारी मोहल्ला निवासी खुशी किन्नर ने बताया कि वह दमोह शहर में शादी-विवाह और अन्य शुभ अवसरों पर मांगकर अपना जीवन यापन करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किन्नर गुड़िया नायक उनसे प्रतिदिन एक लाख रुपये की मांग करती है। खुशी किन्नर के अनुसार, शनिवार रात आशा, जोया, शब्बो और मीना किन्नर सहित गुड़िया नायक उनके घर में घुस आए। उन्होंने खुशी के साथ मारपीट की, उनके बाल काट दिए और पेट में चाकू मारने का प्रयास भी किया। विवाद के बाद सभी आरोपी किन्नर मौके से फरार हो गए। घायल खुशी किन्नर ने अपने हटा स्थित गुरु पिंकी नायक को घटना की जानकारी दी। इसके बाद वे कोतवाली पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। खुशी किन्नर ने बताया कि गुड़िया नायक ने धमकी दी है कि वे उनके हटा वाले गुरु पिंकी की हत्या कर देंगे और सांप्रदायिक हिंसा फैलाएंगे। खुशी किन्नर ने पुलिस से मारपीट करने वाले सभी किन्नरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। खुशी का कहना है कि यदि उसे और उसके गुरु पिंकी नायक को कुछ होता है तो उसके जवाबदार यह सभी किन्नर रहेंगे। हटा से दमोह पहुंचे किन्नर पिंकी नायक ने बताया की खुशी हमारी चेला है। वह दमोह में बहार गुरु के पास रहती है और लोगों के घरों में खुशी के मौके पर जाकर पैसे मांगती है। गुड़िया व अन्य किन्नर इसे बहला फैसला कर अपने साथ ले आए और इसके साथ मारपीट की गई। कई दिनों से मुझे करने की धमकी दी जा रही है। क्योंकि सागर में जो किरण गुरु किन्नर का विवाद चल रहा है मैं उनके पक्ष में हूं और आगे भी उनके साथ रहूंगी। यह बात गुड़िया किन्नर और अन्य लोगों को अच्छी नहीं लग रही। इसलिए वह मेरी हत्या करने की बात कह रहे हैं और मेरे चेले खुशी को इन्होंने बुरी तरह मारा है। इसलिए हम चाहते हैं कि पुलिस इस मामले में सख्त कार्रवाई करे। पुलिस के द्वारा मामले में जांच शुरू कर दी गई है।
न्यू चंडीगढ़ में PBKS vs LSG:स्टेडियम में फैंस पहुंचना शुरू, बोले- सरपंच साहब सरपंच 70-80 रन बनाएंगे

पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच मुकाबला न्यू चंडीगढ़ स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से खेला जाएगा। इसके लिए फैंस स्टेडियम में पहुंचना शुरू हो गए हैं। इस दौरान फैंस ने कहा कि आज सरपंच साहब सरपंच श्रेयस अय्यर 70-80 रन बनाएंगे। पंजाब की नजरें इस घरेलू मैदान पर हैट्रिक लगाने की हैं, क्योंकि पिछले दोनों मुकाबले पंजाब ने जीते हैं। वहीं लखनऊ अपने पांच मैचों में से सिर्फ दो ही मैच जीत पाई है और पिछले दोनों मैच लगातार हार चुकी है। 15 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और 12 अप्रैल को गुजरात टाइटंस से हार का सामना कर चुकी है। पंजाब किंग्स अंक तालिका में 9 अंक के साथ सबसे ऊपर चल रही है। उसने अपने पांच मैचों में से चार मैच जीते हैं, जबकि एक मैच ड्रॉ हुआ है। वहीं लखनऊ की टीम आठवें नंबर पर है। उसने पांच में से सिर्फ दो मैच जीते हैं। पंजाब किंग्स का इस सीजन में पावर प्ले में बेहतर प्रदर्शन रहा है। पंजाब ने लखनऊ के मुकाबले पावर प्ले में ज्यादा रन बनाए हैं। पंजाब ने पावर प्ले के ओवरों में चार पारियों में 277 रन बनाए हैं, वहीं लखनऊ ने पांच पारियों में 252 रन बनाए हैं। मैच देखने के लिए पहुंच रहे फैंस के PHOTOS… मैच के पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
समय रैना के नाना को मारने की धमकी मिली थी:आतंकियों की हिट लिस्ट में थे, स्थानीय कश्मीरी मुसलमानों ने जान बचाई थी

कॉमेडियन समय रैना ने हाल ही में बताया कि 1990 के दशक में कश्मीर में उग्रवाद के दौरान उनके नाना को जान से मारने की धमकी मिली थी। हालांकि, स्थानीय कश्मीरी मुसलमानों की मदद के चलते उनकी जान बच गई थी। समय ने ‘दॉस्टकास्ट’ यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कश्मीर में उग्रवाद और कश्मीरी पंडितों के पलायन के प्रभाव पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि उनके परिवार को भी रातोंरात कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। कॉमेडियन ने बताया, उनके नाना सोमनाथ कौल एक जाने-माने डॉक्टर थे और उनका नाम आतंकियों की हिट लिस्ट में था। उन्हें जान से मारने के लिए चिट्ठी जारी की गई थी। चिट्ठी में लिखा गया था- ‘यहां से चले जाओ, नहीं तो कल जान ले लेंगे।’ इस घटना के बाद समय का परिवार बहुत डर गया था। हालांकि, समय ने यह भी बताया कि उनके नाना की इलाके में बहुत इज्जत थी। वो कई लोगों का मुफ्त इलाज करते थे, इसलिए लोग उन्हें बहुत मानते थे। इसलिए वहां के कश्मीरी मुसलमानों ने उनके नाना को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। उन्होंने आतंकियों को कहा था कि वह उनके साथ ऐसा नहीं कर सकते। लेकिन आतंकवादियों ने समय के परिवार को तुरंत कश्मीर छोड़ने के लिए कहा। जिसके बाद रातों-रात सबने अपना सामान एक वैन में रखा और घर छोड़ दिया। उन्होंने अपने बचपन पर पड़े असर का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना ने उनकी पहचान और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी आज भी कश्मीर जाने में डर महसूस करती है। रैना ने यह भी बताया कि उनकी मां जब कई साल बाद कश्मीर गईं, तो वहां की बदली परिस्थितियां देखकर इमोशनल हो गईं और रो पड़ीं।
गर्मियों में बादाम खाने चाहिए या नहीं? अधिकतर लोगों के मन में होता है यह सवाल, एक्सपर्ट से जानिए सही जवाब

Last Updated:April 19, 2026, 10:31 IST Almonds in Summer: बादाम की तासीर गर्म होती है, जिस वजह से लोग इसे गर्मी के मौसम में अवॉइड करते हैं. डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने बताया कि गर्मियों में बादाम खाना सुरक्षित है, लेकिन सही मात्रा और तरीके का ध्यान रखना जरूरी है. भीगे हुए बादाम सीमित मात्रा में खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और गर्मी का असर भी कम होता है. गर्मियों में रातभर पानी में भिगोकर बादाम का सेवन किया जा सकता है. Right Way to Eat Almonds in Summer: गर्मी के मौसम में लोगों का मन ठंडी चीजें खाने का करता है. सूरज की तपिश से बचने के लिए लोग खानपान में काफी बदलाव कर लेते हैं. माना जाता है कि गर्मियों में उन फूड्स को अवॉइड करना चाहिए, जिनकी तासीर गर्म होती है. ऐसी चीजों का सेवन करने से तबीयत बिगड़ सकती है. ड्राई फ्रूट्स के शौकीन लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या गर्मी में बादाम खाना सही है? लोगों को लगता है कि बादाम गर्म तासीर वाला होता है, इसलिए इसे गर्मियों में नहीं खाना चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो गर्मी में भी बादाम का सेवन किया जा सकता है, लेकिन इसका तरीका सही होना चाहिए. ज्यादा मात्रा में बादाम का सेवन करने से नुकसान हो सकता है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की सीनियर डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि बादाम सेहत के लिए एक बेहतरीन ड्राई फ्रूट है. इसमें प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर, विटामिन E और मैग्नीशियम जैसे तत्व होते हैं, जो शरीर को एनर्जी देते हैं और दिमाग को तेज रखने में मदद करते हैं. गर्मियों में भी शरीर को इन पोषक तत्वों की जरूरत होती है. इस वजह से गर्मी के मौसम में भी बादाम खा सकते हैं. हालांकि गर्मियों में बादाम खाने का तरीका बदलना जरूरी होता है. सूखे बादाम खाने के बजाय उन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह छिलका हटाकर खाना बेहतर होता है. भिगोने से बादाम की गर्म तासीर कम हो जाती है और यह पचने में भी आसान हो जाता है. इससे शरीर में गर्मी बढ़ने की आशंका कम रहती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन ने बताया कि गर्मी में बादाम की मात्रा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है. गर्मियों में रोज 4 से 6 भीगे हुए बादाम खाना पर्याप्त माना जाता है. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से शरीर में गर्मी, एसिडिटी या पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए संतुलन बनाए रखना ही सबसे जरूरी है. अगर आप बादाम को ठंडे फूड्स जैसे दूध, स्मूदी या सलाद में मिलाकर खाएंगे, तो इसका असर और भी संतुलित हो जाता है. यह शरीर को ठंडक बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही जरूरी पोषण भी देता है. खासकर बच्चों और कामकाजी लोगों के लिए यह एक अच्छा एनर्जी बूस्टर हो सकता है. एक्सपर्ट की मानें तो गर्मियों में बादाम खाना पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन इसे सही तरीके और सीमित मात्रा में लेना चाहिए. बादाम खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और कई फायदे मिलते हैं. हर मौसम में बादाम का सेवन लिमिट में ही करना चाहिए. इसके अलावा अगर आपको किसी तरह की एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह जरूर लें. सही जानकारी और संतुलित आहार के साथ आप हर मौसम में स्वस्थ रह सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 19, 2026, 10:31 IST
इंदौर में कारीगर पर हमला, चाकू मारकर लूट:नंदबाग में हुई घटना; तिलक नगर में युवक से मोबाइल छीना

इंदौर के नंदबाग इलाके में शनिवार रात फर्नीचर कारीगर के साथ लूट की वारदात हुई। मल्हारगंज थाना क्षेत्र में 4-5 बदमाशों ने चाकू मारकर घायल किया और नकदी लूटकर फरार हो गए। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। धर्मेंद्र शर्मा (34) रात करीब 10 बजे नंदबाग कचरा प्लाट के पास से गुजर रहे थे। इसी दौरान बाइक का संतुलन बिगड़ा। तभी 4-5 बदमाश मदद के बहाने पहुंचे और मोबाइल छीनने लगे। विरोध करने पर आरोपियों ने चाकू मार दिया और जेब से करीब 8 हजार रुपए लेकर फरार हो गए। घायल हालत में अस्पताल पहुंचा पीड़ित घटना के बाद धर्मेंद्र करीब एक घंटे तक मौके पर घायल पड़ा रहा। होश आने पर वह अनमोल नर्सिंग होम पहुंचा, जहां से परिजनों को सूचना दी गई। हालत बिगड़ने पर उसे एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज जारी है। धर्मेंद्र की पत्नी ने बताया कि वह बाणगंगा में अपनी बहन के घर थी। पति उसे लेने जा रहे थे। धर्मेंद्र फर्नीचर का काम करता है और उसके दो बच्चे हैं। तिलक नगर में युवक से मोबाइल छीना तिलक नगर के स्कीम नंबर 140 में एक युवक से मोबाइल झपटमारी की घटना हुई। कमल भंडारी सड़क किनारे खड़े होकर फोन पर बात कर रहे थे, तभी नकाबपोश बदमाश ने बाइक से आकर मोबाइल छीन लिया और फरार हो गया। दोनों मामलों में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।
इटली में गुरुद्वारे के बाहर 2 सिखों की हत्या:नगर कीर्तन की तैयारियां चल रही थीं, कार में आए हमलावर, 10 गोलियां मारीं

इटली के कोवो में गुरुद्वारा साहिब के बाहर 2 सिख सेवादारों की हत्या कर दी गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल है। आरोपियों ने उन पर करीब 10 राउंड गोलियां चलाईं। तीनों को घायल हालत में तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दो को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि एक घायल का अभी इलाज चल रहा है। इटली पुलिस अभी गोली मारने के कारणों की जांच कर रही है। मृतकों की पहचान राजिंद्र सिंह और गुरमीत सिंह के तौर पर हुई है। दोनों काफी समय से गुरुद्वारा साहिब में सेवादार के रूप में जुड़े हुए थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि हमलावर भारतीय मूल का ही है। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर आरपियों की तलाश शुरू कर दी है। नगर कीर्तन की तैयारियां चल रही थीं जानकारी के अनुसार, राजिंदर सिंह (48) कोवो में रहता है, उनके तीन बच्चे हैं, जबकि गुरमीत सिंह (48) अग्नाडेल्लो-क्रीमोना में रहते हैं, उनके दो बच्चे हैं। गुरुद्वारा में वैसाखी (खालसा पंथ के साजना दिवस) के उपलक्ष्य में 18 अप्रैल को नगर कीर्तन की तैयारियां चल रही थीं। रात करीब 11:50 बजे के आसपास जब संगत गुरुद्वारे से निकल रही थी, तब एक कार में आए हमलावर ने गुरुद्वारे के बाहर गोलीबारी कर दी। दोनों सेवादार गुरुद्वारे से बाहर निकलते समय घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हमलावरों ने 10 गोलियां चलाई इस दौरान एक तीसरा व्यक्ति को भी गोली लगी है, जिससे वह घायल हो गया। आरोपियों ने करीब 10 गोलियां चलाई । इसके बाद हमलावर मौके से कार में सवार होकर भाग निकले। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बनाया। नगर कीर्तन कैंसिल हुआ घटना के बाद कोवो में होने वाले नगर कीर्तन को भी कैंसिल कर दिया गया है। गुरुद्वारा के पास वैशाखी के उपलक्ष्य में नगर कीर्तन होना था। पुलिस जांच में सामने आया है कि मामला आपसी रंजिश से जुड़ा है। ***************** ये खबर भी पढ़ें: कनाडा की क्रिकेट में लॉरेंस गैंग की एंट्री:गुरदासपुर के दिलप्रीत बाजवा को कैप्टन बनाने का डाला प्रेशर, प्लेयर्स को जान से मारने की धमकी कनाडा के क्राइम ब्यूरो (CBC) ने अपनी रिपोर्ट में लॉरेंस गैंग को लेकर कई खुलासे किए। 17 अप्रैल को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि है कि गैंग कनाडा की क्रिकेट टीम के प्लेयर्स को जान से मारने की धमकी दे रही है। इसका कारण पंजाबी मूल के दिलप्रीत बाजवा को कैप्टन न बनाना है। (पढ़ें पूरी खबर)
पंजाब BJP के प्रभारी रहे बलबीर पुंज का निधन:दिल्ली में ली आखिरी सांस; राज्यसभा के रह चुके सांसद; गुरदासपुर में हुआ था जन्म

सीनियर भाजपा नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और पत्रकार बलबीर पुंज का देहांत हो गया है। उन्होंने शनिवार को दिल्ली के अस्पताल में आखिरी सांस ली। उन्हें शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह 76 वर्ष के थे। बलबीर पुंज नोएडा के सेक्टर-17 में रहते थे। उनकी एक बेटी विदेश में रहती है, जबकि दूसरी दिल्ली में रहती है। हालांकि वह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले थे। अक्सर पंजाब आते रहते थे। उनकी रचनाएं कई मैगजीन व न्यूज पेपर में प्रकाशित होती थीं। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने शोक जताया है। पंजाब भाजपा प्रभारी भी रहे बलबीर पुंज का जन्म 2 अक्टूबर 1949 को पंजाब के गुरदासपुर जिले के लालोवाल में हुआ था। लेकिन उन्होंने कभी पंजाब से चुनाव नहीं लड़ा। पुंज ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। वर्ष 1971 में उन्होंने द मदरलैंड अखबार से काम शुरू किया और 1974 में फाइनेंशियल एक्सप्रेस से जुड़ गए। वह कई पदों पर रहे। इसके बाद 1990 के दशक के अंत में वे सक्रिय राजनीति में आए और भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए। पार्टी में उन्होंने बौद्धिक प्रकोष्ठ के संयोजक के रूप में करीब 10 वर्षों तक काम किया। साथ ही वे भाजपा के राष्ट्रीय सचिव, कई राज्यों पंजाब, गुजरात, केरल और हिमाचल प्रदेशके प्रभारी तथा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे। वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, उन्होंने पंजाब में कभी चुनाव नहीं लड़ा। अयोध्या से संवाद’ पुस्तक भी लिखी ‘अयोध्या से संवाद’ उनकी सबसे चर्चित किताबों में से एक है। इस पुस्तक में उन्होंने अयोध्या विवाद के इतिहास को सरल तरीके से समझाया है। साथ ही उन्होंने यह बताया है कि भारत को अपनी सोच और नजरिए को औपनिवेशिक प्रभाव (विदेशी शासन की मानसिकता) से बाहर निकालकर अपनी असली पहचान को समझने की जरूरत है।
लुधियाना में पुल पर रील बनाकर फंसी युवती:वेस्टर्न ड्रेस में मॉडलिंग करते VIDEO शूट कराया, पंजाबी गाना लगा डांस मूव्स दिखाए

लुधियाना में फिरोजपुर रोड पर बने एलीवेटिड पुल पर चलते ट्रैफिक के दौरान वेस्टर्न ड्रेस पहनकर रील बनाने वाली युवती और उसके कैमरामैन साथी के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। युवती ने बैकग्राउंड में पंजाब गाना लगाकर मूव्स दिखाए थे। पुलिस ने यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल रील के आधार पर की है। हालांकि, पुलिस अब तक यह पहचान नहीं कर पाई है कि रील बनाने वाले युवती और युवक कौन हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की पहचान के लिए साइबर और टेक टीम की मदद ली जा रही है। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जाएगा। पुलिस ने पब्लिक प्लेस में अश्लील कृत्य करने, अव्यवस्था फैलाने, आम लोगों के लिए असुविधा पैदा करने और आम लोगों के लिए खतरा पैदा करने जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। ASI ने यह शिकायत देकर केस कराया थाना डिवीजन नंबर 8 के जांच अधिकारी ASI परमजीत सिंह की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। उन्होंने शिकायत में लिखवाया है कि 18 अप्रैल 2026 को वह पुलिस टीम के साथ फव्वारा चौक के पास गश्त पर थे। इसी दौरान खास मुखबिर से सूचना मिली कि एक अज्ञात युवती ने अपने साथी के साथ एलिवेटेड पुल पर होटल पार्क प्लाजा के सामने सड़क पर वीडियो बनाई है। इसका तुरंत संज्ञान लिया गया और सोशल मीडिया पर वायरल रील की जांच की गई। इस रील को कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी आपत्तिजनक बताकर शेयर किया था। इसके बाद युवती और युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। ASI परमजीत सिंह ने कहा कि पुलिस टीमें जांच कर रही हैं। युवती के सोशल मीडिया एकाउंट खंगाले जा रहे हैं। उससे युवती का पता लगाने में पुलिस की साइबर और टेक टीमों की मदद ली जा रही है। जल्द ही उन्हें पकड़ा जाएगा। दोनों वायरल वीडियो में क्या दिख रहा… इंस्टाग्राम पर 1 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स युवती के इंस्टाग्राम पर 1.30 लाख फॉलोअर्स हैं। जबकि, वह अब तक 255 पोस्ट शेयर कर चुकी है। युवती ने अपनी प्रोफाइल में खुद को ब्लॉगर बताया हुआ है। उसके प्रोफाइल बायो में उसने लिखा है- डोंट बी ए वुमन दैट नीड्स ए मैन…बी ए वुमन ए मैन नीड्स (वह महिला मत बनो जिसे एक पुरुष की जरूर है, वह महिला बनो जिसकी पुरुष को जरूरत हो)। युवती ने जिम में एक्सरसाइज करते हुए और पंजाबी सूट पहनकर भी कई रील पोस्ट कर रखे हैं। वहीं, कुछ वीडियो में वह हुक्का पीते हुए भी नजर आई है।
इंदौर में छात्रा से दुष्कर्म, धर्म परिवर्तन का आरोप:खजराना थाने में मामला दर्ज, आरोपी हिरासत में लिया गया

इंदौर के कनाडिया क्षेत्र में किराए से रहकर निजी कॉलेज में पढ़ाई कर रही 19 वर्षीय छात्रा ने युवक पर दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के दबाव का आरोप लगाया है। छात्रा की शिकायत पर खजराना थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़िता ने बताया कि करीब एक साल पहले उसकी मुलाकात आरोपी से स्कीम नंबर 78 क्षेत्र में हुई थी। आरोपी ने अपना नाम राहुल बताया और बातचीत शुरू हुई। बाद में उसने शादी का प्रस्ताव रखा। जून 2025 में घर बुलाकर बनाए संबंध छात्रा के अनुसार, जून 2025 में आरोपी ने उसे घर बुलाया, जहां उसके माता-पिता मौजूद नहीं थे। वहां उसने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने बताया कि बाद में आरोपी ने अपना नाम अब्दुल अजीज पठान बताया और कहा कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना होगा। वीडियो वायरल करने की धमकी छात्रा ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर आरोपी ने वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इसके बाद वह लगातार दबाव बनाकर शोषण करता रहा। परिवार को बताने के बाद दर्ज हुई शिकायत घटना से परेशान होकर छात्रा छिंदवाड़ा चली गई। परिजनों को जानकारी देने के बाद वह इंदौर लौटी और करणी सेना के पदाधिकारियों के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने आरोपी पर जबरन बुर्का पहनाने, नशा कराने और धार्मिक गतिविधियों के लिए मजबूर करने के आरोप भी लगाए हैं। पुलिस ने फिलहाल दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया है। आरोपी हिरासत में, जांच जारी पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
IVF Cases in Jodhpur | What is IVF | जोधपुर में आईवीएफ केस बढ़े | Rising IVF Cases in Jodhpur News

जोधपुर. राजस्थान के जोधपुर शहर में आधुनिक जीवनशैली और करियर को प्राथमिकता देने के चलते विवाह की उम्र में 5 से 10 साल की देरी अब एक बड़ी सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रही है. इस बढ़ते ट्रेंड का सीधा असर दंपतियों की प्रजनन क्षमता पर पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप माता-पिता बनने के लिए ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (IVF) का सहारा लेने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. आंकड़ों के अनुसार, जोधपुर में हर साल करीब 1500 नए आईवीएफ मामले सामने आ रहे हैं. आर्थिक दृष्टि से देखें तो एक औसत आईवीएफ प्रक्रिया पर लगभग 2 लाख रुपये का खर्च आता है, जिससे शहर में इस तकनीक पर सालाना 25 से 30 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, असंतुलित खानपान और बढ़ती उम्र के कारण प्राकृतिक रूप से संतान सुख पाने में चुनौतियां बढ़ गई हैं. 30 के बाद जैविक सीमाओं का बढ़ता प्रभाव जोधपुर के विनायक हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता शर्मा के अनुसार, महिलाओं के शरीर में 20 से 30 वर्ष की आयु गर्भधारण के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. जैसे ही उम्र 30 के पार पहुँचती है, अंडाणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता में गिरावट शुरू हो जाती है. 35 वर्ष की आयु के बाद यह गिरावट और भी तीव्र हो जाती है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावनाएं बेहद कम रह जाती हैं. डॉक्टर बताती हैं कि देरी से शादी करने वाले जोड़ों को अक्सर इसी जैविक बाधा का सामना करना पड़ता है, जिसके बाद उनके पास मेडिकल सहायता लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता. हालांकि आईवीएफ की सफलता दर वर्तमान में 40 से 50 प्रतिशत के बीच है, लेकिन यह भी पूरी तरह से महिला की उम्र पर निर्भर करती है. आधुनिक तकनीक और बदलता दृष्टिकोणव्यस्त जीवनशैली के इस दौर में कामकाजी महिलाएं अब ‘एग फ्रीजिंग’ (अंडाणु संरक्षण) जैसी आधुनिक तकनीकों की ओर भी आकर्षित हो रही हैं, ताकि भविष्य में करियर स्थिर होने पर वे मातृत्व का आनंद ले सकें. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने सफलता दर में सुधार जरूर किया है, लेकिन डॉक्टर शर्मा का मानना है कि करियर और जैविक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है. कई बार महिलाएं जल्दी परिणाम की चाह में भी सीधे आईवीएफ प्रक्रिया को चुन लेती हैं. विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर किसी कारणवश मातृत्व में देरी हो रही है, तो समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए. सही समय पर लिया गया चिकित्सकीय फैसला और संतुलित दिनचर्या कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों को कम कर सकती है. Q1. जोधपुर में IVF मामलों के बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?Ans. जोधपुर में IVF मामलों के बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह बदलती जीवनशैली और देर से शादी करने का ट्रेंड है. आज के समय में युवा पहले अपने करियर को स्थिर करना चाहते हैं, जिसके चलते शादी की उम्र 30 वर्ष या उससे अधिक हो रही है. इसके साथ ही तनाव, फास्ट फूड, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही है. इन सभी कारणों के चलते प्राकृतिक रूप से गर्भधारण मुश्किल हो रहा है, जिससे दंपतियों को IVF जैसी मेडिकल तकनीकों का सहारा लेना पड़ रहा है. Q2. जोधपुर में हर साल कितने दंपति IVF का सहारा ले रहे हैं और इसका क्या मतलब है?Ans. जोधपुर में हर साल लगभग 1500 दंपति IVF तकनीक का सहारा ले रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि शहर में बांझपन या गर्भधारण में कठिनाई की समस्या तेजी से बढ़ रही है. यह आंकड़ा सिर्फ एक मेडिकल ट्रेंड नहीं बल्कि एक सामाजिक बदलाव की ओर भी इशारा करता है. पहले जहां लोग प्राकृतिक तरीके से माता-पिता बनते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग चिकित्सा सहायता ले रहे हैं. इससे यह भी साफ होता है कि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती उम्र का असर सीधे तौर पर परिवार नियोजन पर पड़ रहा है. Q3. IVF प्रक्रिया पर होने वाला खर्च समाज पर क्या प्रभाव डाल रहा है?Ans. IVF प्रक्रिया का खर्च आम लोगों के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है, क्योंकि एक बार के इलाज में लगभग 2 लाख रुपये तक खर्च आता है. जोधपुर में इस पर सालाना 25 से 30 करोड़ रुपये तक खर्च हो रहे हैं, जो एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन चुकी है. इससे एक तरफ मेडिकल इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है. कई दंपति अपने सपने को पूरा करने के लिए कर्ज तक लेने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे यह सिर्फ स्वास्थ्य नहीं बल्कि आर्थिक चुनौती भी बन गई है. Q4. 30 साल के बाद महिलाओं की फर्टिलिटी में क्या बदलाव आते हैं और यह क्यों चिंता का विषय है?Ans. 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रूप से अंडाणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता कम होने लगती है. 35 साल के बाद यह गिरावट और तेजी से होती है, जिससे गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है. यही कारण है कि डॉक्टर इस उम्र के बाद गर्भधारण को चुनौतीपूर्ण मानते हैं. यह स्थिति इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि आज के समय में अधिकतर महिलाएं इसी उम्र के बाद मातृत्व की योजना बनाती हैं, जिससे उन्हें मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है. Q5. एग फ्रीजिंग जैसी तकनीक क्यों लोकप्रिय हो रही है और इसके क्या फायदे हैं?Ans. एग फ्रीजिंग तकनीक आज की कामकाजी महिलाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि यह उन्हें अपने करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने का विकल्प देती है. इस प्रक्रिया में महिलाएं कम उम्र में अपने अंडाणु सुरक्षित रख सकती हैं और भविष्य में जब वे तैयार हों, तब उनका उपयोग कर सकती हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बढ़ती उम्र के बावजूद भी गर्भधारण की संभावना बनी रहती है. हालांकि यह तकनीक महंगी है, लेकिन यह उन महिलाओं के लिए एक सुरक्षित विकल्प बन रही है जो देर से शादी या मातृत्व की योजना बना रही हैं.








