‘शहीद’ जनादेश: मोदी सरकार ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक क्यों पेश किया, जिसकी हार तय थी | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 22:13 IST यह कदम तत्काल कानून के बारे में कम और आगामी राज्य चुनावों और 2029 के आम चुनावों के लिए कहानी तैयार करने के बारे में अधिक था। नीतिगत दृष्टिकोण से, हारे हुए वोट के साथ आगे बढ़ने का निर्णय यह संकेत देता है कि सरकार शेष कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति मॉडल को दरकिनार करने के लिए तैयार है। (फ़ाइल छवि: पीटीआई फ़ाइल) यह जानते हुए भी कि इसमें अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत का अभाव है, नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुक्रवार को संविधान (131वें संशोधन) विधेयक पर भारी मतदान के लिए मजबूर करने के निर्णय को कई विश्लेषकों द्वारा राजनीतिक दृष्टिकोण के एक सुविचारित मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। जबकि बिल 326-वोट की सीमा से लगभग 50 कम रह गया, यह कदम तत्काल कानून के बारे में कम और आगामी राज्य चुनावों और 2029 के आम चुनावों के लिए कथा तैयार करने के बारे में अधिक था। सरकार ने वोट के लिए दबाव क्यों डाला क्योंकि उसे पता था कि वह हार जाएगी? वोटों के विभाजन को मजबूर करने के पीछे प्राथमिक तर्क एक स्थायी “विधायी रिकॉर्ड” बनाना था। प्रत्येक संसद सदस्य को वोट डालने के लिए बाध्य करके, सरकार ने महिला आरक्षण को क्रियान्वित करने के लिए बनाए गए कानून के एक टुकड़े पर प्रत्येक विपक्षी सदस्य को सफलतापूर्वक “नहीं” वोट देने का टैग दिया है। प्रधानमंत्री के रणनीतिकारों की नजर में सदन में हार सार्वजनिक मंच पर एक शक्तिशाली हथियार है। गृह मंत्री अमित शाह ने परिणाम को कांग्रेस के नेतृत्व वाले गुट द्वारा “ऐतिहासिक विश्वासघात” बताने में कोई समय बर्बाद नहीं किया। वोट के लिए जोर देकर, सरकार ने उन नामों की एक सूची संग्रहीत की है जिनका उपयोग निस्संदेह भविष्य की अभियान रैलियों में यह दावा करने के लिए किया जाएगा कि विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सक्रिय रूप से अवरुद्ध कर दिया है। यह हार भाजपा को एक ताकतवर पार्टी से एक एकजुट विपक्ष द्वारा “सताई गई” पार्टी बनने की अनुमति देती है जो लैंगिक न्याय पर “गणितीय गड़बड़ी” को प्राथमिकता देती है। क्या यह कदम विपक्ष को बेनकाब करने का एक रणनीतिक प्रयास था? महिला कोटा की संभावनाओं से परे, सरकार ने विपक्षी एकता के स्थायित्व का परीक्षण करने के लिए 131वें संशोधन को “वेज इश्यू” के रूप में इस्तेमाल किया। लोकसभा को 816 (या 850 तक) सीटों तक विस्तारित करने के विधेयक के प्रस्ताव का उद्देश्य राज्यों के क्षेत्रीय दलों को आकर्षित करना था, जिन्हें प्रतिनिधित्व में शुद्ध लाभ मिलेगा। सरकार को अनुमान था कि भारतीय गुट के भीतर कुछ सहयोगी दल विस्तारित सदन का समर्थन करने के लिए रैंक तोड़ सकते हैं। जबकि विपक्ष मजबूती से खड़ा रहा – राहुल गांधी के “राष्ट्र-विरोधी कृत्य” बयानबाजी के कारण – सरकार ने सफलतापूर्वक उन्हें 1971 की सीट बेसलाइन का सार्वजनिक रूप से बचाव करने के लिए मजबूर किया। परिसीमन की “जहर की गोली” के बारे में बहस करके, सरकार ने विपक्ष को राष्ट्रीय विस्तार की कीमत पर अपने चुनावी मैदान की रक्षा करने वाले एक समूह के रूप में चित्रित किया है। हार यह सुनिश्चित करती है कि “दिन 17” की कहानी सरकार की संख्या की कमी के बारे में नहीं है, बल्कि विपक्ष की कथित दृष्टि की कमी के बारे में है। इस ‘प्रतीकात्मक हार’ का दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है? नीतिगत दृष्टिकोण से, हारे हुए वोट के साथ आगे बढ़ने का निर्णय यह संकेत देता है कि सरकार शेष कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति मॉडल को दरकिनार करने के लिए तैयार है। मतदान से कुछ घंटे पहले 2023 के 106वें संशोधन को अधिसूचित करके, सरकार ने लंबे समय तक संवैधानिक प्रदर्शन के लिए मंच तैयार किया है। मतदाताओं के लिए संदेश स्पष्ट है: “हमारा इरादा है, लेकिन विपक्ष के पास वीटो है।” यह “शहीद” कानून अब प्राथमिक अभियान स्तंभ के रूप में काम करेगा। यह बिल किसी समिति में लटके रहने के बजाय टकराव का केंद्र बिंदु बन गया है। मोदी प्रशासन के लिए, 17 अप्रैल की हार “टकरावपूर्ण सुधार” के एक नए युग की शुरुआत है, जहां देश के 2029 की ओर बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के प्रतिनिधित्व की रुकी हुई प्रगति के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 22:13 IST समाचार राजनीति ‘शहीद’ जनादेश: मोदी सरकार ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक क्यों पेश किया, जिसे हारना तय था अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
राजगढ़ CMHO ₹20 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार:डायग्नोस्टिक सेंटर की अनुमति के लिए एक लाख मांगे थे, 50 हजार में हुई थी डील

भोपाल लोकायुक्त की टीम ने शुक्रवार शाम को राजगढ़ सीएमएचओ डॉ. शोभा पटेल को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जिला अस्पताल परिसर स्थित उनके सरकारी क्वार्टर में की गई। यह मामला एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में डॉक्टर का नाम जोड़ने की अनुमति से संबंधित है। भोपाल निवासी हरिओम अहिरवाल राजगढ़ में ‘सुविधा डायग्नोस्टिक सेंटर’ चलाते हैं। आरोप है कि सीएमएचओ डॉ. पटेल ने उनके सेंटर पर डॉक्टर का नाम जोड़ने के लिए पहले 1 लाख रुपए की मांग की थी, जिसे बाद में 50 हजार रुपए में तय किया गया। आवेदक हरिओम अहिरवाल के अनुसार, डॉ. पटेल पहले ही 30 हजार रुपए ले चुकी थीं और शेष 20 हजार रुपए के लिए लगातार दबाव बना रही थीं। काम लंबित रहने और बढ़ती मांगों से परेशान होकर हरिओम ने लोकायुक्त भोपाल में शिकायत दर्ज कराई। 20 हजार रुपए लेते हुए ट्रैप हुईं शिकायत के सत्यापन के बाद पुलिस अधीक्षक दुर्गेश कुमार राठौर के निर्देश पर एक ट्रैप टीम का गठन किया गया। शुक्रवार को योजना के तहत आवेदक को 20 हजार रुपए लेकर डॉ. पटेल के पास भेजा गया। जैसे ही डॉ. पटेल ने रिश्वत की राशि ली, पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने मौके पर दबिश देकर उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। ट्रैप टीम में उप पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह, आशीष भट्टाचार्य, निरीक्षक रजनी तिवारी, घनश्याम सिंह मर्सकोले, उप निरीक्षक मोनिका पांडेय और अन्य सदस्य शामिल थे। लोकायुक्त ने डॉ. शोभा पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा-7 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
वर्ल्ड हेरिटेज डे: रोशनी से जगमगाया जहाज महल:कल मिलेगा स्मारकों में मुफ्त प्रवेश; यूनेस्को सूची के लिए प्रशासन ने भेजे नए प्रस्ताव

विश्व विरासत दिवस पर शनिवार को मांडू के सभी केंद्रीय संरक्षित स्मारकों में पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क रहेगा। भारतीय पुरातत्व विभाग इस दिन पर सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विशेष आयोजन कर रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार रात जहाज महल को विद्युत रोशनी से रोशन किया गया। इंदौर कमिश्नर और धार कलेक्टर ने भेजे प्रस्ताव तत्कालीन इंदौर संभाग आयुक्त दीपक सिंह और तत्कालीन धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मांडू को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए शासन को कई प्रस्ताव भेजे हैं। मांडू वर्तमान में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल है। प्रशासन अब इसे पूर्ण विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए तकनीकी डोजियर तैयार करने के प्रयासों में जुटा है। मांडू में होंगी विविध गतिविधियां विश्व धरोहर दिवस पर मांडू में हेरिटेज वॉक, चित्रकला, वाद-विवाद और फोटो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों का उद्देश्य मांडू की प्राचीन वास्तुकला, जल प्रबंधन प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति आमजन को जागरूक करना है। एएसआई इस बार ‘विरासत और जलवायु’ विषय पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 61 केंद्रीय और 14 राज्य संरक्षित स्मारक मौजूद ऐतिहासिक नगरी मांडू में बाज बहादुर-रानी रूपमती महल, हिंडोला महल, अशर्फी महल और होशंगशाह के मकबरे सहित कुल 61 केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्मारक हैं। इसके अलावा राज्य पुरातत्व विभाग के भी 14 स्मारक यहां स्थित हैं। मांडू को यूनेस्को की सूची में शामिल करने के लिए वर्ष 1998 से संघर्ष जारी है। प्राचीन जल संरचनाओं के संरक्षण पर विशेष फोकस पुरातत्वविद और एएसआई भोपाल मंडल के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार कुर्मी ने बताया कि मांडू की प्राचीन जल संरचनाएं विश्व में अद्वितीय हैं। विभाग इन जलस्रोतों और स्मारकों के समूह को आधार बनाकर एक सशक्त प्रस्तुतिकरण तैयार कर रहा है। यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधित्व एएसआई द्वारा किया जाता है, जिससे मांडू की दावेदारी अब और मजबूत हुई है।
नरसिंहपुर में सूने मकान से 3 लाख कैश चोरी:अलमारी का लॉक तोड़कर जेवर भी ले गए बदमाश; बदमाशों का मोबाइल और मफलर छूटा

नरसिंहपुर जिले के अंशिका पुरम राजमार्ग पर एक सूने मकान को चोरों ने निशाना बनाया। अज्ञात बदमाशों ने एक ढाबा संचालक के घर से करीब तीन लाख रुपए नकद और लाखों के सोने-चांदी के आभूषण चुरा लिए। पुलिस ने शुक्रवार शाम मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। परिवार की अनुपस्थिति में हुई वारदात पीड़ित राजेश शुक्ला (45) ने पुलिस को बताया कि वे सागर जिले के मढपिपरिया में ‘रूद ढाबा’ चलाते हैं। गुरुवार सुबह वे अपने बेटे के साथ ढाबे पर थे और दोपहर में उनकी पत्नी भी घर पर ताला लगाकर अपने मायके बम्होरी चली गईं। रात करीब 11 बजे जब पिता-पुत्र घर लौटे, तो उन्हें मुख्य गेट और कमरों के ताले टूटे हुए मिले। अलमारी खंगालकर जेवरात चुराए चोरों ने घर के अंदर रखी गोदरेज की अलमारी का लॉक तोड़कर उसमें रखे सोने का हार, चैन, चूड़ियां, झुमकी, अंगूठियां और चांदी के पायजेब सहित अन्य कीमती आभूषण चोरी कर लिए। अलमारी में रखे 3 लाख रुपये नगद और स्टेट बैंक की चेकबुक भी गायब मिली। घर के अंदर सामान बिखरा पड़ा था और जेवरों के खाली डिब्बे जमीन पर पड़े मिले। घटनास्थल पर मिला चोरों का मोबाइल और मफलर मकान के निरीक्षण के दौरान एक स्लेटी रंग का कीपैड मोबाइल और एक भूरे रंग का मफलर बरामद हुआ है। पीड़ित परिवार के अनुसार यह सामान उनका नहीं है, जिससे प्रबल आशंका है कि चोरी की वारदात के दौरान यह सामान बदमाशों का वहीं छूट गया। पुलिस इन सबूतों को अहम मानकर जांच कर रही है। संदिग्धों से पूछताछ कर रही पुलिस सुआताला थाना पुलिस ने राजेश शुक्ला की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों पर केस दर्ज किया है। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है और संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
भोजशाला विवाद; वसंत पंचमी-जुमे पर टकराव रोकने की मांग:सामाजिक सद्भाव की अपील, दोनों समुदायों के हित में नियम बनाने की बात

धार भोजशाला से जुड़े विवाद में दायर याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। आवेदक अंतर सिंह यादव, अनवर हुसैन, मजरुल्ला खान, नंदराम परमार, पुरुषोत्तम हिरवले, रामनारायण धाकड़ और रियाज मोहम्मद खान (सभी निवासी धार) की ओर से वरिष्ठ ए़डवोकेट अशोक चितले ने पक्ष रखा। एडवोकेट चितले ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है, जिसका धार्मिक उपयोग हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा किया जाता रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने की स्थिति में पूर्व में कई बार तनाव, झड़प और टकराव की स्थिति बनी है। उच्च स्तरीय समिति गठन की मांग याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट से मांग की गई कि भविष्य में दोनों समुदायों के बीच टकराव की स्थिति न बने, इसके लिए उच्च स्तरीय समिति/आयोग गठित करने और केंद्र व राज्य शासन को आवश्यक विधायी प्रावधान या नियम बनाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि विवाद की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह अलग याचिका है, जिसमें सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की मांग की गई है। कोर्ट ने कहा भारतीय संविधान के तहत हम सभी धर्मों को साथ लेकर चलते हैं। साथ ही मामले में आगे की सुनवाई अगले दिन जारी रखने की बात कही। इंटरविनर पर कोर्ट की टिप्पणी सुनवाई के दौरान एक इंटरविनर द्वारा बहस की अनुमति मांगे जाने पर कोर्ट ने कहा कि कोर्ट ऐसा मंच नहीं है जहां हर कोई अपनी मांग लेकर उपस्थित हो। यदि किसी याचिका में ठोस आधार (सब्सटेंस) नहीं होगा तो उसे नहीं सुना जाएगा। एएसआई को भी पक्ष रखने की अनुमति एएसआई के एडवोकेट सुनील जैन को कोर्ट ने पक्षकार बताते हुए अपनी रिपोर्ट या पक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई लगातार जारी रखी जाएगी। अंतर सिंह एवं अन्य की ओर से ए़डवोकेट चितले अगली सुनवाई में अपनी दलीलें जारी रखेंगे।
‘विश्वासघात’ बनाम ‘गेरीमैंडरिंग’: संयुक्त विपक्ष ने सरकार के महिला कोटा को हराया, लोकसभा में परिसीमन पर जोर | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 20:23 IST 131वें संशोधन के बिना, सदन का विस्तार करने और 2026 के बाद की जनगणना से महिलाओं के कोटे को अलग करने की कानूनी व्यवस्था रुकी हुई है यह हार 2029 के आम चुनावों के रोडमैप को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ देती है। (फ़ाइल छवि) शुक्रवार को एक नाटकीय विधायी गतिरोध में, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में गिर गया क्योंकि सरकार अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रही। दिन भर की ज़ोरदार बहस के बावजूद, विधेयक – जिसमें सदन को 50 सीटों तक विस्तारित करने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई थी – के पक्ष में 27 वोट और विरोध में 211 वोट मिले। अनुच्छेद 36 के तहत, संशोधन को पारित करने के लिए कम से कम 326 वोटों (49 उपस्थित और मतदान को मानते हुए) के विशेष बहुमत की आवश्यकता थी, जिससे ट्रेजरी बेंच में काफी कमी रह गई। हार के बाद सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार ने परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून विधेयक पर आगे नहीं बढ़ने का भी फैसला किया। तीनों कानूनों का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था। संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक पारित होने में विफल क्यों हुआ? विधेयक की हार का प्राथमिक कारण विपक्ष का एकीकृत मोर्चा था, जिसने तर्क दिया कि यह कानून महिला सशक्तिकरण के बारे में कम और भारत के चुनावी मानचित्र के “खतरनाक” पुनर्गठन के बारे में अधिक था। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विधेयक को “घबराहट की प्रतिक्रिया” और “राष्ट्र-विरोधी कृत्य” करार देते हुए इस आरोप की अगुवाई की, जो दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों को उनके सफल जनसंख्या नियंत्रण के लिए दंडित करेगा। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर महिलाओं के कोटा को नए परिसीमन अभ्यास से जोड़कर, विपक्ष ने दावा किया कि सरकार “गणितीय गड़बड़ी” का प्रयास कर रही थी। सदन का गणित सत्तारूढ़ एनडीए के लिए भी उतना ही ख़राब था। 543 की प्रभावी ताकत और उपस्थित और मतदान करने वालों में से दो-तिहाई की आवश्यकता के साथ, सरकार को पर्याप्त क्रॉस-पार्टी समर्थन की आवश्यकता थी जो कभी पूरा नहीं हुआ। जबकि 27 हाँ ने साधारण बहुमत का प्रतिनिधित्व किया, वे संशोधन के लिए संवैधानिक सीमा से लगभग 50 वोट कम रह गए। अनुपस्थित रहने की कुल अनुपस्थिति – 49 सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से मतदान किया – 50-सीट विस्तार योजना की ध्रुवीकरण प्रकृति को रेखांकित किया। सरकार ने इस विधायी झटके पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की है? मतदान के तुरंत बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला किया और उन पर भारत की महिलाओं के खिलाफ “ऐतिहासिक विश्वासघात” का आरोप लगाया। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि हालांकि विधेयक आज गिर गया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अटल है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने दशकों से लंबित सुधार को रोकने के लिए परिसीमन की तकनीकीताओं के पीछे छिपकर अपने “महिला विरोधी” पूर्वाग्रह को उजागर किया है। रिजिजू ने सदन के बाहर संवाददाताओं से कहा, ”विपक्ष ने आज भारत की बेटियों की आकांक्षाओं के खिलाफ मतदान किया है।” उन्होंने कसम खाई कि सरकार आरक्षण के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी संवैधानिक रास्ते तलाशेगी, यह संकेत देते हुए कि भविष्य के सत्रों में “निष्पादन की कार्यप्रणाली” पर फिर से विचार किया जा सकता है। गृह मंत्री अमित शाह, जिन्होंने पहले सदन से विधेयक को “नैतिक अनिवार्यता” के रूप में पारित करने का आग्रह किया था, ने इसी तरह कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गुट द्वारा “अदूरदर्शी” नाकेबंदी के बावजूद महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए 2029 का लक्ष्य प्राथमिकता बना हुआ है। महिला आरक्षण और परिसीमन की आगे की राह क्या है? यह हार 2029 के आम चुनावों के रोडमैप को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ देती है। 131वें संशोधन के बिना, सदन का विस्तार करने और 2026 के बाद की जनगणना से महिलाओं के कोटा को अलग करने की कानूनी व्यवस्था रुकी हुई है। 2023 का 106वां संशोधन – मूल महिला कोटा कानून – सिर्फ एक दिन पहले 16 अप्रैल को अधिसूचित किया गया था, लेकिन इसका कार्यान्वयन तकनीकी रूप से परिसीमन अभ्यास से जुड़ा हुआ है जिसे अब पराजित विधेयक सुविधाजनक बनाने के लिए था। राजनीतिक लड़ाई के अब सार्वजनिक क्षेत्र में जाने की उम्मीद है, दोनों पक्ष “17 अप्रैल की हार” को या तो संघवाद की जीत या लैंगिक न्याय की हार के रूप में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 20:22 IST समाचार राजनीति ‘विश्वासघात’ बनाम ‘गेरीमैंडरिंग’: संयुक्त विपक्ष ने सरकार के महिला आरक्षण को हराया, लोकसभा में परिसीमन पर जोर अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
सीहोर से लापता 16 वर्षीय बालिका हरदा में मिली:दसवीं में कम नंबर आने से घर छोड़ा, पुलिस ने सकुशल परिजनों को सौंपा

सीहोर जिले के इछावर थाना पुलिस ने शुक्रवार को 16 वर्षीय एक नाबालिग बालिका को हरदा से खोज निकाला है। बालिका 16 अप्रैल को घर से लापता हो गई थी। पुलिस के अनुसार, 16 अप्रैल को सूचनाकर्ता ने इछावर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी बिना बताए घर से कहीं चली गई है। इस रिपोर्ट पर थाना इछावर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। अपहृता की तलाश के लिए पुलिस टीम ने मुखबिरों से मिली सूचना और तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया। टीम ने ग्राम कांकरखेड़ा से जानकारी जुटाई और हरदा पहुंची। वहां बस स्टैंड और फिर जिला चिकित्सालय हरदा में तलाश की गई, जहां बालिका अस्पताल में बैठी मिली। बालिका को परिजनों के साथ थाने लाकर बयान दर्ज कराए गए। उसने बताया कि दसवीं कक्षा की परीक्षा में उम्मीद से कम अंक आने के कारण वह बिना बताए घर से हरदा आ गई थी। बालिका ने अपने साथ किसी भी प्रकार के अपराध की घटना से इनकार किया है। पुलिस ने गुमशुदा बालिका को सकुशल उसके परिजनों को सौंप दिया है।
महिला आरक्षण के लिए इंतजार जारी, संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरा, परिसीमन विधेयक गिरा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 20:07 IST दो तिहाई बहुमत से चूकने के बाद महिला कोटा विधेयक लोकसभा में विफल हो गया, सरकार ने स्पीकर ओम बिरला से परिसीमन विधेयक 2026 और यूटी कानून संशोधन विधेयक 2026 को रोकने के लिए भी कहा। लोकसभा (फाइल फोटो) संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए कोटा का इंतजार जारी है क्योंकि 131वां संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा की परीक्षा में पास नहीं हो सका। संवैधानिक संशोधन विधेयक का उद्देश्य 2029 में विधायिका में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और लोकसभा में सीटों की संख्या में वृद्धि करना है। जहां 298 सदस्यों ने बिल के समर्थन में वोट किया, वहीं 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट किया. मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से, विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। विधेयक के लिए दो-तिहाई बहुमत से कम होने के बाद, सरकार ने स्पीकर ओम बिरला से दो अन्य विधेयकों- परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को आगे नहीं बढ़ाने का भी अनुरोध किया। संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास के बाद, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को “परिचालित” करने के लिए लोकसभा सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाना था। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में सीटें भी बढ़ाई जानी थीं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 19:56 IST न्यूज़ इंडिया महिला आरक्षण के लिए इंतजार जारी, संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरा, परिसीमन विधेयक गिरा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
सीहोर में पाइपलाइन जोड़ने के दौरान पानी बर्बाद:इंदौर नाके पर नई टंकी से कनेक्शन; हजारों लीटर पेयजल सड़कों पर बहा

सीहोर शहर में भीषण गर्मी और जल संकट के बीच हजारों लीटर पेयजल सड़कों पर बह गया। यह घटना नगर के इंदौर नाका क्षेत्र में नवनिर्मित पानी की टंकी को मुख्य पाइपलाइन से जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान हुई। पाइपलाइन जोड़ने के कार्य के तहत मुख्य पाइपलाइन को खाली किया गया, जिससे बड़ी मात्रा में साफ पानी व्यर्थ बह गया। इस लापरवाही को देखकर स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। शहर इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। सीहोर में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। नगर निगम द्वारा शहर में पेयजल की आपूर्ति दो दिन के अंतराल पर की जा रही है। पेयजल संकट लगातार गहरा रहा गिरते जलस्तर के कारण पेयजल संकट लगातार गहरा रहा है। पानी की किल्लत का फायदा निजी टैंकर संचालक उठा रहे हैं, जहां एक टैंकर के लिए नागरिकों को 500 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। 20 लीटर पानी की केन भी 20 रुपए में बिक रही है। नागरिकों का कहना है कि जब शहर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है और लोग महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर हैं, ऐसे में बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इतनी बड़ी मात्रा में पानी बहा देना प्रबंधन की बड़ी लापरवाही है। उनका मानना है कि पाइपलाइन जोड़ने के कार्य को इस तरह नियोजित किया जाना चाहिए था कि पानी की बर्बादी कम से कम हो।
अवैध बोरिंग पर शिकंजा, मशीन जब्त:सीधी में बिना अनुमति चल रही थी बोरिंग, एजेंट समेत जिम्मेदारों पर एक्शन

सीधी जिले के चुरहट क्षेत्र के ग्राम कुसमहर में अवैध बोरिंग के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे बिना अनुमति के बोरिंग का कार्य चल रहा था, जिसे रोककर मशीन जब्त कर ली गई। यह अवैध बोरिंग गांव के प्राथमिक स्कूल से महज 100 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही थी, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई थीं। जानकारी मिलते ही एसडीएम विकास कुमार आनंद ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने तहसीलदार रामपुर नैकिन आशीष कुमार मिश्रा को मौके पर भेजा। तहसीलदार ने बोरिंग कार्य करवा रहे लोगों से दस्तावेज मांगे, लेकिन कोई भी वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जा सकी। जांच में पता चला कि बोरिंग लक्ष्मीकांत प्रजापति की जमीन पर हो रही थी, जबकि कार्य कराने का जिम्मा एजेंट जितेंद्र चतुर्वेदी के पास था। दोनों पक्षों के पास आवश्यक अनुमति नहीं थी, जिससे यह कार्य पूरी तरह अवैध पाया गया। दस्तावेजों के अभाव में प्रशासन ने तत्काल बोरिंग मशीन जब्त कर ली। सुरक्षा कारणों से मशीन को सेमरिया थाने में खड़ा करवाया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी कागजी कार्रवाई नहीं हो जाती और मामला न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक मशीन थाने में ही रहेगी। तहसीलदार आशीष कुमार मिश्रा ने बताया कि मौके पर नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अवैध खनन किया जा रहा था, जिस पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। जब्त की गई बोरिंग मशीन शिव शक्ति कंपनी की है, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर KA 01 ME 7577 है। यह मशीन कर्नाटक की बताई जा रही है। गौरतलब है कि सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा ने पहले ही जिले को प्रतिबंधित जोन घोषित कर अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। प्रशासन की कार्रवाई से अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।







