सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग:याचिका खारिज; CJI बोले- जरूरत जागरूकता की है, हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा आदेश नीतिगत दायरे में आता है और न्यायपालिका इसे जारी नहीं कर सकती। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जान-बूझकर वोट न डालने वालों के लिए दंडात्मक कार्रवाई की मांग और वोटिंग अनिवार्य बनाने वाली याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। बेंच ने PIL याचिकाकर्ता अजय गोयल से कहा कि वे अपनी शिकायतों को लेकर संबंधित पक्षों से संपर्क करें।याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि जो लोग जान-बूझकर वोट डालने से दूर रहते हैं, उनके लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। CJI ने कहा- लोकतंत्र कानूनी दबाव के बजाय जन जागरूकता से फलता-फूलता है। एक ऐसे देश में जो कानून के शासन से चलता है और लोकतंत्र में विश्वास रखता है। जहां हमने 75 सालों में हमने दिखाया है कि हम इस पर कितना भरोसा और विश्वास करते हैं, वहां हर किसी से यह उम्मीद की जाती है कि वह वोट डालने जाए। अगर वे नहीं जाते, तो नहीं जाते। जरूरत जागरूकता की है, लेकिन हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते। CJI ने चुनाव के दौरान होने वाले परेशानिायं भी बताईं सुनवाई केदौरान बेंच ने अनिवार्य वोटिंग कानून की व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र किया और कहा कि चुनाव के दिनों में, जजों समेत कई नागरिकों को काम करना पड़ता है। दरअसल, याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया था कि कोर्ट को चुनाव आयोग को निर्देश देना चाहिए कि वह वोट न डालने वालों के लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाए। इस पर CJI ने घर पर रहने के काम को अपराध बनाने के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अगर हम आपका सुझाव मान लेते हैं, तो मेरे साथी जस्टिस बागची को वोट डालने के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा, भले ही उस दिन काम का दिन हो।” बेंच ने समाज के वंचित वर्गों के लिए भी चिंता जताई। बेंच ने पूछा, “अगर कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि मुझे अपनी दिहाड़ी कमानी है, तो मैं वोट कैसे डालूं, हम उनसे क्या कहें।” याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह एक समिति बनाए, जो उन लोगों पर रोक लगाने के प्रस्ताव दे, जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में नाकाम रहते हैं। हालांकि CJI ने कहा, ‘हमें आशंका है कि ये मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं।’
ग्वालियर में मंदिर की गद्दी को लेकर खूनी संघर्ष:पूर्व पुजारी हरिदास बाबा के चेलों में चले लाठी-डंडे और चाकू,योगेंद्र दास महाराज को गंभीर चोट

ग्वालियर में मंदिर की गद्दी को लेकर चल रही पुरानी तनातनी बुधवार रात खूनी संघर्ष में बदल गई। सिरोल थाना क्षेत्र के डोंगरपुर पुतलीघर स्थित बाग वाले मंदिर में दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला लाठी-डंडों और चाकू तक पहुंच गया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार योगेंद्र दास महाराज पर चंद्रशेखर महाराज ने अपने साथियों मोहन कुशवाहा और कैलाश बघेल के साथ मिलकर रात करीब 11:30 बजे हमला कर दिया। इस हमले में योगेंद्र दास महाराज को पसली में चाकू लगा, वहीं सिर पर डंडा लगने से गंभीर चोट आई। घटना के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अदालत में विचाराधीन है मामला बताया जा रहा है कि दोनों ही पक्ष मंदिर के पूर्व पुजारी हरिदास बाबा के चेले हैं और लंबे समय से मंदिर पर कब्जे को लेकर उनके बीच विवाद चल रहा है। करीब 12 से 15 हजार वर्ग फीट में फैले इस मंदिर की गद्दी को लेकर मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, लेकिन अब यह विवाद हिंसक रूप ले चुका है। पुलिस को नहीं मिली लिखित शिकायत घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। सिरोल थाना प्रभारी गोविंद बगोई के अनुसार फिलहाल घायल पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं दी गई है, हालांकि मेडिकल परीक्षण कराया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
रिकॉर्ड जीत के साथ ‘कैंडिडेट्स’ जीते 20 साल के सिंदारोव:अब 19 वर्षीय गुकेश से सामना; दोपहर में नींद से बचने के लिए चुना था चेस

उज्बेकिस्तान के 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर जावोखिर सिंदारोव ने ‘कैंडिडेट्स चेस टूर्नामेंट’ जीता। 13 मैचों में अजेय रहते हुए उन्होंने 6 जीत दर्ज की, जो 2013 में राउंड रॉबिन फॉर्मेट आने के बाद से इस टूर्नामेंट का रिकॉर्ड है। अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उनका सामना भारत के मौजूदा चैम्पियन 19 साल के डी. गुकेश से होगा। सिंदारोव के पास 2004 के बाद उज्बेकिस्तान को पहला और ओवरऑल सिर्फ दूसरा चैम्पियन देने का मौका है। दूसरी ओर, गुकेश इन दिनों फॉर्म से जूझ रहे हैं और टॉप-10 से भी बाहर हो गए हैं। सिंदारोव – कभी वीडियो गेम्स की लत लग गई थी सिंदारोव ने साढ़े चार साल की उम्र में किंडरगार्टन में दोपहर की नींद से बचने के लिए शतरंज चुना। ट्रेनिंग के बाद 6 महीने में ही दादाजी को हराने लगे और 12 की उम्र में दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर्स में शुमार हो गए। बीच में वीडियो गेम्स की लत के कारण उनकी रेटिंग गिर गई। हालांकि, कोविड में वापस करियर पटरी पर लाए। सिंदारोव बेहद शांत स्वभाव के हैं। कैंडिडेट्स में उनकी एक चाल ने नंबर-2 हिकारू नाकामुरा को 67 मिनट तक सोचने पर मजबूर कर दिया। उस माहौल में भी सिंदारोव बेफिक्र उबासी लेते रहे। अंततः दबाव में नाकामुरा से गलती हुई और सिंदारोव जीत गए। 2025 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद ताशकंद लौटने पर सैन्य बैंड और प्रधानमंत्री ने उनका स्वागत किया। इस जीत के बाद उन्होंने सबसे पहला मैसेज अपनी 5 साल पुरानी दोस्त, कजाकिस्तान की ग्रैंडमास्टर बिबिसारा असौबायेवा को किया था। कैंडिडेट्स में भी दोनों एक-दूसरे को प्रेरित करते नजर आए थे। गुकेश – चैम्पियंस का वॉलपेपर लगाकर तैयारी करते गुकेश के लैपटॉप का वॉलपेपर दुनिया के 16 विश्व चैम्पियनों की तस्वीरों से सजा था। वे रोज उसे देखते और उन्हीं के बीच होने का सपना बुनते। दिसंबर 2024 में जब खुद विश्व चैम्पियन बने, तो उस ऐतिहासिक फेहरिस्त में उनका नाम भी जुड़ गया। 2021 के लॉकडाउन में उन्हें फिल्मों की ऐसी लत लगी कि वे दिन में दो-दो फिल्में देखने लगे। जैसे ही अहसास हुआ कि यह शतरंज को नुकसान पहुंचा रहा है, उन्होंने तुरंत फिल्मों पर ब्रेक लगा दिया। दही-चावल खाने के शौकीन गुकेश को शतरंज का जुनून ऐसा था कि क्लास टॉपर होने के बावजूद चौथी क्लास के बाद स्कूल छोड़ दिया था। बिना स्कूल गए उन्होंने खिलाड़ियों से बात कर फर्राटेदार इंग्लिश सीखी और दोस्तों के साथ फिल्में देखकर हिंदी समझनी शुरू की। गुकेश की दीवानगी ऐसी थी कि कोच चेस की जो किताबें 2-3 दिन में खत्म करने को देते थे, वे घर जाकर पिता के साथ उन्हें कुछ ही घंटों में हल कर देते थे।
यूट्यूब एप से पूरी तरह हटा सकेंगे 'शॉर्ट्स':टाइम मैनेजमेंट में नया 0 मिनट का ऑप्शन मिला; रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी

यूट्यूब ने ‘टाइम मैनेजमेंट’ का नया फीचर जारी किया है। इसके जरिए अब आप एप पर शॉर्ट्स देखने की समय सीमा को ‘जीरो’ पर सेट कर सकते हैं। इससे शॉर्ट्स फीड पूरी तरह से हट जाएगी। इसका मकसद स्क्रीन टाइम को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करना है। यूट्यूब ने पिछले साल अक्टूबर में शॉर्ट्स के लिए टाइमर फीचर पेश किया था, जिसमें न्यूनतम समय सीमा 15 मिनट थी। जनवरी में इस फीचर का विस्तार करते हुए माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल देने के लिए ‘जीरो मिनट’ का विकल्प लाने की घोषणा की गई थी। सभी अकाउंट के लिए फीचर रोलआउट यूट्यूब की प्रवक्ता मैकेंजी स्पिलर के मुताबिक, अब यह विकल्प सभी पैरेंट्स के लिए लाइव हो चुका है और धीरे-धीरे सामान्य एडल्ट अकाउंट्स के लिए भी रोल आउट किया जा रहा है। होम स्क्रीन से भी शॉर्ट्स के सुझाव हट जाएंगे जैसे ही आप ‘जीरो मिनिट’ की लिमिट चुनेंगे, शॉर्ट्स टैब पर कोई वीडियो नहीं दिखेगा। वहां केवल एक नोटिफिकेशन दिखाई देगा कि आपने अपनी ‘शॉर्ट्स फीड लिमिट’ पूरी कर ली है। लिमिट सेट करने के बाद होम स्क्रीन से भी शॉर्ट्स के सुझाव हट जाएंगे। बिंज वॉचिंग और रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी भारत में यूट्यूब के करोड़ों यूजर्स हैं और शॉर्ट्स का क्रेज बहुत ज्यादा है। ऐसे में यह फीचर उन लोगों के लिए काफी मददगार साबित होगा जो डूम स्क्रॉलिंग यानी अनचाहे स्क्रॉलिंग की आदत छोड़ना चाहते हैं। डिजिटल वेलबीइंग की दिशा में यह यूट्यूब का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। फीचर ऑन करने लिए 3 स्टेप्स फॉलो करें नॉलेज पार्ट: क्या है डूमस्क्रॉलिंग लगातार छोटे वीडियो स्क्रॉल करते रहने की आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहते हैं। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है, बल्कि मानसिक तनाव और नींद न आने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
आम खाने का सही तरीका क्या है? सिर्फ 1 गलती की और शरीर में भर सकता है जहर, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए सही नियम

Last Updated:April 16, 2026, 11:57 IST Aam Khane Ka Sahi Tarika : गर्मियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में ‘फलों के राजा’ आम की खुशबू महकने लगी है. रसीले आम का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाना लाजमी है. स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ आम विटामिन्स और मिनरल्स का खजाना भी है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही इस मीठे फल को आपकी सेहत के लिए ‘जहर’ समान बना सकती है? न्यूट्रिशनिस्ट निराली टांक ने हाल ही में आम खाने के उन सही नियमों के बारे में बताया है, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं. Mango Eating Tips : ज्यादातर लोग बाजार से आम खरीदकर लाते हैं, उन्हें नल के नीचे धोते हैं और तुरंत काटकर खाना शुरू कर देते हैं. पहली नजर में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से यह बहुत बड़ी गलती है. बिना सही प्रक्रिया के आम खाने से न केवल पेट खराब हो सकता है, बल्कि यह स्किन और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डालता है. अगर आप आम के शौकीन हैं, तो आपको इसे खाने का सही तरीका और एक्सपर्ट की सलाह जरूर जाननी चाहिए. भिगोना क्यों है जरूरी? (Why Soaking is Essential) न्यूट्रिशनिस्ट निराली टांक के अनुसार, आम को खाने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले पानी में भिगोकर रखना अनिवार्य है. यह प्रक्रिया केवल ऊपरी धूल-मिट्टी साफ करने के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण है. आम की तासीर प्राकृतिक रूप से गर्म होती है. अगर इसे सीधे खाया जाए, तो यह शरीर के ‘थर्मोजेनेसिस’ (आंतरिक गर्मी) को बढ़ा देता है. यही कारण है कि कई लोगों को आम खाने के बाद चेहरे पर फुंसियां या मुंहासे निकलने की शिकायत होती है. शरीर की गर्मी पर नियंत्रण (Controlling Body Heat)- पानी में भिगोने से आम की यह अतिरिक्त गर्मी (Heat Content) काफी हद तक कम हो जाती है. जब आम ठंडा हो जाता है, तो यह शरीर में गर्मी पैदा करने के बजाय ठंडक पहुंचाता है. जो लोग आम खाने के बाद पेट में जलन या मुंह में छालों से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह तरीका रामबाण है. यह छोटा सा काम आम को शरीर के लिए सुरक्षित और पचाने में बेहद आसान बना देता है. Add News18 as Preferred Source on Google फाइटिक एसिड से सुरक्षा (Neutralizing Phytic Acid)- एक और गंभीर कारण है आम में मौजूद ‘फाइटिक एसिड’ (Phytic Acid). फाइटिक एसिड एक ऐसा तत्व है जिसे ‘एंटी-पोषक तत्व’ माना जाता है. यह शरीर को कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स को सोखने से रोकता है. जब हम आम को कुछ देर पानी में भिगोते हैं, तो यह एसिड पानी में निकल जाता है. ऐसा करने से आम में मौजूद भरपूर पोषण आपके शरीर को पूरी तरह मिल पाता है और आप एनीमिया जैसी समस्याओं से बचे रहते हैं. रसायनों और टॉक्सिन्स से बचाव (Safety from Chemicals)- आजकल फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और तेजी से पकाने के लिए कीटनाशकों (Pesticides) और केमिकल्स का भारी इस्तेमाल होता है. ये रसायनिक तत्व छिलके की ऊपरी परत पर चिपके रहते हैं. केवल सादे पानी से धोने भर से ये साफ नहीं होते. जब आम को एक घंटे तक पानी के बर्तन में डुबोकर रखा जाता है, तो ये हानिकारक रसायन पानी में घुलकर निकल जाते हैं, जिससे शरीर के अंदर ‘टॉक्सिन्स’ या जहर पहुंचने का खतरा खत्म हो जाता है. पाचन तंत्र पर असर (Impact on Digestion)- गलत तरीके से आम खाने का सबसे पहला असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है. बिना भिगोए आम खाने से कब्ज, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी संवेदनशील हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप आम को सही विधि से खाते हैं, तो इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन को दुरुस्त रखता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाता है. खाने का सही समय (The Ideal Time to Eat)- न्यूट्रिशनिस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आम को कभी भी मुख्य भोजन (Heavy Meal) के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए. इसे या तो सुबह के नाश्ते के समय लें या फिर दोपहर के स्नैक के रूप में. खाने के तुरंत बाद आम खाने से शरीर में ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह है. इसलिए समय और तरीके का तालमेल ही आपको आम के असली फायदों से रूबरू कराएगा. अंत में, यह ध्यान रखें कि आम केवल एक फल नहीं बल्कि सेहत का खजाना है, बशर्ते आप इसे प्रकृति के नियमों के अनुसार खाएं. तो अगली बार जब आप घर में आम लाएं, तो उसे सीधे थाली में सजाने के बजाय एक घंटे के लिए ठंडे पानी की बाल्टी में जरूर डालें. अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ न करें और न्यूट्रिशनिस्ट द्वारा बताए गए इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर गर्मियों के इस सुनहरे तोहफे का सुरक्षित आनंद लें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) First Published : April 16, 2026, 11:57 IST
गर्मी में पपीता आपकी सेहत के लिये कैसे है फायदेमंद, इसको खाने का सही समय क्या है?

गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक, ऊर्जा और सही पोषण की आवश्यकता होती है. ऐसे में पपीता एक ऐसा फल है जो न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि हमारी सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है और यह विटामिन‑मिनरल्स से भरपूर होता है, इसलिए इसे गर्मियों के लिए एक आदर्श फल माना जाता है. 1. शरीर को रखता है हाइड्रेटपपीता लगभग 85–88% पानी से बना होता है, जो गर्मी में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करता है. पसीने के कारण निकलने वाले तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई में यह सहायक है, जिससे थकान और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. 2. पाचन को करता है दुरुस्तपपीते में पपेन (Papain) नामक प्राकृतिक एंजाइम पाया जाता है, जो प्रोटीन को पचाने में मदद करता है. नियमित रूप से पपीता खाने से कब्ज, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. इसमें मौजूद फाइबर भी आंतों की सफाई में सहायक है. 3. इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायकपपीता विटामिन C और विटामिन A का अच्छा स्रोत है. गर्मियों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में पपीता शरीर की रोग‑प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करता है. 4. त्वचा के लिए फायदेमंदतेज धूप और पसीने की वजह से त्वचा पर टैनिंग और मुंहासे हो सकते हैं. पपीते में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन C त्वचा को भीतर से पोषण देते हैं, झुर्रियों को कम करने और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करते हैं. 5. वजन नियंत्रण में मददगारपपीता कैलोरी में कम और फाइबर में अधिक होता है. इसे खाने से पेट देर तक भरा रहता है, जिससे बार‑बार भूख नहीं लगती और वजन को संतुलित रखने में मदद मिलती है. पपीता खाने का सही समय सुबह खाली पेट पपीता खाना सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय इसका पपेन एंजाइम बेहतर तरीके से काम करता है और पाचन तंत्र को सक्रिय भी करता है.दोपहर में भोजन से 30 मिनट पहले या बीच में भी पपीता खाया जा सकता है, इससे भूख नियंत्रित रहती है.रात में देर से पपीता खाने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ लोगों को इससे गैस या भारीपन महसूस हो सकता है. इन बातों पर जरूर ध्यान दें विशेष रूप से ध्यान रखें कि गर्भवती महिलाएं कच्चा या अधपका पपीता न खाएं.इस तरह, सही समय पर पपीता खाने से गर्मी में शरीर को ठंडक, ऊर्जा और संपूर्ण पोषण मिलता है.
मुरैना में बिना रजिस्ट्रेशन वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल-सीएनजी:प्रभारी कलेक्टर बोले- क्राइम रोकने लिया फैसला, फ्यूल देने पर संचालक पर होगी कार्रवाई

अब मुरैना में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को पेट्रोल,डीजल,सीएनजी नहीं मिलेगा। ऐसा करना पेट्रोल पंप संचालकों के लिए अपराध होगा। इस तरह का आदेश बुधवार देर शाम जिले भर के समस्त पेट्रोल पंप संचालकों को जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के वाहनों बाइक, ट्रैक्टर, डंपर, कार सहित अन्य वाहनों से हो रहे क्राइम को रोकने के लिए यह पहल जिला प्रशासन की ओर से उठाई गई है। जिला प्रशासन का मानना है कि गाड़ी पर रजिस्ट्रेशन ना होने से क्राइम के बाद जांच प्रभावित होती है। बिना रजिस्ट्रेशन फ्यूल नहीं मुरैना के प्रभारी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ कमलेश कुमार भार्गव के द्वारा जिले के समस्त पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया है कि वह अब बिना रजिस्ट्रेशन के वाहनों को पेट्रोल, डीजल, सीएनजी नहीं देंगे।अगर ऐसा करेंगे तो वह जिला प्रशासन के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा। उस पंप संचालक पर धारा 223 व अन्य प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 15 अप्रैल से 14 जून तक प्रभावी रहेगा। बढ़ते अपराधों पर लगाम की कोशिश जिला प्रशासन का मानना है कि जिले में बड़ रहे अपराधों के वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नहीं पाए जाते जैसे ट्रैक्टर, बाइक, डंपर, कार आदि जिससे क्राइम केस की जांच प्रभावित होती है। ज्यादातर ट्रैक्टर ट्रॉलियां और लोडिंग वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं डाले जाते, जिससे हादसे के बाद उस तक पहुंचा मुश्किल होता है। इस कारण जिला प्रशासन ने यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता धारा 163 के अंतर्गत एक पक्षीय रूप से पारित किया गया है।
महिलाओं में भी बढ़ रहा पुरुषों की तरह गंजापन, डॉक्टर ने बताई ये है सबसे बड़ी वजह, जानें उपाय

Last Updated:April 16, 2026, 11:27 IST Hair Fall Reasons: अब पुरुषों ही नहीं, महिलाओं में भी गंजापन की समस्या बढ़ती जा रही है. पुरुषों और महिलाओं में बालों के झड़ने के कुछ अंतरों को समझना बहुत महत्वपूर्ण है. ऐसे में दिल्ली के डॉ. विनय सिंह के अनुसार आजकल युवा महिलाओं में गंजापन तेजी से बढ़ रहा है. इसका मुख्य कारण जल्दी शुरू होने वाले पीरियड्स, कम उम्र में मेनोपॉज़, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओडी, थायरॉयड की समस्या और बढ़ता तनाव है. आइये जानते हैं इसकी मुख्य वजह क्या है. ख़बरें फटाफट नई दिल्ली: पुरुषों में गंजापन होना आम बात है, लेकिन कम उम्र में लड़कों या पुरुषों के बाल झड़ जाना बहुत गंभीर नहीं माना जाता है. क्योंकि पुरुषों में जेनेटिक कारण होने के साथ ही तमाम फैक्टर होते हैं. अब कम उम्र की लड़कियों और महिलाओं में भी गंजापन बढ़ रहा है. ठीक वैसे ही, जैसे पुरुषों में होता आया है. बीते 10 सालों में ऐसे मामलों में इजाफा हुआ है. महिलाओं के बाल जो खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं. वो अब कम उम्र में सिर से गायब हो रहे हैं. आलम यह है कि डॉक्टर के पास ऐसी महिलाओं और लड़कियों की भीड़ बढ़ने लगी है. इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (IADVL) के प्रेसिडेंट यानि राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय सिंह इस पर कई प्रमुख कारण मानते हैं. कम उम्र में पीरियड्स है बड़ी वजह डॉ. विनय सिंह ने बताया कि महिलाओं और लड़कियों में गंजेपन की बड़ी वजह हार्मोन्स का असंतुलित होना है. महिलाओं में गंजेपन को फीमेल पैटर्न बाल्डनेस कहते हैं. बीते 10 सालों में ऐसे मामलों में लगातार इजाफा हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लड़कियों को अब कम उम्र में पीरियड से शुरू हो जाते हैं. अब 8 साल से लेकर 12 साल के बीच लड़कियों में पीरियड्स होने लगे हैं या पीरियड्स रेगुलर नहीं होते हैं. इस वजह से हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है, जिसका असर उनकी बॉडी में दिखने लग जाता है. इसका असर DHT यानी डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन पर पड़ता है. इसका असर बालों की जड़ों पर पड़ता है, जिस वजह से बाल पतले हो जाते हैं या बाल झड़ जाते हैं, जिस वजह से सिर की स्किन यानी स्कैल्प दिखने लग जाता है और खालीपन बन जाता है. महिलाओं में पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का प्रभाव बढ़ने पर फॉलिकल सिकुड़ते हैं. कम उम्र में मेनोपॉज है कारण इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (IADVL) के प्रेसिडेंट यानि राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय सिंह ने बताया कि महिलाओं में गंजेपन के और भी कई कारण होते हैं. जैसे बढ़ती उम्र 30-40 के बाद यह समस्या अधिक दिखने लगती है. इसके अलावा एक और सबसे प्रमुख कारण वह यह है कि कम उम्र में रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) का होना. अब यह 45 साल की उम्र में भी होने लगा है, जिस वजह से महिलाओं में एस्ट्रोजन घटता है. एंड्रोजन का असर बढ़ जाता है. इस वजह से भी गंजापन आता है और थायरॉयड, पीसीओडी, एनीमिया या पोषण की कमी और अत्यधिक तनाव भी इसकी वजह है. जानें कैसे पहाचानें लक्षण 1- मांग चौड़ी दिखने लगना2– सिर के बीच से स्कैल्प दिखना3- पोनीटेल पतली होना4- कंघी करते समय ज्यादा बाल गिरना5- बालों का पतला और बेजान होना इस तरह करवाएं इलाज डॉ. विनय सिंह ने बताया कि जब भी महिलाओं या लड़कियों में पीरियड्स रेगुलर ना हो तो इस बात को गंभीरता से लेते हुए सबसे पहले एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें. इन दोनों से इलाज करवाने के बाद ही अपने बाल, नाखून या स्क्रीन से जुड़ी कोई भी बीमारी हो तो उसके लिए हमेशा रजिस्टर्ड डर्मेटोलॉजिस्ट से ही मिलें. यही लोग सही इलाज कर सकते हैं. घर पर कोई घरेलू नुस्खा अपनाने से बेहतर है कि अगर आपने समय रहते डॉक्टर को दिखा लिया तो आपके बाल बच सकते हैं और आपकी पीरियड्स की जो दिक्कत है. वह भी दूर हो जाएगी. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 16, 2026, 11:27 IST
अवनीत कौर ने प्लास्टिक सर्जरी की अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी:एक्ट्रेस ने कहा- उम्र के साथ लुक में नैचुरल बदलाव हुआ है

एक्ट्रेस अवनीत कौर ने हाल ही में उनके लुक्स को लेकर चल रही प्लास्टिक सर्जरी और बोटॉक्स की अफवाहों पर रिएक्ट किया। उन्होंने साफ किया कि उनके लुक में बदलाव उम्र के साथ नैचुरली हुआ है। गौरतलब है कि अवनीत कौर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी फोटो शेयर करती रहती हैं। समय के साथ उनके लुक में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा बोटॉक्स या प्लास्टिक सर्जरी कराने के दावे किए जाते हैं। बचपन और अब की फोटो की तुलना करने की सलाह दी हाल ही में पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में अवनीत ने इन दावों को लेकर कहा कि वह ऐसे कमेंट्स पर ध्यान नहीं देतीं, लेकिन अगर लोग ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें अपने बचपन और वर्तमान की तस्वीरों की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता है, उसके फीचर्स में बदलाव आना एक नार्मल प्रोसेस है। उन्होंने कहा कि हर कोई उम्र के साथ बदलता है और यह पूरी तरह नेचुरल है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि उनकी नाक, आंखें और बाकी फीचर्स पहले जैसे ही हैं। उन्होंने अपने ब्यूटी मोल (तिल) का जिक्र करते हुए कहा कि वह आज भी वैसा ही है। अवनीत ने अपनी ब्यूटी का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि जो भी है, वह उन्हें नेचुरली मिला है। वर्क फ्रंट की बात करें तो अवनीत आखिरी बार शांतनु माहेश्वरी के साथ फिल्म लव इन वियतनाम में नजर आई थीं। राहत शाह काजमी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसमें अवनीत ने सिमी की भूमिका निभाई थी।
अवनीत कौर ने प्लास्टिक सर्जरी की अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी:एक्ट्रेस ने कहा- उम्र के साथ लुक में नैचुरल बदलाव हुआ है

एक्ट्रेस अवनीत कौर ने हाल ही में उनके लुक्स को लेकर चल रही प्लास्टिक सर्जरी और बोटॉक्स की अफवाहों पर रिएक्ट किया। उन्होंने साफ किया कि उनके लुक में बदलाव उम्र के साथ नैचुरली हुआ है। गौरतलब है कि अवनीत कौर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी फोटो शेयर करती रहती हैं। समय के साथ उनके लुक में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा बोटॉक्स या प्लास्टिक सर्जरी कराने के दावे किए जाते हैं। बचपन और अब की फोटो की तुलना करने की सलाह दी हाल ही में पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में अवनीत ने इन दावों को लेकर कहा कि वह ऐसे कमेंट्स पर ध्यान नहीं देतीं, लेकिन अगर लोग ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें अपने बचपन और वर्तमान की तस्वीरों की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता है, उसके फीचर्स में बदलाव आना एक नार्मल प्रोसेस है। उन्होंने कहा कि हर कोई उम्र के साथ बदलता है और यह पूरी तरह नेचुरल है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि उनकी नाक, आंखें और बाकी फीचर्स पहले जैसे ही हैं। उन्होंने अपने ब्यूटी मोल (तिल) का जिक्र करते हुए कहा कि वह आज भी वैसा ही है। अवनीत ने अपनी ब्यूटी का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि जो भी है, वह उन्हें नेचुरली मिला है। वर्क फ्रंट की बात करें तो अवनीत आखिरी बार शांतनु माहेश्वरी के साथ फिल्म लव इन वियतनाम में नजर आई थीं। राहत शाह काजमी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसमें अवनीत ने सिमी की भूमिका निभाई थी।







