Thursday, 22 Oct 2026 | 07:15 PM

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गीतकार हसरत जयपुरी की 104वीं बर्थ एनिवर्सरी:भांजे डब्बू मलिक बोले- आखिरी सांस तक मामा के हाथ में कलम और किताब थी

गीतकार हसरत जयपुरी की 104वीं बर्थ एनिवर्सरी:भांजे डब्बू मलिक बोले- आखिरी सांस तक मामा के हाथ में कलम और किताब थी

हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार हसरत जयपुरी की 104वीं बर्थ एनिवर्सरी पर उनके भांजे डब्बू मलिक ने उनसे जुड़ी कई खास यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि हसरत जयपुरी न सिर्फ बेहतरीन शायर थे, बल्कि अपनी निजी जिंदगी में बेहद सादगी और अपनापन रखने वाले इंसान भी थे। चौपाटी पर खिलौने बेचने और बस कंडक्टर की नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के शीर्ष गीतकारों में ले आया। शंकर-जयकिशन और राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने कई यादगार गाने दिए। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब रही, जो उनके काम के प्रति जुनून को दिखाती है। लोग इतना इंपोर्टेंस उन्हें क्यों दे रहे हैं, यह जानने के लिए वर्षों लगे डब्बू मलिक बताते हैं- हम बहुत छोटे थे, तब खार स्थिति मामा हसरत जयपुरी के घर पर जाते थे। घर से बालकनी से सटा उनका बेड होता था, जहां बैठकर वे पोयट्री लिखते थे। हमारी बचपन की यादें यह है कि बड़े-बड़े डायरेक्टर, प्रोडूसर, एक्टर का हुजूम उनसे मिलने के लिए घर आते थे। हम छोटे थे, तब इतना क्लीयर नहीं होता था कि लोग उन्हें इतना रिस्पेक्ट या इतना इंपोर्टेंस क्यों दे रहे हैं। यह जानने के लिए हमें वर्षों लगे। फिर धीरे-धीरे पता चला कि मामाजी बहुत बड़े गीतकार हैं। अब पीछे मुड़कर देखता हूं, तब पाता हूं कि बाप रे! इस इंसान ने इतना बेहतरीन काम किया। उनकी सबसे खूबसूरत चीज यह होती थी कि उनको किमाम पान और परफ्यूम का बड़ा शौक था। उसी तरह उनकी खुशबूदार पर्सनालिटी भी थी। उनका बहन-बहनोई आदि का काफी बड़ा कुनबा था और वे सबको बड़ा प्यार देते थे। सबका खयाल रखते थे, उनकी यह सबसे बड़ी विशेषता थी। लोगों की जिंदगी के बारे में सोचते थे और उसमें मग्न रहते थे। हम लोग सोचते थे कि उनका अटेंशन लेना भी बहुत मुश्किल था। बिकॉज, वे दिन भर गीत लिखने में लगे रहते थे। जयकिशन की डेथ पर दिन भर रोते रहे मुझे उनकी एक शाम की बात याद है, जो कभी भूलता नहीं हूं। वह यह है कि जय किशन की डेथ हुई थी। उस दिन नेशनल रेडियो पर उनका लिखा गीत पूरे हिंदुस्तान में बज रहा था। वह गीत था- ‘गीतों का कन्हैया चला गया, अब गीत मेरे विरान हुए…’, इसे सुनकर उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। मुझे पता नहीं, शायद इसकी कम्पोजिशन शंकर-जयकिशन जी ने की होगी। लेकिन वह लम्हा कभी भुलाए भुला नहीं जाता। उनके गीतों पर शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने बड़ा दिलकश काम किया है। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब थी मामा हसरत जयपुरी, मुझसे बेहद प्यार करते थे। मैं उनका लाडला था, क्योंकि घर में सबसे छोटा मैं ही था। मुझे उनसे बहुत प्यार मिला। हालांकि उस समय वे काफी ओल्ड हो चुके थे, लेकिन उन्होंने मुझे प्रेडिक्ट किया था कि तुम्हारे अंदर भी एक संगीतकार छुपा है, तुम गाने बना सकते हो। मैंने बोला कि मैं तो कुछ सीखा ही नहीं हूं। उस समय तक वे जुहू स्थिति अपने बंगले में रहने के लिए आ गए थे। जुहू में उनका भव्य बंगला था। फाइनेंशियली बहुत ही सिक्योर इंसान थे। वे और उनकी वाइफ ने फैमिली के लिए बड़े-बड़े डिसीजन लिये। अपने जमाने में उनकी बहुत ही सक्सेसफुल फैमिली रही है। वे आने वाली 10 जेनरेशन को सिक्योर करके चले गए। इतने महान आदमी थे। लेकिन मैंने एक चीज देखी है कि आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब थी। अपनी बहन यानी मेरी मम्मी के लिए लिखा गीत मेरी मम्मी मिल्किस, हसरत जयपुरी की सबसे छोटी बहन थीं। वे मेरी मम्मी को बहुत प्यार करते थे। प्यार से मम्मी को नन्हूं (छोटी) बुलाते थे। उन्होंने गीत- ‘सुनो छोटी-सी गुड़िया की लंबी कहानी…’, मेरी मम्मी के लिए लिखा था। मेरी मम्मी के जीवन में जो संघर्ष था, उसे ध्यान रखते हुए लिखा था। पापा ने काफी स्ट्रगल देखा था। उनके लिए तो मम्मी 15-16 साल की बहन थी, जिनकी शादी 18 साल की उम्र में हो गई। उन्होंने बहन की सारी जिंदगी देखी। हालांकि अपने हिसाब से वे जो कुछ भी कर सकते थे, वह किया। लेकिन मम्मी को देखकर वे हमेशा कहते थे कि यह मेरी गुड़िया है। उनको इन सब चीजों की तकलीफ उठाने की जरूरत नहीं थी, तब उन्होंने यह गाना लिखा था। अपने काम के प्रति फोकस्ड थे उनकी बहुत ही क्रिएटिव और बड़े कमाल की पर्सनालिटी थी। अपने काम के प्रति इतना फोकस्ड और इतना लीन होना उनसे सीखा जा सकता है। मतलब उनके पास किसी तरह का कोई डायवर्जन ही नहीं था। दिन भर लफ्जों की कहानी में बिजी रहते थे। उन्होंने कभी नॉर्मल जिंदगी जिया ही नहीं। हर एक पल, हर एक क्षण उनको सिर्फ म्यूजिक, लिरिक्स, गीत-गाने, मुखड़े ही सुनते थे। कमाल की शख्सियत थी। डायरेक्टर वगैरह से मिलना हो, तभी वे पार्टी-फंक्शन में जाते थे। अपने जमाने में राइटिंग कि हिसाब से कमर्शियल सक्सेसफुल इंसान रहे। उन्होंने अपने दौर में जो समय देखा है, वह कोई देख ही नहीं सकता। इतना पॉवर, इतनी कमर्शियल सक्सेस, बाप रे बाप! वॉव!! आज अतीत में जाएंगे, तब पाएंगे कि क्या गाने और क्या पिक्चर, क्या काम किया है। मैंने भी सुना है कि चौपाटी पर बैठकर खिलौने बेचते थे उनके बारे जितना सुना है, वह यह है कि वे अपनी फैमिली को संभालने जयपुर से मुंबई आए थे। यहां चौपाटी पर बैठकर खिलौने बेचते थे। फिर उनको बस कंडक्टर की नौकरी मिली। फिर किसी मुशायरे में बतौर पोएट उनको पृथ्वी राज कपूर मिले। पृथ्वी राज कपूर ने उन्हें रेकमेंड किया है कि मेरे बेटे राज कपूर से मिलिए। वहां से कहानी शुरू हुई। मैंने इतना मेहनत करने वाला इंसान अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा। ‘बाहरों फूल बरसाओ…’, ‘लिखे जो खत तुझे…’, ‘तुम मुझे यूं न भुला पाओगे…’, ‘एहसास तेरा होगा मुझ पर…’ ‘जिंन्दगी एक सफर है सुहाना…’ आदि उनके लिखे मेरे पसंदीदा गानों की लिस्ट ही खत्म नहीं होगी। आज सोचता हूं कि इतना दिग्गज इंसान इस पृथ्वी पर आया और इतने अच्छे रोमेंटिक गाने लिखकर चला गया। खुशकिश्मत हूं कि उन्हें गले लगाने का मौका मिला हम तो सारी जिंदगी उनके मुरीद ही बने रहेंगे। कभी-कभी खुद को खुशकिस्मत समझते हैं,

खबर हटके- 20 साल तक पेट में रहा थर्मामीटर:घसीटाराम-खोजाराम जैसे नाम बदल सकेंगे बच्चे; दुल्हन ने चेहरा दिखाने के लिए मांगे ₹90 लाख

खबर हटके- 20 साल तक पेट में रहा थर्मामीटर:घसीटाराम-खोजाराम जैसे नाम बदल सकेंगे बच्चे; दुल्हन ने चेहरा दिखाने के लिए मांगे ₹90 लाख

चीन में एक व्यक्ति के पेट में 20 साल तक थर्मामीटर पड़ा रहा। वहीं, राजस्थान के स्कूलों में अब बच्चे घसीटाराम-खोजाराम जैसे अजीबोगरीब नाम बदल सकेंगे। उधर, उत्तर प्रदेश में एक दुल्हन ने चेहरा दिखाने के लिए ₹90 लाख की डिमांड कर दी। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

जबलपुर के बघौड़ा गांव में अनोखी परंपरा:इस दिन घर में नहीं बाहर बनता है खाना, हैजा से हुई मौतों का डर आज भी

जबलपुर के बघौड़ा गांव में अनोखी परंपरा:इस दिन घर में नहीं बाहर बनता है खाना, हैजा से हुई मौतों का डर आज भी

भले ही आज हम 21वीं सदी में जी रहे हो,पर अभी भी पुरानी परंपरा या फिर अंध विश्वास कहे, वो जीवित है। जबलपुर के ग्राम बघौड़ा में वैशाख माह के पहले मंगलवार को सालो से चल आ रही एक प्रथा को गांव के ग्रामीणों ने आज भी जीवित रखा है,यह प्रथा है, कि इस दिन लोग अपने घरों में नहीं बल्कि गांव से बाहर खाना बनाते हैं। गांव की महिलाएं खाने-पीने का समान लेकर एक साथ पहुंचती है और पेड़ के नीच सभी का भोजन बनता है। गांव के लोग इसे बुढ़वा मंगल के रूप में मनाते हैं। बघोड़ा गांव में परंपरा यह लंबे समय से चली आ रही है। कहा जाता है कि बुढ़वा मंगल के डर के कारण ग्रामीण साल में एक दिन (मंगलवार) को बाहर खाना बनाते हैं। खाने में लजीज भोजन नहीं बल्कि गक्कड़, भरता,चटनी बनाने की परंपरा है। बताया जाता है, कि सैकड़ो साल पहले गांव में हैजा नाम से बीमारी फैली थी, और इसका कोई हल नहीं निकल रहा था। एक के बाद एक कई ग्रामीणों की मौत हो रही थी। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या किया जाए। बुजुर्ग बताते हैं कि नीम,हकीम, वैध सबको दिखाया, पर गांव में हालात जस के तस बने रहे। इसी समय गांव में एक संत का आगमन हुआ, उन्होंने गांव वालों को वैशाख माह की पहले मंगल को बुढ़वा मंगल मनाने की सलाह दी। संत ने कहा कि अगर गांव के बाहर खाना बनाया गया, और घर के अंदर दोनों वक्त का चूल्हा नहीं जला तो निश्चित रूप से फायदा होगा। ग्रामीणों ने यह सब किया तो गांव में बीमारी का प्रकोप खत्म हो जाएगा। संत की बात सभी ने मानी और फिर एक साथ होकर गांव के बाहर जाकर भोजन बनाया। बताया जाता है कि यह सब करने के बाद गांव से बीमारी दूर हो गई। उस दिन के बाद से आज तक बैसाख के पहले मंगलवार को गांव के सभी लोग बाहर जाकर भोजन बनाकर खाते है। परंपरा को लेकर कहा जाता है कि अगर गांव में किसी ग्रामीण को चाय भी पीनी होती है, तो उसके लिए चाय भी बाहर बनाई जाती है। यदि किसी के घर में शादी-ब्याह भी इस दिन पड़ जाता है तो उसे घर में नहीं बल्कि बाहर ही खाना बनाना होता है। ग्रामीणों की मान्यता है कि बुढ़वा मंगल मानने से उनके गांव में बड़ी बीमारियां नहीं होती है। पुरानी परंपरा का लंबे समय से निर्वाह किया जा रहा है। सारे गांव में घर के बाहर महिलाएं पुरुष एक साथ गक्कड़-भरता बनाते हैं, भगवान को भोग लगाते है फिर खाना होता है। गांव के 70 वर्षीय सन्नू लाल पटेल बताते है कि यह परंपरा कब से चली आ रही है, यह नहीं पता, पर बिना किसी गेप के आज तक बैशाख में मंगलवार को यह किया जाता है। उन्होंने बताया बीमारी में कई लोगों की मौत हुई थी। संत के कहने पर गांव के बाहर भोजन बनाया गया था, जो कि आज भी लगातार चल रहा है। साल में एक बार बुढ़वा मंगल मनाया जाता है। अर्चना पटेल ने बताया कि जब से शादी होकर गांव आई है, तब से लेकर आज तक यह प्रथा चली आ रही है कि साल में एक दिन गांव के बाहर खाना बनाया जाए, उस दिन गांव में किसी के घर में ना ही चूल्हा जले, औ ना ही धुंआ हो। उनका कहना है, कि उस दिन के बाद से आज तक बीमारी गांव में नहीं आई है।

उज्जैन के महाकाल रेस्टोरेंट में लगी आग:समय रहते आग पर काबू पाया, बड़ा हादसा टला

उज्जैन के महाकाल रेस्टोरेंट में लगी आग:समय रहते आग पर काबू पाया, बड़ा हादसा टला

उज्जैन के महाकाल क्षेत्र स्थित गुदरी चौराहे पर मंगलवार को महाकाल रेस्टोरेंट में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। घटना रात 10.30 बजे की है। पुलिस और फायर ब्रिगेड की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग किचन में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। घटना के समय रेस्टोरेंट में लोग मौजूद थे। इसके साथ ही, बाहर सड़क पर भी भारी भीड़ थी, क्योंकि यह मार्ग पंचकोशी यात्रा के श्रद्धालुओं और महाकाल दर्शनार्थियों द्वारा उपयोग किया जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, महाकाल थाना की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पुलिस और स्थानीय टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए रेस्टोरेंट में मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। आग बुझाने और रेस्क्यू अभियान में थाना प्रभारी गगन बादल, एएसआई चंद्रभान सिंह और मनीष यादव सहित पुलिस टीम की अहम भूमिका रही। महाकाल क्षेत्र में लगातार लोगों का आवागमन बना रहता है, ऐसे में समय रहते की गई कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।

ग्वालियर में ऑनलाइन सट्‌टे में गंवाए 20 लाख, किया सुसाइड:सुसाइड नोट में लिखा- मेरी मौत के जिम्मेदार राजेन्द्र और रौनक हैं, प्रिया को बता देना

ग्वालियर में ऑनलाइन सट्‌टे में गंवाए 20 लाख, किया सुसाइड:सुसाइड नोट में लिखा- मेरी मौत के जिम्मेदार राजेन्द्र और रौनक हैं, प्रिया को बता देना

‘मेरी, मौत के जिम्मेदार राजेन्द्र शर्मा और रौनक गुप्ता हैं। राजेन्द्र अब जयपुर (राजस्थान) में रहता है, जबकि रौनक डबरा का रहने वाला है। मैं मैच पर ऑनलाइन सट्‌टे में 20 लाख रुपए हार गया हूं। जिसमें रौनक ने डेढ़ लाख रुपए की बेइमानी की है। मेरी मौत के बाद मेरे यह रुपए रौनक से लेकर मेरी मां को दिलाए जाएं। मेरी मौत की खबर राजेन्द्र शर्मा को जरूर दे देना, वो प्रिया को बता देगा, जिससे मेरा बेटा मुखाग्नि दे सके। ’ 47 वर्षीय रवि चौहान ने फांसी लगाने से यह सुसाइड नोट लिखा और हमेशा के लिए खामोश हो गया। घटना मंगलवार शाम सिकंदर कंपू गिरवाई थाना की है। जब उसकी वृद्ध मां घर पहुंची तो बेटा फांसी पर लटका हुआ था। बिजलीघर के पास राजेन्द्र नाथ दुबे के मकान में 47 वर्षीय रवि चौहान उर्फ रवि ठाकुर अपनी वृद्ध मां आशा ठाकुर के साथ किराए से रहता है। वह दिसंबर 2025 से इसी मकान में रह रहा था। रवि शादी शुदा था, लेकिन उसकी नशे और ऑनलाइन मैच सट्‌टे की लत के चलते उसकी पत्नी प्रिया उसे कुछ समय पहले छोड़कर चली गई थी। साथ में अपने बेटे को भी ले गई थी। मंगलवार को रवि घर में अकेला था। शाम को जब मां बाहर से लौटी तो उसने देखा कि अंदर कमरे में रवि फांसी के फंदे पर लटका हुआ है। रवि की मां के चिल्लाने की आवाज सुनकर मकान मालिक, उसका बेटा व आसपास के लोग वहां पहुंचे। मकान मालिक ने तत्काल रवि को फंदा काटकर नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। घटना स्थल से मिला सुसाइड नोट पुलिस ने जब घटना स्थल पर पहुंचकर छानबीन की तो रूम से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें रवि ने खुदकुशी से पहले का जो दर्द था वो बंया किया है।

शुजालपुर में अनियंत्रित ट्रक बिजली पोल से टकराया:ट्रांसफार्मर में लगी आग, शहर में डेढ़ घंटे तक बंद रही बिजली सप्लाई

शुजालपुर में अनियंत्रित ट्रक बिजली पोल से टकराया:ट्रांसफार्मर में लगी आग, शहर में डेढ़ घंटे तक बंद रही बिजली सप्लाई

शुजालपुर मंडी क्षेत्र में राम मंदिर के पास रात 10 बजे एक अनियंत्रित ट्रक ने 33 केवी बिजली लाइन के पोल को टक्कर मार दी। इस हादसे के कारण बिजली कंपनी के कार्यालय में स्थित एक पुराने ऑयल फिल्टर ट्रांसफार्मर में भीषण आग लग गई। आग की लपटें देख सुरक्षा की दृष्टि से पूरे शहर की बिजली कंपनी बंद कर दी गई। सूखे पेड़ ने बढ़ाई आग की लपटें ट्रांसफार्मर के ऊपर एक सूखा पेड़ होने के कारण आग तेजी से फैल गई। सूचना मिलते ही नगर पालिका की दमकल टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। रात का समय होने के कारण सड़क पर भीड़ कम थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई, हालांकि घटनास्थल के पास लगे बिजली के तार पूरी तरह पिघल गए। डेढ़ घंटे बाद बहाल हुई बिजली आपूर्ति बिजली कंपनी के ग्रामीण उपयंत्री गौरव बनाने ने बताया कि जिस ट्रांसफार्मर में आग लगी, उसका सीधा संबंध मुख्य सप्लाई से नहीं था। क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत के बाद रात 11:37 बजे शहर की बिजली आपूर्ति दोबारा शुरू की गई। करीब डेढ़ घंटे तक शहर अंधेरे में डूबा रहा। टक्कर मारकर ट्रक लेकर फरार हुआ चालक अनियंत्रित ट्रक ने पोल से टकराने से पहले एक कार और एक लोडिंग वाहन को भी टक्कर मारी, जिससे दोनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। वारदात के बाद चालक ट्रक लेकर मौके से फरार हो गया, जिसकी पहचान नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, तीन सप्ताह पहले भी रोकड़िया हनुमान चौक पर इसी तरह की ट्रक दुर्घटना हुई थी। लापरवाही से खड़े वाहनों से बढ़ रहे हादसे क्षेत्र में लापरवाही से खड़े और अनियंत्रित गति से चलने वाले भारी वाहनों के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। बिजली कंपनी और पुलिस अब फरार ट्रक चालक की तलाश कर रही है। पुलिस द्वारा सीसीटीवी कैमरों की मदद से वाहन नंबर और मालिक की जानकारी जुटाई जा रही है।

‘नीतीश कुमार की निरंतरता का प्रतिबिंब’: बीजेपी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी को क्यों चुना | राजनीति समाचार

Chennai Super Kings' Khaleel Ahmed, second right, celebrates with teammates the wicket of Kolkata Knight Riders' Sunil Narine during the Indian Premier League cricket match between Chennai Super Kings and Kolkata Knight Riders in Chennai, India, Tuesday, April 14, 2026. (AP Photo)

आखरी अपडेट:14 अप्रैल, 2026, 23:48 IST सूत्रों ने कहा कि भाजपा नेता सम्राट चौधरी की कटौती का एक और कारण यह था कि उनके पास वित्त और गृह विभाग जैसे मजबूत और महत्वपूर्ण विभाग थे। भाजपा नेता सम्राट चौधरी 15 अप्रैल, 2026 को बिहार के 23वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) 15 अप्रैल को बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले सम्राट चौधरी इतिहास रचने से एक कदम दूर हैं। ऐसे कई कारण हैं कि भाजपा, जो अब युवा रक्त पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ने चौधरी को बिहार का नेतृत्व करने के लिए आदर्श उम्मीदवार के रूप में चुना क्योंकि राज्य कम से कम दो दशकों के जेडी (यू) प्रमुख नीतीश कुमार के शासनकाल के बाद “भगवा” मोड में चला गया है। लेकिन नीतीश कुमार सबसे महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं क्योंकि भाजपा सूत्रों के अनुसार, चौधरी का चयन “निरंतरता का प्रतिबिंब” है क्योंकि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के डिप्टी के रूप में काम किया है। बिहार के नए मुख्यमंत्री की घोषणा के लाइव अपडेट यहां देखें सूत्रों ने बताया न्यूज18 यह कटौती करने का एक और कारण यह था कि उनके पास वित्त और गृह विभाग जैसे मजबूत और महत्वपूर्ण विभाग थे। उन्होंने कहा, यह उनके अनुभव को दर्शाता है क्योंकि राज्य के गृह मंत्री का पोर्टफोलियो महत्वपूर्ण है और पहले यह विशेष रूप से नीतीश के पास था। युवा नेताओं पर भाजपा के फोकस के बारे में विस्तार से बताते हुए, खासकर 45 वर्षीय नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने पर, सूत्रों ने कहा कि 57 वर्षीय चौधरी एक युवा नेता हैं और इसलिए, शीर्ष पदों पर युवाओं की पदोन्नति को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने राज्य इकाई प्रमुख सहित संगठन में विभिन्न पदों पर भी काम किया है और उनके पास व्यापक प्रशासनिक अनुभव है जिसके कारण वह सरकार और पार्टी के बीच बेहतर समन्वय कर सकते हैं, जो आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। सम्राट चौधरी कौन हैं? सम्राट चौधरी बुधवार को बिहार के 23वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जो हिंदी पट्टी के केंद्र में “भगवा” राजनीति के एक नए युग का संकेत है। उनकी राजद की जड़ों से लेकर उनकी भाजपा के प्रति निष्ठा तक, एक प्रभावशाली क्षेत्रीय नेता के रूप में उनके उदय का पता राज्य की राजनीति में एक मजबूत पारिवारिक विरासत और कुशवाह (कोइरी) समुदाय से एक ओबीसी नेता के रूप में उनकी पकड़ से लगाया जा सकता है। उनके राजनीतिक विकास में उन्हें उनके पिता, शकुनी चौधरी – जो कि राजद के दिग्गज नेता लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी थे, का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ – जिसके बाद वह 1999 तक राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत बिहार के सबसे युवा मंत्रियों में से एक बन गए। 2000 के दशक की शुरुआत में, वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तीखे आलोचक थे। लेकिन, 2014 में, वह जेडीयू में शामिल हो गए, जिसे आज उनके सीएम पद पर पहुंचने की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है। वह अंततः 2017 और 2018 के बीच भाजपा में शामिल हो गए, जिससे अनजाने में बिहार में भगवा पार्टी के शासन के अग्रदूत के रूप में उनका भाग्य तय हो गया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 14 अप्रैल, 2026, 23:39 IST समाचार राजनीति ‘नीतीश कुमार की निरंतरता का प्रतिबिंब’: बीजेपी ने बिहार के सीएम के रूप में सम्राट चौधरी को क्यों चुना? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री(टी)सम्राट चौधरी(टी)बिहार के मुख्यमंत्री(टी)बिहार में बीजेपी(टी)नीतीश कुमार की विरासत(टी)युवा बीजेपी नेतृत्व(टी)बिहार की राजनीति 2024(टी)बीजेपी सरकार का गठन

सीएम हाउस में हुई बीजेपी कोर ग्रुप की पहली बैठक:देर से पहुंचे विजयवर्गीय, शिवराज को छोड़कर डेढ़ दर्जन दिग्गज रहे मौजूद

सीएम हाउस में हुई बीजेपी कोर ग्रुप की पहली बैठक:देर से पहुंचे विजयवर्गीय, शिवराज को छोड़कर डेढ़ दर्जन दिग्गज रहे मौजूद

सीएम हाउस में बीजेपी के नए कोर ग्रुप की पहली बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को छोड़कर बाकी सभी नेतागण शामिल हुए। शिवराज पटना में पर्यवेक्षक होने के चलते बैठक में नहीं आ सके। बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने कोर ग्रुप के सदस्यों के साथ चर्चा की। विजयवर्गीय देर से पहुंचे बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय काफी देर से पहुंचे। विजयवर्गीय दिल्ली में थे। वे पौने नौ बजे के करीब सीएम हाउस पहुंचे और बैठक में शामिल हुए। केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने तय समय के मुताबिक बैठक खत्म होने पहले ही दिल्ली रवाना हो गए। बैठक के बाद सीएम हाउस में कोर ग्रुप में शामिल नेताओं के लिए डिनर भी रखा गया। बैठक में ये हुए शामिल राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, सीएम डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, राजेन्द्र शुक्ल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, एससी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, मंत्री संपतिया उईके, सांसद व प्रदेश महामंत्री लता वानखेड़े, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया बैठक में शामिल हुए। संगठन के काम और आगे की योजना पर हुई चर्चा कोर ग्रुप की बैठक में बीजेपी के संगठन और सरकार के अब तक के कामों पर चर्चा हुई। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पार्टी के जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी संवाद करेंगे। सूत्र बताते हैं कि बैठक में बताया गया कि निगम-मंडलों को लेकर मामला केन्द्रीय नेतृत्व के स्तर पर स्वीकृति के लिए लंबित है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक नियुक्तियां शुरु हो सकती हैं।

देवास में कलेक्ट्रेट के बाबू समेत चार गिरफ्तार:सील और फर्जी साइन से दर्जनभर आदेश जारी किए; पंजीयन कार्यालय के शक पर पकड़े गए

देवास में कलेक्ट्रेट के बाबू समेत चार गिरफ्तार:सील और फर्जी साइन से दर्जनभर आदेश जारी किए; पंजीयन कार्यालय के शक पर पकड़े गए

देवास कलेक्टर कार्यालय में फर्जी आदेश जारी करने का एक बड़ा मामला मंगलवार को सामने आया है। फर्जीवाड़े को कार्यालय के कुछ बाबुओं ने अन्य लोगों के साथ मिलकर अंजाम दिया। आरोपी अधिकारियों के नाम पर जाली आदेश तैयार कर उन्हें विभिन्न विभागों में जारी कर रहे थे। मामले में नजूल शाखा सहित अलग-अलग तहसीलों में पदस्थ तीन बाबू और एक बिचौलिया लंबे समय से इस फर्जीवाड़े में शामिल थे। आरोप है कि ये लोग आवेदन प्रक्रिया पूरी करवाने के बाद अधिकारियों की जानकारी के बिना उनके हस्ताक्षर और सील की नकल कर फर्जी आदेश जारी करते थे। पंजीयन कार्यालय में संदिग्ध आदेश से पकड़े गए फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब एक संदिग्ध आदेश पंजीयन कार्यालय पहुंचा। जांच के दौरान उसमें गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई। कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया। बीएनपी थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें नजूल शाखा के बाबू रमेश लोबानिया, एडीएम कार्यालय के रीडर संजय जाटव, विजयागंज मंडी तहसील के बाबू जितेंद्र भद्रे और बिचौलिया महेंद्र कुशवाह शामिल हैं। एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। गिरफ्तारी की पुष्टि सीएसपी ने मंगलवार रात करीब 8 बजे की। एक दर्जन से अधिक फर्जी आदेश जारी होने की आशंका प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक दर्जन से अधिक फर्जी आदेश जारी किए हैं। यह गड़बड़ी विशेष रूप से भू-राजस्व संहिता की धारा 165(6) से जुड़े मामलों में की गई, जिनमें जमीन अंतरण की अनुमति दी जाती है। एक फर्जी आदेश के आधार पर रजिस्ट्री भी हो चुकी है, जिसे निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह फर्जीवाड़ा कब से चल रहा था और इसमें कितने लोग शामिल हैं। एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है। मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है। प्रशासन सख्त, होगी कड़ी कार्रवाई कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही जांच के आदेश दे दिए गए थे। आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पद से पृथक भी किया जाएगा। वहीं, सीएसपी सुमित अग्रवाल के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय की नजूल शाखा में विभिन्न प्रकार के आदेश जारी किए जाते हैं, जिनमें कुछ लोगों ने कूटरचना कर अवैध लाभ अर्जित किया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राजगढ़ में शादीशुदा प्रेमी जोड़े ने पेड़ पर फांसी लगाई:पांच साल से एक दूसरे को जानते थे; दो दिन में दूसरी ऐसी घटना

राजगढ़ में शादीशुदा प्रेमी जोड़े ने पेड़ पर फांसी लगाई:पांच साल से एक दूसरे को जानते थे; दो दिन में दूसरी ऐसी घटना

राजगढ़ जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र के दुर्गपुरा गांव में मंगलवार सुबह एक प्रेमी जोड़े के शव गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल की पहाड़ी पर नीम के पेड़ से लटके मिले। युवक ने गमछे और महिला ने चुन्नी से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, वहीं पुलिस ने पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। सुबह करीब 10 बजे बकरी चराने गए एक युवक की नजर पहाड़ी पर पेड़ से लटके दोनों शवों पर पड़ी। वह घबरा गया और तुरंत गांव पहुंचकर लोगों को जानकारी दी। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को खबर दी गई। कुछ ही देर में पूरा गांव घटनास्थल पर जुट गया। सूचना मिलते ही एसडीओपी धर्मवीर सिंह और भोजपुर थाना प्रभारी अजय यादव मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए खिलचीपुर अस्पताल भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी। पांच साल से चल रहा था प्रेम प्रसंग, दोनों थे शादीशुदा मृतकों की पहचान चैनसिंह तंवर (37) और मांगीबाई (35) के रूप में हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे और पिछले करीब पांच साल से उनके बीच प्रेम संबंध था। दोनों पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी हैं। इस रिश्ते को लेकर दोनों परिवारों में पहले भी विवाद हो चुका था। परिजनों के अनुसार, करीब एक साल पहले दोनों घर छोड़कर भाग गए थे। उस समय परिजन उन्हें राजस्थान से ढूंढकर वापस लेकर आए थे। बाद में पंचायत और पुलिस के सामने समझाइश देकर दोनों को अलग कर दिया गया था। इसके बाद मांगीबाई पिछले चार महीने से अपने मायके कोयला गांव में रह रही थी। सोमवार को घर से निकले, फिर नहीं लौटे जानकारी के मुताबिक, सोमवार को चैनसिंह घर से खिलचीपुर जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। वहीं मांगीबाई भी अपने मायके कोयला से बिना बताए निकल गई थी। मंगलवार सुबह दोनों के शव एक ही पेड़ पर अलग-अलग फंदों में लटके मिले। घटनास्थल से पुलिस को शराब की दो बोतलें भी बरामद हुई हैं। हालांकि, पुलिस ने आत्महत्या के पीछे के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं किया है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पिता प्रभुलाल के अनुसार, चैनसिंह खेती और मजदूरी करता था और उसके चार बच्चे हैं। वहीं मांगीबाई का भी एक 10 वर्षीय बेटा है। दो दिन पहले भी हुई थी ऐसी ही घटना गौरतलब है कि दो दिन पहले ही दुर्गपुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर ढाबलीखुर्द गांव में भी एक प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी।