Health Tips: छूते ही जलन, लेकिन फायदे हैरान कर देंगे! गजब है बिच्छू बूटी गठिया से लेकर पथरी तक में देती है राहत

Last Updated:April 12, 2026, 17:53 IST Bichchu Booti Health Benefits: पहाड़ों में पाई जाने वाली बिच्छू बूटी आयुर्वेद का एक अनमोल खजाना है. यह चमत्कारी पौधा गठिया (अर्थराइटिस), मांसपेशियों के दर्द और किडनी की पथरी जैसी गंभीर समस्याओं में रामबाण की तरह काम करता है. विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर इस बूटी का सही इस्तेमाल शरीर को लंबे समय तक निरोग रख सकता है. हालांकि, इसके उपयोग को लेकर कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. जानिए कैसे यह साधारण सी दिखने वाली बूटी आपकी सेहत के लिए वरदान साबित हो सकती है. बागपत: प्रकृति ने हमें अपने खजाने से कई ऐसी जड़ी-बूटियां दी हैं, जो बड़ी से बड़ी बीमारियों को मात देने की ताकत रखती हैं. इन्हीं में से एक है बिच्छू बूटी. पहाड़ों की दुर्गम वादियों में मिलने वाला यह पौधा आज के समय में किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है. आयुर्वेद में इसे एक चमत्कारी औषधि का दर्जा दिया गया है, जो शरीर के कई रोगों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है. घने पहाड़ों के बीच उगने वाली यह बूटी अपनी खास खूबियों के कारण काफी पसंद की जाती है. पोषक तत्वों का भंडार है यह पहाड़ी औषधिआयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी ने इस बूटी के बारे में बताया कि बिच्छू बूटी आयरन और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. यही वजह है कि यह हड्डियों को लोहे जैसी मजबूती देने का काम करती है. अगर आप अर्थराइटिस यानी गठिया के पुराने दर्द से परेशान हैं या आपकी मांसपेशियों में अक्सर खिंचाव और तकलीफ रहती है, तो बिच्छू बूटी आपके लिए बेहद असरदार साबित हो सकती है. किडनी की पथरी को बाहर निकालने में मददगारसिर्फ हड्डियों का दर्द ही नहीं, बल्कि यह बूटी शरीर के अंदरूनी अंगों की सफाई में भी कमाल का काम करती है. बिच्छू बूटी में विटामिन A, C और K भरपूर मात्रा में पाया जाता है. डॉक्टर के अनुसार, इसका सही तरीके से उपयोग करने पर गुर्दे (किडनी) में होने वाली पथरी को आसानी से गलाकर शरीर से बाहर निकाला जा सकता है. इसके साथ ही, यह पेशाब से जुड़ी समस्याओं (यूरिन इन्फेक्शन आदि) में भी तेजी से राहत पहुंचाने का काम करती है. चाय और सूप के जरिए भी ले सकते हैं फायदेइस चमत्कारी बूटी को डाइट में शामिल करना भी काफी आसान है. डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी बताते हैं कि बिच्छू बूटी का इस्तेमाल आप कई तरह से कर सकते हैं. आप इसकी हर्बल चाय बनाकर पी सकते हैं, या फिर इसका गरमा-गरम सूप बनाकर डाइट में शामिल कर सकते हैं. इतना ही नहीं, कुछ लोग इसे सब्जी में डालकर भी इस्तेमाल करते हैं. अफ्रीका के पहाड़ों से लेकर भारत के पहाड़ी इलाकों तक मिलने वाली यह औषधि अब बाजार में भी आसानी से उपलब्ध होने लगी है. बरतना न भूलें ये जरूरी सावधानीबिच्छू बूटी जितनी फायदेमंद है, इसका इस्तेमाल करते समय उतनी ही सावधानी की भी जरूरत होती है. डॉक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस औषधि का गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा उपयोग करने पर शरीर में इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है. इसलिए, जब भी आप इस पहाड़ी बूटी का सेवन शुरू करें, तो पहले किसी अनुभवी चिकित्सक या एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Baghpat,Uttar Pradesh First Published : April 12, 2026, 17:53 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

सिंगर आशा भोसले का शुक्रवार को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए। इनमें से राजस्थानी भी एक है। उन्होंने अपने करियर में 14 राजस्थानी फिल्मों के 45 गाने गाए। 8 से ज्यादा राजस्थानी भजनों को भी अपनी आवाज दी। वहीं, 2019 में वे जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में भी आई थीं। जहां उन्होंने गीतकार प्रसून जोशी के साथ अपने दिल की बात की थी। आशा भोसले को याद करते हुए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- मेरी राजस्थानी फिल्म के लिए उन्होंने गाना गाया था। गाने से पहले मुंबई में राजस्थानी शब्दों को लेकर उनकी ट्रेनिंग हुई। इसके लिए मैंने उन्हें सिर्फ 7 हजार रुपए दिए थे, लेकिन उन्होंने बिना रोक टोक के वो ले लिए। जानिए कैसे राजस्थानी फिल्मों में शुरू हुआ आशा भोसले का सफर… राजस्थानी फिल्मों में आशा भोसले की गायकी का श्रेय संगीतकार पंडित शिवराम को जाता है। उन्होंने 1961 में फिल्म ‘बाबासा री लाडली’ में आशाजी से पहली बार राजस्थानी भाषा में पांच गीत गवाए। इनमें ‘ओ रंग रंगीलो आलीजो…’, ‘बोल पंछीड़ा रे…’, ‘सूती थी रंग म्हैल में…’ और महेंद्र कपूर के साथ सुपरहिट डुएट ‘हिवड़ै सूं दूर मत जा….’ गीत गाए। इसके बाद ‘नानीबाई को मायरो’ में भी आशाजी ने अपनी आवाज दी। इसमें “म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो…” और “म्हाने चूनड़ी ओढ़ाजा…” जैसे गीत लोकप्रिय हुए। कभी रीजनल के रूप मे नहीं देखा राजस्थानी फिल्म विशेषज्ञ एमडी सोनी ने बताया- उस दौर में आशाजी ने ‘धणी लुगाई’, ‘गणगौर’, ‘गोपीचंद भरथरी’ और ‘ढोला मरवण’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी से चार चांद लगाए। राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर में संगीतकार नारायण दत्त ने फिल्म ‘म्हारी प्यारी चनणा’ (1983) के सभी आठ गीत आशाजी से गवाकर इतिहास रच दिया। इनमें ‘सावण आयो रे…’, ‘चांदड़लो चढ़ आयो गिगनार…’ और ‘झिरमिर झिरमिर रे…’ जैसे गीत श्रोताओं की जुबां पर कई साल तक रहे। आशा भोसले ने कभी राजस्थानी सिनेमा को रीजनल के रूप में नहीं देखा, वे हमेशा अच्छी कंपोजिशन के साथ जुड़ना चाहती थीं। 14 राजस्थानी फिल्मों में 45 गाने गाए इसके बाद ‘थारी म्हारी’, ‘घर में राज लुगायां को’, ‘चूनड़ी’, ‘बेटी हुई पराई रे’, ‘बीनणी होवै तो इसी’ और ‘राधू की लिछमी’ (1996) जैसी फिल्मों में भी उनकी आवाज ने राजस्थानी सिनेमा को समृद्ध किया। कुल मिलाकर 14 फिल्मों में करीब 45 गीतों को आशाजी ने अपनी आवाज दी। फिल्मों के अलावा आशाजी ने राजस्थानी भजनों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 1981 में जारी एलपी रिकॉर्ड ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ को मास्टरपीस माना जाता है, जिसमें गीतकार भरत व्यास के लिखे भजनों को उन्होंने अपनी आवाज दी। गाने के लिए दिए थे सात हजार रुपए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- 1996 में आई मेरी राजस्थानी फिल्म राधू की लक्ष्मी का गाना ‘रात ढलती जाए’ आशा जी ने गाया था। आरडी बर्मन साहब की डेथ हो गई थी, उसी समय में आशाजी से मिलने के लिए डेट ले रहा था। एक महीने बाद उनकी तरफ से समय दिया, जब वहां गया तो मैंने इस गाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पूछा- क्या यह बच्चों का गाना है। मैंने मना कर दिया। हारमोनियम पर गाकर बताया तो वे गाने की कंपोजिशन से बेहद प्रभावित हुईं। इस गाने पर दो घंटे तक हमारी बातचीत चली। मुम्बई में ही इसे रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने एक-एक शब्द की जानकारी ली। घर पर कई दिनों तक राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग भी हुई। कंपोजिंग पसंद आ जाती तो वह किसी भी इंडस्ट्री को छोटा बड़ा नहीं समझती। रिेकॉडिंग के बाद मुझे कहा- तुम मुम्बई में नए हो, किसी प्रकार की कोई परेशानी हो तो सीधे बताना। अब मैं आपको एक रोचक बात बताता हूं। इस गाने के लिए हमारी 25 हजार पर बात हुई थी, लेकिन मैंने सात हजार रुपए ही दिए। उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के वह ले लिए। गाने की दी सहमति, रिकॉर्ड नहीं करने का मलाल वीणा म्यूजिक के डायरेक्टर केसी मालू ने बताया- मैं गाना उनके साथ करना चाहता था। इसी सिलसिले में आशाजी से मिलने भी गया था। उन्होंने राजस्थानी गाने के लिए हामी भी भरी थी, लेकिन मैं ही गाना तैयार नहीं कर पाया। उन्होंने मुझे बताया कि जयपुर से महिपाल और भरत व्यास उनके मित्र थे। आशाजी ने ही मुझे बताया था कि राजस्थानी में आठ भजन उन्होंने गाए थे। मैं यह सुनकर हैरान था। ये भजन भरत व्यास ने लिखे थे। उन्होंने कहा कि आशाजी के हामी भरने के बाद भी मैं काम नहीं कर पाया। मैं उनके लिए गाना बनवा नहीं पाया। इसका आज तक अफसोस रहेगा। उन्होंने कई राजस्थानी फिल्मों में गाने गाए है। जब भी किसी ने गाने के लिए कहा, किसी को उन्होंने कभी मना नहीं किया। हमारी मैग्जीन स्वर सरिता लगातार पढ़ती थीं, उसी आधार पर मेरी मुलाकात हुई थी। ये भी पढ़ें… दोस्तों ने रुपए दिए, घर से भागकर मुंबई गए असरानी:जयपुर में काम किया, अजमेर में कहा था- सिंधी ने कभी भी भीख नहीं मांगी बॉलीवुड के हास्य अभिनेता असरानी का मुंबई में निधन हो गया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति गहरी लगन की मिसाल रहा है। उनका असली नाम गोवर्धन असरानी था। वे एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार से थे। उनके पिता भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से जयपुर आ बसे और यहां कालीन की दुकान खोली। (पूरी खबर पढ़ें)
कांग्रेस बोली-सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती:जयराम रमेश ने कहा- महिला आरक्षण में बदलाव से देश को गुमराह किया जा रहा

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है। साथ ही महिला आरक्षण कानून में बदलाव के जरिए देश को गुमराह कर रही है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन की बात कर रही है। यह तर्क दे रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में समय लगेगा। लेकिन बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने 6 महीने से कम समय में जाति सर्वे पूरा किया है। उन्होंने कहा कि ये सरकार का छिपा हुई एजेंडा है। सरकार का असल मकसद जाति जनगणना नहीं कराना है। अनुच्छेद 334-A में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। सरकार अब इसे अलग करने की कोशिश कर रही है, ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके। जयराम रमेश ने पोस्ट में चार मुख्य सवाल उठाए… महिला आरक्षण बिल के लिए 3 दिन का विशेष सत्र जयराम रमेश का बयान ऐसे समय आया है, जब 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित है। इसमें महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा सीटें बढ़ाने से जुड़े बिल लाए जा सकते हैं। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। 1 अप्रैल से जनगणना का पहला फेज शुरू हुआ जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से शुरू हुआ। यह 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। जनगणना के पहले फेज में ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी मकानों की गिनती की जा रही है। दूसरा फेज ‘जनसंख्या गणना’ फरवरी 2027 में होगा। इसमें लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी। आजादी के बाद पहली बार जाति का डेटा जुटाया जाएगा। इससे पहले 1931 में ऐसा हुआ था। पहली बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से होगी। कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा सीधे अपने स्मार्टफोन पर कलेक्ट करेंगे। जनगणना करने वाले आपसे कुल 33 सवाल पूछेंगे। ————- ये खबर भी पढ़ें… BJP ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया:16-18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहना होगा; महिला आरक्षण के लिए विशेष सत्र; PM ने पत्र लिखा BJP ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को 3 लाइन का व्हिप जारी कर 16 से 18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहने को कहा है। इस दौरान किसी को भी छुट्टी नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई थी। पूरी खबर पढ़ें…
2 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल जली:उमरिया में टूटी 11 केवी लाइन से भड़की आग, ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

उमरिया जिले की चंदिया तहसील के मझगंवा गांव में गेहूं के खेत में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप ले लिया और कई किसानों की तैयार खड़ी 2 एकड़ की फसल को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते, काफी नुकसान हो चुका था। इस हादसे में किसान सोनेलाल, दादुराम, कल्ली बाई, भीम्मा और धोरी लाल की गेहूं की फसल पूरी तरह जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। बिजली विभाग की लापरवाही पर गुस्सा गांव के रहने वाले विजय ने बताया कि खेत के पास से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन का तार टूटकर जमीन पर पड़ा था। माना जा रहा है कि इसी तार से निकली चिंगारी की वजह से फसल में आग लगी। ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। फायर ब्रिगेड ने पाया काबू सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, जब तक आग बुझती, तब तक बड़े इलाके की फसल जल चुकी थी। मुआवजे की मांग अपनी मेहनत की कमाई आंखों के सामने जलता देख किसानों में गहरा दुख और गुस्सा है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि बिजली कंपनी की लापरवाही की जांच की जाए और उन्हें हुए भारी नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
पिट्टू प्रतियोगिता में छाईं पौड़ी की लड़कियां, रुद्रप्रयाग के लड़के:रोमांचक मुकाबलों के साथ हुआ समापन; फाइनल मुकाबले में पौड़ी की बालिकाओं ने रुद्रप्रयाग को हराया

राजधानी के जीआरडी गर्ल्स डिग्री कॉलेज (प्रेमनगर) में चल रही ‘प्रथम राज्य स्तरीय जूनियर बालक-बालिका पिट्टू प्रतियोगिता’ का रविवार को समापन हुआ। देहरादून पिट्टू एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में पौड़ी की लड़कियों और रुद्रप्रयाग के लड़कों ने अपना दबदबा कायम करते हुए चैंपियन का ताज पहना। वहीं, बालिका वर्ग में उत्तरकाशी और बालक वर्ग में मेजबान देहरादून ने तीसरा स्थान हासिल किया। रविवार को खेले गए सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में खिलाड़ियों ने जमकर पसीना बहाया और दर्शकों को कई रोमांचक मैच देखने को मिले। बालिका वर्ग के फाइनल में पौड़ी ने रुद्रप्रयाग को 99-63 से हराया बालिका वर्ग में पौड़ी का एकतरफा दबदबा रहा और खिताबी सफर में टीम ने बेहतरीन खेल दिखाया। दिन के पहले सेमीफाइनल में रुद्रप्रयाग ने संघर्षपूर्ण मुकाबले में उत्तरकाशी को 49-44 से हराया। वहीं, दूसरे सेमीफाइनल में पौड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देहरादून को 133-39 के बड़े अंतर से एकतरफा शिकस्त दी। तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में उत्तरकाशी ने देहरादून को 56-40 से हराकर बाजी मारी। जबकि खिताबी मुकाबले में पौड़ी की बालिकाओं का दबदबा कायम रहा और उन्होंने रुद्रप्रयाग को 99-63 से हराकर राज्य स्तरीय ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया। बालक वर्ग में भी टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली पहले सेमीफाइनल में रुद्रप्रयाग ने उत्तरकाशी को 80-67 से हराया, जबकि दूसरे सेमीफाइनल में पौड़ी ने देहरादून को 127-48 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। मेजबान देहरादून ने तीसरे मुकाबले में उत्तरकाशी को 58-42 से हराकर तीसरा स्थान सुनिश्चित किया। जबकि खिताबी मुकाबले में रुद्रप्रयाग के खिलाड़ियों ने रणनीति के तहत खेलते हुए पौड़ी को 75-67 से मात दी और चैंपियन बन गए। विजेताओं को किया गया सम्मानित प्रतियोगिता के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के प्रतिनिधि राय सिंह नेगी, उत्तराखंड पिट्टू एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद पांडे और सचिव अश्वनी भट्ट ने विजेता और उपविजेता टीमों को पुरस्कार वितरित कर उनका हौसला बढ़ाया। इस मौके पर जीआरडी कॉलेज के निदेशक सिद्धांत चमोली, प्राचार्या प्रियंका सिंह, सुशील चमोली, देहरादून पिट्टू एसोसिएशन के सचिव विनोद पंवार, शशांक उनियाल, ओम प्रकाश, जितेंद्र लिंगवाल, मुकेश और संध्या थापा समेत कई खेल प्रेमी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
बहरी तहसील में भृत्य पर रिश्वतखोरी का आरोप:दो हजार नहीं देने पर रोकी फाइल; कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश दिए

सीधी जिले की बहरी तहसील में पदस्थ एक भृत्य पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं। मझरेती खुर्द निवासी आशीष कुमार मिश्रा ने कलेक्टर विकास मिश्रा से शिकायत की है कि फाइल क्लियर करने के नाम पर उनसे 7000 रुपए की मांग की गई। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता आशीष मिश्रा ने आरोप लगाया है कि लोकेश श्रीवास, जो वर्ष 2016 में भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) पद पर नियुक्त हुए थे, वर्तमान में लिपिक का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बहरी तहसील में वर्ष 2018 से बाबू और लिपिक के पद रिक्त पड़े हैं, जिसका फायदा उठाकर श्रीवास काश्तकारों से मनमाने तरीके से पैसे वसूल रहे हैं। आशीष मिश्रा के अनुसार, उनके पिता और उनके नाम से संबंधित एक फाइल तहसील में लंबित थी। इसे क्लियर करने के लिए उनसे 7000 रुपए की मांग की गई। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो उनकी फाइल को जानबूझकर लंबे समय तक रोका गया और उन्हें परेशान किया गया। दो हजार नहीं देने पर रोकी फाइल मिश्रा ने बताया कि अंततः उन्होंने मजबूरी में फोन के माध्यम से 5000 रुपए दिए, लेकिन इसके बावजूद उनका काम नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शेष 2000 रुपए न देने पर लोकेश श्रीवास ने बार-बार कहा कि 5000 रुपए तहसीलदार को देने पड़ते हैं और 2000 रुपए वह स्वयं लेते हैं। पैसे न देने की स्थिति में काम न करने की धमकी दी गई और उनकी फाइल को आगे बढ़ाने के बजाय रोक दिया गया, जबकि उसी दिन उसका निराकरण संभव था। रविवार को शिकायत सामने आने के बाद यह मामला गरमा गया है। आरोपों पर सफाई देते हुए लोकेश श्रीवास ने कहा कि वह भृत्य पद पर हैं, लेकिन कंप्यूटर ज्ञान होने के कारण उनसे लिपिकीय कार्य लिया जाता है। उन्होंने किसी भी प्रकार की अवैध वसूली से इनकार करते हुए कहा कि वे शासन के नियमों के अनुसार ही कार्य करते हैं। दोषी पर सख्त कार्रवाई करेंगे कलेक्टर विकास मिश्रा ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जल्द ही मामले की जांच कराई जाएगी और यदि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से पैसे मांगता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मैं दो माह के लिए प्रभार में था तहसीलदार बहरी इंद्रभान सिंह ने बताया कि ऐसी कोई भी जानकारी मुझे नहीं है। पूर्व नायब तहसीलदार जे पी पांडे का ट्रांसफर सिहावल हो गया है इसलिए मैं 2 महीने के लिए प्रभार में था। मैं इस पूरे मामले की जांच करवाता हूं।
उमा भारती के लिए चेन पुलिंग कर पंजाब मेल रोकी: झांसी में 5 मिनट खड़ी रही; रेलवे बोला- ट्रेन समय पर थी, पूर्व CM ने कहा- पहले छूटी – Jhansi News

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के लिए रविवार को झांसी में चेन पुलिंग कर पंजाब मेल रोकनी पड़ी। उमा भारती प्लेटफॉर्म पर पहुंचीं तो नई दिल्ली जाने वाली पंजाब मेल रवाना हो चुकी थी। . ट्रेन आधा प्लेटफॉर्म छोड़ चुकी थी। उमा के समर्थकों ने तत्काल ट्रेन को रुकवाया। उन्हें ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच A-1 में सवार होना था। लेकिन जब तक ट्रेन रुकी, कोच A-1 यार्ड में पहुंच चुका था। इस कारण वह B-1 कोच में सवार हुईं। उन्होंने ट्रेन के गेट पर ही खड़ी होकर मीडिया से बात भी की। चेन पुलिंग के चलते ट्रेन के ब्रेक की एयर रिलीज हो चुकी थी। ट्रेन 5 मिनट तक आधी प्लेटफॉर्म और आधी यार्ड में खड़ी रही। उमा भारती के ट्रेन में सवार होने के बाद गाड़ी को आगे रवाना किया गया। उमा भारती ने कहा- ट्रेन समय से पहले रवाना हो गई थी। यह पूरी घटना रेलवे की अव्यवस्था का नतीजा है। आज जो मेरे साथ हुआ है, वो आए दिन यात्रियों के साथ हो रहा है। मथुरा, झांसी और ललितपुर जैसे स्टेशनों पर अक्सर ऐसी दिक्कतें आती हैं। महिलाएं सामान और बच्चों के साथ प्लेटफार्म पर दौड़ती भागती हैं। बुजुर्गों और दिव्यांगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उमा भारती को थर्ड एसी में चढ़ना पड़ा। अब जानिए पूरा मामला… उमा भारती का दावा- 2 बजकर 18 मिनट पर स्टेशन पर पहुंच गई थी पूर्व सीएम उमा भारती ने दावा किया कि वे रविवार दोपहर 2:18 बजे झांसी रेलवे स्टेशन आ गई थीं। ट्रेन 2:23 बजे की थी। उमा भारती ने कहा- मैं एस्केलेटर से जा रही थी, लेकिन अफसरों ने ई-कार्ट से जाने के लिए कह दिया। कुछ दूरी चलने पर ई-कार्ट के सामने से एक ट्रेन निकली, इसलिए पांच मिनट तक वहीं खड़े रहना पड़ा। फिर हाथ ठेला निकला। इसके चलते ट्रेन छूट गई। रेल मंत्री को X पर लेटर लिखा- स्टेशन पर संवेदनशीलता का अभाव उमा भारती ने घटना के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सोशल मीडिया X पर एक लेटर लिखा है। उमा भारती ने कहा, मैंने पूर्व में मथुरा रेलवे स्टेशन की यात्रियों के प्रति संवेदनहीनता की बात लिखी है। मेरे साथ आज फिर झांसी रेलवे स्टेशन पर चढ़ते हुए एक घटना हो गई जिसमें कोई अपराधी नहीं है, बल्कि स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं के निर्माण में व्यावहारिक संवेदनशीलता का अभाव कारण बना है। अफसरों ने ई-कार्ट से जाने के लिए कह दिया। इसके बाद उमा भारती प्लेटफॉर्म तक ई-कार्ट से गईं। सीसीटीवी निकलवाए जाएं उमा भारती ने लिखा- झांसी रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी निकलवाए जाएं। मैं झांसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन आने के पहले आ गई थी और यह ट्रेन निर्धारित समय से पूर्व टाइम पर आ गई और निर्धारित समय से पूर्व प्रस्थान हो गई। मुझे बैटरी गाड़ी में बैठाकर प्लेटफॉर्म नंबर 1 से 4 नंबर की तरफ ले जाया जा रहा था। इतने में उसी ट्रैक से एक गाड़ी लंबे समय तक गुजरी और हम खड़े रहे। फिर जब थोड़ा आगे बढ़े तो एक हाथ ठेला ट्रैक में फंसा हुआ था। उसको निकालने में मेरे सुरक्षाकर्मियों ने सहयोग किया फिर जब मैं 4 नंबर प्लेटफार्म पर पहुंची तथा जिस ट्रेन पंजाब मेल में मुझे बैठना था, वह चलती जा रही थी। किसने चेन खींची, जिसका मुझे अंदाज नहीं है और मुझे ट्रेन में बैठा दिया गया। मिलकर मथुरा और झांसी की घटनाएं बताऊंगी उमा ने आगे लिखा- सब कुछ समय के अनुसार था, किसी से कोई भूल नहीं थी। ट्रेन के तीन-चार मिनट मेरे लिए खराब हुए। इसमें पहला कारण था ट्रेन का समय से पहले पहुंचना तथा समय से 2 मिनट पहले निकल जाना। रेल के अंदर संचालित करने वाले अधिकारियों की गलती उमा भारती ने कहा, मेरा तो छोड़ दीजिए लेकिन आमजन, दिव्यांगजन, वृद्ध, स्त्री पुरुष बहुत सारा सामान एवं गोद में बच्चे लिए महिलाएं अव्यवस्था का शिकार होते हैं। मैं झांसी रेलवे के अधिकारियों की बिल्कुल गलती नहीं मानती और अपनी भी नहीं मानती यह पूरी की पूरी व्यवस्था रेल के अंदर रेल को संचालित करने वाले अधिकारियों के द्वारा हुई। मैं आपसे फिर कहूंगी कि आप इन अव्यवस्थाओं पर ध्यान दीजिए। रेलवे का दावा- अपने समय पर छूटी थी ट्रेन नेशनल ट्रेन इन्क्वारी सिस्टम के मुताबिक, ट्रेन अपने निर्धारित समय दोपहर 2.15 की जगह 6 मिनट पहले 2.09 बजे प्लेटफॉर्म 4 पर आ गई थी। इसके बाद उसे 8 मिनट के स्टॉप के बाद 2.23 पर रवाना होना था और ट्रेन अपने निर्धारित टाइम पर ही छूटी थी। बाद में उसे चेन पुलिंग कर रोका गया तो फिर 2.28 बजे रवाना हुई। मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने बताया- मुंबई-फिरोजपुर पंजाब मेल की चेन पुलिंग उमा भारती ने नहीं कराई थी। कुछ यात्री, जो खाना और पानी लेने के लिए झांसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर उतरे थे, उन्होंने जब देखा कि ट्रेन चलने लगी है तो उन्हीं यात्रियों के साथियों ने चेन पुलिंग कर दी थी। रेलवे के सिस्टम में ऐसा नहीं होता कि ट्रेन निर्धारित समय से पहले प्लेटफॉर्म छोड़ दे। हां, ये बात जरूर है कि ट्रेन निर्धारित समय से पहले स्टेशन पर पहुंच जाती है। फिर भी हम मामले की जांच करा रहे हैं कि समय से पहले ट्रेन चलाई गई थी या नहीं। ———————- ये खबर भी पढ़िए- मिर्जापुर में वकील की हत्या करने वाले का एनकाउंटर:दोनों पैर में गोली लगी, पुलिसवाले टांगकर ले गए; मॉर्निंग वॉक पर मारी थी गोली मिर्जापुर में सीनियर वकील राजीव सिंह की हत्या करने वाले 50 हजार के इनामी राजेंद्र सोनकर को पुलिस ने शनिवार रात एनकाउंटर में गिरफ्तार कर लिया। उसके दोनों पैरों में गोली लगी। पुलिसकर्मी उसे कंधे पर टांगकर गाड़ी तक ले गए, फिर मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। पढ़ें पूरी खबर…
गैस और पेट फूलने से तुरंत राहत पाने का देसी तरीका, हींग और सोडा का पानी कैसे देता है मिनटों में आराम, यहां जानिए

Instant Gas Relief: आजकल की लाइफस्टाइल और खानपान ने पेट से जुड़ी दिक्कतों को आम बना दिया है. कभी भारी खाना, कभी बाहर का जंक फूड, तो कभी समय पर खाना न खाना-ये सब मिलकर गैस और एसिडिटी की समस्या को बढ़ा देते हैं. कई बार तो हालत ऐसी हो जाती है कि पेट फूल जाता है, दर्द होने लगता है और बेचैनी अलग से. ऐसे में लोग तुरंत दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन हर बार दवा लेना सही तरीका नहीं होता, अगर आप भी बार-बार गैस और पेट फूलने से परेशान रहते हैं, तो एक आसान सा घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकता है. हींग और सोडा का पानी एक ऐसा देसी नुस्खा है जो काफी समय से इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका असर भी तेजी से दिखता है. खास बात ये है कि ये चीजें लगभग हर किचन में आसानी से मिल जाती हैं. इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि हींग-सोडा पानी कैसे बनाना है, इसे कब और कैसे पीना चाहिए, और ये शरीर पर कैसे काम करता है. अगर आप बिना ज्यादा खर्च और बिना साइड इफेक्ट के राहत चाहते हैं, तो ये उपाय आपके लिए काफी काम का साबित हो सकता है. हींग-सोडा पानी बनाने का सही तरीकाइस नुस्खे को बनाना बेहद आसान है और इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता. सबसे पहले आधा गिलास हल्का गर्म पानी लें. अब इसमें आधा चम्मच खाने वाला सोडा डालें. इसके बाद एक चुटकी हींग और थोड़ा सा पिसा हुआ अजवाइन मिला दें. अगर आप चाहें तो स्वाद और असर बढ़ाने के लिए इसमें कुछ बूंदें नींबू का रस भी डाल सकते हैं. अब इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स करें और तुरंत पी लें. ध्यान रखें कि इसे बनाकर ज्यादा देर तक न रखें, वरना इसका असर कम हो सकता है. गैस में कैसे करता है कामहींग और सोडा दोनों ही पेट के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं. जब ये दोनों एक साथ पानी में मिलते हैं, तो इनका असर और तेज हो जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. हींग पेट में फंसी गैस को बाहर निकालने में मदद करती है और पाचन को बेहतर बनाती है. वहीं सोडा पेट के एसिड को बैलेंस करता है, जिससे जलन और भारीपन कम होता है. अजवाइन भी पाचन को सुधारती है और गैस बनने से रोकती है. इन तीनों का कॉम्बिनेशन पेट को तुरंत आराम देने में मदद करता है और कुछ ही मिनटों में फर्क महसूस होने लगता है. हींग के फायदेहींग सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी काफी उपयोगी है.-यह पाचन को तेज करती है-पेट में गैस बनने से रोकती है-सूजन और भारीपन कम करती है-पेट दर्द में राहत देती है अगर आप रोज के खाने में थोड़ा सा हींग इस्तेमाल करते हैं, तो पेट से जुड़ी कई समस्याओं से बच सकते हैं. सोडा के फायदेखाने वाला सोडा भी गैस की समस्या में तुरंत राहत देने के लिए जाना जाता है.-पेट की एसिडिटी को कम करता है-गैस और जलन में राहत देता है-पेट को हल्का महसूस कराता है लेकिन ध्यान रखें कि इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, वरना उल्टा असर भी हो सकता है. ध्यान रखने वाली बातेंदिन में एक बार से ज्यादा इसका सेवन न करें. खाली पेट पीना ज्यादा असरदार होता है. अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें. प्रेग्नेंट महिलाएं इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
बेटे ने बल्ले से पीटकर पिता की जान ली:छिंदवाड़ा में बाइक को लेकर हुआ झगड़ा; वारदात के बाद आरोपी फरार

छिंदवाड़ा जिले के हर्रई थाना क्षेत्र के ग्राम कचनरा में एक युवक ने अपने पिता की पीट-पीटकर हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार, आरोपी अपने पिता से मोटरसाइकिल लेकर कहीं जाने की जिद कर रहा था। पिता द्वारा मना करने पर दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने बल्ले से अपने पिता पर हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल पिता की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस सूचना मिलते ही हर्रई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपी की तलाश के लिए टीम गठित की है। एसडीओपी कल्याणी बरकड़े ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पिता-पुत्र के बीच विवाद की बात सामने आई है। आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट अकाउंट में 7.5% तक ब्याज:1 से 5 साल तक के लिए कर सकते हैं निवेश, जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें

सरकार ने अप्रैल-जून तिमाही (Q1FY27) के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। यानी आपको पहले जितना ही ब्याज मिलता रहेगा। अगर आप इन दिनों फिक्स्ड डिपॉजिट कराने का प्लान बना रहे हैं तो तो इससे पहले पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग्स टाइम डिपॉजिट अकाउंट के बारे में भी जान लेना चाहिए। यहां हम आपको पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग्स टाइम डिपॉजिट स्कीम के बारे में बता रहे हैं… नेशनल सेविंग्स टाइम डिपॉजिट अकाउंट में मिनिमम ₹1000 निवेश कहां कितने समय में पैसा होगा डबल? नेशनल सेविंग्स टाइम डिपॉजिट अकाउंट में अधिकतम ब्याज 7.5% मिल रहा है ऐसे में रूल 72 के अनुसार अगर आप इस स्कीम में पैसा लगाते हैं तो पैसे को डबल होने में करीब 9 साल 6 महीने का समय लगेगा। क्या है रूल ऑफ 72? फाइनेंस का यह खास नियम है रूल ऑफ 72। एक्सपर्ट्स इसे सबसे सटीक रूल मानते हैं, जिससे यह तय किया जाता है कि आपका निवेश कितने समय में डबल हो जाएगा। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर आपने बैंक के एक खास स्कीम का चयन किया है, जहां आपको सालाना 8% ब्याज मिलता है। ऐसे में आपको रूल ऑफ 72 के तहत 72 में 8 का भाग देना होगा। 72/8= 9 साल, यानी इस स्कीम के तहत आपके पैसे 9 साल में दोगुने हो जाएंगे। 5 साल के लिए निवेश करने पर मिलता है टैक्स छूट का फायदा टाइम डिपॉजिट स्कीम में 5 साल के लिए निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं। इसके तहत 1.50 लाख रुपए तक के निवेश पर आप इनकम टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं। यानी आपकी कुल सालाना इनकम से ये कमाई घटा दी जाती है। हालांकि ये फायदा तभी मिलेगा जब आप पुरानी इनकम टैक्स रिजीम के तहत ITR फाइल करते हैं। अकाउंट कौन-कौन खोल सकता है? ये अकाउंट किसी भी पोस्ट ऑफिस में कोई भी खोल सकता है:







