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बच्चों को बचाने में बाइक फिसली, युवक घायल:डायल-112 ने पहुंचाया अस्पताल, बहुती स्कूल के सामने हादसा

बच्चों को बचाने में बाइक फिसली, युवक घायल:डायल-112 ने पहुंचाया अस्पताल, बहुती स्कूल के सामने हादसा

मऊगंज में एक बाइक चालक बच्चों को बचाने के प्रयास में सड़क पर फिसल गया। इस हादसे में चालक घायल हो गया। यह घटना शनिवार रात मऊगंज थाना क्षेत्र में बहुती ग्लोबल स्कूल के सामने हाईवे पर हुई। हनुमना निवासी बाइक चालक शैलेंद्र सिंह मऊगंज से अपने घर लौट रहे थे। बच्चों को बचाने के प्रयास में हादसा अचानक सड़क पर कुछ बच्चे आ गए। बच्चों को बचाने के प्रयास में शैलेंद्र ने अपनी बाइक का संतुलन खो दिया, जिससे बाइक फिसल गई और वे सड़क पर गिरकर घायल हो गए। घायल को अस्पताल भेजा घटना के तुरंत बाद, मौके पर मौजूद लोगों ने डायल-112 को सूचना दी। डायल-112 की टीम ने मौके पर पहुंचकर घायल शैलेंद्र सिंह को प्राथमिक सहायता प्रदान की और उन्हें सिविल अस्पताल मऊगंज पहुंचाया। उनका उपचार अस्पताल में जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यदि चालक समय पर ब्रेक नहीं लगाता, तो बच्चों के साथ गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। पुलिस ने इस मामले की जानकारी ली है और आगे की कार्रवाई कर रही है।

हाथों में कंपकंपी- मांसपेशियों में जकड़न, बिना देरी भागें डॉक्टर के पास, हो सकती है ये न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम

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Last Updated:April 11, 2026, 22:44 IST Parkinson Symptoms: पार्किंसन डिजीज एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो धीरे-धीरे जानलेवा बनती है. हालांकि इस बीमारी का कोई ठोस इलाज नहीं है, लेकिन शुरआती स्टेज में अगर लक्षण पहचान लिए जाएं तो मेडिकल हेल्प से इसे मैनेज करना आसान होता है. यहां आप पार्किंसन के वॉर्निंग साइन के बारे में जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट Parkinson Symptoms: पार्किंसन एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर की गतिविधियों को प्रभावित करती है.ये न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है. इसमें ब्रेन वो कोशिकाएं प्रभावित होती हैं जो शरीर की गतिविधियों को कंट्रोल करती हैं. इस कारण शरीर में डोपामाइन नामक रसायन की कमी हो जाती है, जिससे मांसपेशियों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है. शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर रूप लेते हैं. पार्किंसन रोग होने का सटीक कारण अभी भी पूरी तरह से समझ में नहीं आया है. यही वजह है कि अब तक इस बीमारी का कोई ठोस इलाज नहीं है. मेडिकल हेल्प से सिर्फ इसके लक्षणों को मैनेज किया जाता है, जिससे मरीज लंबे समय तक क्वालिटी लाइफ जी सके. इसलिए इस बीमारी के संकेतों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है. जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 11 अप्रैल को विश्व पार्किंसन दिवस भी मनाया जाता है. किन लोगोंं में पार्किंसन का ज्यादा खतरा होता है?वैसे तो यह बीमारी आमतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती है, लेकिन कुछ मामलों में यह युवाओं को भी प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा इस बीमारी का खतरा पुरषों में महिलाओं के मुकाबले ज्यादा होता है. कई मामलों में जेनेटिक कारक भी पार्किंसन होने की वजह देखे जाते हैं.  पार्किंसन के शुरुआती लक्षण पार्किंसन के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें सामान्य कमजोरी या बढ़ती उम्र का असर मान लेते हैं. लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है- हाथों या पैरों में कंपकंपी मांसपेशियों में जकड़न और अकड़न चलने-फिरने में धीमापन या असंतुलन उठने-बैठने में दिक्कत लिखने में परेशानी शरीर का एक तरफ झुकना आंखों का कम झपकना या चेहरे के भाव कम होना समय पर इलाज क्यों है जरूरी?अगर पार्किंसन के लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए, तो इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. दवाइयों, फिजियोथेरेपी और स्वस्थ जीवनशैली की मदद से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं. ऐसे में अगर आपको या आपके परिवार में किसी को ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करें. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 11, 2026, 22:44 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

इंदौर में युवक के सिर पर पत्थर मारकर हत्या:शराब दुकान के पास मैदान में गंभीर हालत में मिला था, इलाज के दौरान मौत

इंदौर में युवक के सिर पर पत्थर मारकर हत्या:शराब दुकान के पास मैदान में गंभीर हालत में मिला था, इलाज के दौरान मौत

इंदौर के केट रोड पर शनिवार रात एक युवक की सिर में पत्थर मारकर हत्या कर दी गई। युवक कुंदन नगर स्थित शराब दुकान के पास मैदान में गंभीर हालत में मिला था। पुलिस ने उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे एमवाय अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में शनिवार रात पुलिस की एफआरवी 112 को सूचना मिली थी कि कुंदन नगर शराब दुकान के पास करीब 30 वर्षीय युवक घायल अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवक को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवक अपने साथियों के साथ खाली मैदान में शराब पी रहा था। इसी दौरान विवाद हुआ और आरोपियों ने उसके सिर पर पत्थर से हमला कर दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस शराब दुकान और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है तथा मामले की जांच कर रही है।

फ्री में मिलने वाली ये हरी पत्तियां हैं सेहत के लिए अनमोल, खून करे साफ, कमजोर इम्यूनिटी करे मजबूत, कई रोगों से बचाए

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Last Updated:April 11, 2026, 22:29 IST How to consume coriander leaves in summer: धनिया पत्ती आप अक्सर सब्जी वाले से फ्री में मांग लेते होंगे. ताजी हरी धनिया पत्ती जिस व्यंजन में डाल दें, उसकी खुशबू और स्वाद डबल हो जाता है. धनिया पत्ती स्वाद के साथ ही सेहत भी बनाती है. गर्मियों में इसका सेवन जरूर करना चाहिए, क्योंकि ये सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाता है. जानिए, हरी धनिया पत्ती के स्वास्थ्य लाभ. गर्मियों में हरे धनिए के सेवन के फायदे. How to consume coriander leaves in summer: सर्दियों से लेकर गर्मियों में हरा धनिया अच्छी मात्रा में मिल जाता है और इसके बिना दाल-सब्जी का स्वाद भी अधूरा है. भारतीय खाने में धनिए को सजावटी तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह मात्र दाल या सब्जी को गार्निश करने का साधन नहीं, बल्कि गुणों का खजाना है. आयुर्वेद हरे धनिये को ‘दोष-संतुलक,’ ‘रक्त-शोधक,’ और ‘पाचन-उत्तेजक’ मानता है. यह थायरॉयड में सबसे ज्यादा उपयोगी होता है. हरे धनिए में विटामिन ए, सी, के और पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन समेत कई मिनरल्स मिल जाते हैं. इसमें अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है. यही कारण है कि आयुर्वेद में हरे धनिए को गुणों की खान माना जाता है लेकिन आज भी भारतीय थाली में इसका इस्तेमाल गलत तरीके से होता आ रहा है. आज हम आयुर्वेद के नजरिए से हरे धनिए के सेवन के बारे में जानेंगे. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. अक्सर भारतीय थाली में धनिए को गर्म सब्जी के साथ पका दिया जाता है, लेकिन यह गलत है. धनिए को कभी भी पकाकर नहीं खाना चाहिए, बल्कि इसका सेवन कच्चा ही करना चाहिए. पकाने से धनिए से विटामिन नष्ट हो जाते हैं और मिनरल्स की संख्या में भी कमी आती है. इसके साथ ही कोशिश करें कि धनिए को नींबू के साथ लें. ऐसा करने से शरीर में आयरन की अवशोषणता बढ़ जाती है. इसलिए दाल में कच्चे हरे धनिए के साथ नींबू की कुछ बूंदें जरूर डालें. हरे धनिए के साथ काला नमक जरूर लें. इससे भोजन अच्छे से पचता है और मंद पड़ी पाचन अग्नि तेज होती है. पाचन अग्नि में सुधार लाने के लिए हरा धनिया और काले नमक का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा बेहतरीन है. इसके साथ ही अगर सुबह के वक्त खाली पेट हरे धनिए को पानी में उबालकर और छानकर पी लिया जाए तो यह लिवर के लिए डिटॉक्स वाटर की तरह काम करता है और लिवर के टॉक्सिन को कम करने का काम करता है. ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि जिन लोगों को बहुत जल्दी ठंड लग जाती है, उन्हें सीमित मात्रा में धनिए का सेवन करना चाहिए क्योंकि हरे धनिए की तासीर ठंडी होती है और इससे छींक आने की परेशानी और जुकाम हो सकता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 11, 2026, 22:29 IST

टीईटी के विरोध में जौरा में शिक्षकों का प्रदर्शन:शिक्षकों ने रैली निकाली, बोले– अयोग्य ठहराना अनुचित; आंदोलन तेज करने की चेतावनी

टीईटी के विरोध में जौरा में शिक्षकों का प्रदर्शन:शिक्षकों ने रैली निकाली, बोले– अयोग्य ठहराना अनुचित; आंदोलन तेज करने की चेतावनी

मुरैना के जौरा में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में शनिवार को शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हजारों की संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं सड़कों पर उतर आए और सरकार के नियमों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। शिक्षकों ने कहा कि पहले जिन नियमों के आधार पर उन्हें भर्ती दिया गया, अब उन्हीं के आधार पर उन्हें अयोग्य बताया जाना अनुचित है। आक्रोशित शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठाना गलत है और उन्हें टीईटी परीक्षा के लिए बाध्य करना उचित नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर तहसील क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से शिक्षक सनाढय धर्मशाला जौरा में एकत्रित हुए और वहां से रैली निकालते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। रैली के दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। इसके बाद शिक्षकों ने एसडीएम जौरा के प्रतिनिधि नायब तहसीलदार प्रमोद तोमर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन होगा मप्र शिक्षक कांग्रेस के प्रांतीय सचिव एवं संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी कौशल शर्मा ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में टीईटी परीक्षा को निरस्त करना और नवीन शिक्षक संवर्ग में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आगामी चरण में 18 अप्रैल को भोपाल में प्रदेश स्तरीय धरना और मुख्यमंत्री अनुरोध रैली आयोजित करने की भी घोषणा की गई है, जिसमें पूरे प्रदेश के शिक्षक शामिल होंगे। इस प्रदर्शन में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से सतेन्द्र तिवारी, नरेन्द्र सिंह तोमर, कौशल शर्मा, रविशंकर शर्मा सहित हजारों शिक्षक शामिल हुए।

सुबह नाश्ते में कर रहे हैं ये 4 बड़ी गलतियां? बढ़ सकता है मोटापा और बीमारियों का खतरा!

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Last Updated:April 11, 2026, 21:18 IST अक्सर लोग सुबह के नाश्ते को हल्के में लेते हैं, लेकिन यही दिनभर की सेहत और एनर्जी की नींव होता है. जल्दीबाजी में गलत चीजें खाना या नाश्ता छोड़ देना धीरे-धीरे शरीर पर बुरा असर डाल सकता है. अगर आप भी सुबह कुछ आम गलतियां कर रहे हैं, तो सतर्क हो जाना जरूरी है, वरना ये आदतें कई बीमारियों की वजह बन सकती हैं. सुबह के नाश्ते में होने वाली गलतियां. सुबह का नाश्ता दिन की शुरुआत का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यही आपके शरीर को दिनभर काम करने की ऊर्जा देता है. यह सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता, बल्कि आपकी सेहत, मूड और पूरे दिन की एक्टिविटी पर भी इसका सीधा असर पड़ता है. लेकिन अक्सर लोग सुबह की जल्दी में सही खानपान पर ध्यान नहीं देते और कुछ भी खा लेते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर पर नकारात्मक असर डालने लगता है. सही नाश्ता न करने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे थकान, कमजोरी और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, सुबह का नाश्ता संतुलित और पोषण से भरपूर होना चाहिए, जिसमें विटामिन, मिनरल्स और फाइबर की पर्याप्त मात्रा हो. इससे शरीर को दिनभर के लिए एनर्जी मिलती है और मेटाबॉलिज्म भी बेहतर रहता है. लेकिन अगर नाश्ते में ज्यादा नमक, चीनी या तैलीय चीजें शामिल कर ली जाएं, तो यह फायदे की जगह नुकसान पहुंचाने लगता है. इसलिए जरूरी है कि सुबह का भोजन हल्का लेकिन हेल्दी हो, ताकि शरीर और दिमाग दोनों सक्रिय और फ्रेश बने रहें. सुबह के नाश्ते में होने वाली आम गलतियांअक्सर लोग नाश्ते में ऐसी चीजें शामिल कर लेते हैं, जो स्वाद में भले ही अच्छी लगती हैं, लेकिन सेहत के लिए नुकसानदायक होती हैं. जैसे ज्यादा चीनी वाली चाय, बिस्किट, केक या मिठाइयां, जो शरीर में शुगर लेवल बढ़ाती हैं. इसके अलावा तला-भुना खाना जैसे समोसा, कचौड़ी, परांठे और पकौड़े भी सुबह के लिए सही विकल्प नहीं हैं, क्योंकि ये पाचन पर भारी पड़ते हैं. नमकीन, चिप्स या अचार जैसे ज्यादा नमक वाले फूड्स भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं. सबसे बड़ी गलती जो कई लोग करते हैं, वह है खाली पेट सिर्फ चाय या कॉफी पी लेना और पूरा नाश्ता छोड़ देना, जिससे शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता. हेल्दी नाश्ते के लिए क्या करें?अगर आप दिनभर एक्टिव और हेल्दी रहना चाहते हैं, तो अपने नाश्ते में पौष्टिक चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी है. आप दलिया, ओट्स या सूजी से बने हल्के व्यंजन खा सकते हैं, जो आसानी से पच जाते हैं और ऊर्जा भी देते हैं. इसके साथ ही फल जैसे सेब, केला, संतरा या पपीता शरीर को जरूरी विटामिन प्रदान करते हैं. अंकुरित अनाज जैसे मूंग या चना प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं, जो लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं. दही या फ्रूट योगर्ट भी एक अच्छा विकल्प है, जो पाचन को बेहतर बनाता है. इसके अलावा पोहा या कम तेल में बनी सब्जी के साथ रोटी भी एक संतुलित और हेल्दी नाश्ता हो सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 11, 2026, 21:17 IST

पहले एसपी पर प्रताड़ना के आरोप लगाए, फिर मांगी माफी:मुरैना में शराब के नशे में आरक्षक ने वीडियो बनाया, बोला-एसपी करते है प्रताड़ित

पहले एसपी पर प्रताड़ना के आरोप लगाए, फिर मांगी माफी:मुरैना में शराब के नशे में आरक्षक ने वीडियो बनाया, बोला-एसपी करते है प्रताड़ित

छिंदवाड़ा में एसपी समीर सौरभ के बंगले पर तैनात एक आरक्षक द्वारा ड्यूटी से गैरहाजिर रहते हुए एसपी पर प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने का मामला सामने आया है। आरक्षक रूप सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर वीडियो अपलोड कर आरोप लगाया कि एसपी और उनकी पत्नी द्वारा उसे प्रताड़ित किया जा रहा है तथा उसे छुट्टी नहीं दी जा रही, जबकि वह बीमार है और उसकी दोनों किडनियों में पथरी की शिकायत है। वीडियो में वह नशे की हालत में भी दिखाई दे रहा था और घटना के समय वह ड्यूटी से अनुपस्थित था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, हालांकि अगले ही दिन आरक्षक रूप सिंह अपने पिता के साथ पुलिस लाइन स्थित रक्षित निरीक्षक कार्यालय पहुंचा, जहां उसने अपने कृत्य के लिए लिखित माफी मांगी। उसने स्वीकार किया कि उसने शराब के नशे में गलती की और उसे केवल छुट्टी चाहिए थी। इस दौरान पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण भी कराया। रक्षित निरीक्षक रविकांत शुक्ला के अनुसार आरक्षक पिछले आठ वर्षों से बंगले में पदस्थ है और उसके द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोप गलत हैं। उन्होंने बताया कि आरक्षक दो दिन से ड्यूटी से गैरहाजिर था और घर पर शराब पी रहा था। आरक्षक द्वारा छुट्टी का आवेदन देने पर उसकी छुट्टी स्वीकृत कर दी गई है तथा विभागीय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

दिग्गज गायिका आशा भोसले को हार्ट अटैक:ब्रिच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया

दिग्गज गायिका आशा भोसले को हार्ट अटैक:ब्रिच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया

दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले की तबीयत अचानक बिगड़ने की खबर सामने आई है। शनिवार को उन्हें हार्ट अटैक आने के बाद तुरंत दक्षिण मुंबई स्थित ब्रिच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें इमरजेंसी में एडमिट किया गया। फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है, लेकिन उनकी हालत को लेकर अस्पताल या परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें अत्यावश्यक चिकित्सा इकाई में रखा गया है और लगातार इलाज जारी है। देशभर के फैंस उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। यह खबर अपडेट हो रही है..

TET परीक्षा के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन:बड़वारा में सीएम के नाम दिया मांग पत्र; नियुक्ति दिनांक से सेवा गणना की मांग

TET परीक्षा के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन:बड़वारा में सीएम के नाम दिया मांग पत्र; नियुक्ति दिनांक से सेवा गणना की मांग

कटनी जिले के बड़वारा तहसील में शनिवार को शिक्षकों ने सरकार की नीतियों के विरुद्ध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने तहसीलदार ऋषि गौतम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर नवीन संवर्ग के शिक्षकों की सेवा गणना पुरानी तिथि से करने और पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की। प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता की मांग शिक्षकों ने ज्ञापन में मांग की है कि 1 जुलाई 2018 से नियुक्त दिखाए गए अध्यापकों की सेवा अवधि की गणना उनकी वास्तविक ‘प्रथम नियुक्ति दिनांक’ से की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि IFMS पोर्टल पर दर्ज 2018 की तारीख को विलोपित कर पुरानी तिथि दर्ज की जाए, ताकि शिक्षकों को क्रमोन्नति, पदोन्नति, ग्रेच्युटी और पुरानी पेंशन का उचित लाभ मिल सके। पात्रता परीक्षा (TET) के आदेश का विरोध शिक्षकों ने 3 मार्च 2026 को जारी उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य की गई है। शिक्षकों ने इस आदेश को तत्काल निरस्त करने और सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखने का आग्रह किया है। 5 लाख शिक्षक परिवारों पर संकट का दावा प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि परीक्षा की अनिवार्यता के कारण प्रदेश के लगभग 5 लाख शिक्षक परिवार भविष्य को लेकर मानसिक तनाव में हैं। शिक्षकों का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को इस परीक्षा से पूर्णतः छूट दी जानी चाहिए।। उग्र आंदोलन की दी चेतावनी मोर्चा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी वाजिब मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो प्रदेश भर के शिक्षक उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। शिक्षकों ने साफ कहा कि उनकी लड़ाई उनके सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए है

उपचुनाव के बाद कर्नाटक कांग्रेस में दरार बढ़ी: अल्पसंख्यक विंग के प्रमुख ने इस्तीफा दिया, शिवकुमार ने दावणगेरे से रिपोर्ट मांगी | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:11 अप्रैल, 2026, 20:32 IST कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में उम्मीदवार चयन और अभियान प्रबंधन से जुड़ी आंतरिक असहमति को स्वीकार किया है उपमुख्यमंत्री और केपीसीसी अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि पार्टी नेतृत्व आगे की टिप्पणी करने से पहले तथ्यों का सत्यापन करेगा। छवि/न्यूज़18 कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में मतदान के समापन के बाद ताजा आंतरिक उथल-पुथल का सामना कर रही है, केपीसीसी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष अब्दुल जब्बार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अल्पसंख्यक नेताओं के बीच असंतोष और पार्टी के भीतर वर्गों को किनारे करने के कथित प्रयासों का हवाला दिया है। केपीसीसी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को संबोधित अपने इस्तीफे पत्र में, जब्बार ने कहा कि उपचुनाव के दौरान हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने उन्हें निर्णय लेने के लिए मजबूर किया। जब्बार ने लिखा, “सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद और भारी दुख के साथ, मैं केपीसीसी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के लिए औपचारिक रूप से यह पत्र लिख रहा हूं। उप-चुनाव के दौरान दावणगेरे और पूरे कर्नाटक में हाल के राजनीतिक घटनाक्रम ने मुझे यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।” उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान कई घटनाक्रमों से अल्पसंख्यक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गहरी निराशा हुई है। जब्बार ने यह भी आरोप लगाया कि उपचुनाव के दौरान प्रमुख निर्णय अल्पसंख्यक विभाग नेतृत्व के साथ पर्याप्त परामर्श के बिना लिए गए। उन्होंने लिखा, “दावणगेरे उपचुनाव के दौरान पार्टी नेताओं की ओर से अल्पसंख्यक विभाग और उसके नेताओं से संपर्क करने या उनसे इनपुट लेने का कोई सीधा प्रयास नहीं किया गया है। अल्पसंख्यक पदाधिकारी हाल की घटनाओं से व्यथित और निराश हैं, और मैं भी उन्हीं भावनाओं को साझा करता हूं।” इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस आलाकमान को कथित तौर पर उपचुनाव प्रचार के दौरान जब्बार और मंत्री ज़मीर अहमद खान की भूमिका और उनके कुछ अनुयायियों के दावणगेरे दक्षिण में पार्टी के खिलाफ काम करने के बारे में नकारात्मक रिपोर्ट मिली है। यह इस्तीफा विधायक रिजवान अरशद और एमएलसी सलीम अहमद सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में उम्मीदवार चयन और अभियान प्रबंधन से जुड़ी आंतरिक असहमति को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के एक दिन बाद आया है। इससे पहले पत्रकारों को संबोधित करते हुए सलीम अहमद ने आरोप लगाया कि आंतरिक विभाजन ने पार्टी के कामकाज को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, “पार्टी के भीतर कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस को हराने की साजिश रची। इसके बावजूद, अल्पसंख्यक मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया।” रिजवान अरशद ने यह भी स्वीकार किया कि अल्पसंख्यक उम्मीदवार खड़ा करने की मांग ने आंतरिक तनाव पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा, “हमने एक अल्पसंख्यक उम्मीदवार के लिए जोरदार दबाव डाला था, लेकिन हमें एक पर जोर देने के बजाय कई नाम सुझाने चाहिए थे। इससे भ्रम और कठिनाइयां पैदा हुईं।” शुक्रवार को घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री और केपीसीसी अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि पार्टी नेतृत्व आगे की टिप्पणी करने से पहले तथ्यों का सत्यापन करेगा। शिवकुमार ने कहा, “मुझे कुछ रिपोर्टें मिली हैं और मुझे बताया गया है कि अल्पसंख्यक अध्यक्ष ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मैं कोई भी बयान देने से पहले इसे सत्यापित करूंगा और स्थानीय नेताओं से रिपोर्ट एकत्र करूंगा।” माना जाता है कि आंतरिक कलह दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के लिए उम्मीदवार चयन पर असहमति से उपजी है, जो अनुभवी कांग्रेस नेता शमनूर शिवशंकरप्पा की मृत्यु के बाद हुआ था। कथित तौर पर कई अल्पसंख्यक नेताओं ने विचार के लिए अब्दुल जब्बार के नाम का समर्थन किया था, लेकिन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया और नेतृत्व परामर्श के कारण दूसरे उम्मीदवार का चयन हुआ। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस्तीफे और तोड़फोड़ के आरोपों ने कांग्रेस के भीतर बढ़ते गुटीय तनाव को उजागर कर दिया है, जिससे संगठनात्मक एकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जबकि पार्टी हाल ही में संपन्न उपचुनावों के नतीजों का इंतजार कर रही है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 11 अप्रैल, 2026, 20:32 IST समाचार राजनीति उपचुनाव के बाद कर्नाटक कांग्रेस में दरार बढ़ी: अल्पसंख्यक विंग के प्रमुख ने इस्तीफा दिया, शिवकुमार ने दावणगेरे से रिपोर्ट मांगी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें