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हाथों में कंपकंपी- मांसपेशियों में जकड़न, बिना देरी भागें डॉक्टर के पास, हो सकती है ये न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम

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Parkinson Symptoms: पार्किंसन डिजीज एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो धीरे-धीरे जानलेवा बनती है. हालांकि इस बीमारी का कोई ठोस इलाज नहीं है, लेकिन शुरआती स्टेज में अगर लक्षण पहचान लिए जाएं तो मेडिकल हेल्प से इसे मैनेज करना आसान होता है. यहां आप पार्किंसन के वॉर्निंग साइन के बारे में जान सकते हैं.

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Parkinson Symptoms: पार्किंसन एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर की गतिविधियों को प्रभावित करती है.ये न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है. इसमें ब्रेन वो कोशिकाएं प्रभावित होती हैं जो शरीर की गतिविधियों को कंट्रोल करती हैं. इस कारण शरीर में डोपामाइन नामक रसायन की कमी हो जाती है, जिससे मांसपेशियों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है. शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर रूप लेते हैं.

पार्किंसन रोग होने का सटीक कारण अभी भी पूरी तरह से समझ में नहीं आया है. यही वजह है कि अब तक इस बीमारी का कोई ठोस इलाज नहीं है. मेडिकल हेल्प से सिर्फ इसके लक्षणों को मैनेज किया जाता है, जिससे मरीज लंबे समय तक क्वालिटी लाइफ जी सके. इसलिए इस बीमारी के संकेतों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है. जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 11 अप्रैल को विश्व पार्किंसन दिवस भी मनाया जाता है.

किन लोगोंं में पार्किंसन का ज्यादा खतरा होता है?
वैसे तो यह बीमारी आमतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती है, लेकिन कुछ मामलों में यह युवाओं को भी प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा इस बीमारी का खतरा पुरषों में महिलाओं के मुकाबले ज्यादा होता है. कई मामलों में जेनेटिक कारक भी पार्किंसन होने की वजह देखे जाते हैं. 

पार्किंसन के शुरुआती लक्षण
पार्किंसन के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें सामान्य कमजोरी या बढ़ती उम्र का असर मान लेते हैं. लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है-

  • हाथों या पैरों में कंपकंपी
  • मांसपेशियों में जकड़न और अकड़न
  • चलने-फिरने में धीमापन या असंतुलन
  • उठने-बैठने में दिक्कत
  • लिखने में परेशानी
  • शरीर का एक तरफ झुकना
  • आंखों का कम झपकना या चेहरे के भाव कम होना

समय पर इलाज क्यों है जरूरी?
अगर पार्किंसन के लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए, तो इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. दवाइयों, फिजियोथेरेपी और स्वस्थ जीवनशैली की मदद से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं. ऐसे में अगर आपको या आपके परिवार में किसी को ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करें.

About the Author

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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पार्किंसन रोग होने का सटीक कारण अभी भी पूरी तरह से समझ में नहीं आया है. यही वजह है कि अब तक इस बीमारी का कोई ठोस इलाज नहीं है. मेडिकल हेल्प से सिर्फ इसके लक्षणों को मैनेज किया जाता है, जिससे मरीज लंबे समय तक क्वालिटी लाइफ जी सके. इसलिए इस बीमारी के संकेतों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है. जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 11 अप्रैल को विश्व पार्किंसन दिवस भी मनाया जाता है.

किन लोगोंं में पार्किंसन का ज्यादा खतरा होता है?
वैसे तो यह बीमारी आमतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती है, लेकिन कुछ मामलों में यह युवाओं को भी प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा इस बीमारी का खतरा पुरषों में महिलाओं के मुकाबले ज्यादा होता है. कई मामलों में जेनेटिक कारक भी पार्किंसन होने की वजह देखे जाते हैं. 

पार्किंसन के शुरुआती लक्षण
पार्किंसन के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें सामान्य कमजोरी या बढ़ती उम्र का असर मान लेते हैं. लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है-

  • हाथों या पैरों में कंपकंपी
  • मांसपेशियों में जकड़न और अकड़न
  • चलने-फिरने में धीमापन या असंतुलन
  • उठने-बैठने में दिक्कत
  • लिखने में परेशानी
  • शरीर का एक तरफ झुकना
  • आंखों का कम झपकना या चेहरे के भाव कम होना

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अगर पार्किंसन के लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए, तो इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. दवाइयों, फिजियोथेरेपी और स्वस्थ जीवनशैली की मदद से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं. ऐसे में अगर आपको या आपके परिवार में किसी को ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करें.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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