Monday, 26 Oct 2026 | 05:29 AM

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‘बीजेपी सत्ता में ऐ तो हमलावर…’, ममता सरकार ने भड़के तंज, कहा- हिंसा करने वालों पर मोदी करेंगे एक्शन

'बीजेपी सत्ता में ऐ तो हमलावर...', ममता सरकार ने भड़के तंज, कहा- हिंसा करने वालों पर मोदी करेंगे एक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में मतुआ और नामशूद्र दल के सहयोगियों पर भाजपा का रुख स्पष्ट करते हुए अपना वादा निभाया है। पूर्व बर्धमान जिले के कटवा में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नागरिकता के लिए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) लागू किया है। उन्होंने कहा, ”मैं मतुआ और नामशूद्र समुदाय से चाहता हूं कि वे देश के संविधान की रक्षा करें. उन्होंने कहा कि मोदी ने वोटुआ, नामशूद्र और सभी नामशूद्र आदिवासियों को शांति मिल सके, इसके लिए वहां का गणतंत्र कानून बनाया.” पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों का आरोप प्रधानमंत्री ने कहा, ”भाजपा सरकार बनी हुई है तो सभी पात्र यात्रियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।” दक्षिण बंगाल के कई सजावटी में विस्तारित मतुआ समुदाय के मुसलमानों को एक प्रभावशाली वर्ग माना जाता है और नागरिकता का समुदाय लंबे समय से राजनीतिक रूप से प्रेरित है। मोदी ने अवैध घुसपैठियों के मुद्दे पर तेज हमला करते हुए कहा कि भाजपा सत्ता में है तो घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल में ले जाना चाहती है। उन्होंने कहा, “अब जाने का समय आ गया है और घुसपैठियों को अपना सामान बांधना शुरू कर देना चाहिए। जो लोग घुसपैठियों की मदद कर रहे हैं, उन्हें भी नहीं बचाया जाएगा।” बंगाल में भय का माहौल-मोदी बंगाल सरकार पर पीएम मोदी ने कहा कि 15 साल के शासन में सीएम ममता बनर्जी का जन्म हुआ है. यह इलेक्शन डेमोक्रेसी डार को ख़त्म करने के लिए है। मोदी ने परमाणु के भय से मुक्ति और भाजपा के विश्वास से अभिन्न पश्चिम बंगाल का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा बदलाव एक विकसित पश्चिम बंगाल के निर्माण की दिशा में पहला कदम होगा। आलू किसानों को लेकर क्या कहा प्रधानमंत्री ने कहा, ”भाजपा, वैष्णव कांग्रेस की ‘निर्मम सरकार’ के श्वेतपत्र जारी करने वाली है। उन्होंने कहा, ”हम पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”पश्चिम बंगाल में अगर भाजपा की सरकार बनी तो पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना लागू की जाएगी।” बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 रांची विधानसभा के चरण 2 चरण 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। तीसरी 4 मई को की जाएगी. ये भी पढ़ें ‘बंगला में घुसपैठ के लिए टीएमसी जिम्मेदार’, अमित शाह ने भड़के अभिषेक बनर्जी पर तंज कसते हुए शेख हसीना को लेकर क्या कहा?

‘परफेक्ट मां’ बनने का प्रेशर:देश की 22% माताएं डिप्रेशन में, हर समय खुश रहने का दबाव खतरनाक

‘परफेक्ट मां’ बनने का प्रेशर:देश की 22% माताएं डिप्रेशन में, हर समय खुश रहने का दबाव खतरनाक

भारत में मां बनना अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो गया है। आंकड़ों के अनुसार मातृ मृत्यु दर में गिरावट आई है। 2014-16 में जहां एक लाख जन्म पर 130 मौतें होती थीं, जो कि अब घटकर 88 पर आ गई हैं। 89 प्रतिशत से ज्यादा डिलीवरी अब अस्पतालों में हो रही हैं। लेकिन क्या एक मां मानसिक रूप से भी उतनी ही स्वस्थ हैं, जितनी शारीरिक रूप से? नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, अमेरिका के मुताबिक भारत में लगभग 22 फीसदी महिलाएं गर्भावस्था के दौरान या बच्चे के जन्म के बाद गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि मां की शारीरिक सुरक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना उतना ही जरूरी है। ‘नेशनल सेफ मदरहुड डे’ (11 अप्रैल) पर यह समझना जरूरी है कि सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ बच्चे के जन्म के साथ ही मां की मानसिक सेहत से भी जुड़ा है। आइए मेडिकल तथ्यों के नजरिए से समझते हैं मातृत्व का वह अनदेखा पहलू, जिस पर समाज आज भी बात नहीं करता। जानते हैं महिलाओं की मानसिक स्थिति से जुड़े खतरों के 4 संकेत और उनसे निपटने के उपाय भास्कर एक्सपर्ट तीन विशेषज्ञों से जानें सेफ मदरहुड के सही मायने, डॉ. सुनीला खंडेलवाल(स्त्री और प्रसूती रोग विशेषज्ञ), डॉ. स्मिता वैद कंसल्टेंट गाइनी और रोबोटिक सर्जन, डॉ. स्तुति कैलिफोर्निया (बर्कले यूनि. में एसोसिएट प्रोफेसर) 1. पॉजिटिव टॉक्सिसिटी – 23 फीसदी माताएं प्रभावित प्रेगनेंसी में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रॉन का उतार-चढ़ाव दिमाग पर असर डालता है, जिससे और एंग्जायटी बढ़ती है। जबरदस्ती खुश रहने के दबाव में नई मां असली भावनाएं दबा देती हैं, जिससे चिंता, थकान, इमोशनल डिस्कनेक्ट महसूस होता है। 14-23% महिलाएं क्लीनिकल एंग्जायटी से प्रभावित होती हैं। एक्सपर्ट टिप – गर्भवती महिला पर ‘हर वक्त खुश रहने’ का दबाव न डालें। एंग्जायटी ज्यादा हो तो गाइनेकोलॉजिस्ट के साथ मनोवैज्ञानिक की भी मदद लें। 2. टोकोफोबिया – 14 से 16.5% महिलाओं में डिलीवरी का डर करीब 14-16% महिलाएं टोकोफोबिया यानी डिलीवरी के डर से जूझती हैं। यह डर पिछले खराब अनुभव या लेबर पेन के कारण हो सकता है। ऐसे में कई महिलाएं सी-सेक्शन चुनती हैं। परिवार का कम सपोर्ट, अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी, लड़का होने का दबाव और 35 साल की उम्र के बाद तनाव और बढ़ जाता है। एक्सपर्ट टिप – डॉक्टर से डिलीवरी की प्रक्रिया और पेन मैनेजमेंट पर बात करें। एंटीनेटल क्लासेस, काउंसलिंग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज से डर कम किया जा सकता है। 3. ब्रेस्टफीडिंग न करा पाना – मां के लिए तनाव का बड़ा कारण शिशु के लिए पहले 6 महीने केवल स्तनपान की सलाह दी जाती है। लेकिन डिलीवरी के बाद कई महिलाएं चाहकर भी ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा पाती। इसके पीछे अच्छी डाइट की कमी, पीसीओएस, थायरॉयड, डायबिटीज, ब्रेस्ट सर्जरी, प्रोलैक्टिन हॉर्मोन की कमी, तनाव, डिलीवरी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग जैसे मेडिकल कारण हो सकते हैं। साथ ही डिलीवरी के बाद कम पानी पीना भी इसकी एक बड़ी वजह है। एक्सपर्ट टिप – ब्रेस्टीफीडिंग में दिक्कत हो, तो फॉर्मूला फीडिंग एक विकल्प है। बस, बच्चा भूखा नहीं रहना चाहिए। इसकी मात्रा और देने का तरीका पीडियाट्रिशियन से डिस्कस कर लें। 4. प्रेगनेंसी के बाद डिप्रेशन – नवजात से दूरी और अलगाव डिलीवरी के बाद करीब 70-80% मांएं मानसिक अस्थिरता से गुजरती हैं, जिसे ‘बेबी ब्लूज’ कहा जाता है। इसमें शुरुआती 2-3 दिनों तक थकान, नींद की कमी और चिड़चिड़ापन रहता है, जो आमतौर पर 1-2 हफ्तों में ठीक हो जाता है। लेकिन अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन (PPD) हो सकता है, जो करीब 15-20% महिलाओं में देखा जाता है। इसमें उदासी, तनाव, नींद और भूख में बदलाव, बच्चे से दूरी, परिवार और दोस्तों से अलगाव जैसे लक्षण होते हैं। गंभीर स्थिति में मां खुद को या बच्चे को नुकसान भी पहुंचा सकती है। एक्सपर्ट के अनुसार, अमेरिका में PPD के मामले ज्यादा देखे जाते हैं, क्योंकि वहां न्यूक्लियर फैमिली, देर से शादी और देर से मां बनने का ट्रेंड है। PPD के लक्षण अक्सर 6-8 हफ्तों बाद सामने आते हैं, जिनका इलाज काउंसलिंग, दवाइयों और बॉडी-माइंड थेरेपी से किया जाता है। एक्सपर्ट टिप – इसका सबसे बड़ा फैक्टर सोशल सपोर्ट की कमी है। इसलिए मां के लिए परिवार का साथ बहुत जरूरी है। अगर इनमें से कोई लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

बेटी के निकाह का कार्ड बांटकर लौट रहा था दंपती:खंडवा में बाइक से टकराया जंगली जानवर, पत्नी की मौत; 13 अप्रैल को होनी थी शादी

बेटी के निकाह का कार्ड बांटकर लौट रहा था दंपती:खंडवा में बाइक से टकराया जंगली जानवर, पत्नी की मौत; 13 अप्रैल को होनी थी शादी

खंडवा जिले में शुक्रवार को बेटी के निकाह का निमंत्रण कार्ड बांटकर लौट रहे दंपती की बाइक से एक जंगली जानवर टकरा गया, जिससे 40 वर्षीय पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई और 45 वर्षीय पति गंभीर रूप से घायल हो गया। वर्तमान में घायल पति का जिला अस्पताल में इलाज जारी है, वहीं पुलिस ने शनिवार को जिला अस्पताल में पत्नी के शव का पोस्टमार्टम कराया है और हादसे के बाद परिवार ने 13 अप्रैल को होने वाली शादी को फिलहाल निरस्त कर दिया है। शेखपुरा से लौटते समय रास्ते में हुआ हादसा पुलिस के अनुसार, चारखेड़ा निवासी अयूब खान (45) अपनी पत्नी बिलकिस (40) के साथ शुक्रवार को रिश्तेदारों के घर शेखपुरा क्षेत्र में बेटी के निकाह का कार्ड देने गए थे। वापसी के दौरान अचानक सड़क पार कर रहे एक जंगली जानवर से उनकी बाइक टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े। हादसे में बिलकिस के सिर में गंभीर चोट आई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं अयूब खान घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 13 को था बेटी का निकाह, परिवार ने निरस्त की तारीख परिजनों के मुताबिक, अयूब खान की बेटी का निकाह 13 अप्रैल को तय था और घर में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। पूरा परिवार निमंत्रण बांटने में जुटा हुआ था, लेकिन इस हादसे ने सारी खुशियों को गम में बदल दिया। रिश्तेदार शेख करीम ने बताया कि इस दुखद घटना के बाद परिवार ने फिलहाल निकाह की तारीख को निरस्त कर दिया है। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।

मधुबाला की बायोपिक में धुरंधर फेम एक्ट्रेस की चर्चा:दावा- लीड रोल में सारा अर्जुन नजर आ सकती हैं, आधिकारिक घोषणा बाकी

मधुबाला की बायोपिक में धुरंधर फेम एक्ट्रेस की चर्चा:दावा- लीड रोल में सारा अर्जुन नजर आ सकती हैं, आधिकारिक घोषणा बाकी

हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अदाकाराओं में गिनी जाने वाली मधुबाला की बायोपिक को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। फिल्म में उनकी भूमिका कौन निभाएगा, इसे लेकर नए नाम सामने आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीड रोल के लिए सारा अर्जुन का नाम सबसे आगे है। फिल्म को संजय लीला भंसाली प्रोड्यूस करेंगे, जबकि निर्देशन जसमीत के रीन करेंगे। सारा अर्जुन इन दिनों अपनी फिल्म धुरंधर को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है। इसी के बाद उनके करियर को नया मोड़ मिला और अब उन्हें मधुबाला जैसी आइकॉनिक शख्सियत निभाने का मौका मिल सकता है। टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म फिलहाल प्री-प्रोडक्शन स्टेज में है। 2026 के आखिर तक इसकी शूटिंग शुरू हो सकती है। फिल्म 50-60 के दशक के गोल्डन एरा को बड़े स्तर पर दिखाएगी। इसमें मधुबाला की फिल्मों के साथ उनकी निजी जिंदगी, खासकर रिश्ते, संघर्ष और कम उम्र में हुई मौत को विस्तार से दिखाया जाएगा। इस किरदार के लिए सारा अर्जुन को खास तैयारी करनी होगी। वह लुक टेस्ट, डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज पर काम करेंगी, ताकि मधुबाला की ग्रेस और स्क्रीन प्रेजेंस को सही तरीके से पर्दे पर उतार सकें। मधुबाला की बायोपिक के लिए पिछले कुछ समय में कई बड़ी एक्ट्रेसेस के नाम सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कियारा आडवाणी का नाम जोड़ा गया था। हाल ही में अनीत पड्डा को लेकर भी खबरें आई थीं कि वह इस रोल के लिए चुनी जा सकती हैं। अब ताजा रिपोर्ट्स में सारा अर्जुन का नाम सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर सामने आया है। अगर कास्टिंग फाइनल होती है, तो यह उनके करियर का बड़ा ब्रेक साबित हो सकता है। दर्शकों को हिंदी सिनेमा के ग्लैमरस और रहस्यमयी दौर को करीब से देखने का मौका मिलेगा। हालांकि, आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।

सिंगरौली में पत्रकार विकास दुबे छेड़छाड़ मामले में गिरफ्तार:गिरफ्तारी से पहले मारपीट का आरोप, अज्ञात पर केस दर्ज

सिंगरौली में पत्रकार विकास दुबे छेड़छाड़ मामले में गिरफ्तार:गिरफ्तारी से पहले मारपीट का आरोप, अज्ञात पर केस दर्ज

सिंगरौली जिले में भाजपा की एक महिला पदाधिकारी से छेड़छाड़ और मानसिक प्रताड़ना के मामले में नया मोड़ आया है। विंध्यनगर थाना पुलिस ने इस मामले में आरोपी पत्रकार विकास दुबे को बीती रात गिरफ्तार कर लिया। महिला पदाधिकारी की शिकायत पर विकास दुबे के खिलाफ पहले ही गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया। गिरफ्तारी से पहले पत्रकार विकास दुबे ने खुद को पीड़ित बताया। उन्होंने दावा किया कि तीन अज्ञात लोगों ने उनके साथ मारपीट की है। दुबे ने अपने शरीर पर चोट के निशान भी दिखाए और आरोप लगाया कि यह हमला महिला नेत्री की साजिश का हिस्सा था। मारपीट मामले की जांच शुरू विंध्यनगर थाना प्रभारी अर्चना द्विवेदी ने बताया कि महिला नेत्री द्वारा दर्ज कराए गए प्रकरण में गंभीर धाराएं लागू होने के कारण आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि विकास दुबे की मारपीट की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट का आरोप महिला पदाधिकारी ने आरोप लगाया था कि विकास दुबे पिछले एक महीने से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट कर मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक दिन दुबे ने कथित तौर पर अश्लील हरकत की थी। फिलहाल, पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है। एक तरफ छेड़छाड़ और प्रताड़ना के आरोपों की पड़ताल की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पत्रकार विकास दुबे के साथ हुई मारपीट के मामले में भी सच्चाई सामने लाने के प्रयास जारी हैं। अपनी चोट दिखाता घायल विकास

थर्मस में रखी चाय कितनी देर तक सही रहती है, जानिये इसको कब तक पीना है फायदेमंद?

हौसलों की उड़ान से बंद दरवाजे से बनाया रास्ता, अब मिसाल बनी यह 'सफल' पत्नी

सुबह के समय चाय बनाकर थर्मस में रख लेना आजकल काफी आम बात हो गई है. ऑफिस, यात्रा या लंबे समय तक गर्म चाय चाहिए हो, तो थर्मस बहुत ही काम आता है. लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि थर्मस में रखी चाय कितनी देर तक पीने लायक रहती है और क्या लंबे समय तक रखी चाय नुकसानदायक भी हो सकती है. आइए इस बात को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं. थर्मस में चाय कितनी देर तक सही रहती है?अगर चाय को ताज़ा बनाकर अच्छे क्वालिटी वाले साफ थर्मस में रखा गया है, तो: 2 से 4 घंटे तक चाय स्वाद और सेहत, दोनों के लिहाज से ठीक रहती है.6 घंटे तक चाय सुरक्षित तो रहती है, लेकिन उसका स्वाद, खुशबू और ताजगी कम हो सकती है.8 घंटे या उससे ज्यादा समय तक रखी चाय पीने की सलाह नहीं दी जाती, खासकर अगर उसमें दूध मिला हो.क्योंकि दूध वाली चाय में बैक्टीरिया जल्दी पनप सकते हैं, खासकर अगर थर्मस पूरी तरह साफ न हो. थर्मस में चाय रखने के फायदे 1. लंबे समय तक गर्म रहती हैथर्मस की इंसुलेशन तकनीक चाय को कई घंटों तक गर्म बनाए रखती है. 2. समय की बचतबार‑बार चाय बनाने की जरूरत नहीं पड़ती, खासकर ऑफिस या यात्रा के दौरान. 3. ईंधन की बचतगैस या बिजली की खपत कम होती है. 4. बाहर की चाय से बचावघर की बनी चाय ज्यादा साफ‑सुथरी और सुरक्षित होती है. थर्मस में चाय रखने के नुकसान 1. स्वाद और खुशबू में कमीलंबे समय तक रखने से चाय बासी‑सी लगने लगती है. 2. सेहत को नुकसानदूध वाली चाय देर तक रखने से उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे गैस, एसिडिटी या फूड पॉइजनिंग का खतरा होता है. 3. पोषक तत्वों में कमीचाय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स समय के साथ कम हो जाते हैं. 4. थर्मस साफ न हो तो खतराअच्छी तरह साफ न किया गया थर्मस पुराने बैक्टीरिया को बढ़ावा दे सकता है. सुरक्षित रखने के जरूरी टिप्स हमेशा उबाल कर ताज़ी चाय ही थर्मस में डालें.थर्मस को रोज़ाना अच्छी तरह धोकर सुखाएं.कोशिश करें कि 4 घंटे के अंदर चाय खत्म कर लें.अगर ज्यादा देर के लिए रखना हो, तो बिना दूध की चाय बेहतर रहती है. थर्मस में चाय रखना सुविधाजनक जरूर है, लेकिन इसे ज्यादा देर तक रखना सही नहीं. सेहत और स्वाद दोनों को ध्यान में रखते हुए सीमित समय में ही थर्मस वाली चाय का सेवन करना बेहतर होता है.

3,000 रुपये बनाम 1,500 रुपये का कल्याण युद्ध: क्या बीजेपी बंगाल में ममता दीदी को ‘आउट’ करने की कोशिश कर रही है? | चुनाव समाचार

PBKS Vs SRH Live: Follow latest score updates from IPL 2026 match between Punjab Kings and Sunrisers Hyderabad. (PTI Photo)

आखरी अपडेट:11 अप्रैल, 2026, 13:48 IST भाजपा का बंगाल घोषणापत्र एक स्पष्ट संकेत है कि विचारधारा माहौल तय कर सकती है, लेकिन चुनाव रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था पर जीते जा रहे हैं 2026 के घोषणापत्र से पता चलता है कि भाजपा अब ममता बनर्जी की कल्याण राजनीति को बदलने की कोशिश नहीं कर रही है; वह इसे दोहराने और उससे आगे निकलने की कोशिश कर रहा है। (पीटीआई) सभी सुर्खियाँ बटोरने वाले वादों – 60 दिनों के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन, और अवैध आप्रवासन पर परिचित “पता लगाने, हटाने, निर्वासित करने” की पिच के लिए – भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नवीनतम पश्चिम बंगाल घोषणापत्र कहीं अधिक परिणामी बदलाव का खुलासा करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी बयानबाजी के पीछे एक शांत लेकिन तीव्र पुनर्गणना निहित है: भाजपा अब लंबे समय से ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रभुत्व वाले कल्याण युद्धक्षेत्र में कदम रख रही है। 2021 का विधानसभा चुनाव, कई मायनों में, बंगाल में भाजपा के लिए एक बड़ा संकेत था, लेकिन साथ ही यह उसकी सीमाओं का एक सबक भी था। पार्टी ने पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा और ध्रुवीकरण जैसे विषयों से भरपूर अभियान चलाया। हालांकि यह एक महत्वपूर्ण वोट शेयर को मजबूत करने और केवल दो सीटों से 77 तक पहुंचने में सफल रही, लेकिन यह बनर्जी को हटाने में विफल रही, जिनकी राजनीतिक प्रवृत्ति अधिक तीव्र साबित हुई। उन्होंने अपने अभियान को मूर्त कल्याण वितरण में शामिल किया – नकद हस्तांतरण, सब्सिडी वाली योजनाएं, और प्रत्यक्ष लाभ जो ग्रामीण और शहरी बंगाल के घरों तक पहुंचे। 2026 के घोषणापत्र की ओर तेजी से आगे बढ़ें, और ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा ने उस सबक को आत्मसात कर लिया है। पार्टी ने अतिरिक्त वित्तीय सहायता कार्यक्रमों पर जोर देते हुए कम से कम चार मौजूदा टीएमसी योजनाओं को मात देने का वादा किया है। यह नीतिगत नकल से कहीं अधिक है। बीजेपी का वादा बनाम टीएमसी का ऑफर इस बार ऐसा लगता है कि बंगाल की राजनीतिक लड़ाई कल्याण पर सीधी लड़ाई है। बनर्जी के तहत टीएमसी के कल्याण मॉडल के केंद्र में लक्ष्मीर भंडार योजना है। 2021 में लॉन्च किया गया, यह महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करता है – शुरुआत में 500 रुपये, अब श्रेणी के आधार पर 1,000 रुपये से 1,200 रुपये तक की वृद्धि हुई है। जवाब में, भाजपा ने अधिक आक्रामक नकद हस्तांतरण मॉडल का वादा किया है, जो मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग और गरीब महिलाओं को प्रति माह 3,000 रुपये की पेशकश करेगा, इसे वित्तीय स्वतंत्रता के लिए एक उपकरण के रूप में पेश किया जाएगा। यह प्रतियोगिता बेरोजगार युवाओं तक भी फैली हुई है। टीएमसी की युबा साथी योजना 21 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के बेरोजगार युवाओं को प्रति माह 1,500 रुपये प्रदान करती है। भाजपा ने दोगुनी राशि – 3,000 रुपये मासिक भत्ता, पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार सृजन के व्यापक वादे के साथ, रोजगार आश्वासन के साथ कल्याण को मिश्रित करने का प्रयास किया है। स्वास्थ्य सेवा में, टीएमसी का स्वास्थ्य साथी प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का बीमा कवरेज प्रदान करता है। भाजपा ने लाभार्थियों को केंद्रीय योजना आयुष्मान भारत के साथ एकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि कवरेज सीमा को 5 लाख रुपये से अधिक बढ़ाया है, जो विस्तार और केंद्रीय संरेखण दोनों का संकेत है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत के साथ, लाभार्थी केवल पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं, जैसा कि सत्य साथी के मामले में है। किसान भी इस कल्याणकारी द्वंद्व के केंद्र में हैं। टीएमसी के कृषक बंधु के तहत किसानों को 4,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की वार्षिक सहायता मिलती है। भाजपा ने केंद्र की पीएम-किसान योजना को अतिरिक्त राज्य समर्थन के साथ जोड़कर इसे बढ़ाने का वादा किया है, जिससे कुल सहायता लगभग 9,000 रुपये सालाना हो जाएगी। भाजपा के अनुसार, नई प्रणाली के तहत वर्गीकरण में कोई भेदभाव नहीं होगा, जहां भाजपा के सत्ता में आने पर प्रत्येक किसान को समान राशि मिलेगी। यह बदलाव क्यों मायने रखता है? यह बंगाल में एक राजनीतिक सच्चाई की मौन स्वीकृति है- कल्याण सिर्फ शासन नहीं है, यह चुनावी मुद्रा है। पिछले कुछ वर्षों में बनर्जी ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जहां लक्ष्मीर भंडार और कन्याश्री जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य की उपस्थिति सीधे नागरिकों के जीवन में महसूस की जाती है। ये मुफ़्त चीज़ों से कहीं अधिक हैं; वे राज्य समर्थन के मासिक अनुस्मारक हैं जो जीवन को छूते हैं। भाजपा ने 2021 के चुनाव में इस मॉडल की भावनात्मक और आर्थिक ताकत को कम आंककर गलती की। नवंबर 2025 में भी, भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें बंगाल की मुख्यमंत्री की खैरात की राजनीति की आलोचना की गई थी और दावा किया गया था कि उनकी मुफ्त चीज़ें “ऋण का जाल है, उपहार नहीं”। हालाँकि, बीजेपी को जल्द ही एहसास हुआ कि ग्रामीण बंगाल, विशेष रूप से दक्षिण बंगाल के ग्रामीण हिस्से, पार्टी के लिए तब तक निषिद्ध क्षेत्र बने रहेंगे जब तक कि वे परिवारों को टीएमसी के प्रति वफादार बनाने वाली खैरात का स्वागत नहीं करते। इसके विपरीत, 2026 के घोषणापत्र से पता चलता है कि भाजपा अब बनर्जी की कल्याण राजनीति को बदलने की कोशिश नहीं कर रही है; वह इसे दोहराने और उससे आगे निकलने की कोशिश कर रहा है। टीएमसी को उसके ही खेल में हराना? इससे एक गहरा सवाल उठता है: क्या बीजेपी टीएमसी को मात दे सकती है? यहां दो जोखिम हैं. पहला, विश्वसनीयता. कल्याणकारी राजनीति का मतलब सिर्फ योजनाओं की घोषणा करना नहीं है; यह डिलीवरी में विश्वास के बारे में है। बनर्जी की सरकार को सत्ता में रहने का लाभ मिलता है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी चाहे जो भी वादा करें, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने वादे तुरंत पूरे कर सकते हैं. किसी भी सत्तारूढ़ दल के लिए यह हमेशा एक अतिरिक्त लाभ होता है। दूसरा, भेदभाव. यदि दोनों पार्टियां समान लाभ का वादा कर रही हैं, तो मुकाबला विचारधारा से हटकर कार्यान्वयन और व्यक्तित्व पर केंद्रित हो जाता है। ऐसे परिदृश्य में, बनर्जी की

Diabetes Symptoms : शरीर में दिख रहे हैं ये 7 बदलाव? हो सकता है आप डायबिटीज के शिकार हों, आज ही कराएं जांच!

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Last Updated:April 11, 2026, 13:17 IST Diabetes Symptoms : आपका शरीर जो संकेत भेजता है, उन्हें सही समय पर पहचानना आपके स्वास्थ्य संसाधनों की सबसे कुशल योजना का एक अभिन्न अंग है. मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसके शुरुआती लक्षणों को लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और उन्हें सामान्य थकान समझ लेते हैं. लेकिन लिए सही समय पर इसकी पहचान करना ही सबसे सटीक तरीका है. पहले डायबिटीज को उम्र बढ़ने के बाद होने वाली बीमारी माना जाता था. लेकिन अब बदलती लाइफस्टाइल, तनाव और खाने की आदतों की वजह से ये समस्या कम उम्र में भी बढ़ रही है. खास बात ये है कि डायबिटीज अचानक नहीं आती. ये प्री-डायबिटीज स्टेज से धीरे-धीरे बढ़ती है. अगर इस दौरान शरीर के दिए संकेतों को पहचान लिया जाए तो हालात को कंट्रोल किया जा सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि खासकर ये 7 संकेत पहले ही बता देते हैं कि आपको डायबिटीज हो सकती है. घाव धीरे-धीरे भरना जब खून में ग्लूकोज का स्तर ज्यादा होता है तो रक्त नलिकाएं कमजोर हो जाती हैं. इससे खून का संचार सही से नहीं होता. इसी वजह से छोटे घाव भी सामान्य से ज्यादा समय लेते हैं ठीक होने में. इसे शरीर में शुगर लेवल बढ़ने का संकेत मानना चाहिए. बार-बार पेशाब आना. द इकनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, जब खून में शुगर ज्यादा हो जाती है तो किडनी अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है. इससे बार-बार पेशाब आती है, खासकर रात में कई बार उठना पड़ता है. ये शरीर के शुगर को कंट्रोल न कर पाने का संकेत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर). Add News18 as Preferred Source on Google इन्फेक्शन ज्यादा होना हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर में बैक्टीरिया और यीस्ट बढ़ जाते हैं. इससे बार-बार सर्दी, यूरिन इन्फेक्शन (UTI), स्किन प्रॉब्लम्स और मसूड़ों की दिक्कतें हो सकती हैं. अगर आपकी इम्युनिटी कम हो रही है तो ध्यान देना चाहिए. बहुत ज्यादा प्यास लगना बार-बार पेशाब जाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इससे डिहाइड्रेशन होता है और हमेशा प्यास लगती रहती है. बार-बार पानी पीने का मन करना भी खून में शुगर बढ़ने का संकेत है. लगातार थकान महसूस होना जब शरीर ग्लूकोज को एनर्जी में नहीं बदल पाता तब थकान आती है. अगर अच्छी नींद लेने के बाद भी आपको कमजोरी या थकावट महसूस हो रही है, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस या प्री-डायबिटीज का संकेत मानना चाहिए. वजन में अचानक बदलाव अगर हमारी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं है फिर भी अचानक वजन बढ़ना या कम होना हो रहा है तो यह चिंता की बात हो सकती है. जब शरीर ग्लूकोज को सही से नहीं ले पाता तो मांसपेशियां और फैट टूटने लगते हैं. इससे वजन में बहुत ज्यादा बदलाव आ सकते हैं. दृष्टि धुंधली होना. ज्यादा ब्लड शुगर आंखों के लेंस पर असर डालता है जिससे नजर धुंधली हो सकती है. शुरू में ये थोड़े समय के लिए हो सकता है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी गंभीर आंखों की समस्या हो सकती है. आखिर में याद रखने वाली बात यह है कि इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि आपको जरूर डायबिटीज है. लेकिन ये शुरुआती चेतावनी संकेत हैं. इसी समय ब्लड शुगर टेस्ट करवाना, हेल्दी खाना खाना, एक्सरसाइज करना और तनाव कम करना बहुत जरूरी है. First Published : April 11, 2026, 13:17 IST

एम्स भोपाल में चूहों का खतरा:AC डक्ट से निकलकर वार्ड-एनआईसीयू तक पहुंचे, 20 नवजात भर्ती; स्टाफ बोला- एमवाय जैसी घटना हुई तो जिम्मेदार कौन

एम्स भोपाल में चूहों का खतरा:AC डक्ट से निकलकर वार्ड-एनआईसीयू तक पहुंचे, 20 नवजात भर्ती; स्टाफ बोला- एमवाय जैसी घटना हुई तो जिम्मेदार कौन

एम्स भोपाल में इन दिनों चूहों की बढ़ती मौजूदगी ने मरीजों और स्टाफ दोनों की चिंता बढ़ा दी है। सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम के डक्ट में पनपे चूहे अब वार्ड, कॉरिडोर और यहां तक कि एनआईसीयू तक पहुंच गए हैं। बीते तीन दिनों में 25 से ज्यादा मृत चूहे अलग-अलग क्षेत्रों में मिले हैं। यह स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि बीते साल एमवाय अस्पताल इंदौर में चूहों के कारण दो नवजातों की मौत हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे। एम्स भोपाल में सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम लगा हुआ है, जिसके डक्ट में चूहों की भरमार पाई गई है। जानकारी के अनुसार, अब तक पेस्ट कंट्रोल केवल वार्ड और निचले हिस्सों तक सीमित था, जिससे एसी डक्ट में चूहों की संख्या लगातार बढ़ती रही। अप्रैल की शुरुआत में जब एसी मेंटेनेंस के दौरान रियरिंग टीम ने जांच की, तो डक्ट के अंदर बड़ी संख्या में चूहे पाए गए। इसी के बाद प्रबंधन ने वहां पेस्ट कंट्रोल कराने का फैसला लिया। पेस्ट कंट्रोल के बाद नई समस्या तीन दिन तक चले पेस्ट कंट्रोल अभियान के बाद अब चूहे डक्ट से बाहर निकलकर वार्ड और कॉरिडोर में आने लगे हैं। बीते तीन दिनों में सफाई कर्मचारियों को 25 से ज्यादा मृत चूहे विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में मिले हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है और अस्पताल का वातावरण प्रभावित हो रहा है। एम्स के एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) में इस समय करीब 20 नवजात भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से यहां भी चूहों की आवाजाही देखी जा रही है। शिशु रोग विभाग के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चूहे एनआईसीयू में घूमते नजर आते हैं और कुछ समय बाद मर जाते हैं। इससे नवजातों को काटने का खतरा तो है ही, साथ ही संक्रमण का जोखिम भी बहुत अधिक है। यदि यहां कोई घटना होती है तो एमवाय अस्पताल की तहर जिम्मेदार डॉक्टरों और स्टाफ को माना जाएगा। जबकि इस स्थिति को लेकर प्रबंधन को कई बार अवगत कराया गया है। संक्रमण का सबसे बड़ा खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, चूहों के शरीर, बाल, पैरों और मल-मूत्र में कई खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं। ये बैक्टीरिया गंभीर संक्रमण फैला सकते हैं। एनआईसीयू में भर्ती बच्चे पहले से ही कमजोर होते हैं, ऐसे में मामूली संक्रमण भी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। मामले में एम्स प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो पेस्ट कंट्रोल के दौरान का है। उनके अनुसार, पेस्ट कंट्रोल के समय चूहे दवा के असर से इधर-उधर भागते हैं और कुछ समय बाद मर जाते हैं। प्रबंधन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया प्रशिक्षित कर्मियों की निगरानी में की जा रही है। मृत चूहों को तुरंत हटाया जाता है और संबंधित क्षेत्र को वैज्ञानिक तरीके से साफ किया जाता है। इंदौर में दो मौतें हुई थीं 31 अगस्त-1 सितंबर 2025 की रात इंदौर के एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में दो नवजातों को चूहों ने काट लिया था, जिनकी बाद में मौत हो गई थी। हाई कोर्ट तक मामला पहुंचा। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना और एक डॉक्टर सहित 8 लोगों को सस्पेंड किया गया था।

इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे नीतीश:7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहा सामान; लालू के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार

इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे नीतीश:7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहा सामान; लालू के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे हैं। 1 अणे मार्ग से सामान 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहा है। मुख्यमंत्री आवास से ट्रैक्टर में सामान बाहर ले जाया जा रहा है। नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद की शपथ ली है। सूत्रों की माने तो नीतीश 14 अप्रैल को CM पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार बन सकती है। CM पद से हटने के बाद नीतीश कुमार लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। वह दिल्ली तो जा रहे हैं, लेकिन बिहार में अपना ठिकाना नहीं छोड़ेंगे। 7 सर्कुलर रोड आवास का इस्तेमाल अभी नीतीश कुमार ही कर रहे हैं। इसे CM कार्यालय के तौर पर यूज किया जा रहा है। नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले को बनावाया था। ये इतना मजबूत है कि भूकंप के झटके झेल सके। इसके लॉन में कोलकाता से मंगाकर घास लगाई गई है। नीतीश कुमार का 7 सर्कुलर रोड वाले आवास से क्या नाता है? इस बंगले की क्या खासियत है? पढ़िए रिपोर्ट…। नीतीश कुमार को पसंद है 7 सर्कुलर रोड बंगला नीतीश कुमार को 7 सर्कुलर रोड बंगला पसंद है। लोकसभा चुनाव 2014 हारने के बाद उन्होंने CM पद छोड़ दिया था। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद रहने के लिए 7 सर्कुलर आ गए थे। इसी बंगले में रहते हुए नीतीश ने जीतन राम से मुख्यमंत्री की कुर्सी वापस ले ली थी। विधानसभा 2015 में जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री बने थे। CM बनने के बाद नीतीश एक अणे मार्ग गए, लेकिन 7 सर्कुलर बंगला अपने पास बनाए रखा। विपक्ष ने 2-2 बंगला रखने का आरोप लगाया तो इसे मुख्य सचिव के नाम अलॉट किया गया। नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले का भूकंप रोधी निर्माण कराया था। लालू यादव के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहे हैं। अब वे लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। यहां से राबड़ी आवास बस दो घर बाद है। दोनों बंगलों के बीच की दूरी करीब 200 मीटर होगी। दोनों घर सर्कुलर रोड के दक्षिण तरफ है। 7 सर्कुलर रोड वाले बंगले की खास बातें नंबर 7 से है नीतीश कुमार को प्रेम नीतीश कुमार अपने लिए नंबर 7 को लकी मानते हैं। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री बने थे तब उनके फोन नंबर का अंतिम अंक 7 था। नीतीश जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्हें जो गाड़ी मिली थी उसका नंबर 777 था। नीतीश ने 1977 में राजनीति शुरू की थी। 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को 7 निश्चय नाम दिया। अभी बिहार सरकार 7 निश्चय पार्ट 3 पर काम कर रही है। 19 वर्षों से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है 1 अणे मार्ग नीतीश अभी सीएम आवास एक अणे मार्ग में रह रहे हैं। यह घर लगभग 19 वर्षों से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है। जहां से नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को दिशा दी। अब राज्यसभा जाने के बाद उनका 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होना एक तरह से बिहार की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत माना जा रहा है।