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एम्स भोपाल में चूहों का खतरा:AC डक्ट से निकलकर वार्ड-एनआईसीयू तक पहुंचे, 20 नवजात भर्ती; स्टाफ बोला- एमवाय जैसी घटना हुई तो जिम्मेदार कौन

एम्स भोपाल में चूहों का खतरा:AC डक्ट से निकलकर वार्ड-एनआईसीयू तक पहुंचे, 20 नवजात भर्ती; स्टाफ बोला- एमवाय जैसी घटना हुई तो जिम्मेदार कौन

एम्स भोपाल में इन दिनों चूहों की बढ़ती मौजूदगी ने मरीजों और स्टाफ दोनों की चिंता बढ़ा दी है। सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम के डक्ट में पनपे चूहे अब वार्ड, कॉरिडोर और यहां तक कि एनआईसीयू तक पहुंच गए हैं। बीते तीन दिनों में 25 से ज्यादा मृत चूहे अलग-अलग क्षेत्रों में मिले हैं। यह स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि बीते साल एमवाय अस्पताल इंदौर में चूहों के कारण दो नवजातों की मौत हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे। एम्स भोपाल में सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम लगा हुआ है, जिसके डक्ट में चूहों की भरमार पाई गई है। जानकारी के अनुसार, अब तक पेस्ट कंट्रोल केवल वार्ड और निचले हिस्सों तक सीमित था, जिससे एसी डक्ट में चूहों की संख्या लगातार बढ़ती रही। अप्रैल की शुरुआत में जब एसी मेंटेनेंस के दौरान रियरिंग टीम ने जांच की, तो डक्ट के अंदर बड़ी संख्या में चूहे पाए गए। इसी के बाद प्रबंधन ने वहां पेस्ट कंट्रोल कराने का फैसला लिया। पेस्ट कंट्रोल के बाद नई समस्या तीन दिन तक चले पेस्ट कंट्रोल अभियान के बाद अब चूहे डक्ट से बाहर निकलकर वार्ड और कॉरिडोर में आने लगे हैं। बीते तीन दिनों में सफाई कर्मचारियों को 25 से ज्यादा मृत चूहे विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में मिले हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है और अस्पताल का वातावरण प्रभावित हो रहा है। एम्स के एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) में इस समय करीब 20 नवजात भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से यहां भी चूहों की आवाजाही देखी जा रही है। शिशु रोग विभाग के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चूहे एनआईसीयू में घूमते नजर आते हैं और कुछ समय बाद मर जाते हैं। इससे नवजातों को काटने का खतरा तो है ही, साथ ही संक्रमण का जोखिम भी बहुत अधिक है। यदि यहां कोई घटना होती है तो एमवाय अस्पताल की तहर जिम्मेदार डॉक्टरों और स्टाफ को माना जाएगा। जबकि इस स्थिति को लेकर प्रबंधन को कई बार अवगत कराया गया है। संक्रमण का सबसे बड़ा खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, चूहों के शरीर, बाल, पैरों और मल-मूत्र में कई खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं। ये बैक्टीरिया गंभीर संक्रमण फैला सकते हैं। एनआईसीयू में भर्ती बच्चे पहले से ही कमजोर होते हैं, ऐसे में मामूली संक्रमण भी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। मामले में एम्स प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो पेस्ट कंट्रोल के दौरान का है। उनके अनुसार, पेस्ट कंट्रोल के समय चूहे दवा के असर से इधर-उधर भागते हैं और कुछ समय बाद मर जाते हैं। प्रबंधन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया प्रशिक्षित कर्मियों की निगरानी में की जा रही है। मृत चूहों को तुरंत हटाया जाता है और संबंधित क्षेत्र को वैज्ञानिक तरीके से साफ किया जाता है। इंदौर में दो मौतें हुई थीं 31 अगस्त-1 सितंबर 2025 की रात इंदौर के एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में दो नवजातों को चूहों ने काट लिया था, जिनकी बाद में मौत हो गई थी। हाई कोर्ट तक मामला पहुंचा। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना और एक डॉक्टर सहित 8 लोगों को सस्पेंड किया गया था।

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