चौंकाने वाला: कन्हैया कुमार ने अहमदाबाद रैली में गुजरातियों को “घुसपैठिया” कहा | News18 अपडेट

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‘सबसे बड़ा घुसपैठिया गुजरात से आया’: असम में कन्हैया कुमार का अमित शाह पर परोक्ष हमला | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:10 अप्रैल, 2026, 14:34 IST कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (बाएं से दाएं) कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए राज्य से घुसपैठियों को बाहर निकालने के भाजपा के वादे पर निशाना साधा। कुमार ने असम के बोंगाईगांव में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “…मैंने कहा था कि हिमंत बिस्वा सरमा के साथ सबसे बड़ा घुसपैठिया गुजरात से आया है और उसे भी बाहर निकालने की जरूरत है।” यह बयान शाह की पिछली टिप्पणी के जवाब में था कि असम में घुसपैठियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें “एक-एक करके” निर्वासित किया जाएगा। उन्होंने 9 अप्रैल को असम में बराक घाटी के पत्थरकांडी में कहा था, “हमने घुसपैठियों की पहचान कर ली है; अब उन्हें एक-एक करके देश से बाहर भेजने का समय आ गया है।” बोंगाईगांव में कांग्रेस उम्मीदवार गिरीश बरुआ के लिए प्रचार कर रहे कन्हैया कुमार ने कहा कि असम के संसाधन राज्य के लोगों के हैं, इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बोंगाईगांव, असम: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार कहते हैं, “हमारे गांव और जिले के लोग बोंगाईगांव में काम करते हैं, लेकिन हम अभी भी कहते हैं कि बोंगाईगांव के संसाधन और असम की संपत्ति पहले असम के लोगों की है… जैसे गांधीजी ने अंग्रेजों से समझौता नहीं किया,… pic.twitter.com/hBAKvzEWU3– आईएएनएस (@ians_india) 10 अप्रैल 2026 “हमारे गांव और जिले के लोग बोंगाईगांव में काम करते हैं, लेकिन हम अभी भी कहते हैं कि बोंगाईगांव के संसाधन और असम की संपत्ति पहले असम के लोगों की है… जिस तरह गांधी ने अंग्रेजों के साथ समझौता नहीं किया, उसी तरह हम इस देश के संविधान को मिटने नहीं देंगे। हम इन चोरों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे…” उन्होंने कहा। असम में मतदान भारत के चुनाव आयोग के अनुसार, असम की 126 सीटों पर गुरुवार, 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ, जिसमें राज्य में 85.74 प्रतिशत का प्रभावशाली मतदान दर्ज किया गया। जहां भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करना चाहता है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन रायजोर दल और सीपीआई (एम) के साथ गठबंधन पर भरोसा करके वापसी करना चाहता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 10 अप्रैल, 2026, 14:34 IST समाचार राजनीति ‘सबसे बड़ा घुसपैठिया गुजरात से आया’: असम में कन्हैया कुमार का अमित शाह पर परोक्ष हमला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कन्हैया कुमार असम भाषण(टी)कन्हैया कुमार अमित शाह(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम घुसपैठियों की टिप्पणी(टी)कांग्रेस बनाम बीजेपी असम(टी)बोंगाईगांव चुनाव रैली(टी)असम मतदाता मतदान 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव
स्मार्टफोन की लत दिमाग को बना रहा 10 साल बूढ़ा? ‘डिजिटल डिटॉक्स’ से ब्रेन हेल्थ को ऐसे करें रीवर्स, रिसर्च में बड़ा खुलासा

Last Updated:April 10, 2026, 14:33 IST Social media addiction and brain health : शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मार्टफोन से दूरी बनाने पर दिमाग की एकाग्रता (Attention) में इतना सुधार हुआ, जो उम्र के साथ आने वाली 10 साल की गिरावट को मिटाने के बराबर था. यानी, सिर्फ 14 दिन का संयम आपके दिमाग को 10 साल तक जवां बना सकता है. न्यू मैक्सिको में भी कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के लिए मेटा पर भारी जुर्माना लगाया है. Impact of social media on memory and attention :क्या आपकी सुबह फोन की स्क्रीन से शुरू होती है और रात उसी नीली रोशनी के साथ खत्म हो जाती है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं. रिसर्च बताती है कि एक औसत इंसान दिन के 4 से 5 घंटे सिर्फ फोन पर बिता रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह लत आपके दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना रही है? विज्ञान का दावा है कि सोशल मीडिया की यह आदत आपके दिमाग को 10 साल तक पीछे धकेल सकती है. राहत की बात यह है कि इसे ‘रिवर्स’ यानी ठीक करना भी आपके ही हाथ में है. दुनियाभर की कोर्ट ले रही ऐतिहासिक फैसलेसोशल मीडिया का जाल अब इतना गहरा हो गया है कि इसे लेकर दुनिया भर की अदालतें सख्त हो गई हैं. पिछले महीने कैलिफोर्निया में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया, जहाँ टेक दिग्गज मेटा और यूट्यूब को एक युवती को करीब 50 करोड़ रुपये ($6 मिलियन) हर्जाना देने का आदेश मिला. वजह? वह इन प्लेटफॉर्म्स की इतनी बुरी तरह आदी हो गई थी कि उसका मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह बिगड़ गया. न्यू मैक्सिको में भी कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के लिए मेटा पर भारी जुर्माना लगाया है. ये फैसले साफ बताते हैं कि अब पानी सिर के ऊपर से गुजर चुका है. क्या है डिजिटल डिटॉक्स, जो लौटाएगा दिमाग की जवानी?‘PNAS नेक्सस’ द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में 467 लोगों पर रिसर्च की गई. इन लोगों ने सिर्फ दो हफ्ते के लिए अपने फोन से इंटरनेट का नाता तोड़ दिया. नतीजे चौंकाने वाले थे! शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मार्टफोन से दूरी बनाने पर दिमाग की एकाग्रता (Attention) में इतना सुधार हुआ, जो उम्र के साथ आने वाली 10 साल की गिरावट को मिटाने के बराबर था. यानी, सिर्फ 14 दिन का संयम आपके दिमाग को 10 साल तक जवां बना सकता है. फोन और कंप्यूटर के इस्तेमाल में बड़ा फर्कअध्ययन में एक दिलचस्प बात सामने आई. शोधकर्ताओं का मानना है कि हम कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल किसी काम के लिए करते हैं, लेकिन फोन का इस्तेमाल “मजबूरी और बिना सोचे-समझे” (Mindless scrolling) होता है. यही वह आदत है जो हमारे डिनर, वॉक और परिवार के साथ बिताए जाने वाले सुकून के पलों को छीन रही है. जब प्रतिभागियों ने फोन का इंटरनेट बंद किया, तो उनका ऑनलाइन समय 314 मिनट से घटकर महज 161 मिनट रह गया. मूड और नींद में जबरदस्त सुधारहार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक और स्टडी बताती है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करने से केवल एक हफ्ते के भीतर चिंता (Anxiety), अवसाद (Depression) और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं में बड़ी गिरावट आती है. अगर आप रात भर करवटें बदलते हैं या बिना वजह तनाव महसूस करते हैं, तो शायद इसकी जड़ आपके हाथ में मौजूद वह छोटा सा गैजेट ही है. बच्चों पर मंडराता खतरा और कड़े कानूनसोशल मीडिया के खतरों को देखते हुए अब कई देश सख्त कानून बना रहे हैं. अमेरिका के मैसाचुसेट्स में 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी है, वहीं इंडोनेशिया ने 16 साल से कम उम्र वालों पर इसे प्रतिबंधित कर दिया है. वैज्ञानिक अब उन लोगों की पहचान कर रहे हैं जो दूसरों से अपनी तुलना करके दुखी होते हैं या अकेलेपन को दूर करने के लिए घंटों रील स्क्रॉल करते हैं. कैसे करें शुरुआत? एक्सपर्ट की सलाहजॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कोस्टाडिन कुश्लेव का कहना है कि आपको हमेशा के लिए फोन छोड़ने की जरूरत नहीं है. बस कुछ दिनों का ‘आंशिक डिटॉक्स’ (Partial Detox) भी जादू की तरह काम करता है. सप्ताह में एक दिन ‘नो फोन डे’ रखें या सोने से 2 घंटे पहले फोन को खुद से दूर कर दें. आपका दिमाग खुद-ब-खुद हील होने लगेगा. डिजिटल दुनिया की चकाचौंध में हम अपनी दिमागी शांति खो रहे हैं. विज्ञान ने रास्ता दिखा दिया है- फैसला अब आपका है कि आप फोन को खुद पर हावी होने देंगे या अपने दिमाग की सेहत को चुनेंगे. (यह लेख पीनास नेक्सस (PNAS Nexus), हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की स्टडी और द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर आधारित है.) About the Author Pranaty Tiwary मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 10, 2026, 14:31 IST
ओलावृष्टि-बारिश से दतिया के 42 गांवों की गेहूं फसल बर्बाद:सेवढ़ा क्षेत्र में जलभराव से सड़ी फसल, मुआवजे के इंतजार में किसान

दतिया की सेवढ़ा तहसील क्षेत्र में बीते सप्ताह हुई ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। 42 गांवों में गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हालत यह है कि खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है और खड़ी फसल सड़कर नष्ट हो रही है। किसान न तो फसल काट पा रहे हैं और न ही उसमें से एक दाना निकालने की उम्मीद बची है। दैनिक भास्कर टीम ने आलमपुर बुजुर्ग, जरौली, दिगुवा सहित कई गांवों का दौरा किया। जहां किसानों ने बताया कि 7 दिन बीत जाने के बाद भी खेतों में जलभराव बना हुआ है। गेहूं पूरी तरह सड़ चुकी है, जिससे खाने के लिए अनाज तक नहीं बचा। वहीं पशुओं के लिए भूसे का भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। किसानों का कहना है कि अब हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें अपने पशु बेचने तक की नौबत आ गई है। परिवार के भरण-पोषण के साथ बेटियों की शादी जैसी जिम्मेदारियां भी उनके सामने बड़ी चुनौती बन गई हैं। आरोप- कई गांवों में सर्वे नहीं हुआ ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अभी तक कई गांवों में सर्वे टीम नहीं पहुंची है। किसान मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन सर्वे में देरी से उन्हें राहत मिलने पर भी संशय बना हुआ है। किसानों का दर्द है कि फसल पूरी तरह खत्म हो चुकी है, लेकिन खेतों की सफाई के लिए भी अब उन्हें अलग से खर्च करना पड़ेगा। इधर, जनप्रतिनिधि और नेता केवल आश्वासन दे रहे हैं। जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। मामले की लेकर अपर कलेक्टर महेंद्र सिंह कपचे ने बताया कि सर्वे टिम लगी हुई है, जो जल्द सर्वे कर जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
बीजेपी बंगाल मेनिफेस्टो 2026: बंगाल के लिए बीजेपी का संकल्प पत्र- बेरोजगार युवाओं को हर महीने 3 हजार रुपये, 6 महीने में UCC, जानिए क्या-क्या बड़ा ऐलान

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को बंगाल के लिए संकल्प पत्र जारी किया है, जिसे पार्टी ने प्रतिज्ञा का शपथ पत्र नाम दिया है। संकल्प पत्र जारी करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह पश्चिम बंगाल की जनता के लिए विश्वास का दस्तावेज है और इसमें जनता से जुड़े अहम वादे शामिल हैं। अमित शाह ने कहा कि संकल्प पत्र लोगों को नया रास्ता बताएं। महिलाओं को डराने-धमकाने का प्रयास। इन लोगों को नई आशा और भरोसेमंद उम्मीदें। इस पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा विकसित भारत का रोड मैप और लोगों को आगमन से आगमन का रास्ता भी बताया गया है। बीजेपी ने संकल्प पत्र जारी करने के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार डर के शहर में काम कर रही है. बीजेपी के संकल्प पत्र की बड़ी बातें गृह मंत्री अमित शाह ने संकल्प पत्र जारी करते हुए कहा कि बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने पर केंद्र की सख्त रुख अपनाएगी और जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम होगा। इसके तहत घुसपैठियों की पहचान करना, उनका नाम दर्ज करना और उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी। यानी एडिट, डिलीट और डिपोर्ट। अमित शाह ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी पेंशनभोगियों के लिए स्कीम यानी डीए सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार बनने के 45 दिन बाद सातवां आयोग वेतन लागू करेगा। अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं के बैंक खाते में हर महीने 3 हजार रुपये देगी, ताकि उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके। पश्चिम बंगाल में आयुष्मान योजना लागू की जाएगी, जिससे लोगों को इलाज में राहत मिलेगी। सरकार समान बनने के छह महीने के भीतर राज्य में नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में काम करेगी। युवाओं को हर महीने 3 हजार रुपये का बजट दिया जाएगा, ताकि उन्हें रोजगार मिलने तक आर्थिक मदद मिल सके। बंगाल की सीमाओं को सील कर दिया गया है। 75 लाख महिलाओं को बनाया गया लक्ष्य। गर्भवती महिलाओं को 21 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। राज्य के दस्तावेज़ में महिलाओं का सफर मुफ़्त में किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी की ओर से बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब मन से बदलाव चाहती है और राज्य में बदलाव की भावना साफ दिखाई दे रही है। अमित शाह ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में बीजेपी ने एक मजबूत और जिम्मेदार कार्यकर्ता की भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वतंत्रता संग्राम का उदाहरण पेश किया गया है, जिससे लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि भारत, जिसे पहले कई मामलों में पीछे माना जाता था, आज मोदी सरकार के नेतृत्व में दुनिया के सामने एक मजबूत और आगे बढ़ने वाला देश उभर रहा है। बंगाल की जनता के सामने-अमित शाह अमित शाह ने यह भी बताया कि बीजेपी ने सबसे पहले बंगाल की जनता के सामने एक राक्षस राकी थी, जिसमें पिछली 15 साल की सरकार को लेकर असंतोष की बात कही गई थी. अब पार्टी का संकल्प पत्र लोगों की आस्था का प्रतीक है और इस राज्य से बाहर निकलने का पूरा रोडमैप दिया गया है। कोलकाता के विकास के लिए बीजेपी का काम बीजेपी ने कोलकाता के विकास को लेकर एक बड़ी योजना पेश की है। पार्टी का लक्ष्य है कि कोलकाता को विश्व स्तर का शहर बनाया जाये। इसके लिए मेट्रो नेटवर्क का पूरा विस्तार किया जाएगा, पुलों को मजबूत करने का समयबद्धता कार्यक्रम और बंदरगाह, विशेष रूप से हल्दिया पोर्ट का बड़े स्तर पर विकास किया जाएगा। व्यापार को आसान बनाने के लिए नई फैक्ट्री लाई मेटल और सिंडिकेट सिस्टम को खत्म करने का वादा किया गया है। किसानों के लिए किसानों के लिए भी योजना बनाई गई है, ताकि आलू, धान और आम की खेती करने वाले किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। चाय उद्योग को मजबूत बनाने और चाय बागानों को फिर से बेहतर बनाने के लिए और भी मजबूत कदम उठाएं। उत्तर बंगाल के विकास पर खास जोर दिया गया वहां आईआईटी, एम्स, आईआईएम और फैशन डिजाइन जैसे बड़े इंस्टीट्यूट की बात कही गई है। इसके अलावा वंदे मातरम सिद्धांत और वंदे मातरम मिशन के माध्यम से बंगाल की संस्कृति को बनाए रखने और बढ़ावा देने की योजना है। कानूनी व्यवस्था को लेकर बीजेपी का लक्ष्य कानूनी व्यवस्था को लेकर बीजेपी ने कहा है कि विश्वव्यापी सरकार के संपूर्ण पद पर श्वेत पत्र लाया जाएगा। इसमें तर्क, राजनीतिक संघर्ष और कानून व्यवस्था की स्थिति सामने रखी गई है। राजनीतिक हिंसा की जांच के लिए एक बैराज जज की प्रगति आयोग बनाया जाएगा। बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि उनके शासन में भय, भेदभाव और गरीबी को बढ़ावा मिला है. पार्टी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को मजबूती मिली है और उसी मॉडल को बंगाल को भी आगे बढ़ाया जाएगा. कुल मिलाकर, बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र के माध्यम से विकास, सुरक्षा, रोजगार और बेहतर शासन का वादा किया है और एकजुट होकर काम किया है। ये भी पढ़ें: बारामती उपचुनाव के बीच पार्थ सुपरस्टार ने दिव्यांग पिता, प्रतियोगी माता और पीएम मोदी के साथ तस्वीर साझा की
DIY डिओडोरेंट: अंडरआर्म्स के दाग और कालेपन को दूर करती है ये सस्ती घरेलू दवा, सिर्फ 12 रुपए में खरीदें डिओडोरेंट, जानें आसान तरीका

10 अप्रैल 2026 को 13:35 IST पर अद्यतन किया गया DIY डिओडोरेंट: गर्मियों में बार-बार अंडरआर्म्स में प्लास्टिक से बने पदार्थ आते हैं। ऐसे में बाहर मिलने वाले डियोडोरेंट में केमिकल्स मिलते हैं, जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं साथ ही काफी महंगे भी होते हैं। लेकिन अब घर पर भी सिर्फ 12 रुपये में डियोडोरेंट बनवा सकते हैं। (टैग अनुवाद करने के लिए) DIY प्राकृतिक डिओडोरेंट (टी) घर का बना डिओडोरेंट (टी) अंडरआर्म गंध उपाय (टी) पसीने की गंध समाधान (टी) प्राकृतिक त्वचा देखभाल युक्तियाँ (टी) रसायन मुक्त डिओडोरेंट (टी) अंडरआर्म देखभाल (टी) सौंदर्य घरेलू उपचार (टी) एलोवेरा डिओडोरेंट (टी) फिटकरी डिओडोरेंट
साकिब सलीम बोले- रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में है:डेब्यू फिल्म के लिए 7-8 महीने ऑडिशन दिए, पहला एड नहीं मिलता तो फैमिली बिजनेस संभालता

वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर साकिब सलीम चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने किरदार, तैयारी और एक्टिंग प्रोसेस साझा किया। वे प्रोजेक्ट चुनने से पहले स्क्रिप्ट और डायरेक्टर का विजन समझते हैं। ‘कप्तान’ में किरदार को रियल बनाने के लिए फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के साथ ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां जोड़ीं। उन्होंने फिल्म 83 के 6 महीने के क्रिकेट ट्रेनिंग एक्सपीरियंस को करियर का खास फेज बताया। साथ ही शुरुआती दिनों, यश राज फिल्म्स के साथ डेब्यू और ऑडिशन स्ट्रगल पर बात की। उन्होंने कहा कि आज भी वे सीखने और खुद को बेहतर बनाने में विश्वास रखते हैं। पेश हैं साकिब सलीम से बातचीत के प्रमुख अंश: सवाल: ‘कप्तान’ को लेकर रोल चुनने का प्रोसेस क्या है? जवाब: मैं पहले स्क्रिप्ट पढ़ता हूं। कहानी समझ आए और मज़ा आए, तभी करता हूं। फिर डायरेक्टर के विज़न के अनुसार खुद को ढालता हूं। मेरा मानना है कि हर फिल्म और शो का प्रोसेस अलग होता है, क्योंकि हर डायरेक्टर की सोच अलग होती है। सवाल: ‘कप्तान’ में आपके किरदार ‘समर’ को लेकर आपने क्या इनपुट दिए? जवाब: मेरा एक ही फीडबैक था कि किरदार सिर्फ सीरियस या हीरोइक ना लगे। उसमें ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां भी होनी चाहिए। हमने कोशिश की कि वह एक रियल इंसान लगे, जो गलतियां भी करता है और उनसे सीखता भी है। सवाल: इस रोल के लिए कितनी तैयारी की? जवाब: काफी मेहनत की। करीब 7-8 किलो वजन कम किया। किरदार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का है, जो हमेशा फील्ड पर रहता है, इसलिए फिटनेस और एजिलिटी जरूरी थी। सवाल: आपने कहा कि हर प्रोजेक्ट का प्रोसेस अलग होता है, क्या आप कोई उदाहरण देना चाहेंगे? जवाब: कबीर खान की फिल्म ‘83’ का प्रोसेस अलग था। उन्होंने 6 महीने तक सिर्फ क्रिकेट खेलने को कहा। एक्टिंग बाद में, पहले टीम बनानी थी। यह मेरे करियर का यूनिक अनुभव था। सवाल: ‘83’ में क्या चुनौती रही? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुरानी स्टाइल भूलनी पड़ी। मोहिंदर अमरनाथ की तरह खेलना, उनका चलना और बैटिंग स्टाइल सीखना था। जो चीज पहले से आती है, उसे भूलकर नई चीज सीखना मुश्किल होता है। सवाल: आपका एक्टिंग करियर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेरी शुरुआत दिलचस्प रही। मैं एक दोस्त के साथ ऑडिशन देने गया था, उसका नहीं हुआ और मेरा हो गया। पहला काम एक ऐड में मिला, जिसके लिए 25 हजार रुपए मिले। मैं टाइमपास के लिए गया था। शाम को फोन आया कि आप सिलेक्ट हो गए हैं, 25 हजार का बजट है। मैं घबरा गया और बोला कि मेरे पास 25 हजार नहीं हैं देने के लिए, लगा मुझे पैसे देने पड़ेंगे। फिर उन्होंने हंसकर कहा कि आपको पैसे मिलेंगे। अगर पहला ऐड नहीं मिलता, तो मैं दिल्ली जाकर फैमिली बिजनेस संभालता। मैं पापा से कहकर आया था कि एक साल खुद को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। थोड़ा झूठ बोला, क्योंकि सीधे बोलता तो शायद मानते नहीं। उसी साल फिल्म मिल गई, फिर उन्हें मनाने की जरूरत नहीं पड़ी। सवाल: डेब्यू फिल्म कैसे मिली? जवाब: लंबा ऑडिशन प्रोसेस चला। यश राज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने 7-8 महीने तक अलग-अलग सीन करवाए। कभी गाना, कभी एक्टिंग। ऐसा लगा जैसे वर्कशॉप चल रही हो। फिर यश राज फिल्म्स की ‘मुझसे फ्रेंडशिप करोगे’ मिली। मैं खुद को लकी मानता हूं कि शुरुआत इतनी बड़ी कंपनी के साथ हुई। सवाल: करियर का सबसे बड़ा चैलेंज क्या रहा? जवाब: मैं हंसते-बोलते रहता हूं, इसलिए कई बार लोग सीरियसली नहीं लेते। उन्हें मेरी मेहनत नहीं दिखती। अब सीख लिया है कि लोगों का परसेप्शन बदलने की कोशिश नहीं करनी, बस काम ईमानदारी से करना है। सवाल: इतने सालों के करियर में इंस्पिरेशन कहां से मिलती है? जवाब: मैं हर किसी से सीखता हूं। मैंने सलमान खान, रणवीर सिंह, वरुण धवन, तापसी पन्नू और रानी मुखर्जी जैसे कलाकारों के साथ काम किया है। सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: क्या अब भी आप ऑडिशन देने के लिए तैयार रहते हैं? जवाब: बिल्कुल। अगर मुझे किसी फिल्ममेकर के साथ काम करना है, तो मैं खुद जाकर ऑडिशन देने को तैयार हूं। रिजेक्शन से डरना नहीं चाहिए, यह एक्टर के काम का हिस्सा है। सवाल: लेकिन कई एक्टर्स रिजेक्शन से डरते हैं, आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए, रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में होता है। हमें इसे पर्सनली नहीं लेना चाहिए। कई बार रोल आपके लिए नहीं होता, इसका मतलब ये नहीं कि आप अच्छे एक्टर नहीं हैं। मैं तो आज भी ऑडिशन देने में शर्माता नहीं हूं, क्योंकि यही हमारे काम का हिस्सा है। सवाल: बढ़ती एक्सपेक्टेशंस और प्रेशर को कैसे हैंडल करते हैं? जवाब: मैं अपना बेस्ट देने पर ध्यान देता हूं। लोगों की सोच कंट्रोल नहीं कर सकता, लेकिन अपनी मेहनत और ईमानदारी को कंट्रोल कर सकता हूं। आजकल कई बार गलत जानकारी भी फैलती है, इसलिए उससे बचना जरूरी है। सवाल: आज के समय में सोशल मीडिया और इंफॉर्मेशन ओवरलोड को कैसे देखते हैं? जवाब: आज बहुत ज्यादा इंफॉर्मेशन है, लेकिन सही से ज्यादा गलत फैल रही है। सबको सबसे पहले खबर देनी है, इसलिए कई बार सही जानकारी नहीं आती। मैं कोशिश करता हूं कि इस शोर से थोड़ा दूर रहूं। सवाल: अगर मौका मिले तो किसकी बायोपिक करना चाहेंगे? जवाब: मैं विराट कोहली की बायोपिक करना चाहूंगा। मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है और लोग भी कहते हैं कि मैं यह रोल कर सकता हूं। सवाल: आपको किस तरह की किताबें पढ़ना पसंद है? जवाब: मुझे स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी की किताबें पढ़ना पसंद है। जैसे युवराज सिंह, शेन वॉर्न, क्रिस गेल और आंद्रे अगासी की किताबें पढ़ी हैं। मुझे लोगों के अनुभव जानना अच्छा लगता है। सवाल: आपके लिए सबसे बड़ी सफलता क्या है? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता है कि मैं 15 साल से इंडस्ट्री में हूं। मेरे माता-पिता और बहन मेरे साथ हैं, यही सबसे बड़ी बात है। बाकी जो मिल रहा है, वह बोनस है।
साकिब सलीम बोले- रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में है:डेब्यू फिल्म के लिए 7-8 महीने ऑडिशन दिए, पहला एड नहीं मिलता तो फैमिली बिजनेस संभालता

वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर साकिब सलीम चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने किरदार, तैयारी और एक्टिंग प्रोसेस साझा किया। वे प्रोजेक्ट चुनने से पहले स्क्रिप्ट और डायरेक्टर का विजन समझते हैं। ‘कप्तान’ में किरदार को रियल बनाने के लिए फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के साथ ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां जोड़ीं। उन्होंने फिल्म ‘83’ के 6 महीने के क्रिकेट ट्रेनिंग एक्सपीरियंस को करियर का खास फेज बताया। साथ ही शुरुआती दिनों, यश राज फिल्म्स के साथ डेब्यू और ऑडिशन स्ट्रगल पर बात की। उन्होंने कहा कि आज भी वे सीखने और खुद को बेहतर बनाने में विश्वास रखते हैं। पेश हैं साकिब सलीम से बातचीत के प्रमुख अंश: सवाल: ‘कप्तान’ को लेकर रोल चुनने का प्रोसेस क्या है? जवाब: मैं पहले स्क्रिप्ट पढ़ता हूं। कहानी समझ आए और मजा आए, तभी करता हूं। फिर डायरेक्टर के विजन के अनुसार खुद को ढालता हूं। मेरा मानना है कि हर फिल्म और शो का प्रोसेस अलग होता है, क्योंकि हर डायरेक्टर की सोच अलग होती है। सवाल: ‘कप्तान’ में आपके किरदार ‘समर’ को लेकर आपने क्या इनपुट दिए? जवाब: मेरा एक ही फीडबैक था कि किरदार सिर्फ सीरियस या हीरोइक ना लगे। उसमें ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां भी होनी चाहिए। हमने कोशिश की कि वह एक रियल इंसान लगे, जो गलतियां भी करता है और उनसे सीखता भी है। सवाल: इस रोल के लिए कितनी तैयारी की? जवाब: काफी मेहनत की। करीब 7-8 किलो वजन कम किया। किरदार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का है, जो हमेशा फील्ड पर रहता है, इसलिए फिटनेस और एजिलिटी जरूरी थी। सवाल: आपने कहा कि हर प्रोजेक्ट का प्रोसेस अलग होता है, क्या आप कोई उदाहरण देना चाहेंगे? जवाब: कबीर खान की फिल्म ‘83’ का प्रोसेस अलग था। उन्होंने 6 महीने तक सिर्फ क्रिकेट खेलने को कहा। एक्टिंग बाद में, पहले टीम बनानी थी। यह मेरे करियर का यूनिक अनुभव था। सवाल: ‘83’ में क्या चुनौती रही? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुरानी स्टाइल भूलनी पड़ी। मोहिंदर अमरनाथ की तरह खेलना, उनका चलना और बैटिंग स्टाइल सीखना था। जो चीज पहले से आती है, उसे भूलकर नई चीज सीखना मुश्किल होता है। सवाल: आपका एक्टिंग करियर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेरी शुरुआत दिलचस्प रही। मैं एक दोस्त के साथ ऑडिशन देने गया था, उसका नहीं हुआ और मेरा हो गया। पहला काम एक ऐड में मिला, जिसके लिए 25 हजार रुपए मिले। मैं टाइमपास के लिए गया था। शाम को फोन आया कि आप सिलेक्ट हो गए हैं, 25 हजार का बजट है। मैं घबरा गया और बोला कि मेरे पास 25 हजार नहीं हैं देने के लिए, लगा मुझे पैसे देने पड़ेंगे। फिर उन्होंने हंसकर कहा कि आपको पैसे मिलेंगे। अगर पहला ऐड नहीं मिलता, तो मैं दिल्ली जाकर फैमिली बिजनेस संभालता। मैं पापा से कहकर आया था कि एक साल खुद को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। थोड़ा झूठ बोला, क्योंकि सीधे बोलता तो शायद मानते नहीं। उसी साल फिल्म मिल गई, फिर उन्हें मनाने की जरूरत नहीं पड़ी। सवाल: डेब्यू फिल्म कैसे मिली? जवाब: लंबा ऑडिशन प्रोसेस चला। यश राज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने 7-8 महीने तक अलग-अलग सीन करवाए। कभी गाना, कभी एक्टिंग। ऐसा लगा जैसे वर्कशॉप चल रही हो। फिर यश राज फिल्म्स की ‘मुझसे फ्रेंडशिप करोगे’ मिली। मैं खुद को लकी मानता हूं कि शुरुआत इतनी बड़ी कंपनी के साथ हुई। सवाल: करियर का सबसे बड़ा चैलेंज क्या रहा? जवाब: मैं हंसते-बोलते रहता हूं, इसलिए कई बार लोग सीरियसली नहीं लेते। उन्हें मेरी मेहनत नहीं दिखती। अब सीख लिया है कि लोगों का परसेप्शन बदलने की कोशिश नहीं करनी, बस काम ईमानदारी से करना है। सवाल: इतने सालों के करियर में इंस्पिरेशन कहां से मिलती है? जवाब: मैं हर किसी से सीखता हूं। मैंने सलमान खान, रणवीर सिंह, वरुण धवन, तापसी पन्नू और रानी मुखर्जी जैसे कलाकारों के साथ काम किया है। सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: क्या अब भी आप ऑडिशन देने के लिए तैयार रहते हैं? जवाब: बिल्कुल। अगर मुझे किसी फिल्ममेकर के साथ काम करना है, तो मैं खुद जाकर ऑडिशन देने को तैयार हूं। रिजेक्शन से डरना नहीं चाहिए, यह एक्टर के काम का हिस्सा है। सवाल: लेकिन कई एक्टर्स रिजेक्शन से डरते हैं, आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए, रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में होता है। हमें इसे पर्सनली नहीं लेना चाहिए। कई बार रोल आपके लिए नहीं होता, इसका मतलब ये नहीं कि आप अच्छे एक्टर नहीं हैं। मैं तो आज भी ऑडिशन देने में शर्माता नहीं हूं, क्योंकि यही हमारे काम का हिस्सा है। सवाल: बढ़ती एक्सपेक्टेशंस और प्रेशर को कैसे हैंडल करते हैं? जवाब: मैं अपना बेस्ट देने पर ध्यान देता हूं। लोगों की सोच कंट्रोल नहीं कर सकता, लेकिन अपनी मेहनत और ईमानदारी को कंट्रोल कर सकता हूं। आजकल कई बार गलत जानकारी भी फैलती है, इसलिए उससे बचना जरूरी है। सवाल: आज के समय में सोशल मीडिया और इंफॉर्मेशन ओवरलोड को कैसे देखते हैं? जवाब: आज बहुत ज्यादा इंफॉर्मेशन है, लेकिन सही से ज्यादा गलत फैल रही है। सबको सबसे पहले खबर देनी है, इसलिए कई बार सही जानकारी नहीं आती। मैं कोशिश करता हूं कि इस शोर से थोड़ा दूर रहूं। सवाल: अगर मौका मिले तो किसकी बायोपिक करना चाहेंगे? जवाब: मैं विराट कोहली की बायोपिक करना चाहूंगा। मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है और लोग भी कहते हैं कि मैं यह रोल कर सकता हूं। सवाल: आपको किस तरह की किताबें पढ़ना पसंद है? जवाब: मुझे स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी की किताबें पढ़ना पसंद है। जैसे युवराज सिंह, शेन वॉर्न, क्रिस गेल और आंद्रे अगासी की किताबें पढ़ी हैं। मुझे लोगों के अनुभव जानना अच्छा लगता है। सवाल: आपके लिए सबसे बड़ी सफलता क्या है? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता है कि मैं 15 साल से इंडस्ट्री में हूं। मेरे माता-पिता और बहन मेरे साथ हैं, यही सबसे बड़ी बात है। बाकी जो मिल रहा है, वह बोनस है।
शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर:पेड़ से टकराकर रुका; जगतपुर तिराहा पर बड़ा हादसा टला

शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे के जगतपुर तिराहा पर गुरुवार देर शाम एक बड़ा हादसा टल गया। सड़क किनारे खड़े एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीछे से दूसरी ट्रॉली ने टक्कर मार दी, जिससे आगे खड़ा ट्रैक्टर बिना ड्राइवर के ही स्टार्ट होकर अनियंत्रित दौड़ पड़ा। गनीमत रही कि इस दौरान कोई राहगीर या वाहन उसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी के अनुसार, कुमरौआ गांव निवासी किसान राजेंद्र धाकड़ अपनी फसल बेचकर कोलारस अनाज मंडी से वापस गांव लौट रहे थे। उन्होंने जगतपुर तिराहा पर अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खड़ा कर दिया और पास की दुकान पर सामान लेने चले गए। इसी दौरान, खोंकर गांव निवासी उत्तम चंदेल अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से वहां पहुंचे और पीछे से खड़े ट्रैक्टर में टक्कर मार दी। बताया गया है कि राजेंद्र का ट्रैक्टर गियर में खड़ा था, जिसके कारण टक्कर लगते ही वह स्टार्ट होकर आगे बढ़ गया। बिना ड्राइवर के ही ट्रैक्टर कुछ दूरी तक सड़क पर चलता रहा और फिर सड़क से उतरकर एक पेड़ से टकराकर रुक गया। घटना के वक्त आसपास कोई राहगीर या वाहन मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
174 घनमीटर अवैध रेत जब्त:देवसर के मझौना में खनिज-राजस्व-पुलिस का एक्शन, भंडारणकर्ता की तलाश जारी

सिंगरौली जिले के देवसर क्षेत्र में प्रशासन ने अवैध रेत परिवहन और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई की है। शुक्रवार को खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने मझौना इलाके में दबिश दी। इस दौरान दो अलग-अलग स्थानों से अवैध रूप से भंडारित 174 घनमीटर रेत जब्त की गई। यह रेत बिना किसी वैध अनुमति के जमा की गई थी। कार्रवाई के दौरान टीम ने आराजी नंबर 551 और 555/658 की भूमि पर भंडारित रेत को जब्त किया। नियमानुसार आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जब्त रेत की अनुमानित कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जब्त रेत को संबंधित ठेकेदार को सुरक्षित रूप से सौंप दिया गया है। खनिज विभाग की टीम अब भूमि के वास्तविक स्वामी और रेत के भंडारणकर्ता की पहचान कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को देवसर क्षेत्र के नदी-नालों से अवैध रूप से रेत निकालकर आसपास के इलाकों में भंडारण और फिर अन्य जिलों में भेजने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इस अवैध गतिविधि से शासन को भारी राजस्व हानि हो रही थी। यह कार्रवाई कलेक्टर के निर्देश पर खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल और सहायक खनिज अधिकारी अशोक मिश्रा के नेतृत्व में की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और भंडारण के खिलाफ ऐसी कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।









