मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया:नोएडा में बोले- युद्ध के संकट से देश को एकजुट होकर लड़ना है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यूपी के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-1 का उद्घाटन किया। 4 फेज पूरे होने के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से इजराइल-अमेरिका और ईरान की जंग से उपजे संकट से एकजुट होकर लड़ने की अपील की। उन्होंने कहा- कल सभी राज्यों के सीएम से चर्चा हुई। मैं देशवासियों से कहूंगा कि धैर्य और एकजुटता के साथ इस संकट का सामना करें। ये पूरी दुनिया को परेशान करने वाला संकट है। प्रधानमंत्री ने कहा- देश के राजनीतिक दलों से कहना चाहता हूं कि संकट की घड़ी में ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं। देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को जनता कभी माफ नहीं करेगी। एयरपोर्ट के पहले फेज का काम पूरा हो गया है। इसमें करीब 3300 एकड़ जमीन पर टर्मिनल और रनवे बनाए गए हैं। यहां से हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्री सफर कर सकेंगे। इस प्रोजेक्ट पर करीब 11 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। एयरपोर्ट के उद्घाटन की 3 तस्वीरें… मोदी के भाषण की 3 बड़ी बातें 1. ‘पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते दुनिया के सामने संकट खड़ा हुआ’ पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा है। इसके चलते कई देशों में संकट पैदा हो गया है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस युद्ध-प्रभावित क्षेत्रों से मंगाता है। इसलिए सरकार हर वह कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों और किसानों पर बोझ न पड़े। 140 करोड़ देशवासी इस मुसीबत का एकजुट होकर सामना करें। 2. ‘नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था’ नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। कुर्सी जाने के डर से पहले के सत्ताधारी यहां आने से डरते थे। जब यहां सपा सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया। तब पुराने मुख्यमंत्री (अखिलेश) इतने डरे हुए थे कि वे कार्यक्रम में आए ही नहीं। मुझे भी डराने की कोशिश की गई। कहा गया- नोएडा मत जाइए। अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हैं। 3. ‘सपा ने पश्चिमी यूपी को लूट का एटीएम बना दिया था’ सपा ने पश्चिमी यूपी को लूट का एटीएम बना दिया था। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरू के 2-3 सालों में उन्होंने जेवर एयरपोर्ट का काम नहीं होने दिया, लेकिन जैसे ही यहां भाजपा सरकार बनी तो जेवर एयरपोर्ट की नींव पड़ी, निर्माण हुआ और अब शुरू भी हो गया। नोएडा एयरपोर्ट की 3 तस्वीरें देखिए- फ्लाइट मई से शुरू हो सकती है नोएडा एयरपोर्ट अथॉरिटी से जुड़े अफसरों ने बताया- यहां से फ्लाइट मई से शुरू हो सकती है। यह एयरपोर्ट 52 स्क्वायर किमी में बनना है। एशिया की सबसे बड़े एयरपोर्ट की बात करें तो अभी चीन का बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इसका एरिया 47 स्क्वायर किमी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन से जुड़े अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
ड्रग्स माफिया पर नकेल कसें सभी एसपी:मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में दिए निर्देश, कहा- पेट्रोल-डीजल का संकट नहीं

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक त्यौहारों के दौरान कानून और व्यवस्था की कड़ी निगरानी करें। सभी एसपी जोनल प्लान तैयार करके 31 मार्च तक प्रस्तुत कर दें। ड्रग्स माफिया पर सख्ती के लिए नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान चलाने के साथ-साथ जन जागरुकता अभियान चलाएं। एनकोर समिति की हर महीने बैठक करके कार्यवाही विवरण पोर्टल पर दर्ज कराएं। सीएस जैन ने ये बातें वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहीं। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रदेश में ड्रग्स माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों को दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश से ड्रग्स माफियाओं का नेटवर्क पूर्णतः समाप्त होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में ड्रग्स का कारोबार करने वाले अपराधियों को चिन्हित करें और उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही करें। मनरेगा में जल संरक्षण के काम कराएं उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में सौ दिन से अधिक समय से लंबित प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण कराएं। मुख्य सचिव ने कहा कि मनरेगा योजना से जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य प्राथमिकता से कराएं। इसे जल गंगा अभियान में शामिल करके पोर्टल पर प्रगति दर्ज करें। मनरेगा से दो लाख 51 हजार कार्य स्वीकृत हैं। इनमें जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता देने से जल गंगा संवर्धन अभियान अधिक प्रभावी बनेगा। एकल नलजल योजनाओं का निर्माण कार्य 31 मार्च तक पूरा कराकर इन्हें ग्राम पंचायतों को समारोहपूर्वक हैण्डओवर करें। साथ ही सभी घरों में नल कनेक्शन और पानी की आपूर्ति भी सुनिश्चित कराएं। एकल नलजल योजनाओं के स्रोत तथा हैण्डपंपों में रिचार्ज पिट बनाएं। पेट्रोल डीजल का संकट नहीं, लोगों को करें जागरुक बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती, खाद के ई टोकन से शत-प्रतिशत वितरण, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पर निगरानी के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की प्रदेश में पर्याप्त उपलब्धता है। इस संबंध में आमजनों को लगातार जानकारी दें। बैठक में अधिकारियों को गेंहू उपार्जन की तैयारी, स्वरोजगार योजनाओं की लक्ष्यपूर्ति, नरवाई प्रबंधन, अग्नि दुर्घटना से बचाव के उपाय, राहवीर योजना तथा प्रधानमंत्री दुर्घटना राहत योजना के संबंध में निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के अत्याचार पीड़ितों और पक्षकारों को मिलने वाली राहत राशि का भुगतान समय पर कराएं। तय टारगेट से राजस्व जुटाने काम करें उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि नामांकन, सीमांकन और बंटवारा के प्रकरणों का समय पर निराकरण करना राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी का निर्वहन सभी राजस्व अधिकारी और कलेक्टर्स निष्ठापूर्वक करें। अविवादित नामांतरण तथा बटवारा के प्रकरण समय सीमा में निराकृत करें। सभी जिले तय लक्ष्य के अनुसार राजस्व का संग्रहण कराएं। सागर, इंदौर, भोपाल और जबलपुर जिले इस पर विशेष ध्यान दें। स्वामित्व योजना में शेष लंबित प्रकरणों का निराकरण एक माह में कराएं। नरवाई जलाने की घटनाओं पर लाएं कमी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि नरवाई जलाने की घटनाओं के प्रति किसानों को जागरुक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से किसानों और आम लोगों को क्या हानियां होती हैं तथा पर्यावरण पर क्या विपरीत प्रभाव पड़ता है, इसके संबंध में जागरूक किया जाए। बैठक में प्रदेश में गेहूं उपार्जन कार्य की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के लिए सभी माकूल व्यवस्थाएं जाएं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पशुपालन विभाग, मत्स्य पालन विभाग एवं पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
‘बंगाली हिंदुओं के लिए अस्तित्व का संकट’: कैसे आरएसएस बंगाल चुनाव को ‘अस्तित्व’ की लड़ाई बता रहा है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:26 मार्च, 2026, 12:05 IST चुनाव को अस्तित्व के संघर्ष के रूप में पेश करके, आरएसएस पारंपरिक सत्ता-विरोधी या विकास संबंधी बहसों को दरकिनार करने का प्रयास करता हुआ प्रतीत होता है। हाल के राज्य चुनावों में, आरएसएस ने भाजपा के चुनावी इंजन के लिए अंतिम बूथ-स्तरीय स्नेहक के रूप में कार्य किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने लगभग 250 निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 1.75 लाख मतदाता जागरूकता अभियान बैठकों के साथ, बंगाल में हर सामाजिक स्तर में प्रवेश करने के लिए 14 सहयोगी निकायों को सक्रिय किया है। ज़मीनी स्तर पर पहुंच से लेकर रामनवमी के माध्यम से बड़े पैमाने पर लामबंदी और अब शुक्रवार को एक केंद्रित प्रयास, संघ ने एक उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित किया है – ‘बंगाली हिंदुओं’ को बचाने के लिए अपने संघर्ष को शक्ति प्रदान करना। सुर्खियां बटोरने वाली रैलियों या हाई-डेसीबल भाषणों से दूर, संघ की रणनीति लगभग व्यवस्थित दिखती है। आरएसएस के एक सूत्र ने कहा, लगभग 250 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 700 लोकमत परिषद (जनमत का स्पष्टीकरण और मतदाता जागरूकता अभियान) बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं। ऐसी बैठकों को आम तौर पर वर्तमान राजनीतिक माहौल को महज सत्ता परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि ‘अस्तित्व की लड़ाई’ के रूप में प्रस्तुत करके हिंदू वोटों को मजबूत करने के एक नैदानिक प्रयास के रूप में देखा जाता है। यह अब पूर्ण पैमाने पर आर्केस्ट्रा युद्धाभ्यास में परिवर्तित हो गया है। इस लामबंदी के मूल में पहचान की तीव्र अभिव्यक्ति निहित है। आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रचार प्रमुख (प्रवक्ता) जिष्णु बोस ने कहा, “हमारा आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं है। बंगाली हिंदू यहां अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे हैं। अस्तित्व और जीवित रहने के लिए यह हमारा संघर्ष है।” संजाल आरएसएस की रणनीति विकेंद्रीकृत है, फिर भी गहराई से एकीकृत है। बंगाल को तीन रणनीतिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है – उत्तर बंगा (दार्जिलिंग से मालदा तक फैला हुआ), मध्य बंगा (मुर्शिदाबाद से हुगली तक), और दक्षिण बंगा (हुगली से सागर तक)। इस वर्ष संघ के प्रकाशित दस्तावेज़ के अनुसार, संगठन राज्य भर में कम से कम 4,325 शाखाएँ चला रहा है, जिनमें उत्तर बंग में 1,127, मध्य बंग में 1,881 और दक्षिण बंग क्षेत्र में 1,317 शाखाएँ शामिल हैं। उनकी उपस्थिति का व्यापक पैमाना राम नवमी के प्रकाशिकी में परिलक्षित होता है, जिसमें 2025 में उत्तर बंगाल में 10,000 स्थानों पर, मध्य में 7,000 और दक्षिण में 12,000 स्थानों पर जुलूस देखे गए। संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि ऐसे जुलूसों की संख्या पिछले साल की तुलना में अधिक होगी। इस उछाल के पीछे 14 संबद्ध और संबद्ध संगठनों का हाथ है, जिनमें एबीवीपी की छात्र शक्ति से लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) का श्रमिक प्रभाव शामिल है। भारतीय किसान संघ के कृषि क्षेत्रों से लेकर लघु उद्योग भारती के तहत औद्योगिक एसएमई तक, संघ हर जनसांख्यिकीय तंत्रिका को छू रहा है। यहां तक कि संवेदनशील सीमावर्ती जिलों पर भी सीमांत चेतना मंच द्वारा निगरानी रखी जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राष्ट्रीय सुरक्षा की कहानी मतदाताओं के दिमाग में सामने और केंद्र में रहे। उत्तरजीविता आख्यान चुनाव को अस्तित्व के संघर्ष के रूप में पेश करके, आरएसएस पारंपरिक सत्ता-विरोधी या विकास संबंधी बहसों को दरकिनार करने का प्रयास कर रहा है, और उन्हें सांप्रदायिक सुरक्षा या बदलती जनसांख्यिकी की धारणा के लिए मौलिक आग्रह के साथ प्रतिस्थापित कर रहा है। यह एक मनोवैज्ञानिक धुरी है जिसे मतदाता को यह महसूस कराने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि उनकी पहचान तत्काल खतरे में है। हालाँकि, एक महत्वपूर्ण प्रश्न बना हुआ है – क्या यह संगठनात्मक दिग्गज वास्तव में भाजपा के लिए लड़ाई का रुख मोड़ सकता है? हाल के राज्य चुनावों में, आरएसएस ने भाजपा के चुनावी इंजन के लिए अंतिम बूथ-स्तरीय स्नेहक के रूप में कार्य किया। बंगाल में चुनौती अनोखी है. जबकि आरएसएस शाखाओं और जुलूसों के मामले में तेजी से बढ़ा है, उसे टीएमसी मशीनरी का सामना करना पड़ रहा है जो स्थानीय धरती पर समान रूप से मजबूत है। संघ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या इसकी अस्तित्ववादी लड़ाई की कहानी बंगाल की उप-क्षेत्रीय पहचान और कल्याण राजनीति के दुर्जेय किले को भेद सकती है। पहले प्रकाशित: 26 मार्च, 2026, 12:05 IST समाचार चुनाव ‘बंगाली हिंदुओं के लिए अस्तित्व का संकट’: कैसे आरएसएस बंगाल चुनाव को ‘अस्तित्व’ की लड़ाई बता रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से कैंटीन-चौपाटी-ढाबे बंद:रीवा में सैकड़ों लोगों पर रोजगार का संकट, रेस्टोरेंट्स के बाहर लगे अस्थाई बंद के नोटिस

रीवा में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को गहरे संकट में डाल दिया है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण शहर की कई कैंटीन, रेस्टोरेंट, चौपाटी और ढाबे बंद होने लगे हैं। इस संकट का सीधा असर कारोबारियों की आय पर पड़ रहा है। रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि जहां पहले वे महीनेभर में संतोषजनक कमाई कर लेते थे, वहीं अब कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। दुकानें बंद होने की वजह से बड़ी संख्या में काम करने वाले लोग बेरोजगार होने लगे हैं। गैस की कमी के चलते भोजन तैयार करना संभव नहीं हो पा रहा, जिससे ग्राहकों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। शहर के कई रेस्टोरेंट्स के बाहर नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं, जिनमें साफ लिखा है कि सिलेंडर की कमी के चलते संस्थान अस्थायी रूप से बंद किया गया है। रीवा की चौपाटी, जो आमतौर पर 24 घंटे गुलजार रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। संचालकों का कहना है कि हालात लॉकडाउन से भी बदतर होते जा रहे हैं। कुछ संचालक कोयले भट्टी का ले रहे सहारा कुछ रेस्टोरेंट संचालक मजबूरी में गैस के विकल्प के रूप में कोयले और लकड़ी का सहारा लेकर काम चला रहे हैं। हालांकि, इससे लागत बढ़ रही है और धुएं के कारण कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि फिलहाल कारोबार को किसी तरह बचाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कलेक्टर बोलीं- आपूर्ती को सामान्य करने की कोशिश कर रहे रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इस मामले में कहा कि कमर्शियल और एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य की जा रही है। प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों की कैंटीन और रेस्टोरेंट में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही स्थिति पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है। फिलहाल, रेस्टोरेंट संचालकों की स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है और कई प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर हैं। अब देखना होगा कि गैस आपूर्ति कब तक पूरी तरह सामान्य होती है और कारोबार फिर से पटरी पर लौट पाता है।
कांग्रेस का BRICS+ समिट को लेकर पीएम से सवाल:पूछा- पश्चिम एशिया संकट पर समिट आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे 'विश्वगुरु'

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि वेस्ट एशिया संकट से निपटने के लिए BRICS+ समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा। पार्टी का आरोप है कि मोदी अमेरिका और इजराइल को नाराज नहीं करना चाहते। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पोस्ट में कहा- भारत इस साल नई दिल्ली में 18वीं BRICS+ समिट की मेजबानी करने वाला है। ऐसे में सरकार को वेस्ट एशिया संकट पर कूटनीतिक पहल के लिए इस मंच का इस्तेमाल करना चाहिए। खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने वाले प्रधानमंत्री इस दिशा में पहल क्यों नहीं कर रहे हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते। केवल फोन कॉल के जरिए बातचीत की सीमाएं होती हैं, जबकि समिट के जरिए ठोस फैसले और आमने-सामने बातचीत ज्यादा प्रभावी हो सकती है। G20 पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने कहा कि इस साल G20 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है और इससे कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह मंच सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह सकता है। पहले भी सरकार पर साधा था निशाना कांग्रेस ने पिछले हफ्ते भी केंद्र सरकार की आलोचना की थी। पार्टी का कहना था कि BRICS+ चेयर होने के बावजूद भारत ने वेस्ट एशिया संघर्ष पर कोई सामूहिक बयान जारी नहीं किया। शनिवार को भी कांग्रेस ने अमेरिका-इजराइल के हमले की निंदा न करने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर: एलपीजी संकट में इन खास के साथ-साथ इलेक्ट्रिक कुकर भी है अच्छा विकल्प, मिनटों में बनता है खाना

विद्युत उपकरण कुकर | छवि: एआई/फ़्रीपिक इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर का उपयोग करने का सही तरीका: आजकल एलपीजी इंजन की भारी कीमत और कभी-कभी होने वाली कमी के कारण लोग नए विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में इन तीनों में इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिक कुकर का एक शानदार और आसान विकल्प सामने आया है। इससे न सिर्फ गैस की बचत होती है, बल्कि कम समय में स्वादिष्ट खाना भी तैयार हो जाता है। इलेक्ट्रिक उपकरण कुकर क्या है? इलेक्ट्रिक उपकरण कुकर एक ऐसा किचन उपकरण है जो बिजली से चलता है और इलेक्ट्रिक उपकरण कुकर की तरह ही काम करता है। फ़िट बस इतना है कि इसमें आपको गैस जलाने की ज़रूरत नहीं है। इसमें पहले से ही कई मस्जिदें हैं, जिनसे खाना बनाना और भी आसान हो जाता है। इलेक्ट्रिक कुकर के उपयोग के फायदे यह समय की बचत और इसकी मदद से खाना जल्दी बनेगा। खाना बनाने के लिए इसमें गैस की जरूरत नहीं है। ऐसे में एलपीजी पर भी प्रतिबंध नहीं होगा। इसका इस्तेमाल करना बहुत आसान होता है। नए लोग भी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें कई तरह के शाकाहारी फीचर्स पहले से ही मौजूद हैं। यह खाने को ओवरहीट नहीं करता है और इसे आसानी से नियंत्रित भी किया जा सकता है। इसकी मदद से आप एक ही कुक में कई तरह के व्यंजन तैयार कर सकते हैं। विद्युत उपकरण कुकर का उपयोग कैसे किया जाता है? इसका इस्तेमाल करना बहुत ही आसान है। 1.सामग्री सबसे पहले कुकर के अंदर पोथी में दाल, चावल या सब्जी डालें। 2. पानी डालें आवश्यकतानुसार जैसे दाल के लिये अधिक, चावल के लिये कम पानी चाहिये। 3. मार्केट बंद करें कुकर का अपार्टमेंट अच्छी तरह से लॉक करें। 4. सेटिंग चुनें अब अपने व्यंजन के खाते से बटन प्रारूप जैसे चावल, दाल, सूप या केवल स्टीम। 5. चरण करें स्टेप बटन दबाते ही कुकर खुद काम शुरू कर देगा। 6. रिलीज करें खाना बनने के बाद कुकर खुद डीवीडी रिलीज कर सकते हैं या आप मैनुअली भी कर सकते हैं। इलेक्ट्रिक कुकर में क्या-क्या बनाया जा सकता है? इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिक कुक्कुट की खास बात यह है कि आप इसमें लगभग हर रोज खाना बना सकते हैं। चावल, दाल, पुलाव और व्यंजन जैसे व्यंजन बना सकते हैं। इसके अलावा सूप में या ओटीएस बनाया जा सकता है। रसायन शास्त्र भी यह औषधि साबित होगी। घर में मेहमान आ रहे हैं तो राजमा, छोले, बिरयानी या पास्ता जैसे कई व्यंजन बनाए जा सकते हैं। इन सबके अलावा आप इडली और केक भी बना सकते हैं. इलेक्ट्रिक कुकर का उपयोग समय किन बातों का उपयोग करते समय किया जाता है? कुकर को ओवरफिल न करें। सही मात्रा में पानी डालें। इस्तेमाल के बाद साफ जरूर करें। बिजली के उपकरणों और तारों की जांच करें। यदि आप एलपीजी की समस्या से बचना चाहते हैं, तो आपके लिए इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिक उपकरण एक स्मार्ट और पोर्टेबल विकल्प है। यह समय, पैसा और मेहनत तीर्थ की बचत करने में मददगार साबित होगी। यह अवश्य पढ़ें: एलपीजी कनेक्शन के बदले नियम, आधार के बिना नहीं मिलेगा गैस; घर बैठे मोबाइल ऐप से जानें e-KYC कैसे करें (टैग्सटूट्रांसलेट) इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर(टी)इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर(टी)इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर(टी)इंडक्शन(टी)एलपीजी संकट(टी)इंडक्शन बनाम इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर(टी)कुकर(टी)किचन टिप्स का उपयोग कैसे करें
इंडक्शन का उपयोग कैसे करें: एलपीजी संकट के बारे में सबसे पहले क्या पता चल रहा है? जानिए सही तरीके और कौन से पोज़िशन हैं बेस्ट

इन-कैसे प्रयोग किया जाता है? | छवि: फ्रीपिक प्रेरण के लिए सर्वोत्तम बर्तन: कई बार घर में एलपीजी खत्म हो जाती है या गैस की समस्या हो जाती है। ऐसे में इनसाइड कुकर का एक बेहतरीन विकल्प सामने आता है। इसे तेजी से पकाना और इस्तेमाल करना भी काफी आसान होता है। हालाँकि जो लोग पहली बार इन्सेक्ट का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बार-बार यह समझ में नहीं आता है कि इसे सही तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाए और कौन से पॉज़िक्स का इस्तेमाल किया जाए। अगर आप भी पहली बार यहां स्पेशलाइज्ड ढूंढ रहे हैं तो ये आसान टिप्स आपके काम आ सकते हैं। इन किताबों का सही तरीका क्या है? सबसे पहले सबसे पहले एलियन को समंदर में जगह मिली इन असाहित्य कुकर को हमेशा जगह-जगह पर मलमलीय और शुष्क बनाया जाता है। इससे यह सही तरीके से काम करता है और सुरक्षा भी बनी रहती है। सही पोथी का प्रयोग करें इन अलोकेट्स में हर तरह के पॉश्चर काम नहीं करते हैं। इसलिए सबसे पहले सही पॉश्चर चुनें और फिर से रूट चालू करें। बिजली से जुड़ें इन यूनिटों में बिजली के इलेक्ट्रॉनिक आउटलेट और पावर बटन को चालू करें। पॉश्चर भंडार के बाद ही मॉड चुनें इन सूची में प्लास्टिक भंडार के बाद ही कुकिंग मूड चुनें, जैसे – दूध का मसाला, सब्जी बनाना, फ्री या आटा पकाना। तापमान और समय निर्धारित करें आवश्यकता के हिसाब से तापमान या समय निर्धारित करें। इनमें से ज्यादातर में अलग-अलग फीचर्स पहले से दिए गए हैं, जिनसे खाना बनाना आसान हो जाता है। सूची में कौन से स्थान सबसे अच्छे हैं? उदाहरण के लिए स्टील के पीओके यदि पोर के नीचे मैग्नेट छिपा हुआ है, तो वह आसानी से काम ढूंढ सकता है। ओक्लाहोमा स्टील के कई स्थानों में शोधकर्ताओं के लिए सही जगह होती है। कास्ट आयरन आयरन के पॉट लोहे की चटनी या तवा एक तरह से बहुत अच्छे से काम करते हैं और खाना भी अच्छा पकाते हैं। इन बेसिस वाले पोकेशियन इन बाज़ारों में विशेष रूप से सूचीबद्ध बेस वाले पॉइशियन हिस्से हैं, जो सबसे बेहतर तरीके से काम करते हैं। इन लाइक्स में किन पॉट्स का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए? इन सुझावों में एल्युमिनियम के साधारण कांच के बर्तन, मिट्टी के टुकड़े और तांबे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ये इन अणुओं में चुंबकीय तकनीक के साथ काम नहीं किया गया है, इसलिए इनका खाना पक्का नहीं है। इन दिनों किस चीज़ का उपयोग किया जाता है? इन-लाइन्स पर रिक्त स्थान नहीं। पानी या नारियल हाथों से इन खास को न छूएं। उपयोग के बाद इसे बंद करके हटा दिया गया। सूची के शीर्ष पर बहुत भारी स्थैतिक भंडार से हटा दिया गया। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो एक निश्चित कुकर गैस का बेहतरीन परिणाम हो सकता है। इससे खाना जल्दी बनता है, ऊर्जा की बचत होती है और किचन में भी साफ-सुथरा रहता है। यह अवश्य पढ़ें: दूध को ताज़ा कैसे रखें: गर्म में बार-बार फैट होता है दूध? ये रहस्य ट्रिक अनोखा काम; कई दिन तक रहेंगे ताज़ा (टैग्सटूट्रांसलेट)इंडक्शन कैसे इस्तेमाल करें(टी)इंडक्शन(टी)इंडक्शन का उपयोग कैसे करें(टी)इंडक्शन के लिए सबसे अच्छे बर्तन(टी)इंडक्शन कुकिंग टिप्स(टी)इंडक्शन(टी)एलपीजी गैस संकट
रसोई गैस संकट: रसोई गैस संकट के बीच अचल में विस्थापित चूल्हे की बिक्री में उछाल, जानिए क्या है कीमत? कैसे उपयोग किया जाता है

स्टोव चूल्हे में कैसे प्रयोग किया जाता है? | छवि: फ्रीपिक भारत में प्रेरण मूल्य: पिछले कुछ दिनों में 30 दिनों में 300 एकड़ (100 किमी) की बढ़ोतरी हुई है। 7 मार्च 2026 से घरेलू 14.2 किलों के जोड़े की कीमत 60 रुपये बढ़ गई है। अब दिल्ली में घरेलू प्रोजेक्ट 913 रुपये का हो गया है, जो पहले 853 रुपये था। वहीं मुंबई में इसकी कीमत 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये तक पहुंच गई है। घरेलू साजिद ही नहीं, बल्कि सिर्फ साजिद के दाम भी करीब 115 रुपए तक बढ़ गए हैं। दिल्ली में अब यह करीब 1,883 रुपये का मिल रहा है। मीडिया के सिद्धांतकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और गैस की कमी के कारण गैस में तेजी आई है। कई शहरों में तो मीटिंग में भी देरी हो रही है और लोगों को 25 से 30 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसी वजह से अब लोग गैस की तलाश कर रहे हैं और घरों में एक जैसे चूल्हे की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन-इन-साहित्य चूल्हे की बिक्री में उछाल गैस संकट के बाद विशेष चूल्हों की बिक्री में बड़ा उछाल देखा गया। खासकर कोलकाता में इसकी बिक्री करीब तीन गुना तक बढ़ गई है। वहीं क्विक कॉमर्स ऐप्स और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर एलाइक्स की सेल में 10 गुना तक बढ़ोतरी की खबरें सामने आई हैं। लोग गैस के फीचर्स से बचने के लिए लाइक में विकल्प अच्छा मान रहे हैं। अमेज़ॅन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर सिंगल चूल्हों पर कई ऑफर भी दिए जा रहे हैं। इन एसेट चूल्हे की कीमत कितनी है? मार्च 2026 के खाते से बाजार में अलग-अलग बजट के अलग-अलग चूल्हे उपलब्ध हैं। लाइफलॉन्ग और कैडलेक के मॉडल करीब 1,099 से 1,299 रुपये में मिल रहे हैं। बजाज और पिजन के 1800-2000 वोट वाले की कीमत 1,700 से 2,000 रुपये तक मिल जाती है। वहीं प्रेस्टीज और फिलिप्स के शानदार मॉडल 3,000 से 4,000 रुपये तक के हैं। निजीकरण पर भी 1,800 से 3,500 रुपये तक के एक लाख रुपये तक के चूल्हे उपलब्ध हैं। कई जगहों पर एलेक्जेंड्रा की लिस्टिंग भी दी जा रही है, शुरुआती किस्ट करीब 800 से 1,000 रुपये तक हो सकती है। इन सामानों में चूल्हे के दाम क्या हैं? गैस संकट के बाद की मांग निश्चित रूप से अच्छी है, लेकिन जिले में गैस संकट के कारण ज्यादा बदलाव नहीं हुए हैं। कुछ मॉडलों पर तो 100 से 200 रुपए तक की छूट भी मिल रही है। हालाँकि अगर गैस संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो प्लांट सब्ज़ी होने की वजह से दाम बढ़ सकते हैं। इन इनोवेटिव चूल्हा क्यों अच्छा है? इन जैसे चूल्हे में कई लोग गैस का विकल्प मानते हैं। इसके कई फायदे हैं। गैस की जरूरत नहीं है। खाना जल्दी पकता है। रसोई सबसे सुरक्षित रहती है। बिजली सेवा का उपयोग इसलिए आसान है। तापमान को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। एक्वेरियम में चूल्हा का उपयोग कैसे किया जाता है? इनसाइड का इस्तेमाल करना बहुत आसान होता है। सबसे पहले समुद्र तट पर स्थित स्थानों पर। इसे बिजली के उपकरण से कनेक्ट करें। इन लाइक्स के ऊपर सही पॉच स्थान। अब पावर ऑन करके कुकिंग मूड या तापमान सेट करें। कुछ ही मिनटों में खाना पकाना शुरू हो जाएगा। इन अलॉट में कौन-से पॉट का उपयोग किया जाता है? इन दस्तावेजों में हर तरह के पेस्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके लिए खास तरह के पॉश्चर होने चाहिए। इन दस्तावेजों के लिए सही पॉश्चर कौन से हैं? कैसल स्टील के पॉट, कास्ट आयरन यानी आयरन की कढ़ी या तवा और बेस वाले कुकर और पैन में इस्तेमाल करना सही होता है। किन पोल्ट्री का उपयोग अन्य चूल्हे में नहीं किया जाना चाहिए? इन चूल्हे में एल्युमीनियम के पोर्शनल पॉइचर, कांच के पोर और मिट्टी के प्वॉइंट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यदि पोर के नीचे मैग्नेट छिपा हुआ है, तो वह आसानी से काम ढूंढ लेता है। यदि आप पेट्रोलियम गैसों और नाटकों की कमी से परेशान हैं, तो सिलेंडर चूल्हा में आपके लिए एक अच्छा वैकल्पिक प्रस्ताव हो सकता है। यह भी सुरक्षित है और रसोई का खर्च भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि सरकार गैस की परमाणु ऊर्जा बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कार्यशाला चूल्हा में कई घरों में एक कंसॉलिडेशन असोसिएशन बनाया जा रहा है। यह अवश्य पढ़ें: लंच बॉक्स रेसिपी: बच्चों के टिफिन की क्या है खासियत? मिनटों में बनाएं ये 3 तरह के आसान व्यंजन, सेहत को भी नहीं होगा नुकसान
बैतूल के विजयग्राम में पेयजल संकट पर ग्रामीणों का आक्रोश:17 मार्च तक पानी नहीं मिला तो स्टेट हाईवे पर चक्काजाम की चेतावनी

बैतूल के भेसदेही विकासखंड की विजयग्राम पंचायत में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सामने आया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण ट्रैक्टरों में भरकर झल्लार थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को अपनी समस्या बताते हुए एक आवेदन सौंपा। उन्होंने प्रशासन को 17 मार्च तक पेयजल व्यवस्था न होने पर चक्काजाम की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पिछले चार माह से नल-जल योजना से पानी नहीं आ रहा है। इसके कारण करीब 800 की आबादी वाले नीमढाना में पेयजल का गंभीर संकट गहरा गया है। अब तक लोग हैंडपंप और निजी बोर से पानी का इंतजाम कर रहे थे, लेकिन अब वे स्रोत भी सूख गए हैं। महिलाओं को आधा किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार सरपंच और सचिव को अवगत कराया गया। कलेक्टर और विधायक तक भी शिकायतें पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। मंगलवार को पंचायत में एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सरपंच और सचिव को भी बुलाया गया था, लेकिन वे बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव की पुरानी सड़क बंद पड़ी है और पुलिया का निर्माण कार्य भी अधूरा है, जिससे लोगों को आवागमन में भी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 17 मार्च तक गांव में पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो वे विजयग्राम बस स्टैंड पर चक्काजाम करेंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
MP में कमर्शियल गैस संकट, कई शहरों में बुकिंग बंद:ईरान-इजराइल युद्ध का असर, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में होटल-रेस्टोरेंट बंद होने का खतरा

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच एलपीजी सप्लाई को लेकर मध्यप्रदेश में सतर्कता बढ़ गई है। कई शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रोक दी गई है, जिससे होटल-रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर असर पड़ने की आशंका है। राजधानी भोपाल में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने ऑयल कंपनियों, गैस एजेंसियों और व्यापार संगठनों की बैठक बुलाई। वहीं भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा कि कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से शहर के 2000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट संकट में आ सकते हैं। ऑयल कंपनियों ने सोमवार से कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी रोक दी है। हालांकि सरकार का कहना है कि घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है। पांच बड़े शहरों में घरेलू सिलेंडर की भी वेटिंग, विकल्प तलाश रहे भोपाल: 2000 होटल संकट में, कलेक्टर ने बुलाई बैठक भोपाल में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकने से होटल-रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल और मंत्री अजय देवनानी ने प्रशासन को बताया कि शहर के 2000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट कमर्शियल गैस पर निर्भर हैं। शादियों के सीजन में एक बड़े होटल में एक बार में 10-15 सिलेंडर और छोटे होटल में 2-4 सिलेंडर तक इस्तेमाल होते हैं। अभी कुछ जगह स्टॉक बचा है, लेकिन दो दिन में खत्म होने की आशंका है। सराफा एसोसिएशन के मुताबिक गैस संकट का असर सोना-चांदी के करीब 3 हजार कारीगरों पर भी पड़ सकता है, जिन्हें रोज करीब 300 सिलेंडर की जरूरत होती है। कलेक्टर ने बैठक में जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इंदौर: कमर्शियल सप्लाई बंद, होटल में अभी संकट नहीं इंदौर में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी गई है। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी 4-5 दिन में हो रही है। इंदौर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी के अनुसार अभी शहर में होटल इंडस्ट्री को कोई बड़ा संकट नहीं आया है, लेकिन आने वाले दिनों में परेशानी हो सकती है। होटल संचालकों ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाई है और मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी भी है। उज्जैन: रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर उज्जैन में भी दो दिन से कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। कलेक्टर रोशन सिंह के अनुसार फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ अस्पताल और स्कूलों को दिए जा रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग अब 25 दिन बाद ही हो सकेगी और डिलीवरी में 5-7 दिन लग सकते हैं। एजेंसियों के अनुसार पैनिक में लोग बड़ी संख्या में बुकिंग करा रहे हैं। ग्वालियर: बुकिंग बंद, सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं को छूट ग्वालियर में कमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग पूरी तरह बंद कर दी गई है। ग्वालियर-चंबल एलपीजी फेडरेशन के अनुसार फिलहाल सिर्फ हॉस्पिटल और इमरजेंसी सेवाओं को ही सिलेंडर दिए जा रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी में 5 से 6 दिन का समय लग रहा है। होटल-रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस नहीं मिलने पर कारोबार प्रभावित होगा। कई संचालक इंडक्शन चूल्हे का विकल्प भी तलाश रहे हैं। जबलपुर: होटल इंडस्ट्री पर असर शुरू जबलपुर में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने गैस सप्लाई कम होने की बात कही है। होटल अरिहंत पैलेस के संचालक राजेश जैन का कहना है कि सरकार ने इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर में सप्लाई सीमित कर दी है, जिससे होटल व्यवसाय प्रभावित हो सकता है। होटल संचालक शुभम गुप्ता ने बताया कि एजेंसी से सिलेंडर लेने पहुंचे तो उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। प्रदेश के बाकी शहरों में यह स्थिति सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रही है। पहले यह 853 रुपए की थी। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 1 फरवरी को 115 रुपए बढ़ाए गए थे। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। प्रदेश सरकार का दावा सप्लाई सामान्य, घबराने की जरूरत नहीं कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल और गैस की उपलब्धता की निगरानी के निर्देश दिए। मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक है और घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने और अधिकृत जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है। कालाबाजारी राेकने सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया इधर, केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर दिया है। अब गैस को 4 कैटेगरी में बांटा जाएगा…. संकट से निपटने सरकार ने 5 जरूरी कदम उठाए 1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी। 2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। 3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक होगा। 4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं। 5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। इस एक्स्ट्रा उत्पादन का इस्तेमाल घरेलू गैस के लिए होगा। सिलेंडर सप्लाई संकट की दो बड़ी वजह 1. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से









