Saturday, 02 May 2026 | 10:53 PM

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यूएन प्रमुख की रेस में 4 नाम, 2 महिलाएं:जेल में पिटाई, बिजली के झटके सहे, नहीं झुकीं मिशेल; रेबेका ने अनाज संकट से बचाया

यूएन प्रमुख की रेस में 4 नाम, 2 महिलाएं:जेल में पिटाई, बिजली के झटके सहे, नहीं झुकीं मिशेल; रेबेका ने अनाज संकट से बचाया

संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में पहली बार शीर्ष पद पर महिला नेतृत्व की उम्मीद बनी है। मौजूदा प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल दिसंबर में खत्म होगा। इस बार चार उम्मीदवार शार्ट लिस्ट हुए हैं। इनमें दो महिलाएं मिशेल बैचलेट (74) व रेबेका ग्रिनस्पैन (70) हैं। न्यूयॉर्क में 21-22 अप्रैल को दोनों की डिबेट होगी। मिशेल चिली की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं जबकि रेबेका कोस्टा रिका की उप राष्ट्रपति रह चुकी हैं। मिशेल – संसाधनों की कमी से मरीज को तड़पते देख डॉक्टरी की पढ़ाई की 1973 में चिली में जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने सैन्य तख्तापलट किया, तब मिशेल पैडिएट्रिक्स की पढ़ाई कर रही थीं। उस दौरान राष्ट्रपति सल्वाडोर से करीबी संबंध के चलते मिशेल के परिवार को बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। जेल में हाथ बांध लात-घूसे मारे गए। तब बंदियों को लोहे की ग्रिल से बिजली के झटके तक दिए जाते। यातनाओं से पिता की मौत के बाद भी मिशेल नहीं झुकीं। स्वास्थ्य मंत्री व रक्षा मंत्री के बाद 2006 में पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। तब शॉपिंग के लिए मॉल जाती तो प्रशंसक घेर लेते। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई का फैसला क्लीनिक में संसाधनों की कमी से तड़पते मरीज को देखकर ली। रेबेका – एक कॉल से कोस्टा रिका के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंची थीं 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होते ही वैश्विक खाद्य संकट गहराने लगा। यूक्रेन से गेहूं, मक्का, जौ का निर्यात ठप हुआ, दाम बढ़े व भुखमरी का खतरा पैदा हुआ। तब रेबेका यूएन व्यापार-विकास सम्मेलन की महासचिव थीं। उन्होंने मुख्य वार्ताकार बन रूस, तुर्किए व यूक्रेन में बातचीत कराई। नतीजा काला सागर से निर्यात का समझौता हुआ, जिससे 3.3 करोड़ टन अनाज बाजार पहुंचा। कीमतें 23% तक घटीं। उनकी राजनीति 80 के दशक में राष्ट्रपति ऑफिस से एक फोन कॉल से शुरू हुई, जिसने उन्हें आर्थिक सलाहकार बनाया फिर वित्त उप मंत्री होते हुए 1994 में मध्य अमेरिकी देश कोस्टा रिका की उपराष्ट्रपति बनीं।

तेल संकट का चीन पर असर क्यों नहीं पड़ा:20 साल पहले इमरजेंसी भंडार बनाए, नए तरीकों से बिजली; केमिकल के लिए भी निर्भर नहीं

तेल संकट का चीन पर असर क्यों नहीं पड़ा:20 साल पहले इमरजेंसी भंडार बनाए, नए तरीकों से बिजली; केमिकल के लिए भी निर्भर नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, वहीं चीन पर इसका असर बाकी दुनिया के मुकाबले कम दिखाई दे रहा है। इसकी वजह यह है कि चीन खुद को कई सालों से ऐसे हालात के लिए तैयारी कर रहा था। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है, इसलिए अगर तेल की सप्लाई में रुकावट आती है तो उसे सबसे ज्यादा नुकसान होना चाहिए था। लेकिन चीन ने पहले से ही बड़ी मात्रा में तेल जमा करके रखा हुआ है। इसके अलावा चीन बिजली से चलने वाले सिस्टम पर शिफ्ट कर चुका है और कोयले से भी जरूरी चीजें बना रहा है। चीन ने धीरे-धीरे अपनी ऊर्जा पॉलिसी को इस तरह बदला कि वह वैश्विक सप्लाई शॉक का सामना कर सके। सरकार ने अहम सेक्टर्स में निवेश बढ़ाया और इंडस्ट्रियल स्ट्रेंथ को राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बनाया। इसके साथ-साथ उसने बिजली बनाने के दूसरे तरीकों पर भी तेजी से काम किया है, जैसे सौर ऊर्जा, हवा से बनने वाली ऊर्जा और पानी से बनने वाली बिजली। इसी कारण अब चीन में पेट्रोल और डीजल की मांग धीरे-धीरे कम होती जा रही है। चीन ने फैक्ट्रियों और प्रोडक्शन को मजबूत बनाया चीन की सरकार लंबे समय से यह मानती है कि मजबूत इंडस्ट्री ही देश की असली ताकत होती है। इसी सोच के तहत उसने अपनी फैक्ट्रियों और उत्पादन क्षमता को इतना मजबूत बना लिया है कि उसे बाहर के देशों पर कम निर्भर रहना पड़े। खास तौर पर उसने उन सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दिया, जो उसके लिए रणनीतिक रूप से जरूरी हैं। सरकार सीधे तौर पर दिशा देती रही कि किन क्षेत्रों को मजबूत करना है, ताकि चीन किसी भी पश्चिमी देश के दबाव में न आए। ऊर्जा इस पूरी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा रही है। कुछ साल पहले तक चीन पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार था, लेकिन अब वह इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। इसका मतलब यह है कि वहां अब बड़ी संख्या में गाड़ियां तेल की जगह बिजली से चल रही हैं, जिससे तेल पर निर्भरता कम हो रही है। कोयले की मदद से जरूरी केमिकल बनाना सीखा 1990 के दशक में जब चीन कई फैक्ट्रियां बना रहा था, तब उसे केमिकल बनाने के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। ये वही केमिकल होते हैं जिनसे प्लास्टिक, रबर, धातु के हिस्से और कई दूसरी चीजें बनती हैं। लेकिन अब चीन ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे वह कोयले की मदद से ही कई जरूरी केमिकल बना सकता है, जैसे मेथेनॉल और सिंथेटिक अमोनिया। यह तकनीक नई नहीं है, बल्कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने भी इसका इस्तेमाल किया था। अब चीन इसी तरीके से तेल के बिना भी अपनी इंडस्ट्री चला सकता है। आज दुनिया का बड़ा हिस्सा केमिकल सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर है। उदाहरण के तौर पर, दुनिया का करीब तीन-चौथाई पॉलिएस्टर और नायलॉन चीन में बनता है। वियनताम-फिलीपींस ने चीन से मदद मांगी हाल ही में वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को जब ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने चीन से मदद मांगी। चीन ने भी कहा कि वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ मिलकर ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर काम करने को तैयार है। चीन की यह सोच नई नहीं है। साल 2000 के आसपास उसे इस बात की चिंता होने लगी थी कि उसका तेल कुछ खास समुद्री रास्तों पर निर्भर है, जैसे मलक्का स्ट्रेट। अगर वहां कोई समस्या होती है, तो सप्लाई रुक सकती है। इसी वजह से 2004 में चीन ने इमरजेंसी तेल भंडार बनाना शुरू किया और अब वह लगातार इसे बढ़ा रहा है। फिर भी चीन पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। आज भी उसकी करीब 75% तेल जरूरतें आयात से पूरी होती हैं। लेकिन उसने इलेक्ट्रिक गाड़ियों और नवीकरणीय ऊर्जा में इतना निवेश किया है कि पेट्रोल और डीजल की मांग लगातार दो साल से घट रही है। कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चीन में तेल की मांग अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है और आगे कम हो सकती है। चीन ने कोयले का इस्तेमाल बढ़ाया इसके साथ ही चीन ने कोयले का इस्तेमाल फिर से बढ़ा दिया है, खासकर केमिकल बनाने के लिए। 2020 में जहां उसने 155 मिलियन टन कोयला इस काम में इस्तेमाल किया था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 276 मिलियन टन हो गया और 2025 में इसमें और बढ़ोतरी हुई। सरकार कहती है कि यह एक अस्थायी उपाय है, जब तक वह पूरी तरह साफ ऊर्जा पर नहीं पहुंच जाता। लेकिन फिलहाल इससे उसे फायदा मिल रहा है, क्योंकि तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर, खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाला यूरिया देखें। इसकी वैश्विक कीमतें 40% से ज्यादा बढ़ गई हैं, लेकिन चीन में कोयले से बनने वाले यूरिया की कीमत वैश्विक दर से आधी से भी कम है। इससे चीन को बड़ा फायदा मिल रहा है। असल में, अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ सालों से चल रहे तनाव ने भी चीन को आत्मनिर्भर बनने के लिए और तेज कर दिया। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में शुरू हुए व्यापार युद्ध और तकनीकी टकराव ने चीन को यह एहसास कराया कि उसे अपने सप्लाई चेन और संसाधनों पर खुद का नियंत्रण मजबूत करना होगा। इसके बाद चीन ने अपनी इंडस्ट्री और तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाया। ———————————————- ये खबर भी पढ़ें… ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए‎ खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने‎ मिडिल ईस्ट में भारी निवेश किया हुआ है। साथ ‎ही ये क्षेत्र उसके इस्पात, इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर पैनलों के लिए बड़ा बाजार है।‎ ईरान के रूप में चीन को तेल का सस्ता स्रोत‎ मिला था। पूरे क्षेत्र में उसे ऐसी सरकारें भी मिलीं,‎जो नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में चीन से‎ सीखने के लिए उत्सुक थीं। इन्हीं सब के बीच‎ चीन तेल और गैस‎ के लिए मध्य पूर्व की

इंडक्शन बनाम इलेक्ट्रिक स्टोव: बिजली बिल की कीमत या कुकिंग की रेटिंग? रसोई गैस संकट में इलेक्ट्रिक चूल्हे के बीच असली ‘पैसा वसूल’ कौन है? जानें अंतर

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इंडक्शन बनाम इलेक्ट्रिक स्टोव कौन सा बेहतर है: शामिल एलपीजी इंजील की खबरों के बीच लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है, इलेक्ट्रिक कुकिंग संस्थानों की ओर से। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इलैक्ट्रिक चूल्हा लें या इलेक्ट्रिक चूल्हा? दोनों ही बिजली से चलते हैं, लेकिन काम करने का तरीका, खर्च और खाना पकाने की गति एक-दूसरे से काफी अलग हैं। तो जानें दोनों में से कौन है बेस्ट? टेक्नोलॉजी में क्या है फर्क? विद्युत चूल्हा इलेक्ट्रिक चूल्हे में एक मेटल कॉइल होता है, जो बिजली से खुद गर्म लाल हो जाता है। वही गर्मी से पॉश्चर गर्माहट होती है और खाना पकाता है। इन अज़ाब चूल्हा एक किताब में चुल्हा में थोड़ी उन्नति होती है। कॉइल खुद में गर्माहट नहीं होती, बल्कि चुंबकीय तरंगें यानी मैग्नेटिक तरंगें होती हैं, जो सीधे पॉलीकोइल को गर्म करती हैं। यानी इलेक्ट्रिक चूल्हा पहले खुद को गर्म करता है, जबकि डायरेक्टली स्टोव को गर्म करता है। सबसे सस्ता कौन है? दोनों की कीमत के बारे में बात करें तो इलेक्ट्रिक चूल्हा करीब ₹500-₹1000 तक मिलेगा और इलेक्ट्रिक चूल्हा ₹1500-₹4500 तक का मार्केट में मिलेगा। वहीं इलेक्ट्रिक चूल्हा बेहद सस्ता होता है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा कीमत मिलती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके लिए पॉटरी भी अलग-अलग इस्तेमाल की जाती है।शुरुआत में इलेक्ट्रिक चूल्हा आपकी जेब पर कम भार की जगह है। बिजली के खाते से सबसे अच्छा कौन है? बिजली के जमा खाते से 30-40% तक बिजली मिलती है, तो इलेक्ट्रिक चूल्हा में बिजली का बड़ा खाता होता है। लंबे समय तक इंकलाब में सबसे ज्यादा मुनाफाखोरी होती रही। कुकिंग स्पीड किसकी बेहतर? इन-इन-कैलोरी चूल्हा तेजी से खाना बनाने वाली संस्थाएं हैं, क्योंकि हीट स्ट्रेट पोर कोलेट करती है। जहां इलेक्ट्रिक चूल्हा पहले खुद गर्म होता है, वहीं फिर पोषाहार को गर्म करता है। इससे समय अधिकतर लगता है। जल्दी खाना बनाना है तो इन जैसा साफा जीतना है। पोचोरों का झंझट इन निवेशकों के लिए खास बातें इन-फ्रेंडली पॉज़िशन जरूरी होती हैं। वहीं इलेक्ट्रिक चूल्हे का भी सामान्य उपयोग किया जा सकता है। अगर कोई नया इलेक्ट्रानिक खरीदार नहीं चाहता है, तो इलेक्ट्रिक चूल्हा आसान विकल्प है। आखिर कौन सा आयोजन? यदि आपका बजट कम है या कभी-कभार ही खाना बनाना है या फिर आप नए प्वॉइंट नहीं खरीदना चाहते हैं तो इलेक्ट्रिक चूल्हा आपके लिए सर्वोत्तम पद पर आसीन हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ रोजाना खाना बनाना है और बिजली बिल बेचना चाहते हैं। इसके अलावा तेज और स्मार्ट खाना बनाना चाहिए? तो इन अलिखित चूल्हा में आपका काफी काम आ सकता है। यदि आप केवल कुछ समय के लिए या कम उपयोग के लिए चूल्हा लेना चाहते हैं, तो इलेक्ट्रिक चूल्हा ठीक है। लेकिन अगर आप एलपीजी का पूरा विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो यहां सिलेंडर में जरूरी समझदारी भरा और “पैसा वसूली” विकल्प है। यह अवश्य पढ़ें: खरबूजा ख़रीदने के टिप्स: खरबूजा मीठा है या नहीं? बिना काटे एक मिनट में पता लगाने के लिए काम आएंगे ये आसान टिप्स

इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम में चोरी करने वाला गिरोह पकड़ाया:CCTV फुटेज में कैद चोर के हाथ के टैटू से हुई पहचान; लैपटॉप-बैटरियां जब्त

इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम में चोरी करने वाला गिरोह पकड़ाया:CCTV फुटेज में कैद चोर के हाथ के टैटू से हुई पहचान; लैपटॉप-बैटरियां जब्त

ग्वालियर के झांसी रोड इलाके में इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम में चोरी करने वाले तीन शातिर चोरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वारदात CCTV कैमरों में कैद हो गई थी, जिससे पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली। फुटेज में एक आरोपी के हाथ पर बने टैटू के आधार पर उसकी पहचान की गई। पुलिस ने छापेमारी कर तीनों आरोपियों को पकड़ा और उनके कब्जे से एक लैपटॉप, दो बैटरियां और नकदी जब्त की है। आरोपियों पर पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह से अन्य चोरी की वारदातों का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल उनसे पूछताछ जारी है। जानकारी के अनुसार, मुरार स्थित शिवहरे कॉलोनी निवासी दिनेश शिवहरे का नाका चंद्रबदनी पुल के पास एम्पियर इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम है, जहां कुछ दिन पहले चोरी हुई थी। मामले की जांच सीएसपी विश्वविद्यालय हीना खान के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी झांसी रोड शक्ति सिंह यादव के नेतृत्व में की जा रही थी। CCTV से मिला सुराग: लैपटॉप के साथ घूमता आरोपी दबोचा CCTV फुटेज में तीन संदिग्धों के चेहरे सामने आने के बाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी। इसी दौरान रविवार को सूचना मिली कि विवेकानंद चौराहे के पास एक युवक काले रंग का लैपटॉप लेकर घूम रहा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया। उसकी पहचान 22 वर्षीय शुभम पुत्र राजेश वाल्मीकि निवासी नाका चंद्रबदनी, झांसी रोड के रूप में हुई। पूछताछ में शुभम ने अपने साथियों सौरभ खटीक और शक्ति जाटव के साथ 31 मार्च की सुबह 4 से 5 बजे के बीच शोरूम में चोरी करना कबूल किया। इसके बाद पुलिस ने सौरभ खटीक (रानीपुरा पुलिया) और शक्ति जाटव को नाका चंद्रबदनी पुलिया सब्जी मंडी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। बंटवारे में मिली रकम खाने-पीने में उड़ाई पुलिस पूछताछ में सामने आया कि शुभम वाल्मीकि को चोरी की रकम में 10 हजार रुपये मिले थे, जिनमें से अधिकांश उसने खाने-पीने में खर्च कर दिए। उसके पास से करीब 500 रुपए जब्त किए गए हैं। सौरभ खटीक ने अपने हिस्से की एक स्कूटी बैटरी घर में रखी थी। पुलिस ने उसके घर से एक बैटरी और 18,500 रुपए में से केवल 300 रुपए बरामद किए। वहीं, शक्ति जाटव के हिस्से में एक बैटरी और नकदी आई थी। उसने बैटरी साइंस कॉलेज की दीवार के पास झाड़ियों में छिपा दी थी, जबकि नकदी खर्च कर दी। पुलिस ने बैटरी बरामद कर ली है। टीआई झांसी रोड शक्ति सिंह यादव ने बताया- आरोपियों ने इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम के ताले तोड़कर चोरी की थी। घटना स्थल के CCTV फुटेज के आधार पर गिरोह को पकड़ लिया गया और चोरी का सामान बरामद कर लिया गया है।

मिडिल-ईस्ट जंग: कांग्रेस के 4 बड़े नेता सरकार के साथ:राहुल गांधी से अलग राय रखी; LPG संकट पर कहा- सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है

मिडिल-ईस्ट जंग: कांग्रेस के 4 बड़े नेता सरकार के साथ:राहुल गांधी से अलग राय रखी; LPG संकट पर कहा- सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है

कांग्रेस के चार बड़े नेता मिडिल ईस्ट जंग और एलपीजी संकट पर पार्टी लाइन से हटकर बात कर रहे हैं। इनमें कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी शामिल हैं। एक तरफ जहां राहुल गांधी इन मुद्दों पर सीधे पीएम का नाम लेकर निशाना साध रहे हैं। वहीं कांग्रेस के सीनियर लीडर मौजूदा परिस्थिति में भारत की विदेश नीति की तारीफ कर रहे। कांग्रेस MP मनीष तिवारी ने एक टीवी न्यूज चैनल पर वेस्ट एशिया युद्ध पर बोलते हुए कहा कि सरकार शायद सही काम कर रही है। गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भारत के डिप्लोमैटिक तरीके की तारीफ करते हुए इसे मैच्योर और स्किलफुल बताया। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गैस संकट पर कहा था कि ऐसी कोई कमी नहीं है। यह बस एक माहौल बनाया जा रहा है। सरकार के समर्थन में कांग्रेस नेताओं के बयान… आनंद शर्मा बोले- सरकार ने संभावित खतरों से बचाया आनंद शर्मा ने X पर पोस्ट में लिखा कि संकट से निपटने में भारत का डिप्लोमैटिक तरीका समझदारी भरा रहा है। जिससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने ‘एक अप्रत्याशित और अस्थिर स्थिति’ में राजनीतिक नेताओं को पॉलिसी फैसलों के बारे में बताने के लिए एक ऑल-पार्टी मीटिंग भी की। उन्होंने आगे लिखा कि यह नेशनल डायलॉग जारी रहना चाहिए। नेशनल एकता और नेशनल इंटरेस्ट को ध्यान में रखकर एक मैच्योर रिस्पॉन्स आज की जरूरत है। इस पोस्ट को भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी शेयर किया था। कमलनाथ बोले- गैस की कहीं पर कोई कमी नहीं LPG की कमी की कई रिपोर्टों के सामने आने पर कमलनाथ ने कहा, ऐसी कोई कमी नहीं है। यह बस एक माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कमलनाथ ने कुछ लोगों पर राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर पैनिक पैदा करने का आरोप लगाया। हालांकि इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी रिएक्शन दिया। उन्होंने X पर पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस के नेता खुद मान रहे हैं कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी नहीं है। थरूर बोले थे- भारत की चुप्पी जंग का समर्थन करना नहीं कांग्रेस MP शशि थरूर ने इंडियन एक्सप्रेस में एक आर्टिकल में लिखा था कि मिडिल ईस्ट जंग मामले में भारत का संयम स्ट्रेटेजिक समझदारी दिखाता है। उन्होंने लिखा, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। बल्कि हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हुए हैं। अब सरकार के खिलाफ राहुल के 2 बयान… 12 मार्च: राहुल बोले- देश में ईंधन की बड़ी समस्या आने वाली है राहुल गांधी ने कहा- आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। गलत विदेश नीति के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। अब हमें तैयारी करनी होगी। हमारे पास अभी थोड़ा समय है, इसलिए सरकार और प्रधानमंत्री को तुरंत तैयारी शुरू करनी चाहिए, वरना करोड़ों लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मुझे साफ दिख रहा है कि एक बड़ी समस्या आने वाली है। समस्या यह है कि प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे भी कारण हैं, वे फंसे हुए हैं। 21 मार्च: राहुल बोले- तेल की कीमतें बढ़ना महंगाई का संकेत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरने और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमत बढ़ने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने X पोस्ट में लिखा, ‘रुपए का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।’ ———————– ये खबर भी पढ़ें… घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज महंगे होंगे: रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ रही है और कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे बोतलबंद पानी, नमक, तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें, एसी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल से लेकर नॉन-सर्जिकल मेडिकल आइटम के दाम बढ़ सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

मिडिल-ईस्ट जंग: कांग्रेस के 4 बड़े नेता सरकार के साथ:राहुल गांधी से अलग राय रखी; LPG संकट पर कहा- सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है

मिडिल-ईस्ट जंग: कांग्रेस के 4 बड़े नेता सरकार के साथ:राहुल गांधी से अलग राय रखी; LPG संकट पर कहा- सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है

कांग्रेस के चार बड़े नेता मिडिल ईस्ट जंग और एलपीजी संकट पर पार्टी लाइन से हटकर बात कर रहे हैं। इनमें कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी शामिल हैं। एक तरफ जहां राहुल गांधी इन मुद्दों पर सीधे पीएम का नाम लेकर निशाना साध रहे हैं। वहीं कांग्रेस के सीनियर लीडर मौजूदा परिस्थिति में भारत की विदेश नीति की तारीफ कर रहे। कांग्रेस MP मनीष तिवारी ने एक टीवी न्यूज चैनल पर वेस्ट एशिया युद्ध पर बोलते हुए कहा कि सरकार शायद सही काम कर रही है। गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भारत के डिप्लोमैटिक तरीके की तारीफ करते हुए इसे मैच्योर और स्किलफुल बताया। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गैस संकट पर कहा था कि ऐसी कोई कमी नहीं है। यह बस एक माहौल बनाया जा रहा है। सरकार के समर्थन में कांग्रेस नेताओं के बयान… आनंद शर्मा बोले- सरकार ने संभावित खतरों से बचाया आनंद शर्मा ने X पर पोस्ट में लिखा कि संकट से निपटने में भारत का डिप्लोमैटिक तरीका समझदारी भरा रहा है। जिससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने ‘एक अप्रत्याशित और अस्थिर स्थिति’ में राजनीतिक नेताओं को पॉलिसी फैसलों के बारे में बताने के लिए एक ऑल-पार्टी मीटिंग भी की। उन्होंने आगे लिखा कि यह नेशनल डायलॉग जारी रहना चाहिए। नेशनल एकता और नेशनल इंटरेस्ट को ध्यान में रखकर एक मैच्योर रिस्पॉन्स आज की जरूरत है। इस पोस्ट को भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी शेयर किया था। कमलनाथ बोले- गैस की कहीं पर कोई कमी नहीं LPG की कमी की कई रिपोर्टों के सामने आने पर कमलनाथ ने कहा, ऐसी कोई कमी नहीं है। यह बस एक माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कमलनाथ ने कुछ लोगों पर राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर पैनिक पैदा करने का आरोप लगाया। हालांकि इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी रिएक्शन दिया। उन्होंने X पर पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस के नेता खुद मान रहे हैं कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी नहीं है। थरूर बोले थे- भारत की चुप्पी जंग का समर्थन करना नहीं कांग्रेस MP शशि थरूर ने इंडियन एक्सप्रेस में एक आर्टिकल में लिखा था कि मिडिल ईस्ट जंग मामले में भारत का संयम स्ट्रेटेजिक समझदारी दिखाता है। उन्होंने लिखा, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। बल्कि हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हुए हैं। अब सरकार के खिलाफ राहुल के 2 बयान… 12 मार्च: राहुल बोले- देश में ईंधन की बड़ी समस्या आने वाली है राहुल गांधी ने कहा- आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। गलत विदेश नीति के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। अब हमें तैयारी करनी होगी। हमारे पास अभी थोड़ा समय है, इसलिए सरकार और प्रधानमंत्री को तुरंत तैयारी शुरू करनी चाहिए, वरना करोड़ों लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मुझे साफ दिख रहा है कि एक बड़ी समस्या आने वाली है। समस्या यह है कि प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे भी कारण हैं, वे फंसे हुए हैं। 21 मार्च: राहुल बोले- तेल की कीमतें बढ़ना महंगाई का संकेत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरने और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमत बढ़ने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने X पोस्ट में लिखा, ‘रुपए का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।’ ———————– ये खबर भी पढ़ें… घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज महंगे होंगे: रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ रही है और कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे बोतलबंद पानी, नमक, तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें, एसी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल से लेकर नॉन-सर्जिकल मेडिकल आइटम के दाम बढ़ सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब इंडस्ट्री पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से मंडरा रहे संकट का मुद्दा आज विधानसभा में उठेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में की गई कटौती का मामला सदन में उठाने जा रहे हैं। यह मामला प्रदेश की 5500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी और लगभग 3 लाख बागवान परिवारों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन (EU) के लिए 20 प्रतिशत कर दी है। इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से अब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर भी संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह होगा प्रभावित कुलदीप राठौर ने बताया कि वाशिंगटन एपल के भारतीय बाजार में आने से हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे न केवल प्रीमियम सेब के दाम गिरेंगे, बल्कि कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अभी अमेरिका-न्यूजीलैंड और EU के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई गई गई है। अब इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव डालेंगे। मोदी ने किया था इम्पोर्ट ड्यूटी 100% का वादा राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। हकीकत में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि सदन में यह मामला उठाकर केंद्र सरकार से इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध जताएंगे और यह फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी। हिमाचल के बागवान सचिवालय का घेराव कर चुके बता दें कि हिमाचल के बागवान इस फैसले के खिलाफ दो महीने पहले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों का आरोप है कि केंद्र सरकार आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों के लिए इसे कम कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से बागवान ज्यादा चिंतित बागवानों की चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन लागत और उत्पादकता में अंतर भी है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि अमेरिका, न्यूजीलैंड और चीन जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। वहीं, हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब उत्पादन की लागत करीब 27 रुपए आती है। ऐसे में बागवानों को लाभ तभी मिल पाता है, जब उनका सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का बनाएंगे दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU को दी गई रियायतों के बाद अब अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विदेशी सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।

अंगोला से गैस खरीदने की तैयारी में भारतीय कंपनियां:सरकारी स्तर पर भी बातचीत जारी, होर्मुज संकट की वजह से भारत नए ऑप्शन तलाश रहा

अंगोला से गैस खरीदने की तैयारी में भारतीय कंपनियां:सरकारी स्तर पर भी बातचीत जारी, होर्मुज संकट की वजह से भारत नए ऑप्शन तलाश रहा

भारत में गैस की कमी की वजह से सरकारी तेल और गैस कंपनियां अब नए देशों से सप्लाई का ऑप्शन तलाश रही हैं। इसी कड़ी में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और गेल (इंडिया) लिमिटेड अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल से रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने के लिए बात कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल के साथ लंबी अवधि के समझौते (टर्म कॉन्ट्रैक्ट) करने पर विचार कर रही हैं। हालांकि, बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और सरकार से सरकार के स्तर पर भी चर्चा जारी है। यह हालात इसलिए बने हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है। यह रास्ता दुनिया में तेल और गैस सप्लाई के लिए बहुत अहम माना जाता है। इसके बंद होने से भारत समेत कई देशों की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा LPG उपभोक्ता भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 60% इंपोर्ट करता है। वहीं, करीब 50% LNG भी इंपोर्ट करता है। अभी तक भारत को ज्यादातर गैस मिडिल ईस्ट के देशों, खासकर कतर और UAE से मिलती रही है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण भारत की करीब 90% LPG आयात पर असर पड़ा है। इसी वजह से सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियम सख्त कर दिए हैं। अब शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन के अंतराल पर ही सिलेंडर बुक किया जा सकता है। अंगोला पहली बार भारत को LPG कर सकता है एक्सपर्ट्स का कहना है कि अफ्रीका से गैस सप्लाई अमेरिका की तुलना में 10 से 15 दिन जल्दी भारत पहुंच सकती है। ऐसे में अंगोला भारत के लिए एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है। अगर यह करार होता है, तो अंगोला पहली बार भारत को रसोई गैस सप्लाई करेगा। भारतीय कंपनियां LPG के लिए करीब एक साल और LNG के लिए कम से कम 10 साल का करार करने पर विचार कर रही हैं। अंगोला के पास करीब 4.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है और वह पहले से ही भारत को कच्चा तेल और LNG सप्लाई करता रहा है। वित्त वर्ष 2025 में अंगोला भारत का पांचवां सबसे बड़ा LNG सप्लायर था। ऑस्ट्रेलिया-अल्जीरिया और रूस से भी LPG खरीदने की तैयारी भारत सिर्फ अंगोला ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस इंपोर्ट के ऑप्शन तलाश रहा है, ताकि किसी एक रीजन पर निर्भरता कम की जा सके। इस गैस संकट का असर उर्वरक (फर्टिलाइजर) और स्टील सेक्टर जैसे उद्योगों पर भी पड़ सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो गैस की कीमतें भी बढ़ सकती हैं और भारत को महंगे दामों पर गैस -खरीदनी पड़ सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट की सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में दो बड़े जहाज करीब 94 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर भारत की ओर रवाना हुए हैं। भारत की 92% LPG खाड़ी के 4 देशों से आती है भारत का ज्यादातर LPG आयात फारस की खाड़ी के देशों UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से होता है। खास बात यह है कि इन सभी देशों से आने वाली गैस एक ही रास्ते, होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। यह सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता है, लेकिन दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का व्यापार यहीं से होता है। 2024-25 में भारत के करीब 92% LPG आयात इन्हीं चार खाड़ी देशों से आए। इनमें यूएई सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है, जिसकी हिस्सेदारी बढ़कर 40% से ज्यादा हो गई है। वहीं, कतर और सऊदी अरब की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। भारत में LPG की मांग बढ़ी लेकिन उत्पादन नहीं भारत में LPG की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन लगभग नहीं बढ़ रहा। यही वजह है कि देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाना पड़ रहा है, जिससे सप्लाई को लेकर जोखिम भी बढ़ गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने साल 2024-25 में 20.67 मिलियन टन LPG आयात किया, जो 2019-20 के 14.81 मिलियन टन के मुकाबले करीब 40% ज्यादा है। यानी सिर्फ पांच साल में आयात में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। भारत का घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर बना हुआ है। 2019-20 में देश ने 12.82 मिलियन टन LPG का उत्पादन किया था, जो 2024-25 में घटकर करीब 12.79 मिलियन टन रह गया। यानी उत्पादन में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। 2024-25 में भारत ने 31.32 मिलियन टन LPG का इस्तेमाल किया, जो 2019-20 के मुकाबले करीब 19% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में गैस कनेक्शन बढ़ने की वजह से हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों परिवारों को LPG कनेक्शन दिए गए हैं। अब देश में 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव गैस कनेक्शन हैं, जिससे मांग लगातार बढ़ रही है।

इछावर में पानी संकट पर युवक टंकी पर चढ़ा:एक घंटे तक मचाया हंगामा; पुलिस की समझाइश के बाद उतरा नीचे

इछावर में पानी संकट पर युवक टंकी पर चढ़ा:एक घंटे तक मचाया हंगामा; पुलिस की समझाइश के बाद उतरा नीचे

सीहोर जिले में जल संकट के बीच एक युवक पानी की मांग को लेकर इछावर के आजाद चौक स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गया। उसने करीब एक घंटे तक हंगामा किया और प्रशासन से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की। जानकारी के अनुसार, युवक टंकी पर चढ़कर जोर-जोर से चिल्ला रहा था और पानी की समस्या को उजागर कर रहा था। जब स्थानीय लोगों की समझाइश के बाद भी वह नीचे नहीं उतरा, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। इछावर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को काफी देर तक समझाया। पुलिस की समझाइश के बाद अधेड़ व्यक्ति पानी की टंकी से नीचे उतर आया। यह घटना सीहोर जिले में बढ़ते जल संकट की गंभीरता को दर्शाती है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

एमपी टूरिज्म होटल में लकड़ी के चूल्हे जले:एलपीजी संकट के कारण भरहुत में पारंपरिक भाठा पर बन रहा भोजन

एमपी टूरिज्म होटल में लकड़ी के चूल्हे जले:एलपीजी संकट के कारण भरहुत में पारंपरिक भाठा पर बन रहा भोजन

सतना जिले में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कमी के कारण होटल कारोबार प्रभावित हो रहा है। आधुनिक रसोईघरों से लैस कई होटल अब पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों पर लौटने को मजबूर हैं। गैस की अनियमित आपूर्ति के चलते कई होटल संचालक लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बना रहे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होटल भरहुत भी इस संकट से जूझ रहा है। होटल में 11 मार्च से गैस की अनुपलब्धता के कारण लकड़ी के चूल्हे और भाठा में भोजन तैयार किया जा रहा है। यह स्थिति होटल के संचालन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। निजी होटल संचालक जहां एलपीजी की कुछ वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर रहे हैं या घरेलू सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं, वहीं सरकारी नियंत्रण वाले होटल भरहुत को 11 मार्च से व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हुई है। इस कारण उन्हें पारंपरिक तरीके अपनाने पड़े हैं। गैस आधारित रसोई की तुलना में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय और श्रम लग रहा है। इससे ग्राहकों को समय पर सेवा प्रदान करना एक चुनौती बन गया है, जिससे होटल की कार्यप्रणाली पर सीधा असर पड़ रहा है। होटल भरहुत के असिस्टेंट मैनेजर सलिल सिंह ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि बीते कई दिनों से रसोई में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लकड़ी के चूल्हे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कामकाज प्रभावित होने के साथ-साथ लागत और प्रबंधन संबंधी दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। होटल भरहुत में चूल्हे के अलावा विंध्य का पारंपरिक भाठा भी तैयार किया गया है, जिसमें अधिकांश भोजन पकाया जा रहा है।