Wednesday, 23 Sep 2026 | 05:14 AM

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देश में चाइनीज स्मार्टफोन की बाजार हिस्सेदारी घटी:6 साल में सबसे कम हुई, 15000 रुपए से सस्ते फोन की बिक्री 45% घटी

देश में चाइनीज स्मार्टफोन की बाजार हिस्सेदारी घटी:6 साल में सबसे कम हुई, 15000 रुपए से सस्ते फोन की बिक्री 45% घटी

देश के स्मार्टफोन बाजार में अप्रैल-जून तिमाही में एक खास ट्रेंड देखा गया। चाइनीज ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी घटकर छह साल के निचले स्तर (18% तक) पर आ गई। दूसरी तरफ सैमसंग, नथिंग और गूगल पिक्सल जैसी कंपनियों ने बिक्री में तेज ग्रोथ दिखाई। रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के मुताबिक, जून तिमाही के दौरान स्मार्टफोन की कुल बिक्री सालाना आधार पर 10% घटी, जो बीते छह साल में जून-तिमाही की सबसे तेज गिरावट है। सबसे ज्यादा असर 15,000 रुपए से सस्ते फोन पड़ा, जिनकी बिक्री 45% घट गई। गिरावट की बड़ी वजह मेमोरी चिप (डेटा स्टोर करने वाला पुर्जा) की कीमतों में उछाल रही, जिसके चलते ज्यादातर कंपनियों ने फोन के दाम करीब 15% तक बढ़ा दिए। आउटलुक : पूरे साल में 13% घट सकती है बिक्री सितंबर, 2025 से अब तक स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप की कीमतें करीब 4 गुना बढ़ चुकी हैं। इसी वजह से अप्रैल-जून में स्मार्टफोन के औसत दाम करीब 15% बढ़ गए। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आगामी महीनों में इनके दाम 5 गुना तक बढ़ जाएंगे। इसे देखते हुए काउंटरपॉइंट का अंदाजा है कि इस साल स्मार्टफोन की कुल बिक्री 13% घट सकती है। ट्रेंड : देश के टॉप-5 ब्रांड्स में सिर्फ सैमसंग की बिक्री 2% बढ़ी, नए ब्रांड नथिंग की 105%, गूगल पिक्सल की 68% ओपो, वीवो, शाओमी, रियलमी, वनप्लस, आईक्यू और पोको जैसे चाइनीज ब्रांड्स का बड़ा कारोबार सस्ते फोन पर टिका है। यही वजह रही कि दाम बढ़ने से इनकी बाजार हिस्सेदारी 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई। बिक्री के लिहाज से टॉप-5 ब्रांड्स में सैमसंग इकलौती कंपनी रही, जिसकी बिक्री 2 फीसदी बढ़ी। गैलेक्सी ए और एस सीरीज की मजबूत मांग देखी गई। नथिंग सबसे तेज बढ़ने वाला ब्रांड रहा। इसकी बिक्री में 105 फीसदी उछाल आया। प्रीमियम सेगमेंट में गूगल पिक्सल ने आक्रामक मार्केटिंग और स्थिर कीमतों के दम पर 68 फीसदी ग्रोथ दिखाई।

भास्कर ​रिसर्च: खरीदारी का तरीका बदल रहा:सोफा-टीवी से आरओ तक मासिक किराए पर लेने का दौर, घरेलू चीजों का रेंटल मार्केट 33500 करोड़ पहुंचा

भास्कर ​रिसर्च: खरीदारी का तरीका बदल रहा:सोफा-टीवी से आरओ तक मासिक किराए पर लेने का दौर, घरेलू चीजों का रेंटल मार्केट 33500 करोड़ पहुंचा

आजकल सामान खरीदने के बजाय उसे किराये (सब्सक्रिप्शन) पर लेने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती महंगाई और बार-बार शहर बदलने की मजबूरी ने लोगों की सोच बदल दी है। अब लोग सोफा, बेड, टीवी, फ्रिज, एसी और कार जैसी महंगी चीजों का मालिक बनने के बजाय, हर महीने एक निश्चित किराया देकर उनका उपयोग करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रेंटोमोजो और फर्लेंको जैसी कंपनियां इस सुविधा को आसान बना रही हैं। फर्नीचर और घरेलू उपकरणों का रेंटल बाजार भी पीछे नहीं है। रेडसीर के अनुसार, यह बाजार अभी 33,500 करोड़ रु. का है। जानकारों का अनुमान है कि 2032 तक यह 46,000 करोड़ रु. के पार निकल जाएगा। यह नया ट्रेंड बताता है कि भारतीय परिवारों के लिए अब चीजों के मालिकाना हक से ज्यादा ‘सुविधा’ और ‘किफायत’ जरूरी हो गई है। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम हो रहा है, बल्कि लाइफस्टाइल को अपग्रेड करना भी आसान हो गया है। एक स्टडी के मुताबिक, देश में औसत सब्सक्रिप्शन 13 महीने का होता है। देश में सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी की शुरुआत ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से हुई थी। इसी ने लोगों के बीच मासिक सब्सक्रिप्शन की आदत डाली। एक्सप्लेनर: चीन के बाद सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही हमारी सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी छोटे फर्नीचर 79 रु./माह से शुरू, कारें 600 रु./दिन पर हैं 1. किराए पर सामान लेने से क्या फायदा है? यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जो बार-बार शहर बदलते हैं या भारी निवेश के बिना अच्छी लाइफस्टाइल चाहते हैं। 2. आखिर ये किराया कितना किफायती है? यह बहुत सस्ता है। छोटे फर्नीचर ₹79/माह और अप्लायंसेज ₹149/माह से शुरू होते हैं। 1BHK का पूरा सेटअप भी ₹514-₹570 रु./माह के आसपास मिल सकता है। 3. डिलीवरी और इंस्टॉलेशन का क्या होता है? डिलीवरी और इंस्टॉलेशन का शुल्क चेकआउट पर अलग से जुड़ता है। बेड, गद्दे, फ्रिज और वॉशिंग मशीन का इंस्टॉलेशन आमतौर पर मुफ्त होता है। 4. क्या मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ग्राहक की है? नहीं, सामान की मरम्मत और मेंटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होती है। 5. क्या कोई अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है? हर सब्सक्रिप्शन के साथ लगभग ₹1,000 का ‘डैमेज-वेवर’ चार्ज जुड़ता है। कंपनियों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। 6. क्या इन कंपनियों में कोई ऑफर होता है? कुछ कंपनियां पहले महीने के किराए पर किड्स फर्नीचर पर 22% (₹1,100 तक) की छूट जैसे शुरुआती ऑफर्स देती हैं। 7. कार सब्सक्रिप्शन का शुरुआती किराया? शॉर्ट-टर्म सेल्फ-ड्राइव में किराया ₹499/दिन, जबकि प्रीमियम एसयूवी में ₹999/दिन से शुरू है। आमतौर पर बजट कारों का रोजाना रेंट 600-800 रु. के बीच है। 8. लंबी अवधि में कार लेने का रेंट क्या है? लॉन्ग-टर्म सब्सक्रिप्शन के लिए किराया ₹15,000 प्रति माह से शुरू होता है। 9. कंपनियां क्या-क्या खर्च वहन करती हैं? कार की कीमत, रोड टैक्स, इंश्योरेंस और सर्विसिंग यानी ओनरशिप का झंझट कंपनी संभालती है। हालांकि इंश्योरेंस क्लेम में जो रकम कंपनी सेटल नहीं करती, वो पैसे और क्लेम-फाइलिंग चार्ज ग्राहक देते हैं। 10. ग्राहक को जेब से क्या-क्या देना होता है? ईंधन (पेट्रोल/डीजल), टोल टैक्स, पार्किंग और राज्यों की एंट्री फीस का भुगतान ग्राहक को खुद करना पड़ता है। 11. ये कंपनियां कितने शहरों में उपलब्ध हैं? ये कंपनियां देशभर के 21-30 से अधिक शहरों में सेवाएं दे रही हैं, जिनमें इंदौर, जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ शामिल हैं। 12. सब्सक्रिप्शन बीच में बंद कर सकते हैं? हां, सब्सक्रिप्शन ट्रांसफर कर सकते हैं या सामान लौटा सकते हैं, पर अर्ली चार्ज है। 13. आरओ का सब्सक्रिप्शन कितने का है? आरओ खरीदने में 10,000-30,000 रु. खर्च होते हैं। लिवप्योर जैसी कंपनियां आरओ 429 रु./महीने के सब्सक्रिप्शन पर दे रहीं। इसमें मशीन, इंस्टॉलेशन, फिल्टर बदलना और सर्विसिंग भी शामिल होती है। 14. रेंटल कंपनियों तक कैसे पहुंच सकते हैं? ऑर्डर एप/साइट से बुक होते हैं। टीम घर पर डिलीवरी-इंस्टॉलेशन करती है। शहर बदलने पर सामान फ्री में शिफ्ट करते हैं। भारत में सालाना ग्रोथ 16.6% है… फ्यूचर मार्केट इनसाइट्स के मुताबिक, भारत की सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी हर साल करीब 16.6% बढ़ रही है। यह चीन (18%) के बाद दुनिया की सबसे तेज वृद्धि दरों में से एक है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में और ज्यादा कंपनियां ‘प्रोडक्ट बेचने’ के बजाय ‘सर्विस मॉडल’ पर काम करने के लिए मजबूर होंगी। लेकिन ये मॉडल हर जगह सफल नहीं… अमेरिका में कैडिलैक, ऑडी, बीएमडब्ल्यू और वॉल्वो जैसी कंपनियों ने कार सब्सक्रिप्शन सर्विस शुरू कीं, लेकिन ऊंची लागत और जटिल ढांचे के कारण अधिकांश स्कीम्स बंद करनी पड़ीं। चीन में कपड़ों की सब्सक्रिप्शन कंपनी वाईक्लोजेट भी इसी वजह से नहीं टिक सकी। इस मामले में ओटीटी सबसे सफल मॉडल रहा। बेहतर मौके खोजने वाले युवाओं में ट्रेंड बढ़ रहा है भास्कर एक्सपर्ट: संजय छाबड़ा- एमडी, लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स हाल के वर्षों में सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी तेजी से बढ़ी है। लेकिन यह अब भी मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित है। दरअसल मौजूदा दौर में युवा लगातार बेहतर मौके की तलाश में रहते हैं। इसके चलते उन्हें कुछ ही साल के अंतर पर शहर बदलना पड़ता है। इसलिए वे घर के सामान खरीदने की बजाय किराए पर लेना पसंद करते हैं। खास तौर पर कोविड के बाद यह नया बिजनेस मॉडल ट्रेंड में आया है। हमारे आंकड़े कहते हैं कि 5 साल पहले तक 76% ग्राहक कैश में इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदते थे। अब 20% ही कैश पेमेंट करते हैं। बाकी ग्राहक ईएमआई पर सामान लेते हैं। जाहिर है, उन पर मासिक किस्तों का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यदि सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी बढ़ रही है तो ये स्वाभाविक ही है। लेकिन छोटे-मझोले शहरों में इस मॉडल ने अब भी जोर नहीं पकड़ा है।

दही भल्ला रेसिपी: आपके भी दही भल्ले रह जाते हैं सख्त, इस सीक्रेट तरीके से बनाएं रुई जैसे मुलायम, मुंह में डालें ही खा जाएंगे

दही भल्ला रेसिपी

18 जुलाई 2026 को 20:46 IST पर अपडेट किया गया दही भल्ला रेसिपी: दही भल्ला रेसिपी: दही भल्ला सभी को बहुत पसंद आता है, लेकिन अक्सर लोगों की फरमाइश होती है कि घर पर बनाए गए भल्ले सख्त रह जाते हैं. अगर आप भी बाजार में रुई जैसे नैर और स्पैनी दही भल्ले बनाना चाहते हैं, तो इन खास टिप्स और सामग्री का उपयोग करके आप घर पर ही प्रभावकारी परिणाम पा सकते हैं। अनुसरण करना : 1 कप उड़द दालअदरक का टुकड़ाहरी मिर्चनमकतेल2 कप आराध्य देवी2 चीनी चीनीआधा काला नमकहाल ही में हुआ जीरा पाउडरलाल मिर्च पाउडरइमली और खजूर की मिठाईहरी धनिया और पुदीने की चटनीअनारदाने और कटा हरा धनिया छवि: ऐ उड़द की दाल को 4 से 5 घंटे तक अकेलेकर रखें। पीसते समय कम पानी का उपयोग करें ताकि बैटर फ्लोट रहे। इसमें अदरक- हरी मिर्च की गोलियां, इसे कम से कम 10 से 15 मिनट तक फेंटें, जिसमें मिक्सचर और फ्लफी हो जाए। छवि: एआई भल्लों को हमेशा अधिष्ठापन पर तलें। तेज गति पर भल्ले ऊपर से जल जाएंगे और अंदर से कच्ची रह जाएंगी, वहीं अधम जंक पर वे तेल ज्यादा सोख छोड़ देंगे। छवि: एआई आख़िर हुए भल्लों को सीधे दही में न डालें। सबसे पहले उन्हें गुनगुने नमक वाले पानी में 10 से 15 मिनट के लिए ऑनलाइनकर लें। इससे भल्ले एक्स्ट्रा तेल छोड़ गए और सीधा नर हो जाएंगे। छवि: एआई दही भल्लों का असली स्वाद दही पर वर्जित है। दही को अच्छी तरह से फेंटें या छन्नी से अच्छी लें ताकि वह एकदम सही और क्रीमी हो जाए। इसमें स्वाद में आधा चीनी और नमक मिला हुआ है। छवि: एआई अपुष्ट हाथों से चित्रित किए गए भल्लों को प्लेटों में रखा गया और ऊपर से नवजात शिशु को रखा गया। इसके बाद इमली की खट्टी-मीठी चटनी, हरी चटनी, जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और अनार के दानों से सजाकर सजावटें हुईं। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 18 जुलाई 2026 को 20:46 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)दही भल्ला रेसिपी(टी)सॉफ्ट दही भल्ला(टी)सॉफ्ट दही भल्ला कैसे बनाएं(टी)दही वड़ा रेसिपी हिंदी में(टी)परफेक्ट दही भल्ला टिप्स(टी)इंडियन स्ट्रीट फूड रेसिपी(टी)दही स्नैक्स रेसिपी

कबाड़ के जरिए फर्जी कैशबैक; साइबर ठगी का नया खेल:पार्सल बॉक्स के लेबल से पर्सनल डेटा चुरा रहे ठग, ऐसे बना रहे आपको शिकार

कबाड़ के जरिए फर्जी कैशबैक; साइबर ठगी का नया खेल:पार्सल बॉक्स के लेबल से पर्सनल डेटा चुरा रहे ठग, ऐसे बना रहे आपको शिकार

आपने जो पार्सल अभी-अभी खोला उसका डिब्बा कूड़े में फेंक दिया। लेकिन क्या पता वो डिब्बा आपके बैंक अकाउंट तक पहुंचने का रास्ता बन जाए। यह अजीब जरूर है, लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स की मानें तो अमेजन और फ्लिपकार्ट के पार्सल पर चिपका वो छोटी-सा स्टीकर, जिसे हम कभी गौर से देखते भी नहीं, जालसाजों के लिए सोने की खान बन गया है। जरा सोचिए, हर बार जब आप ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, डिलीवरी बॉक्स पर लगी चिट्ठी में क्या-क्या छपा होता है। इसमें आपका नाम, फोन नंबर, पूरा पता, ईमेल आईडी, और कई बार तो यह भी होता है कि आपने क्या खरीदा। पैकेट खुलते ही यह जानकारी बेकार लगती है, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे बॉक्स को कूड़ेदान में डाल देते हैं। यहीं से शुरू होती है असली कहानी। ठग कूड़े के ढेर या कबाड़ी के पास से पार्सल डिब्बे उठाते हैं और उन पर छपी जानकारियां नोट कर लेते हैं। इसके बाद वे खुद को अमेजन, फ्लिपकार्ट या किसी डिलीवरी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर फोन करते हैं। चूंकि उनके पास आपका नाम, पता और हाल में की गई खरीदारी की जानकारी होती है, लिहाजा बातचीत सही लगती है और भरोसा बनते देर नहीं लगती। इसके बाद कैशबैक, लॉयल्टी रिवॉर्ड या अगली खरीदारी पर छूट का लालच देकर एक फीडबैक सर्वे भरने को कहा जाता है। एसएमएस, वाट्सएप या ई-मेल पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करते ही खेल शुरू हो जाता है। यह लिंक किसी फर्जी वेबसाइट पर ले जाता है, जहां बैंक डिटेल्स, कार्ड नंबर या ओटीपी मांगा जाता है। कई बार तो फोन में एक ऐसा मैलिशियस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जो पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल्स चुराकर सीधे अकाउंट से पैसे उड़ा ले जाता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा फ्रॉड शुरू होता है एक ऐसी जगह से, जिसे हम कचरा समझकर भूल जाते हैं। लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग जितनी बढ़ रही है, ठगों के तरीके भी उतने ही नए और शातिर होते जा रहे हैं। लेकिन एक छोटी-सी आदत- डिब्बा फेंकने से पहले लेबल मिटाना आपको इस नए तरह के फ्रॉड का अगला शिकार बनने से बचा सकती है। तो ऐसी धोखाधड़ी से बचाव का तरीका क्या है? जवाब उतना ही आसान है, जितनी यह समस्या मुश्किल लगती है। बॉक्स फेंकने से पहले शिपिंग लेबल फाड़ें, काटें या खुरच दें, ताकि उस पर लिखी जानकारियां कोई पढ़ न सके। आइडेंटिटी प्रोटेक्शन रोलर स्टैंप से भी संवेदनशील जानकारी छिपाई जा सकती है। साथ ही, अगर कोई कॉल पर खुद को ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताकर एप इंस्टॉल करने, अनजान लिंक पर क्लिक करने या ओटीपी-बैंक डिटेल्स शेयर करने के लिए कहे, तो सतर्क हो जाएं। अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां अमूमन ऐसी मांग नहीं करतीं। किसी भी ऑफर या कैशबैक मैसेज की सच्चाई जानने के लिए कंपनी की ऑफिशियल एप पर जांच करें।

बालों के लिए फिटकारी: चिपचिपी हीट में स्कैल्प से डैंड्रफ की छुट्टी फिटकारी, जान लें इस्तेमाल का सही तरीका; हेयरफॉल भी कम होगा

तस्वीर का विवरण

फिटकरी में बेहतरीन एंटी-सहायक और एंटी-फंगल गुण होते हैं। यह स्कैल्प की जड़ों को गहराई से साफ करती है, डैंड्रफ को जड़ों से मिटाती है और हेयरफॉल को भी काफी हद तक कम करती है। छवि: एआई प्रयोग का पहला उपाय: संस्थान से पहले एक मग पानी में एक छोटा टुकड़ा फिटकरी का स्थान। जब यह पानी में चमक जाए, तो इस जादुई पानी से अपने बालों और स्कैल्प को अच्छी तरह धो लें। छवि: फ्रीपिक इसके अलावा आप अन्य तरीकों से भी फिटकरी का न्यूट्रिशन पाउडर बना सकते हैं। अब अपने नारियल या सरसों के तेल में एक पिंच फिटकरी पाउडर और इसी तरह के स्कैल्प के हाथ से मसाज करें। छवि: फ्रीपिक तेल और फिटकरी के इस मिश्रण को बालों में 20 से 30 मिनट तक लगा रहा। इसके बाद किसी माइल्ड या प्लांट शैम्पू से बालों को धो लें। इससे पहली बार डैंड्रफ की छुट्टी होगी। छवि: एआई फिटकरी का इस्तेमाल हर हफ्ते सिर्फ 1 या 2 बार ही करें। इसका बहुत ज्यादा उपयोग बालों को रूखा बनाने के लिए किया जा सकता है। यदि स्कैल्प पर कोई घाव या कट है, तो इसका उपयोग न करें। छवि: फ्रीपिक गर्मियों में इस सबसे आसान और सस्ते घरेलू नुस्खे को जरूर अपनाएं। कुछ ही तरीक़े से आपके बाल डैंड्रफ-मुक्त, मजबूत और चमकदार बन जायेंगे। आज ही इसे अपना हेयर केयर रूटीन का भाग जारी करें। छवि: फ्रीपिक अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 18 जुलाई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सरकार ने अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें साप्ताहिक की जगह रोजाना तय करने का फैसला किया है। फरवरी से शुरू हुआ था बढ़ने का सिलसिला हालिया बढ़ोतरी के बावजूद दोनों ईंधन अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई (पीक लेवल) से नीचे बने हुए हैं। 3 अप्रैल को डीजल की कीमत 520.35 रुपया प्रति लीटर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में यह तेजी 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद देखने को मिली थी, जब डीजल 281 रुपया प्रति लीटर के स्तर पर था। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोल की कीमत भी 3 अप्रैल को 458.41 रुपया के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसकी शुरुआत मार्च के पहले हफ्ते में 266 रुपया प्रति लीटर से हुई थी। अब हर रोज तय होंगे दाम पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बदल रही हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट और प्रधानमंत्री ने फैसला किया है कि अब ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को रोजाना कीमतें तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। OGRA न सिर्फ अपनी वेबसाइट पर रोज सुबह नए रेट जारी करेगी, बल्कि यह भी सार्वजनिक करेगी कि पेट्रोल पंप तक पहुंचते-पहुंचते टैक्स, मार्जिन और अन्य खर्चों की वजह से कीमतें किस तरह तय हुईं। इससे पहले मार्च की शुरुआत से सरकार हर हफ्ते कीमतों की समीक्षा कर रही थी। एक लीटर तेल पर 105 रुपया तो सिर्फ टैक्स, डीलर्स ने दी आंदोलन की चेतावनी आम जनता को मिलने वाले पेट्रोल-डीजल पर सरकार भारी-भरकम टैक्स वसूल रही है। इस समय दोनों पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर प्रति लीटर लगभग 105 रुपया का टैक्स लिया जा रहा है। इसमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन शामिल हैं। दूसरी ओर, ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने सरकार के ‘डेली प्राइसिंग’ यानी रोज दाम बदलने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि रोज दाम बदलने से उनके बिजनेस और स्टॉक मैनेजमेंट में दिक्कतें आएंगी। डीलर्स ने चेतावनी दी है कि वे इसके खिलाफ अगले हफ्ते एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 18 जुलाई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सरकार ने अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें साप्ताहिक की जगह रोजाना तय करने का फैसला किया है। फरवरी से शुरू हुआ था बढ़ने का सिलसिला हालिया बढ़ोतरी के बावजूद दोनों ईंधन अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई (पीक लेवल) से नीचे बने हुए हैं। 3 अप्रैल को डीजल की कीमत 520.35 रुपया प्रति लीटर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में यह तेजी 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद देखने को मिली थी, जब डीजल 281 रुपया प्रति लीटर के स्तर पर था। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोल की कीमत भी 3 अप्रैल को 458.41 रुपया के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसकी शुरुआत मार्च के पहले हफ्ते में 266 रुपया प्रति लीटर से हुई थी। अब हर रोज तय होंगे दाम पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बदल रही हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट और प्रधानमंत्री ने फैसला किया है कि अब ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को रोजाना कीमतें तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। OGRA न सिर्फ अपनी वेबसाइट पर रोज सुबह नए रेट जारी करेगी, बल्कि यह भी सार्वजनिक करेगी कि पेट्रोल पंप तक पहुंचते-पहुंचते टैक्स, मार्जिन और अन्य खर्चों की वजह से कीमतें किस तरह तय हुईं। इससे पहले मार्च की शुरुआत से सरकार हर हफ्ते कीमतों की समीक्षा कर रही थी। एक लीटर तेल पर 105 रुपया तो सिर्फ टैक्स, डीलर्स ने दी आंदोलन की चेतावनी आम जनता को मिलने वाले पेट्रोल-डीजल पर सरकार भारी-भरकम टैक्स वसूल रही है। इस समय दोनों पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर प्रति लीटर लगभग 105 रुपया का टैक्स लिया जा रहा है। इसमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन शामिल हैं। दूसरी ओर, ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने सरकार के ‘डेली प्राइसिंग’ यानी रोज दाम बदलने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि रोज दाम बदलने से उनके बिजनेस और स्टॉक मैनेजमेंट में दिक्कतें आएंगी। डीलर्स ने चेतावनी दी है कि वे इसके खिलाफ अगले हफ्ते एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।

नोलन से मार्वल तक; हॉलीवुड फिल्मों की नई रणनीति:भारत बना हॉलीवुड का बड़ा प्रमोशन मार्केट, पहली बार 2,000 करोड़ कमाई की उम्मीद

नोलन से मार्वल तक; हॉलीवुड फिल्मों की नई रणनीति:भारत बना हॉलीवुड का बड़ा प्रमोशन मार्केट, पहली बार 2,000 करोड़ कमाई की उम्मीद

क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म द ऑडेसी रिलीज हो चुकी है। इसकी सबसे खास बात रही कि उन्होंने अपनी फिल्म का पहला भारतीय प्रीमियर मुंबई में किया। यह पहली बार है जब नोलन जैसे निर्देशक ने भारत को लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क के बराबर अपनी आधिकारिक ग्लोबल प्रमोशन सूची में रखा। इन हस्तियों ने मुंबई के कोलाबा में स्थित 108 साल पुराने ओलंपिया कॉफी हाउस में बन मस्का का आनंद भी लिया है। दरअसल हॉलीवुड फिल्मों के लिए भारत सबसे तेजी से बढ़ता बाजार है। 2026 में हॉलीवुड फिल्मों की कमाई पहली बार भारत में 2 हजार करोड़ रु. के पार पहुंच सकती है। हॉलीवुड अपना रहा ‘इंडिया-फर्स्ट’ नीति 1. भारतीय दर्शकों ने पहले भी भरोसा जताया भारत में ओपेनहाइमर नोलन की पहली 100 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाने वाली फिल्म बनी। यह अमेरिका के बाद शीर्ष कमाई वाले बाजारों में शामिल हुई थी। 2. तीन महीने पहले शुरू हो रही फिल्मों की बुकिंग मार्वल स्टूडियोज 20 जुलाई से एवेंजर्स: डूम्सडे की एडवांस बुकिंग शुरू करने की तैयारी में है, जबकि फिल्म 18 दिसंबर को रिलीज होगी। शुरुआती बुकिंग इनफिनिटी विजन जैसे प्रीमियम बड़े स्क्रीन फॉर्मेट के लिए होगी। 3. सिर्फ हिन्दी नहीं, क्षेत्रीय भाषाओं पर भी जोर ‘अवातार: फायर एंड एंश’ में अंग्रेजी ट्रेलर से ज्यादा जोर हिंदी, तमिल, तेलुगु और दूसरी भाषाओं पर दिया गया। मार्वल की फिल्म एवेंजर्स: डूम्सडे में भी अलग-अलग भारतीय भाषाओं के बड़े कलाकारों से डबिंग कराई जा रही है। 4. सिर्फ फिल्म ही नहीं, ‘इवेंट’ बेचा जा रहा ब्रैड पिट की एफ1 सिर्फ फिल्म नहीं थी। भारत में रेसिंग सिम्युलेटर लगाए गए। गेमिंग एरीना से साझेदारी हुई। स्पोर्ट्स चैनलों के साथ प्रचार किया गया। आईमैक्स और 4DX अनुभव को मुख्य आकर्षण बनाया गया। 5. भारत में प्रीमियम स्क्रीन का क्रेज भी बढ़ रहा है भारत में अभी 70mm आईमैक्स जैसे थिएटर नहीं हैं, फिर भी नोलन ने भारत को प्राथमिकता दी। इसकी वजह यह है कि यहां आईमैक्स और अन्य प्रीमियम फॉर्मेट में फिल्में देखने वाले दर्शकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ट्रेंड; हॉलीवुड फिल्मों की 6 साल बाद सबसे ज्यादा कमाई 2019 में हॉलीवुड फिल्मों ने भारत में रिकॉर्ड 1,595 करोड़ कमाए और कुल बॉक्स ऑफिस में 15% हिस्सेदारी हासिल की। लेकिन महामारी के बाद यह रफ्तार टूट गई। यही वजह है कि अब हॉलीवुड अपनी रणनीति बदल रहा है। रिकॉर्ड; 6 महीने में हॉलीवुड करेगा 1500 करोड़ रु. कमाई जनवरी से जून के बीच अंग्रेजी फिल्मों ने 512 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। लेकिन 2026 पहला साल हो सकता है जब भारत में हॉलीवुड फिल्मों की कमाई पहली बार ₹2,000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर जाए। स्पाइडरमैन: ब्रैंड न्यू डे 30 जुलाई जुमानजी: ओपन वर्ल्ड 11 दिसंबर एवेंजर्स: डूम्सडे 18 दिसंबर ड्यून पार्ट-3 18 दिसंबर

स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी के ऑफिस पहुंचे सलमान खान:बुजुर्गों को चाबियां दीं, हाथ मिलाया, फिल्म मातृभूमि से जुड़ा सवाल करने से इनकार

स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी के ऑफिस पहुंचे सलमान खान:बुजुर्गों को चाबियां दीं, हाथ मिलाया, फिल्म मातृभूमि से जुड़ा सवाल करने से इनकार

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान शुक्रवार को SRA (स्लब रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी) के दफ्तर पहुंचे, जहां उन्होंने कई बुजुर्गों को उनके सपनों के घर की चाबियां सौंपीं। एक्टर टाइट सिक्योरिटी के साथ पहुंचे थे, इसके बावजूद भीड़ ने उन्हें घेर लिया। सलमान खान के पर्सनल सिक्योरिटी हैड शेरा भी उनके साथ मौजूद रहे। सलमान ने वहां मौजूद बुजुर्ग महिलाओं को उनके घरों की चाबियां दीं और मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया। देखिए तस्वीरें- मातृभूमि से जुड़े सवाल पूछने से रोका ऑफिस में सलमान खान के साथ मौजूद टीम ने वहां पहुंचे लोगों से कहा कि वो चाहें तो सवाल पूछ सकते हैं। एक शख्स उनकी फिल्म से जुड़ा सवाल पूछता, उससे पहले ही सलमान ने कहा, बस एक सवाल छोड़कर बाकी कुछ भी पूछ लेना। उसका जवाब तो मेरे पास भी नहीं है। सलमान खान ने SRA के डेटा कलेक्शन एंड सेग्रिगेशन सपोर्ट सेंटर (आईटी सर्वर रूम) का उद्घाटन भी किया। यह आधुनिक आईटी सर्वर रूम डिजिटल प्रशासन को अधिक मजबूत, सुरक्षित और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही, इससे SRA की ई-गवर्नेंस पहलों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। विवादों में है सलमान खान की फिल्म मातृभूमि

स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी के ऑफिस पहुंचे सलमान खान:बुजुर्गों को चाबियां दीं, हाथ मिलाया, फिल्म मातृभूमि से जुड़ा सवाल करने से इनकार

स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी के ऑफिस पहुंचे सलमान खान:बुजुर्गों को चाबियां दीं, हाथ मिलाया, फिल्म मातृभूमि से जुड़ा सवाल करने से इनकार

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान शुक्रवार को SRA (स्लब रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी) के दफ्तर पहुंचे, जहां उन्होंने कई बुजुर्गों को उनके सपनों के घर की चाबियां सौंपीं। एक्टर टाइट सिक्योरिटी के साथ पहुंचे थे, इसके बावजूद भीड़ ने उन्हें घेर लिया। सलमान खान के पर्सनल सिक्योरिटी हैड शेरा भी उनके साथ मौजूद रहे। सलमान ने वहां मौजूद बुजुर्ग महिलाओं को उनके घरों की चाबियां दीं और मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया। देखिए तस्वीरें- मातृभूमि से जुड़े सवाल पूछने से रोका ऑफिस में सलमान खान के साथ मौजूद टीम ने वहां पहुंचे लोगों से कहा कि वो चाहें तो सवाल पूछ सकते हैं। एक शख्स उनकी फिल्म से जुड़ा सवाल पूछता, उससे पहले ही सलमान ने कहा, बस एक सवाल छोड़कर बाकी कुछ भी पूछ लेना। उसका जवाब तो मेरे पास भी नहीं है। सलमान खान ने SRA के डेटा कलेक्शन एंड सेग्रिगेशन सपोर्ट सेंटर (आईटी सर्वर रूम) का उद्घाटन भी किया। यह आधुनिक आईटी सर्वर रूम डिजिटल प्रशासन को अधिक मजबूत, सुरक्षित और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही, इससे SRA की ई-गवर्नेंस पहलों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। विवादों में है सलमान खान की फिल्म मातृभूमि