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नो-बेक चीजकेक से लेकर मैंगो स्टिकी राइस तक… आम का सीजन खत्म होने से पहले घर पर सजाएं 5 शानदार रेसिपी

आम का मौसम खत्म होने से पहले, घर पर आम की ये पांच अनूठी रेसिपीज़ आज़माएँ

30 जून 2026 को 19:20 IST पर अपडेट किया गया समर का राजा आम अब जल्द ही विदा होने वाला है। पर सबसे आसान और स्वादिष्ट मैंगो रेसिपी घरज ट्रेस करें। क्लासिक मैंगो शेक, नो-बेक चीज़केक, मैंगो स्टिकी राइस, कुल्फी और अमरस पूरी तरह से ये व्यंजन डेज़र्ट तक हर मूड को पूरा स्कोर करते हैं। अनुसरण करना : समर का राजा आम अब धीरे-धीरे विदा होने वाला है। बाजार में आम अच्छे-धीमे-धीमे कम हो रहे हैं, इसलिए आखिरी मावे का पैसा और घर पर आसान और स्वादिष्ट आम के व्यंजन परिवार को खुश करें। छवि: फ्रीपिक लौकी आम की माथापच्ची हो या कच्ची आम का कट्टापन, ये फल खोज से लेकर डेजर्ट तक सब कुछ में जादू कर सकते हैं। यहां हम आपको कुछ आसान रेसिपीज बता रहे हैं, जिन्हें आप घर पर आसानी से बना सकते हैं। छवि: फ्रीपिक क्लासिक मैंगो शेक: गर्म में ठंडा मैंगो शेक से बेहतर कुछ नहीं। आमों को ठंडा दूध, थोड़ी चीनी या शहद और कुछ बर्फ के टुकड़े के साथ मिश्रित करें। डेमोक्रेट और मनोरंजन भी बना सकते हैं। छवि: Pexels एलीजेंट डेजर्ट चाहिए तो नो-बेक मैंगो चीज़केक सर्वोत्तम प्लेसमेंट है। बिना पके हुए बनने वाली मैंगो चीज़केक में बिस्किट का बेस, क्रीम चीज़ की फिलिंग और ऊपर से मज़ेदार आम की प्यूरी की टॉपिंग होती है। छवि: Pexels मैंगो स्टिकी चावल: थाई स्टाइल का यह डेजर्ट बहुत पसंदीदा है। स्टिकी राइस के साथ-साथ लॉट आम के अप्लाई और फ्लोटिंग नारियल का दूध तैयार किया जाता है। छवि: Pexels मैंगो कुल्फी: ट्रेडिशनल कुल्फी को नया ऑटोमोबाइल डेस्टिनेशन। इसके लिए गाधे मिल्क में यूनिट आम ​​का पल्प ऑल ट्रेडिशनल कुल्फी को एक नया और सीज़नल यूनिट तैयार करना है। इस मिश्रण को सांचों में जमें और मजा लें। छवि: Pexels अमरस वीडियो पूरी तरह से: भारतीय संग्रहालय का टाइमलेस फ़ेवरेट है। आमरस, लौकी आम के गूदे में हल्की सी इलायची और केसर का मिश्रण बनाया जाता है। सर्वमान्य कलाकार वाले खाने के लिए इसे गर्म और फूली हुई पूरियों के साथ ठंडा-ठंडा परोसें। छवि: Pexels द्वारा प्रकाशित: सागर सिंह प्रकाशित 30 जून 2026, 19:20 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)नो-बेक मैंगो चीज़केक(टी)मैंगो चीज़केक(टी)मैंगो स्टिकी राइस(टी)मैंगो कुल्फी(टी)पूरी के साथ आमरस(टी)आम का मौसम समाप्त होता है(टी)घर पर अनूठे आम के व्यंजन

पेट्रोकेमिकल्स के इम्पोर्ट पर जीरो कस्टम-ड्यूटी 15 जुलाई तक बढ़ी:सरकार ने 40 से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर राहत दी; सप्लाई बनाए रखने के लिए फैसला किया

पेट्रोकेमिकल्स के इम्पोर्ट पर जीरो कस्टम-ड्यूटी 15 जुलाई तक बढ़ी:सरकार ने 40 से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर राहत दी; सप्लाई बनाए रखने के लिए फैसला किया

सरकार ने 30 जून को लगभग 40 जरूरी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स के इम्पोर्ट पर जीरो कस्टम ड्यूटी को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। अब यह राहत 15 जुलाई तक लागू रहेगी। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बीच घरेलू उद्योगों को स्थिरता देने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह फुल कस्टम ड्यूटी छूट पहली बार 2 अप्रैल को एक अस्थायी राहत उपाय के रूप में शुरू की गई थी। पहले इसे 30 जून को समाप्त होना था, लेकिन मंगलवार को वित्त मंत्रालय ने इस छूट को 15 जुलाई तक बढ़ाने का फैसला किया। प्लास्टिक्स, फार्मा और टेक्सटाइल समेत कई सेक्टर्स को मिलेगा फायदा ड्यूटी माफी का यह फैसला उन उद्योगों को सीधा फायदा पहुंचाएगा जो पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स पर निर्भर हैं। इनमें प्लास्टिक्स, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स शामिल हैं। सरकार के इस कदम से इन डाउनस्ट्रीम सेक्टर्स पर लागत का दबाव कम होगा। वेस्ट एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावट इन 9 प्रमुख प्रोडक्ट्स समेत 40 आइटम्स पर मिलेगी छूट कस्टम ड्यूटी छूट के दायरे में आने वाले प्रमुख पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स में मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यूनि, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन (मेथिलीन क्लोराइड), विनाइल क्लोराइड मोनोमर, पॉलीब्यूटाडीन, स्टाइरीन-ब्यूटाडीन और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन्स शामिल हैं। क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और फर्टिलाइजर्स के इम्पोर्ट पर चिंता वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री शिपिंग रूटों में आई रुकावटों ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस संकट की वजह से भारत के फर्टिलाइजर्स, क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस के इम्पोर्ट पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि भारत पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और फर्टिलाइजर्स दोनों का एक बहुत बड़ा इम्पोर्टर देश है। क्या होते हैं पेट्रोकेमिकल्स और डाउनस्ट्रीम सेक्टर्स? ये खबर भी पढ़ें… सुकन्या में 8.2% और PPF पर 7.1% ब्याज मिलता रहेगा: स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं, लगातार 10वीं तिमाही ब्याज दर स्थिर सरकार ने जुलाई-सितंबर तिमाही यानी वित्त-वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स जैसे- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), पोस्ट ऑफिस FD, सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। यह लगातार 10वीं तिमाही है, जब ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने आखिरी बार दिसंबर 2023 में इंटरेस्ट रेट्स में बढ़ोतरी की थी। पूरी खबर पढ़ें…

पेट्रोकेमिकल्स के इम्पोर्ट पर जीरो कस्टम-ड्यूटी 15 जुलाई तक बढ़ी:सरकार ने 40 से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर राहत दी; सप्लाई बनाए रखने के लिए फैसला किया

पेट्रोकेमिकल्स के इम्पोर्ट पर जीरो कस्टम-ड्यूटी 15 जुलाई तक बढ़ी:सरकार ने 40 से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर राहत दी; सप्लाई बनाए रखने के लिए फैसला किया

सरकार ने 30 जून को लगभग 40 जरूरी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स के इम्पोर्ट पर जीरो कस्टम ड्यूटी को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। अब यह राहत 15 जुलाई तक लागू रहेगी। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बीच घरेलू उद्योगों को स्थिरता देने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह फुल कस्टम ड्यूटी छूट पहली बार 2 अप्रैल को एक अस्थायी राहत उपाय के रूप में शुरू की गई थी। पहले इसे 30 जून को समाप्त होना था, लेकिन मंगलवार को वित्त मंत्रालय ने इस छूट को 15 जुलाई तक बढ़ाने का फैसला किया। प्लास्टिक्स, फार्मा और टेक्सटाइल समेत कई सेक्टर्स को मिलेगा फायदा ड्यूटी माफी का यह फैसला उन उद्योगों को सीधा फायदा पहुंचाएगा जो पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स पर निर्भर हैं। इनमें प्लास्टिक्स, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स शामिल हैं। सरकार के इस कदम से इन डाउनस्ट्रीम सेक्टर्स पर लागत का दबाव कम होगा। वेस्ट एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावट इन 9 प्रमुख प्रोडक्ट्स समेत 40 आइटम्स पर मिलेगी छूट कस्टम ड्यूटी छूट के दायरे में आने वाले प्रमुख पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स में मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यूनि, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन (मेथिलीन क्लोराइड), विनाइल क्लोराइड मोनोमर, पॉलीब्यूटाडीन, स्टाइरीन-ब्यूटाडीन और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन्स शामिल हैं। क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और फर्टिलाइजर्स के इम्पोर्ट पर चिंता वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री शिपिंग रूटों में आई रुकावटों ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस संकट की वजह से भारत के फर्टिलाइजर्स, क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस के इम्पोर्ट पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि भारत पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और फर्टिलाइजर्स दोनों का एक बहुत बड़ा इम्पोर्टर देश है। क्या होते हैं पेट्रोकेमिकल्स और डाउनस्ट्रीम सेक्टर्स? ये खबर भी पढ़ें… सुकन्या में 8.2% और PPF पर 7.1% ब्याज मिलता रहेगा: स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं, लगातार 10वीं तिमाही ब्याज दर स्थिर सरकार ने जुलाई-सितंबर तिमाही यानी वित्त-वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स जैसे- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), पोस्ट ऑफिस FD, सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। यह लगातार 10वीं तिमाही है, जब ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने आखिरी बार दिसंबर 2023 में इंटरेस्ट रेट्स में बढ़ोतरी की थी। पूरी खबर पढ़ें…

नोएल टाटा नवंबर में वोल्टास के चेयरमैन पद से हटेंगे:आज 72वीं एजीएम में ऐलान किया; शेयरहोल्डर्स से कहा- यह मेरी आखिरी सालाना जनरल मीटिंग

नोएल टाटा नवंबर में वोल्टास के चेयरमैन पद से हटेंगे:आज 72वीं एजीएम में ऐलान किया; शेयरहोल्डर्स से कहा- यह मेरी आखिरी सालाना जनरल मीटिंग

नोएल टाटा इस साल नवंबर में 70 साल की उम्र पूरी होने के बाद वोल्टास के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने मंगलवार को कंपनी की 72वीं सालाना जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरहोल्डर्स को खुद इसकी जानकारी दी। शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए वोल्टास के चेयरमैन नोएल टाटा ने कहा कि जैसा कि आप सभी को शायद पता ही होगा, चेयरमैन के रूप में यह मेरी आखिरी सालाना जनरल मीटिंग है। टाटा ग्रुप की पॉलिसी के कारण फैसला, ट्रेंट से भी हटे नोएल टाटा इसी साल नवंबर में 70 साल के होने जा रहे हैं। टाटा ग्रुप की कॉर्पोरेट गवर्नेंस पॉलिसी के अनुसार, सभी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स 65 साल की उम्र में और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स 70 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं। इसी पॉलिसी के तहत नोएल टाटा ने पिछले हफ्ते ही टाटा ग्रुप की रिटेल शाखा ट्रेंट के चेयरमैन पद से भी इस्तीफा दे दिया था। नोएल टाटा ने 2017 में संभाली थी वोल्टास की कमान नोएल टाटा ने साल 2017 में वोल्टास के चेयरमैन का पद संभाला था। वोल्टास के अलावा वे इस साल के आखिरी तक टाटा ग्रुप की कई अन्य बड़ी कंपनियों के बोर्ड से भी रिटायर होने वाले हैं। इन कंपनियों में टाइटन, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन, टाटा स्टील और टाटा इंटरनेशनल शामिल हैं, जहां से वे इस साल के आखिरी तक हट जाएंगे। वोल्टास ने पहली तिमाही में बेचे 10 लाख से ज्यादा AC वोल्टास ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के पहले तीन महीनों के भीतर ही 10 लाख से ज्यादा एयर-कंडीशनर बेचने का रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी की इस मजबूत सेल को इस साल पड़ी भीषण गर्मी और वोल्टास के बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से काफी मदद मिली है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडस्ट्री में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद देश के कंज्यूमर ड्यूरेबल्स उद्योग के बारे में बात करते हुए नोएल टाटा ने कहा कि इस सेक्टर के भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट में से एक बनकर उभरने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि देश में बड़े और तेजी से बढ़ते मिडिल क्लास, लोगों की बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम और सेमी-अर्बन व ग्रामीण बाजारों में बढ़ती पैठ से इस सेक्टर को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। 2030 तक 2.5 लाख करोड़ का होगा व्हाइट गुड्स सेगमेंट नोएल टाटा ने आगे जोड़ा कि सस्टेनेबिलिटी, डिजिटलाइजेशन और रीजनल सप्लाई चेन रीअलाइनमेंट की तरफ हो रहे स्ट्रक्चरल बदलावों के कारण इस सेक्टर में काफी बेहतरीन लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल मौजूद है। प्रोजेक्शन के अनुसार, यह पूरी इंडस्ट्री 11% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़कर वित्त वर्ष 2028-29 (FY29) तक 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। वहीं, इस इंडस्ट्री का व्हाइट गुड्स सेगमेंट साल 2030 तक 2.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। वैश्विक चुनौतियों का बिजनेस सेंटीमेंट पर असर व्हाइट गुड्स क्या होते हैं व्हाइट गुड्स में भारी घरेलू उपकरण जैसे एसी, फ्रिज और वाशिंग मशीन शामिल होते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से सफेद रंग में बनाया जाता था। कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट यह निवेश या इंडस्ट्री की सालाना औसत ग्रोथ को मापने का तरीका है, जिससे लॉन्ग-टर्म डेवलपमेंट का सटीक पता चलता है। ये खबर भी पढ़ें… ग्रीस में शुरू हुई भारत की UPI सर्विस: अब दुनिया के 10 देशों में डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे भारतीय; पीयूष गोयल की मौजूदगी में लाइव डेमो हुआ भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब ग्रीस में भी लाइव हो गया है। ग्रीस इस डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ने वाला नया देश बन गया है। एथेंस में यूरोबैंक के हेडक्वार्टर में यूरोबैंक और NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की पार्टनरशिप से शुरू हुई इस सर्विस का लाइव डेमो भी देखा गया। पूरी खबर पढ़ें…

नोएल टाटा नवंबर में वोल्टास के चेयरमैन पद से हटेंगे:आज 72वीं एजीएम में ऐलान किया; शेयरहोल्डर्स से कहा- यह मेरी आखिरी सालाना जनरल मीटिंग

नोएल टाटा नवंबर में वोल्टास के चेयरमैन पद से हटेंगे:आज 72वीं एजीएम में ऐलान किया; शेयरहोल्डर्स से कहा- यह मेरी आखिरी सालाना जनरल मीटिंग

नोएल टाटा इस साल नवंबर में 70 साल की उम्र पूरी होने के बाद वोल्टास के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने मंगलवार को कंपनी की 72वीं सालाना जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरहोल्डर्स को खुद इसकी जानकारी दी। शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए वोल्टास के चेयरमैन नोएल टाटा ने कहा कि जैसा कि आप सभी को शायद पता ही होगा, चेयरमैन के रूप में यह मेरी आखिरी सालाना जनरल मीटिंग है। टाटा ग्रुप की पॉलिसी के कारण फैसला, ट्रेंट से भी हटे नोएल टाटा इसी साल नवंबर में 70 साल के होने जा रहे हैं। टाटा ग्रुप की कॉर्पोरेट गवर्नेंस पॉलिसी के अनुसार, सभी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स 65 साल की उम्र में और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स 70 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं। इसी पॉलिसी के तहत नोएल टाटा ने पिछले हफ्ते ही टाटा ग्रुप की रिटेल शाखा ट्रेंट के चेयरमैन पद से भी इस्तीफा दे दिया था। नोएल टाटा ने 2017 में संभाली थी वोल्टास की कमान नोएल टाटा ने साल 2017 में वोल्टास के चेयरमैन का पद संभाला था। वोल्टास के अलावा वे इस साल के आखिरी तक टाटा ग्रुप की कई अन्य बड़ी कंपनियों के बोर्ड से भी रिटायर होने वाले हैं। इन कंपनियों में टाइटन, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन, टाटा स्टील और टाटा इंटरनेशनल शामिल हैं, जहां से वे इस साल के आखिरी तक हट जाएंगे। वोल्टास ने पहली तिमाही में बेचे 10 लाख से ज्यादा AC वोल्टास ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के पहले तीन महीनों के भीतर ही 10 लाख से ज्यादा एयर-कंडीशनर बेचने का रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी की इस मजबूत सेल को इस साल पड़ी भीषण गर्मी और वोल्टास के बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से काफी मदद मिली है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडस्ट्री में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद देश के कंज्यूमर ड्यूरेबल्स उद्योग के बारे में बात करते हुए नोएल टाटा ने कहा कि इस सेक्टर के भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट में से एक बनकर उभरने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि देश में बड़े और तेजी से बढ़ते मिडिल क्लास, लोगों की बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम और सेमी-अर्बन व ग्रामीण बाजारों में बढ़ती पैठ से इस सेक्टर को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। 2030 तक 2.5 लाख करोड़ का होगा व्हाइट गुड्स सेगमेंट नोएल टाटा ने आगे जोड़ा कि सस्टेनेबिलिटी, डिजिटलाइजेशन और रीजनल सप्लाई चेन रीअलाइनमेंट की तरफ हो रहे स्ट्रक्चरल बदलावों के कारण इस सेक्टर में काफी बेहतरीन लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल मौजूद है। प्रोजेक्शन के अनुसार, यह पूरी इंडस्ट्री 11% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़कर वित्त वर्ष 2028-29 (FY29) तक 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। वहीं, इस इंडस्ट्री का व्हाइट गुड्स सेगमेंट साल 2030 तक 2.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। वैश्विक चुनौतियों का बिजनेस सेंटीमेंट पर असर व्हाइट गुड्स क्या होते हैं व्हाइट गुड्स में भारी घरेलू उपकरण जैसे एसी, फ्रिज और वाशिंग मशीन शामिल होते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से सफेद रंग में बनाया जाता था। कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट यह निवेश या इंडस्ट्री की सालाना औसत ग्रोथ को मापने का तरीका है, जिससे लॉन्ग-टर्म डेवलपमेंट का सटीक पता चलता है। ये खबर भी पढ़ें… ग्रीस में शुरू हुई भारत की UPI सर्विस: अब दुनिया के 10 देशों में डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे भारतीय; पीयूष गोयल की मौजूदगी में लाइव डेमो हुआ भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब ग्रीस में भी लाइव हो गया है। ग्रीस इस डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ने वाला नया देश बन गया है। एथेंस में यूरोबैंक के हेडक्वार्टर में यूरोबैंक और NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की पार्टनरशिप से शुरू हुई इस सर्विस का लाइव डेमो भी देखा गया। पूरी खबर पढ़ें…

टेक कंपनियों पर ऑस्ट्रेलिया सख्त:कानून तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए करने की तैयारी‎; किशोरों को सोशल मीडिया से दूर रखने की कोशिश

टेक कंपनियों पर ऑस्ट्रेलिया सख्त:कानून तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए करने की तैयारी‎; किशोरों को सोशल मीडिया से दूर रखने की कोशिश

ऑस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के अपने कानून को और सख्त करने की तैयारी में है। किशोरों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आयु सीमा लागू करने वाला ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बना था, लेकिन शुरुआती नतीजों से सरकार संतुष्ट नहीं है। कानून के तहत स्नैपचैट, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय की गई है। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों ने भी इसी तरह के कदम उठाने शुरू किए हैं। हालांकि सरकारी रिपोर्ट बताती है कि कानून लागू होने के बावजूद किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल में अपेक्षित कमी नहीं आई है। हजारों अकाउंट जरूर बंद हुए हैं, लेकिन दस में से सात अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों के अकाउंट अब भी सक्रिय हैं। शोधकर्ताओं ने भी पाया कि अधिकांश ऑस्ट्रेलियाई किशोर किसी न किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही हैं। उनके मुताबिक अब भी बड़ी संख्या में बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। संचार मंत्री अनिका वेल्सने आरोप लगाया कि टेक कंपनियां नियमों से बचने के लिए न्यूनतम प्रयास कर रही हैं और अपनी पुरानी रणनीतियां अपना रही हैं। दूसरी ओर, टेक कंपनियों ने इस कानून को अत्यधिक कठोर बताते हुए कहा है कि इसमें प्लेटफॉर्म पर पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों को नजर अंदाज किया गया है। प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म रेडिट ने तो ऑस्ट्रेलियाई सरकार के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया है। कंपनी का तर्क है कि यह कानून बच्चों के राजनीतिक संवाद और अभिव्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया के ई-सेफ्टी कमिश्नर ने फेसबुक,इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब के खिलाफ कानून के पालन की जांच शुरू कर दी है। कानून के तहत प्रतिबंधित 10 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बच्चों को दूर रखना संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी है। ऑनलाइन सेफ्टी नियामक केकानूनी अधिकार और बढ़ेंगे कानून तोड़ने वाली टेक्नोलॉजी कंपनियों पर अधिकतम जुर्माना दोगुना बढ़ाकर 660 करोड़ रुपए किया जाएगा। सरकार का कहना है, ऑनलाइन सेफ्टी नियामक के कानूनी अधिकार बढ़ाए जाएंगे। कंपनियों को बताना पड़ेगा कि उन्होंने 16 साल से कम आयु के बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए कौन से कदम उठाए हैं।

गर्मी से मौतें बढ़ने का अधिक खतरा यूरोपीय देशों में‎:फ्रांस में कार्डिएक अरेस्ट के मामले‎ चार गुना बढ़े; कई देशों में ट्रेन, न्यूक्लियर प्लांट बंद‎

गर्मी से मौतें बढ़ने का अधिक खतरा यूरोपीय देशों में‎:फ्रांस में कार्डिएक अरेस्ट के मामले‎ चार गुना बढ़े; कई देशों में ट्रेन, न्यूक्लियर प्लांट बंद‎

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। ‎इसका असर अब केवल लोगों के स्वास्थ्य तक‎ सीमित नहीं रहा, बल्कि अर्थव्यवस्था और‎ बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखने लगा है।‎ पश्चिमी यूरोप का रेल नेटवर्क अस्त-व्यस्त हो‎ गया है। फ्रांस में कई परमाणु रिएक्टर बंद कर दिए‎ गए हैं या उनकी क्षमता घटा दी गई है, क्योंकि वे‎ नदियों में अत्यधिक गर्म पानी छोड़ रहे हैं। फ्रांस‎ के एक ऑटोमोबाइल प्लांट में यूनियन नेताओं ने‎ फैक्ट्री फ्लोर पर असहनीय गर्मी का हवाला देते ‎हुए हड़ताल का ऐलान किया है।‎ फ्रांस और इटली में बिजली घरों के बंद होने से‎ सैकड़ों इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।‎ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्मी का यह दौर जारी रहा तो कई यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था‎ पर असर पड़ सकता है और मृत्यु दर भी बढ़ ‎सकती है। शहरों में स्थिति और गंभीर है। मोटी‎ दीवारों वाली पुरानी इमारतें दिनभर की गर्मी‎ सोखकर रात तक छोड़ती रहती हैं, जिससे‎ अपार्टमेंट भट्ठी जैसे बन गए हैं। गर्मी से परेशान‎ लोग आधी रात के बाद पार्कों का रुख कर रहे हैं।‎ एयर कंडीशनर खरीदने की होड़ मची है। कई लोग‎ राहत के लिए होटलों में तक ठहर रहे हैं। पेरिस में राजनीतिक पर्यावरण के विशेषज्ञ ‎फ्रांस्वा जेमेने कहते हैं, “हर कोई यही पूछ रहा है ‎कि हम इस स्थिति के लिए तैयार क्यों नहीं थे। ”‎एक सप्ताह से अधिक समय से जारी इस हीटवेव ‎ने ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में तापमान के कई‎ रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दुनिया के सबसे तेजी से गर्म हो रहे महाद्वीप की अधिकांश इमारतें और‎ बुनियादी ढांचा ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर ‎बनाए गए थे। पुराने भवनों में गर्मी सोखने वाली‎ निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। उनमें बाहरी‎ शटर जैसी व्यवस्थाएं भी कम हैं, जिससे गर्मी‎ इमारतों के भीतर ही कैद होकर मुश्किलें और बढ़ा‎ रही है। यूरोप का इंफ्रास्ट्रक्चर सर्दी से बचाव के लिए बना है, बढ़ती गर्मी के लिए यह तैयार नहीं‎ फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री स्टीफेनी रिस्ट के‎ अनुसार कार्डिएक अरेस्ट के मामलो में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। पहले 5 से 10 मामले‎ आते थे, अब 20 से 30 आ रहे हैं। 2023 ‎की एक स्टडी बताती है कि गर्मी से मौत का‎ खतरा फ्रांस, स्पेन और इटली में ज्यादा है।‎ इन देशों को ज्यादा नुकसान‎ जर्मन इंश्योरेंस कंपनी अलायंज की रिपोर्ट में ‎इटली, फ्रांस,जर्मनी व स्पेन को गर्मी की वजह से ‎सर्वाधिक आर्थिक नुकसान की बात कही गई है।‎ चार न्यूक्लियर रिएक्टर बंद‎ गर्मी की वजह से तापमान इतना बढ़ गया कि‎ फ्रांस में चार परमाणु बिजली घरों के रिएक्टर तक‎ बंद करने पड़े हैं।‎ जर्मनी, ब्रिटेन में कई ट्रेनें रद्द‎ गर्मी बढ़ने से जर्मनी, स्विटजरलैंड और ब्रिटेन में ‎ट्रेनें रद्द करना पड़ी हैं। कुछ अन्य देशों में ट्रेन के ‎ऑनबोर्ड सिस्टम गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं।‎ गर्मी से बचने की योजनाएं फ्रांस ने 52 उपायों के साथ पिछले साल 388 पेज की योजना जारी की है। लंदन में इस सप्ताह ‎गर्मी से बचाने का प्लान पेश किया गया है।‎

गर्मी से मौतें बढ़ने का अधिक खतरा यूरोपीय देशों में‎:फ्रांस में कार्डिएक अरेस्ट के मामले‎ चार गुना बढ़े; कई देशों में ट्रेन, न्यूक्लियर प्लांट बंद‎

गर्मी से मौतें बढ़ने का अधिक खतरा यूरोपीय देशों में‎:फ्रांस में कार्डिएक अरेस्ट के मामले‎ चार गुना बढ़े; कई देशों में ट्रेन, न्यूक्लियर प्लांट बंद‎

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। ‎इसका असर अब केवल लोगों के स्वास्थ्य तक‎ सीमित नहीं रहा, बल्कि अर्थव्यवस्था और‎ बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखने लगा है।‎ पश्चिमी यूरोप का रेल नेटवर्क अस्त-व्यस्त हो‎ गया है। फ्रांस में कई परमाणु रिएक्टर बंद कर दिए‎ गए हैं या उनकी क्षमता घटा दी गई है, क्योंकि वे‎ नदियों में अत्यधिक गर्म पानी छोड़ रहे हैं। फ्रांस‎ के एक ऑटोमोबाइल प्लांट में यूनियन नेताओं ने‎ फैक्ट्री फ्लोर पर असहनीय गर्मी का हवाला देते ‎हुए हड़ताल का ऐलान किया है।‎ फ्रांस और इटली में बिजली घरों के बंद होने से‎ सैकड़ों इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।‎ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्मी का यह दौर जारी रहा तो कई यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था‎ पर असर पड़ सकता है और मृत्यु दर भी बढ़ ‎सकती है। शहरों में स्थिति और गंभीर है। मोटी‎ दीवारों वाली पुरानी इमारतें दिनभर की गर्मी‎ सोखकर रात तक छोड़ती रहती हैं, जिससे‎ अपार्टमेंट भट्ठी जैसे बन गए हैं। गर्मी से परेशान‎ लोग आधी रात के बाद पार्कों का रुख कर रहे हैं।‎ एयर कंडीशनर खरीदने की होड़ मची है। कई लोग‎ राहत के लिए होटलों में तक ठहर रहे हैं। पेरिस में राजनीतिक पर्यावरण के विशेषज्ञ ‎फ्रांस्वा जेमेने कहते हैं, “हर कोई यही पूछ रहा है ‎कि हम इस स्थिति के लिए तैयार क्यों नहीं थे। ”‎एक सप्ताह से अधिक समय से जारी इस हीटवेव ‎ने ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में तापमान के कई‎ रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दुनिया के सबसे तेजी से गर्म हो रहे महाद्वीप की अधिकांश इमारतें और‎ बुनियादी ढांचा ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर ‎बनाए गए थे। पुराने भवनों में गर्मी सोखने वाली‎ निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। उनमें बाहरी‎ शटर जैसी व्यवस्थाएं भी कम हैं, जिससे गर्मी‎ इमारतों के भीतर ही कैद होकर मुश्किलें और बढ़ा‎ रही है। यूरोप का इंफ्रास्ट्रक्चर सर्दी से बचाव के लिए बना है, बढ़ती गर्मी के लिए यह तैयार नहीं‎ फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री स्टीफेनी रिस्ट के‎ अनुसार कार्डिएक अरेस्ट के मामलो में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। पहले 5 से 10 मामले‎ आते थे, अब 20 से 30 आ रहे हैं। 2023 ‎की एक स्टडी बताती है कि गर्मी से मौत का‎ खतरा फ्रांस, स्पेन और इटली में ज्यादा है।‎ इन देशों को ज्यादा नुकसान‎ जर्मन इंश्योरेंस कंपनी अलायंज की रिपोर्ट में ‎इटली, फ्रांस,जर्मनी व स्पेन को गर्मी की वजह से ‎सर्वाधिक आर्थिक नुकसान की बात कही गई है।‎ चार न्यूक्लियर रिएक्टर बंद‎ गर्मी की वजह से तापमान इतना बढ़ गया कि‎ फ्रांस में चार परमाणु बिजली घरों के रिएक्टर तक‎ बंद करने पड़े हैं।‎ जर्मनी, ब्रिटेन में कई ट्रेनें रद्द‎ गर्मी बढ़ने से जर्मनी, स्विटजरलैंड और ब्रिटेन में ‎ट्रेनें रद्द करना पड़ी हैं। कुछ अन्य देशों में ट्रेन के ‎ऑनबोर्ड सिस्टम गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं।‎ गर्मी से बचने की योजनाएं फ्रांस ने 52 उपायों के साथ पिछले साल 388 पेज की योजना जारी की है। लंदन में इस सप्ताह ‎गर्मी से बचाने का प्लान पेश किया गया है।‎

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर पाकिस्तान गए श्रद्धालु लौटे:गुरुद्वारों के दर्शन कर जताई खुशी; सरकारों से मांगी वीजा में ढील

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर पाकिस्तान गए श्रद्धालु लौटे:गुरुद्वारों के दर्शन कर जताई खुशी; सरकारों से मांगी वीजा में ढील

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर पाकिस्तान गया सिख श्रद्धालुओं का जत्था मंगलवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौट आया। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने ननकाना साहिब, पंजा साहिब, करतारपुर साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन किए। भारत लौटने पर श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा उनके लिए काफी इमोशनल रही। इसे वह भुला नहीं सकते। अमृतसर के श्रद्धालु बलवीर सिंह ने कहा कि सबसे पहले उन्होंने ननकाना साहिब में गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान के दर्शन किए। इसके बाद पंजा साहिब, लाहौर स्थित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारे और करतारपुर साहिब के दर्शन का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों पर पहुंचकर मन को गहरी शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ। पाकिस्तान में व्यवस्थाओं और सुरक्षा की सराहना श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान में की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और हर समय सुरक्षा कर्मी उनके साथ मौजूद रहे। किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें वहां लोगों से बहुत प्रेम, सम्मान और सहयोग मिला, जिससे उनका अनुभव और भी बेहतर हो गया। एक अन्य श्रद्धालु हरजीत कौर ने बताया कि यह जत्था 21 जून को पाकिस्तान गया था और आज 30 जून को वापस लौटा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उनकी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी हुई। पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन कर उन्होंने अत्यंत आनंद और संतोष महसूस किया। वीजा प्रक्रिया आसान करने की श्रद्धालुओं की अपील श्रद्धालुओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से अपील की कि धार्मिक यात्राओं को और सरल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वीजा प्रक्रिया को आसान किया जाना चाहिए और श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक अवसर दिए जाने चाहिए ताकि वे अपने पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकें। इससे दोनों देशों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे। साझा विरासत को संरक्षित करने बेहतर प्रयास उन्होंने यह भी कहा कि साझा विरासत को संरक्षित करने और लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए सीमा पार धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देना बहुत आवश्यक है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि दोनों देशों के बीच शांति और सद्भाव का संदेश भी जाता है।

रसोई में तेजी से जगह बना रहे फ्रोजन फूड:बर्गर पैटी, नगेट्स, मोमो और कबाब अब हमारे लंच-​डिनर का हिस्सा; सालाना ग्रोथ 14.5%

रसोई में तेजी से जगह बना रहे फ्रोजन फूड:बर्गर पैटी, नगेट्स, मोमो और कबाब अब हमारे लंच-​डिनर का हिस्सा; सालाना ग्रोथ 14.5%

भारतीय किचन में फ्रोजन फूड अब सिर्फ इमरजेंसी या पार्टी की जरूरत नहीं रहा। बर्गर पैटी, नगेट्स, मोमो और कबाब जैसे प्रोडक्ट्स तेजी से रोजमर्रा के खाने का हिस्सा बन रहे हैं। मार्केट रिसर्च फ्यूचर के मुताबिक अगले 10 साल में देश का फ्रोजन फूड बाजार हर साल 14% से भी ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। बदलती लाइफस्टाइल, वर्किंग वुमन की बढ़ती तादाद और क्विक कॉमर्स का विस्तार- ये तीन ताकतें मिलकर इस बाजार को अगले दौर में ले जा रही हैं। आईटीसी मास्टरशेफ, मैकेन और एलटी फूड्स जैसी कंपनियां नए प्रोडक्ट्स, कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल चैनलों में भारी निवेश कर रही हैं। घर का खाना पसंद, तैयारी का झंझट नहीं चाहते लोग फ्रोजन फूड कैटेगरी अभी सालाना करीब 13% की दर से बढ़ रही है। इसमें तैयार फ्रोजन स्नैक्स की रफ्तार पारंपरिक फ्रोजन सब्जियों, मसलन, मटर और मक्का से काफी तेज है। अलवारेज एंड मार्सल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ऋषभ जैन के मुताबिक, ग्राहक ऐसा खाना चाहते हैं जो घर पर ताजा पका हो, लेकिन तैयारी का झंझट न हो। नगेट्स, फ्राइज और मोमो जैसे प्रोडक्ट्स इसीलिए सबसे तेजी से बिक रहे हैं। इनमें पकाने का आखिरी काम ग्राहक खुद करता है। फ्रोजन फूड की बढ़ती लोकप्रियता के जानिए चार बड़े कारण 1. बदली लाइफस्टाइल – बढ़ती आय, व्यस्त दिनचर्या, बढ़ती कामकाजी महिलाओं ने रोज के खाने की प्लानिंग बदल दी है। 2. एयर फ्रायर कल्चर – घर पर रेस्तरां जैसा अनुभव देने वाले एयर फ्रायर ने फ्रोजन स्नैक्स की खपत के नए दरवाजे खोले हैं। 3. क्विक कॉमर्स की पहुंच – स्विगी, इंस्टामार्ट, ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म युवा खरीदारों तक फ्रोजन प्रोडक्ट्स मिनटों में पहुंचा रहे। 4. सिर्फ स्नैकिंग से आगे – आईटीसी मास्टरशेफ कहती है- फ्रोजन फूड अब सिर्फ स्नैकिंग नहीं, लंच-डीनर हिस्सा बन रहा। कंपनियों की बड़ी तैयारी – आफ्टर-स्कूल स्नैकिंग से बिरयानी किट तक आईटीसी मास्टरशेफ – अनियन रिंग्स, पेरी-पेरी प्रॉन्स, फलाफेल कबाब, साबूदाना टिक्की; आईक्यूएफ (इंडिविजुअली क्विक फ्रीजिंग) टेक्नोलॉजी। मैकेन फूड्स इंडिया – एयर फ्रायर के लिए खास प्रोडक्ट्स; आफ्टर-स्कूल स्नैकिंग और मिनी मील सेगमेंट। एलटी फूड्स (दावत) – बिरयानी किट, थाई ग्रीन करी राइस किट, कप्पा राइस; डिजिटल चैनल से सालाना 45% से ज्यादा ग्रोथ। फैक्ट्री से लेकर रिटेल शेल्फ तक खर्चीला कोल्ड चेन फ्रोजन फूड बाजार आकर्षक जरूर है, लेकिन मुनाफा कमाना आसान नहीं है। फैक्ट्री से लेकर रिटेल शेल्फ तक बिना रुके कोल्ड चेन बनाए रखना बहुत खर्चीला है। ऋषभ जैन के मुताबिक, इस सेगमेंट में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां डिस्ट्रीब्यूशन की लागत और किफायती दाम के बीच किस हद तक संतुलन बना पाती हैं। निरंतर नए-नए प्रोडक्ट भी लाते रहना जरूरी है क्योंकि लोग एक ही तरह के खाने से जल्द ऊब जाते हैं।