पाकिस्तान के कराची में पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर आतंकी हमला:फायरिंग में 4 सुरक्षाकर्मियों की मौत; आतंकी गाड़ी से मैन गेट तोड़ते हुए परिसर में घुसे

पाकिस्तान के कराची में शनिवार को आतंकियों ने सिंध रेंजर्स के पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया। हमला रात करीब 8.30 बजे गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में हुआ। इसमें चार रेंजर्स कर्मियों की मौत हो गई, जबकि एक कर्मी घायल हो गया। PTI के मुताबिक, चार से छह आतंकी विस्फोटकों से भरी गाड़ी से मैन गेट को तोड़कर परिसर में घुसे और फायरिंग शुरू कर दी। कई घंटे चली मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। सिंध के पुलिस महानिरीक्षक जावेद आलम ओधो ने बताया कि शुरुआती जांच के मुताबिक आतंकी गाड़ी से मैन गेट तोड़कर परिसर में घुसे थे। हमला शुरू होते ही धमाके की आवाज भी सुनाई दी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि धमाका किस वजह से हुआ। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। SSU और ATF की टीमें मौके पर पहुंचीं हमले के बाद पुलिस, रेंजर्स, स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (SSU), एंटी टेररिस्ट फोर्स (ATF), रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं। आसपास की सड़कें बंद कर दी गईं और लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई। रॉयटर्स के मुताबिक, बाद में फायरिंग बंद हो गई और स्थिति सामान्य हो गई। मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने घटना की रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक और कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक (AIG) को मामले की पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, गृह मंत्री जियाउल हसन लांजर ने भी घटना पर अलग से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी आतंकी या अलगाववादी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जमात-उल-अहरार (JuA) के जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया है। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कराची पहले भी हो चुके हैं बड़े हमले कराची पहले भी बड़े आतंकी हमलों का निशाना बन चुका मई में 128 आंतकी हमले हुए थे, 27% की बढ़ोतरी बढ़े पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में देश में 128 आतंकी हमले हुए। अप्रैल में यह संख्या 101 थी। यानी एक महीने में आतंकी हमलों में 27% की बढ़ोतरी हुई। सबसे ज्यादा आतंकी हिंसा खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में दर्ज की गई।
चावल का आटा फेशियल: ग्लोइंग स्किन के लिए अपनाएं 5 घरेलू नुस्खे, चावल के नुस्खे से लेकर बेदाग त्वचा, पड़ोसी भी पूछेंगे आपकी खूबसूरती का राज

27 जून 2026 को 23:23 IST पर अपडेट किया गया चावल के आटे का फेशियल: ग्लोइंग त्वचा के लिए बेहतरीन फेसियल की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब घर पर ही चावल के आटे से आप त्वचा को साफ कर सकती हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)चावल के आटे का फेस पैक(टी)चमकदार त्वचा के लिए घरेलू फेसपैक(टी)त्वचा की देखभाल के टिप्स(टी)चावल के आटे के फायदे(टी)प्राकृतिक सौंदर्य टिप्स(टी)घर का बना फेशियल(टी)चमकती त्वचा के हैक्स(टी)जैविक त्वचा की देखभाल
‘वो सुबह हम से ही आएगी’ पर बोले महेश भट्ट:रंगमंच आज भी जोड़ता है इंसान से इंसान को, अनु मलिक ने बताई चुनौती

मुंबई में जल्द मंचित होने जा रहे नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ को लेकर फिल्ममेकर महेश भट्ट और संगीतकार अनु मलिक ने दैनिक भास्कर से बात की। यह नाटक बदलाव, उम्मीद और इंसान की भीतर की ताकत की कहानी है। इसे महेश भट्ट प्रजेंट कर रहे हैं। नाटक दिनेश गौतम ने लिखा है, तारिक हमीद डायरेक्ट कर रहे हैं। इसके गीत IPS अधिकारी कैसर खालिद ने लिखे हैं और संगीत अनु मलिक ने दिया है। मंच पर इमरान जाहिद और नमिता सचदेवा अभिनय करते नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में महेश भट्ट ने कहा कि आज लोगों के पास मोबाइल, स्ट्रीमिंग और डिजिटल कंटेंट के कई विकल्प हैं, लेकिन रंगमंच की ताकत अब भी अलग है। उन्होंने कहा, “रंगमंच में आप किसी कलाकार की सांस महसूस करते हैं। वहां जो अनुभव मिलता है, वह किसी स्क्रीन पर नहीं मिल सकता। हम दुनिया से जुड़े हुए दिखते हैं, लेकिन भीतर से कटते जा रहे हैं। ऐसे दौर में थिएटर इंसान को इंसान से जोड़ता है।” नाटक के मूल विचार पर बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा कि असली बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से आता है। उन्होंने कहा, “जब तक आप अपने अंदर की रोशनी नहीं जगाएंगे, तब तक उधार की रोशनी पर चलते रहेंगे। सबसे बुरा वक्त ही कई बार आपको अपनी असली ताकत से मिलाता है।” भट्ट ने अपनी जिंदगी के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि करियर और निजी जीवन के कठिन दौर ने उन्हें बदला और उसी से कई यादगार कहानियां निकलीं। उन्होंने कहा, “अगर इस नाटक को देखकर दर्शकों को लगे कि अगर कहानी का किरदार कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी।” वहीं, नाटक के संगीत को लेकर अनु मलिक ने कहा कि वह शुरुआत से इस प्रोजेक्ट से भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे। अनु मलिक ने कहा, “इस नाटक का शीर्षक ही इतना असरदार था कि मैं उससे तुरंत जुड़ गया। इमरान जाहिद ने जब कहानी सुनाई और गीत भेजे तो मैंने उसी वक्त धुन बना ली।” उन्होंने थिएटर और फिल्मों के संगीत के फर्क पर कहा, “थिएटर के लिए संगीत बनाना ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि सब कुछ रियल टाइम में होता है। जो दर्शक उस पल महसूस करता है, वही उसके साथ घर तक जाता है।” महेश भट्ट के साथ अपने रिश्ते पर अनु मलिक ने कहा, “महेश भट्ट मेरे लिए सिर्फ निर्देशक नहीं हैं। उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। उनका नाम सुनते ही मेरे दिमाग में धुन बनने लगती है। यही उनका जादू है।” नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ उम्मीद, आत्मविश्वास और भीतर की रोशनी की बात करता है। इसके जरिए टीम संदेश देना चाहती है कि बदलाव किसी और से नहीं, खुद से शुरू होता है।
‘वो सुबह हम से ही आएगी’ पर बोले महेश भट्ट:रंगमंच आज भी जोड़ता है इंसान से इंसान को, अनु मलिक ने बताई चुनौती

मुंबई में जल्द मंचित होने जा रहे नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ को लेकर फिल्ममेकर महेश भट्ट और संगीतकार अनु मलिक ने दैनिक भास्कर से बात की। यह नाटक बदलाव, उम्मीद और इंसान की भीतर की ताकत की कहानी है। इसे महेश भट्ट प्रजेंट कर रहे हैं। नाटक दिनेश गौतम ने लिखा है, तारिक हमीद डायरेक्ट कर रहे हैं। इसके गीत IPS अधिकारी कैसर खालिद ने लिखे हैं और संगीत अनु मलिक ने दिया है। मंच पर इमरान जाहिद और नमिता सचदेवा अभिनय करते नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में महेश भट्ट ने कहा कि आज लोगों के पास मोबाइल, स्ट्रीमिंग और डिजिटल कंटेंट के कई विकल्प हैं, लेकिन रंगमंच की ताकत अब भी अलग है। उन्होंने कहा, “रंगमंच में आप किसी कलाकार की सांस महसूस करते हैं। वहां जो अनुभव मिलता है, वह किसी स्क्रीन पर नहीं मिल सकता। हम दुनिया से जुड़े हुए दिखते हैं, लेकिन भीतर से कटते जा रहे हैं। ऐसे दौर में थिएटर इंसान को इंसान से जोड़ता है।” नाटक के मूल विचार पर बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा कि असली बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से आता है। उन्होंने कहा, “जब तक आप अपने अंदर की रोशनी नहीं जगाएंगे, तब तक उधार की रोशनी पर चलते रहेंगे। सबसे बुरा वक्त ही कई बार आपको अपनी असली ताकत से मिलाता है।” भट्ट ने अपनी जिंदगी के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि करियर और निजी जीवन के कठिन दौर ने उन्हें बदला और उसी से कई यादगार कहानियां निकलीं। उन्होंने कहा, “अगर इस नाटक को देखकर दर्शकों को लगे कि अगर कहानी का किरदार कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी।” वहीं, नाटक के संगीत को लेकर अनु मलिक ने कहा कि वह शुरुआत से इस प्रोजेक्ट से भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे। अनु मलिक ने कहा, “इस नाटक का शीर्षक ही इतना असरदार था कि मैं उससे तुरंत जुड़ गया। इमरान जाहिद ने जब कहानी सुनाई और गीत भेजे तो मैंने उसी वक्त धुन बना ली।” उन्होंने थिएटर और फिल्मों के संगीत के फर्क पर कहा, “थिएटर के लिए संगीत बनाना ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि सब कुछ रियल टाइम में होता है। जो दर्शक उस पल महसूस करता है, वही उसके साथ घर तक जाता है।” महेश भट्ट के साथ अपने रिश्ते पर अनु मलिक ने कहा, “महेश भट्ट मेरे लिए सिर्फ निर्देशक नहीं हैं। उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। उनका नाम सुनते ही मेरे दिमाग में धुन बनने लगती है। यही उनका जादू है।” नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ उम्मीद, आत्मविश्वास और भीतर की रोशनी की बात करता है। इसके जरिए टीम संदेश देना चाहती है कि बदलाव किसी और से नहीं, खुद से शुरू होता है।
विपिन अनेजा बोले- रहमान से मांगा अपनी आवाज का गाना:हनी सिंह ने फोन कर कहा- आपकी गजल दिल छू गई

सिंगर विपिन अनेजा इन दिनों फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के गाने ‘तेरे पास मैं’ को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह गाना उनके लिए नया प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि लंबे इंतजार और संगीत सफर का अहम पड़ाव है। उन्होंने ‘जाने तेरे शहर का’, ए.आर. रहमान के साथ अनुभव, हनी सिंह के साथ प्रयोग और बदलते संगीत पर बात की। उनका कहना है कि हर नया गाना उन्हें आगे बढ़ने का मौका देता है। सवाल: फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ का गाना ‘तेरे पास मैं’ आपके लिए कितना खास है? जवाब: यह गाना मेरे लिए बहुत खास है। ‘तेरे पास मैं’ और ‘जाने तेरे शहर का’ दोनों की भावनात्मक दुनिया एक जैसी है। दोनों न्यू एज गजल जैसे लगते हैं। लोगों ने पहले गाने की तरह इसे भी अपनाया है और यह लंबे समय तक साथ रहेगा। सवाल: लोग आज भी फिल्म ‘जज्बा’ के गाने ‘जाने तेरे शहर का’ को याद करते हैं, उस सफर को कैसे देखते हैं? जवाब: इस गाने ने मुझे पहचान दी। फिल्म में यह गाना इरफान खान और ऐश्वर्या राय पर फिल्माया गया है। शुरुआत में लगा था कि इसे ज्यादा प्रमोशन नहीं मिलेगा, लेकिन बाद में यह अपने दम पर लोगों तक पहुंचा। आज भी युवा इसे सुनते हैं और अपनी प्लेलिस्ट में रखते हैं। सवाल: ‘जाने तेरे शहर का’ गाने तक पहुंचने की कहानी क्या रही? जवाब: मुंबई में एक संगीत महफिल के दौरान मेरी मुलाकात आर्को से हुई। उन्होंने मुझे लाइव सुना और मेरी आवाज पसंद आई। वहीं से मुझे मौका मिला और बाद में यह गाना फिल्म का हिस्सा बना। सवाल: ‘मैं वापस आऊंगा’ और ए.आर. रहमान के साथ जुड़ने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: रहमान साहब के साथ मेरा जुड़ाव काफी पुराना है। मैंने उनसे कहा था कि मेरी आवाज की अपनी पहचान है और उसके हिसाब से कुछ बनाएं। बाद में इस प्रोजेक्ट में मैंने अलग-अलग वर्जन रिकॉर्ड किए। उनके साथ काम करना सपना पूरा होने जैसा है। सवाल: ए.आर. रहमान से पहली मुलाकात कैसे हुई थी? जवाब: रहमान साहब से मेरी मुलाकात करीब 20 साल पहले कजाकिस्तान के वर्ल्ड पॉप म्यूजिक फेस्टिवल में हुई थी। मैं भारत को सिंगर के तौर पर रिप्रेजेंट कर रहा था और वह जज थे। उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस सुनी और बाद में इंटरनेशनल कॉन्सर्ट्स में भी मौका दिया। वहीं से जुड़ाव शुरू हुआ। ‘मैं वापस आऊंगा’ से पहले मैंने उनकी साउथ की कुछ फिल्मों में गाए हैं। सवाल: आपने रहमान से अपनी आवाज के लिए अलग तरह का संगीत बनाने की बात भी कही थी? जवाब: मैंने उनसे कहा था कि मेरी आवाज मिड और लो रेंज में ज्यादा सहज रहती है। मेरी आवाज की अपनी पहचान है। इसके बाद लंबी बातचीत हुई और मैंने उन्हें देर रात तक गजलें सुनाईं। यह मेरे लिए खास अनुभव था। सवाल: हनी सिंह के साथ जुड़ी कौन-सी बात सबसे ज्यादा यादगार रही? जवाब: हनी सिंह ने मेरा गाना सुनकर मुझे फोन किया और कहा कि उन्हें ‘जाने तेरे शहर का’ पसंद आया। वह मेरे साथ कुछ अलग करना चाहते थे। बाद में हमने गजल और रैप को मिलाकर प्रयोग किया। सवाल: हनी सिंह के साथ गजल और रैप का प्रयोग कैसे हुआ? जवाब: हमारी पहचान पुरानी है। हमने साथ काम किया और गजल-रैप का नया प्रयोग किया। संगीत में नए रास्ते तलाशते रहना जरूरी है। सवाल: ओटीटी आने के बाद संगीत में क्या बदलाव महसूस हुआ? जवाब: ओटीटी ने संगीत को ज्यादा आजादी दी है। अब सिर्फ पारंपरिक फिल्मी साउंड तक सीमित नहीं रहना पड़ता। नए विषय और अलग तरह के गानों को जगह मिल रही है। सवाल: क्या आज के दौर में मेलोडी पीछे छूट रही है? जवाब: मुझे ऐसा नहीं लगता। ट्रेंड बदलते रहते हैं, लेकिन अच्छी धुन, अच्छे बोल और अच्छी आवाज लोगों के दिल तक पहुंचती है। मेलोडी कभी खत्म नहीं होती। सवाल: हजारों लाइव शोज के बाद कौन-सा मंच सबसे यादगार रहा? जवाब: रहमान साहब के साथ इंटरनेशनल स्टेज पर परफॉर्म करना यादगार रहा, लेकिन महाकाल में गाना सबसे भावुक अनुभव था। वहां भजन और स्तोत्र गाना अलग अनुभव था। सवाल: अपने पूरे सफर को आज किस तरह देखते हैं? जवाब: मैं अपने परिवार का पहला इंसान हूं जिसने प्रोफेशनल म्यूजिक को करियर बनाया। रास्ते में कई बार गिरा, सीखा और आगे बढ़ा। जब लोग कहते हैं कि मेरी सफलता उन्हें अपनी लगती है, तो लगता है कि मेहनत सही दिशा में जा रही है। सवाल: इतने सालों बाद भी क्या आज सीखना जारी है? जवाब: बिल्कुल। मैं आज भी खुद को संगीत का छात्र मानता हूं। 27 साल से मंच पर हूं, लेकिन हर नया गाना और कंपोजर कुछ नया सिखाता है।
जेंडर का फर्क मिट रहा, पर बदल रहीं सिर्फ महिलाएं:36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके

ऑफिस में सूट-वेस्ट पहनी महिलाएं आम हो गई हैं। लेकिन क्या आपने किसी पुरुष को झुमकियां पहनकर मीटिंग में आते देखा है? शायद नहीं। यही फर्क हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर मारेन हॉफ की नई रिसर्च का केंद्र बना। हॉफ जब ऑफिस में महिलाओं को सूट-वेस्ट में देखने लगीं तो उन्होंने खुद भी कुछ खरीद लिए। लेकिन एक मार्केटिंग स्कॉलर के रूप में उनके जेहन में सवाल उठा- यह बदलाव किस दिशा में हो रहा है? इसका जवाब उन्होंने ‘जर्नल ऑफ कंज्यूमर रिसर्च’ में दिया है-महिलाओं की तुलना में पुरुष बेहद कम बदल रहे हैं। मारेन की रिसर्च टीम ने 1880 से 2022 के बीच अमेरिका के एक लाख बच्चों के नामों का विश्लेषण किया। पाया कि हर साल औसतन 310 पुरुष नाम जेंडर-फ्लूइड बने। यानी लड़कियों ने पुरुषों के नाम अपनाए, जबकि जो पुरुषों ने महिला नाम अपनाए, वे सिर्फ 207 थे। ब्लेक इसका अच्छा उदाहरण है। 1883 में यह सिर्फ लड़कों का नाम था। 1960 के दशक में लड़कियों ने इसे अपनाना शुरू किया। 1981 तक यह दोनों का हो गया। टीम ने फैशन रिटेलर फारफेच के 2 लाख से ज्यादा प्रोडक्ट इमेज एक इमेज-रिकॉग्निशन मॉडल से जांचे। नतीजा साफ था- महिलाओं के 7% कपड़े एआई ने पुरुषों के समझ लिए, जबकि पुरुषों के सिर्फ 5.3% कपड़े ही महिलाओं का समझा। यानी महिलाओं के फैशन में मर्दाना छाप ज्यादा है, पर इसका उल्टा कम हो रहा है। इसकी वजह सीधी है- मर्दानगी को समाज में ताकत का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं के लिए पुरुष-स्टाइल कम जोखिम भरा है, बल्कि यह उन्हें प्रोफेशनल और सशक्त दिखाता है। पुरुषों के लिए स्त्रियोचित स्टाइल अब भी सामाजिक रूप से जोखिम भरा माना जाता है। हॉफ कहती हैं, ‘यह ट्रेंड समावेश के नाम पर है, लेकिन असल में यह पुरानी पावर डायनेमिक्स को बनाए रखता है।’ दिलचस्प है कि 36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके हैं। नॉर्डस्ट्रॉम, मार्क जैकब्स और गुची जैसे ब्रांड जेंडर-फ्लूइड कलेक्शन ला चुके हैं। लेकिन मारेन की रिसर्च कहती है कि जब तक यह बदलाव एकतरफा है, तब तक समानता दूर है। असली बदलाव तब आएगा जब पुरुष भी बिना झिझक झुमकियां पहन सकें। यूनिसेक्स जेंडर-फ्लूइड का बस एक हिस्सा, फैशन इंडस्ट्री में इसकी चार कैटेगरी फैशन की दुनिया में चार अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जिन्हें अक्सर एक समझ लिया जाता है: जेंडर-फ्लूइड – धीरे-धीरे और स्थायी रूप से लिंग की सीमाएं तोड़ता है, मसलन पुरुषों के लिए पर्ल नेकलेस। जेंडर-बेंडिंग – अपोजिट जेंडर के कपड़े पहनना, पर यह अस्थायी होता है। यूनिसेक्स – न मर्दाना, न स्त्रैण- जैसे ओवरसाइज्ड हूडी। एंड्रोजनी – एक ही लुक में दोनों का मिश्रण, जैसे आधा सूट, आधी ड्रेस।
सैफ ने हमले पर की बात:कहा- उसने पूरी ताकत से चाकू मारा, सफेद कुर्ता खून से सन गया, तैमूर ने पूछा था- क्या आप मर जाओगे

सैफ अली खान ने जनवरी 2025 में घर में घुसकर हुए डरावने, जानलेवा हमले पर बात की है। एक्टर ने बताया है कि जब वो बच्चों के कमरे में पहुंचे तो वो हमलावर जेह और नैनी को पहले ही चोट पहुंचा चुका था। जैसे ही सैफ ने उसे रोकने की कोशिश की, उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मार दिया और उनका सफेद कुर्ता खून से लाल हो गया। सैफ ने ये भी बताया है कि हमले के बाद वो फर्श पर गिर पड़े और उन्हें लगा कि वो अब जिंदा नहीं बच सकेंगे। तभी बेटे तैमूर ने उनसे पूछा था कि क्या वो मरने वाले हैं। हमले पर बात करते हुए सैफ ने ये भी कहा कि वो उस शख्स को माफ करने के लिए तैयार हैं। सैफ अली खान ने मोजो स्टोरी को दिए इंटरव्यू में हमले पर बात करते हुए कहा, ‘वह बहुत ही भयावह घटना थी। एक चोर बाथरूम की खिड़की से घर में घुस आया। हम सो रहे थे, तभी नैनी ने आकर कहा, “जेह बाबा के कमरे में कोई आदमी है, जिसके हाथ में छुरी है और वह पैसे मांग रहा है।” ‘मैं तुरंत बच्चों के कमरे में गया। वह शख्स बच्चे (जेह) को पकड़े हुए था। उसने बच्चे को हल्की चोट पहुंचाई थी और हमारी मेड को भी जख्मी कर दिया था। शायद अगर मैं पहले लाइट जला देता और उससे बात करने की कोशिश करता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। लेकिन उस समय मैंने बिना सोचे-समझे उस पर हमला कर दिया और हमारी हाथापाई शुरू हो गई।’ ‘इसके बाद वह चाकू लेकर बेकाबू हो गया। चारों तरफ खून और अफरा-तफरी मच गई। फिर मेरी नेपाली मेड गीता वहां आई, उसने उसे जोर से धक्का देकर कमरे के दूसरी तरफ फेंक दिया।’ आगे सैफ ने कहा, ‘कुछ देर बाद मैंने नोटिस किया कि मैं सफेद कुर्ता-पायजामा पहने हुए था, जो खून से पूरी तरह भीग चुका था। एक समय ऐसा आया जब मैं फर्श पर पड़ा था और मुझे लगा कि शायद मैं मर जाऊंगा। मैं सोच रहा था कि मैंने अपनी जिंदगी अच्छी तरह जी ली है। मैं बस अपने बच्चे का हाथ पकड़कर दुनिया को अलविदा कहना चाहता था। फिर मेरी आंख खुली और मैंने सोचा ऐसा नहीं होगा। फिर मैं हॉस्पिटल गया। मैं वाकई तैमूर के साथ रहना चाहता था। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम मेरे साथ हॉस्पिटल आओगे। उसने मुझे देखा और पूछा, ‘क्या आप मरने वाले हैं?’ मैंने कहा, ‘नहीं, मेरी पीठ में बहुत दर्द है, लेकिन मैं ठीक हो जाऊंगा’, उसने कहा, हां मैं चलूंगा।’ सैफ ने ये भी कहा कि उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मारा था। चाकू का 6 इंच का टुकड़ा उनकी पीठ में रह गया था। वो टुकड़ा रीड़ की हड्डी के पास लगा था। सैफ ने कहा, ‘मेरा एक पैर सुन्न हो रहा था, मैं पैरालाइस होने के बेहद करीब था।’ मैं उसे माफ करना चाहता हूं- सैफ अली खान आखिर में सैफ ने कहा, मैं उस आदमी को माफ भी करना चाहता था, क्योंकि मुझे लगता है कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई थी और वह लड़ाई करने नहीं आया था। मैं उसे माफ करने के लिए तैयार हूं, लेकिन जिस हिस्से में उसने मुझे मारने की कोशिश की, उसे भुला पाना मेरे लिए अब भी मुश्किल है। मुझे लगता है कि समाज में अमीरी-गरीबी और असमानता जैसी चीजों ने भी ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं।” जनवरी 2025 में हुआ था हमला सैफ अली खान पर बीते साल 15 जनवरी को उनके घर सतगुरु शरण अपार्टमेंट में घुसकर हमला हुआ था। इसके बाद सैफ खुद ऑटो कर बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचे थे। लीलावती हॉस्पिटल की मेडकिल रिपोर्ट के अनुसार, एक्टर सैफ अली खान को पांच जगहों पर चाकू घोंपा गया था। उनको पीठ, कलाई, गर्दन, कंधे और कोहनी पर चोटें लगी थीं। इलाज के बाद एक्टर को 21 जनवरी को डिस्चार्ज किया गया। पुलिस ने 2 दिन बाद बांग्लादेशी नागरिक शरीफुल इस्लाम को गिरफ्तार किया था। आरोपी अब भी पुलिस की हिरासत में है।
सैफ ने हमले पर की बात:कहा- उसने पूरी ताकत से चाकू मारा, सफेद कुर्ता खून से सन गया, तैमूर ने पूछा था- क्या आप मर जाओगे

सैफ अली खान ने जनवरी 2025 में घर में घुसकर हुए डरावने, जानलेवा हमले पर बात की है। एक्टर ने बताया है कि जब वो बच्चों के कमरे में पहुंचे तो वो हमलावर जेह और नैनी को पहले ही चोट पहुंचा चुका था। जैसे ही सैफ ने उसे रोकने की कोशिश की, उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मार दिया और उनका सफेद कुर्ता खून से लाल हो गया। सैफ ने ये भी बताया है कि हमले के बाद वो फर्श पर गिर पड़े और उन्हें लगा कि वो अब जिंदा नहीं बच सकेंगे। तभी बेटे तैमूर ने उनसे पूछा था कि क्या वो मरने वाले हैं। हमले पर बात करते हुए सैफ ने ये भी कहा कि वो उस शख्स को माफ करने के लिए तैयार हैं। सैफ अली खान ने मोजो स्टोरी को दिए इंटरव्यू में हमले पर बात करते हुए कहा, ‘वह बहुत ही भयावह घटना थी। एक चोर बाथरूम की खिड़की से घर में घुस आया। हम सो रहे थे, तभी नैनी ने आकर कहा, “जेह बाबा के कमरे में कोई आदमी है, जिसके हाथ में छुरी है और वह पैसे मांग रहा है।” ‘मैं तुरंत बच्चों के कमरे में गया। वह शख्स बच्चे (जेह) को पकड़े हुए था। उसने बच्चे को हल्की चोट पहुंचाई थी और हमारी मेड को भी जख्मी कर दिया था। शायद अगर मैं पहले लाइट जला देता और उससे बात करने की कोशिश करता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। लेकिन उस समय मैंने बिना सोचे-समझे उस पर हमला कर दिया और हमारी हाथापाई शुरू हो गई।’ ‘इसके बाद वह चाकू लेकर बेकाबू हो गया। चारों तरफ खून और अफरा-तफरी मच गई। फिर मेरी नेपाली मेड गीता वहां आई, उसने उसे जोर से धक्का देकर कमरे के दूसरी तरफ फेंक दिया।’ आगे सैफ ने कहा, ‘कुछ देर बाद मैंने नोटिस किया कि मैं सफेद कुर्ता-पायजामा पहने हुए था, जो खून से पूरी तरह भीग चुका था। एक समय ऐसा आया जब मैं फर्श पर पड़ा था और मुझे लगा कि शायद मैं मर जाऊंगा। मैं सोच रहा था कि मैंने अपनी जिंदगी अच्छी तरह जी ली है। मैं बस अपने बच्चे का हाथ पकड़कर दुनिया को अलविदा कहना चाहता था। फिर मेरी आंख खुली और मैंने सोचा ऐसा नहीं होगा। फिर मैं हॉस्पिटल गया। मैं वाकई तैमूर के साथ रहना चाहता था। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम मेरे साथ हॉस्पिटल आओगे। उसने मुझे देखा और पूछा, ‘क्या आप मरने वाले हैं?’ मैंने कहा, ‘नहीं, मेरी पीठ में बहुत दर्द है, लेकिन मैं ठीक हो जाऊंगा’, उसने कहा, हां मैं चलूंगा।’ सैफ ने ये भी कहा कि उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मारा था। चाकू का 6 इंच का टुकड़ा उनकी पीठ में रह गया था। वो टुकड़ा रीड़ की हड्डी के पास लगा था। सैफ ने कहा, ‘मेरा एक पैर सुन्न हो रहा था, मैं पैरालाइस होने के बेहद करीब था।’ मैं उसे माफ करना चाहता हूं- सैफ अली खान आखिर में सैफ ने कहा, मैं उस आदमी को माफ भी करना चाहता था, क्योंकि मुझे लगता है कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई थी और वह लड़ाई करने नहीं आया था। मैं उसे माफ करने के लिए तैयार हूं, लेकिन जिस हिस्से में उसने मुझे मारने की कोशिश की, उसे भुला पाना मेरे लिए अब भी मुश्किल है। मुझे लगता है कि समाज में अमीरी-गरीबी और असमानता जैसी चीजों ने भी ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं।” जनवरी 2025 में हुआ था हमला सैफ अली खान पर बीते साल 15 जनवरी को उनके घर सतगुरु शरण अपार्टमेंट में घुसकर हमला हुआ था। इसके बाद सैफ खुद ऑटो कर बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचे थे। लीलावती हॉस्पिटल की मेडकिल रिपोर्ट के अनुसार, एक्टर सैफ अली खान को पांच जगहों पर चाकू घोंपा गया था। उनको पीठ, कलाई, गर्दन, कंधे और कोहनी पर चोटें लगी थीं। इलाज के बाद एक्टर को 21 जनवरी को डिस्चार्ज किया गया। पुलिस ने 2 दिन बाद बांग्लादेशी नागरिक शरीफुल इस्लाम को गिरफ्तार किया था। आरोपी अब भी पुलिस की हिरासत में है।
पैपराजी पर भड़कीं मलाइका अरोड़ा:किसी से बात कर रही थीं; ज्यादा करीब आने पर बोलीं- बाबा, आप इधर आ जाओ

मलाइका अरोड़ा का हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में वह किसी से बात करती नजर आ रही हैं। इस दौरान पैपराजी उनके काफी करीब आ जाते हैं, जिससे वे नाराज हो गईं। मलाइका पैपराजी से कहती हैं, “बाबा, आप इधर आ जाओ।” जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि, अब तक यह जानकारी सामने नहीं आ पाई कि यह वीडियो कब और कहां का है। मलाइका ने बिना जरूरत तस्वीरें खींचने पर नाराजगी जताई थी बता दें कि मलाइका अरोड़ा ने कहा था कि उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब पैपराजी उनकी बिना जरूरत वाली तस्वीरें क्लिक करते हैं। दिसंबर 2022 में कॉमेडियन भारती सिंह से बातचीत के दौरान मलाइका ने कहा था, “मैंने कभी किसी को नहीं डांटा, जब तक किसी ने मुझे धक्का न दिया हो या गलत व्यवहार न किया हो, लेकिन मुझे सबसे ज्यादा गुस्सा तब आता है, जब फोटोग्राफर्स मेरे चेहरे की बजाय मेरे शरीर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें लेने लगते हैं। कैमरा ऊपर-नीचे घूमता रहता है और मुझे इससे दिक्कत होती है।” मलाइका ने आगे कहा था, “वे मेरे शरीर के कुछ खास हिस्सों पर ही फोकस क्यों करते हैं? मुझे अपने शरीर पर गर्व है। फिर लोग कहते हैं कि अगर नहीं दिखाना है, तो पूरे कपड़े पहन लो। लेकिन मैं क्या पहनूं, यह मेरा फैसला है। मुझे जैसे कपड़े पसंद हैं, मैं वैसे ही पहनूंगी।” उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसी तस्वीरों की वजह से उन्हें अपने परिवार को भी जवाब देना पड़ता है। इसलिए यह बात उन्हें परेशान करती है। सलमान भी पैपराजी पर भड़के थे वहीं, पिछले महीने सलमान खान भी पैपराजी पर भड़क गए थे। दरअसल, वे हिंदुजा अस्पताल पहुंचे थे, जहां से निकलते समय पैपराजी के शोर से एक्टर भड़क गए थे। हालांकि, बाद में जब सलमान फिल्म राजा शिवाजी की सक्सेस पार्टी में पहुंचे, तब सभी पैपराजी ने उनसे माफी मांगी थी। सलमान जैसे ही पार्टी में पहुंचे, वैसे ही सभी पैपराजी ने उन्हें घेर लिया और माफी मांगने लगे। सभी एक साथ, “सॉरी भाईजान, जोर से बोलो सॉरी”, कहते दिखे। इसके बाद सलमान ने भी उनकी माफी कबूल कर ली थी। बता दें कि इस पहले गोविंदा के बॉडीगार्ड्स की भी पैपराजी से बहस हो चुकी है। दरअसल, गोविंदा पिछले एक इवेंट में पहुंचे थे। वहां से निकलते हुए उन्हें पैपराजी ने घेर लिया था। जब उनके गार्ड्स ने निकलने की जगह बनाने के लिए लोगों को पीछे किया, तो पैपराजी ने आरोप लगाया कि उन्हें धक्का दिया गया। विवाद बढ़ने पर गोविंदा को खुद बीच-बचाव करना पड़ा था।
पैपराजी पर भड़कीं मलाइका अरोड़ा:किसी से बात कर रही थीं; ज्यादा करीब आने पर बोलीं- बाबा, आप इधर आ जाओ

मलाइका अरोड़ा का हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में वह किसी से बात करती नजर आ रही हैं। इस दौरान पैपराजी उनके काफी करीब आ जाते हैं, जिससे वे नाराज हो गईं। मलाइका पैपराजी से कहती हैं, “बाबा, आप इधर आ जाओ।” जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि, अब तक यह जानकारी सामने नहीं आ पाई कि यह वीडियो कब और कहां का है। मलाइका ने बिना जरूरत तस्वीरें खींचने पर नाराजगी जताई थी बता दें कि मलाइका अरोड़ा ने कहा था कि उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब पैपराजी उनकी बिना जरूरत वाली तस्वीरें क्लिक करते हैं। दिसंबर 2022 में कॉमेडियन भारती सिंह से बातचीत के दौरान मलाइका ने कहा था, “मैंने कभी किसी को नहीं डांटा, जब तक किसी ने मुझे धक्का न दिया हो या गलत व्यवहार न किया हो, लेकिन मुझे सबसे ज्यादा गुस्सा तब आता है, जब फोटोग्राफर्स मेरे चेहरे की बजाय मेरे शरीर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें लेने लगते हैं। कैमरा ऊपर-नीचे घूमता रहता है और मुझे इससे दिक्कत होती है।” मलाइका ने आगे कहा था, “वे मेरे शरीर के कुछ खास हिस्सों पर ही फोकस क्यों करते हैं? मुझे अपने शरीर पर गर्व है। फिर लोग कहते हैं कि अगर नहीं दिखाना है, तो पूरे कपड़े पहन लो। लेकिन मैं क्या पहनूं, यह मेरा फैसला है। मुझे जैसे कपड़े पसंद हैं, मैं वैसे ही पहनूंगी।” उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसी तस्वीरों की वजह से उन्हें अपने परिवार को भी जवाब देना पड़ता है। इसलिए यह बात उन्हें परेशान करती है। सलमान भी पैपराजी पर भड़के थे वहीं, पिछले महीने सलमान खान भी पैपराजी पर भड़क गए थे। दरअसल, वे हिंदुजा अस्पताल पहुंचे थे, जहां से निकलते समय पैपराजी के शोर से एक्टर भड़क गए थे। हालांकि, बाद में जब सलमान फिल्म राजा शिवाजी की सक्सेस पार्टी में पहुंचे, तब सभी पैपराजी ने उनसे माफी मांगी थी। सलमान जैसे ही पार्टी में पहुंचे, वैसे ही सभी पैपराजी ने उन्हें घेर लिया और माफी मांगने लगे। सभी एक साथ, “सॉरी भाईजान, जोर से बोलो सॉरी”, कहते दिखे। इसके बाद सलमान ने भी उनकी माफी कबूल कर ली थी। बता दें कि इस पहले गोविंदा के बॉडीगार्ड्स की भी पैपराजी से बहस हो चुकी है। दरअसल, गोविंदा पिछले एक इवेंट में पहुंचे थे। वहां से निकलते हुए उन्हें पैपराजी ने घेर लिया था। जब उनके गार्ड्स ने निकलने की जगह बनाने के लिए लोगों को पीछे किया, तो पैपराजी ने आरोप लगाया कि उन्हें धक्का दिया गया। विवाद बढ़ने पर गोविंदा को खुद बीच-बचाव करना पड़ा था।







