‘उनकी चुप्पी निराशाजनक’: आप ने कहा कि राघव चड्ढा संसद में पंजाब के मुद्दे उठाने में ‘विफल’ रहे | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:05 अप्रैल, 2026, 08:02 IST आप पंजाब के नेताओं ने सांसद राघव चड्ढा पर राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राज्य के प्रमुख मुद्दों को संसद में उठाने में विफल रहने का आरोप लगाया। चड्ढा 2012 में आप के गठन के बाद से ही इससे जुड़े हुए हैं। (फाइल छवि) आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए उन पर संसद में पंजाब की चिंताओं को पर्याप्त रूप से आवाज नहीं उठाने का आरोप लगाया और उनके दृष्टिकोण को पार्टी के मूल मूल्यों के साथ असंगत बताया। एक संयुक्त बयान में, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, राज्य इकाई के प्रमुख अमन अरोड़ा और नेता कुलदीप सिंह धालीवाल ने गंभीर मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी पर असंतोष व्यक्त किया। चीमा ने कहा कि पंजाब के विधायकों द्वारा चुने जाने के बावजूद चड्ढा राज्य को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मामलों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में विफल रहे। मंत्री ने कहा कि सांसद ने राज्य से संबंधित “एक भी संवेदनशील मुद्दा” नहीं उठाया। पीटीआई सूचना दी. चड्ढा की ‘निष्क्रियता’ पार्टी सिद्धांतों के विपरीत: आप उद्धृत की गई चिंताओं में ग्रामीण विकास निधि का लगभग 8,500 करोड़ रुपये का बकाया और 60,000 करोड़ रुपये के करीब जीएसटी से संबंधित घाटा शामिल था। नेताओं ने जीएसटी मुआवजे में कमी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वित्त पोषण अंतराल और राज्य में पिछले साल की बाढ़ के बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित बाढ़ राहत में 1,600 करोड़ रुपये जारी करने में केंद्र की देरी को भी चिह्नित किया। चड्ढा की चुप्पी को ”निराशाजनक” बताते हुए मंत्री चीमा ने कहा कि आप को उम्मीद थी कि राज्यसभा सांसद इन मुद्दों को केंद्र के समक्ष उठाएंगे और उनकी ”निष्क्रियता” पार्टी के सिद्धांतों के विपरीत है। अरोड़ा ने कहा कि जनता के मुद्दों को लगातार उठाना पार्टी की विचारधारा का केंद्र है। धालीवाल ने कहा कि बाढ़ प्रभावित निवासी खुद को नजरअंदाज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि मुआवजे और राहत की उनकी मांगों को संसद में नहीं लाया गया। यह तब हुआ है जब आप ने बुधवार को चड्ढा को उच्च सदन में उपनेता के पद से हटा दिया, जो पार्टी के भीतर आंतरिक दरार के संकेत देता है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर चड्ढा को पार्टी के उपनेता पद से हटाने के फैसले की जानकारी दी। पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया इस कदम के कुछ घंटों बाद, राज्यसभा सांसद ने राज्यसभा में अपने तर्कों और हस्तक्षेपों का संकलन साझा करके परोक्ष प्रतिक्रिया जारी की। तीन मिनट के वीडियो में 37 वर्षीय नेता को वायु प्रदूषण और बढ़ते हवाई किराए से लेकर गिग श्रमिकों के अधिकारों और मोबाइल प्रीपेड योजनाओं की 28-दिन की वैधता सहित कई मुद्दों पर चिंता व्यक्त करते हुए दिखाया गया है। इससे पहले शनिवार को आप सांसद ने पलटवार करते हुए आप नेतृत्व द्वारा उन पर लगाए गए तीन प्रमुख आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। स्वाति मालीवाल के बाद वह आप के दूसरे राज्यसभा सांसद बन गए हैं, जिनका पार्टी नेतृत्व से मतभेद हो गया है। जगह : पंजाब, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 05 अप्रैल, 2026, 07:59 IST समाचार राजनीति ‘उनकी चुप्पी निराशाजनक’: आप ने कहा कि राघव चड्ढा संसद में पंजाब के मुद्दे उठाने में ‘विफल’ रहे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा आप विवाद(टी)आम आदमी पार्टी(टी)पंजाब की चिंता संसद(टी)राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा(टी)आप आंतरिक दरार(टी)पंजाब जीएसटी बकाया(टी)बाढ़ राहत पंजाब(टी)अरविंद केजरीवाल नेतृत्व
बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं

बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं
ईरान ने ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया:कहा- बेबस और घबराकर धमकी दे रहे, तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 48 घंटे में होर्मुज खोलने के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है। ईरानी सेना ने कहा है कि अमेरिका बेबस और घबराकर धमकियां दे रहा है। ईरान के केंद्रीय सैन्य मुख्यालय खातम अल-अनबिया के जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने ट्रम्प की चेतावनी को मूर्खतापूर्ण कार्रवाई बताया और इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की धमकियों का मतलब है कि “तुम्हारे लिए भी नरक के दरवाजे खोल दिए जाएंगे।” इससे पहले ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने या समझौता करने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि समय खत्म हो रहा है और ऐसा नहीं होने पर ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया जाएगा। ट्रम्प अब तक होर्मुज खोलने के लिए ईरान को तीन बार अल्टीमेटम दे चुके हैं, जिससे इस मुद्दे पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान बोला- बुशहर न्यूक्लियर साइट पर 4 बार हमला हुआ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल ने बुशहर न्यूक्लियर साइट पर चार बार हमला किया है। उन्होंने कहा कि इन हमलों से न केवल ईरान बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि न्यूक्लियर साइट के पास हमले बेहद जोखिम भरे हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के जापोरिज्जिया न्यूक्लियर प्लांट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो चिंता दिखाई जाती है, वैसी संवेदनशीलता बुशेहर के मामले में नहीं दिख रही है। अराघची ने यह भी कहा कि पेट्रोकेमिकल ठिकानों पर हमले इस बात का संकेत हैं कि रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों से पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है। ईरान जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
सिवनी में जेबकतरा गिरफ्तार:मंदिर से श्रद्धालु का उड़ाया था पर्स, 17 हजार लेकर हुआ था फरार

सिवनी जिले में सक्रिय जेबकतरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने शनिवार की रात एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी की नकदी और पर्स बरामद किया। कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को सिवनी निवासी अमित राजपूत (42) ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि हनुमान प्रकटोत्सव के दौरान बालस्वरूप हनुमान मंदिर में पूजा करते समय रात करीब 8 बजे किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से लगभग 17 हजार रुपए चुरा लिए थे। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना स्तर पर एक टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास पूछताछ, संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया। इसके आधार पर सिवनी के टिग्गा मोहल्ला निवासी इस्लाम खान (30) की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने चोरी की गई राशि में से कुछ पैसे खर्च कर दिए थे। उसके पास से 7,250 रुपये नकद और एक पर्स बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी इस्लाम खान के खिलाफ पहले भी कोतवाली थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सतीश तिवारी के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक संजय यादव, मनोज पाल, मुकेश चौरिया और राजेंद्र राजपूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
गर्मी में भूलकर भी नहीं रखें फ्रिज में ये चीजें, फायदे की जगह हो जाएगा नुकसान, हेल्थ एक्सपर्ट से जानें

Last Updated:April 05, 2026, 07:03 IST Health tips: गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग ठंडी चीजें ज्यादा खाने लगते हैं. घर में रखा फ्रिज इस मौसम में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज बन जाता है. कई लोग खाने-पीने की लगभग हर चीज फ्रिज में रख देते हैं, ताकि वह ज्यादा समय तक ताजा रहे. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ चीजें फ्रिज में रखना नुकसानदायक हो सकता है. खरगोन हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संतोष मौर्य (आयुर्वेद विशेषज्ञ) बताते हैं कि हर चीज को ठंडा रखना जरूरी नहीं होता. कई फल और सब्जियां फ्रिज में रखने से उनके पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इससे शरीर को फायदा मिलने की जगह नुकसान हो सकता है. इसलिए गर्मी में खाने की चीजों को सही तरीके से रखना जरूरी है. ब्रेड को भी अक्सर लोग फ्रिज में रख देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता. फ्रिज में रखने से ब्रेड जल्दी सूख जाती है और उसका स्वाद भी खराब हो जाता है. लंबे समय तक ऐसी ब्रेड खाने से पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है. टमाटर को फ्रिज में रखने से उसका स्वाद और प्राकृतिक गुण कम हो जाते हैं. ठंडे तापमान में टमाटर जल्दी खराब भी हो सकता है. इसलिए टमाटर को सामान्य तापमान पर खुले स्थान पर रखना ज्यादा सही माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google केले, आम और पपीता जैसे फलों को भी फ्रिज में रखने से बचना चाहिए. फ्रिज में रखने से ये फल जल्दी काले पड़ जाते हैं और इनमें मौजूद पोषक तत्व कम हो जाते हैं. ऐसे फल सामान्य जगह पर रखने से ज्यादा समय तक अच्छे रहते हैं. तरबूज को भी पूरा का पूरा फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. इससे उसका स्वाद बदल सकता है. तरबूज काटने के बाद ही फ्रिज में रखें और जल्दी उपयोग करें. इससे शरीर को सही पोषण मिलता है और पेट की समस्या से बचाव होता है. लहसुन, प्याज और आलू जैसी चीजों को भी फ्रिज में रखने से नुकसान हो सकता है. फ्रिज में रखने से इनका स्वाद बदल जाता है और इनमें नमी बढ़ जाती है. इससे ये जल्दी खराब हो सकते हैं और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. तेल को भी फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. ठंडे तापमान में तेल गाढ़ा हो जाता है और उसकी गुणवत्ता बदल सकती है. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गर्मी में भी कुछ चीजों को सामान्य तापमान पर ही रखना चाहिए, ताकि शरीर स्वस्थ बना रहे. First Published : April 05, 2026, 07:03 IST
जोधपुर में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब शहर में संभव – News18 हिंदी

X जोधपुर में शुरू हुई रोबोटिक सर्जरी, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब संभव Jodhpur Cancer Robotic Surgery: जोधपुर के विनायका अस्पताल में स्वदेशी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है. 8 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस तकनीक से अब कैंसर सहित कई जटिल ऑपरेशन शहर में ही संभव हो गए हैं. डेढ़ महीने में 13 सफल सर्जरी इसके बेहतर परिणाम का संकेत हैं. अस्पताल ने 8 डॉक्टरों और 12 स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देकर इस सुविधा को मजबूत बनाया है. डॉ. प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में टीम पहले ही 5000 से अधिक कैंसर ऑपरेशन कर चुकी है. अब रोबोटिक तकनीक से मरीजों को कम दर्द, जल्दी रिकवरी और कम खर्च का लाभ मिल रहा है. RGHS योजना से जुड़ने के कारण आम लोगों की पहुंच भी बढ़ी है. इस पहल से मारवाड़ के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
गर्मी में गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें खास ख्याल! डाइटिशियन से जानें, क्या खाएं, क्या बचें और कैसे रहें स्वस्थ

जमशेदपुर: गर्मी का मौसम शुरू होते ही आम लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की जरूरत ज्यादा हो जाती है. इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में सही खान-पान और दिनचर्या बेहद जरूरी हो जाती है. आइये जानते हैं गर्भवती महिलाएं ऐसे में क्या करें. जमशेदपुर की डाइटिशियन बीवा रंजन ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी में एक बार में ज्यादा खाना खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करना ज्यादा फायदेमंद होता है. हर 2 से 3 घंटे में हल्का भोजन लेने से पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है. हाइड्रेशन का रखें खास ध्यान गर्मी में सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी होती है. इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है. इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताजे फलों का जूस जैसे तरबूज का जूस शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. सुबह का नाश्ता हो हल्का और पौष्टिक सुबह के समय फल खाना सबसे अच्छा माना जाता है. तरबूज, खरबूजा, सेब, केला जैसे फल शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देते हैं. साथ ही आप हल्का दलिया, ओट्स या दूध भी ले सकती हैं. दोपहर का भोजन संतुलित रखें दोपहर में रोटी, चावल और दाल का संतुलित सेवन करें. इसके साथ हरी सब्जियां और सलाद जरूर शामिल करें. सलाद में खीरा, टमाटर, गाजर जैसी चीजें शरीर को ठंडक देती हैं और पाचन को बेहतर बनाती हैं. शाम के समय हेल्दी स्नैक्स लें शाम को भारी तली-भुनी चीजों से बचें. इसके बजाय सॉटेड पनीर, चना (चिकपी) सलाद या स्प्राउट्स खा सकती हैं. ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं और मां व बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हैं. रात का खाना हल्का रखें रात में हल्का भोजन जैसे खिचड़ी, दाल-चावल या हल्की सब्जी के साथ रोटी लेना बेहतर होता है. ज्यादा भारी खाना पचने में दिक्कत दे सकता है और नींद भी खराब कर सकता है. लाइफस्टाइल का भी रखें ध्यान गर्मी में ज्यादा मेहनत या हार्ड वर्क से बचना चाहिए. हल्की-फुल्की वॉक करना शरीर के लिए अच्छा रहता है. ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें और तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. जानें क्या न करें बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और बाहर का खाना अवॉयड करें. कैफीन और ज्यादा मीठे पेय पदार्थ भी कम लें. अंत में गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और आरामदायक दिनचर्या अपनाकर खुद को स्वस्थ रखना चाहिए. इससे मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है.
पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
एमपी में विधायकों को सजा के 5 चर्चित मामले:सिर्फ एक महिला विधायक की सदस्यता हुई थी समाप्त, दतिया MLA का केस भी कोर्ट पर निर्भर

दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को फर्जीवाडे़ के मामले में दिल्ली की राउज अवेन्यू कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट रिक्त घोषित करने की सूचना चुनाव आयोग को भेजते हुए गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया। अब राजेन्द्र भारती इस सजा और सदस्यता खत्म करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी में हैं। सोमवार को उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो सकती है। मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा के ऐसे पांच प्रमुख मामले हैं जिनमें न्यायालय से विधायकों को सजा हुई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की लेकिन, उच्च अदालतों से कुछ विधायकों को राहत मिल गई तो उनकी विधायकी बच गई। लेकिन, एक विधायक की सदस्यता चली गई थी। 1. आशा रानी सिंह (विधायक,बिजावर) छतरपुर जिले के बिजावर सीट से भाजपा विधायक आशा रानी सिंह को 2011 में एक नौकरानी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके पति पर नौकरानी उनकी सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त की और सीट रिक्त घोषित की थी। भाजपा की पूर्व विधायक आशारानी सिंह को उनकी घरेलू सहायिका (तिजिया बाई) को प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया गया था। 10 साल की सजा के बाद गई थी विधायकी 31 जनवरी 2011 को छतरपुर की एक अदालत ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद उनकी सदस्यता खतरे में आ गई थी, लेकिन उस समय ‘लिली थॉमस’ फैसला लागू नहीं था। हालांकि, जेल जाने के कारण और सजा की अवधि लंबी होने के कारण 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। आशारानी सिंह ने हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन उन्हें सजा पर स्टे नहीं मिला, जिसके कारण उनकी सदस्यता नहीं बच सकी और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। 2. प्रहलाद लोधी (विधायक, पवई) भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का मामला मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय और न्यायपालिका के बीच खींचतान का एक बड़ा उदाहरण बना। 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) ने लोधी को साल 2014 के एक मामले में 2 साल की जेल और सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई करने गए पवई के तत्कालीन तहसीलदार के साथ मारपीट की थी। कोर्ट से मिला स्टे तो बच गई सदस्यता विधानसभा सचिवालय ने इस सजा के आधार पर 2 नवंबर 2019 को उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद प्रहलाद लोधी हाई कोर्ट पहुंचे और 7 नवंबर 2019 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दिया। इस स्टे के आधार पर काफी कानूनी विवाद हुआ, लेकिन अंततः सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे। कोर्ट से राहत मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने तत्कालीन स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाए थे सत्यमेव जयते! साथी विधायक प्रहलाद लोधी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली है। स्पीकर ने विधायक को असंवैधानिक तरीके से अयोग्य घोषित किया था। प्रदेश सरकार ने घटिया हरकत की और एक महीने तक क्षेत्र की जनता को अपने जनप्रतिनिधि से वंचित रखने का महापाप किया। #MP_मांगे_जवाब— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 6, 2019 3. खरगापुर विधायक का निर्वाचन हो गया था शून्य टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी चंदा सिंह गौर ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में दो मुख्य आरोप लगाए गए थे। जिनमें, राहुल सिंह लोधी ने अपने नामांकन पत्र (एफिडेविट) में यह जानकारी छिपाई थी कि उनकी फर्म ‘आरआर कंस्ट्रक्शन’ का सरकार के साथ अनुबंध था, जो कि लाभ के पद के अंतर्गत आता है। उन्होनें चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित सीमाओं और नियमों का उल्लंघन किया गया था। हाई कोर्ट का फैसला और तारीख मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के जस्टिस नमिन्द्रा सिंह ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राहुल सिंह लोधी के 2018 के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने माना कि नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951’ की धारा 100 के तहत चुनाव रद्द करने का ठोस आधार है। विधानसभा सचिवालय की कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद, नवंबर 2022 में मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की। इसके तहत राहुल सिंह लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी गई और खरगापुर विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इसकी सूचना तत्काल चुनाव आयोग को भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट से ‘स्टे’ और सदस्यता की बहाली विधानसभा से सदस्यता रद्द होने के तुरंत बाद राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उनकी सदस्यता बहाल तो हो गई, लेकिन कोर्ट ने उन पर कुछ शर्तें लगाई थीं। वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते थे, लेकिन अंतिम फैसला आने तक उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं था और वे विधायक के रूप में मिलने वाले कुछ भत्तों के लिए भी पात्र नहीं थे। 4. मुकेश मल्होत्रा (विधायक, विजयपुर) विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को मार्च 2026 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक मामले में दोषी मानते हुए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। कोर्ट ने माना कि मतदाता को उम्मीदवार के आपराधिक इतिहास को जानने का अधिकार है और इसे छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है। राज्यसभा चुनाव में नहीं दे पाएंगे वोट, विधायकी बची रहेगी मुकेश मल्होत्रा ने एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें विधायक





