Sunday, 14 Jun 2026 | 04:29 AM

Trending :

Bangladesh Ram Statue Project Halted Amidst Fundamentalist Pressure कॉन्टैक्ट लेंस सुरक्षा: आपकी आँखों में कांटेक्ट लेंस क्या हैं? जान लें कि इसे काफी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है क्रिकेटर ऋषभ पंत ने किए आदि कैलाश के दर्शन:आईटीबीपी जवानों के साथ मिलकर बढ़ाया हौसला, स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का पारंपरिक इलाज- चॉकलेट से इलाज! 3 लाख करोड़ रुपए का इलाज करा चुके हैं ‘जड़ी-मजबूत की रानी’ पद्मश्री यानुंग जामोह
EXCLUSIVE

सोमवार ऑफिस जाने का सोचकर संडे को ही बढ़ जाती है एंजायटी, घबराहट? जानें क्या है ‘संडे स्केयरीज’ दूर करने के टिप्स

authorimg

How to overcome Sunday Scaries: काफी लोगों को ऑफिस जाना अच्छा लगता है. रेगुलर ऑफिस जाकर अपना सारा काम समय पर निपटा देने में ऐसे लोग एक्सपर्ट होते हैं. ऐसे लोगों को वीक ऑफ के खत्म का इंतजार रहता है, ताकि वे सोमवार से फिर से नए मूड, फ्रेश माइंड से ऑफिस जा सकें. लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें ऑफिस जाना बोरिंग टास्क लगता है. वे मजबूरी में काम करते हैं, क्योंकि घर चलाना है. अपने खर्चे उठाने हैं. ये लोग सोमवार शुरू नहीं होता है कि वीक ऑफ आने का इंतजार करने लगते हैं. शनिवार बीतने के बाद जब संडे आता है तो ये दिन भर यही सोचते हैं कि कल से यानी समोवार से फिर ऑफिस जाना, वर्क प्रेशर, वर्क टेंशन सब शुरू हो जाएगा. इस सोच या ऑफिस जाने के डर को ‘संडे स्केयरीज’ का नाम दिया गया है. चलिए जानते हैं क्या है संडे स्केयरीज, क्यों कुछ लोगों को संडे से ही सोमवार को ऑफिस जाने की टेंशन परेशान करने लगती है? क्या है संडे स्केयरीज? ‘संडे स्केयरीज’ एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल उस बेचैनी, तनाव या एंजायटी के लिए किया जाता है, जो कई लोगों को रविवार खत्म होने के साथ महसूस होने लगती है. जैसे-जैसे सोमवार करीब आता है, दिमाग में ऑफिस, काम का दबाव, मीटिंग्स, डेडलाइन और जिम्मेदारियों की चिंता बढ़ने लगती है. क्यों होती है यह समस्या? कई लोगों के लिए वीकेंड आराम और आजादी का समय होता है, लेकिन रविवार शाम आते-आते दिमाग फिर से कामकाजी रूटीन में लौटने लगता है. इसी बदलाव के कारण तनाव महसूस हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. इसके पीछे कुछ आम कारण हो सकते हैं: ऑफिस का अधिक दबावकाम से असंतोषसोमवार की मीटिंग या टारगेट का तनाववर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़नापर्याप्त आराम न मिलनानौकरी को लेकर असुरक्षा या चिंतासंडे स्केयरीज के सामान्य लक्षणरविवार शाम उदासी या घबराहट महसूस होनानींद ठीक से न आनापेट में बेचैनी या भारीपनमूड खराब रहनालगातार सोमवार के बारे में सोचनाथकान या चिड़चिड़ापन महसूस होना क्या यह सामान्य है? हल्की चिंता महसूस होना काफी आम माना जाता है, लेकिन अगर यह हर हफ्ते बहुत ज्यादा होने लगे और मानसिक स्वास्थ्य, नींद या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. संडे स्केयरीज से राहत पाने के कुछ आसान तरीके1. रविवार को पूरी तरह ‘वर्क डे’ न बनाएं. वीकेंड में थोड़ा आराम, हॉबी या परिवार के साथ रिलैक्स होकर समय बिताएं. ऑफिस का ख्याल दिमाग से निकाल दें. 2. सोमवार की तैयारी पहले ही कर लें. कपड़े, जरूरी काम या टू-डू लिस्ट पहले तैयार करने से तनाव कम हो सकता है. 3. अच्छी नींद लेना भी है जरूरी. रविवार रात देर तक जागने से सोमवार और मुश्किल लग सकता है. 4. स्क्रीन टाइम कम करना है जरूरी. सोने से पहले लगातार ईमेल या ऑफिस चैट देखने से एंजायटी बढ़ सकती है. 5. खुद के लिए रिलैक्सिंग रूटीन बनाएं. हल्की वॉक, म्यूजिक, योग या मेडिटेशन मदद कर सकते हैं. 6. अगर लगातार तनाव, घबराहट, नींद की समस्या या काम को लेकर डर बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है.