Tuesday, 04 Aug 2026 | 06:46 PM

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Bangladesh Ram Statue Project Halted Amidst Fundamentalist Pressure

Bangladesh Ram Statue Project Halted Amidst Fundamentalist Pressure

ढाका16 मिनट पहलेलेखक: एसएम अमानुर रहमान

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बांग्लादेश के गैबांधा जिले में 82 फीट ऊंची राम प्रतिमा का प्रोजेक्ट कट्टरपंथी दबाव के बाद रोक दिया गया है। यह प्रतिमा श्री श्री राधा गोबिंद और काली मंदिर परिसर में बन रही थी। मंदिर समिति ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अस्थायी रोक बताया है, लेकिन इसकी असली वजह कट्टरपंथी संगठनों का दबाव बताया जा रहा है।

प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे कट्टरपंथी संगठनों ने अधूरी संरचना गिराने तक की मांग की है। इमाम-उलमा परिषद ने प्रोजेक्ट पूरी तरह रद्द करने, भविष्य में ऐसी किसी पहल पर रोक लगाने और फंडिंग की जांच कराने की मांग रखी है।

बता दें ​कि यह निर्माण 2025 की शुरुआत में निजी फंडिंग से शुरू हुआ था। परिसर में पहले से 100 से ज्यादा देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। इनमें 30 फीट की शिव प्रतिमा और 53 फीट की कृष्ण प्रतिमा भी शामिल है। राम प्रतिमा को एशिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा के रूप में पेश किया जा रहा था। इस परियोजना पर 17 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने थे।

बीते शुक्रवार को चटगांव में राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कट्टरपंथी।

बीते शुक्रवार को चटगांव में राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कट्टरपंथी।

कट्टरपंथियों ने फंडिंग-खातों की खुफिया जांच की मांग की

कट्टरपंथी संगठन इमाम-उलमा परिषद और अन्य ने इस प्रोजेक्ट की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि खुफिया एजेंसियां जांच करें कि क्या किसी विदेशी सरकार या संगठन से पैसा आया है।

इस मांग में परोक्ष रूप से भारत की ओर इशारा माना जा रहा है। विरोधियों ने इस पहल से जुड़े लोगों के बैंक खातों व संपत्तियों की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट का हमारी संप्रभुता पर असर होगा।

1.38 एकड़ में फैले मंदिर परिसर में पहले ही 100 से ज्यादा मूर्तियां

श्री श्री राधा गोबिंद और काली मंदिर परिसर 1.38 एकड़ यानी 138 डेसीमल जमीन पर फैला है। शुरुआत में यह परिसर 76 डेसीमल जमीन पर बनना था। बाद में इसमें 62 डेसीमल जमीन और जोड़ी गई।

परिसर में 100 से ज्यादा देवी-देवताओं की मूर्तियां पहले ही बनाई जा चुकी हैं। यहां 30 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और 53 फीट ऊंची कृष्ण प्रतिमा भी है। कृष्ण प्रतिमा को एशिया की सबसे ऊंची कृष्ण प्रतिमा बताया जा रहा है।

यह मंदिर परिसर भारत की सीमा के काफी नजदीक है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से मंदिर परिसर की दूरी केवल 70 किमी है। इस कारण यह प्रोजेक्ट सिर्फ स्थानीय नहीं रह गया था। इसे सीमावर्ती धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा था।

करीब दो साल पहले बांग्लादेश में तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद से हिंदुओं पर अत्याचार के मामले बढ़े।

करीब दो साल पहले बांग्लादेश में तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद से हिंदुओं पर अत्याचार के मामले बढ़े।

बीते दो साल में दो और प्रोजेक्ट पर लग चुकी है रोक

राम प्रतिमा प्रोजेक्ट से पहले भी दो साल में हिंदू आस्था से जुड़े 2 प्रोजेक्ट पर रोक लग चुकी है। 2025 में कट्टपरंथियों के विरोध पर ढाका में दुर्गा मंदिर प्रशासन ने गिराई। 2024 में ढाका के उत्तरा में दुर्गा पूजा मूर्ति स्थापना पर आपत्ति के बाद उसकी जगह बदलनी पड़ी।

दमन… दो वर्ष में हिंदुओं पर 2,839 हमले व 100 हत्याएं

अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर 2,839 हमले हुए हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, 4-20 अगस्त 2024 के बीच 2,010 घटनाएं हुईं। 2025 में 522 तो 2026 के पहले 3 महीनों में 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 100 से ज्यादा हत्याएं, यौन हिंसा, घर-दुकान पर हमला, मंदिरों-प्रतिमाओं की तोड़फोड़, लूट, आगजनी और जमीन कब्जे जैसी घटनाएं शामिल हैं।

————— बांग्लादेश से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

बांग्लादेश लौटने के लिए खुद सामने आ रहे अवैध प्रवासी:बंगाल में रोज 200-300 लोगों का वेरिफिकेशन

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की हकीमपुर चेकपोस्ट पर इन दिनों अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ जुट रही है। ये लोग खुद अपनी पहचान बताकर बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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बांग्लादेश के गैबांधा जिले में 82 फीट ऊंची राम प्रतिमा का प्रोजेक्ट कट्टरपंथी दबाव के बाद रोक दिया गया है। यह प्रतिमा श्री श्री राधा गोबिंद और काली मंदिर परिसर में बन रही थी। मंदिर समिति ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अस्थायी रोक बताया है, लेकिन इसकी असली वजह कट्टरपंथी संगठनों का दबाव बताया जा रहा है।

प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे कट्टरपंथी संगठनों ने अधूरी संरचना गिराने तक की मांग की है। इमाम-उलमा परिषद ने प्रोजेक्ट पूरी तरह रद्द करने, भविष्य में ऐसी किसी पहल पर रोक लगाने और फंडिंग की जांच कराने की मांग रखी है।

बता दें ​कि यह निर्माण 2025 की शुरुआत में निजी फंडिंग से शुरू हुआ था। परिसर में पहले से 100 से ज्यादा देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। इनमें 30 फीट की शिव प्रतिमा और 53 फीट की कृष्ण प्रतिमा भी शामिल है। राम प्रतिमा को एशिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा के रूप में पेश किया जा रहा था। इस परियोजना पर 17 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने थे।

बीते शुक्रवार को चटगांव में राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कट्टरपंथी।

बीते शुक्रवार को चटगांव में राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कट्टरपंथी।

कट्टरपंथियों ने फंडिंग-खातों की खुफिया जांच की मांग की

कट्टरपंथी संगठन इमाम-उलमा परिषद और अन्य ने इस प्रोजेक्ट की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि खुफिया एजेंसियां जांच करें कि क्या किसी विदेशी सरकार या संगठन से पैसा आया है।

इस मांग में परोक्ष रूप से भारत की ओर इशारा माना जा रहा है। विरोधियों ने इस पहल से जुड़े लोगों के बैंक खातों व संपत्तियों की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट का हमारी संप्रभुता पर असर होगा।

1.38 एकड़ में फैले मंदिर परिसर में पहले ही 100 से ज्यादा मूर्तियां

श्री श्री राधा गोबिंद और काली मंदिर परिसर 1.38 एकड़ यानी 138 डेसीमल जमीन पर फैला है। शुरुआत में यह परिसर 76 डेसीमल जमीन पर बनना था। बाद में इसमें 62 डेसीमल जमीन और जोड़ी गई।

परिसर में 100 से ज्यादा देवी-देवताओं की मूर्तियां पहले ही बनाई जा चुकी हैं। यहां 30 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और 53 फीट ऊंची कृष्ण प्रतिमा भी है। कृष्ण प्रतिमा को एशिया की सबसे ऊंची कृष्ण प्रतिमा बताया जा रहा है।

यह मंदिर परिसर भारत की सीमा के काफी नजदीक है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से मंदिर परिसर की दूरी केवल 70 किमी है। इस कारण यह प्रोजेक्ट सिर्फ स्थानीय नहीं रह गया था। इसे सीमावर्ती धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा था।

करीब दो साल पहले बांग्लादेश में तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद से हिंदुओं पर अत्याचार के मामले बढ़े।

करीब दो साल पहले बांग्लादेश में तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद से हिंदुओं पर अत्याचार के मामले बढ़े।

बीते दो साल में दो और प्रोजेक्ट पर लग चुकी है रोक

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दमन… दो वर्ष में हिंदुओं पर 2,839 हमले व 100 हत्याएं

अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर 2,839 हमले हुए हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, 4-20 अगस्त 2024 के बीच 2,010 घटनाएं हुईं। 2025 में 522 तो 2026 के पहले 3 महीनों में 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 100 से ज्यादा हत्याएं, यौन हिंसा, घर-दुकान पर हमला, मंदिरों-प्रतिमाओं की तोड़फोड़, लूट, आगजनी और जमीन कब्जे जैसी घटनाएं शामिल हैं।

————— बांग्लादेश से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

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पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की हकीमपुर चेकपोस्ट पर इन दिनों अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ जुट रही है। ये लोग खुद अपनी पहचान बताकर बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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