सेंसेक्स में 600 अंक से ज्यादा की बढ़त:77,400 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 200 अंक चढ़ा; IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 29 जुलाई को गिरावट है। सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 77,400 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 200 अंक की तेजी है, ये 24,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और बैंकिंग शेयर्स में आज सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार 28 जुलाई को अमेरिकी बाजार में मिलाजुला कारोबार रहा 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹9,400 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 28 जुलाई को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 69 अंक की गिरावट के साथ 76,765 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 10 अंक गिरा, ये 23,985 के स्तर पर बंद हुआ था।
सेंसेक्स में 800 अंक से ज्यादा की बढ़त:77,600 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 250 अंक चढ़ा; IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 29 जुलाई को गिरावट है। सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 77,600 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 250 अंक की तेजी है, ये 24,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और बैंकिंग शेयर्स में आज सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार 28 जुलाई को अमेरिकी बाजार में मिलाजुला कारोबार रहा 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹9,400 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 28 जुलाई को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 69 अंक की गिरावट के साथ 76,765 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 10 अंक गिरा, ये 23,985 के स्तर पर बंद हुआ था।
यूक्रेन में जहाज पर हमलें में 13 भारतीय फंसे:भारत ने सुरक्षित वापसी की अपील की, 15 क्रू मेंबर सवार थे

यूक्रेन में जहाज पर हमले में 13 भारतीय फंस गए हैं। ‘एमवी अमीर 1’ नाम का जहाज ड्रोन और मिसाइल हमलों की चपेट में आ गया। इसके बाद इंडियन सीमेन यूनियन ने इस मामले में तुरंत मदद की अपील की है। यूनियन के मुताबिक, जहाज के आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश हो रही है। ऐसे में चालक दल के सदस्य हर समय इस डर में जी रहे हैं कि किसी भी वक्त जहाज सीधे हमले की चपेट में आ सकता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल तय:केंद्र ने अधिकतम 30 दिन स्टॉक रखने का आदेश दिया; 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे नियम

केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी कर चीनी व्यापारियों के लिए अधिकतम 30 दिन की स्टॉक लिमिट और 4,000 क्विंटल की होल्डिंग सीमा तय कर दी है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की गजट अधिसूचना के अनुसार, यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। मानसून में कमी के अनुमान को देखते हुए घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। देश के किसी भी व्यापारी पर 4,000 क्विंटल की सीमा लागू मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह पाबंदी लगाई है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि देश भर में कोई भी चीनी व्यापारी या डीलर किसी भी स्थान पर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी स्टॉक में नहीं रख सकेगा। स्टॉक रखने की अवधि की गिनती रसीद की तारीख से होगी केंद्र सरकार के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यापारी द्वारा स्टॉक रखने की अवधि की गणना उस तारीख से शामिल की जाएगी, जिस दिन व्यापारी को चीनी का स्टॉक प्राप्त हुआ है। इसके अलावा व्यापारी प्राप्त स्टॉक को 30 दिनों से अधिक समय तक होल्ड नहीं कर पाएंगे। राज्य सरकारों को टर्नओवर सीमा तय करने के निर्देश मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को अपने स्तर पर स्टॉक होल्डिंग और टर्नओवर की सीमाएं निर्धारित करने को कहा है। हालांकि, राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सीमाएं केंद्र द्वारा तय की गई 4,000 क्विंटल की सीमा या 30 दिन की अवधि से अधिक न हों। व्यापारियों को पोर्टल पर अपडेट करना होगा डेटा सरकार ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने देश के सभी चीनी व्यापारियों और डीलरों से कहा है कि वे निर्दिष्ट पोर्टल पर अपनी चीनी की स्टॉक स्थिति की घोषणा करें और इसे नियमित रूप से अपडेट करते रहें। PDS और सरकारी चीनी स्टॉक को पाबंदी से छूट यह आदेश सरकारी खाते में रखी गई चीनी पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों द्वारा नामित डीलरों या राशन दुकानों (PDS) के जरिए वितरण के लिए अधिकृत अधिकारियों के पास मौजूद चीनी के स्टॉक को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। कम मानसून के अनुमान के बीच चीनी एक्सपोर्ट पर पहले ही बैन कीमतों पर काबू पाने और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगा दी है। सरकार ने मई में ही तत्काल प्रभाव से चीनी निर्यात पर बैन लगाया था, जिसकी समयसीमा 30 सितंबर तक तय की गई है। चालू विपणन वर्ष 2025-26 (सितंबर में समाप्त होने वाले) के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। इस सीजन में 29.3 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, एथेनॉल डायवर्जन के बाद 2025-26 मार्केटिंग सीजन में कुल चीनी उत्पादन 29.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले 2024-25 सीजन में दर्ज किए गए 26.12 मिलियन टन उत्पादन से अधिक है। इंडस्ट्री बॉडीज बोलीं- देश में पर्याप्त स्टॉक, सट्टेबाजी न करें हालिया कीमतों में उछाल के बीच 17 जुलाई को चीनी उद्योग निकायों ISMA और NFCSF ने कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने संस्थागत खरीदारों, थोक और खुदरा व्यापारियों से अपील की थी कि वे कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ‘सट्टेबाजी और घबराहट में खरीदारी’ करने से बचें। क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल तय:केंद्र ने अधिकतम 30 दिन स्टॉक रखने का आदेश दिया; 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे नियम

केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी कर चीनी व्यापारियों के लिए अधिकतम 30 दिन की स्टॉक लिमिट और 4,000 क्विंटल की होल्डिंग सीमा तय कर दी है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की गजट अधिसूचना के अनुसार, यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। मानसून में कमी के अनुमान को देखते हुए घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। देश के किसी भी व्यापारी पर 4,000 क्विंटल की सीमा लागू मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह पाबंदी लगाई है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि देश भर में कोई भी चीनी व्यापारी या डीलर किसी भी स्थान पर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी स्टॉक में नहीं रख सकेगा। स्टॉक रखने की अवधि की गिनती रसीद की तारीख से होगी केंद्र सरकार के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यापारी द्वारा स्टॉक रखने की अवधि की गणना उस तारीख से शामिल की जाएगी, जिस दिन व्यापारी को चीनी का स्टॉक प्राप्त हुआ है। इसके अलावा व्यापारी प्राप्त स्टॉक को 30 दिनों से अधिक समय तक होल्ड नहीं कर पाएंगे। राज्य सरकारों को टर्नओवर सीमा तय करने के निर्देश मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को अपने स्तर पर स्टॉक होल्डिंग और टर्नओवर की सीमाएं निर्धारित करने को कहा है। हालांकि, राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सीमाएं केंद्र द्वारा तय की गई 4,000 क्विंटल की सीमा या 30 दिन की अवधि से अधिक न हों। व्यापारियों को पोर्टल पर अपडेट करना होगा डेटा सरकार ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने देश के सभी चीनी व्यापारियों और डीलरों से कहा है कि वे निर्दिष्ट पोर्टल पर अपनी चीनी की स्टॉक स्थिति की घोषणा करें और इसे नियमित रूप से अपडेट करते रहें। PDS और सरकारी चीनी स्टॉक को पाबंदी से छूट यह आदेश सरकारी खाते में रखी गई चीनी पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों द्वारा नामित डीलरों या राशन दुकानों (PDS) के जरिए वितरण के लिए अधिकृत अधिकारियों के पास मौजूद चीनी के स्टॉक को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। कम मानसून के अनुमान के बीच चीनी एक्सपोर्ट पर पहले ही बैन कीमतों पर काबू पाने और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगा दी है। सरकार ने मई में ही तत्काल प्रभाव से चीनी निर्यात पर बैन लगाया था, जिसकी समयसीमा 30 सितंबर तक तय की गई है। चालू विपणन वर्ष 2025-26 (सितंबर में समाप्त होने वाले) के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। इस सीजन में 29.3 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, एथेनॉल डायवर्जन के बाद 2025-26 मार्केटिंग सीजन में कुल चीनी उत्पादन 29.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले 2024-25 सीजन में दर्ज किए गए 26.12 मिलियन टन उत्पादन से अधिक है। इंडस्ट्री बॉडीज बोलीं- देश में पर्याप्त स्टॉक, सट्टेबाजी न करें हालिया कीमतों में उछाल के बीच 17 जुलाई को चीनी उद्योग निकायों ISMA और NFCSF ने कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने संस्थागत खरीदारों, थोक और खुदरा व्यापारियों से अपील की थी कि वे कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ‘सट्टेबाजी और घबराहट में खरीदारी’ करने से बचें। क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम-पेमेंट्स-बैंक को बंद करने का आदेश दिया:आरबीआई ने दी जानकारी, नियमों के उल्लंघन पर रद्द हुआ था बैंकिंग लाइसेंस

दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) को बंद करने का आदेश दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। कोर्ट ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 और कंपनीज एक्ट, 2013 के प्रावधानों के तहत यह फैसला सुनाया है। 8 जुलाई से प्रभावी हुआ आदेश आरबीआई के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 के आदेश और 22 जुलाई 2026 के आदेश के साथ यह निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व सीजीएम गिरीकुमार एम नायर को पीपीबीएल का आधिकारिक लिक्विडेटर नियुक्त किया है। नायर 8 जुलाई 2026 से बैंक के बोर्ड की सभी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे। उन्हें बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट और कंपनीज एक्ट के तहत निर्धारित सभी अधिकार दिए गए हैं। नियमों के उल्लंघन पर रद्द हुआ था लाइसेंस आरबीआई ने इस साल अप्रैल में पीपीबीएल का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने कहा था कि बैंक का कामकाज जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ था। इससे पहले मार्च 2022 में भी बैंक पर नए ग्राहकों को जोड़ने पर रोक लगाई गई थी। उस समय बैंक में गंभीर पर्यवेक्षी चिंताएं देखी गई थीं और उसे आईटी सिस्टम का ऑडिट कराने का निर्देश दिया गया था। पहले भी लगाई गई थीं पाबंदियां पेटीएम पेमेंट्स बैंक विजय शेखर शर्मा की फिनटेक कंपनी पेटीएम की सहयोगी फर्म है। लाइसेंस रद्द करने से पहले 31 जनवरी 2024 और 16 फरवरी 2024 को बैंक पर कई व्यावसायिक प्रतिबंध लगाए गए थे। इसमें ग्राहकों के खातों, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स और वॉलेट में किसी भी तरह की नई जमा, क्रेडिट या टॉप-अप की सुविधा पर रोक शामिल थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम-पेमेंट्स-बैंक को बंद करने का आदेश दिया:RBI ने जानकारी दी, नियमों के उल्लंघन पर बैंकिंग लाइसेंस रद्द हुआ था

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लाइसेंस रद्द किए जाने के कुछ महीनों बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। RBI ने मंगलवार को इस कानूनी फैसले की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने SBI के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर गिरिकुमार एम नायर को पेटीएम पेमेंट्स बैंक का ऑफिशियल लिक्विडेटर नियुक्त किया है। नायर 8 जुलाई 2026 से बैंक के बोर्ड की सभी पावर का इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में क्या कहा गया? RBI ने बयान में बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 के आदेश और 22 जुलाई 2026 के आदेश के साथ यह निर्देश जारी किया है। यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 और कंपनीज एक्ट, 2013 के प्रावधानों के तहत की गई है। कोर्ट ने लिक्विडेटर को बैंकिंग और कंपनीज एक्ट के तहत तय सभी अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए कहा है। अप्रैल 2026 में रद्द हुआ था बैंक का लाइसेंस RBI ने लगातार नियमों का पालन न करने की वजह से अप्रैल 2026 में पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। उस समय RBI ने कहा था कि बैंक का कामकाज डिपॉजिटर्स के हितों के खिलाफ चलाया जा रहा। लाइसेंस रद्द करने के साथ ही RBI ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह बैंक को बंद कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करेगा। पेटीएम बैंक पर कब-कब हुई कार्रवाई? विजय शेखर शर्मा की लीडरशिप वाली फिनटेक कंपनी पेटीएम की सहयोगी कंपनी पेटीएम पेमेंट्स बैंक को पिछले कुछ सालों में कई बार कड़े नियमों का सामना करना पड़ा… ये खबर भी पढ़ें… फ्रांस में इन्फोसिस पर 2 करोड़ का जुर्माना: वर्किंग आवर्स का सही रिकॉर्ड न रखने का आरोप, वहां हफ्ते में 35 घंटे काम का नियम फ्रांस के श्रम अधिकारियों ने इन्फोसिस पर 1.75 लाख यूरो यानी करीब 2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। कंपनी की कर्मचारियों के काम के घंटे रिकॉर्ड करने वाली प्रणाली कानूनी जरूरतों के मुताबिक नहीं पाई गई। यह जुर्माना फ्रांस की रिजनल लेबर अथॉरिटी DRIEETS इले-डी-फ्रांस ने लगाया है। इन्फोसिस ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इस मामले की जानकारी दी है। पूरी खबर पढ़ें…
विजय के बाद शिल्पा शेट्टी के नाम से फर्जी पोस्ट:एक्ट्रेस ने भड़ककर कहा- मेरे नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे; दावा था- आरक्षण पर बयान दिया

एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के नाम से आरक्षण पर फर्जी पोस्ट वायरल हो गई। जानकारी मिलने पर एक्ट्रेस भड़क गईं और उन्होंने साफ किया कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है। शिल्पा शेट्टी ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, आरक्षण को लेकर मेरे नाम से जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। कुछ लोग जानबूझकर मेरे नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और फर्जी खबर फैला रहे हैं। ऐसी फर्जी न्यूज पर बिल्कुल भरोसा मत कीजिए।” विजय वर्मा ने भी फर्जी पोस्ट वायरल होने पर दी सफाई हाल ही में एक्टर विजय वर्मा के नाम से भी रिजर्वेशन पर एक पोस्ट वायरल हो गई। पोस्ट में विजय के नाम से लिखा गया था, “मेरे पिता ने मारुति 800 खरीदी थी, जब मैं पैदा हुआ था। जब मैं 12वीं कक्षा में पहुंचा, तब उन्होंने होंडा सिटी खरीदी। मैं उसी कार से कॉलेज जाता था, जबकि मेरा सबसे अच्छा दोस्त, जो एक मारवाड़ी परिवार से था, अब भी 12 साल पुरानी हीरो होंडा बाइक चलाता था। हमने एक सरकारी नौकरी की परीक्षा दी। उसने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन उसे सीट नहीं मिली। नतीजे वाले दिन वह रोते हुए घर लौटा, जबकि मैं मुस्कुराते हुए घर गया। मैं उस आरक्षण का हकदार नहीं था, लेकिन मुझे वह मिला। अगर मेरा नहीं, तो कम से कम उसके लिए तो निष्पक्ष मौका उसका अधिकार था।” पोस्ट वायरल होने के बाद विजय ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने यह कभी पोस्ट नहीं किया। यह पूरी तरह झूठ है।” रिजर्वेशन पर क्यों वायरल हो रही हैं सेलेब्स की पोस्ट नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया है। इस मुद्दे पर जीत के बाद कई लोग जनरल कैटेगरी के लोगों को सामान्य अधिकार न मिलने पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसके लिए भी विरोध करने की बात कही, जिसके बाद से ही रिजर्वेशन का मुद्दा गरम हो गया। इसी बीच सेलेब्स को इससे जोड़ा जा रहा है।
फ्रांस में इन्फोसिस पर लगा करीब 2 करोड़ का जुर्माना:काम के घंटे रिकॉर्ड करने वाली प्रणाली नियमों के मुताबिक नहीं पाई गई

फ्रांस के श्रम अधिकारियों ने इन्फोसिस पर 1.75 लाख यूरो यानी करीब 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी की कर्मचारियों के काम के घंटे रिकॉर्ड करने वाली प्रणाली कानूनी जरूरतों के मुताबिक नहीं पाई गई। यह जुर्माना फ्रांस के क्षेत्रीय श्रम प्राधिकरण DRIEETS इले-डी-फ्रांस ने लगाया है। इन्फोसिस ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इस घटनाक्रम की जानकारी दी है। कंपनी ने बताया कि उसे जुर्माना वसूली के संबंध में प्राधिकरण से सूचना मिली है। काम के घंटों को लेकर चिंताएं जांच में सामने आया कि कंपनी की वर्किंग-टाइम रिकॉर्डिंग प्रणाली फ्रांस के श्रम नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करती थी। प्राधिकरण ने सिस्टम की विश्वसनीयता, ऑडिट योग्य रिकॉर्ड बनाए रखने की क्षमता और कुछ श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए निगरानी क्षमताओं पर चिंता जताई है। फ्रांसीसी श्रम कानून के तहत, नियोक्ताओं को कर्मचारियों के काम के घंटों का सटीक रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। इसमें देश के 35 घंटे के कार्य सप्ताह, ओवरटाइम की सीमा और अनिवार्य आराम के समय का पालन शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड विश्वसनीय और जरूरत पड़ने पर ऑडिट के योग्य होने चाहिए। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में यह स्पष्ट नहीं है कि ये निष्कर्ष इन्फोसिस के किन कर्मचारियों से संबंधित हैं। साथ ही, इसमें यह भी नहीं बताया गया है कि क्या कंपनी को टाइम-रिकॉर्डिंग सिस्टम में बदलाव करने का निर्देश दिया गया है। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कई तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा कि फ्रांस में पूर्णकालिक स्थायी काम आमतौर पर 35 घंटे का होता है और अनुबंध अधिकतम 48 घंटे तक जा सकते हैं। ऑफिस के समय के बाद, सप्ताहांत और छुट्टियों पर कर्मचारियों से संपर्क करना वहां अवैध है। एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की कि अब फ्रांसीसी कर्मचारी अपना सामान्य काम करेंगे और काम का बोझ भारत शिफ्ट हो जाएगा, क्योंकि यहां कॉर्पोरेट गुलामी सामान्य है। एक तीसरे यूजर ने कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि कई युवा विदेशी कार्य संस्कृति पसंद करते हैं। भारत में कई नियोक्ता वर्क-लाइफ बैलेंस की अनदेखी करते हैं, जबकि सरकार छह दिन के कार्य सप्ताह के खिलाफ मजबूत कानून बनाने या 40 घंटे से अधिक के लिए सख्त ओवरटाइम भुगतान अनिवार्य करने में विफल रही है। नारायण मूर्ति का 9-9-6 वर्क कल्चर विवाद यह जुर्माना कंपनी में काम के घंटों को लेकर चल रही बहस के बीच लगा है। इन्फोसिस के संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति पहले भारतीय कर्मचारियों के लिए लंबे काम के घंटों की वकालत कर चुके हैं। उनका तर्क है कि देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अधिक प्रयास की जरूरत है। चीन की 9-9-6 कार्य संस्कृति का जिक्र करते हुए मूर्ति ने कहा था कि बिना कड़ी मेहनत के कोई भी व्यक्ति, समुदाय या देश आगे नहीं बढ़ा है। उन्होंने इस शेड्यूल को सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, सप्ताह में छह दिन काम करने के रूप में वर्णित किया था।
जापान के कुमामोटो में 7.1 तीव्रता का भूकंप:सुनामी की चेतावनी जारी, 10 किमी की गहराई में केंद्र था

जापान के दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के कुमामोटो इलाके में मंगलवार देर शाम भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 7.1 मापी गई है। झटकों के बाद प्रशासन ने सुनामी की चेतावनी जारी कर दी है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि भूकंप का केंद्र समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके महसूस होते ही स्थानीय स्तर पर अलर्ट जारी कर दिया गया है। फिलहाल, एजेंसी की ओर से सुनामी को लेकर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इस घटना को लेकर अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की जानकारी सामने नहीं आई है। एजेंसी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। खबर अपडेट हो रही है….









