लौकी राजमा मसाला रेसिपी: बच्चे नहीं खाते लौकी? राजमा के साथ-साथ किराने की सब्जी; स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है

सामग्री: 1 लोकी, 1 कप मोटा राजमा, 2 प्याज, 2 हरी मिर्च, 1 अदरक लहसुन पेस्ट, ½ अदरक लहसुन पेस्ट, ½ अदरक लहसुन पेस्ट, हल्दी पाउडर, लाल और गरम मसाला, 1 धनिया पाउडर और कसूरी मेथी, तेल, नमक, हरा धनियां छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले राजमा को रातभर के लिए छोड़ दिया गया और सुबह कुकर में नर्मा तक का नाम ले लिया गया। एक कड़ाही में तेल गरम करें। इसमें जीरा डाला गया। जब जीरा चटकने लगे, तब स्टोनमैन स्टोनला होने तक भुन लें। छवि: फ्रीपिक अब अदरक-लहसुन का पेस्ट और हरी मिर्च का पेस्ट 1 मिनट तक। इसके बाद टमाटर की प्यूरी और हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और नमक मिलाकर तब तक मिलाया जाता है, जब तक कि मसाले से तेल अलग न हो जाए। छवि: एआई अब कटी हुई लड़की लगाई और 4-5 मिनट तक की शूटिंग के साथ-साथ अच्छी तरह से काम किया। छोटा हुआ राजमा और ज़रूरत के अनुसार थोड़ा सा पानी मिला। ढलकर 10-12 मिनट तक मिनट पर काम करने वाला, ताकि लोकी अच्छी तरह से गल जाए। छवि: एआई गरम मसाला और कसूरी मेथी रचना 2 मिनट तक का समय। गैस बंद करें और ऊपर से हरा धनिया गार्निश करें। गरमा-गरम लौकी राजमा मसाला को तंदूरी रोटी, पराठा या चावल के साथ बनायें। छवि: एआई लौकी और राजमा का स्ट्रैटेजी कॉम्बिनेशन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देता है। राजमारोइन और डाकू का अच्छा स्रोत है। लोकी पाचन के लिए अद्भुत है और शरीर को स्टॉक में रखने में मदद मिलती है। छवि: मेटा एआई यह रेसिपी बच्चों के लिए भी लोकी का स्वादिष्ट तरीका है। लंच और डिनर दोनों के लिए यह एक बेहतरीन और लाजवाब विकल्प है। छवि: एआई अगर आप रोज की दुकान से कुछ अलग और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो लोकी राजमा मसाला जरूर बनाएं। इसकी म्यूजिकल स्वाद और म्यूजिकल प्रॉपर्टी इसे पूरे परिवार की पसंदीदा डिश बना सकती है। छवि: एआई
सारा तेंदुलकर: ना मराठी पोशाकें, ना हैवी जूलरी, सुदूर सूट, सारा का ‘नेचुरल लुक’ हुआ वायरल वीडियो

23 जुलाई 2026 को 19:38 IST पर अपडेट किया गया सारा तेंदुलकर फैशन: सचिन की लाडली सारा टैलेंट भले ही फिल्मों में नहीं हैं, लेकिन उनकी फैन फॉलोइंग और पॉपुलैरिटी किसी भी बड़ी हीरोइन से कम नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर सारा का सिंपल लुक तेजी से वायरल हो रहा है। अनुसरण करना : सारा हमेशा अपने सिंपल और एलिगेंट फैशन सेंस के लिए जानी जाती हैं। उनका सदाबहार और खूबसूरत ‘नेचुरल लुक’ प्रेमियों का दिल जीत जाता है। छवि: सोशल मीडिया हाल ही में सारा का एक नया वीडियो वायरल हुआ है। वे इसमें बिना भारी-भरकम आकृतियों और बिना किसी भव्यता के बेहद खूबसूरत लग रही हैं। छवि: सोशल मीडिया सारा को हाल ही में एक शोरूम के बाहर प्रदर्शित किया गया था। रेड कार्पेट हो या कैज़ुअल आउटिंग, उनके स्टाइल हमेशा छाए रहते हैं। छवि: सोशल मीडिया सैलून के बाहरी हिस्से में सारा मैरून कलर के खूबसूरत फ्लोरल लेक को-ऑर्ड सेट में देखा गया। उनका यह कैम्फर्ट पोर्टेबल इंडो-वेस्टर्न अवतार कॉम्फ्रे का था। छवि: सोशल मीडिया इन दिनों शॉर्ट कुर्ती के साथ प्लाजो पैंट्स का काफी ट्रेंड है। यह देसी और ट्रेंडी मॉडल सारा पर बहुत जंच रही थी। छवि: सोशल मीडिया वीडियो देखें छवि: सोशल मीडिया सारा की इन तस्वीरों और वीडियो पर लोग खूब प्यार लुटा रहे हैं। उनकी इसी साज़िश और मस्जिद ने एक बार फिर इंटरनेट पर ख़र्च किया है। छवि: सोशल मीडिया द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 23 जुलाई 2026 19:38 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)सारा सावंत फैशन(टी)सारा सावंत(टी)सारा तेंदुलकर(टी)सारा तेंदुलकर वीडियो(टी)सारा तेंदुलकर फैशन(टी)सचिन सावंत(टी)सचिन तेंदुलकर
‘अब संगीता कहानियां नहीं हैं…’ शेफाली जरीवाला के डॉग ‘सिम्बा’ का निधन, पराग त्यागी ने शेयर की भावुक पोस्ट; वीडियो

23 जुलाई 2026 को 17:30 IST पर अद्यतन किया गया शेफाली जरीवाला पालतू कुत्ते की मौत: दुखों का पहाड़ टूट गया है पैरास्टार पर। उनकी दिवंगत पत्नी शेफाली जरीवाला के बाद अब उनके प्रिय पेट डॉग ‘सिम्बा’ का भी निधन हो गया। पार ने सोशल मीडिया पर यह भावुक खबर दी। अनुसरण करना : पारे ने एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “अब मलामा घूमने नहीं जाते। सिंबा मलामा के साथ बहुत खुश हैं। मैं भी आप दोनों दूसरी दुनिया में मिलने का इंतजार नहीं कर सकता।” छवि: सोशल मीडिया वीडियो में डेड शेफाली जरीवाला सिम्बा के पास आती हैं और उसे प्यार से अपने गोद में बिठाती हैं। सिम्बा एक पैग (पग) था, जो पर्स और शेफाली अपने बच्चे की तरह प्यार करते थे। छवि: सोशल मीडिया शेफाली के निधन के बाद सिम्बा की देखभाल में ही उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया था। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपना नाम भी प्यार से “परी और सिंबा के पापा” लिखा है। छवि: सोशल मीडिया ‘कांटा लगा’ गर्ल शेफाली जरीवाला का 27 जून 2025 को 42 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। अस्पताल ले जाने के बाद अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। छवि: सोशल मीडिया पैरा के इस लेबल पोस्ट पर प्रेमी कॉन्स्टैंट भावुक टिप्पणियाँ कर रहे हैं। इस मुश्किल घड़ी में लोग उन्हें धमकियां दे रहे हैं और अपना सपोर्ट और संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। छवि: सोशल मीडिया द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 23 जुलाई 2026 17:30 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)शेफाली जरीवाला(टी)पराग त्यागी(टी)शेफाली जरीवाला(टी)पराग गीतकार(टी)शेफाली जरीवाला कुत्ता(टी)शेफाली जरीवाला पालतू कुत्ता सिम्बा
आशीष कुमार दश होंगे इंफोसिस के नए CEO:पहली तिमाही में मुनाफा 12.2% बढ़कर ₹7,769 करोड़ रहा, रेवेन्यू 14% उछलकर ₹48,211 करोड़ पहुंचा

देश की दूसरी सबसे बड़ी IT सर्विसेज कंपनी इंफोसिस ने आशीष कुमार दश को अपना नया CEO नियुक्त किया है। 23 जुलाई 2026 को पहली तिमाही के नतीजों के साथ कंपनी ने इस लीडरशिप बदलाव का ऐलान किया। वे मौजूदा CEO और MD सलिल पारिख की जगह लेंगे। वे 1 अप्रैल 2027 से चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और मैनेजिंग डायरेक्ट के रूप में पदभार संभालेंगे। उनका कार्यकाल 5 साल के लिए होगा, जो 31 मार्च 2032 तक चलेगा। कंपनी का मुनाफा 12.2% बढ़कर 7,769 करोड़ रुपए रहा जून तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 12.2% बढ़कर 7,769 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 6,921 करोड़ रुपए था। पिछली तिमाही के 8,501 करोड़ रुपए के मुकाबले कंपनी के नेट प्रॉफिट में 8.6% की गिरावट आई है। रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹48,211 करोड़ हुआ इंफोसिस का रेवेन्यू सालाना आधार पर 14% बढ़कर 48,211 करोड़ रुपए हो गया है। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 42,279 करोड़ रुपए का रेवेन्यू हासिल किया था। तिमाहगी आधार (QoQ) पर देखें तो कंपनी के रेवेन्यू में 4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (मार्च तिमाही) में कंपनी का रेवेन्यू 46,402 करोड़ रुपए रहा था। सलिल पारेख बोले- 8 साल में कंपनी की कमाई दोगुनी अपना पद छोड़ रहे MD और CEO सलिल पारेख ने कहा कि पिछले आठ साल में इंफोसिस का नेतृत्व करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात रही है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 10 अरब डॉलर से बढ़कर दोगुना यानी 20 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। सलिल पारेख ने आगे कहा कि हमने डिजिटल बदलावों के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है और AI बदलाव के लिए एक अलग रणनीति तैयार की है। आशीष के साथ कई साल तक काम करने के कारण मैंने उनकी ईमानदारी, ग्राहकों के प्रति सोच और बदलाव के दौर में नेतृत्व करने की क्षमता को बहुत करीब से देखा है। उन्हें हमारे ग्राहकों, व्यापार और कर्मचारियों की गहरी समझ है। मुझे पूरा भरोसा है कि वे इंफोसिस को बदलाव के अगले चरण में सफलतापूर्वक ले जाएंगे। आशीष कुमार बोले- इंफोसिस नए दौर की शुरुआत मजबूती से कर रही नई जिम्मेदारी मिलने पर आशीष कुमार दश ने कहा कि तकनीक अब एक नए युग में प्रवेश कर रही है, जहां एआई व्यापार करने और वैल्यू बनाने के तरीकों को पूरी तरह बदल रहा है। इंफोसिस इस नए दौर की शुरुआत बहुत मजबूती के साथ कर रही है। हमारे पास स्पष्ट एआई रणनीति, बेहतरीन प्रतिभा, ग्राहकों के साथ गहरे संबंध और ऐसे मूल्य हैं जिन्होंने दुनिया भर में विश्वास जीता है। मेरा संकल्प इन ताकतों को और मजबूत करने, नए प्रयोगों को तेज करने, क्षमताओं को बढ़ाने और ग्राहकों को एआई-संचालित दुनिया में सफल बनाने का है।
नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इसे नेपाल की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने दोनों सबसे बड़े पड़ोसियों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ मीटिंग बालेन शाह नहीं चाहते थे कि भारत या चीन में से किसी को यह लगे कि दूसरे देश को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने दोनों देशों के राजदूतों से एक ही दिन अलग-अलग मुलाकात करने का फैसला किया है। दोनों बैठकें एक के बाद एक होंगी, ताकि दोनों देशों के साथ समान व्यवहार का मैसेज जाए। नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें इसी सप्ताह होंगी। हालांकि, दोनों बैठकों की सटीक तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। नेपाल का विदेश मंत्रालय इन बैठकों की अंतिम तैयारियों में जुटा है। बालेन शाह ने अपना रुख क्यों बदला? प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने यह परंपरा बनाई थी कि वह किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। उनका मानना था कि कई शक्तिशाली देश सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे नेपाल के टॉप नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करते रहे हैं। इसलिए उन्होंने विदेशी राजनयिकों से सिर्फ समूह (ग्रुप) में मुलाकात करने की नीति अपनाई। इस फैसले के चलते उन्होंने कई बड़े विदेशी प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत मुलाकात करने से इनकार कर दिया। अब बालेन शाह मान रहे हैं कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारत और चीन के साथ सीधे संवाद बनाए रखना जरूरी हो चुका है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब उनकी सरकार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और शुरुआती नीतिगत फैसलों को लेकर लगातार आलोचना का सामना कर रही है। नेपाल की विदेश नीति में भारत-चीन की अहम भूमिका नेपाल लंबे समय से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर विदेश नीति चलाता रहा है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है और लाखों नेपाली नागरिक रोजगार, व्यापार और अन्य कारणों से भारत से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते भी काफी गहरे हैं। वहीं चीन ने पिछले एक दशक में नेपाल में बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के जरिए अपना प्रभाव लगातार बढ़ाया है। बीजिंग नेपाल के साथ अपने रणनीतिक संबंध मजबूत करना चाहता है, जबकि काठमांडू दोनों पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करता है। भारत से मुलाकात क्यों अहम है? भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है और सुरक्षा तथा व्यापार के मामले में भी दोनों एक-दूसरे पर काफी निर्भर हैं। हालांकि समय-समय पर सीमा विवाद और राजनीतिक मतभेदों को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव भी देखने को मिला है। इसके बावजूद नेपाल के लिए भारत के साथ स्थिर और मजबूत संबंध बनाए रखना उसकी विदेश नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक माना जाता है। चीन भी क्यों है बराबर अहम? चीन ने हाल के वर्षों में नेपाल में सड़क, रेल, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसके जरिए वह नेपाल में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत के साथ-साथ चीन के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखना नेपाल की विदेश नीति का अहम हिस्सा है। क्या बदल रही है बालेन शाह की राजनीति? बालेन शाह पहले काठमांडू के मेयर थे। उन्होंने पारंपरिक राजनीति से अलग छवि बनाकर लोकप्रियता हासिल की थी। विदेशी राजदूतों से अकेले मुलाकात नहीं करने का फैसला भी उसी सोच का हिस्सा था। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें व्यावहारिक कूटनीति की जरूरतों को भी ध्यान में रखना पड़ रहा है।
नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इसे नेपाल की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने दोनों सबसे बड़े पड़ोसियों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ मीटिंग बालेन शाह नहीं चाहते थे कि भारत या चीन में से किसी को यह लगे कि दूसरे देश को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने दोनों देशों के राजदूतों से एक ही दिन अलग-अलग मुलाकात करने का फैसला किया है। दोनों बैठकें एक के बाद एक होंगी, ताकि दोनों देशों के साथ समान व्यवहार का मैसेज जाए। नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें इसी सप्ताह होंगी। हालांकि, दोनों बैठकों की सटीक तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। नेपाल का विदेश मंत्रालय इन बैठकों की अंतिम तैयारियों में जुटा है। बालेन ने विदेशी नेताओं से दूरी क्यों बनाई थी? बालेन शाह को अपना फैसला क्यों बदलना पड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने खुद को पारंपरिक नेताओं से अलग दिखाया था। इसी सोच के तहत उन्होंने नियम बनाया था कि वह किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदल गए हैं। अब उन्हें समझ आ गया है कि सिर्फ अलग छवि बनाना काफी नहीं है। देश चलाने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सीधे बातचीत भी जरूरी होती है। इसी वजह से उन्होंने पहली बार अपना पुराना नियम तोड़ा है। भारत और चीन, दोनों नेपाल के सबसे अहम पड़ोसी हैं। ऐसे में दोनों देशों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना उनकी सरकार की जरूरत बन गया है। नेपाल के लिए भारत और चीन दोनों क्यों जरूरी हैं? नेपाल की विदेश नीति हमेशा से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है, जिससे लाखों नेपाली नागरिक काम, व्यापार और पढ़ाई के लिए आसानी से भारत आते-जाते हैं। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ पड़ोसी होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से भी जुड़े हैं। दूसरी ओर, चीन ने पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में सड़क, रेल, ऊर्जा और दूसरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसलिए नेपाल के लिए चीन भी एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बन गया है। यही वजह है कि काठमांडू किसी एक देश के करीब दिखने के बजाय भारत और चीन, दोनों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता है।
शेफाली जरिवाला के पालतू कुत्ते सिंबा का निधन:बच्चा मानती थीं, पति पराग बोले- तुम दोनों से मिलने का इंतजार नहीं कर सकता

कांटा लगा एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला के पालतू कुत्ते सिंबा का आज निधन हो गया है। शेफाली, सिंबा को अपना बच्चा मानती थीं। फैंस से ये दुखद खबर शेयर करते हुए शेफाई के पति एक्टर पराग त्यागी ने भावुक पोस्ट शेयर की है। पराग त्यागी ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से शेफाली जरीवाला और सिंबा का एक वीडियो शेयर कर लिखा है, ‘अब मम्मा अकेली नहीं हैं। सिंबा मम्मा के साथ बहुत खुश है। तुम दोनों से मिलने का इंतजार नहीं कर सकता, मेरी लाइफ लाइन। दूसरी तरफ।’ सिंबा को बेटा मानती थीं शेफाली जरीवाला शेफाली पालतू डॉग सिंबा को बेटा मानती थीं। उनकी मौत के बाद पति पराग त्यागी ने सिंबा के कई वीडियोज शेयर कर दावा किया कि शेफाली के जाने के बाद से ही वो बेहद उदास है। रक्षाबंधन पर शेफाली सिंबा को राखी भी बांधती थीं। उनकी मौत के बाद पराग ने सिंबा को राखी बांधी थी। 27 जून 2025 में अचानक हुआ निधन बताते चलें कि शेफाली जरीवाला का निधन 27 जून 2025 को अचानक हुआ है। उस रोज उनके घर में पूजा रखी गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, शेफाली ने उस दिन व्रत रखा था, उन्होंने इंसुलिन ली थी, जिसके बाद फ्रिज में रखा ठंडा खाना खाते ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उनका निधन हो गया। शेफाली के निधन का कारण ब्लड प्रेशर फ्लक्चुएशन माना जाता है। हालांकि परिवार ने कभी उनके निधन के कारण पर ऑफिशियल पुष्टि नहीं की है। ‘बिग बॉस 13’ में ली थी वाइल्ड कार्ड एंट्री शेफाली जरीवाला को कांटा लगा गर्ल नाम से जाना जाता था। एक्ट्रेस कई टीवी शोज और म्यूजिक एल्बम में नजर आई थीं। इसके अलावा शेफाली जरीवाला ने 2019 में बिग बॉस 13 में वाइल्ड कार्ड एंट्री ली थी, जहां उन्हें अपने एक्स-बॉयफ्रेंड सिद्धार्थ शुक्ला के साथ अच्छा बॉन्ड शेयर करते देखा गया था। बता दें कि सिद्धार्थ शुक्ला का भी निधन 2021 में कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ था।
इजराइली विरोध के बावजूद सऊदी को परमाणु तकनीक देगा अमेरिका:ट्रम्प ने समझौते की मंजूरी दी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा

सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। इस समझौते को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। वह पिछले पांच साल से भी ज्यादा समय से यह समझौता चाह रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल समेत अमेरिका के कई अधिकारी और न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि यदि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की तकनीक मिल गई, तो भविष्य में वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में भी बढ़ सकता है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने का खतरा पैदा हो सकता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले कई बार कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में कदम उठाएगा। यह समझौता विवादों में क्यों है? ट्रम्प ने समझौते से इजराइल को हटाया इस समझौते की शुरुआत जो बाइडेन के राष्ट्रपति रहते हुई थी। तब अमेरिका चाहता था कि परमाणु समझौते के बदले सऊदी अरब, इजराइल को औपचारिक मान्यता दे और दोनों देश राजनयिक संबंध स्थापित करें। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी, आधुनिक हथियार और असैन्य परमाणु कार्यक्रम में सहयोग देने को तैयार था। बदले में सऊदी अरब से उम्मीद थी कि वह इजराइल के साथ दूतावास खोलेगा, राजदूत नियुक्त करेगा और आधिकारिक संबंध शुरू करेगा। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध की वजह से यह प्लान फेल हो गया। सऊदी कहने लगा कि जब तक एक अलग फिलिस्तीन राष्ट्र नहीं बन जाता तब तक वे इजराइल को मान्यता नहीं देंगे। बाद में ट्रम्प ने रणनीति बदली और इजराइल के साथ रिश्तों को इस समझौते से अलग कर दिया। मिडिल ईस्ट में सऊदी का प्रभाव बढ़ेगा परमाणु बिजलीघर (न्यूक्लियर रिएक्टर) बनने में 10 साल या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए इस समझौते के बाद सऊदी अरब लंबे समय तक अमेरिका की परमाणु तकनीक और मदद पर निर्भर रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा, कारोबार और आपसी रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी की एक्सपर्ट कैरेन यंग के मुताबिक, सऊदी अरब सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर यह कदम उठा रहा है। उनका कहना है कि यह समझौता सिर्फ परमाणु बिजली बनाने तक सीमित नहीं है। इससे सऊदी अरब की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी और मिडिल ईस्ट में उसका प्रभाव भी पहले से ज्यादा मजबूत होगा। अमेरिका को क्या फायदा होगा? इस समझौते से अमेरिका को दो बड़े फायदे मिल सकते हैं। 1. अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब में परमाणु बिजली संयंत्र बनाने के अरबों डॉलर के ठेके मिल सकते हैं। 2. अमेरिका को सऊदी अरब के परमाणु कार्यक्रम पर नजदीकी नजर रखने का मौका मिलेगा, जिससे उसे हथियारों के प्रसार को लेकर अपनी चिंताओं पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। रूस-चीन भी मदद को तैयार थे अगर अमेरिका के साथ यह समझौता किसी वजह से नहीं हो पाता, तो सऊदी अरब के पास दूसरे विकल्प भी हैं। दरअसल, सऊदी कई बार चेतावनी दे चुका था कि अगर उसे अमेरिका इसमें मदद नहीं करेगा तो वे चीन, रूस, फ्रांस या दक्षिण कोरिया जैसे दूसरे देशों से परमाणु तकनीक ले लेंगे। चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (CNNC) पहले ही न्यूक्लियर प्लांट बनाने में रुचि दिखा चुकी है। रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम भी सऊदी अरब के साथ शुरुआती समझौते कर चुकी है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया और फ्रांस भी संभावित साझेदार माने जा रहे हैं। ट्रम्प का फैसला बदलना संसद के लिए मुश्किल इस समझौते को अमेरिकी संसद की मंजूरी भी चाहिए होगी। हालांकि इसके पास होने की संभावना ज्यादा है, क्योंकि अगर संसद इसे रोकना चाहेगी तो उसे ट्रम्प के फैसले को पलटने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा, जो आसान नहीं माना जाता।
हम लोग डरने वाले नहीं हैं:भाई पर कुल्हाड़ी से हुए जानलेवा हमले पर बोले पंकज त्रिपाठी, कहा- संसार में किसी के साथ गलत नहीं किया

जून में पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई विजेंद्र नाथ पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया था। घटना के बाद वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब लंबे समय बाद पंकज त्रिपाठी ने इस हमले पर बात की है। उनका कहना है कि उनके परिवार ने कभी किसी के साथ गलत नहीं किया है, यही वजह है कि परिवार किसी से नहीं डरता। हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में एक्टर पंकज त्रिपाठी ने कहा है, ‘मेरा अपने परिवार से बहुत लगाव है, हम दिन में रोज एक बार बात जरूर करते हैं। इस घटना का मुझ पर असर जरूर पड़ा, लेकिन मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। हम लोग किसी से डरने वाले लोग नहीं हैं।’ आगे एक्टर ने कहा है, ‘हमने किसी के लिए संसार में गलत नहीं किया, तो डर किस बात का। वो एक अप्रिय घटना से ज्यादा कुछ नहीं है। जीवन में ये सब घटना चलती रहती है।’ जानिए क्या था हमले का पूरा विवाद? जून में बिहार के गोपालगंज में एक्टर पंकज त्रिपाठी के भाई विजेंद्र नाथ पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया। घटना बरौली थाना क्षेत्र के बेलसंड गांव की है। विजेंद्र नाथ तिवारी देर शाम अपने घर के दरवाजे पर बैठे थे। इसी दौरान अचानक 2 लोगों ने विजेंद्र पर वार किया। हमले में वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। विजेंद्र नाथ को तुरंत सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने हालत को देखते हुए उन्हें पटना AIIMS रेफर कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि विजेंद्र का आरोपियों के साथ जमीनी विवाद था, जिसके चलते उन पर जानलेवा हमला किया गया था। दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जल्द शुरू करेंगे यूट्यूब चैनल आखिरी बार इसी साल की फिल्म कृष्णा अवतारम में नजर आए पंकज त्रिपाठी जल्द ही अपना यूट्यूब चैनल शुरू करने वाले हैं। आने वाले दिनों में वो फिल्म मिर्जापुर में नजर आएंगे, जो 5 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। इसके अलावा वो फिल्म पारिवारिक मनुरंजन और ओह माय डॉग में नजर आएंगे। पंकज त्रिपाठी 12 साल बाद थिएटर में भी वापसी करने वाले हैं।
हम लोग डरने वाले नहीं हैं:भाई पर कुल्हाड़ी से हुए जानलेवा हमले पर बोले पंकज त्रिपाठी, कहा- संसार में किसी के साथ गलत नहीं किया

जून में पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई विजेंद्र नाथ पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया था। घटना के बाद वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब लंबे समय बाद पंकज त्रिपाठी ने इस हमले पर बात की है। उनका कहना है कि उनके परिवार ने कभी किसी के साथ गलत नहीं किया है, यही वजह है कि परिवार किसी से नहीं डरता। हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में एक्टर पंकज त्रिपाठी ने कहा है, ‘मेरा अपने परिवार से बहुत लगाव है, हम दिन में रोज एक बार बात जरूर करते हैं। इस घटना का मुझ पर असर जरूर पड़ा, लेकिन मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। हम लोग किसी से डरने वाले लोग नहीं हैं।’ आगे एक्टर ने कहा है, ‘हमने किसी के लिए संसार में गलत नहीं किया, तो डर किस बात का। वो एक अप्रिय घटना से ज्यादा कुछ नहीं है। जीवन में ये सब घटना चलती रहती है।’ जानिए क्या था हमले का पूरा विवाद? जून में बिहार के गोपालगंज में एक्टर पंकज त्रिपाठी के भाई विजेंद्र नाथ पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया। घटना बरौली थाना क्षेत्र के बेलसंड गांव की है। विजेंद्र नाथ तिवारी देर शाम अपने घर के दरवाजे पर बैठे थे। इसी दौरान अचानक 2 लोगों ने विजेंद्र पर वार किया। हमले में वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। विजेंद्र नाथ को तुरंत सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने हालत को देखते हुए उन्हें पटना AIIMS रेफर कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि विजेंद्र का आरोपियों के साथ जमीनी विवाद था, जिसके चलते उन पर जानलेवा हमला किया गया था। दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जल्द शुरू करेंगे यूट्यूब चैनल आखिरी बार इसी साल की फिल्म कृष्णा अवतारम में नजर आए पंकज त्रिपाठी जल्द ही अपना यूट्यूब चैनल शुरू करने वाले हैं। आने वाले दिनों में वो फिल्म मिर्जापुर में नजर आएंगे, जो 5 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। इसके अलावा वो फिल्म पारिवारिक मनुरंजन और ओह माय डॉग में नजर आएंगे। पंकज त्रिपाठी 12 साल बाद थिएटर में भी वापसी करने वाले हैं।









