विश्व कप मैच के बाद फॉकलैंड पर फिर भिड़े अर्जेंटीना-ब्रिटेन:ब्रिटिश वॉरशिप के समुद्री इलाके में घुसने का आरोप; खिलाड़ियों के बैनर से बढ़ा विवाद

फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराने के कुछ घंटों बाद अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच फॉकलैंड द्वीप को लेकर नया विवाद शुरू हो गया। अर्जेंटीना ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी का वॉरशिप HMS मेडवे बिना अनुमति उसके समुद्री क्षेत्र में घुस आया। अर्जेंटीना ने इसे सैन्य घुसपैठ करार दिया। विदेश मंत्री पाब्लो क्विर्नो ने कहा कि इस मामले में ब्रिटिश दूतावास के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं ब्रिटेन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यात्रा की जानकारी पहले ही अर्जेंटीना सरकार को दे दी गई थी और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप थी। यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब इंग्लैंड को हराकर फाइनल में पहुंचने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर ‘लास माल्विनास सन अर्जेंटीना’ (माल्विनास अर्जेंटीना का है) लिखा बैनर लहराया। अर्जेंटीना में फॉकलैंड को माल्विनास कहा जाता है। इस घटना के बाद दोनों देशों का पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया।
छिपकली हटाने के टिप्स: छिपकली के मौसम में आपके भी घर में छिपकली का बच्चा लगे? इन 5 घरेलू नुस्खों से तुरंत शुरुआत

16 जुलाई 2026 को 21:34 IST पर अपडेट किया गया छिपकली हटाने के टिप्स: इस मौसम में आपके भी घर में छिपकली के छोटे-छोटे बच्चे दिखाई देने लगते हैं। इसे बिल्कुल भी लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। इस बात का संकेत है कि आपके घर का सम्राट उनके लिए एकदम उपयुक्त बन गया है। वहाँ अक्सर अपनी-अपनी शब्दावली रचनाएँ होती हैं जहाँ उन्हें भोजन, छिपकली और छिपकली के लिए सेफ जगह मिल जाती है। इसके अलावा खुले में खाना बनाकर रखा जाता है और घर में मौजूद कीड़े मकोड़े उन्हें तेजी से आकर्षित करते हैं। अनुसरण करना : चिपचिप झीलों के तट पर आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण: दीवारों के अभिलेख, ज्योतिष और डेस्टिनेशन के माध्यम से घर में घुसेड़ते हैं। इन पुराने को बंद कर दें और घर की साफ-सफाई को बरकरार रखें ताकि उन्हें छिपने का कोई कोना न मिले। छवि: एआई काली मिर्च का झटका: एक बोतल में पानी और काली मिर्च या लाल मिर्च का पाउडर मिलाया जाता है। इस डायनासोर को उन जगहों पर छिड़कें जहां छिपकली के बच्चे अक्सर दिखते हैं। इसकी अपवित्र गंध से वे दूर भागती हैं। छवि: एआई लहसुन और प्याज: लहसुन की कलियाँ या कटा हुआ प्याज़ कलाकारों और विद्वानों के नाख़ून में। चमकदार गंध वाले छिपकली को पसंद नहीं किया जाता है और वे ऐसे स्थान से दूर रहते हैं। छवि: एआई अंडे के छिलके: अंडे के छिलकों को साफ करके खिड़की या दुकान के पास रखें। यह एक पुरानी और प्रभावशाली कंपनी है। चिपलकियाँ इन छिलकों की गंध या सम्मिलित से दूर भागती हैं। उदाहरणार्थ समय-समय पर अस्थिर रहना। छवि: एआई एनीमेशन को कम करें: आइसलैंड वाली जगहें छिपकलीपियों को बहुत पसंद हैं। रसीले और साकीत की साज़िश को खुला रखा गया ताकि हवा बनी रहे। पानी का सामान हो तो उसे तुरंत ठीक करें ताकि घर सूखा बन जाए। छवि: एआई उपचार और नेफ़थलीन: घर में पेपरमिंट या नीलगिरी के प्लांट्स या इनके तेल का छिड़काव करें। नेफथलीन की गोलियों की अलमारी और सिंक के नीचे। व्युत्पत्ति हमेशा भोजन-पीने की नीवे से दूर रहती है। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 16 जुलाई 2026 21:34 IST पर
बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका:ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा

म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है। म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘बंगाली’ कहकर पुकारा जाता है। रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है। करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है। रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है। जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है। हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं। खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है। IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की। एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई। भारत में कितने रोहिंग्या हैं? नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।
बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका:ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा

म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है। म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘बंगाली’ कहकर पुकारा जाता है। रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है। करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है। रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है। जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है। हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं। खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है। IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की। एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई। भारत में कितने रोहिंग्या हैं? नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।
‘प्रहार, द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द होगी रिलीज:निकम बोले- राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, पूरी बॉडी लैंग्वेज आत्मसात की

राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘प्रहार: द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द ही रिलीज होगी। इसकी तैयारी और राजकुमार की मेथड एक्टिंग को लेकर खुद वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व पब्लिक प्रॉसिक्यूटर निकम ने खास बातें साझा कीं उज्ज्वल निकम बताते हैं कि ‘राजकुमार राव ने पारंपरिक रिसर्च की तरह लगातार सवाल नहीं पूछे। वह लंबे समय तक सामने बैठकर केवल यह देखते थे कि मैं कैसे बैठता हूं, फाइल कैसे पकड़ता हूं और अदालत में बहस करते समय हाथों का इस्तेमाल कैसे करता हूं। राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, बल्कि पूरी बॉडी लैंग्वेज को आत्मसात किया। उन्होंने मुझसे सवाल कम पूछे, लेकिन मेरी हर सूक्ष्म बारिकियों को बखूबी पकड़ा।’ संवाद रटने से ज्यादा व्यक्तित्व समझने पर फोकस किया गया निकम के मुताबिक, ‘राजकुमार की दिलचस्पी संवाद याद करने से ज्यादा उस व्यक्तित्व को समझने में थी, जिसे उन्हें परदे पर जीना था। वह रियल लाइफ में इंट्रोवर्ट हैं लेकिन किरदार की तैयार के लिहाज से की जाने वाली हर चीज जेहन में दर्ज करते जाते हैं। खास बात ये है कि वह अनावश्यक बातचीत में समय नहीं गंवाते। यही उनकी तैयारी की सबसे बड़ी ताकत है।’ वॉइस पर भी खास मेहनत की गई निकम का कहना है कि ‘अदालत में किसी वकील की पहचान केवल कानूनी ज्ञान से नहीं, बल्कि प्रस्तुति से भी बनती है। वॉइस कब ऊंची होगी, कब धीमी होगी और किस तर्क पर कितना विराम लेना है। इन बारीकियों पर राजकुमार ने खास तौर पर विशेष मेहनत की। उन्होंने सिर्फ संवाद याद नहीं किए, बल्कि उस लय को पकड़ने की कोशिश की जिसमें मैं अदालत में दलीलें रखता हूं।’ पुराने वीडियो देखकर राजकुमार ने पकड़ी निकम की शैली व्यक्तिगत मुलाकातों के अलावा राजकुमार ने निकम की कई पुराने दलीलों और रिकॉर्डिंग्स को बार-बार देखा। बकौल निकम, ‘मैंने देखा कि वह शब्दों पर जोर, बोलने की स्पीड और चेहरे के भावों को समझने के लिए मेरे वीडियोज बार-बार देखते थे। यह किसी संवाद को याद करने का नहीं, बल्कि एक इंसान के व्यक्तित्व को आत्मसात करने का अभ्यास था।’ निर्देशक के साथ असली कोर्ट जाकर लाइव माहौल भी समझा निर्देशक अविनाश अरुण के साथ राजकुमार ने वास्तविक अदालत की कार्यवाही भी देखी। निकम कहते हैं कि ‘राजकुमार को असल कोर्ट में जाकर समझ आया कि कोर्टरूम फिल्मों से बिल्कुल अलग दुनिया है। वहां हर शब्द का महत्व होता है, हर प्रतिक्रिया नियंत्रित होती है। अभिनय से ज्यादा संयम जरूरी होता है।’ शूटिंग के दौरान खुद सेट पर पहुंचे थे निकम, बोल दिए संवाद निकम के अनुसार, किसी व्यक्ति की हूबहू नकल करना आसान है लेकिन उसे परदे पर विश्वसनीय बनाना मुश्किल। राजकुमार ने मेरी आवाज या चाल की कॉपी करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने मेरी सोच, प्रतिक्रिया और ऊर्जा को समझने की कोशिश की। एक कोर्ट सीन की शूटिंग के दौरान मैं अचानक सेट पर पहुंच गया था और वह संवाद खुद बोल दिया, जिसे राजकुमार बोलने वाले थे। कुछ पल के लिए पूरी यूनिट चौंक गई। बाद में जब सभी को पता चला कि यह मजाक था, तो सेट पर ठहाके गूंज उठे।’
'दुल्हनिया ले आएगी' का ट्रेलर रिलीज:फिल्म में शाहरुख के बेटे आर्यन की रूमर्ड गर्लफ्रेंड भी नजर आएंगी; कहानी में मजेदार ट्विस्ट और फैमिली ड्रामा

आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर रिलीज हो गया। कॉमेडी, रोमांस, पारिवारिक रिश्तों और शादी की अफरा-तफरी से भरपूर यह ट्रेलर एक ऐसी फैमिली एंटरटेनर की झलक दिखाता है, जिसमें हंसी के साथ-साथ इमोशंस और कई मजेदार ट्विस्ट भी देखने को मिलेंगे। फिल्म में खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा दिखाई देंगे। फिल्म में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की रूमर्ड गर्लफ्रेंड लारिसा बोन्सी भी नजर आएंगी। बता दें कि सिद्धार्थ बनर्जी, आकाशादित्य लामा और विकास अग्रवाल द्वारा प्रोड्यूस की गई ‘दुल्हनिया ले आएगी’ 24 जुलाई, 2026 को थिएटर में रिलीज होगी। फिल्म की कहानी एक ऐसी दुल्हन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके सामने समय की बड़ी चुनौती है। इसी डेडलाइन के बीच उसकी जिंदगी में कई संभावित दूल्हों की एंट्री होती है और शुरू हो जाता है दूल्हों की तलाश का ऐसा मजेदार सिलसिला, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करता है। शादी के रंगों और उत्सव से सजा इसका माहौल फिल्म को और भी आकर्षक बनाता है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर डायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने कहा, “हर शादी में ड्रामा होता है, लेकिन ‘दुल्हनिया ले आएगी’ में यह ड्रामा फेरों से पहले ही शुरू हो जाता है। हमारी कोशिश थी कि ट्रेलर देखने के बाद दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान हो और साथ ही उनके मन में यह जानने की उत्सुकता भी बनी रहे कि आगे क्या होने वाला है। यह तेज रफ्तार, मजेदार, इमोशनल और ऐसे किरदारों से भरी फिल्म है, जिनसे दर्शक आसानी से जुड़ जाएंगे। यह पूरी तरह से एक फैमिली एंटरटेनर है और मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे देखकर उतना ही आनंद लेंगे, जितना हमें इसे बनाने में आया।” खुशाली ने किरदार को करियर का सबसे मजेदार बताया एक्ट्रेस खुशाली कुमार ने कहा, “यह मेरे करियर के सबसे मनोरंजक किरदारों में से एक है। वह कॉन्फिडेंट है, अनप्रिडिक्टेबल है और हर पल सबको सरप्राइज करती रहती है। ट्रेलर में फिल्म की एनर्जी और मस्ती भरे नेचर को खूबसूरती से दिखाया गया है। अब मैं ऑडियंस को उसकी पूरी कहानी बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार नहीं कर सकती।” महेश मांजरेकर ने फिल्म के बारे में कहा, “‘दुल्हनिया ले आएगी’ की सबसे खास बात इसकी सादगी और ईमानदारी है। यह ऐसी फिल्म है, जो मनोरंजन करने की कोशिश नहीं करती, बल्कि आप खुद-ब-खुद इसकी दुनिया में खो जाते हैं और मुस्कुराने लगते हैं। मेरा किरदार अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा चाहता है और यही इमोशनल पक्ष इसकी कॉमेडी को और भी दमदार बनाता है। ट्रेलर सिर्फ उस मजे की एक झलक है, जो फिल्म में देखने को मिलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हर पीढ़ी के दर्शक इस कहानी से जुड़ाव महसूस करेंगे।” लारिसा बोन्सी ने ट्रेलर इंस्टाग्राम पर शेयर किया वहीं, फिल्म को लेकर एक्ट्रेस लारिसा बोन्सी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर शेयर किया है। ट्रेलर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “साल की सबसे धमाकेदार शादी का जश्न देखने के लिए तारीख याद रखिए। यह आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ऑफिशियल ट्रेलर है। शादी की मस्ती, फैमिली ड्रामा और भरपूर मनोरंजन का शानदार मेल। यह फिल्म 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।” खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा के अलावा फिल्म में ओंकार कपूर के साथ लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर्स अगू स्टेनली चिएदोजी और बी.सी. आंटी भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म के ह्यूमर को और भी खास बनाती है।
विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो का मुख्य बिजनेस यानी आईटी सर्विसेज का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कंसॉलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।
'दुल्हनिया ले आएगी' का ट्रेलर रिलीज:फिल्म में शाहरुख के बेटे आर्यन की रूमर्ड गर्लफ्रेंड भी नजर आएंगी; कहानी में मजेदार ट्विस्ट और फैमिली ड्रामा

आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर रिलीज हो गया। कॉमेडी, रोमांस, पारिवारिक रिश्तों और शादी की अफरा-तफरी से भरपूर यह ट्रेलर एक ऐसी फैमिली एंटरटेनर की झलक दिखाता है, जिसमें हंसी के साथ-साथ इमोशंस और कई मजेदार ट्विस्ट भी देखने को मिलेंगे। फिल्म में खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा दिखाई देंगे। फिल्म में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की रूमर्ड गर्लफ्रेंड लारिसा बोन्सी भी नजर आएंगी। बता दें कि सिद्धार्थ बनर्जी, आकाशादित्य लामा और विकास अग्रवाल द्वारा प्रोड्यूस की गई ‘दुल्हनिया ले आएगी’ 24 जुलाई, 2026 को थिएटर में रिलीज होगी। फिल्म की कहानी एक ऐसी दुल्हन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके सामने समय की बड़ी चुनौती है। इसी डेडलाइन के बीच उसकी जिंदगी में कई संभावित दूल्हों की एंट्री होती है और शुरू हो जाता है दूल्हों की तलाश का ऐसा मजेदार सिलसिला, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करता है। शादी के रंगों और उत्सव से सजा इसका माहौल फिल्म को और भी आकर्षक बनाता है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर डायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने कहा, “हर शादी में ड्रामा होता है, लेकिन ‘दुल्हनिया ले आएगी’ में यह ड्रामा फेरों से पहले ही शुरू हो जाता है। हमारी कोशिश थी कि ट्रेलर देखने के बाद दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान हो और साथ ही उनके मन में यह जानने की उत्सुकता भी बनी रहे कि आगे क्या होने वाला है। यह तेज रफ्तार, मजेदार, इमोशनल और ऐसे किरदारों से भरी फिल्म है, जिनसे दर्शक आसानी से जुड़ जाएंगे। यह पूरी तरह से एक फैमिली एंटरटेनर है और मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे देखकर उतना ही आनंद लेंगे, जितना हमें इसे बनाने में आया।” खुशाली ने किरदार को करियर का सबसे मजेदार बताया एक्ट्रेस खुशाली कुमार ने कहा, “यह मेरे करियर के सबसे मनोरंजक किरदारों में से एक है। वह कॉन्फिडेंट है, अनप्रिडिक्टेबल है और हर पल सबको सरप्राइज करती रहती है। ट्रेलर में फिल्म की एनर्जी और मस्ती भरे नेचर को खूबसूरती से दिखाया गया है। अब मैं ऑडियंस को उसकी पूरी कहानी बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार नहीं कर सकती।” महेश मांजरेकर ने फिल्म के बारे में कहा, “‘दुल्हनिया ले आएगी’ की सबसे खास बात इसकी सादगी और ईमानदारी है। यह ऐसी फिल्म है, जो मनोरंजन करने की कोशिश नहीं करती, बल्कि आप खुद-ब-खुद इसकी दुनिया में खो जाते हैं और मुस्कुराने लगते हैं। मेरा किरदार अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा चाहता है और यही इमोशनल पक्ष इसकी कॉमेडी को और भी दमदार बनाता है। ट्रेलर सिर्फ उस मजे की एक झलक है, जो फिल्म में देखने को मिलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हर पीढ़ी के दर्शक इस कहानी से जुड़ाव महसूस करेंगे।” लारिसा बोन्सी ने ट्रेलर इंस्टाग्राम पर शेयर किया वहीं, फिल्म को लेकर एक्ट्रेस लारिसा बोन्सी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर शेयर किया है। ट्रेलर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “साल की सबसे धमाकेदार शादी का जश्न देखने के लिए तारीख याद रखिए। यह आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ऑफिशियल ट्रेलर है। शादी की मस्ती, फैमिली ड्रामा और भरपूर मनोरंजन का शानदार मेल। यह फिल्म 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।” खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा के अलावा फिल्म में ओंकार कपूर के साथ लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर्स अगू स्टेनली चिएदोजी और बी.सी. आंटी भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म के ह्यूमर को और भी खास बनाती है।
विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा हुआ:रेवेन्यू अनुमान से कम रहा, बोर्ड ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो का मुख्य बिजनेस यानी आईटी सर्विसेज का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कंसॉलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।
ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ने वाले रक्षामंत्री हटाए गए:जेलेंस्की के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे, इसी महीने प्रधानमंत्री को भी हटाया था

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव को नियुक्ति के सिर्फ छह महीने बाद पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी कीव में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसके अलावा ओडेसा, ल्वीव और रूस के हमलों का लगातार सामना कर रहे खारकीव शहर में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। खारकीव में 300 से ज्यादा लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाए। 35 वर्षीय मिखाइलो फेदोरोव को यूक्रेन में ड्रोन युद्ध की रणनीति का प्रमुख चेहरा माना जाता है। उन्होंने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिए रूस के सैन्य ठिकानों और तेल उद्योग से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति को आगे बढ़ाया। इसके अलावा कब्जे वाले क्रीमिया को सैन्य और रसद के स्तर पर अलग-थलग करने के अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।







