Wednesday, 05 Aug 2026 | 04:52 PM

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3 इडियट्स के 'चतुर' सोनम वांगचुक के समर्थन में आए:एक्टर ओमी वैद्य बोले- मैं नहीं चाहता कि फुंसुख वांगडू मर जाए, वह जिंदा रहें

3 इडियट्स के 'चतुर' सोनम वांगचुक के समर्थन में आए:एक्टर ओमी वैद्य बोले- मैं नहीं चाहता कि फुंसुख वांगडू मर जाए, वह जिंदा रहें

फिल्म 3 इडियट्स में ‘चतुर रामलिंगम’ का किरदार निभाने वाले एक्टर ओमी वैद्य ने सोनम वांगचुक के समर्थन में लोगों से आगे आने की अपील की। ओमी वैद्य ने एक वीडियो मैसेज जारी कर कहा कि आज मैं आपसे एक जरूरी बात करना चाहता हूं। मैं अक्सर ऐसे वीडियो नहीं बनाता, इसलिए मेरी बात ध्यान से सुनिए। क्या आपको पता है कि 3 इडियट्स में आमिर खान का किरदार फुंसुख वांगडू असल जिंदगी के लद्दाख के इंजीनियर, इनोवेटर, शिक्षक और समाज सुधारक सोनम वांगचुक से प्रेरित था? ओमी ने आगे कहा, मैं उनसे मिल चुका हूं। वह बहुत ही दिलचस्प और सादगी पसंद इंसान हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में कई बेहतरीन काम किए हैं। इसलिए मैं आपसे कहूंगा कि उनके बारे में जानिए और देखिए कि इस समय वह क्या कर रहे हैं। फिलहाल सोनम वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। कई हफ्ते बीत चुके हैं और उनका ब्लड शुगर काफी कम हो गया है। मुझे नहीं पता कि आपने इसके बारे में सुना है या नहीं, या मीडिया इस पर कितनी खबर दिखा रहा है, लेकिन यह बहुत गंभीर मामला है। वह भूख हड़ताल क्यों कर रहे हैं? क्योंकि उन्हें भारत की शिक्षा व्यवस्था, लद्दाख से जुड़े कुछ मुद्दों और पर्यावरण की चिंता है। आप उनकी बात से सहमत हों या नहीं, लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि मैं नहीं चाहता कि यह इंसान मर जाए। मेरे लिए वह एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं और मैं चाहता हूं कि वह सुरक्षित रहें और जिंदा रहें। एक्टर ने लोगों से अपील करते हुए कहा, हम सब आम लोग हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत व्यस्त रहते हैं। कई बार हमारे पास ऐसे मुद्दों पर ध्यान देने का समय नहीं होता, लेकिन अगर आप थोड़ा समय निकालकर इस मामले को समझेंगे, तो हो सकता है कि आपको भी उनकी कुछ बातें सही लगें। शायद आप, आपके परिवार या आपके दोस्तों ने भी ऐसी समस्याओं का सामना किया हो। इसलिए मैं आपसे बस इतना कहना चाहता हूं कि कुछ मिनट रुकिए। अपने काम या घर की जिम्मेदारियों से थोड़ा समय निकालिए और देखिए कि इस समय क्या हो रहा है। मुझे लगता है कि यह जानना बहुत जरूरी है। क्योंकि मैं नहीं चाहता कि फुंसुख वांगडू मर जाए, और मुझे लगता है कि आप भी ऐसा नहीं चाहेंगे। जनप्रतिनिधियों तक बात पहुंचाने को कहा ओमी ने आगे कहा कि आइए, हम सब मिलकर जो कर सकते हैं, वह करें। इस मैसेज को सोशल मीडिया पर शेयर करें, रीपोस्ट करें और इंस्टाग्राम पर भी लोगों तक पहुंचाएं। अगर आपको सच में इस मुद्दे की चिंता है, तो अपने स्थानीय जनप्रतिनिधियों या सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों तक भी अपनी बात पहुंचाइए और उनसे इस मामले में कार्रवाई की मांग कीजिए। सोनम वांगचुक और उनसे जुड़े ये मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण हैं। मुझे लगता है कि इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उम्मीद है कि आप भी ऐसा ही सोचेंगे। मैंने जो यह मैसेज आपको दिया है, उसे दिल से स्वीकार कीजिए। बहुत-बहुत धन्यवाद। 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 जून 2026 से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आज उनकी भूख हड़ताल का 17वां दिन है। वह देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षाओं में कथित धांधली (जैसे NEET परीक्षा विवाद) और पेपर लीक मामलों के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पूरी जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने देश के नागरिकों से इस मुद्दे पर एकजुट होने और आगामी 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘संसद मार्च’ में शामिल होने की अपील की है।

3 इडियट्स के 'चतुर' सोनम वांगचुक के समर्थन में आए:एक्टर ओमी वैद्य बोले- मैं नहीं चाहता कि फुंसुख वांगडू मर जाए, वह जिंदा रहें

3 इडियट्स के 'चतुर' सोनम वांगचुक के समर्थन में आए:एक्टर ओमी वैद्य बोले- मैं नहीं चाहता कि फुंसुख वांगडू मर जाए, वह जिंदा रहें

फिल्म 3 इडियट्स में ‘चतुर रामलिंगम’ का किरदार निभाने वाले एक्टर ओमी वैद्य ने सोनम वांगचुक के समर्थन में लोगों से आगे आने की अपील की। ओमी वैद्य ने एक वीडियो मैसेज जारी कर कहा कि आज मैं आपसे एक जरूरी बात करना चाहता हूं। मैं अक्सर ऐसे वीडियो नहीं बनाता, इसलिए मेरी बात ध्यान से सुनिए। क्या आपको पता है कि 3 इडियट्स में आमिर खान का किरदार फुंसुख वांगडू असल जिंदगी के लद्दाख के इंजीनियर, इनोवेटर, शिक्षक और समाज सुधारक सोनम वांगचुक से प्रेरित था? ओमी ने आगे कहा, मैं उनसे मिल चुका हूं। वह बहुत ही दिलचस्प और सादगी पसंद इंसान हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में कई बेहतरीन काम किए हैं। इसलिए मैं आपसे कहूंगा कि उनके बारे में जानिए और देखिए कि इस समय वह क्या कर रहे हैं। फिलहाल सोनम वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। कई हफ्ते बीत चुके हैं और उनका ब्लड शुगर काफी कम हो गया है। मुझे नहीं पता कि आपने इसके बारे में सुना है या नहीं, या मीडिया इस पर कितनी खबर दिखा रहा है, लेकिन यह बहुत गंभीर मामला है। वह भूख हड़ताल क्यों कर रहे हैं? क्योंकि उन्हें भारत की शिक्षा व्यवस्था, लद्दाख से जुड़े कुछ मुद्दों और पर्यावरण की चिंता है। आप उनकी बात से सहमत हों या नहीं, लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि मैं नहीं चाहता कि यह इंसान मर जाए। मेरे लिए वह एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं और मैं चाहता हूं कि वह सुरक्षित रहें और जिंदा रहें। एक्टर ने लोगों से अपील करते हुए कहा, हम सब आम लोग हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत व्यस्त रहते हैं। कई बार हमारे पास ऐसे मुद्दों पर ध्यान देने का समय नहीं होता, लेकिन अगर आप थोड़ा समय निकालकर इस मामले को समझेंगे, तो हो सकता है कि आपको भी उनकी कुछ बातें सही लगें। शायद आप, आपके परिवार या आपके दोस्तों ने भी ऐसी समस्याओं का सामना किया हो। इसलिए मैं आपसे बस इतना कहना चाहता हूं कि कुछ मिनट रुकिए। अपने काम या घर की जिम्मेदारियों से थोड़ा समय निकालिए और देखिए कि इस समय क्या हो रहा है। मुझे लगता है कि यह जानना बहुत जरूरी है। क्योंकि मैं नहीं चाहता कि फुंसुख वांगडू मर जाए, और मुझे लगता है कि आप भी ऐसा नहीं चाहेंगे। जनप्रतिनिधियों तक बात पहुंचाने को कहा ओमी ने आगे कहा कि आइए, हम सब मिलकर जो कर सकते हैं, वह करें। इस मैसेज को सोशल मीडिया पर शेयर करें, रीपोस्ट करें और इंस्टाग्राम पर भी लोगों तक पहुंचाएं। अगर आपको सच में इस मुद्दे की चिंता है, तो अपने स्थानीय जनप्रतिनिधियों या सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों तक भी अपनी बात पहुंचाइए और उनसे इस मामले में कार्रवाई की मांग कीजिए। सोनम वांगचुक और उनसे जुड़े ये मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण हैं। मुझे लगता है कि इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उम्मीद है कि आप भी ऐसा ही सोचेंगे। मैंने जो यह मैसेज आपको दिया है, उसे दिल से स्वीकार कीजिए। बहुत-बहुत धन्यवाद। 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 जून 2026 से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आज उनकी भूख हड़ताल का 17वां दिन है। वह देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षाओं में कथित धांधली (जैसे NEET परीक्षा विवाद) और पेपर लीक मामलों के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पूरी जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने देश के नागरिकों से इस मुद्दे पर एकजुट होने और आगामी 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘संसद मार्च’ में शामिल होने की अपील की है।

होर्मुज में टैंकर पर हमले में एक भारतीय की मौत:अमेरिका ने लगातार तीसरा रात ईरान पर हमले किए; ईरानी बंदरगाहों की फिर नाकाबंदी करेगा US

होर्मुज में टैंकर पर हमले में एक भारतीय की मौत:अमेरिका ने लगातार तीसरा रात ईरान पर हमले किए; ईरानी बंदरगाहों की फिर नाकाबंदी करेगा US

होर्मुज स्ट्रेट में हालिय हमलों में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई है। UAE के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, होर्मुज में ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास उसके दो तेल टैंकरों पर ईरान की दो क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया है। मोंबासा और अल बहिया नाम के टैंकरों पर हुए इस हमले में 8 लोग भी घायल हुए हैं। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि सोमवार को ईरान पर लगातार तीसरी रात हवाई हमले शुरू किए गए हैं। CENTCOM के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य ईरानी सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाना और होर्मुज स्ट्रेट में आम नागरिकों और कमर्शियल जहाजों पर हमले करने की उसकी क्षमता को कमजोर करना है। साथ ही, CENTCOM ने कहा है कि मंगलवार से अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले समुद्री यातायात की नाकाबंदी फिर शुरू करेगा। हालांकि, जो जहाज इस नाकाबंदी का उल्लंघन नहीं करेंगे, उनके लिए क्षेत्रीय समुद्री मार्गों पर आवाजाही जारी रहेगी। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स: ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

रैपिड फायर राउंड में शिल्पा शेट्टी बोलीं:रेड कार्पेट लुक नहीं, घर का पजामा पसंद है, शाहरुख को सुपरस्टार और सलमान को अच्छा दोस्त बताया

रैपिड फायर राउंड में शिल्पा शेट्टी बोलीं:रेड कार्पेट लुक नहीं, घर का पजामा पसंद है, शाहरुख को सुपरस्टार और सलमान को अच्छा दोस्त बताया

रैपिड फायर राउंड में शिल्पा शेट्टी ने कई दिलचस्प सवालों के जवाब दिए। उन्होंने शाहरुख खान को सुपरस्टार, सलमान खान को अच्छा दोस्त और गोविंदा को मल्टी-टैलेंटेड बताया। फेम और सुकून में उन्होंने सुकून को चुना। चीट मील और एक्स्ट्रा वर्कआउट के सवाल पर उन्होंने चीट मील को प्राथमिकता दी। बॉलीवुड और बिजनेस को उन्होंने अपनी सफलता का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि असली सफलता सिर्फ नाम और पैसा नहीं, बल्कि ईमानदारी से जीना, लोगों का प्यार पाना और दूसरों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना है। सवाल: एक शब्द में शाहरुख खान के बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब: सुपरस्टार। सवाल: सलमान खान आपके लिए क्या हैं? जवाब: बहुत अच्छे दोस्त। सवाल: गोविंदा को एक शब्द में कैसे बताएंगी? जवाब: मल्टी-टैलेंटेड। सवाल: योगा या शॉपिंग, किसे चुनेंगी? जवाब: दोनों। लेकिन योगा मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी। सवाल: रेड कार्पेट लुक या घर का पजामा? जवाब: पजामा। सवाल: बॉलीवुड या बिजनेस? जवाब: दोनों। मैंने दोनों किए हैं और दोनों में मुझे सफलता मिली है। सवाल: चीट मील या एक्स्ट्रा वर्कआउट? जवाब: चीट मील। एक्स्ट्रा वर्कआउट क्यों करूंगी? सवाल: फेम या सुकून, किसे चुनेंगी? जवाब: सुकून। अगर मन शांत नहीं है, तो किसी भी सफलता का आनंद अधूरा रह जाता है। सवाल: मॉर्निंग पर्सन हैं या नाइट आउल? जवाब: मैं मॉर्निंग पर्सन नहीं हूं। अभी बच्चों की छुट्टियां चल रही हैं, इसलिए सुबह 8:30 बजे उठना भी मेरे लिए लग्जरी है। सवाल: आपके लिए सफलता का असली मतलब क्या है? जवाब: मेरे लिए सफलता सिर्फ नाम और पैसा नहीं है। असली सफलता तब है, जब आप ईमानदारी से अपनी जिंदगी जिएं, लोगों का प्यार पाएं और किसी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

रैपिड फायर राउंड में शिल्पा शेट्टी बोलीं:रेड कार्पेट लुक नहीं, घर का पजामा पसंद है, शाहरुख को सुपरस्टार और सलमान को अच्छा दोस्त बताया

रैपिड फायर राउंड में शिल्पा शेट्टी बोलीं:रेड कार्पेट लुक नहीं, घर का पजामा पसंद है, शाहरुख को सुपरस्टार और सलमान को अच्छा दोस्त बताया

रैपिड फायर राउंड में शिल्पा शेट्टी ने कई दिलचस्प सवालों के जवाब दिए। उन्होंने शाहरुख खान को सुपरस्टार, सलमान खान को अच्छा दोस्त और गोविंदा को मल्टी-टैलेंटेड बताया। फेम और सुकून में उन्होंने सुकून को चुना। चीट मील और एक्स्ट्रा वर्कआउट के सवाल पर उन्होंने चीट मील को प्राथमिकता दी। बॉलीवुड और बिजनेस को उन्होंने अपनी सफलता का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि असली सफलता सिर्फ नाम और पैसा नहीं, बल्कि ईमानदारी से जीना, लोगों का प्यार पाना और दूसरों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना है। सवाल: एक शब्द में शाहरुख खान के बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब: सुपरस्टार। सवाल: सलमान खान आपके लिए क्या हैं? जवाब: बहुत अच्छे दोस्त। सवाल: गोविंदा को एक शब्द में कैसे बताएंगी? जवाब: मल्टी-टैलेंटेड। सवाल: योगा या शॉपिंग, किसे चुनेंगी? जवाब: दोनों। लेकिन योगा मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी। सवाल: रेड कार्पेट लुक या घर का पजामा? जवाब: पजामा। सवाल: बॉलीवुड या बिजनेस? जवाब: दोनों। मैंने दोनों किए हैं और दोनों में मुझे सफलता मिली है। सवाल: चीट मील या एक्स्ट्रा वर्कआउट? जवाब: चीट मील। एक्स्ट्रा वर्कआउट क्यों करूंगी? सवाल: फेम या सुकून, किसे चुनेंगी? जवाब: सुकून। अगर मन शांत नहीं है, तो किसी भी सफलता का आनंद अधूरा रह जाता है। सवाल: मॉर्निंग पर्सन हैं या नाइट आउल? जवाब: मैं मॉर्निंग पर्सन नहीं हूं। अभी बच्चों की छुट्टियां चल रही हैं, इसलिए सुबह 8:30 बजे उठना भी मेरे लिए लग्जरी है। सवाल: आपके लिए सफलता का असली मतलब क्या है? जवाब: मेरे लिए सफलता सिर्फ नाम और पैसा नहीं है। असली सफलता तब है, जब आप ईमानदारी से अपनी जिंदगी जिएं, लोगों का प्यार पाएं और किसी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

धुरंधर जैसी फिल्मों पर राजनीतिक दबाव दिखता है:नफीसा बोलीं- युवा बदलते सिनेमा की राजनीति समझें, नासर बोले- ब्रेकअप जिंदगी का अंत नहीं

धुरंधर जैसी फिल्मों पर राजनीतिक दबाव दिखता है:नफीसा बोलीं- युवा बदलते सिनेमा की राजनीति समझें, नासर बोले- ब्रेकअप जिंदगी का अंत नहीं

क्या ब्रेकअप के बाद जिंदगी खत्म हो जाती है? क्या हिंसक रिश्ते को सिर्फ इसलिए निभाते रहना चाहिए क्योंकि वह रिश्ता है? ऐसे सवालों पर अभिनेता नासर और अभिनेत्री व सामाजिक कार्यकर्ता नफीसा अली ने फिल्म ‘मैक्स, मिन और म्याउजाकी’ के प्रमोशन के दौरान दैनिक भास्कर से बात की। नासर ने कहा कि रिश्ता टूटने का मतलब जिंदगी खत्म होना नहीं है। कमिटमेंट की अहमियत समझनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर थेरेपी लेने में झिझक नहीं करनी चाहिए। नफीसा अली ने युवाओं को खुद से प्यार करना सीखने, हिंसक रिश्तों से बाहर निकलने और हर परिवार के लिए हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज फिल्मों में रोमांस और संगीत की जगह एक्शन और हिंसा हावी है, जबकि ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों पर राजनीतिक दबाव का असर भी साफ दिखाई देता है, जिसे युवाओं को समझना चाहिए। सवाल: नासर सर, जब आपने फिल्म ‘मैक्स, मिन और म्याउजाकी’ की कहानी सुनी तो ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको तुरंत हां कहने पर मजबूर कर दिया? जवाब/नासर: कहानी सुनकर लगा कि यह किसी फिल्म की नहीं, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिन्हें मैं अपनी जिंदगी में जानता हूं। हर किरदार असली लगा। कहीं भी बनावटीपन या ड्रामा नहीं था। सब कुछ जिंदगी की तरह स्वाभाविक था। मुझे लगा कि मैं खुद को और अपने बेटे की झलक भी इस कहानी में देख सकता हूं। इसलिए मैंने तुरंत फिल्म के लिए हां कह दी। सवाल: नफीसा जी, आपने यह फिल्म क्यों चुनी? जवाब/नफीसा अली: मेरी पहली प्रतिक्रिया थी कि मैं फिल्म नहीं कर पाऊंगी, क्योंकि उस समय मैं कैंसर से लड़ रही थी। लेकिन पद्मकुमार ने मुझ पर भरोसा जताया और पूरी कहानी सुनाई। कहानी सुनने के बाद लगा कि यह आज की सच्चाई है। भारत की ज्यादातर आबादी 28 साल से कम उम्र की है। युवाओं को यह समझना जरूरी है कि उनके ऊपर माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति भी जिम्मेदारी है। माता-पिता पूरी जिंदगी बच्चों के लिए सब कुछ करते हैं, लेकिन आज कई बच्चे पढ़ाई, नौकरी और दूसरे कारणों से दूर चले जाते हैं। कई बार उनके पास माता-पिता के लिए समय भी नहीं होता। यह फिल्म दिल, आत्मा और एक-दूसरे की परवाह करने की कहानी है। मुझे लगा कि यह मेरे जीवन की भी कहानी हो सकती है। इसलिए मैंने यह फिल्म की। सवाल: आज की युवा पीढ़ी में रिश्ते जल्दी बनते हैं और जल्दी टूट भी जाते हैं। कम्युनिकेशन गैप, धैर्य की कमी और बदलती सोच को आप किस तरह देखते हैं? युवाओं को क्या सलाह देना चाहेंगे? जवाब/नफीसा अली: मुझे अपना बचपन याद आता है। मैंने भी बहुत प्यार किया है और कई बार दिल टूटा है। लेकिन युवाओं से कहना चाहूंगी कि अगर दिल टूट जाए तो यह मत सोचिए कि जिंदगी खत्म हो गई है या दोबारा प्यार नहीं मिलेगा। ब्रेकअप की वजह से खुद को खत्म मत कीजिए। नशे की तरफ मत जाइए, अपनी सेहत खराब मत कीजिए और परिवार से दूर मत होइए। जिंदगी बहुत खूबसूरत है और हर इंसान के लिए सही साथी जरूर होता है। सबसे पहले खुद से प्यार करना सीखिए। अगर आप खुद से प्यार करेंगे तो किसी के जाने से जिंदगी नहीं रुकेगी। जो लोग आपका दिल तोड़कर चले जाते हैं, उन्हें जाने दीजिए। आप खुद अपने लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। सवाल: नासर सर, आज के रिश्तों और पहले के रिश्तों में आपको क्या सबसे बड़ा फर्क दिखाई देता है? जवाब/नासर: मैं नफीसा जी की बात से सहमत हूं। हर दौर में रिश्तों का स्वरूप बदलता रहा है। 1960 के दशक की प्रेम कहानियों और आज की फिल्मों में बड़ा अंतर है। पहले महिलाओं को जिस तरह दिखाया जाता था, अब उनकी भूमिका ज्यादा मजबूत और स्वतंत्र है। यह अच्छा बदलाव है। आज की युवा पीढ़ी के पास पहले से ज्यादा आजादी है। लेकिन अब ब्रेकअप को बहुत हल्के में लिया जाने लगा है। पहले उसका दर्द लंबे समय तक महसूस होता था, लेकिन अब कई लोग जल्दी आगे बढ़ जाते हैं। आगे बढ़ना गलत नहीं है, लेकिन बार-बार रिश्ते बनाना और तोड़ना आदत बन जाए तो यह चिंता की बात है। रिश्ता खत्म हो जाए तो भी जिंदगी नहीं रुकती। अपने सपनों और करियर पर ध्यान दीजिए, लेकिन कमिटमेंट की अहमियत कभी मत भूलिए। सवाल: आज फिल्मों में रोमांस और संगीत की जगह एक्शन और हिंसा ज्यादा देखने को मिल रही है। आपको क्या लगता है, इसकी वजह क्या है? जवाब/नफीसा अली: हमारी फिल्मों की पहचान कभी प्यार, रिश्ते और संगीत थी। लेकिन अब एक्शन और हिंसा का असर ज्यादा दिखाई देता है। लोग बार-बार ऐसी फिल्में देख रहे हैं, लेकिन सवाल है कि हिंसा को आखिर कितनी बार देखा जा सकता है? मैं फिल्म बनाने वालों को पूरी तरह दोष नहीं देती, लेकिन समाज के प्रति उनका भी दायित्व है। उन्हें सोचना चाहिए कि वे दर्शकों तक कैसा संदेश पहुंचा रहे हैं। सवाल: क्या आपको लगता है कि फिल्मों और समाज के माहौल का एक-दूसरे पर असर पड़ता है? जवाब/नफीसा अली: बिल्कुल पड़ता है। आज देश में कई तरह की राजनीतिक सोच और प्रभाव फिल्मों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे माहौल में युवाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि उनके दिमाग पर किस तरह का असर डाला जा रहा है। हर इंसान को अपने विवेक से सोचना चाहिए। किसी भी मानसिक प्रभाव या भटकाव से बचना जरूरी है। यह भी समझना चाहिए कि हमारी सोच किस दिशा में जा रही है और वह सही है या नहीं। सवाल: रिश्ते टूटने के बाद बढ़ती घरेलू हिंसा और आक्रामक व्यवहार पर आप क्या कहना चाहेंगी? जवाब/नफीसा अली: वरिष्ठ होने के नाते मैं यह जरूर कहना चाहूंगी कि हमारे देश में शादी और रिश्तों के नाम पर बंद दरवाजों के पीछे बहुत हिंसा हो रही है। सरकार ने कई हेल्पलाइन और सहायता व्यवस्थाएं शुरू की हैं। अगर कोई व्यक्ति रिश्ते में हिंसा झेल रहा है, तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए। उसे अपनी आवाज उठानी चाहिए। जो इंसान आपके साथ हिंसक व्यवहार करता है, वह आपके साथ रहने के लायक नहीं है। ऐसे रिश्ते से बाहर निकलना ही बेहतर है। किसी को भी हिंसा सहने के लिए मजबूर नहीं होना

ब्रिटेन में मंदिर की जगह मुस्लिमों को बेचने पर विवाद:हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई; नीलामी की प्रक्रिया गलत होने का आरोप

ब्रिटेन में मंदिर की जगह मुस्लिमों को बेचने पर विवाद:हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई; नीलामी की प्रक्रिया गलत होने का आरोप

लंदन से 120 किमी दूर पीटरबरो में 40 साल पुराने मंदिर और कम्युनिटी सेंटर की बिक्री को पर विवाद हो गया है। पीटरबरो सिटी काउंसिल ने न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स को नीलामी के बाद एक मुस्लिम संस्था, यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन, को बेचने का फैसला किया है। इसी परिसर में भारत हिंदू समाज का मंदिर चलता है, जो शहर और आसपास रहने वाले हजारों हिंदुओं का प्रमुख पूजा और सांस्कृतिक केंद्र है। फैसले से नाराज भारत हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बिक्री प्रक्रिया को चुनौती दी है। भारत हिंदू समाज संगठन का आरोप है कि काउंसिल ने मंदिर की करीब 40 साल पुरानी धार्मिक और सामुदायिक भूमिका को नजरअंदाज किया। नीलामी के मूल्यांकन में भी गंभीर खामियां रहीं। बता दें कि फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए काउंसिल को बिक्री पूरी करने जैसे किसी भी कदम से रोक दिया था। अब न्यायिक समीक्षा में यह जांच हो रही है कि फैसला लेने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक थी या नहीं। मंदिर प्रबंधन ने साफ किया है कि उसका विरोध मुस्लिम संस्था से नहीं, बल्कि काउंसिल के फैसले और प्रक्रिया से है। अब कोर्ट जांच करेगा कि संपत्ति बेचने का फैसला कानून और समानता के नियमों के मुताबिक लिया गया था या नहीं। मंदिर बंद होने से 56 किमी दूर जाने को मजबूर होंगे हिंदू भारत हिंदू समाज का कहना है कि पीटरबरो का यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इलाके के 4,000 हिंदुओं का एकमात्र सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र भी है। यदि यह परिसर बंद होता है, तो हिंदुओं को पूजा-अर्चना व त्योहारों के लिए निकटतम मंदिर (कैंब्रिज-56 किमी) या (लेस्टर-64 किमी) का रुख करना पड़ेगा। घाटे के चलते बेचने पड़ रहे हैं परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व क्लब पीटरबरो का विवाद ब्रिटेन में अकेला नहीं है। यहां की काउंसिलें बढ़ते खर्च व कम सरकारी मदद के कारण सामाजिक परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व कम्युनिटी भवन बेचकर बजट संभाल रही हैं। 2025 के ‘की सिटीज’ सर्वे में 60% काउंसिलों ने संपत्ति बिक्री को घाटा भरने का रास्ता बताया। बर्मिंघम को 24-25 का बजट संतुलित करने के लिए 2,883 करोड़ रु. की संपत्तियां बेचने का लक्ष्य रखना पड़ा। नॉटिंघम का 2025-26 घाटा 267 करोड़ और चार वर्षों का कुल अनुमानित अंतर 689 करोड़ रु. था। नीलामी में खामियां, समीक्षा बिना मंजूरी दी गई भारत हिंदू समाज का आरोप है कि बिक्री के दौरान दोनों पक्षों की बोलियों का ठीक मूल्यांकन नहीं हुआ। अदालत में संगठन ने कहा कि काउंसिल ने जांच और स्कोरिंग में गलतियां कीं। इसके बाद काउंसिल सदस्यों ने उन्हीं सिफारिशों को पड़ताल के बिना स्वीकार कर लिया। संगठन का कहना है कि मामला केवल ऊंची बोली का नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल का भी है। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें…

ब्रिटेन में मंदिर की जगह मुस्लिमों को बेचने पर विवाद:हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई; नीलामी की प्रक्रिया गलत होने का आरोप

ब्रिटेन में मंदिर की जगह मुस्लिमों को बेचने पर विवाद:हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई; नीलामी की प्रक्रिया गलत होने का आरोप

लंदन से 120 किमी दूर पीटरबरो में 40 साल पुराने मंदिर और कम्युनिटी सेंटर की बिक्री को पर विवाद हो गया है। पीटरबरो सिटी काउंसिल ने न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स को नीलामी के बाद एक मुस्लिम संस्था, यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन, को बेचने का फैसला किया है। इसी परिसर में भारत हिंदू समाज का मंदिर चलता है, जो शहर और आसपास रहने वाले हजारों हिंदुओं का प्रमुख पूजा और सांस्कृतिक केंद्र है। फैसले से नाराज भारत हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बिक्री प्रक्रिया को चुनौती दी है। भारत हिंदू समाज संगठन का आरोप है कि काउंसिल ने मंदिर की करीब 40 साल पुरानी धार्मिक और सामुदायिक भूमिका को नजरअंदाज किया। नीलामी के मूल्यांकन में भी गंभीर खामियां रहीं। बता दें कि फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए काउंसिल को बिक्री पूरी करने जैसे किसी भी कदम से रोक दिया था। अब न्यायिक समीक्षा में यह जांच हो रही है कि फैसला लेने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक थी या नहीं। मंदिर प्रबंधन ने साफ किया है कि उसका विरोध मुस्लिम संस्था से नहीं, बल्कि काउंसिल के फैसले और प्रक्रिया से है। अब कोर्ट जांच करेगा कि संपत्ति बेचने का फैसला कानून और समानता के नियमों के मुताबिक लिया गया था या नहीं। मंदिर बंद होने से 56 किमी दूर जाने को मजबूर होंगे हिंदू भारत हिंदू समाज का कहना है कि पीटरबरो का यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इलाके के 4,000 हिंदुओं का एकमात्र सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र भी है। यदि यह परिसर बंद होता है, तो हिंदुओं को पूजा-अर्चना व त्योहारों के लिए निकटतम मंदिर (कैंब्रिज-56 किमी) या (लेस्टर-64 किमी) का रुख करना पड़ेगा। घाटे के चलते बेचने पड़ रहे हैं परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व क्लब पीटरबरो का विवाद ब्रिटेन में अकेला नहीं है। यहां की काउंसिलें बढ़ते खर्च व कम सरकारी मदद के कारण सामाजिक परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व कम्युनिटी भवन बेचकर बजट संभाल रही हैं। 2025 के ‘की सिटीज’ सर्वे में 60% काउंसिलों ने संपत्ति बिक्री को घाटा भरने का रास्ता बताया। बर्मिंघम को 24-25 का बजट संतुलित करने के लिए 2,883 करोड़ रु. की संपत्तियां बेचने का लक्ष्य रखना पड़ा। नॉटिंघम का 2025-26 घाटा 267 करोड़ और चार वर्षों का कुल अनुमानित अंतर 689 करोड़ रु. था। नीलामी में खामियां, समीक्षा बिना मंजूरी दी गई भारत हिंदू समाज का आरोप है कि बिक्री के दौरान दोनों पक्षों की बोलियों का ठीक मूल्यांकन नहीं हुआ। अदालत में संगठन ने कहा कि काउंसिल ने जांच और स्कोरिंग में गलतियां कीं। इसके बाद काउंसिल सदस्यों ने उन्हीं सिफारिशों को पड़ताल के बिना स्वीकार कर लिया। संगठन का कहना है कि मामला केवल ऊंची बोली का नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल का भी है। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें…

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