गर्मी में AC नहीं, यह नेचुरल चीज देगा राहत! शरीर को रखेगा फ्रिज जैसा ठंडा, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें सेवन

Last Updated:May 11, 2026, 17:33 IST Benefits of Consuming Katira in summer: भीषण गर्मी में करौली के ग्रामीण आज भी शरीर को ठंडा रखने के लिए पारंपरिक देसी नुस्खे कतीरा पर भरोसा करते हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार कतीरे की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर को ठंडक देने, डिहाइड्रेशन से बचाने और लू के असर को कम करने में मदद करती है. लोग इसे रातभर भिगोकर सुबह दूध, शरबत या मिश्री के साथ सेवन करते हैं. आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. महेश जंगम ने बताया कि कतीरा फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. भीषण गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखना बेहद जरूरी हो जाता है. ऐसे मौसम में करौली के ग्रामीण आज भी पारंपरिक देसी नुस्खों पर भरोसा करते हैं. इन्हीं में से एक है कतीरा, जिसे आयुर्वेद में शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. गांवों में लोग सुबह खाली पेट कतीरे का सेवन करते हैं, ताकि शरीर को ठंडक मिले और लू से बचाव हो सके. कतीरा शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और गर्म हवाओं के असर को कम करने में मदद करता है. ग्रामीणों का मानना है कि नियमित सेवन से शरीर तरोताजा रहता है और गर्मी से राहत मिलती है. करौली के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. महेश जंगम के अनुसार गर्मी के मौसम में कतीरा का सेवन फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए. उनका कहना है कि कतीरा शरीर को ठंडक पहुंचाने, लू से बचाव करने और शरीर में पानी की कमी को संतुलित रखने में मदद करता है. हालांकि जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट फूलना, अपच या अन्य पेट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं. इसलिए कतीरा का उपयोग हमेशा संतुलित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए, ताकि शरीर को इसका पूरा लाभ मिल सके. ग्रामीणों का कहना है कि कतीरा शरीर को फ्रिज की तरह ठंडा रखने का काम करता है. यह एक प्राकृतिक गोंद होता है, जो पेड़ों से प्राप्त किया जाता है. गर्मी के मौसम में गांवों में इसका सेवन काफी लोकप्रिय माना जाता है. कतीरा को रातभर पानी में भिगोकर रखा जाता है, जिससे यह फूलकर जेली जैसा बन जाता है. सुबह लोग इसे दूध, शरबत या ठंडे पानी में मिश्री के साथ मिलाकर पीते हैं. ग्रामीणों के अनुसार इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने, लू से बचाने और दिनभर तरोताजा बनाए रखने में मदद करता है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मियों के मौसम में कतीरे की मांग काफी बढ़ जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देने के साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, कतीरे की तासीर ठंडी होती है, इसलिए इसका सेवन गर्मी में फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने, डिहाइड्रेशन से बचाने और पेट को ठंडा रखने में सहायक होता है. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण होने वाली लू से बचाव में भी कतीरा असरदार माना जाता है. नियमित और सीमित मात्रा में सेवन करने से शरीर तरोताजा और ठंडा बना रहता है. गांवों में बुजुर्ग आज भी बच्चों और खेतों में काम करने वाले लोगों को नियमित रूप से कतीरा सेवन करने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि यह गर्मी और लू से बचाने में काफी मददगार होता है. विशेषज्ञों के अनुसार कतीरा शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और लंबे समय तक शरीर को ठंडक प्रदान करता है. यही वजह है कि किसान और मजदूरी करने वाले लोग इसका सेवन ज्यादा करते हैं. कई लोग कतीरे को मिश्री और गुलाब शरबत के साथ मिलाकर पीते हैं, जिससे इसका स्वाद बढ़ जाता है और शरीर को तुरंत ठंडक व ताजगी महसूस होती है. गर्मी के मौसम में कतीरा सिर्फ शरीर को ठंडक ही नहीं देता, बल्कि पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसका सेवन कब्ज, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं में राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है. कतीरा शरीर को अंदर से ठंडा रखकर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है. महिलाओं के लिए भी इसे उपयोगी बताया जाता है, क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा देने और कमजोरी दूर करने में मदद करता है. गर्मियों में सीमित मात्रा में इसका सेवन लाभकारी माना जाता है. गर्मी के इस मौसम में कतीरा गांवों के लोगों के लिए किसी प्राकृतिक औषधि से कम नहीं माना जाता. करौली के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे पारंपरिक देसी नुस्खे के रूप में इस्तेमाल करते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि कतीरा शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू से बचाने में काफी मददगार होता है. यही कारण है कि आधुनिक कोल्ड ड्रिंक्स और बाजारू पेयों की बजाय लोग आज भी कतीरा को ज्यादा महत्व देते हैं. गर्मियों में इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और गांवों में इसकी मांग लगातार बढ़ जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
जौ या चना… मई-जून में कौन सा सत्तू शरीर को देता ज्यादा ताकत और ठंडक? एक्सपर्ट से समझें

Last Updated:May 11, 2026, 09:48 IST Jau vs chana sattu : गर्मी बढ़ते ही लोग शरीर को ठंडा रखने वाले देसी ड्रिंक्स की तलाश में जुट जाते हैं. ऐसे में सत्तू का शरबत फिर से लोगों की पहली पसंद बन रहा है. लेकिन अब सवाल यह उठने लगा है कि जौ का सत्तू ज्यादा फायदेमंद है या चने का? दोनों ही देसी सुपरफूड माने जाते हैं और गांव से लेकर शहर तक खूब पिए जाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों सत्तू के फायदे अलग-अलग हैं और जरूरत के हिसाब से इनका चुनाव करना चाहिए. प्रयागराज के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ सुबोध ने कंफ्यूजन दूर कर दिया है. आयुर्वेद के सतुआ में फायदे – आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, गर्मी के दिनों में लू से बचने के लिए घर से निकलने से पहले सत्तू या सत्तू का शरबत पी लें तो लू लगने का खतरा बहुत कम हो जाता है. सत्तू प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडा और स्वस्थ रखने में मदद करता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सुबोध बताते हैं कि चने का सत्तू प्रोटीन और फाइबर से भरपूर माना जाता है. यही वजह है कि इसे पीने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और शरीर को एनर्जी मिलती है. गर्मियों में मजदूर, किसान और जिम जाने वाले लोग इसे खूब पसंद करते हैं. कई लोग इसे “देसी प्रोटीन ड्रिंक” भी कहते हैं. वहीं जौ का सत्तू शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए ज्यादा जाना जाता है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक जिन्हें गर्मी ज्यादा लगती है या पेट में जलन और एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए जौ का सत्तू बेहतर विकल्प माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग सुबह खाली पेट नमक, नींबू और भुना जीरा डालकर सत्तू का घोल पीते हैं. इससे शरीर में पानी की कमी कम महसूस होती है और लंबे समय तक ताजगी बनी रहती है. कई जगहों पर जौ और चने का सत्तू मिलाकर भी पिया जाता है, ताकि दोनों का फायदा एक साथ मिल सके. फूड एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर वजन घटाना चाहते हैं, तो जौ का सत्तू ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह हल्का होता है. वहीं शरीर को ताकत और प्रोटीन चाहिए, तो चने का सत्तू बेहतर विकल्प हो सकता है. हालांकि दोनों को सही मात्रा में ही पीना चाहिए. जरूरत से ज्यादा सत्तू पीने पर कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने जैसी दिक्कत भी हो सकती है. आजकल बाजार में फ्लेवर्ड और पैकेट वाले सत्तू भी आने लगे हैं, लेकिन गांवों में लोग अब भी देसी तरीके से तैयार सत्तू को ज्यादा पसंद करते हैं. कम खर्च में शरीर को ठंडक, ताकत और भरपूर एनर्जी देने की वजह से सत्तू आज भी गर्मियों का सबसे भरोसेमंद देसी ड्रिंक माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।









